दैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि
मंगलवार, 26 जनवरी 2027 का कन्या राशिफल — Kanya Rashifal
मंगलवार, 26 जनवरी 2027
कन्या राशि के तारे, 26 जनवरी के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा कन्या के 3°03′ पर, उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के चरण 2 में है, तारे υ Leonis से 1.9° दूर।
कन्या राशि को पहला भाव मानकर: 26 जनवरी को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव कन्या राशि से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का कन्या राशि का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
कन्या राशि, 26 जनवरी को: सुबह 6:45 बजे से चंद्रमा आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में है (ध्यान: वेध: आपसे पाँचवें भाव में सूर्य); 9 ग्रहों में से 2 ग्रह साथ, 7 ध्यान माँगते हैं।
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- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
कन्या राशि के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- पूर्वा फाल्गुनी 133°20′ से 146°40′ योगतारा: Zosma (δ Leonis) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- उत्तरा फाल्गुनी 146°40′ से 160°00′ योगतारा: Denebola (β Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- हस्त 160°00′ से 173°20′ योगतारा: Algorab (δ Corvi)। स्रोत: कैलेंडर सुधार समिति 1955 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। बर्जेस और ह्विटनी 1860 में यह γ Corvi है।
- चित्रा 173°20′ से 186°40′ योगतारा: Spica (α Virginis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि · मंगलवार, 26 जनवरी 2027
26 जनवरी का कन्या राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
कन्या राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। कन्या बारह राशियों में छठी राशि है, निरयण राशिचक्र में 150° से 180° तक, और इसके स्वामी बुध हैं; इसमें उत्तरा फाल्गुनी के चरण 2 से 4, हस्त के चारों चरण और चित्रा के चरण 1 और 2 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Virgo कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, कन्या राशि से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
9 ग्रहों में से 2 साथ · 7 ध्यान
26 जनवरी को कन्या राशि के लिए 9 ग्रहों में से 2 ग्रह साथ, 7 ध्यान माँगते हैं। चंद्रमा कन्या में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, गुरुवार 28 जनवरी, दोपहर 12:09 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है।
मंगल सिंह में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 10 मार्च, रात 12:13 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे तीसरे भाव में शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए शास्त्र में इसे सहायक गिना गया है; शास्त्रीय फल: खर्च और सेहत।
- मंगल · कन्या राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- वाम वेध: शुक्र, तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
गुरु कर्क में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 26 जून, सुबह 5:19 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: लाभ और सेहत में सुधार।
- गुरु · कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
चंद्रमा कन्या में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, गुरुवार 28 जनवरी, दोपहर 12:09 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: सुख-सुविधा और अच्छा भोजन।
- चंद्र · कन्या राशि से पहला भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वेध: सूर्य, पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
सूर्य मकर में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, 13 फ़रवरी, सुबह 10:09 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे ग्यारहवें भाव में गुरु होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और सूर्य मकर में है, जिसके स्वामी शनि से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: सेहत और आराम।
- सूर्य · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- वाम वेध: गुरु, ग्यारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
बुध मकर में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, गुरुवार 28 जनवरी, रात 3:34 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: घर में खिंचाव।
- बुध · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शुक्र वृश्चिक में, आपसे तीसरे भाव (पराक्रम और भाई-बहन) में, शुक्रवार 29 जनवरी, शाम 6:42 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पहले भाव में चंद्रमा होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: समृद्धि और प्रतिष्ठा।
- शुक्र · कन्या राशि से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: चंद्र, पहला भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- तीसरा भाव: पराक्रम और भाई-बहन बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शनि मीन में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 3 जून, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: रिश्तों में खिंचाव और थकाने वाली यात्रा।
- शनि · कन्या राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
राहु मकर में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन और मन की उदासी।
- राहु · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
केतु कर्क में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य और बुध होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: प्रतिष्ठा और यश।
- केतु · कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- वेध: सूर्य और बुध, पाँचवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.18
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
26 जनवरी को सुबह 6:45 बजे चंद्रमा कन्या राशि में जाते हैं, इसलिए दिन के दोनों हिस्से दिखाए गए हैं।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
काम और धन: साथ: गुरु और मंगल; ध्यान: शुक्र और केतु।
गुरु कर्क में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 26 जून, सुबह 5:19 बजे तक: शास्त्र में लाभ के लिए अनुकूल।
- गुरु · कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
मंगल सिंह में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 10 मार्च, रात 12:13 बजे तक: शास्त्र में खर्च के लिए अनुकूल नहीं, लेकिन आपसे तीसरे भाव में शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए शास्त्र में इसे सहायक गिना गया है।
- मंगल · कन्या राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- वाम वेध: शुक्र, तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शुक्र वृश्चिक में, आपसे तीसरे भाव (पराक्रम और भाई-बहन) में, शुक्रवार 29 जनवरी, शाम 6:42 बजे तक: शास्त्र में समृद्धि और प्रतिष्ठा के लिए अनुकूल, लेकिन आपसे पहले भाव में चंद्रमा होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है।
- शुक्र · कन्या राशि से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: चंद्र, पहला भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- तीसरा भाव: पराक्रम और भाई-बहन बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
केतु कर्क में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक: शास्त्र में प्रतिष्ठा और यश के लिए अनुकूल, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य और बुध होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है।
- केतु · कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- वेध: सूर्य और बुध, पाँचवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.18
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- प्रेम और परिवार?
