चंद्रमा 0% प्रकाशित, कृष्ण पक्ष। पंचांग शैली का आकार; आपके आकाश में इसका झुकाव अलग होता है। अभी: अमावस्या · दोपहर 12:32 IST तक अभी की तिथि (दृक् पद्धति): सूर्य से चंद्रमा का कोण, 12° के खंडों में, पृथ्वी के केंद्र से; इसी पल के लिए NASA JPL के आंकड़ों से निकाली गई।

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दैनिक राशिफल · चंद्र राशि के अनुसार

शुक्रवार, 23 अगस्त 2024 का राशिफल — मेष से मीन, सभी 12 राशियाँ

शुक्रवार, 23 अगस्त 2024

23 अगस्त को चंद्रमा कहाँ है

मेष राशि मेंमेषपहलावृषभ राशि से बारहवाँवृषभबारहवाँमिथुन राशि से ग्यारहवाँमिथुनग्यारहवाँकर्क राशि से दसवाँकर्कदसवाँसिंह राशि से नौवाँसिंहनौवाँकन्या राशि से आठवाँकन्याआठवाँतुला राशि से सातवाँतुलासातवाँवृश्चिक राशि से छठावृश्चिकछठाधनु राशि से पाँचवाँधनुपाँचवाँमकर राशि से चौथामकरचौथाकुंभ राशि से तीसराकुंभतीसरामीन राशि से दूसरामीनदूसरामेषअश्विनी · चरण 10°58′

दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा मेष के 0°58′ पर, अश्विनी नक्षत्र के चरण 1 में है, और रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे वृषभ में जाएगा। चक्र पर हर राशि के साथ लिखा है कि उससे चंद्रमा किस भाव में है।

रंग हर राशि से चंद्रमा का बल (चंद्रबल) दिखाते हैं। छोटे बिंदु: योगतारे, यानी 27 नक्षत्रों की पहचान के तारे, अपने असली भोगांश पर। निरयण स्थिति, लाहिड़ी अयनांश, NASA JPL के आंकड़ों से (DE440s) हमारे अपने इंजन द्वारा।

तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, पाँचवाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।

23 अगस्त को चंद्रमा सुबह 10:24 बजे तक मीन में, फिर रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे तक मेष में है।

Columbus · America/New_York

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हमारा राशिफल अलग क्यों है

हर पंक्ति अपना कारण बताती है
हर फल की हर पंक्ति बताती है कि उसके पीछे कौन सा ग्रह है, वह आपकी राशि से किस भाव में है, और कौन सा शास्त्रीय श्लोक उसे पढ़ता है, ताकि आप कारण ख़ुद परख सकें।
मिनट तक सटीक
जब दिन के बीच चंद्रमा या कोई और ग्रह राशि बदलता है, पेज उसका मिनट बताता है और दिन को हिस्सों में दिखाता है। केवल गुरु और शनि के वक्री-मार्गी होने के समय, जब उनकी गति लगभग शून्य होती है, तारीख़ से दिए गए हैं।
शुरू से अंत तक एक ही पद्धति
हर फल चंद्र राशि (जन्म राशि) से, निरयण राशिचक्र और लाहिड़ी अयनांश में गिना जाता है, जैसे वैदिक गोचर पढ़ा जाता है। न सूर्य राशि की तारीख़ें, न पद्धतियों का मेल; राहु-केतु स्पष्ट गणना से हैं, और मध्यम गणना की तारीख़ साथ में दी गई है।
हिंदी और अंग्रेज़ी एक ही बात कहती हैं
दोनों भाषाएँ एक ही गणना से, पंक्ति-दर-पंक्ति बनती हैं, और एक जाँच देखती है कि हर पंक्ति दोनों भाषाओं में एक ही सूची में रहे: साथ या ध्यान।
स्विस एफ़ेमेरिस से जाँचा गया
स्थितियाँ NASA JPL के आंकड़ों से (DE440s) हमारे अपने इंजन द्वारा निकलती हैं। 2025–2032 के 2,922 दिनों में 8 ग्रहों की हमारी राशियाँ स्विस एफ़ेमेरिस से कभी अलग नहीं हुईं, और 405 राशि परिवर्तन 1.06 विकला के भीतर मिले।
कुछ भी गढ़ा हुआ नहीं
न स्टार रेटिंग, न अंक या प्रतिशत, न दिन का कोई रंग या अंक: कोई शास्त्रीय नियम इन्हें नहीं देता, इसलिए हर पंक्ति केवल ग्रह-स्थिति और उसके बताए नियम से बनती है।

दैनिक राशिफल · शुक्रवार, 23 अगस्त 2024

मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का राशिफल

अपनी राशि, यानी चंद्र राशि, चुनें और पूरा फल खोलें। हर राशि के नीचे लिखी बात केवल चंद्रमा का बल (चंद्रबल) है; पूरे फल में नौ ग्रह गिने गए हैं।

  1. मेषसहायक स्वामी मंगल · अश्विनी 1–4, भरणी 1–4, कृत्तिका 1 मेष, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे पहले भाव में है, जो शास्त्र में सहायक है, पर सूर्य और शुक्र के वेध से रुका हुआ है। पूरा मेष राशिफल पढ़ें
  2. वृषभधैर्य रखने का समय स्वामी शुक्र · कृत्तिका 2–4, रोहिणी 1–4, मृगशिरा 1–2 वृषभ, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है। पूरा वृषभ राशिफल पढ़ें
  3. मिथुनसहायक स्वामी बुध · मृगशिरा 3–4, आर्द्रा 1–4, पुनर्वसु 1–3 मिथुन, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे ग्यारहवें भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है। पूरा मिथुन राशिफल पढ़ें
  4. कर्कसहायक स्वामी चंद्र · पुनर्वसु 4, पुष्य 1–4, आश्लेषा 1–4 कर्क, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे दसवें भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है। पूरा कर्क राशिफल पढ़ें
  5. सिंहधैर्य रखने का समय स्वामी सूर्य · मघा 1–4, पूर्वा फाल्गुनी 1–4, उत्तरा फाल्गुनी 1 सिंह, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे तक चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है; सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे नौवें भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है। पूरा सिंह राशिफल पढ़ें
  6. कन्याचंद्राष्टम: सहज रहें स्वामी बुध · उत्तरा फाल्गुनी 2–4, हस्त 1–4, चित्रा 1–2 कन्या, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है। पूरा कन्या राशिफल पढ़ें
  7. तुलासहायक स्वामी शुक्र · चित्रा 3–4, स्वाति 1–4, विशाखा 1–3 तुला, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे सातवें भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है। पूरा तुला राशिफल पढ़ें
  8. वृश्चिकसहायक स्वामी मंगल · विशाखा 4, अनुराधा 1–4, ज्येष्ठा 1–4 वृश्चिक, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है। पूरा वृश्चिक राशिफल पढ़ें
  9. धनुधैर्य रखने का समय स्वामी गुरु · मूल 1–4, पूर्वाषाढ़ा 1–4, उत्तराषाढ़ा 1 धनु, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है। पूरा धनु राशिफल पढ़ें
  10. मकरधैर्य रखने का समय स्वामी शनि · उत्तराषाढ़ा 2–4, श्रवण 1–4, धनिष्ठा 1–2 मकर, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे चौथे भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है। पूरा मकर राशिफल पढ़ें
  11. कुंभसहायक स्वामी शनि · धनिष्ठा 3–4, शतभिषा 1–4, पूर्वा भाद्रपद 1–3 कुंभ, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है। पूरा कुंभ राशिफल पढ़ें
  12. मीनधैर्य रखने का समय स्वामी गुरु · पूर्वा भाद्रपद 4, उत्तरा भाद्रपद 1–4, रेवती 1–4 मीन, 23 अगस्त को: सुबह 10:24 बजे से चंद्रमा आपसे दूसरे भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है। पूरा मीन राशिफल पढ़ें
राशिफल 2027: पूरा साल, मेष से मीन

