चंद्रमा 87% प्रकाशित, शुक्ल पक्ष। पंचांग शैली का आकार; आपके आकाश में इसका झुकाव अलग होता है। अभी: शुक्ल द्वादशी · दोपहर 2:36 IST तक अभी की तिथि (दृक् पद्धति): सूर्य से चंद्रमा का कोण, 12° के खंडों में, पृथ्वी के केंद्र से; इसी क्षण के लिए NASA JPL डेटा से गणना।
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राशिफल

दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि

रविवार, 20 सितंबर 2026 का तुला राशिफल — Tula Rashifal

रविवार, 20 सितंबर 2026

तुला राशि के तारे, 20 सितंबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ

कन्यातुलावृश्चिकचित्रास्वातिविशाखाक्रांतिवृत्तपूर्वपश्चिमचित्रा: Spicaस्वाति: Arcturusविशाखा: ι¹ Libraeशुक्र

दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा धनु में है, इस मानचित्र से बाहर; 11 अक्टूबर, सुबह 10:04 बजे यह फिर तुला में आएगा और 13 अक्टूबर, शाम 7:13 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: शुक्र तुला में।

तुला को पहला भाव मानकर: 20 सितंबर को नौ ग्रह कहाँ हैं

7शु 11°89चं 18°1011रा 5°12श 18°व1234मं 1°गु 23°5के 5°6सू 3°बु 21°

हर भाव तुला से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का तुला का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।

तुला, 20 सितंबर को: पूरे दिन चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में है, जिसे शास्त्र में सहायक माना गया है।

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें

  • चंद्रमा
  • ग्रह
  • राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
  • योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
  • तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
  • क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
  • राशि की सीमा
  • नक्षत्र की सीमा
  • अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं

तुला के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।

इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे

  • चित्रा 173°20′ से 186°40′ योगतारा: Spica (α Virginis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
  • स्वाति 186°40′ से 200°00′ योगतारा: Arcturus (α Boötis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
  • विशाखा 200°00′ से 213°20′ योगतारा: ι¹ Librae। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कैलेंडर सुधार समिति 1955 और कोलब्रुक 1807 में यह α² Librae है। स्रोत दो-दो में बँटे हैं; सूर्य सिद्धांत की बताई स्थिति के निकट का तारा लिया गया है।
  • अनुराधा 213°20′ से 226°40′ योगतारा: Dschubba (δ Scorpii) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।

तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।

तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।

दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि · रविवार, 20 सितंबर 2026

20 सितंबर का तुला राशिफल: काम, प्रेम और सेहत

तुला राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। तुला बारह राशियों में सातवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 180° से 210° तक, और इसके स्वामी शुक्र हैं; इसमें चित्रा के चरण 3 और 4, स्वाति के चारों चरण और विशाखा के चरण 1 से 3 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Libra कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, तुला से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।

सहायक?

रविवार, 20 सितंबर: पूरे दिन (सोमवार 21 सितंबर, सुबह 11:15 बजे तक) चंद्रमा धनु में है, जो तुला से तीसरी राशि है। शास्त्र में तीसरे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (लाभ)।

सहायक। हमारी गिनती में 20 सितंबर को तुला के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 4, मिले-जुले 2 और धैर्य माँगने वाले 3; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।

कल से कोई बदलाव नहीं: चंद्रमा शुक्रवार 18 सितंबर, रात 10:45 बजे से धनु में, यानी आपसे तीसरे भाव में है, और कल या 20 सितंबर को किसी ग्रह की राशि, चाल या अस्त-उदय की स्थिति नहीं बदली।

काम, प्रेम और सेहत

काम और धन?

शास्त्र में तीसरे भाव के चंद्रमा को लाभ के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दसवें भाव का गुरु काम और धन पर ध्यान माँगता है, लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए इसे नरम गिना गया है। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।

प्रेम और परिवार?

20 सितंबर को आपसे सातवें, चौथे या दूसरे भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए प्रेम और परिवार के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

सेहत?

