दैनिक राशिफल · चंद्र राशि के अनुसार
बुधवार, 13 जनवरी 2027 का राशिफल — मेष से मीन, सभी 12 राशियाँ
बुधवार, 13 जनवरी 2027
13 जनवरी को चंद्रमा कहाँ है
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा मीन के 3°33′ पर, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चरण 1 में है, और शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे मेष में जाएगा। चक्र पर हर राशि के साथ लिखा है कि उससे चंद्रमा किस भाव में है।
रंग हर राशि से चंद्रमा का बल (चंद्रबल) दिखाते हैं। छोटे बिंदु: योगतारे, यानी 27 नक्षत्रों की पहचान के तारे, अपने असली भोगांश पर। निरयण स्थिति, लाहिड़ी अयनांश, नासा JPL DE440s से हमारे अपने इंजन द्वारा।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
13 जनवरी को चंद्रमा सुबह 5:10 बजे तक कुंभ में, फिर शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक मीन में है।
Columbus · America/New_York · ·
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हमारा राशिफल अलग क्यों है
- हर पंक्ति अपना कारण बताती है
- हर फल की हर पंक्ति बताती है कि उसके पीछे कौन सा ग्रह है, वह आपकी राशि से किस भाव में है, और कौन सा शास्त्रीय श्लोक उसे पढ़ता है, ताकि आप कारण ख़ुद परख सकें।
- मिनट तक सटीक
- जब दिन के बीच चंद्रमा या कोई और ग्रह राशि बदलता है, पेज उसका मिनट बताता है और दिन को हिस्सों में दिखाता है। केवल गुरु और शनि के वक्री-मार्गी होने के समय, जब उनकी गति लगभग शून्य होती है, तारीख़ से दिए गए हैं।
- शुरू से अंत तक एक ही पद्धति
- हर फल चंद्र राशि (जन्म राशि) से, निरयण राशिचक्र और लाहिड़ी अयनांश में गिना जाता है, जैसे वैदिक गोचर पढ़ा जाता है। न सूर्य राशि की तारीख़ें, न पद्धतियों का मेल; राहु-केतु स्पष्ट गणना से हैं, और मध्यम गणना की तारीख़ साथ में दी गई है।
- हिंदी और अंग्रेज़ी एक ही बात कहती हैं
- दोनों भाषाएँ एक ही गणना से, पंक्ति-दर-पंक्ति बनती हैं, और एक जाँच देखती है कि हर पंक्ति दोनों भाषाओं में एक ही रुख़ रखे: सहायक, मिला-जुला या धैर्य।
- स्विस एफ़ेमेरिस से जाँचा गया
- स्थितियाँ नासा JPL के DE440s एफ़ेमेरिस से हमारे अपने इंजन द्वारा निकलती हैं। 2025–2032 के 2,922 दिनों में 8 ग्रहों की हमारी राशियाँ स्विस एफ़ेमेरिस से कभी अलग नहीं हुईं, और 405 राशि परिवर्तन 1.06 विकला के भीतर मिले।
- कुछ भी गढ़ा हुआ नहीं
- न स्टार रेटिंग, न अंक या प्रतिशत, न दिन का कोई रंग या अंक: कोई शास्त्रीय नियम इन्हें नहीं देता, इसलिए हर पंक्ति केवल ग्रह-स्थिति और उसके बताए नियम से बनती है।
दैनिक राशिफल · बुधवार, 13 जनवरी 2027
मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का राशिफल
अपनी राशि, यानी चंद्र राशि, पर टैप करें और पूरा फल खोलें। हर कार्ड पर लिखा लेबल केवल चंद्रमा का बल (चंद्रबल) है; पूरे फल में नौ ग्रह गिने गए हैं।
- मेषधैर्य का समय स्वामी मंगल · अश्विनी 1–4, भरणी 1–4, कृत्तिका 1 चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में मेष, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है। पूरा मेष राशिफल पढ़ें
- वृषभसहायक स्वामी शुक्र · कृत्तिका 2–4, रोहिणी 1–4, मृगशिरा 1–2 चंद्रमा आपसे ग्यारहवें भाव में वृषभ, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे ग्यारहवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक है, पर सूर्य के वेध से रुका हुआ है। पूरा वृषभ राशिफल पढ़ें
- मिथुनसहायक स्वामी बुध · मृगशिरा 3–4, आर्द्रा 1–4, पुनर्वसु 1–3 चंद्रमा आपसे दसवें भाव में मिथुन, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे दसवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा मिथुन राशिफल पढ़ें
- कर्कधैर्य का समय स्वामी चंद्र · पुनर्वसु 4, पुष्य 1–4, आश्लेषा 1–4 चंद्रमा आपसे नौवें भाव में कर्क, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे तक चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है; सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे नौवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है। पूरा कर्क राशिफल पढ़ें
- सिंहचंद्राष्टम: सहज रहें स्वामी सूर्य · मघा 1–4, पूर्वा फाल्गुनी 1–4, उत्तरा फाल्गुनी 1 चंद्रमा आपसे आठवें भाव में सिंह, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है। पूरा सिंह राशिफल पढ़ें
- कन्यासहायक स्वामी बुध · उत्तरा फाल्गुनी 2–4, हस्त 1–4, चित्रा 1–2 चंद्रमा आपसे सातवें भाव में कन्या, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे सातवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा कन्या राशिफल पढ़ें
- तुलासहायक स्वामी शुक्र · चित्रा 3–4, स्वाति 1–4, विशाखा 1–3 चंद्रमा आपसे छठे भाव में तुला, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा तुला राशिफल पढ़ें
- वृश्चिकधैर्य का समय स्वामी मंगल · विशाखा 4, अनुराधा 1–4, ज्येष्ठा 1–4 चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में वृश्चिक, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में है, जो शास्त्र में वाम वेध से सहायक गिना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा वृश्चिक राशिफल पढ़ें
- धनुधैर्य का समय स्वामी गुरु · मूल 1–4, पूर्वाषाढ़ा 1–4, उत्तराषाढ़ा 1 चंद्रमा आपसे चौथे भाव में धनु, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे चौथे भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है। पूरा धनु राशिफल पढ़ें
- मकरसहायक स्वामी शनि · उत्तराषाढ़ा 2–4, श्रवण 1–4, धनिष्ठा 1–2 चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में मकर, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा मकर राशिफल पढ़ें
- कुंभधैर्य का समय स्वामी शनि · धनिष्ठा 3–4, शतभिषा 1–4, पूर्वा भाद्रपद 1–3 चंद्रमा आपसे दूसरे भाव में कुंभ, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे दूसरे भाव में है, जो शास्त्र में वाम वेध से सहायक गिना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा कुंभ राशिफल पढ़ें
- मीनसहायक स्वामी गुरु · पूर्वा भाद्रपद 4, उत्तरा भाद्रपद 1–4, रेवती 1–4 चंद्रमा आपसे पहले भाव में मीन, 13 जनवरी को: सुबह 5:10 बजे से चंद्रमा आपसे पहले भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है। पूरा मीन राशिफल पढ़ें
दैनिक राशिफल
13 जनवरी को चंद्रमा किस राशि में है?
