दैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि
बुधवार, 22 जुलाई 2026 का कुंभ राशिफल — Kumbh Rashifal
बुधवार, 22 जुलाई 2026
कुंभ राशि के तारे, 22 जुलाई के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा तुला में है, इस मानचित्र से बाहर; 31 जुलाई, सुबह 6:38 बजे यह फिर कुंभ राशि में आएगा और 2 अगस्त, दोपहर 3:27 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: राहु कुंभ में।
कुंभ राशि को पहला भाव मानकर: 22 जुलाई को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव कुंभ राशि से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का कुंभ राशि का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
कुंभ राशि, 22 जुलाई को: पूरे दिन चंद्रमा आपसे नौवें भाव (भाग्य, धर्म और पिता) में है (ध्यान: भाव अनुकूल नहीं); 9 ग्रहों में से 2 ग्रह साथ, 7 ध्यान माँगते हैं।
नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
कुंभ राशि के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- धनिष्ठा 293°20′ से 306°40′ योगतारा: Rotanev (β Delphini) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और कैलेंडर सुधार समिति 1955। पिंग्री और मॉरिसी 1989 में यह α Delphini है। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
- शतभिषा 306°40′ से 320°00′ योगतारा: λ Aquarii। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- पूर्वा भाद्रपद 320°00′ से 333°20′ योगतारा: Markab (α Pegasi)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- उत्तरा भाद्रपद 333°20′ से 346°40′ योगतारा: Algenib (γ Pegasi) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: कैलेंडर सुधार समिति 1955 और बर्जेस और ह्विटनी 1860। पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807 में यह α Andromedae है। यहाँ स्रोत अलग हैं। 1955 की कैलेंडर सुधार समिति, जिसका लाहिड़ी अयनांश यह साइट उपयोग करती है, का दिया तारा चिह्नित है; दूसरा पाठ साथ में दिया गया है।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि · बुधवार, 22 जुलाई 2026
22 जुलाई का कुंभ राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
कुंभ राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। कुंभ बारह राशियों में ग्यारहवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 300° से 330° तक, और इसके स्वामी शनि हैं; इसमें धनिष्ठा के चरण 3 और 4, शतभिषा के चारों चरण और पूर्वा भाद्रपद के चरण 1 से 3 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Aquarius कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, कुंभ राशि से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
9 ग्रहों में से 2 साथ · 7 ध्यान
22 जुलाई को कुंभ राशि के लिए 9 ग्रहों में से 2 ग्रह साथ, 7 ध्यान माँगते हैं। चंद्रमा तुला में, आपसे नौवें भाव (भाग्य, धर्म और पिता) में, गुरुवार 23 जुलाई, शाम 7:01 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
सूर्य कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 17 अगस्त, सुबह 7:59 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी।
- सूर्य · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
बुध मिथुन में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, 5 अगस्त, शाम 7:54 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में शनि होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए शास्त्र में इसे सहायक गिना गया है; शास्त्रीय फल: घर में खिंचाव।
- बुध · कुंभ राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वाम वेध: शनि, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
चंद्रमा तुला में, आपसे नौवें भाव (भाग्य, धर्म और पिता) में, गुरुवार 23 जुलाई, शाम 7:01 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: मन की थकान और दफ़्तरी काम।
- चंद्र · कुंभ राशि से नौवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- नौवाँ भाव: भाग्य, धर्म और पिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
मंगल वृषभ में, आपसे चौथे भाव (माता, घर और सुख) में, 2 अगस्त, रात 10:51 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: सेहत और दिनचर्या।
- मंगल · कुंभ राशि से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- चौथा भाव: माता, घर और सुख बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
गुरु कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; शास्त्रीय फल: बेचैनी।
- गुरु · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शुक्र सिंह में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 1 अगस्त, सुबह 9:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में शनि होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: रिश्तों में खिंचाव।
- शुक्र · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वाम वेध: शनि, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शनि मीन में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन के मामले।
- शनि · कुंभ राशि से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
राहु कुंभ में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: तनाव।
- राहु · कुंभ राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
केतु सिंह में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
- केतु · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
काम और धन: साथ: सूर्य; ध्यान: गुरु और शनि।
सूर्य कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 17 अगस्त, सुबह 7:59 बजे तक: शास्त्र में प्रतिस्पर्धा में बढ़त के लिए अनुकूल।
- सूर्य · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
गुरु कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; काम और धन के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- गुरु · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शनि मीन में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में धन के लिए अनुकूल नहीं।
- शनि · कुंभ राशि से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- प्रेम और परिवार?