शास्त्र में छठे भाव के शनि को हर ओर सहजता के लिए अनुकूल माना गया है।

तुला के लिए 20 सितंबर को चंद्रबल और ताराबल

चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल

पूरे दिन (सोमवार 21 सितंबर, सुबह 11:15 बजे तक): चंद्रमा धनु में, आपसे तीसरे भाव में; सहायक।

  • चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4

तुला के लिए अगला चंद्राष्टम: 30 सितंबर, दोपहर 1:14 बजे से 2 अक्टूबर, दोपहर 3:41 बजे तक।

तुला राशि के नक्षत्रों का ताराबल

चित्रा (चरण 3–4): रात 1:43 बजे तक साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।

चित्रा (चरण 3–4): रात 1:43 बजे से वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

स्वाति (चरण 1–4): रात 1:43 बजे तक प्रत्यरि तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

स्वाति (चरण 1–4): रात 1:43 बजे से साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।

विशाखा (चरण 1–3): रात 1:43 बजे तक क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।

विशाखा (चरण 1–3): रात 1:43 बजे से प्रत्यरि तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

नई दिल्ली में आपके सहायक समय

पंचांग के 6 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर

सुबह 4:34 बजे से सुबह 5:21 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।

सुबह 9:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।

सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक: अभिजित मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।

दोपहर 2:15 बजे से दोपहर 3:17 बजे तक: विजय मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।

शाम 6:20 बजे से रात 9:18 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।

रात 11:13 बजे से सोमवार 21 सितंबर, रात 12:00 बजे तक: अमृत काल, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।

सहायक समय क्या हैं?

नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)

सुबह 4:34 बजे से सुबह 5:21 बजे तक · सुबह 9:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक · सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक · दोपहर 2:15 बजे से दोपहर 3:17 बजे तक · शाम 6:20 बजे से रात 9:18 बजे तक · रात 11:13 बजे से सोमवार 21 सितंबर, रात 12:00 बजे तक

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इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।

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तुला राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें

तुला के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 3 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे छठे भाव में है। अगली ढैया (आठवाँ भाव) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है।

तुला पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।

चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।

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क्यों: तुला से हर ग्रह का भाव

हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन

  1. सूर्य? कन्या · बारहवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 17 अक्टूबर, शाम 7:52 बजे

  2. चंद्र? धनु · तीसरा भाव सहायक?

    शास्त्र में तीसरे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (लाभ)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: सोमवार 21 सितंबर, सुबह 11:15 बजे

  3. मंगल? कर्क · दसवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 12 नवंबर, रात 8:19 बजे

  4. बुध? कन्या · बारहवाँ भाव नरम?

    शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत), लेकिन कन्या इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए इसे नरम गिना गया है।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: शनिवार 26 सितंबर, दोपहर 12:39 बजे

  5. गुरु? कर्क · दसवाँ भाव नरम?

    शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का गुरु धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में बदलाव और धन), लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए इसे नरम गिना गया है।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे

  6. शुक्र? तुला · पहला भाव सहायक?

    शास्त्र में पहले भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (सुख-सुविधाएँ और आनंद)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 6 नवंबर, रात 1:04 बजे

  7. शनि? मीन · छठा भाव सहायक?

    शास्त्र में छठे भाव के शनि को सहायक माना गया है (हर ओर सहजता)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे

  8. राहु? कुंभ · पाँचवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (धन और मन की उदासी): खर्च पर नज़र रखें और मन को आराम दें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

  9. केतु? सिंह · ग्यारहवाँ भाव सहायक?

    शास्त्र में ग्यारहवें भाव के केतु को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा और यश)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

तुला के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 2, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 1।

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अगले 30 दिनों में तुला राशि

अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ

शनिवार 26 सितंबर, दोपहर 12:39 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार पहले भाव का बुध धैर्य माँगता है (धन और सलाह): किसी सलाह पर अमल से पहले उसे परखें और खर्च पर नज़र रखें।

3 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे: शुक्र तुला में, आपसे पहले भाव में, वक्री होते हैं।

14 अक्टूबर, रात 12:21 बजे: शुक्र तुला में, आपसे पहले भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

17 अक्टूबर, शाम 7:52 बजे: सूर्य तुला राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार पहले भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकान, अतिरिक्त खर्च और यात्रा): अपनी गति संतुलित रखें और खर्च की योजना पहले से बनाएँ।