13 जनवरी को चंद्रमा सुबह 5:10 बजे तक कुंभ में, फिर शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक मीन में है। चंद्रमा का नक्षत्र सुबह 11:35 बजे तक पूर्वा भाद्रपद, फिर उत्तरा भाद्रपद है।
- चंद्र राशि
- कुंभ? रविवार 10 जनवरी, शाम 6:05 बजे – सुबह 5:10 बजे
- मीन? सुबह 5:10 बजे – शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे
- चंद्र नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद मंगलवार 12 जनवरी, सुबह 9:44 बजे – सुबह 11:35 बजे
- उत्तरा भाद्रपद सुबह 11:35 बजे – गुरुवार 14 जनवरी, दोपहर 12:49 बजे
- तिथि
- शुक्ल षष्ठी गुरुवार 14 जनवरी, रात 3:29 बजे तक, फिर शुक्ल सप्तमी
हर राशि से चंद्रमा का भाव
| राशि | कुंभ सुबह 5:10 बजे तक | मीन सुबह 5:10 बजे से |
|---|---|---|
| मेष | ग्यारहवाँ · सहायक | बारहवाँ · धैर्य का समय |
| वृषभ | दसवाँ · सहायक | ग्यारहवाँ · सहायक |
| मिथुन | नौवाँ · धैर्य का समय | दसवाँ · सहायक |
| कर्क | आठवाँ · चंद्राष्टम: सहज रहें | नौवाँ · धैर्य का समय |
| सिंह | सातवाँ · सहायक | आठवाँ · चंद्राष्टम: सहज रहें |
| कन्या | छठा · सहायक | सातवाँ · सहायक |
| तुला | पाँचवाँ · धैर्य का समय | छठा · सहायक |
| वृश्चिक | चौथा · धैर्य का समय | पाँचवाँ · धैर्य का समय |
| धनु | तीसरा · सहायक | चौथा · धैर्य का समय |
| मकर | दूसरा · धैर्य का समय | तीसरा · सहायक |
| कुंभ | पहला · सहायक | दूसरा · धैर्य का समय |
| मीन | बारहवाँ · धैर्य का समय | पहला · सहायक |
दैनिक राशिफल
13 जनवरी का ग्रह गोचर
Columbus में सूर्योदय (सुबह 7:53 बजे) पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी): वही तालिका जो हमारे पंचांग पर है। 'इस राशि में कब तक' वह मिनट है जब ग्रह अपनी राशि छोड़ता है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | इस राशि में कब तक |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य? | धनु | 28°52′ | उत्तराषाढ़ा · 1 | गुरुवार 14 जनवरी, सुबह 10:40 बजे, फिर मकर |
| चंद्र? | मीन | 1°24′ | पूर्वा भाद्रपद · 4 | शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे, फिर मेष |
| मंगल? वक्री | सिंह | 16°08′ | पूर्वा फाल्गुनी · 1 | 9 मार्च, दोपहर 1:43 बजे, फिर कर्क |
| बुध? अस्त | मकर | 6°14′ | उत्तराषाढ़ा · 3 | 27 जनवरी, शाम 5:04 बजे, फिर कुंभ |
| गुरु? वक्री | सिंह | 1°13′ | मघा · 1 | 24 जनवरी, दोपहर 3:01 बजे, फिर कर्क |
| शुक्र? | वृश्चिक | 12°17′ | अनुराधा · 3 | 29 जनवरी, सुबह 8:12 बजे, फिर धनु |
| शनि? | मीन | 14°42′ | उत्तरा भाद्रपद · 4 | 2 जून, शाम 7:58 बजे (EDT), फिर मेष |
| राहु? | मकर | 26°30′ | धनिष्ठा · 1 | 24 मई 2028, सुबह 5:38 बजे (EDT), फिर धनुमध्यम गणना: 23 जून 2028 |
| केतु? | कर्क | 26°30′ | आश्लेषा · 3 | 24 मई 2028, सुबह 5:38 बजे (EDT), फिर मिथुनमध्यम गणना: 23 जून 2028 |
दैनिक राशिफल · गुरुवार, 14 जनवरी
अगले दिन का राशिफल, 14 जनवरी
- मेषकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं।
- वृषभकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे ग्यारहवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं।
- मिथुनकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे दसवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं।
- कर्ककल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे नौवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं।
- सिंहकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं।
- कन्याकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे सातवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं।
- तुलाकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं।
- वृश्चिककल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में है, जो शास्त्र में वाम वेध से सहायक गिना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं।
- धनुकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे चौथे भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं।
- मकरकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं।
- कुंभकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे दूसरे भाव में है, जो शास्त्र में वाम वेध से सहायक गिना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं।
- मीनकल (गुरुवार, 14 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा आपसे पहले भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है; सुबह 10:40 बजे सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं।
दैनिक राशिफल
साढ़ेसाती और शनि की ढैया: अभी किन राशियों पर और कब तक
साढ़ेसाती चंद्र राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का गोचर है, लगभग साढ़े सात वर्ष। ढैया चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में शनि का गोचर है, लगभग ढाई वर्ष।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
| राशि | अभी | पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक | विराम |
|---|---|---|---|
| मेष | साढ़ेसाती का पहला चरण? | 29 मार्च 2025 – 30 मई 2032 | कोई नहीं |
| सिंह | ढैया (आठवाँ भाव)? | 29 मार्च 2025 – 23 फ़रवरी 2028 | 2 जून – 19 अक्टूबर |
| धनु | ढैया (चौथा भाव)? | 29 मार्च 2025 – 23 फ़रवरी 2028 | 2 जून – 19 अक्टूबर |
| कुंभ | साढ़ेसाती का तीसरा चरण? | 23 जनवरी 2020 – 23 फ़रवरी 2028 | 2 जून – 19 अक्टूबर |
| मीन | साढ़ेसाती का दूसरा चरण? | 28 अप्रैल 2022 – 16 अप्रैल 2030 | 12 जुलाई 2022 – 17 जनवरी 2023 8 अगस्त 2029 – 5 अक्टूबर 2029 |
अभी न साढ़ेसाती, न ढैया: वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक और मकर।
शनि के आगे के बदलाव
- 2 जून, शाम 7:58 बजे (EDT): शनि मेष में