प्रेम और परिवार: ध्यान: शनि।
शनि मीन में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 3 जून, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में रिश्तों के लिए अनुकूल नहीं।
- शनि · कन्या राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- सेहत?
सेहत: ध्यान: चंद्रमा।
चंद्रमा कन्या में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, गुरुवार 28 जनवरी, दोपहर 12:09 बजे तक: शास्त्र में सुख-सुविधा और अच्छे भोजन के लिए अनुकूल, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है।
- चंद्र · कन्या राशि से पहला भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वेध: सूर्य, पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
कन्या के लिए 26 जनवरी को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
रविवार 24 जनवरी, सुबह 4:54 बजे से सुबह 6:45 बजे तक: चंद्रमा सिंह में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में; इस भाव से चंद्रबल नहीं।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
सुबह 6:45 बजे से गुरुवार 28 जनवरी, दोपहर 12:09 बजे तक: चंद्रमा कन्या में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में; चंद्रबल है।
सुबह 6:45 बजे तक चंद्रमा सिंह में मंगल के साथ है।
कन्या राशि के लिए अगला चंद्राष्टम: 12 फ़रवरी, सुबह 5:42 बजे से 14 फ़रवरी, सुबह 11:28 बजे तक।
कन्या राशि के नक्षत्रों का ताराबल
उत्तरा फाल्गुनी (चरण 2–4): रात 1:03 बजे तक अतिमित्र तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
उत्तरा फाल्गुनी (चरण 2–4): रात 1:03 बजे से जन्म तारा: नए काम के लिए नहीं ली जाती (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–13)।
हस्त (चरण 1–4): रात 1:03 बजे तक मित्र तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
हस्त (चरण 1–4): रात 1:03 बजे से अतिमित्र तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
चित्रा (चरण 1–2): रात 1:03 बजे तक वध तारा: नौ की तीसरी आवृत्ति में, नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.13); प्रचलित पंचांग सारणी में यह नए काम के लिए नहीं ली जाती।
चित्रा (चरण 1–2): रात 1:03 बजे से मित्र तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
नई दिल्ली में आपके सहायक समय
पंचांग के 4 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:54 बजे तक: अभिजित मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 2:21 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक: विजय मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
शाम 5:12 बजे से शाम 6:44 बजे तक: अमृत काल, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
रात 10:54 बजे से रात 11:14 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 2:13 बजे से सुबह 6:19 बजे तक · सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:54 बजे तक · दोपहर 2:21 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक · शाम 5:12 बजे से शाम 6:44 बजे तक · रात 10:54 बजे से रात 11:14 बजे तक
इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि
कन्या राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
साढ़ेसाती चंद्र राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का गोचर है, लगभग साढ़े सात वर्ष। ढैया चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में शनि का गोचर है, लगभग ढाई वर्ष।
कन्या के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 3 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे सातवें भाव में है। अगली ढैया (आठवाँ भाव) 3 जून 2027 से 17 अप्रैल 2030 तक है।
कन्या राशि पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 3 जून से 17 अप्रैल 2030 तक है, बीच में 20 अक्टूबर से 23 फ़रवरी 2028 तक और 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: कन्या राशि से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · सुबह 6:45 बजे से
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सूर्य मकर में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, 13 फ़रवरी, सुबह 10:09 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे ग्यारहवें भाव में गुरु होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और सूर्य मकर में है, जिसके स्वामी शनि से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: सेहत और आराम।
- सूर्य · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- वाम वेध: गुरु, ग्यारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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चंद्रमा कन्या में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, गुरुवार 28 जनवरी, दोपहर 12:09 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: सुख-सुविधा और अच्छा भोजन।
- चंद्र · कन्या राशि से पहला भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वेध: सूर्य, पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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मंगल सिंह में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 10 मार्च, रात 12:13 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे तीसरे भाव में शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए शास्त्र में इसे सहायक गिना गया है; शास्त्रीय फल: खर्च और सेहत।
- मंगल · कन्या राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- वाम वेध: शुक्र, तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- वक्री (10 जनवरी से 1 अप्रैल तक)
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बुध मकर में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, गुरुवार 28 जनवरी, रात 3:34 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: घर में खिंचाव।
- बुध · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- वक्री होंगे: 9 फ़रवरी, रात 11:06 बजे