दैनिक राशिफल

23 अगस्त को चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा का नक्षत्र सुबह 10:24 बजे तक रेवती, फिर अश्विनी है।

चंद्र राशि
मीन? बुधवार 21 अगस्त, सुबह 9:42 बजे – सुबह 10:24 बजे
मेष? सुबह 10:24 बजे – रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे
चंद्र नक्षत्र
रेवती गुरुवार 22 अगस्त, दोपहर 12:36 बजे – सुबह 10:24 बजे
अश्विनी सुबह 10:24 बजे – शनिवार 24 अगस्त, सुबह 8:36 बजे
तिथि
कृष्ण पंचमी रात 10:22 बजे तक, फिर कृष्ण षष्ठी
Columbus का पूरा पंचांग देखें

हर राशि से चंद्रमा का भाव

राशिमीन सुबह 10:24 बजे तकमेष सुबह 10:24 बजे से
मेषबारहवाँ · धैर्य रखने का समयपहला · सहायक
वृषभग्यारहवाँ · सहायकबारहवाँ · धैर्य रखने का समय
मिथुनदसवाँ · सहायकग्यारहवाँ · सहायक
कर्कनौवाँ · धैर्य रखने का समयदसवाँ · सहायक
सिंहआठवाँ · चंद्राष्टम: सहज रहेंनौवाँ · धैर्य रखने का समय
कन्यासातवाँ · सहायकआठवाँ · चंद्राष्टम: सहज रहें
तुलाछठा · सहायकसातवाँ · सहायक
वृश्चिकपाँचवाँ · धैर्य रखने का समयछठा · सहायक
धनुचौथा · धैर्य रखने का समयपाँचवाँ · धैर्य रखने का समय
मकरतीसरा · सहायकचौथा · धैर्य रखने का समय
कुंभदूसरा · धैर्य रखने का समयतीसरा · सहायक
मीनपहला · सहायकदूसरा · धैर्य रखने का समय

दैनिक राशिफल

23 अगस्त का ग्रह गोचर

सूर्योदय (सुबह 6:52 बजे) पर निरयण स्थिति (तारों के आधार पर राशियाँ, लाहिड़ी अयनांश): वही तालिका जो हमारे पंचांग पर है। 'इस राशि में कब तक' वह मिनट है जब ग्रह अपनी राशि छोड़ता है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणइस राशि में कब तक
सूर्य? सिंह स्वराशि6°36′मघा · 2 16 सितंबर, सुबह 10:13 बजे, फिर कन्या
चंद्र? मीन27°51′रेवती · 4 सुबह 10:24 बजे, फिर मेष
मंगल? वृषभ28°08′मृगशिरा · 2 सोमवार 26 अगस्त, सुबह 5:55 बजे, फिर मिथुन
बुध? वक्री अस्त कर्क29°02′आश्लेषा · 4 4 सितंबर, रात 2:12 बजे, फिर सिंह
गुरु? वृषभ23°45′मृगशिरा · 1 14 मई 2025, दोपहर 1:07 बजे, फिर मिथुन
शुक्र? सिंह28°19′उत्तरा फाल्गुनी · 1 शनिवार 24 अगस्त, दोपहर 3:47 बजे, फिर कन्या
शनि? वक्री कुंभ स्वराशि23°00′पूर्वा भाद्रपद · 1 29 मार्च 2025, दोपहर 12:15 बजे, फिर मीन
राहु? मीन12°53′उत्तरा भाद्रपद · 3 29 मई 2025, दोपहर 2:48 बजे, फिर कुंभराहु-केतु की औसत चाल से तारीख़: 18 मई 2025
केतु? कन्या12°53′हस्त · 1 29 मई 2025, दोपहर 2:48 बजे, फिर सिंहराहु-केतु की औसत चाल से तारीख़: 18 मई 2025

दैनिक राशिफल · शनिवार, 24 अगस्त

अगले दिन का राशिफल, 24 अगस्त

  1. मेषकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे पहले भाव में है, जो शास्त्र में सहायक है, पर सूर्य और शुक्र के वेध से रुका हुआ है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं।
  2. वृषभकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं।
  3. मिथुनकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे ग्यारहवें भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं।
  4. कर्ककल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे दसवें भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं।
  5. सिंहकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे नौवें भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं।
  6. कन्याकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं।
  7. तुलाकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे सातवें भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं।
  8. वृश्चिककल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं।
  9. धनुकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं।
  10. मकरकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे चौथे भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं।
  11. कुंभकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं।
  12. मीनकल (शनिवार, 24 अगस्त): पूरे दिन चंद्रमा आपसे दूसरे भाव में है, शास्त्र के अनुसार यह धैर्य रखने का समय है; दोपहर 3:47 बजे शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं।
24 अगस्त का पूरा राशिफल देखें

दैनिक राशिफल

साढ़ेसाती और शनि की ढैया: अभी किन राशियों पर और कब तक

साढ़ेसाती चंद्र राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का गोचर है, लगभग साढ़े सात वर्ष। ढैया चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में शनि का गोचर है, लगभग ढाई वर्ष।

चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह लगातार कोशिश और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।

राशिअभीपहले प्रवेश से अंतिम निकास तकविराम
कर्क ढैया (आठवाँ भाव)? 28 अप्रैल 2022 – 29 मार्च 202512 जुलाई 2022 – 17 जनवरी 2023
वृश्चिक ढैया (चौथा भाव)? 28 अप्रैल 2022 – 29 मार्च 202512 जुलाई 2022 – 17 जनवरी 2023
मकर साढ़ेसाती का तीसरा चरण? 26 जनवरी 2017 – 29 मार्च 202520 जून 2017 – 26 अक्टूबर 2017
कुंभ साढ़ेसाती का दूसरा चरण? 23 जनवरी 2020 – 23 फ़रवरी 20282 जून 2027 – 19 अक्टूबर 2027
मीन साढ़ेसाती का पहला चरण? 28 अप्रैल 2022 – 16 अप्रैल 203012 जुलाई 2022 – 17 जनवरी 2023
8 अगस्त 2029 – 5 अक्टूबर 2029

अभी न साढ़ेसाती, न ढैया: मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला और धनु।

शनि के आगे के बदलाव

  • 15 नवंबर: शनि कुंभ में मार्गी (केवल तारीख़)
  • 29 मार्च 2025, दोपहर 12:15 बजे: शनि मीन में
  • 12 जुलाई 2025: शनि मीन में वक्री (केवल तारीख़)
  • 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे: शनि मेष में
  • 19 अक्टूबर 2027, रात 9:42 बजे: शनि मीन में

29 मार्च 2025 के बाद: साढ़ेसाती मेष (पहला चरण), कुंभ (तीसरा चरण) और मीन (दूसरा चरण) पर; ढैया सिंह (आठवाँ भाव) और धनु (चौथा भाव) पर।

दैनिक राशिफल

आने वाले गोचर

अगले 60 दिनों का हर राशि परिवर्तन, वक्री या मार्गी होना और अस्त-उदय, हर राशि से उसके भाव के साथ, और राशि परिवर्तन के लिए वहाँ उसका फल भी।