प्रेम और परिवार: ध्यान: शुक्र, केतु, मंगल और शनि।
शुक्र सिंह में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 1 अगस्त, सुबह 9:28 बजे तक: शास्त्र में रिश्तों के लिए अनुकूल नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में शनि होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शुक्र · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वाम वेध: शनि, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
केतु सिंह में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- केतु · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
मंगल वृषभ में, आपसे चौथे भाव (माता, घर और सुख) में, 2 अगस्त, रात 10:51 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- मंगल · कुंभ राशि से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- चौथा भाव: माता, घर और सुख बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शनि मीन में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- शनि · कुंभ राशि से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- सेहत?
सेहत: साथ: सूर्य; ध्यान: राहु और गुरु।
सूर्य कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 17 अगस्त, सुबह 7:59 बजे तक: शास्त्र में सेहत में सुधार और चिंताओं में कमी के लिए अनुकूल।
- सूर्य · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
राहु कुंभ में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे तक: शास्त्र में ऊर्जा के लिए अनुकूल नहीं।
- राहु · कुंभ राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
गुरु कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे तक: शास्त्र में मन की शांति के लिए अनुकूल नहीं, लेकिन गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी।
- गुरु · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
कुंभ के लिए 22 जुलाई को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
पूरे दिन (गुरुवार 23 जुलाई, शाम 7:01 बजे तक): चंद्रमा तुला में, आपसे नौवें भाव (भाग्य, धर्म और पिता) में; इस भाव से चंद्रबल नहीं।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
पूरे दिन: चंद्रमा तुला में, आपसे नौवें भाव में, शुक्ल पक्ष में; शास्त्र में शुक्ल पक्ष का चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना गया है।
- शुक्ल पक्ष का चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 13.2
कुंभ राशि के लिए अगला चंद्राष्टम: 15 अगस्त, सुबह 9:35 बजे से 17 अगस्त, शाम 4:20 बजे तक।
कुंभ राशि के नक्षत्रों का ताराबल
धनिष्ठा (चरण 3–4): रात 11:04 बजे तक संपत तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
धनिष्ठा (चरण 3–4): रात 11:04 बजे से विपत तारा: नौ की तीसरी आवृत्ति में, नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.13); प्रचलित पंचांग सारणी में यह नए काम के लिए नहीं ली जाती।
शतभिषा (चरण 1–4): रात 11:04 बजे तक जन्म तारा: जन्म नक्षत्र की तारा, नौ की तीसरी आवृत्ति में: ली जाती है, पर अनुकूल श्रेणी में नहीं (मुहूर्त चिंतामणि 4.13); प्रचलित पंचांग सारणी में यह नए काम के लिए नहीं ली जाती।
शतभिषा (चरण 1–4): रात 11:04 बजे से संपत तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
पूर्वा भाद्रपद (चरण 1–3): रात 11:04 बजे तक अतिमित्र तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
पूर्वा भाद्रपद (चरण 1–3): रात 11:04 बजे से जन्म तारा: जन्म नक्षत्र की तारा, नौ की तीसरी आवृत्ति में: ली जाती है, पर अनुकूल श्रेणी में नहीं (मुहूर्त चिंतामणि 4.13); प्रचलित पंचांग सारणी में यह नए काम के लिए नहीं ली जाती।
नई दिल्ली में आपके सहायक समय
पंचांग के 7 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
रात 12:07 बजे से रात 1:45 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 4:42 बजे से सुबह 4:56 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 5:37 बजे से सुबह 7:20 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 2:10 बजे से दोपहर 3:39 बजे तक: अमृत काल और विजय मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
शाम 5:35 बजे से शाम 7:18 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
रात 8:36 बजे से रात 11:10 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 12:07 बजे से रात 1:45 बजे तक · सुबह 4:42 बजे से सुबह 4:56 बजे तक · सुबह 5:37 बजे से सुबह 7:20 बजे तक · सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक · दोपहर 2:10 बजे से दोपहर 3:39 बजे तक · शाम 5:35 बजे से शाम 7:18 बजे तक · रात 8:36 बजे से रात 11:10 बजे तक
इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि
कुंभ राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