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गुरु कर्क में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 26 जून, सुबह 5:19 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: लाभ और सेहत में सुधार।
- गुरु · कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
- वक्री (13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल तक)
-
शुक्र वृश्चिक में, आपसे तीसरे भाव (पराक्रम और भाई-बहन) में, शुक्रवार 29 जनवरी, शाम 6:42 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पहले भाव में चंद्रमा होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: समृद्धि और प्रतिष्ठा।
- शुक्र · कन्या राशि से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: चंद्र, पहला भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- तीसरा भाव: पराक्रम और भाई-बहन बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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शनि मीन में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 3 जून, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: रिश्तों में खिंचाव और थकाने वाली यात्रा।
- शनि · कन्या राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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राहु मकर में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन और मन की उदासी।
- राहु · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 24 जून 2028 तक
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केतु कर्क में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य और बुध होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: प्रतिष्ठा और यश।
- केतु · कन्या राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- वेध: सूर्य और बुध, पाँचवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.18
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 24 जून 2028 तक
दिन का दूसरा हिस्सा: सुबह 6:45 बजे तक
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चंद्रमा सिंह में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, सुबह 6:45 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: खर्च और आराम।
- चंद्र · कन्या राशि से बारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शुक्र वृश्चिक में, आपसे तीसरे भाव (पराक्रम और भाई-बहन) में, शुक्रवार 29 जनवरी, शाम 6:42 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: समृद्धि और प्रतिष्ठा।
- शुक्र · कन्या राशि से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- तीसरा भाव: पराक्रम और भाई-बहन बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
कन्या राशि के लिए 4 धीमे ग्रहों (गुरु, शनि, राहु और केतु) में से 1 साथ, 3 ध्यान माँगते हैं।
दैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में कन्या राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
गुरुवार 28 जनवरी, रात 3:34 बजे: बुध कुंभ राशि में, यानी आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: सफलता और प्रतिष्ठा।
- बुध · कन्या राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
शुक्रवार 29 जनवरी, शाम 6:42 बजे: शुक्र धनु राशि में, यानी आपसे चौथे भाव (माता, घर और सुख) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: मित्र और प्रसन्नता।
- शुक्र · कन्या राशि से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
9 फ़रवरी, रात 11:06 बजे: बुध कुंभ में, आपसे छठे भाव में, वक्री होते हैं।
12 फ़रवरी, दोपहर 1:35 बजे: बुध कुंभ में, आपसे छठे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
13 फ़रवरी, सुबह 10:09 बजे: सूर्य कुंभ राशि में, यानी आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन सूर्य कुंभ में है, जिसके स्वामी शनि से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी।
- सूर्य · कन्या राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
24 फ़रवरी, सुबह 4:40 बजे: बुध मकर राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: घर में खिंचाव।
- बुध · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
24 फ़रवरी, दोपहर 3:16 बजे: शुक्र मकर राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: संतान और प्रसन्नता।
- शुक्र · कन्या राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
24 फ़रवरी, शाम 7:26 बजे: बुध मकर में, आपसे पाँचवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
दैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का कन्या राशिफल, 27 जनवरी
कल (बुधवार, 27 जनवरी): पूरे दिन चंद्रमा कन्या में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में है: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे पाँचवें भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: सुख-सुविधा और अच्छा भोजन।
27 जनवरी का पूरा राशिफल देखेंदैनिक कन्या राशिफल · चंद्र राशि
कन्या राशि के बारे में: स्वामी बुध, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- बुधबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- नाव में बैठी कन्या, एक हाथ में अन्न और दूसरे में अग्नि (दीपक)बृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- द्विस्वभावबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- सम राशि; स्त्रीबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- दक्षिणबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- कमर और कूल्हेबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 150° से 180°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- उत्तरा फाल्गुनी 2–4; हस्त 1–4; चित्रा 1–2बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- टो पा पी पू ष ण ठ पे पोअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- कन्या राशि में बुध उच्च और शुक्र नीच होते हैं; कन्या बुध की मूलत्रिकोण राशि भी है।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
कन्या राशि से जुड़े सवाल
कन्या राशि का स्वामी कौन है?