  1. शनिवार 24 अगस्त, दोपहर 3:47 बजे · शुक्र कन्या राशि में

    1. मेष छठाधैर्य रखने का समय
    2. वृषभ पाँचवाँसहायता मंद
    3. मिथुन चौथासहायता मंद
    4. कर्क तीसरासहायता मंद
    5. सिंह दूसरासहायता मंद
    6. कन्या पहलासहायता मंद
    7. तुला बारहवाँसहायता मंद
    8. वृश्चिक ग्यारहवाँसहायता मंद
    9. धनु दसवाँधैर्य रखने का समय
    10. मकर नौवाँसहायता मंद
    11. कुंभ आठवाँसहायता मंद
    12. मीन सातवाँधैर्य रखने का समय
  2. सोमवार 26 अगस्त, सुबह 5:55 बजे · मंगल मिथुन राशि में

    1. मेष तीसरासहायता मंद
    2. वृषभ दूसराधैर्य रखने का समय
    3. मिथुन पहलाधैर्य रखने का समय
    4. कर्क बारहवाँधैर्य रखने का समय
    5. सिंह ग्यारहवाँसहायता मंद
    6. कन्या दसवाँधैर्य रखने का समय
    7. तुला नौवाँधैर्य रखने का समय
    8. वृश्चिक आठवाँधैर्य रखने का समय
    9. धनु सातवाँधैर्य रखने का समय
    10. मकर छठासहायता मंद
    11. कुंभ पाँचवाँधैर्य रखने का समय
    12. मीन चौथाधैर्य रखने का समय
  3. सोमवार 26 अगस्त, सुबह 8:50 बजे · बुध कर्क में अस्त से बाहर

    1. मेष चौथा
    2. वृषभ तीसरा
    3. मिथुन दूसरा
    4. कर्क पहला
    5. सिंह बारहवाँ
    6. कन्या ग्यारहवाँ
    7. तुला दसवाँ
    8. वृश्चिक नौवाँ
    9. धनु आठवाँ
    10. मकर सातवाँ
    11. कुंभ छठा
    12. मीन पाँचवाँ
  4. बुधवार 28 अगस्त, शाम 5:15 बजे · बुध कर्क में मार्गी

    1. मेष चौथा
    2. वृषभ तीसरा
    3. मिथुन दूसरा
    4. कर्क पहला
    5. सिंह बारहवाँ
    6. कन्या ग्यारहवाँ
    7. तुला दसवाँ
    8. वृश्चिक नौवाँ
    9. धनु आठवाँ
    10. मकर सातवाँ
    11. कुंभ छठा
    12. मीन पाँचवाँ
  5. 4 सितंबर, रात 2:12 बजे · बुध सिंह राशि में

    1. मेष पाँचवाँधैर्य रखने का समय
    2. वृषभ चौथासहायक
    3. मिथुन तीसराधैर्य रखने का समय
    4. कर्क दूसरासहायक
    5. सिंह पहलाधैर्य रखने का समय
    6. कन्या बारहवाँधैर्य रखने का समय
    7. तुला ग्यारहवाँसहायक
    8. वृश्चिक दसवाँसहायक
    9. धनु नौवाँधैर्य रखने का समय
    10. मकर आठवाँसहायक
    11. कुंभ सातवाँधैर्य रखने का समय
    12. मीन छठासहायक
  6. 14 सितंबर, रात 3:25 बजे · बुध सिंह में सूर्य के निकट, अस्त

    1. मेष पाँचवाँ
    2. वृषभ चौथा
    3. मिथुन तीसरा
    4. कर्क दूसरा
    5. सिंह पहला
    6. कन्या बारहवाँ
    7. तुला ग्यारहवाँ
    8. वृश्चिक दसवाँ
    9. धनु नौवाँ
    10. मकर आठवाँ
    11. कुंभ सातवाँ
    12. मीन छठा
  7. 16 सितंबर, सुबह 10:13 बजे · सूर्य कन्या राशि में

    1. मेष छठासहायक
    2. वृषभ पाँचवाँधैर्य रखने का समय
    3. मिथुन चौथाधैर्य रखने का समय
    4. कर्क तीसरासहायक
    5. सिंह दूसराधैर्य रखने का समय
    6. कन्या पहलाधैर्य रखने का समय
    7. तुला बारहवाँधैर्य रखने का समय
    8. वृश्चिक ग्यारहवाँसहायक
    9. धनु दसवाँसहायक
    10. मकर नौवाँधैर्य रखने का समय
    11. कुंभ आठवाँधैर्य रखने का समय
    12. मीन सातवाँधैर्य रखने का समय
  8. 18 सितंबर, सुबह 4:27 बजे · शुक्र तुला राशि में

    1. मेष सातवाँनरम
    2. वृषभ छठानरम
    3. मिथुन पाँचवाँसहायक
    4. कर्क चौथासहायक
    5. सिंह तीसरासहायक
    6. कन्या दूसरासहायक
    7. तुला पहलासहायक
    8. वृश्चिक बारहवाँसहायक
    9. धनु ग्यारहवाँसहायक
    10. मकर दसवाँनरम
    11. कुंभ नौवाँसहायक
    12. मीन आठवाँसहायक
  9. 23 सितंबर, रात 12:41 बजे · बुध कन्या राशि में

    1. मेष छठासाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    2. वृषभ पाँचवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    3. मिथुन चौथासाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    4. कर्क तीसरासाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    5. सिंह दूसरासाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    6. कन्या पहलासाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    7. तुला बारहवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    8. वृश्चिक ग्यारहवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    9. धनु दसवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    10. मकर नौवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    11. कुंभ आठवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
    12. मीन सातवाँसाथ और ध्यान: हर बात अलग देखें
  10. 9 अक्टूबर (केवल तारीख़) · गुरु वृषभ में वक्री

    1. मेष दूसरा
    2. वृषभ पहला
    3. मिथुन बारहवाँ
    4. कर्क ग्यारहवाँ
    5. सिंह दसवाँ
    6. कन्या नौवाँ
    7. तुला आठवाँ
    8. वृश्चिक सातवाँ
    9. धनु छठा
    10. मकर पाँचवाँ
    11. कुंभ चौथा
    12. मीन तीसरा
  11. 10 अक्टूबर, रात 1:50 बजे · बुध तुला राशि में

    1. मेष सातवाँधैर्य रखने का समय
    2. वृषभ छठासहायता मंद
    3. मिथुन पाँचवाँधैर्य रखने का समय
    4. कर्क चौथासहायता मंद
    5. सिंह तीसराधैर्य रखने का समय
    6. कन्या दूसरासहायता मंद
    7. तुला पहलाधैर्य रखने का समय
    8. वृश्चिक बारहवाँधैर्य रखने का समय
    9. धनु ग्यारहवाँसहायता मंद
    10. मकर दसवाँसहायता मंद
    11. कुंभ नौवाँधैर्य रखने का समय
    12. मीन आठवाँसहायता मंद
  12. 12 अक्टूबर, रात 8:31 बजे · शुक्र वृश्चिक राशि में

    1. मेष आठवाँसहायक
    2. वृषभ सातवाँधैर्य रखने का समय
    3. मिथुन छठाधैर्य रखने का समय
    4. कर्क पाँचवाँसहायक
    5. सिंह चौथासहायक
    6. कन्या तीसरासहायक
    7. तुला दूसरासहायक
    8. वृश्चिक पहलासहायक
    9. धनु बारहवाँसहायक
    10. मकर ग्यारहवाँसहायक
    11. कुंभ दसवाँधैर्य रखने का समय
    12. मीन नौवाँसहायक
  13. 16 अक्टूबर, रात 10:13 बजे · सूर्य तुला राशि में