- 9 अगस्त: शनि मेष में वक्री (केवल तारीख़)
- 19 अक्टूबर, रात 9:42 बजे (EDT): शनि मीन में
- 23 दिसंबर: शनि मीन में मार्गी (केवल तारीख़)
- 23 फ़रवरी 2028, सुबह 8:54 बजे: शनि मेष में
2 जून के बाद: साढ़ेसाती मेष (दूसरा चरण), वृषभ (पहला चरण) और मीन (तीसरा चरण) पर; ढैया कन्या (आठवाँ भाव) और मकर (चौथा भाव) पर।
दैनिक राशिफल
आने वाले गोचर
अगले 60 दिनों का हर राशि परिवर्तन, वक्री या मार्गी होना और अस्त-उदय, हर राशि से उसके भाव के साथ, और राशि परिवर्तन के लिए वहाँ उसका फल भी।
-
गुरुवार 14 जनवरी, सुबह 10:40 बजे · सूर्य मकर राशि में
- मेष दसवाँसहायता मंद
- वृषभ नौवाँधैर्य का समय
- मिथुन आठवाँधैर्य का समय
- कर्क सातवाँधैर्य का समय
- सिंह छठासहायता मंद
- कन्या पाँचवाँधैर्य का समय
- तुला चौथाधैर्य का समय
- वृश्चिक तीसरासहायता मंद
- धनु दूसराधैर्य का समय
- मकर पहलाधैर्य का समय
- कुंभ बारहवाँधैर्य का समय
- मीन ग्यारहवाँसहायता मंद
-
23 जनवरी, सुबह 8:22 बजे · बुध मकर में अस्त से बाहर
- मेष दसवाँ
- वृषभ नौवाँ
- मिथुन आठवाँ
- कर्क सातवाँ
- सिंह छठा
- कन्या पाँचवाँ
- तुला चौथा
- वृश्चिक तीसरा
- धनु दूसरा
- मकर पहला
- कुंभ बारहवाँ
- मीन ग्यारहवाँ
-
24 जनवरी, दोपहर 3:01 बजे · गुरु कर्क राशि में
- मेष चौथानरम
- वृषभ तीसरानरम
- मिथुन दूसरासहायक
- कर्क पहलानरम
- सिंह बारहवाँनरम
- कन्या ग्यारहवाँसहायक
- तुला दसवाँनरम
- वृश्चिक नौवाँसहायक
- धनु आठवाँनरम
- मकर सातवाँसहायक
- कुंभ छठानरम
- मीन पाँचवाँसहायक
-
27 जनवरी, शाम 5:04 बजे · बुध कुंभ राशि में
- मेष ग्यारहवाँसहायक
- वृषभ दसवाँसहायक
- मिथुन नौवाँधैर्य का समय
- कर्क आठवाँसहायक
- सिंह सातवाँधैर्य का समय
- कन्या छठासहायक
- तुला पाँचवाँधैर्य का समय
- वृश्चिक चौथासहायक
- धनु तीसराधैर्य का समय
- मकर दूसरासहायक
- कुंभ पहलाधैर्य का समय
- मीन बारहवाँधैर्य का समय
-
29 जनवरी, सुबह 8:12 बजे · शुक्र धनु राशि में
- मेष नौवाँसहायक
- वृषभ आठवाँसहायक
- मिथुन सातवाँधैर्य का समय
- कर्क छठाधैर्य का समय
- सिंह पाँचवाँसहायक
- कन्या चौथासहायक
- तुला तीसरासहायक
- वृश्चिक दूसरासहायक
- धनु पहलासहायक
- मकर बारहवाँसहायक
- कुंभ ग्यारहवाँसहायक
- मीन दसवाँधैर्य का समय
-
9 फ़रवरी, दोपहर 12:36 बजे · बुध कुंभ में वक्री
- मेष ग्यारहवाँ
- वृषभ दसवाँ
- मिथुन नौवाँ
- कर्क आठवाँ
- सिंह सातवाँ
- कन्या छठा
- तुला पाँचवाँ
- वृश्चिक चौथा
- धनु तीसरा
- मकर दूसरा
- कुंभ पहला
- मीन बारहवाँ
-
12 फ़रवरी, रात 3:05 बजे · बुध कुंभ में सूर्य के निकट, अस्त
- मेष ग्यारहवाँ
- वृषभ दसवाँ
- मिथुन नौवाँ
- कर्क आठवाँ
- सिंह सातवाँ
- कन्या छठा
- तुला पाँचवाँ
- वृश्चिक चौथा
- धनु तीसरा
- मकर दूसरा
- कुंभ पहला
- मीन बारहवाँ
-
12 फ़रवरी, रात 11:39 बजे · सूर्य कुंभ राशि में
- मेष ग्यारहवाँसहायता मंद
- वृषभ दसवाँसहायता मंद
- मिथुन नौवाँधैर्य का समय
- कर्क आठवाँधैर्य का समय
- सिंह सातवाँधैर्य का समय
- कन्या छठासहायता मंद
- तुला पाँचवाँधैर्य का समय
- वृश्चिक चौथाधैर्य का समय
- धनु तीसरासहायता मंद
- मकर दूसराधैर्य का समय
- कुंभ पहलाधैर्य का समय
- मीन बारहवाँधैर्य का समय
-
23 फ़रवरी, शाम 6:10 बजे · बुध मकर राशि में
- मेष दसवाँसहायता मंद
- वृषभ नौवाँधैर्य का समय
- मिथुन आठवाँसहायता मंद
- कर्क सातवाँधैर्य का समय
- सिंह छठासहायता मंद
- कन्या पाँचवाँधैर्य का समय
- तुला चौथासहायता मंद
- वृश्चिक तीसराधैर्य का समय
- धनु दूसरासहायता मंद
- मकर पहलाधैर्य का समय
- कुंभ बारहवाँधैर्य का समय
- मीन ग्यारहवाँसहायता मंद
-
24 फ़रवरी, सुबह 4:46 बजे · शुक्र मकर राशि में
- मेष दसवाँधैर्य का समय
- वृषभ नौवाँसहायक
- मिथुन आठवाँसहायक
- कर्क सातवाँधैर्य का समय
- सिंह छठाधैर्य का समय
- कन्या पाँचवाँसहायक
- तुला चौथासहायक
- वृश्चिक तीसरासहायक
- धनु दूसरासहायक
- मकर पहलासहायक
- कुंभ बारहवाँसहायक
- मीन ग्यारहवाँसहायक
-
24 फ़रवरी, सुबह 8:56 बजे · बुध मकर में अस्त से बाहर
- मेष दसवाँ
- वृषभ नौवाँ
- मिथुन आठवाँ
- कर्क सातवाँ
- सिंह छठा
- कन्या पाँचवाँ
- तुला चौथा
- वृश्चिक तीसरा
- धनु दूसरा
- मकर पहला
- कुंभ बारहवाँ
- मीन ग्यारहवाँ
-
3 मार्च, सुबह 7:33 बजे · बुध मकर में मार्गी
- मेष दसवाँ
- वृषभ नौवाँ
- मिथुन आठवाँ
- कर्क सातवाँ
- सिंह छठा
- कन्या पाँचवाँ
- तुला चौथा
- वृश्चिक तीसरा
- धनु दूसरा
- मकर पहला
- कुंभ बारहवाँ
- मीन ग्यारहवाँ
-
9 मार्च, दोपहर 1:43 बजे · मंगल कर्क राशि में
- मेष चौथाधैर्य का समय
- वृषभ तीसरासहायता मंद
- मिथुन दूसराधैर्य का समय
- कर्क पहलाधैर्य का समय
- सिंह बारहवाँधैर्य का समय
- कन्या ग्यारहवाँसहायता मंद
- तुला दसवाँधैर्य का समय
- वृश्चिक नौवाँधैर्य का समय
- धनु आठवाँधैर्य का समय
- मकर सातवाँधैर्य का समय
- कुंभ छठासहायता मंद
- मीन पाँचवाँधैर्य का समय
-
11 मार्च, शाम 6:37 बजे · बुध कुंभ राशि में
- मेष ग्यारहवाँसहायक
- वृषभ दसवाँसहायक
- मिथुन नौवाँधैर्य का समय
- कर्क आठवाँसहायक
- सिंह सातवाँधैर्य का समय
- कन्या छठासहायक
- तुला पाँचवाँधैर्य का समय
- वृश्चिक चौथासहायक
- धनु तीसराधैर्य का समय
- मकर दूसरासहायक
- कुंभ पहलाधैर्य का समय
- मीन बारहवाँधैर्य का समय
दैनिक राशिफल
मेरी राशि कौन सी है? चंद्र राशि, नाम राशि और सूर्य राशि
- चंद्र राशि (जन्म राशि)
- आपके जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। वैदिक राशिफल इसी से पढ़ा जाता है, और यह पेज भी।
- सूर्य राशि
- पश्चिमी ज्योतिष की जन्मदिन वाली राशि, सायन राशिचक्र से। यह अलग पद्धति है; अधिकतर लोगों की यह उनकी राशि नहीं होती।
- नाम राशि
- आपके नाम के पहले अक्षर की राशि। यह जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा गया हो, इसलिए इसे तभी लें जब जन्म तिथि पता न हो।
जन्म तिथि से अपनी राशि जानें
