दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि
शनिवार, 21 नवंबर 2026 का तुला राशिफल — Tula Rashifal
शनिवार, 21 नवंबर 2026
तुला राशि के तारे, 21 नवंबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा मीन में है, इस मानचित्र से बाहर; 4 दिसंबर, दोपहर 12:33 बजे यह फिर तुला में आएगा और 6 दिसंबर, रात 10:44 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: बुध तुला में और शुक्र कन्या में।
तुला को पहला भाव मानकर: 21 नवंबर को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव तुला से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का तुला का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
तुला, 21 नवंबर को: शाम 7:25 बजे तक चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक है, पर शुक्र के वेध से रुका हुआ है।
Columbus · America/New_York · ·
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
तुला के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- चित्रा 173°20′ से 186°40′ योगतारा: Spica (α Virginis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- स्वाति 186°40′ से 200°00′ योगतारा: Arcturus (α Boötis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
- विशाखा 200°00′ से 213°20′ योगतारा: ι¹ Librae। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कैलेंडर सुधार समिति 1955 और कोलब्रुक 1807 में यह α² Librae है। स्रोत दो-दो में बँटे हैं; सूर्य सिद्धांत की बताई स्थिति के निकट का तारा लिया गया है।
- अनुराधा 213°20′ से 226°40′ योगतारा: Dschubba (δ Scorpii) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि · शनिवार, 21 नवंबर 2026
21 नवंबर का तुला राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
तुला राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। तुला बारह राशियों में सातवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 180° से 210° तक, और इसके स्वामी शुक्र हैं; इसमें चित्रा के चरण 3 और 4, स्वाति के चारों चरण और विशाखा के चरण 1 से 3 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Libra कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, तुला से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
मिला-जुला?
शनिवार, 21 नवंबर: गुरुवार 19 नवंबर, दोपहर 2:20 बजे से शाम 7:25 बजे तक चंद्रमा मीन में है, जो तुला से छठी राशि है। शास्त्र में छठे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त), लेकिन आपसे बारहवें भाव में शुक्र होने से वेध बनता है, इसलिए 21 नवंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- चंद्र · तुला से छठा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वेध: शुक्र, बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
मिला-जुला। हमारी गिनती में 21 नवंबर को तुला के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 4, मिले-जुले 2 और धैर्य माँगने वाले 3; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।
21 नवंबर को शाम 7:25 बजे चंद्रमा मेष राशि में जाते हैं, इसलिए दिन के दोनों हिस्से दिखाए गए हैं।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
शास्त्र में छठे भाव के शनि को हर ओर सहजता के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दूसरे भाव का सूर्य धन पर ध्यान माँगता है: खर्च पर नज़र रखें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- शनि · तुला से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- सूर्य · तुला से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- प्रेम और परिवार?
आपसे दूसरे भाव में सूर्य धैर्य माँगता है; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- सेहत?
शास्त्र में छठे भाव के शनि को हर ओर सहजता के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि छठे भाव के चंद्रमा को अच्छी सेहत के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन आपसे बारहवें भाव में शुक्र होने से वेध बनता है, इसलिए 21 नवंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- शनि · तुला से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- चंद्र · तुला से छठा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- वेध: शुक्र, बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
तुला के लिए 21 नवंबर को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
गुरुवार 19 नवंबर, दोपहर 2:20 बजे से शाम 7:25 बजे तक: चंद्रमा मीन में, आपसे छठे भाव में; सहायक।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
शाम 7:25 बजे से सोमवार 23 नवंबर, रात 8:55 बजे तक: चंद्रमा मेष में, आपसे सातवें भाव में; सहायक।
शाम 7:25 बजे तक चंद्रमा मीन में शनि के साथ है।
तुला के लिए अगला चंद्राष्टम: सोमवार 23 नवंबर, रात 8:55 बजे से बुधवार 25 नवंबर, रात 8:41 बजे तक।
तुला राशि के नक्षत्रों का ताराबल
चित्रा (चरण 3–4): शाम 7:25 बजे तक प्रत्यरि तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
चित्रा (चरण 3–4): शाम 7:25 बजे से साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।
स्वाति (चरण 1–4): शाम 7:25 बजे तक क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।
स्वाति (चरण 1–4): शाम 7:25 बजे से प्रत्यरि तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
विशाखा (चरण 1–3): शाम 7:25 बजे तक विपत तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
विशाखा (चरण 1–3): शाम 7:25 बजे से क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।
Columbus में आपके सहायक समय
पंचांग के 7 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
रात 12:18 बजे से रात 3:51 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 5:30 बजे से सुबह 6:27 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 9:25 बजे से सुबह 9:51 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक: अभिजित मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 2:45 बजे से दोपहर 3:58 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
शाम 5:07 बजे से शाम 6:39 बजे तक: अमृत काल, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