तुला राशिफल 2027: पूरा साल, महीने दर महीने

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अगले दिन का तुला राशिफल, 21 सितंबर

कल (सोमवार, 21 सितंबर): सुबह 11:15 बजे से चंद्रमा आपसे चौथे भाव में है, जो अपने आप में प्रतिकूल है, पर शास्त्र में वाम वेध से इसे सहायक गिना गया है।

21 सितंबर का पूरा राशिफल देखें

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तुला राशि के बारे में: स्वामी शुक्र, नक्षत्र और नाम अक्षर

स्वामी
शुक्रबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
चिह्न
तराजू लिए हुए पुरुषबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
प्रकृति
चरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
विषम या सम
विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
दिशा
पश्चिमबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
उदय
शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
बल
दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
कालपुरुष का अंग
नाभि के नीचे का भाग (बस्ति)बृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
विस्तार (निरयण)
180° से 210°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नक्षत्र चरण
चित्रा 3–4; स्वाति 1–4; विशाखा 1–3बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नाम अक्षर
रा री रू रे रो ता ती तू तेअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
तुला में शनि उच्च और सूर्य नीच होते हैं; तुला शुक्र की मूलत्रिकोण राशि भी है।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7

नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।

इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ

  • वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
  • कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद

प्रश्न

तुला राशि से जुड़े सवाल

तुला राशि का स्वामी कौन है?

तुला के स्वामी शुक्र 20 सितंबर को तुला में है, यानी तुला से पहले भाव में, 6 नवंबर, रात 1:04 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में तुला के स्वामी शुक्र हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। शुक्र वृषभ के भी स्वामी हैं।

तुला राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?

20 सितंबर को चंद्रमा धनु में है; 11 अक्टूबर, सुबह 10:04 बजे यह फिर तुला में आएगा और 13 अक्टूबर, शाम 7:13 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि तुला होती है। तुला के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: रा, री (चित्रा 3–4); रू, रे, रो, ता (स्वाति 1–4); ती, तू, ते (विशाखा 1–3)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि तुला है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।

तुला राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

20 सितंबर को चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा में है; 11 अक्टूबर, सुबह 10:04 बजे यह तुला के पहले चरण, चित्रा चरण 3, में पहुँचेगा। तुला निरयण राशिचक्र में 180° से 210° तक है: चित्रा के चरण 3 और 4, स्वाति के चारों चरण और विशाखा के चरण 1 से 3, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि तुला है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।

तुला राशि के लोग कैसे होते हैं?

उन्हें देवताओं और विद्वानों का आदर करने वाला, व्यापार और अपने काम में कुशल, समझदार, और अपने संबंधियों की सहायता करने वाला बताया गया है; ग्रंथ उन्हें दुबले शरीर और उठी हुई नाक वाला बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.7, सारावली 23.44 और होरासार 29.7 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, तुला और इसके स्वामी शुक्र, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।

तुला राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?

तुला पर 20 सितंबर को न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, तुला से छठे भाव में। तुला पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।

तुला राशि का समय कब बदलेगा?

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, तुला से ग्यारहवें भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, तुला से चौथे और दसवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, तुला से सातवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव तुला की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।

तुला राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

20 सितंबर को दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में कन्या 27°20′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में कन्या 3°06′ में। अंग्रेज़ी में तुला को Libra कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Libra है, उसकी राशि तुला हो, यह ज़रूरी नहीं।

इस पेज के शब्द

27
सूर्य
नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
चंद्र
नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
मंगल
नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
बुध
नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
गुरु
नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
शुक्र
नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
शनि
नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
राहु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
केतु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
सहायक
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
नरम
धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जो ग्रह के स्वराशि या उच्च राशि में होने से नरम पड़ा है (फलदीपिका 26.31)।
धैर्य का समय
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
सहायक
दिन का हमारा लेबल, जब दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो (भाव से, या वाम वेध से)।
गोचर
राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
भाव
आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
चंद्रबल
आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
ताराबल
आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
सबसे अधिक प्रभाव
राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
मध्यम राहु-केतु की गणना
राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
सहायक समय
आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
उच्च
वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
नीच
उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
स्वराशि
वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
काम और धन
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
प्रेम और परिवार
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
सेहत
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।

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