    1. मेष सातवाँधैर्य रखने का समय
    2. वृषभ छठासहायता मंद
    3. मिथुन पाँचवाँधैर्य रखने का समय
    4. कर्क चौथाधैर्य रखने का समय
    5. सिंह तीसरासहायता मंद
    6. कन्या दूसराधैर्य रखने का समय
    7. तुला पहलाधैर्य रखने का समय
    8. वृश्चिक बारहवाँधैर्य रखने का समय
    9. धनु ग्यारहवाँसहायता मंद
    10. मकर दसवाँसहायता मंद
    11. कुंभ नौवाँधैर्य रखने का समय
    12. मीन आठवाँधैर्य रखने का समय
  14. 20 अक्टूबर, सुबह 4:52 बजे · मंगल कर्क राशि में

    1. मेष चौथाधैर्य रखने का समय
    2. वृषभ तीसरासहायता मंद
    3. मिथुन दूसराधैर्य रखने का समय
    4. कर्क पहलाधैर्य रखने का समय
    5. सिंह बारहवाँधैर्य रखने का समय
    6. कन्या ग्यारहवाँसहायता मंद
    7. तुला दसवाँधैर्य रखने का समय
    8. वृश्चिक नौवाँधैर्य रखने का समय
    9. धनु आठवाँधैर्य रखने का समय
    10. मकर सातवाँधैर्य रखने का समय
    11. कुंभ छठासहायता मंद
    12. मीन पाँचवाँधैर्य रखने का समय

दैनिक राशिफल

मेरी राशि कौन सी है? चंद्र राशि, नाम राशि और सूर्य राशि

चंद्र राशि (जन्म राशि)
आपके जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। वैदिक राशिफल इसी से पढ़ा जाता है, और यह पेज भी।
सूर्य राशि
पश्चिमी ज्योतिष की जन्मदिन वाली राशि, सायन राशिचक्र से। यह अलग पद्धति है; अधिकतर लोगों की यह उनकी राशि नहीं होती।
नाम राशि
आपके नाम के पहले अक्षर की राशि। यह जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा गया हो, इसलिए इसे तभी लें जब जन्म तिथि पता न हो।
जन्म तिथि से अपनी राशि जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

आपकी जन्मपत्रिका जन्म तिथि, समय और स्थान से आपकी राशि, नक्षत्र और लग्न ठीक-ठीक बताती है। मेरी जन्मपत्रिका बनाएँ

दैनिक राशिफल

12 राशियों के नाम हिंदी और अंग्रेज़ी में, उनके स्वामी ग्रह

नाम अक्षर तभी काम के हैं जब जन्म तिथि पता न हो: नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र से रखा गया हो। अंग्रेज़ी नाम केवल पहचान के लिए हैं; किसी राशि पर पश्चिमी तारीख़ों का दायरा लागू नहीं होता।

राशिस्वामीनक्षत्र चरणनाम अक्षर
मेषमंगलअश्विनी 1–4, भरणी 1–4, कृत्तिका 1चू चे चो ला ली लू ले लो अ
वृषभशुक्रकृत्तिका 2–4, रोहिणी 1–4, मृगशिरा 1–2ई उ ए ओ वा वी वू वे वो
मिथुनबुधमृगशिरा 3–4, आर्द्रा 1–4, पुनर्वसु 1–3का की कू घ ङ छ के को हा
कर्कचंद्रपुनर्वसु 4, पुष्य 1–4, आश्लेषा 1–4ही हू हे हो डा डी डू डे डो
सिंहसूर्यमघा 1–4, पूर्वा फाल्गुनी 1–4, उत्तरा फाल्गुनी 1मा मी मू मे मो टा टी टू टे
कन्याबुधउत्तरा फाल्गुनी 2–4, हस्त 1–4, चित्रा 1–2टो पा पी पू ष ण ठ पे पो
तुलाशुक्रचित्रा 3–4, स्वाति 1–4, विशाखा 1–3रा री रू रे रो ता ती तू ते
वृश्चिकमंगलविशाखा 4, अनुराधा 1–4, ज्येष्ठा 1–4तो ना नी नू ने नो या यी यू
धनुगुरुमूल 1–4, पूर्वाषाढ़ा 1–4, उत्तराषाढ़ा 1ये यो भा भी भू धा फा ढा भे
मकरशनिउत्तराषाढ़ा 2–4, श्रवण 1–4, धनिष्ठा 1–2भो जा जी खी खू खे खो गा गी
कुंभशनिधनिष्ठा 3–4, शतभिषा 1–4, पूर्वा भाद्रपद 1–3गू गे गो सा सी सू से सो दा
मीनगुरुपूर्वा भाद्रपद 4, उत्तरा भाद्रपद 1–4, रेवती 1–4दी दू थ झ ञ दे दो चा ची

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हमारा राशिफल कैसे बनता है: चंद्र राशि से गोचर, NASA JPL के आंकड़े (DE440s), लाहिड़ी अयनांश

अंकों की जाँच कैसे होती है

ग्रह-स्थिति
हर स्थिति NASA JPL के आंकड़ों से (DE440s) हमारी अपनी गणना से निकलती है। इसमें लाहिड़ी अयनांश के साथ निरयण, यानी तारों के आधार पर राशियाँ ली गई हैं। 2,922 दिनों और 8 ग्रहों में हमारी राशियाँ स्विस एफ़ेमेरिस से कभी अलग नहीं हुईं, और 405 राशि परिवर्तन 1.06 विकला (कोण नापने की बहुत छोटी इकाई) के भीतर मिले।
वक्री-मार्गी और अस्त
बुध और शुक्र के वक्री-मार्गी होने के समय स्विस एफ़ेमेरिस से एक मिनट के भीतर मिलते हैं और मिनट तक छपते हैं; गुरु और शनि की गति उस समय लगभग शून्य होती है, इसलिए उनकी केवल तारीख़ दी गई है। अस्त होने की सीमाएँ 0.06 विकला के भीतर मिलती हैं।
राहु और केतु
हर फल में स्पष्ट राहु-केतु, यानी उस समय की चाल से निकली स्थिति ली गई है। कई पंचांग औसत चाल से निकले मध्यम राहु छापते हैं, जिसकी राशि लगभग दस दिन आगे-पीछे बदल सकती है, इसलिए उसकी तारीख़ हमारी तारीख़ के साथ दी गई है। हमारी मध्यम गणना स्विस एफ़ेमेरिस से 0.13 विकला (कोण नापने की बहुत छोटी इकाई) के भीतर मिलती है।
पन्ना कब बदलता है
हर दिन का पन्ना, यहाँ चुने गए समय क्षेत्र (आम तौर पर भारतीय मानक समय) में रात 12 बजे से अगली आधी रात तक की तारीख़ का है, और केवल ग्रह-स्थिति से बनता है; कोई पंक्ति हाथ से लिखी या बदली नहीं जाती। बीते दिन का पन्ना जैसा था, वैसा ही रहता है।