रात 8:45 बजे से रविवार 22 नवंबर, रात 12:00 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
Columbus में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 12:18 बजे से रात 3:51 बजे तक · सुबह 5:30 बजे से सुबह 6:27 बजे तक · सुबह 9:25 बजे से सुबह 9:51 बजे तक · सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक · दोपहर 2:45 बजे से दोपहर 3:58 बजे तक · शाम 5:07 बजे से शाम 6:39 बजे तक · रात 8:45 बजे से रविवार 22 नवंबर, रात 12:00 बजे तक
इस पेज का हर समय America/New_York में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय Columbus के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि
तुला राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
तुला के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 2 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे छठे भाव में है। अगली ढैया (आठवाँ भाव) 8 अगस्त 2029 से 30 मई 2032 तक है।
तुला पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 30 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: तुला से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · शाम 7:25 बजे तक
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शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (धन और रोज़मर्रा की सुविधाएँ): खर्च पर नज़र रखें।
- सूर्य · तुला से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र में छठे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त), लेकिन आपसे बारहवें भाव में शुक्र होने से वेध बनता है, इसलिए 21 नवंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- चंद्र · तुला से छठा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वेध: शुक्र, बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र में ग्यारहवें भाव के मंगल को सहायक माना गया है (लाभ, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत)।
- मंगल · तुला से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र के अनुसार पहले भाव का बुध धैर्य माँगता है (धन और सलाह): किसी सलाह पर अमल से पहले उसे परखें और खर्च पर नज़र रखें।
- बुध · तुला से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
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शास्त्र में ग्यारहवें भाव के गुरु को सहायक माना गया है (लाभ और सेहत में सुधार)।
- गुरु · तुला से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वक्री होंगे: 12 दिसंबर
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शास्त्र में बारहवें भाव के शुक्र को अनुकूल माना गया है, लेकिन आपसे छठे भाव में चंद्रमा और शनि होने से वेध बनता है, और शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए 21 नवंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- शुक्र · तुला से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- वेध: चंद्र और शनि, छठा भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
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शास्त्र में छठे भाव के शनि को सहायक माना गया है (हर ओर सहजता)।
- शनि · तुला से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (26 जुलाई से 10 दिसंबर तक)
- मार्गी होंगे: 10 दिसंबर
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शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (धन और मन की उदासी): खर्च पर नज़र रखें और मन को आराम दें।
- राहु · तुला से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
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शास्त्र में ग्यारहवें भाव के केतु को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा और यश)।
- केतु · तुला से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
दिन का दूसरा हिस्सा: शाम 7:25 बजे से
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शास्त्र में सातवें भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (सुख, धन और सम्मान), लेकिन आपसे दूसरे भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए 21 नवंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- चंद्र · तुला से सातवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वेध: सूर्य, दूसरा भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
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शास्त्र में बारहवें भाव के शुक्र को अनुकूल माना गया है, लेकिन आपसे छठे भाव में शनि होने से वेध बनता है, और शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए 21 नवंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- शुक्र · तुला से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- वेध: शनि, छठा भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
तुला के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 3, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 1।
दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में तुला राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
रविवार 22 नवंबर, सुबह 6:51 बजे: शुक्र तुला राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में पहले भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (सुख-सुविधाएँ और आनंद)।
- शुक्र · तुला से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
बुधवार 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे: राहु मकर राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (मध्यम राहु-केतु की गणना से: 5 दिसंबर)। शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का राहु धैर्य माँगता है (बेचैनी): घर की दिनचर्या शांत रखें।
- राहु · तुला से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
बुधवार 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे: केतु कर्क राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (मध्यम राहु-केतु की गणना से: 5 दिसंबर)। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव में केतु होने से यह धैर्य का समय है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