कन्या राशि के स्वामी बुध 26 जनवरी को मकर में है, कन्या राशि से पाँचवें भाव में, गुरुवार 28 जनवरी, रात 3:34 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में कन्या राशि के स्वामी बुध हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। बुध मिथुन राशि के भी स्वामी हैं।
कन्या राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
26 जनवरी को चंद्रमा कन्या राशि में है, सुबह 6:45 बजे से गुरुवार 28 जनवरी, दोपहर 12:09 बजे तक: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि कन्या होती है। कन्या राशि के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: टो, पा, पी (उत्तरा फाल्गुनी 2–4); पू, ष, ण, ठ (हस्त 1–4); पे, पो (चित्रा 1–2)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि कन्या है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
कन्या राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
26 जनवरी को चंद्रमा कन्या राशि के नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी में है, और शाम 6:17 बजे तक इसके चरण 3 में। कन्या निरयण राशिचक्र में 150° से 180° तक है: उत्तरा फाल्गुनी के चरण 2 से 4, हस्त के चारों चरण और चित्रा के चरण 1 और 2, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि कन्या है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
कन्या राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें सत्यवादी और विद्वान, मृदु और मधुर वाणी वाला, सदाचारी, और सुंदर मुख तथा मनभावन दृष्टि वाला बताया गया है। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.6, सारावली 23.37 और होरासार 29.6 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, कन्या और इसके स्वामी बुध, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
कन्या राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
कन्या राशि पर 26 जनवरी को न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, कन्या राशि से सातवें भाव में। कन्या राशि पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 3 जून से 17 अप्रैल 2030 तक है, बीच में 20 अक्टूबर से 23 फ़रवरी 2028 तक और 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
कन्या राशि का समय कब बदलेगा?
3 जून, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, कन्या राशि से आठवें भाव में; 26 जून, सुबह 5:19 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, कन्या राशि से बारहवें भाव में; 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे राहु धनु में और केतु मिथुन में जाते हैं, कन्या राशि से चौथे और दसवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 24 जून 2028 को)। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव कन्या राशि की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
कन्या राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
26 जनवरी को दोपहर 3:23 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में कुंभ 6°12′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में मकर 11°58′ में। अंग्रेज़ी में कन्या को Virgo कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Virgo है, उसकी राशि कन्या हो, यह ज़रूरी नहीं।
दैनिक राशिफल
बाकी 11 राशियों का राशिफल
- मेष राशिफल
- वृषभ राशिफल
- मिथुन राशिफल
- कर्क राशिफल
- सिंह राशिफल
- तुला राशिफल
- वृश्चिक राशिफल
- धनु राशिफल
- मकर राशिफल
- कुंभ राशिफल
- मीन राशिफल
इस पेज के शब्द
27
- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- चंद्रबल के भीतर पंचांग के समय
- अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त, विजय या लाभ, शुभ या अमृत चौघड़िया, जो राहु काल, यमगंड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य और भद्रा से बाहर हों, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी चंद्र राशि से पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- अमित्र राशि
- ऐसी राशि जिसके स्वामी से ग्रह का नैसर्गिक विरोध है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- साथ देने वाली बातें
- ऐसे ग्रह जिनका भाव शास्त्र में अनुकूल है और जिन्हें कोई रोक नहीं रहा, या जिन्हें वाम वेध से सहायक गिना गया (मुहूर्त चिंतामणि 4.4)।
- ध्यान माँगने वाली बातें
- बाकी हर ग्रह, उस तथ्य के साथ जो उसे यहाँ रखता है: शास्त्र में अनुकूल न गिना गया भाव, वेध, नीच या अमित्र राशि, अस्त, प्रतिकूल भाव में स्वराशि या उच्च राशि, चंद्रमा का साथ, या चंद्राष्टम।
- भाव का अर्थ
- हर भाव किस विषय का है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11): पहला देह और स्वयं, दूसरा परिवार, धन और वाणी, तीसरा पराक्रम और भाई-बहन, चौथा माता, घर और सुख, पाँचवाँ संतान, विद्या और बुद्धि, छठा स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता, सातवाँ विवाह और साझेदारी, आठवाँ शोध और गुप्त विषय, नौवाँ भाग्य, धर्म और पिता, दसवाँ करियर और कर्म, ग्यारहवाँ लाभ और मित्र, बारहवाँ व्यय, विदेश और मोक्ष।
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राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
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