यह पेज क्या लागू करता है

  • हर भाव आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है; राशिचक्र निरयण (लाहिड़ी अयनांश) है और ग्रह-स्थिति NASA JPL के आंकड़ों से (DE440) है। राहु-केतु स्पष्ट (वास्तविक) गति से लिए गए हैं, जैसा हमारी कुंडली में है, और कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना की तारीख़ साथ में दी गई है। — लाहिड़ी अयनांश: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश; स्पष्ट राहु-केतु: हमारी गिनती (राष्ट्रीय पंचांग में स्पष्ट और माध्य पात दोनों दिए हैं)
  • किस भाव में गोचर अनुकूल है, यह फलदीपिका 26.2, बृहत्संहिता 104.4 और मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 से लिया गया है, जो आपस में सहमत हैं; हर भाव का फल वहीं लिखा गया है जहाँ फलदीपिका और बृहत्संहिता एक बात कहती हैं।
  • वेध आपकी चंद्र राशि से गिना गया है (नारद), और सूर्य-शनि तथा चंद्र-बुध के बीच वेध नहीं होता।
  • अनुकूल भाव में राहु-केतु को भी सात में से कोई ग्रह इसी तरह वेध से रोकता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.1; कालप्रकाशिका 36.18)।
  • वाम वेध धैर्य माँगने वाली स्थिति को तब सहायक गिनता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8); यह भी आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, और चंद्राष्टम को नहीं बदलता।
  • अनुकूल भाव में नीच या अमित्र राशि के ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; बृहत्संहिता 104.53)।
  • अनुकूल भाव में सूर्य के निकट (अस्त) ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
  • धैर्य माँगने वाले भाव में स्वराशि या उच्च राशि का ग्रह प्रतिकूल फल नहीं देता (फलदीपिका 26.31; कालप्रकाशिका 36.12)।
  • जहाँ स्वराशि या उच्च राशि और अस्त दोनों हों, वहाँ पढ़े गए ग्रंथों में किसी एक को दूसरे से ऊपर रखने का नियम नहीं मिला, इसलिए उसे दोनों तथ्यों के साथ 'धैर्य रखने वाली बातें' में रखा गया है।
  • जब चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों, तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद गिनी गई है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56); इससे कोई पंक्ति कठोर नहीं होती। बाकी ग्रहों का साथ केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि उसका फल एक ही ग्रंथ में है।
  • शुक्ल पक्ष में चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक गिना गया है, जब तक बुध के सिवा कोई ग्रह छठे, चौथे या आठवें भाव में न हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)। यह अलग पंक्ति में है और 12 राशियों की तालिका या दिन का लेबल नहीं बदलता।
  • आठवें भाव का चंद्रमा हर स्थिति में चंद्राष्टम ही रहता है और जितने घंटे वह रहता है उनका लेबल वही तय करता है; जब वह दिन के केवल एक हिस्से में हो, तो वह हिस्सा मुख्य पंक्ति में बताया गया है। यह क्रम हमारी अपनी पद्धति है।
  • जीवन के तीन क्षेत्र भावों का हमारा अपना समूह हैं, जिनके अर्थ बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11 में इन्हीं विषयों से जुड़े हैं: काम और धन (दसवाँ, छठा, तीसरा, ग्यारहवाँ, दूसरा, बारहवाँ), प्रेम और परिवार (सातवाँ, चौथा, दूसरा), सेहत (पहला, छठा)।
  • दसवें भाव के राहु या केतु को धैर्य रखने का समय माना गया है, जैसा पाँच ग्रंथ मानते हैं (मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका, शार्ङ्गधर, ज्योतिःप्रकाश और श्रीपति); फलदीपिका इसे अनुकूल मानती है, इसलिए साथ में 'ग्रंथों में मतभेद' लिखा गया है।
  • वक्री होना केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है। गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं, इसलिए वक्री ग्रह को उसी राशि से पढ़ा गया है जिसमें वह है।
  • दोनों सूचियाँ हमारा अपना समूह हैं, कोई शास्त्रीय अंक नहीं: अनुकूल भाव का ग्रह, जिसे कोई रोक नहीं रहा (या जिसे वाम वेध से सहायक गिना गया), 'साथ देने वाली बातें' में है; बाकी हर ग्रह 'धैर्य रखने वाली बातें' में, उस तथ्य के साथ जो उसे वहाँ रखता है। सभी नौ ग्रहों की गिनती दी गई है, और दिन की पहली पंक्ति चंद्रमा की है।
  • यहाँ दिन का कोई अंक या रंग नहीं दिया गया: जाँचे गए ग्रंथों में राशि के लिए दिन का अंक या रंग देने का नियम नहीं मिला। इसकी जगह आपके चंद्रबल के भीतर पंचांग के समय दिए गए हैं।

क्या शामिल नहीं है, और क्यों

  • यहाँ राहु-केतु की उच्च या स्वराशि नहीं ली गई, क्योंकि इन पर ग्रंथों में मतभेद है।
  • शास्त्र कहते हैं कि अनुकूल स्थिति को 'अन्य ग्रह' वेध से रोकते हैं, पर यह नहीं बताते कि राहु-केतु इनमें गिने जाएँ या नहीं; इसलिए हम वेध में केवल सात दृश्य ग्रह गिनते हैं।
  • राहु-केतु पर वाम वेध लागू नहीं किया गया: केवल एक ग्रंथ ऐसा पढ़ता है, इसलिए धैर्य माँगने वाले भाव में राहु-केतु को वैसे ही गिना गया है।
  • मुहूर्त चिंतामणि 4.7 के चंद्रमा से जुड़े बाकी नियम (ऐसे दो ग्रहों के बीच, उनमें से किसी से सातवाँ, या मित्र के नवांश से राहत) नहीं लिए गए: ग्रंथ इनका एक जैसा मतलब नहीं बताते।
  • राशि का सर्वाष्टकवर्ग केवल अंक के रूप में दिया गया है: बृहत्पाराशर होराशास्त्र के वर्ग (30 से अधिक, 25 से 30, 25 से कम) की पुष्टि किसी दूसरे ग्रंथ से नहीं हुई, और फलदीपिका 28 को आधार मानती है, इसलिए कोई वर्ग नहीं दिया गया।
  • राहु-केतु का अपना अष्टकवर्ग नहीं होता, इसलिए उनके बिंदु नहीं पढ़े गए।
  • कक्ष्या का समय फलदीपिका 23.16–19 में दूसरे मत के रूप में दिया गया है और बाकी ग्रंथों में नहीं मिलता, इसलिए नहीं लिया गया।
  • राशि बदलने के पल वाला नियम (मुहूर्त चिंतामणि 3.19; नारद संहिता 11.26) महीने भर के फल के लिए है, रोज़ के फल के लिए नहीं।
  • ग्रंथ कहते हैं कि कुछ ग्रह राशि बदलने से पहले ही फल देने लगते हैं (सूर्य 5 दिन, मंगल 8 दिन, शनि 6 महीने, राहु-केतु 3 महीने); यह साल भर के फल का विषय है, इसलिए यहाँ नहीं दिखाया गया। बुध, शुक्र और गुरु के लिए ग्रंथों के आँकड़े अलग हैं, इसलिए वे नहीं लिए गए।
  • होरा केवल तथ्य के रूप में दी गई हैं। होरा अपने स्वामी के वार के काम के लिए ठीक मानी गई है, यह नियम (मुहूर्त चिंतामणि 1.56; नारद संहिता 5.20) जाँचा जा चुका है, पर हर वार के कामों की सूची की दूसरी जाँच अभी बाकी है, इसलिए होरा की सलाह नहीं दी गई।
  • शनि का 'पाया' (सोना, चाँदी, ताँबा या लोहा) नहीं दिखाया गया: मुख्य ग्रंथों में इसका श्लोक नहीं मिला, और प्रचलित नियम आपस में अलग हैं।