साढ़ेसाती चंद्र राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का गोचर है, लगभग साढ़े सात वर्ष। ढैया चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में शनि का गोचर है, लगभग ढाई वर्ष।
कुंभ के लिए साढ़ेसाती का तीसरा चरण: शनि मीन में, यानी आपसे दूसरे भाव में, 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक हैं। पूरी साढ़ेसाती 24 जनवरी 2020 से 23 फ़रवरी 2028 तक है, बीच में 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक विराम के साथ। परंपरा में यह समय निरंतर प्रयास, अनुशासन और सेहत की देखभाल का फल देता है।
- साढ़ेसाती फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
इस ठहराव में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव मीन के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 2 जुलाई 2026 से 20 अगस्त 2026 तक और 11 मार्च 2027 से 3 जून 2027 तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
शनि नौ ग्रहों में से एक है: आपसे दूसरे भाव के शनि का फल और बाकी आठ ग्रह नीचे की तालिका में हैं।
कुंभ राशि पर अगली ढैया (शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: कुंभ राशि से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन
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सूर्य कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 17 अगस्त, सुबह 7:59 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव; शास्त्रीय फल: सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी।
- सूर्य · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
चंद्रमा तुला में, आपसे नौवें भाव (भाग्य, धर्म और पिता) में, गुरुवार 23 जुलाई, शाम 7:01 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: मन की थकान और दफ़्तरी काम।
- चंद्र · कुंभ राशि से नौवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- नौवाँ भाव: भाग्य, धर्म और पिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
मंगल वृषभ में, आपसे चौथे भाव (माता, घर और सुख) में, 2 अगस्त, रात 10:51 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: सेहत और दिनचर्या।
- मंगल · कुंभ राशि से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- चौथा भाव: माता, घर और सुख बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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बुध मिथुन में, आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में, 5 अगस्त, शाम 7:54 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में शनि होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए शास्त्र में इसे सहायक गिना गया है; शास्त्रीय फल: घर में खिंचाव।
- बुध · कुंभ राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वाम वेध: शनि, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- पाँचवाँ भाव: संतान, विद्या और बुद्धि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- स्वराशि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
- वक्री (29 जून, रात 11:05 बजे से शुक्रवार 24 जुलाई, सुबह 4:29 बजे तक)
- मार्गी होंगे: शुक्रवार 24 जुलाई, सुबह 4:29 बजे
-
गुरु कर्क में, आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में, 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; शास्त्रीय फल: बेचैनी।
- गुरु · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- छठा भाव: स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
शुक्र सिंह में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 1 अगस्त, सुबह 9:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में शनि होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: रिश्तों में खिंचाव।
- शुक्र · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वाम वेध: शनि, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
शनि मीन में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन के मामले।
- शनि · कुंभ राशि से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- वक्री होंगे: 27 जुलाई
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
राहु कुंभ में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: तनाव।
- राहु · कुंभ राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
-
केतु सिंह में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
- केतु · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
कुंभ राशि के लिए 4 धीमे ग्रहों (गुरु, शनि, राहु और केतु) में से 0 साथ, 4 ध्यान माँगते हैं।
दैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में कुंभ राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