- केतु · तुला से दसवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10 · ज्योतिर्निबंध पृ. 51, 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- ग्रंथों में मतभेद: अधिकतर में धैर्य, फलदीपिका 26.2 में अनुकूल फलदीपिका 26.2, 26.24 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10 · ज्योतिर्निबंध पृ. 51, 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
2 दिसंबर, सुबह 6:58 बजे: बुध वृश्चिक राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में दूसरे भाव के बुध को सहायक माना गया है (धन)।
- बुध · तुला से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
6 दिसंबर, दोपहर 2:25 बजे: बुध वृश्चिक में, आपसे दूसरे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
10 दिसंबर: शनि मीन में, आपसे छठे भाव में, मार्गी होते हैं।
12 दिसंबर: गुरु सिंह में, आपसे ग्यारहवें भाव में, वक्री होते हैं।
15 दिसंबर, रात 11:55 बजे: सूर्य धनु राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में तीसरे भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त)।
- सूर्य · तुला से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का तुला राशिफल, 22 नवंबर
कल (रविवार, 22 नवंबर): पूरे दिन चंद्रमा आपसे सातवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक है, पर सूर्य के वेध से रुका हुआ है; सुबह 6:51 बजे शुक्र तुला राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं।
22 नवंबर का पूरा राशिफल देखेंदैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि
तुला राशि के बारे में: स्वामी शुक्र, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- शुक्रबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- तराजू लिए हुए पुरुषबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- चरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- पश्चिमबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- नाभि के नीचे का भाग (बस्ति)बृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 180° से 210°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- चित्रा 3–4; स्वाति 1–4; विशाखा 1–3बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- रा री रू रे रो ता ती तू तेअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- तुला में शनि उच्च और सूर्य नीच होते हैं; तुला शुक्र की मूलत्रिकोण राशि भी है।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
तुला राशि से जुड़े सवाल
तुला राशि का स्वामी कौन है?
तुला के स्वामी शुक्र 21 नवंबर को कन्या में है, तुला से बारहवें भाव में, रविवार 22 नवंबर, सुबह 6:51 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में तुला के स्वामी शुक्र हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। शुक्र वृषभ के भी स्वामी हैं।
तुला राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
21 नवंबर को चंद्रमा मीन में है; 4 दिसंबर, दोपहर 12:33 बजे यह फिर तुला में आएगा और 6 दिसंबर, रात 10:44 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि तुला होती है। तुला के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: रा, री (चित्रा 3–4); रू, रे, रो, ता (स्वाति 1–4); ती, तू, ते (विशाखा 1–3)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि तुला है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
तुला राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
21 नवंबर को चंद्रमा रेवती में है; 4 दिसंबर, दोपहर 12:33 बजे यह तुला के पहले चरण, चित्रा चरण 3, में पहुँचेगा। तुला निरयण राशिचक्र में 180° से 210° तक है: चित्रा के चरण 3 और 4, स्वाति के चारों चरण और विशाखा के चरण 1 से 3, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि तुला है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
तुला राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें देवताओं और विद्वानों का आदर करने वाला, व्यापार और अपने काम में कुशल, समझदार, और अपने संबंधियों की सहायता करने वाला बताया गया है; ग्रंथ उन्हें दुबले शरीर और उठी हुई नाक वाला बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.7, सारावली 23.44 और होरासार 29.7 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, तुला और इसके स्वामी शुक्र, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
तुला राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
तुला पर 21 नवंबर को न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, तुला से छठे भाव में। तुला पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 30 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
तुला राशि का समय कब बदलेगा?
बुधवार 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, तुला से चौथे और दसवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 24 जनवरी 2027, दोपहर 3:01 बजे गुरु कर्क में जाते हैं, तुला से दसवें भाव में; 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे (EDT) शनि मेष में जाते हैं, तुला से सातवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव तुला की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
तुला राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
21 नवंबर को सुबह 9:43 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में वृश्चिक 29°18′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में वृश्चिक 5°04′ में। अंग्रेज़ी में तुला को Libra कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Libra है, उसकी राशि तुला हो, यह ज़रूरी नहीं।
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इस पेज के शब्द
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- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- वेध से रुका
- अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- मिला-जुला
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा वेध से रुका, मंद या नरम हो, या उसकी राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- ग्रंथों में मतभेद
- शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
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