इस पेज के शब्द

98
सूर्य
नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
चंद्र
नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
मंगल
नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
बुध
नौ ग्रहों में से एक: बोलचाल, पढ़ाई और व्यापार।
गुरु
नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
शुक्र
नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
शनि
नौ ग्रहों में से एक: ज़िम्मेदारी, धैर्य और लगातार काम।
राहु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
केतु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
मेष
पहली राशि, निरयण 0° से 30° तक, स्वामी मंगल।
वृषभ
दूसरी राशि, निरयण 30° से 60° तक, स्वामी शुक्र।
मिथुन
तीसरी राशि, निरयण 60° से 90° तक, स्वामी बुध।
कर्क
चौथी राशि, निरयण 90° से 120° तक, स्वामी चंद्र।
सिंह
पाँचवीं राशि, निरयण 120° से 150° तक, स्वामी सूर्य।
कन्या
छठी राशि, निरयण 150° से 180° तक, स्वामी बुध।
तुला
सातवीं राशि, निरयण 180° से 210° तक, स्वामी शुक्र।
वृश्चिक
आठवीं राशि, निरयण 210° से 240° तक, स्वामी मंगल।
धनु
नौवीं राशि, निरयण 240° से 270° तक, स्वामी गुरु।
मकर
दसवीं राशि, निरयण 270° से 300° तक, स्वामी शनि।
कुंभ
ग्यारहवीं राशि, निरयण 300° से 330° तक, स्वामी शनि।
मीन
बारहवीं राशि, निरयण 330° से 360° तक, स्वामी गुरु।
साथ
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
साथ: वाम वेध
ऐसे भाव का गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल नहीं मानते, पर जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से सहायक गिना गया (मुहूर्त चिंतामणि 4.4)।
ध्यान: वेध
अनुकूल भाव, पर उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह उसे रोक रहा है (फलदीपिका 26.3–8)।
ध्यान: सहायता मंद
अनुकूल भाव, पर ग्रह नीच राशि, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है (फलदीपिका 26.32)।
ध्यान: दोनों तथ्य
स्वराशि या उच्च राशि के साथ सूर्य के निकट (अस्त): कोई ग्रंथ एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखता, इसलिए दोनों तथ्य दिखाए गए हैं; या अनुकूल चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु (मुहूर्त चिंतामणि 4.7)।
ध्यान: भाव अनुकूल नहीं (स्वराशि या उच्च राशि)
ऐसा भाव जिसे शास्त्र अनुकूल नहीं मानते, पर ग्रह अपनी स्वराशि या उच्च राशि में है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता (फलदीपिका 26.31)।
ध्यान: भाव अनुकूल नहीं
ऐसा गोचर जिसका भाव शास्त्र उस ग्रह के लिए अनुकूल नहीं मानते (फलदीपिका 26.2)।
चंद्राष्टम
चंद्रमा आपकी चंद्र राशि से आठवीं राशि में (फलदीपिका 26.34; मुहूर्त चिंतामणि 4.1)।
गोचर
राशियों में ग्रहों का चलना, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
चंद्र राशि (जन्म राशि)
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था; यहाँ हर भाव उसी से गिना गया है।
भाव
आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
वेध
जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
वाम वेध (विपरीत वेध)
धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
चंद्रमा का साथ
चंद्रमा की राशि में बैठे ग्रह; वहाँ सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद मानी जाती है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56)।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
चंद्रबल
आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में यह अच्छा है।
ताराबल
आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
नक्षत्र
राशिचक्र के 27 भागों में से एक, हर भाग 13°20′ का, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
चरण
नक्षत्र का चौथाई भाग (3°20′); एक राशि में नौ चरण होते हैं।
साढ़ेसाती
आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का लगभग साढ़े सात साल तक गुज़रना; आज कई पंचांगों में यह नाम इस्तेमाल होता है, भाव फलदीपिका ग्रंथ 26.22–23 में हैं।
शनि की ढैया
आपकी चंद्र राशि से चौथे या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई साल का ठहराव।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
मार्गी
वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
अस्त
सूर्य की चमक में छिपा ग्रह; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद (फलदीपिका 26.32)। गुरु और शुक्र: जब तक भारत के संदर्भ अक्षांश 23°11′ उत्तर (भारतीय खगोलीय पंचांग) से न दिखें; मंगल, बुध और शनि ग्रंथों के अंशों से (सूर्य सिद्धांत 9.6–9.8)।
सबसे अधिक प्रभाव
राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले भाग में, गुरु और शुक्र बीच के भाग में, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
स्पष्ट राहु-केतु
राहु-केतु की वास्तविक (घटती-बढ़ती) गति, जैसी हमारी कुंडली में ली जाती है।
मध्यम राहु-केतु की गणना
राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से निकली तारीख़ों से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
ग्रंथों में मतभेद
शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
अष्टकवर्ग
आपकी कुंडली में हर ग्रह हर राशि को जो बिंदु (0 से 8) देता है; अधिक बिंदु, गोचर में अधिक सहयोग (फलदीपिका 26.41; बृहत्पाराशर होराशास्त्र 72.30–31)।
बिंदु
अष्टकवर्ग का एक अंक; हर ग्रह के लिए हर राशि में 0 से 8।
सर्वाष्टकवर्ग
आपकी कुंडली में किसी राशि को मिले सभी बिंदुओं का योग, जो अंक के रूप में दिया गया है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 72)।
दशा
विंशोत्तरी पद्धति से आपके जीवन में चल रही ग्रह की अवधि।
महादशा
दशा की मुख्य अवधि।
अंतर्दशा
महादशा के भीतर की छोटी अवधि।
चंद्रबल के भीतर पंचांग के समय
अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त, विजय या लाभ, शुभ या अमृत चौघड़िया, जो राहु काल, यमगंड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य और भद्रा से बाहर हों, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी चंद्र राशि से पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो।
उच्च
वह राशि जहाँ ग्रह सबसे मज़बूत होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
नीच
उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे कमज़ोर होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
स्वराशि
वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
मित्र राशि
ऐसी राशि जिसका स्वामी ग्रहों की तय मित्रता के नियम में इस ग्रह का मित्र माना गया है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
सम राशि
ऐसी राशि जिसका स्वामी ग्रहों की तय मित्रता के नियम में इस ग्रह का न मित्र माना गया है, न विरोधी (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
अमित्र राशि
ऐसी राशि जिसका स्वामी ग्रहों की तय मित्रता के नियम में इस ग्रह का विरोधी माना गया है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
साढ़ेसाती का पहला चरण
आपकी चंद्र राशि से बारहवें भाव में शनि।
साढ़ेसाती का दूसरा चरण
आपकी चंद्र राशि में ही शनि।
साढ़ेसाती का तीसरा चरण
आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में शनि।
ढैया (चौथा भाव)
आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि।
ढैया (आठवाँ भाव)
आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि।
जन्म तारा
आपका अपना जन्म नक्षत्र, पहली तारा; ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
संपत तारा
दूसरी तारा, 'संपत्ति'; नए काम के लिए अच्छी।
विपत तारा
जन्म नक्षत्र से नौ-नौ के समूह में गिनने पर तीसरी तारा (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
क्षेम तारा
चौथी तारा, 'कुशल-क्षेम'; नए काम के लिए अच्छी।
प्रत्यरि तारा
जन्म नक्षत्र से नौ-नौ के समूह में गिनने पर पाँचवीं तारा (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
साधक तारा
छठी तारा, 'सिद्धि देने वाली'; नए काम के लिए अच्छी।
वध तारा
जन्म नक्षत्र से नौ-नौ के समूह में गिनने पर सातवीं तारा (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
मित्र तारा
आठवीं तारा, 'मित्र'; नए काम के लिए अच्छी।
अतिमित्र तारा
नौवीं तारा, 'परम मित्र'; नए काम के लिए अच्छी।
काम और धन
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भावों से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
प्रेम और परिवार
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भावों से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
सेहत
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भावों से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
5 या अधिक बिंदु
जिस राशि में ग्रह गोचर कर रहा है, उसमें उसके अपने बिंदु: 8 बिंदुओं में से 5 या अधिक हों तो 'साथ' में (हमारा समूह)।
4 बिंदु
जिस राशि में ग्रह गोचर कर रहा है, उसमें उसके अपने 8 बिंदुओं में से 4 बिंदु: 'ध्यान' में (हमारा समूह)।
3 या कम बिंदु
जिस राशि में ग्रह गोचर कर रहा है, उसमें उसके अपने 8 बिंदुओं में से 3 या कम बिंदु: 'ध्यान' में (हमारा समूह)।
अभिजित मुहूर्त
स्थानीय मध्याह्न के आसपास का मुहूर्त।
अमृत काल
दिन के नक्षत्र के लिए पंचांग में अमृत काल नाम का समय।
ब्रह्म मुहूर्त
सूर्योदय से पहले का मुहूर्त।
विजय मुहूर्त
दोपहर बाद का विजय मुहूर्त।
लाभ, शुभ या अमृत चौघड़िया
दिन के चौघड़िया में लाभ, शुभ या अमृत का भाग।
फलदीपिका
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
बृहत्संहिता
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
मुहूर्त चिंतामणि
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
नारद संहिता
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
कालप्रकाशिका
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
बृहत्पाराशर होराशास्त्र
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
ज्योतिर्निबंध
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
बृहद्दैवज्ञरंजन
एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
साथ देने वाली बातें
ऐसे ग्रह जिनका भाव शास्त्र में अनुकूल है और जिन्हें कोई रोक नहीं रहा, या जिन्हें वाम वेध से सहायक गिना गया (मुहूर्त चिंतामणि 4.4)।
धैर्य रखने वाली बातें
बाकी हर ग्रह, उस तथ्य के साथ जो उसे यहाँ रखता है: शास्त्र में अनुकूल न गिना गया भाव, वेध, नीच या अमित्र राशि, अस्त, प्रतिकूल भाव में स्वराशि या उच्च राशि, चंद्रमा का साथ, या चंद्राष्टम।
भाव का अर्थ
हर भाव किस विषय का है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11): पहला शरीर और खुद, दूसरा परिवार, पैसा और बोलचाल, तीसरा हिम्मत, मेहनत और भाई-बहन, चौथा माँ, घर और सुकून, पाँचवाँ बच्चे, पढ़ाई और समझ, छठा सेहत, नौकरी और मुकाबला, सातवाँ शादी और साझेदारी, आठवाँ खोजबीन और छिपी बातें, नौवाँ किस्मत, धर्म और पिता, दसवाँ करियर और काम, ग्यारहवाँ कमाई और दोस्त, बारहवाँ खर्च, विदेश और मोक्ष।