आपकी जन्मपत्रिका जन्म तिथि, समय और स्थान से आपकी राशि, नक्षत्र और लग्न ठीक-ठीक बताती है। मेरी जन्मपत्रिका बनाएँ
दैनिक राशिफल
12 राशियों के नाम हिंदी और अंग्रेज़ी में, उनके स्वामी ग्रह
नाम अक्षर तभी काम के हैं जब जन्म तिथि पता न हो: नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र से रखा गया हो। अंग्रेज़ी नाम केवल पहचान के लिए हैं; किसी राशि पर पश्चिमी तारीख़ों का दायरा लागू नहीं होता।
| राशि | हिंदी | अंग्रेज़ी | स्वामी | नक्षत्र चरण | नाम अक्षर |
|---|---|---|---|---|---|
| Mesh | मेष | Aries | मंगल | अश्विनी 1–4, भरणी 1–4, कृत्तिका 1 | चू चे चो ला ली लू ले लो अ |
| Vrishabh | वृषभ | Taurus | शुक्र | कृत्तिका 2–4, रोहिणी 1–4, मृगशिरा 1–2 | इ उ ए ओ वा वी वू वे वो |
| Mithun | मिथुन | Gemini | बुध | मृगशिरा 3–4, आर्द्रा 1–4, पुनर्वसु 1–3 | का की कू घ ङ छ के को हा |
| Kark | कर्क | Cancer | चंद्र | पुनर्वसु 4, पुष्य 1–4, आश्लेषा 1–4 | ही हू हे हो डा डी डू डे डो |
| Singh | सिंह | Leo | सूर्य | मघा 1–4, पूर्वा फाल्गुनी 1–4, उत्तरा फाल्गुनी 1 | मा मी मू मे मो टा टी टू टे |
| Kanya | कन्या | Virgo | बुध | उत्तरा फाल्गुनी 2–4, हस्त 1–4, चित्रा 1–2 | टो पा पी पू ष ण ठ पे पो |
| Tula | तुला | Libra | शुक्र | चित्रा 3–4, स्वाति 1–4, विशाखा 1–3 | रा री रू रे रो ता ती तू ते |
| Vrishchik | वृश्चिक | Scorpio | मंगल | विशाखा 4, अनुराधा 1–4, ज्येष्ठा 1–4 | तो ना नी नू ने नो या यी यू |
| Dhanu | धनु | Sagittarius | गुरु | मूल 1–4, पूर्वाषाढ़ा 1–4, उत्तराषाढ़ा 1 | ये यो भा भी भू धा फा ढा भे |
| Makar | मकर | Capricorn | शनि | उत्तराषाढ़ा 2–4, श्रवण 1–4, धनिष्ठा 1–2 | भो जा जी खी खू खे खो गा गी |
| Kumbh | कुंभ | Aquarius | शनि | धनिष्ठा 3–4, शतभिषा 1–4, पूर्वा भाद्रपद 1–3 | गू गे गो सा सी सू से सो दा |
| Meen | मीन | Pisces | गुरु | पूर्वा भाद्रपद 4, उत्तरा भाद्रपद 1–4, रेवती 1–4 | दी दू थ झ ञ दे दो चा ची |
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हमारा राशिफल कैसे बनता है: चंद्र राशि से गोचर, नासा JPL DE440s, लाहिड़ी अयनांश
अंकों की जाँच कैसे होती है
- ग्रह-स्थिति
- हर स्थिति नासा JPL के DE440s एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने इंजन द्वारा, लाहिड़ी अयनांश के साथ निरयण। 2,922 दिनों और 8 ग्रहों में हमारी राशियाँ स्विस एफ़ेमेरिस से कभी अलग नहीं हुईं, और 405 राशि परिवर्तन 1.06 विकला के भीतर मिले।
- वक्री-मार्गी और अस्त
- बुध और शुक्र के वक्री-मार्गी होने के समय स्विस एफ़ेमेरिस से एक मिनट के भीतर मिलते हैं और मिनट तक छपते हैं; गुरु और शनि की गति उस समय लगभग शून्य होती है, इसलिए उनकी केवल तारीख़ दी गई है। अस्त होने की सीमाएँ 0.06 विकला के भीतर मिलती हैं।
- राहु और केतु
- हर फल में स्पष्ट राहु-केतु लिए गए हैं, जैसे हमारी कुंडली में। कई पंचांग मध्यम राहु छापते हैं, जिसकी राशि लगभग दस दिन आगे-पीछे बदल सकती है, इसलिए उसकी तारीख़ हमारी तारीख़ के साथ दी गई है। हमारी मध्यम गणना स्विस एफ़ेमेरिस से 0.13 विकला के भीतर मिलती है।
- पेज कब बदलता है
- हर दिन का पेज, पेज के समय क्षेत्र (सामान्यतः IST) में रात 12 बजे से आधी रात तक की तारीख़ का है, और केवल ग्रह-स्थिति से बनता है; कोई पंक्ति हाथ से लिखी या बदली नहीं जाती। बीते दिन का पेज जैसा था, वैसा ही रहता है।
यह पेज क्या लागू करता है
- हर भाव आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है; राशिचक्र निरयण (लाहिड़ी अयनांश) है और ग्रह-स्थिति नासा जेपीएल DE440 से है। राहु-केतु स्पष्ट (वास्तविक) गति से लिए गए हैं, जैसा हमारी कुंडली में है, और कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना की तारीख़ साथ में दी गई है।
- किस भाव में गोचर अनुकूल है, यह फलदीपिका 26.2, बृहत्संहिता 104.4 और मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 से लिया गया है, जो आपस में सहमत हैं; हर भाव का फल वहीं लिखा गया है जहाँ फलदीपिका और बृहत्संहिता एक बात कहती हैं।
- वेध आपकी चंद्र राशि से गिना गया है (नारद), और सूर्य-शनि तथा चंद्र-बुध के बीच वेध नहीं होता।
- अनुकूल भाव में राहु-केतु को भी सात में से कोई ग्रह इसी तरह वेध से रोकता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.1; कालप्रकाशिका 36.18)।
- वाम वेध धैर्य माँगने वाली स्थिति को तब सहायक गिनता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8); यह भी आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, और चंद्राष्टम को नहीं बदलता।
- अनुकूल भाव में नीच या अमित्र राशि के ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; बृहत्संहिता 104.53)।
- अनुकूल भाव में सूर्य के निकट (अस्त) ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
- धैर्य माँगने वाले भाव में स्वराशि या उच्च राशि का ग्रह प्रतिकूल फल नहीं देता (फलदीपिका 26.31; कालप्रकाशिका 36.12)।
- जहाँ स्वराशि या उच्च राशि और अस्त दोनों हों, वहाँ कोई ग्रंथ एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखता, इसलिए उसे दोनों तथ्यों के साथ मिला-जुला दिखाया गया है।
- जब चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों, तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद गिनी गई है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56); इससे कोई पंक्ति कठोर नहीं होती। बाकी ग्रहों का साथ केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि उसका फल एक ही ग्रंथ में है।
- शुक्ल पक्ष में चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक गिना गया है, जब तक बुध के सिवा कोई ग्रह छठे, चौथे या आठवें भाव में न हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)। यह अलग पंक्ति में है और 12 राशियों की तालिका या दिन का लेबल नहीं बदलता।
