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राशिफल

दैनिक वृश्चिक राशिफल · चंद्र राशि

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 का वृश्चिक राशिफल — Vrishchik Rashifal

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

वृश्चिक राशि के तारे, 3 अक्टूबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ

तुलावृश्चिकधनुविशाखाअनुराधाज्येष्ठामूलक्रांतिवृत्तपूर्वपश्चिमविशाखा: ι¹ Libraeअनुराधा: Dschubbaज्येष्ठा: Antaresमूल: ShaulaSargasLarawagSabik

दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा मिथुन में है, इस मानचित्र से बाहर; 13 अक्टूबर, शाम 7:13 बजे यह फिर वृश्चिक में आएगा और 16 अक्टूबर, सुबह 6:48 बजे तक रहेगा।

वृश्चिक को पहला भाव मानकर: 3 अक्टूबर को नौ ग्रह कहाँ हैं

891011रा 4°12श 17°व123चं 12°4मं 8°गु 25°5के 4°6सू 15°7बु 9°शु 14°

हर भाव वृश्चिक से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का वृश्चिक का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।

वृश्चिक, 3 अक्टूबर को: पूरे दिन चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है।

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें

  • चंद्रमा
  • ग्रह
  • राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
  • योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
  • तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
  • क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
  • राशि की सीमा
  • नक्षत्र की सीमा
  • अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं

वृश्चिक के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।

इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे

  • विशाखा 200°00′ से 213°20′ योगतारा: ι¹ Librae। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कैलेंडर सुधार समिति 1955 और कोलब्रुक 1807 में यह α² Librae है। स्रोत दो-दो में बँटे हैं; सूर्य सिद्धांत की बताई स्थिति के निकट का तारा लिया गया है।
  • अनुराधा 213°20′ से 226°40′ योगतारा: Dschubba (δ Scorpii)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
  • ज्येष्ठा 226°40′ से 240°00′ योगतारा: Antares (α Scorpii)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
  • मूल 240°00′ से 253°20′ योगतारा: Shaula (λ Scorpii)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और कैलेंडर सुधार समिति 1955। पिंग्री और मॉरिसी 1989 में यह 45 Ophiuchi है।

तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।

तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।

दैनिक वृश्चिक राशिफल · चंद्र राशि · शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

3 अक्टूबर का वृश्चिक राशिफल: काम, प्रेम और सेहत

वृश्चिक राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। वृश्चिक बारह राशियों में आठवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 210° से 240° तक, और इसके स्वामी मंगल हैं; इसमें विशाखा का चरण 4, अनुराधा के चारों चरण और ज्येष्ठा के चारों चरण आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Scorpio कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, वृश्चिक से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।

चंद्राष्टम: सहज रहें?

शनिवार, 3 अक्टूबर: पूरे दिन (रविवार 4 अक्टूबर, शाम 6:32 बजे तक) चंद्रमा मिथुन में है, जो वृश्चिक से आठवीं राशि है। शास्त्र में इसे चंद्राष्टम कहा गया है, यानी सहज रहने का समय: योजनाएँ सरल रखें और आराम को समय दें।

चंद्राष्टम: सहज रहें। हमारी गिनती में 3 अक्टूबर को वृश्चिक के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 4, मिले-जुले 0 और धैर्य माँगने वाले 5; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।

काम, प्रेम और सेहत

काम और धन?

शास्त्र में ग्यारहवें भाव के सूर्य को प्रतिष्ठा, सम्मान और लाभ के लिए अनुकूल माना गया है।

प्रेम और परिवार?

आपसे चौथे भाव में राहु धैर्य माँगता है; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।

सेहत?

3 अक्टूबर को आपसे पहले या छठे भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए सेहत के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

वृश्चिक के लिए 3 अक्टूबर को चंद्रबल और ताराबल

चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल

पूरे दिन (रविवार 4 अक्टूबर, शाम 6:32 बजे तक): चंद्रमा मिथुन में, आपसे आठवें भाव में; चंद्राष्टम, यानी सहज रहने का समय।

  • चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4

वृश्चिक के लिए चंद्राष्टम: शुक्रवार 2 अक्टूबर, दोपहर 3:41 बजे से रविवार 4 अक्टूबर, शाम 6:32 बजे तक; सहज रहने का समय।

वृश्चिक के लिए अगला चंद्राष्टम: 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे से 1 नवंबर, रात 12:01 बजे तक।

वृश्चिक राशि के नक्षत्रों का ताराबल

विशाखा (चरण 4): रात 2:55 बजे तक मित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।

विशाखा (चरण 4): रात 2:55 बजे से अतिमित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।

अनुराधा (चरण 1–4): रात 2:55 बजे तक वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

अनुराधा (चरण 1–4): रात 2:55 बजे से मित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।

ज्येष्ठा (चरण 1–4): रात 2:55 बजे तक साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।

ज्येष्ठा (चरण 1–4): रात 2:55 बजे से वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

नई दिल्ली में आपके सहायक समय

नई शुरुआत के लिए कोई समय नहीं; कारण भीतर दिया गया है

3 अक्टूबर को पंचांग के समय चंद्राष्टम के भीतर हैं, जो सहज रहने का समय है, इसलिए नई शुरुआत के लिए कोई समय नहीं दिया गया; रोज़ के काम ठीक हैं, और पंचांग के समय संदर्भ के लिए दिए गए हैं।

सहायक समय क्या हैं?

नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)

रात 12:11 बजे से रात 3:13 बजे तक · सुबह 4:38 बजे से सुबह 5:26 बजे तक · सुबह 7:50 बजे से सुबह 9:13 बजे तक · दोपहर 12:20 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक · दोपहर 3:08 बजे से शाम 5:36 बजे तक · रात 9:08 बजे से रविवार 4 अक्टूबर, रात 12:00 बजे तक

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इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।

दैनिक वृश्चिक राशिफल · चंद्र राशि

वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें

वृश्चिक के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 3 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे पाँचवें भाव में है। अगली ढैया (आठवाँ भाव) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक है।

वृश्चिक पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक है।

चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।

दैनिक वृश्चिक राशिफल · चंद्र राशि

क्यों: वृश्चिक से हर ग्रह का भाव

हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन

  1. सूर्य? कन्या · ग्यारहवाँ भाव सहायक?

    शास्त्र में ग्यारहवें भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, सम्मान, लाभ और सेहत में सुधार)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 17 अक्टूबर, शाम 7:52 बजे

  2. चंद्र? मिथुन · आठवाँ भाव चंद्राष्टम: सहज रहें?

    शास्त्र में आठवें भाव के चंद्रमा को चंद्राष्टम कहा गया है, यानी सहज रहने का समय: योजनाएँ सरल रखें और आराम को समय दें।

    शास्त्रीय फल: चंद्राष्टम · इस राशि में कब तक: रविवार 4 अक्टूबर, शाम 6:32 बजे

  3. मंगल? कर्क · नौवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (प्रतिष्ठा, धन और कम ऊर्जा): ऊर्जा बचाकर रखें और खर्च पर नज़र रखें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 12 नवंबर, रात 8:19 बजे

  4. बुध? तुला · बारहवाँ भाव सहायक (वाम वेध)?

    शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का बुध अपने आप में प्रतिकूल है (रुकावटें और सेहत), लेकिन आपसे ग्यारहवें भाव में सूर्य होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए इसे सहायक गिना गया है।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 2 दिसंबर, शाम 5:28 बजे

  5. गुरु? कर्क · नौवाँ भाव सहायक?

    शास्त्र में नौवें भाव के गुरु को सहायक माना गया है (भाग्य, सफलता और संतान)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे

  6. शुक्र? तुला · बारहवाँ भाव सहायक?

    शास्त्र में बारहवें भाव के शुक्र को अनुकूल माना गया है।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 6 नवंबर, रात 1:04 बजे

  7. शनि? मीन · पाँचवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (संतान और धन): कदम उठाने से पहले योजनाओं पर ठीक से विचार करें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे

  8. राहु? कुंभ · चौथा भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का राहु धैर्य माँगता है (बेचैनी): घर की दिनचर्या शांत रखें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

  9. केतु? सिंह · दसवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार दसवें भाव में केतु होने से यह धैर्य का समय है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

    शास्त्रीय फल: अधिकतर ग्रंथों में धैर्य · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

वृश्चिक के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3।

दैनिक वृश्चिक राशिफल · चंद्र राशि

अगले 30 दिनों में वृश्चिक राशि

अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ

आज के बदलाव

3 अक्टूबर को दोपहर 12:43 बजे: शुक्र तुला में, आपसे बारहवें भाव में, वक्री होते हैं।

17 अक्टूबर, शाम 7:52 बजे: सूर्य तुला राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

19 अक्टूबर, सुबह 8:16 बजे: शुक्र तुला में, आपसे बारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे: बुध तुला में, आपसे बारहवें भाव में, वक्री होते हैं।

29 अक्टूबर, सुबह 9:40 बजे: शुक्र तुला में, आपसे बारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

30 अक्टूबर, सुबह 6:04 बजे: बुध तुला में, आपसे बारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का गुरु धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में बदलाव और धन): बदलावों में स्थिर रहें और खर्च पर नज़र रखें।

वृश्चिक राशिफल 2027: पूरा साल, महीने दर महीने

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अगले दिन का वृश्चिक राशिफल, 4 अक्टूबर