प्रश्न

राशिफल से जुड़े सवाल

राशिफल किस राशि से देखें: चंद्र राशि, सूर्य राशि या नाम राशि?

23 अगस्त को चंद्रमा सुबह 10:24 बजे तक मीन में, फिर रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे तक मेष में है, और इस पेज का हर फल चंद्र राशि (जन्म राशि) से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है। अपनी चंद्र राशि पढ़ें। नाम राशि उससे तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा गया हो; सूर्य राशि दूसरी पद्धति की है।

मेरी राशि क्या है, कैसे पता करें?

23 अगस्त को चंद्रमा मेष में है, इसलिए अभी जन्मे हर व्यक्ति की राशि मेष है: आपकी राशि वह है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। इस पेज के खोजने वाले फ़ॉर्म में जन्म तिथि, और पता हो तो समय, डालें, या राशि, नक्षत्र और लग्न एक साथ जानने के लिए अपनी जन्मपत्रिका बनाएँ।

बिना जन्म समय के जन्म तिथि से राशि कैसे पता करें?

23 अगस्त को सुबह 10:24 बजे चंद्रमा मीन से मेष में जाता है। इसलिए अक्सर हाँ: चंद्रमा एक राशि में लगभग ढाई दिन रहता है, और ज़्यादातर तारीख़ों पर पूरे दिन एक ही राशि रहती है; जिस दिन उसने राशि बदली, उस दिन हमारा फ़ॉर्म अनुमान लगाने के बजाय दोनों राशियाँ बदलाव के समय के साथ दिखाता है।

नाम से राशि कैसे जानें?

23 अगस्त को चंद्रमा का नक्षत्र अश्विनी है, जिसके नाम अक्षर चू, चे, चो, ला हैं। 108 नक्षत्र चरणों में हर चरण का एक अक्षर है, और नौ चरणों से एक राशि बनती है, इसलिए नाम का पहला अक्षर एक राशि बताता है; इस पेज की 12 राशियों वाली तालिका में ये अक्षर दिए गए हैं। यह केवल विकल्प है: नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र से रखा गया हो।

नाम राशि और जन्म राशि में क्या अंतर है?

23 अगस्त को जन्मे बच्चे की जन्म राशि मेष है, यानी जन्म के समय चंद्रमा की राशि। नाम राशि नाम के पहले अक्षर से आती है; अश्विनी के अक्षर, जैसे चू, चे, चो, ला, मेष (चरण 1–4) में आते हैं। दोनों तभी मिलती हैं जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।

चंद्र राशि क्या होती है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, निरयण राशिचक्र (तारों के आधार पर बारह राशियों का घेरा, लाहिड़ी अयनांश) में, वही आपकी चंद्र राशि है। चंद्रमा लगभग 27 दिनों में सभी 12 राशियाँ पार करता है, इसलिए यह रोज़ की सबसे निजी राशि है।

जन्मदिन से मेरी सूर्य राशि कुंभ है, क्या मेरी राशि कुंभ है?

23 अगस्त को शाम 5:12 बजे सूर्य निरयण राशिचक्र (तारों के आधार पर बारह राशियों के घेरे) में सिंह के 7°01′ पर है और जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र (मौसम के आधार पर बारह राशियों के घेरे) में कन्या के 1°13′ पर; दोनों राशिचक्रों में लगभग 24° का अंतर है। इसलिए ज़रूरी नहीं: जन्मदिन वाली राशि सूर्य की होती है, जबकि आपकी राशि जन्म के समय चंद्रमा की राशि है, और अधिकतर लोगों की दोनों अलग होती हैं। यह जन्म तिथि, समय और स्थान से तय होता है।

राशि और लग्न में क्या अंतर है?

23 अगस्त को चंद्रमा मेष में है, और अभी जन्मे हर व्यक्ति की राशि यही है। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए इसके लिए जन्म समय चाहिए। दैनिक राशिफल राशि से पढ़ा जाता है; आपकी कुंडली दोनों का उपयोग करती है।

12 राशियों के नाम हिंदी और अंग्रेज़ी में क्या हैं?

23 अगस्त को चंद्रमा मेष में है। 12 राशियाँ हैं: मेष (Aries), वृषभ (Taurus), मिथुन (Gemini), कर्क (Cancer), सिंह (Leo), कन्या (Virgo), तुला (Libra), वृश्चिक (Scorpio), धनु (Sagittarius), मकर (Capricorn), कुंभ (Aquarius) और मीन (Pisces)। इस पेज की तालिका में हर राशि का स्वामी, उसके नक्षत्र चरण और नाम अक्षर भी दिए गए हैं।

इस दिन का राशिफल किस आधार पर बनता है?

23 अगस्त को चंद्रमा सुबह 10:24 बजे तक मीन में, फिर रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे तक मेष में है। हर राशि से नौ ग्रहों का भाव गिना जाता है और हर एक को फलदीपिका, बृहत्संहिता और मुहूर्त चिंतामणि के गोचर नियमों से, वेध, उच्च-नीच और अस्त के साथ पढ़ा जाता है। हर फल के नीचे 'क्यों' वाली सूची में हर ग्रह, उसका भाव और उसका श्लोक दिया गया है।

इस दिन चंद्रमा किस राशि में है और कब तक?