- आठवें भाव का चंद्रमा हर स्थिति में चंद्राष्टम ही रहता है और जितने घंटे वह रहता है उनका लेबल वही तय करता है; जब वह दिन के केवल एक हिस्से में हो, तो वह हिस्सा मुख्य पंक्ति में बताया गया है। यह क्रम हमारी अपनी पद्धति है।
- जीवन के तीन क्षेत्र भावों का हमारा अपना समूह हैं, जिनके अर्थ बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11 में इन्हीं विषयों से जुड़े हैं: काम और धन (दसवाँ, छठा, तीसरा, ग्यारहवाँ, दूसरा, बारहवाँ), प्रेम और परिवार (सातवाँ, चौथा, दूसरा), सेहत (पहला, छठा)।
- दसवें भाव के राहु या केतु को धैर्य का समय माना गया है, जैसा पाँच ग्रंथ मानते हैं (मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका, शार्ङ्गधर, ज्योतिःप्रकाश और श्रीपति); फलदीपिका इसे अनुकूल मानती है, इसलिए साथ में 'ग्रंथों में मतभेद' लिखा गया है।
- वक्री होना केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है। गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं, इसलिए वक्री ग्रह को उसी राशि से पढ़ा गया है जिसमें वह है।
- दिन का लेबल हमारी अपनी पद्धति है, कोई शास्त्रीय अंक नहीं: दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है, चंद्राष्टम सबसे ऊपर है, और साथ में सभी नौ ग्रहों की गिनती दी गई है।
- यहाँ दिन का कोई अंक या रंग नहीं दिया गया: किसी शास्त्र में राशि के दिन के लिए ऐसा नहीं मिलता। इसकी जगह सहायक समय पंचांग से दिए गए हैं।
क्या शामिल नहीं है, और क्यों
- यहाँ राहु-केतु की उच्च या स्वराशि नहीं ली गई, क्योंकि इन पर ग्रंथों में मतभेद है।
- शास्त्र कहते हैं कि अनुकूल स्थिति को 'अन्य ग्रह' वेध से रोकते हैं, पर यह नहीं बताते कि राहु-केतु इनमें गिने जाएँ या नहीं; इसलिए हम वेध में केवल सात दृश्य ग्रह गिनते हैं।
- राहु-केतु पर वाम वेध लागू नहीं किया गया: केवल एक ग्रंथ ऐसा पढ़ता है, इसलिए धैर्य माँगने वाले भाव में राहु-केतु को वैसे ही गिना गया है।
- मुहूर्त चिंतामणि 4.7 के चंद्रमा से जुड़े बाकी नियम (ऐसे दो ग्रहों के बीच, उनमें से किसी से सातवाँ, या मित्र के नवांश से राहत) नहीं लिए गए: ग्रंथ इन्हें एक तरह से परिभाषित नहीं करते।
- राशि का सर्वाष्टकवर्ग केवल अंक के रूप में दिया गया है: बृहत्पाराशर होराशास्त्र के वर्ग (30 से अधिक, 25 से 30, 25 से कम) की पुष्टि किसी दूसरे ग्रंथ से नहीं हुई, और फलदीपिका 28 को आधार मानती है, इसलिए कोई वर्ग नहीं दिया गया।
- राहु-केतु का अपना अष्टकवर्ग नहीं होता, इसलिए उनके बिंदु नहीं पढ़े गए।
- कक्ष्या का समय फलदीपिका 23.16–19 में दूसरे मत के रूप में दिया गया है और बाकी ग्रंथों में नहीं मिलता, इसलिए नहीं लिया गया।
- राशि-प्रवेश के क्षण वाला नियम (मुहूर्त चिंतामणि 3.19; नारद संहिता 11.26) मासिक फल के लिए है, दैनिक पेज के लिए नहीं।
- ग्रंथ कहते हैं कि कुछ ग्रह राशि बदलने से पहले ही फल देने लगते हैं (सूर्य 5 दिन, मंगल 8 दिन, शनि 6 महीने, राहु-केतु 3 महीने); यह वार्षिक फल का विषय है, इसलिए यहाँ नहीं दिखाया गया। बुध, शुक्र और गुरु के लिए ग्रंथों के आँकड़े अलग हैं, इसलिए वे नहीं लिए गए।
- होरा केवल तथ्य के रूप में दी गई हैं। होरा अपने स्वामी के वार के काम के लिए उपयुक्त है, यह नियम (मुहूर्त चिंतामणि 1.56; नारद संहिता 5.20) पुष्ट है, पर हर वार के कामों की सूची की दूसरी जाँच अभी बाकी है, इसलिए होरा की सलाह नहीं दी गई।
- शनि का 'पाया' (सोना, चाँदी, ताँबा या लोहा) नहीं दिखाया गया: मुख्य ग्रंथों में इसका श्लोक नहीं मिला, और प्रचलित नियम आपस में अलग हैं।
इस पेज के शब्द
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- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- मेष
- पहली राशि, निरयण 0° से 30° तक, स्वामी मंगल।
- वृषभ
- दूसरी राशि, निरयण 30° से 60° तक, स्वामी शुक्र।
- मिथुन
- तीसरी राशि, निरयण 60° से 90° तक, स्वामी बुध।
- कर्क
- चौथी राशि, निरयण 90° से 120° तक, स्वामी चंद्र।
- सिंह
- पाँचवीं राशि, निरयण 120° से 150° तक, स्वामी सूर्य।
- कन्या
- छठी राशि, निरयण 150° से 180° तक, स्वामी बुध।
- तुला
- सातवीं राशि, निरयण 180° से 210° तक, स्वामी शुक्र।
- वृश्चिक
- आठवीं राशि, निरयण 210° से 240° तक, स्वामी मंगल।
- धनु
- नौवीं राशि, निरयण 240° से 270° तक, स्वामी गुरु।
- मकर
- दसवीं राशि, निरयण 270° से 300° तक, स्वामी शनि।
- कुंभ
- ग्यारहवीं राशि, निरयण 300° से 330° तक, स्वामी शनि।
- मीन
- बारहवीं राशि, निरयण 330° से 360° तक, स्वामी गुरु।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- सहायक (वाम वेध)
- धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जिसे जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से (वाम वेध) सहायक गिना गया है।
- वेध से रुका
- अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
- सहायता मंद
- अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
- मिला-जुला
- संकेत दोनों ओर जाते हैं (स्वराशि या उच्च राशि, पर सूर्य के निकट), या सहायक चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हैं, इसलिए यह गोचर न सहायक गिना गया, न धैर्य का समय।
- नरम
- धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जो ग्रह के स्वराशि या उच्च राशि में होने से नरम पड़ा है (फलदीपिका 26.31)।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- चंद्राष्टम: सहज रहें
- चंद्रमा आपकी राशि से आठवीं राशि में; परंपरा में योजनाएँ सरल रखने और बड़े नए निर्णय धीरे लेने का समय।
- सहायक
- दिन का हमारा लेबल, जब दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो (भाव से, या वाम वेध से)।
- मिला-जुला
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा वेध से रुका, मंद या नरम हो, या उसकी राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों।