शुक्रवार 24 जुलाई, सुबह 4:29 बजे: बुध मिथुन में, आपसे पाँचवें भाव में, मार्गी होते हैं।
27 जुलाई: शनि मीन में, आपसे दूसरे भाव में, वक्री होते हैं।
1 अगस्त, सुबह 9:28 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे आठवें भाव (शोध और गुप्त विषय) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: धन और सुख-सुविधाएँ।
- शुक्र · कुंभ राशि से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
2 अगस्त, रात 10:51 बजे: मंगल मिथुन राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव (संतान, विद्या और बुद्धि) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: संतान की ज़रूरतें और सेहत।
- मंगल · कुंभ राशि से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
5 अगस्त, शाम 7:54 बजे: बुध कर्क राशि में, यानी आपसे छठे भाव (स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन बुध कर्क में है, जिसके स्वामी चंद्रमा से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: सफलता और प्रतिष्ठा।
- बुध · कुंभ राशि से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
10 अगस्त, सुबह 7:53 बजे: गुरु कर्क में, आपसे छठे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
14 अगस्त, रात 1:28 बजे: बुध कर्क में, आपसे छठे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
17 अगस्त, सुबह 7:59 बजे: सूर्य सिंह राशि में, यानी आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन सिंह इसकी स्वराशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता; शास्त्रीय फल: थकाने वाली यात्रा और प्रतिष्ठा में कमी।
- सूर्य · कुंभ राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- स्वराशि: नरम फलदीपिका 26.31 · कालप्रकाशिका 36.12
दैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का कुंभ राशिफल, 23 जुलाई
कल (गुरुवार, 23 जुलाई): शाम 7:01 बजे तक चंद्रमा तुला में, आपसे नौवें भाव (भाग्य, धर्म और पिता) में है: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: मन की थकान और दफ़्तरी काम।
23 जुलाई का पूरा राशिफल देखेंदैनिक कुंभ राशिफल · चंद्र राशि
कुंभ राशि के बारे में: स्वामी शनि, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- शनिबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- घड़ा लिए हुए पुरुषबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- स्थिरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- पश्चिमबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- पिंडलियाँबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 300° से 330°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- धनिष्ठा 3–4; शतभिषा 1–4; पूर्वा भाद्रपद 1–3बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- गू गे गो सा सी सू से सो दाअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- कुंभ शनि की मूलत्रिकोण राशि है; इसमें कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
- स्वामी: हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में शनि हैं। कुछ आधुनिक लेखक राहु को कुंभ राशि का सह-स्वामी कहते हैं; हमारे पढ़े किसी ग्रंथ में यह नहीं है, इसलिए यहाँ इसका उपयोग नहीं है।
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
कुंभ राशि से जुड़े सवाल
कुंभ राशि का स्वामी कौन है?
कुंभ राशि के स्वामी शनि 22 जुलाई को मीन में है, कुंभ राशि से दूसरे भाव में, 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में कुंभ राशि के स्वामी शनि हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। शनि मकर राशि के भी स्वामी हैं।
कुंभ राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
22 जुलाई को चंद्रमा तुला में है; 31 जुलाई, सुबह 6:38 बजे यह फिर कुंभ राशि में आएगा और 2 अगस्त, दोपहर 3:27 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि कुंभ होती है। कुंभ राशि के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: गू, गे (धनिष्ठा 3–4); गो, सा, सी, सू (शतभिषा 1–4); से, सो, दा (पूर्वा भाद्रपद 1–3)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि कुंभ है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
कुंभ राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
22 जुलाई को चंद्रमा स्वाति में है; 31 जुलाई, सुबह 6:38 बजे यह कुंभ राशि के पहले चरण, धनिष्ठा चरण 3, में पहुँचेगा। कुंभ निरयण राशिचक्र में 300° से 330° तक है: धनिष्ठा के चरण 3 और 4, शतभिषा के चारों चरण और पूर्वा भाद्रपद के चरण 1 से 3, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि कुंभ है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
कुंभ राशि के लोग कैसे होते हैं?