कल (रविवार, 4 अक्टूबर): शाम 6:32 बजे तक चंद्राष्टम है, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में; शास्त्र में यह सहज रहने का समय है।

4 अक्टूबर का पूरा राशिफल देखें

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वृश्चिक राशि के बारे में: स्वामी मंगल, नक्षत्र और नाम अक्षर

स्वामी
मंगलबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
चिह्न
बिच्छूबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
प्रकृति
स्थिरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
विषम या सम
सम राशि; स्त्रीबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
दिशा
उत्तरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
उदय
शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
बल
दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
कालपुरुष का अंग
गुप्त अंगबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
विस्तार (निरयण)
210° से 240°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नक्षत्र चरण
विशाखा 4; अनुराधा 1–4; ज्येष्ठा 1–4बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नाम अक्षर
तो ना नी नू ने नो या यी यूअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
वृश्चिक में चंद्रमा नीच होता है।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
  • उदय: बृहज्जातक 1.10, सारावली 3.24, फलदीपिका 1.8 और जातक पारिजात 1.14 वृश्चिक को शीर्षोदय कहते हैं; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.17 के छपे संस्करण इस श्लोक को अलग-अलग पढ़ते हैं।

नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।

इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ

  • वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
  • कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद

प्रश्न

वृश्चिक राशि से जुड़े सवाल

वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?

वृश्चिक के स्वामी मंगल 3 अक्टूबर को कर्क में है, वृश्चिक से नौवें भाव में, 12 नवंबर, रात 8:19 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में वृश्चिक के स्वामी मंगल हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। मंगल मेष के भी स्वामी हैं।

वृश्चिक राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?

3 अक्टूबर को चंद्रमा मिथुन में है; 13 अक्टूबर, शाम 7:13 बजे यह फिर वृश्चिक में आएगा और 16 अक्टूबर, सुबह 6:48 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि वृश्चिक होती है। वृश्चिक के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: तो (विशाखा 4); ना, नी, नू, ने (अनुराधा 1–4); नो, या, यी, यू (ज्येष्ठा 1–4)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि वृश्चिक है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।

वृश्चिक राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

3 अक्टूबर को चंद्रमा आर्द्रा में है; 13 अक्टूबर, शाम 7:13 बजे यह वृश्चिक के पहले चरण, विशाखा चरण 4, में पहुँचेगा। वृश्चिक निरयण राशिचक्र में 210° से 240° तक है: विशाखा का चरण 4, अनुराधा के चारों चरण और ज्येष्ठा के चारों चरण, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि वृश्चिक है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।

वृश्चिक राशि के लोग कैसे होते हैं?

ग्रंथ मुख्य रूप से शरीर पर सहमत हैं: बड़ी, आकर्षक आँखें और सुडौल जाँघें तथा घुटने। तीनों कहते हैं कि बचपन में स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रखना चाहिए, और दो ग्रंथ ऐसे लोगों का वर्णन करते हैं जो प्रायः जल्दी ही माता-पिता और गुरुओं से अलग अपना रास्ता बनाते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.8, सारावली 23.51 और होरासार 29.8 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, वृश्चिक और इसके स्वामी मंगल, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।

वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?

वृश्चिक पर 3 अक्टूबर को न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, वृश्चिक से पाँचवें भाव में। वृश्चिक पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2034 तक है। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।

वृश्चिक राशि का समय कब बदलेगा?

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, वृश्चिक से दसवें भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, वृश्चिक से तीसरे और नौवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, वृश्चिक से छठे भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव वृश्चिक की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।

वृश्चिक राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

3 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में तुला 10°04′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में कन्या 15°50′ में। अंग्रेज़ी में वृश्चिक को Scorpio कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Scorpio है, उसकी राशि वृश्चिक हो, यह ज़रूरी नहीं।

इस पेज के शब्द

29
सूर्य
नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
चंद्र
नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
मंगल
नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
बुध
नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
गुरु
नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
शुक्र
नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
शनि
नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
राहु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
केतु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
सहायक
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
सहायक (वाम वेध)
धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जिसे जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से (वाम वेध) सहायक गिना गया है।
धैर्य का समय
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
चंद्राष्टम: सहज रहें
चंद्रमा आपकी राशि से आठवीं राशि में; परंपरा में योजनाएँ सरल रखने और बड़े नए निर्णय धीरे लेने का समय।
गोचर
राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
भाव
आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
वाम वेध (विपरीत वेध)
धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
चंद्रबल
आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
ताराबल
आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
सबसे अधिक प्रभाव
राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
मध्यम राहु-केतु की गणना
राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
ग्रंथों में मतभेद
शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
सहायक समय
आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
उच्च
वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
नीच
उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
स्वराशि
वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
काम और धन
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
प्रेम और परिवार
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
सेहत
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।

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