- धैर्य का समय
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा धैर्य माँगने वाले भाव में या चंद्राष्टम में हो।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- चंद्र राशि (जन्म राशि)
- जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था; यहाँ हर भाव उसी से गिना गया है।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- चंद्रमा का साथ
- चंद्रमा की राशि में बैठे ग्रह; वहाँ सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद मानी जाती है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56)।
- शुक्ल पक्ष
- अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- नक्षत्र
- राशिचक्र के 27 भागों में से एक, हर भाग 13°20′ का, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
- चरण
- नक्षत्र का चौथाई भाग (3°20′); एक राशि में नौ चरण होते हैं।
- साढ़ेसाती
- आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का भ्रमण; नाम बाद की परंपरा का है, भाव फलदीपिका 26.22–23 में हैं।
- शनि की ढैया
- आपकी चंद्र राशि से चौथे या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई वर्ष का ठहराव।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- अस्त
- सूर्य की चमक में छिपा ग्रह; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद (फलदीपिका 26.32)। गुरु और शुक्र: जब तक भारत के संदर्भ अक्षांश 23°11′ उत्तर (भारतीय खगोलीय पंचांग) से न दिखें; मंगल, बुध और शनि ग्रंथों के अंशों से (सूर्य सिद्धांत 9.6–9.8)।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- स्पष्ट राहु-केतु
- राहु-केतु की वास्तविक (घटती-बढ़ती) गति, जैसी हमारी कुंडली में ली जाती है।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- ग्रंथों में मतभेद
- शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
- अष्टकवर्ग
- आपकी कुंडली में हर ग्रह हर राशि को जो बिंदु (0 से 8) देता है; अधिक बिंदु, गोचर में अधिक सहयोग (फलदीपिका 26.41; बृहत्पाराशर होराशास्त्र 72.30–31)।
- बिंदु
- अष्टकवर्ग का एक अंक; हर ग्रह के लिए हर राशि में 0 से 8।
- सर्वाष्टकवर्ग
- आपकी कुंडली में किसी राशि को मिले सभी बिंदुओं का योग, जो अंक के रूप में दिया गया है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 72)।
- दशा
- विंशोत्तरी पद्धति से आपके जीवन में चल रही ग्रह की अवधि।
- महादशा
- दशा की मुख्य अवधि।
- अंतर्दशा
- महादशा के भीतर की उप-अवधि।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- स्वराशि
- वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- मित्र राशि
- ऐसी राशि जिसका स्वामी ग्रह का नैसर्गिक मित्र है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- सम राशि
- ऐसी राशि जिसका स्वामी ग्रह का न नैसर्गिक मित्र है, न विरोधी (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- अमित्र राशि
- ऐसी राशि जिसके स्वामी से ग्रह का नैसर्गिक विरोध है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- साढ़ेसाती का पहला चरण
- आपकी चंद्र राशि से बारहवें भाव में शनि।
- साढ़ेसाती का दूसरा चरण
- आपकी चंद्र राशि में ही शनि।
- साढ़ेसाती का तीसरा चरण
- आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में शनि।
- ढैया (चौथा भाव)
- आपकी चंद्र राशि से चौथे भाव में शनि।
- ढैया (आठवाँ भाव)
- आपकी चंद्र राशि से आठवें भाव में शनि।
- जन्म तारा
- आपका अपना जन्म नक्षत्र, पहली तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
- संपत तारा
- दूसरी तारा, 'संपत्ति'; नए काम के लिए अच्छी।
- विपत तारा
- तीसरी तारा, 'कठिनाई'; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
- क्षेम तारा
- चौथी तारा, 'कुशल-क्षेम'; नए काम के लिए अच्छी।
- प्रत्यरि तारा
- पाँचवीं तारा, 'बाधा'; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
- साधक तारा
- छठी तारा, 'सिद्धि देने वाली'; नए काम के लिए अच्छी।
- वध तारा
- सातवीं तारा, जिसे नैधन भी कहते हैं; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
- मित्र तारा
- आठवीं तारा, 'मित्र'; नए काम के लिए अच्छी।
- अतिमित्र तारा
- नौवीं तारा, 'परम मित्र'; नए काम के लिए अच्छी।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- अच्छा सहयोग
- ग्रह के अपने बिंदुओं का हमारा वर्गीकरण: 5 या अधिक अच्छा, 4 मध्यम, 3 या कम कम।
- मध्यम
- ग्रह के अपने बिंदुओं का हमारा वर्गीकरण: 5 या अधिक अच्छा, 4 मध्यम, 3 या कम कम।
- कम सहयोग
- ग्रह के अपने बिंदुओं का हमारा वर्गीकरण: 5 या अधिक अच्छा, 4 मध्यम, 3 या कम कम।
- अभिजित मुहूर्त
- पंचांग के अनुसार नए काम के लिए अच्छा समय।
- अमृत काल
- पंचांग के अनुसार नए काम के लिए अच्छा समय।
- ब्रह्म मुहूर्त
- पंचांग के अनुसार नए काम के लिए अच्छा समय।
- विजय मुहूर्त
- पंचांग के अनुसार नए काम के लिए अच्छा समय।
- शुभ चौघड़िया
- पंचांग के अनुसार नए काम के लिए अच्छा समय।
- फलदीपिका
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- बृहत्संहिता
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- मुहूर्त चिंतामणि
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- नारद संहिता
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- कालप्रकाशिका
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- बृहत्पाराशर होराशास्त्र
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- ज्योतिर्निबंध
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
- बृहद्दैवज्ञरंजन
- एक शास्त्रीय ग्रंथ, जिसका नाम उस पर टिकी पंक्तियों के साथ दिया गया है।
प्रश्न
राशिफल से जुड़े सवाल
राशिफल किस राशि से देखें: चंद्र राशि, सूर्य राशि या नाम राशि?