ग्रंथ मुख्य रूप से शरीर पर सहमत हैं: लंबा, मज़बूत शरीर, चौड़े कूल्हे और मज़बूत पैर। इनमें से दो ग्रंथ यात्रा की रुचि और लंबी यात्राएँ करने का धीरज भी बताते हैं। स्वभाव पर वे अलग-अलग बातें कहते हैं, इसलिए यहाँ केवल यही साझा बातें दी गई हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.11, सारावली 23.72 और होरासार 29.11 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, कुंभ और इसके स्वामी शनि, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
कुंभ राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
कुंभ राशि पर 22 जुलाई को साढ़ेसाती चल रही है, इसका तीसरा और अंतिम चरण: शनि मीन में है, कुंभ राशि से दूसरे भाव में। यह 24 जनवरी 2020 को शुरू हुई और शनि के अंतिम निकास के साथ 23 फ़रवरी 2028 को पूरी होती है, बीच में 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। कुंभ राशि पर अगली ढैया (शनि चौथे भाव में) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
कुंभ राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, कुंभ राशि से सातवें भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, कुंभ राशि से बारहवें और छठे भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, कुंभ राशि से तीसरे भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव कुंभ राशि की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
कुंभ राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
22 जुलाई को दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में कर्क 29°29′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में कर्क 5°16′ में। अंग्रेज़ी में कुंभ को Aquarius कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Aquarius है, उसकी राशि कुंभ हो, यह ज़रूरी नहीं।
दैनिक राशिफल
बाकी 11 राशियों का राशिफल
- मेष राशिफल
- वृषभ राशिफल
- मिथुन राशिफल
- कर्क राशिफल
- सिंह राशिफल
- कन्या राशिफल
- तुला राशिफल
- वृश्चिक राशिफल
- धनु राशिफल
- मकर राशिफल
- मीन राशिफल
इस पेज के शब्द
31
- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- ध्यान: दोनों तथ्य
- स्वराशि या उच्च राशि के साथ सूर्य के निकट (अस्त): कोई ग्रंथ एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखता, इसलिए दोनों तथ्य दिखाए गए हैं; या अनुकूल चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु (मुहूर्त चिंतामणि 4.7)।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- शुक्ल पक्ष
- अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- साढ़ेसाती
- आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का भ्रमण; नाम बाद की परंपरा का है, भाव फलदीपिका 26.22–23 में हैं।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- चंद्रबल के भीतर पंचांग के समय
- अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त, विजय या लाभ, शुभ या अमृत चौघड़िया, जो राहु काल, यमगंड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य और भद्रा से बाहर हों, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी चंद्र राशि से पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- स्वराशि
- वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- अमित्र राशि
- ऐसी राशि जिसके स्वामी से ग्रह का नैसर्गिक विरोध है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- साथ देने वाली बातें
- ऐसे ग्रह जिनका भाव शास्त्र में अनुकूल है और जिन्हें कोई रोक नहीं रहा, या जिन्हें वाम वेध से सहायक गिना गया (मुहूर्त चिंतामणि 4.4)।
- ध्यान माँगने वाली बातें
- बाकी हर ग्रह, उस तथ्य के साथ जो उसे यहाँ रखता है: शास्त्र में अनुकूल न गिना गया भाव, वेध, नीच या अमित्र राशि, अस्त, प्रतिकूल भाव में स्वराशि या उच्च राशि, चंद्रमा का साथ, या चंद्राष्टम।
- भाव का अर्थ
- हर भाव किस विषय का है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11): पहला देह और स्वयं, दूसरा परिवार, धन और वाणी, तीसरा पराक्रम और भाई-बहन, चौथा माता, घर और सुख, पाँचवाँ संतान, विद्या और बुद्धि, छठा स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता, सातवाँ विवाह और साझेदारी, आठवाँ शोध और गुप्त विषय, नौवाँ भाग्य, धर्म और पिता, दसवाँ करियर और कर्म, ग्यारहवाँ लाभ और मित्र, बारहवाँ व्यय, विदेश और मोक्ष।
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राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
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