23 अगस्त को चंद्रमा सुबह 10:24 बजे तक मीन में, फिर रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे तक मेष में है; चंद्रमा का नक्षत्र सुबह 10:24 बजे तक रेवती, फिर अश्विनी है। समय America/New_York में हैं।

क्या दिन में राशिफल बदल सकता है?

23 अगस्त को सुबह 10:24 बजे चंद्रमा मेष में जाते हैं, इसलिए दिन हिस्सों में, हर हिस्सा अपने समय के साथ दिखाया गया है। जब भी दिन के बीच चंद्रमा या कोई और ग्रह राशि बदलता है, फल हर हिस्से के लिए बदलाव के ठीक मिनट के साथ दिखाया जाता है।

इस दिन का राशिफल कब अपडेट होता है?

शुक्रवार, 23 अगस्त 2024 का यह पन्ना America/New_York में रात 12 बजे से अगली आधी रात तक का है, और आधी रात को अगले दिन का फल आ जाता है। हर दिन केवल ग्रह-स्थिति से बनता है, और कुछ भी हाथ से बदला नहीं जाता।

क्या एक राशि के सभी लोगों का राशिफल एक जैसा होता है?

23 अगस्त को मेष राशि वाले हर व्यक्ति के लिए चंद्रमा पहले भाव में है, इसलिए हाँ: एक दिन में एक राशि वाले सभी लोगों का फल एक ही होता है। निजी फल में आपका नक्षत्र, आपकी दशा और आपका अष्टकवर्ग जुड़ता है; अपनी कुंडली के साथ साइन इन करने पर यह पेज उसे दिखाता है।

क्या राशिफल सही होता है?

23 अगस्त को सुबह 10:24 बजे चंद्रमा मीन से मेष में जाता है: यह समय हमारे इंजन से है और इस पेज के हर समय की तरह स्विस एफ़ेमेरिस से जाँचा गया है, इसलिए ग्रह-स्थिति सटीक है। फल चंद्र राशि से दिन का सामान्य रुख़ बताता है, बताए गए शास्त्रीय नियमों से; यह तय घटनाएँ नहीं बताता, और हर पंक्ति अपना आधार बताती है ताकि आप ख़ुद परख सकें।

अलग-अलग वेबसाइटों पर राशिफल अलग क्यों होता है?

23 अगस्त को शनि हमारे निरयण राशिचक्र (तारों के आधार पर बारह राशियों के घेरे) में कुंभ में है, पर पश्चिमी ज्योतिष के सायन राशिचक्र (मौसम के आधार पर बारह राशियों के घेरे) में मीन में: यह चार कारणों में से एक है। बाकी हैं सूर्य राशि या चंद्र राशि; राहु की गणना (स्पष्ट गणना से राहु 29 मई 2025, दोपहर 2:48 बजे तक मीन में है, फिर कुंभ में जाते हैं; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से यह बदलाव 18 मई 2025 को है); और हाथ से लिखी या गणना से बनी पंक्तियाँ, जबकि हमारी हर पंक्ति केवल ग्रह-स्थिति से बनती है और अपना नियम बताती है।

इस दिन किस राशि का दिन अच्छा है?

23 अगस्त को केवल चंद्रबल से चंद्रमा मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक और कुंभ के लिए सहायक है; वृषभ, सिंह, धनु, मकर और मीन के लिए धैर्य का समय; और कन्या के लिए चंद्राष्टम, यानी सहज रहने का समय। हर राशि का पूरा फल बाकी ग्रहों को भी गिनता है, और कोई दिन पूरा अच्छा या ख़राब नहीं होता।

कल का दिन कैसा रहेगा?

24 अगस्त को चंद्रमा पूरे दिन मेष में है, रविवार 25 अगस्त, दोपहर 1:00 बजे तक। हर राशि के लिए कल की पंक्ति यहाँ है, और पूरा फल 'कल' चुनने से खुलता है।

अभी किस राशि पर साढ़ेसाती चल रही है?

23 अगस्त को शनि कुंभ में है, इसलिए साढ़ेसाती मीन (पहला चरण), कुंभ (दूसरा चरण) और मकर (तीसरा चरण) पर है। शनि की ढैया कर्क (आठवाँ भाव) और वृश्चिक (चौथा भाव) पर है।

मेरी साढ़ेसाती कब उतरेगी?

अभी की साढ़ेसाती: मकर: 26 जनवरी 2017 से अंतिम निकास 29 मार्च 2025 तक, बीच में 20 जून 2017 से 26 अक्टूबर 2017 तक विराम; कुंभ: 23 जनवरी 2020 से अंतिम निकास 23 फ़रवरी 2028 तक, बीच में 2 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम; मीन: 28 अप्रैल 2022 से अंतिम निकास 16 अप्रैल 2030 तक, बीच में 12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2023 तक विराम और 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक विराम। हर एक शनि के अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ; ये तारीख़ें हमारे इंजन से हैं और हमारी कुंडली की साढ़ेसाती से मिलती हैं।

2025 में साढ़ेसाती और ढैया किन राशियों पर?

शनि 29 मार्च 2025 को मीन में जाते हैं। तब से साढ़ेसाती मेष (पहला चरण), कुंभ (तीसरा चरण) और मीन (दूसरा चरण) पर और ढैया सिंह (आठवाँ भाव) और धनु (चौथा भाव) पर है। शनि 2 जून 2027 को मेष में जाते हैं; शनि 19 अक्टूबर 2027 को मीन में जाते हैं।

साढ़ेसाती क्या है, इसके तीन चरण कौन से हैं?

23 अगस्त को साढ़ेसाती मीन (पहला चरण), कुंभ (दूसरा चरण) और मकर (तीसरा चरण) पर है। यह आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का गुज़रना है, हर भाव में लगभग ढाई साल; इन्हें पहला, दूसरा और तीसरा चरण कहते हैं। शास्त्र में यह लगातार कोशिश और धैर्य का समय है, और यहाँ दी गई तारीख़ें बताती हैं कि हर चरण कब शुरू और ख़त्म होता है।

शनि की ढैया क्या है?

23 अगस्त को ढैया कर्क (आठवाँ भाव) और वृश्चिक (चौथा भाव) पर है। यह आपकी चंद्र राशि से चौथे या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई साल का ठहराव है, जिसे साढ़ेसाती की तरह ही गिना जाता है।

गोचर क्या होता है?

23 अगस्त को, उदाहरण के लिए, गुरु 14 मई 2025, दोपहर 1:07 बजे तक वृषभ में है, फिर मिथुन में जाते हैं। गोचर राशियों में ग्रहों का भ्रमण है, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है: शास्त्रीय तालिकाओं के अनुसार हर ग्रह का भाव अनुकूल होता है या धैर्य माँगता है। इस पेज की ग्रह तालिका में नौ ग्रह दिए गए हैं।

गुरु मिथुन राशि में कब जाएँगे?

गुरु 14 मई 2025, दोपहर 1:07 बजे तक वृषभ में है, फिर मिथुन में जाते हैं। समय America/New_York में हैं; इस पेज के आने वाले गोचर में हर राशि के लिए इसका भाव दिया गया है।

दैनिक राशिफल

राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।

राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।

मेरी जन्मपत्रिका पाएँ

इस साइट को बेहतर बनाने के लिए हम Google Analytics से गिनते हैं कि कौन-से पेज पढ़े जाते हैं। आपकी जन्म की जानकारी इसमें कभी नहीं जाती।