13 जनवरी को चंद्रमा सुबह 5:10 बजे तक कुंभ में, फिर शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक मीन में है, और इस पेज का हर फल चंद्र राशि (जन्म राशि) से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है। अपनी चंद्र राशि पढ़ें। नाम राशि उससे तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा गया हो; सूर्य राशि दूसरी पद्धति की है।
मेरी राशि क्या है, कैसे पता करें?
13 जनवरी को चंद्रमा मीन में है, इसलिए अभी जन्मे हर व्यक्ति की राशि मीन है: आपकी राशि वह है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। इस पेज के खोजने वाले फ़ॉर्म में जन्म तिथि, और पता हो तो समय, डालें, या राशि, नक्षत्र और लग्न एक साथ जानने के लिए अपनी जन्मपत्रिका बनाएँ।
बिना जन्म समय के जन्म तिथि से राशि कैसे पता करें?
13 जनवरी को सुबह 5:10 बजे चंद्रमा कुंभ से मीन में जाता है। इसलिए अक्सर हाँ: चंद्रमा एक राशि में लगभग ढाई दिन रहता है, और ज़्यादातर तारीख़ों पर पूरे दिन एक ही राशि रहती है; जिस दिन उसने राशि बदली, उस दिन हमारा फ़ॉर्म अनुमान लगाने के बजाय दोनों राशियाँ बदलाव के समय के साथ दिखाता है।
नाम से राशि कैसे जानें?
13 जनवरी को चंद्रमा का नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है, जिसके नाम अक्षर दू, थ, झ, ञ हैं। 108 नक्षत्र चरणों में हर चरण का एक अक्षर है, और नौ चरणों से एक राशि बनती है, इसलिए नाम का पहला अक्षर एक राशि बताता है; इस पेज की 12 राशियों वाली तालिका में ये अक्षर दिए गए हैं। यह केवल विकल्प है: नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र से रखा गया हो।
नाम राशि और जन्म राशि में क्या अंतर है?
13 जनवरी को जन्मे बच्चे की जन्म राशि मीन है, यानी जन्म के समय चंद्रमा की राशि। नाम राशि नाम के पहले अक्षर से आती है; उत्तरा भाद्रपद के अक्षर, जैसे दू, थ, झ, ञ, मीन (चरण 1–4) में आते हैं। दोनों तभी मिलती हैं जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
चंद्र राशि क्या होती है?
13 जनवरी को चंद्रमा सुबह 5:10 बजे तक कुंभ में, फिर शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक मीन में है। जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में होता है, निरयण राशिचक्र (लाहिड़ी अयनांश) में, वही आपकी चंद्र राशि है। चंद्रमा लगभग 27 दिनों में सभी 12 राशियाँ पार करता है, इसलिए यह रोज़ की सबसे निजी राशि है।
जन्मदिन से मैं Aquarius हूँ, क्या मेरी राशि कुंभ है?
13 जनवरी को दोपहर 2:35 बजे सूर्य निरयण राशिचक्र में धनु के 29°09′ पर है और जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में मकर के 23°23′ पर; दोनों राशिचक्रों में लगभग 24° का अंतर है। इसलिए ज़रूरी नहीं: जन्मदिन वाली राशि सूर्य की होती है, जबकि आपकी राशि जन्म के समय चंद्रमा की राशि है, और अधिकतर लोगों की दोनों अलग होती हैं। यह जन्म तिथि, समय और स्थान से तय होता है।
राशि और लग्न में क्या अंतर है?
13 जनवरी को चंद्रमा मीन में है, और अभी जन्मे हर व्यक्ति की राशि यही है। लग्न वह राशि है जो जन्म के समय पूर्व में उदित हो रही थी; यह लगभग हर दो घंटे में बदलता है, इसलिए इसके लिए जन्म समय चाहिए। दैनिक राशिफल राशि से पढ़ा जाता है; आपकी कुंडली दोनों का उपयोग करती है।
12 राशियों के नाम हिंदी और अंग्रेज़ी में क्या हैं?
13 जनवरी को चंद्रमा मीन में है। 12 राशियाँ हैं: मेष (Aries), वृषभ (Taurus), मिथुन (Gemini), कर्क (Cancer), सिंह (Leo), कन्या (Virgo), तुला (Libra), वृश्चिक (Scorpio), धनु (Sagittarius), मकर (Capricorn), कुंभ (Aquarius) और मीन (Pisces)। इस पेज की तालिका में हर राशि का स्वामी, उसके नक्षत्र चरण और नाम अक्षर भी दिए गए हैं।
इस दिन का राशिफल किस आधार पर बनता है?
13 जनवरी को चंद्रमा सुबह 5:10 बजे तक कुंभ में, फिर शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक मीन में है। हर राशि से नौ ग्रहों का भाव गिना जाता है और हर एक को फलदीपिका, बृहत्संहिता और मुहूर्त चिंतामणि के गोचर नियमों से, वेध, उच्च-नीच और अस्त के साथ पढ़ा जाता है। हर फल के नीचे 'क्यों' वाली सूची में हर ग्रह, उसका भाव और उसका श्लोक दिया गया है।
इस दिन चंद्रमा किस राशि में है और कब तक?
13 जनवरी को चंद्रमा सुबह 5:10 बजे तक कुंभ में, फिर शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक मीन में है; चंद्रमा का नक्षत्र सुबह 11:35 बजे तक पूर्वा भाद्रपद, फिर उत्तरा भाद्रपद है। समय America/New_York में हैं।
क्या दिन में राशिफल बदल सकता है?
13 जनवरी को सुबह 5:10 बजे चंद्रमा मीन में जाते हैं, इसलिए दिन हिस्सों में, हर हिस्सा अपने समय के साथ दिखाया गया है। जब भी दिन के बीच चंद्रमा या कोई और ग्रह राशि बदलता है, फल हर हिस्से के लिए बदलाव के ठीक मिनट के साथ दिखाया जाता है।
इस दिन का राशिफल कब अपडेट होता है?
बुधवार, 13 जनवरी 2027 का यह पेज America/New_York में रात 12 बजे से आधी रात तक का है, और आधी रात को अगले दिन का फल आ जाता है। हर दिन केवल ग्रह-स्थिति से बनता है, और कुछ भी हाथ से बदला नहीं जाता।
क्या एक राशि के सभी लोगों का राशिफल एक जैसा होता है?
13 जनवरी को मीन राशि वाले हर व्यक्ति के लिए चंद्रमा पहले भाव में है, इसलिए हाँ: एक दिन में एक राशि वाले सभी लोगों का फल एक ही होता है। निजी फल में आपका नक्षत्र, आपकी दशा और आपका अष्टकवर्ग जुड़ता है; अपनी कुंडली के साथ साइन इन करने पर यह पेज उसे दिखाता है।
क्या राशिफल सही होता है?
13 जनवरी को सुबह 5:10 बजे चंद्रमा कुंभ से मीन में जाता है: यह समय हमारे इंजन से है और इस पेज के हर समय की तरह स्विस एफ़ेमेरिस से जाँचा गया है, इसलिए ग्रह-स्थिति सटीक है। फल चंद्र राशि से दिन का सामान्य रुख़ बताता है, बताए गए शास्त्रीय नियमों से; यह तय घटनाएँ नहीं बताता, और हर पंक्ति अपना आधार बताती है ताकि आप ख़ुद परख सकें।
अलग-अलग वेबसाइटों पर राशिफल अलग क्यों होता है?
13 जनवरी को शनि हमारे निरयण राशिचक्र में मीन में है, पर पश्चिमी साइटों के सायन राशिचक्र में मेष में: यह चार कारणों में से एक है। बाकी हैं सूर्य राशि या चंद्र राशि; राहु की गणना (स्पष्ट गणना से राहु 24 मई 2028, सुबह 5:38 बजे (EDT) तक मकर में है, फिर धनु में जाते हैं; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से यह बदलाव 23 जून 2028 को है); और हाथ से लिखी या गणना से बनी पंक्तियाँ, जबकि हमारी हर पंक्ति केवल ग्रह-स्थिति से बनती है और अपना नियम बताती है।
इस दिन किस राशि का दिन अच्छा है?
13 जनवरी को केवल चंद्रबल से चंद्रमा वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और मीन के लिए सहायक है; मेष, कर्क, वृश्चिक, धनु और कुंभ के लिए धैर्य का समय; और सिंह के लिए चंद्राष्टम, यानी सहज रहने का समय। हर राशि का पूरा फल बाकी ग्रहों को भी गिनता है, और कोई दिन पूरा अच्छा या ख़राब नहीं होता।
कल का दिन कैसा रहेगा?
14 जनवरी को चंद्रमा पूरे दिन मीन में है, शुक्रवार 15 जनवरी, दोपहर 1:21 बजे तक। हर राशि के लिए कल की पंक्ति इस पेज पर है, और पूरा फल 'कल' पर टैप करने से खुलता है।
अभी किस राशि पर साढ़ेसाती चल रही है?
13 जनवरी को शनि मीन में है, इसलिए साढ़ेसाती मेष (पहला चरण), मीन (दूसरा चरण) और कुंभ (तीसरा चरण) पर है। शनि की ढैया सिंह (आठवाँ भाव) और धनु (चौथा भाव) पर है।
मेरी साढ़ेसाती कब उतरेगी?
अभी की साढ़ेसाती: मेष: 29 मार्च 2025 से अंतिम निकास 30 मई 2032 तक; कुंभ: 23 जनवरी 2020 से अंतिम निकास 23 फ़रवरी 2028 तक, बीच में 2 जून से 19 अक्टूबर तक विराम; मीन: 28 अप्रैल 2022 से अंतिम निकास 16 अप्रैल 2030 तक, बीच में 12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2023 तक विराम और 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक विराम। हर एक शनि के अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ; ये तारीख़ें हमारे इंजन से हैं और हमारी कुंडली की साढ़ेसाती से मिलती हैं।
2027 में साढ़ेसाती और ढैया किन राशियों पर?
शनि 2 जून को मेष में जाते हैं। तब से साढ़ेसाती मेष (दूसरा चरण), वृषभ (पहला चरण) और मीन (तीसरा चरण) पर और ढैया कन्या (आठवाँ भाव) और मकर (चौथा भाव) पर है। शनि 19 अक्टूबर को मीन में जाते हैं; शनि 23 फ़रवरी 2028 को मेष में जाते हैं।
साढ़ेसाती क्या है, इसके तीन चरण कौन से हैं?
13 जनवरी को साढ़ेसाती मेष (पहला चरण), मीन (दूसरा चरण) और कुंभ (तीसरा चरण) पर है। यह आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का भ्रमण है, हर भाव में लगभग ढाई वर्ष; इन्हें पहला, दूसरा और तीसरा चरण कहते हैं। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय है, और इस पेज की तारीख़ें बताती हैं कि हर चरण कब शुरू और ख़त्म होता है।
शनि की ढैया क्या है?
13 जनवरी को ढैया सिंह (आठवाँ भाव) और धनु (चौथा भाव) पर है। यह आपकी चंद्र राशि से चौथे या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई वर्ष का ठहराव है, जिसे साढ़ेसाती की तरह ही गिना जाता है।
गोचर क्या होता है?
13 जनवरी को, उदाहरण के लिए, गुरु 24 जनवरी, दोपहर 3:01 बजे तक सिंह में है, फिर कर्क में जाते हैं। गोचर राशियों में ग्रहों का भ्रमण है, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है: शास्त्रीय तालिकाओं के अनुसार हर ग्रह का भाव अनुकूल होता है या धैर्य माँगता है। इस पेज की ग्रह तालिका में नौ ग्रह दिए गए हैं।
गुरु कर्क राशि में कब जाएँगे?
गुरु 24 जनवरी, दोपहर 3:01 बजे तक सिंह में है, फिर कर्क में जाते हैं। समय America/New_York में हैं; इस पेज के आने वाले गोचर में हर राशि के लिए इसका भाव दिया गया है।
दैनिक राशिफल
राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
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