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दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2081

Columbus का पंचांग, 4 मार्च 2025

मंगलवार, 4 मार्च 2025

मंगलवार, 4 मार्च 2025 को शुक्ल षष्ठी तिथि रात 2:22, 5 मार्च तक है, उसके बाद शुक्ल सप्तमी; नक्षत्र भरणी शाम 4:08 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल षष्ठी रात 2:22, 5 मार्च तक

    फिर शुक्ल सप्तमी

    शुक्ल पक्ष की छठी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    मंगलवार

    मंगलवार, मंगल का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    भरणी शाम 4:08 तक

    फिर कृत्तिका

    27 नक्षत्रों में दूसरा: निरयण राशिचक्र में 13°20′ से 26°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    इन्द्र दोपहर 3:37 तक

    फिर वैधृति

  5. करण

    कौलव दोपहर 3:32 तक

    फिर तैतिल रात 2:22, 5 मार्च तक

    फिर गर

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल षष्ठी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: भरणी 3 · सुबह 10:34 · भरणी 4 · शाम 4:08 · कृत्तिका 1 · रात 9:43 · कृत्तिका 2 · रात 3:20, 5 मार्च

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

आज रात का आसमान

आज रात, सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक: चंद्रमा और ग्रह आकाश में कहाँ हैं

स्थिति और समय की गणना NASA JPL के आंकड़ों से।

आसमान दिखना मौसम और आसपास की रुकावटों पर निर्भर है।

समय समुद्र-तल और खुले मैदान के हिसाब से है, जहाँ पहाड़ या इमारत की रुकावट न हो।

जहाँ चमक का अंक नहीं मिला, वह ग्रह देखने की जाँच में शामिल नहीं है।

नीचे दिया हर चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है

आने वाली आकाश की घटनाएँ · कहाँ देखें

नीचे की हर घटना के समय, उसमें दिया चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है

  • आधा चंद्रमा, बढ़ता हुआ ·
    चंद्रमा: उत्तर-पूर्व (6.2°)
  • आधा चंद्रमा, घटता हुआ ·
    चंद्रमा: दक्षिण (20.4°)

सूर्य और चंद्रमा के समय भी देख सकते हैं

गणना और स्रोत देखें: NASA JPL के आंकड़ों से

खुली आँख से देखने की हमारी कसौटी: सूर्य की ऊँचाई −12° से नीचे, तारे या ग्रह की ऊँचाई 10° से ऊपर, चमक का अंक 4 या कम (अंक जितना कम, उतनी ज़्यादा चमक); चंद्रमा की ऊँचाई 5° से ऊपर हो तो सूर्य की ऊँचाई और चमक की शर्त नहीं। ऊँचाई हवा के असर के बिना, समुद्र-तल से है। हर 10 मिनट पर जाँच; छोटा समय छूट सकता है।

ग्रहों के मेल का चुना तरीका: राशि-चक्र पर दोनों का अंश बराबर हो। दूसरे तरीके: आकाश के नक्शे पर दोनों एक ही सीधी रेखा पर हों, या दोनों के बीच सबसे कम दूरी हो। हमारी सूची में वही मेल है जहाँ दोनों के बीच 10° से कम दूरी हो। दोनों की जाँच घटना के समय पर है।

छह हफ़्तों में कसौटी पूरी करने वाली अगली तीन घटनाएँ। यहाँ चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति के लिए ज़रूरी आंकड़े हैं। बुध, मंगल और शनि की चमक का अंक: नहीं मिला। ऋतु बदलने के दिन (जैसे साल का सबसे लंबा दिन) आसमान में देखने की चीज़ नहीं, इसलिए सूची में नहीं हैं।

नक्शे पर जगह के अंक (उत्तर-दक्षिण / पूर्व-पश्चिम): 39.96, -83.00

समय चुने गए शहर की घड़ी से · ग्रहों की स्थिति: NASA JPL (DE440s)

  • राष्ट्रीय पंचांग 1948 शक (2026-27), प्रस्तावना पृष्ठ छह (सूर्य: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 31′ मुड़ना + 16′ आधी चौड़ाई), पृष्ठ 114 (शहरों की तालिका), पृष्ठ 131 (शहरों के अक्षांश-देशांतर)
  • भारतीय खगोलीय पंचांग 2027, पृष्ठ 462 (चंद्रमा: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 34′ मुड़ना); राष्ट्रीय पंचांग में चंद्रमा का नियम लिखा नहीं, इसलिए इसे हमारा तय तरीका कहा गया है
  • ए. मल्लामा और जे. एल. हिल्टन (2018), ग्रहों की चमक की गणना (शुक्र, बृहस्पति)

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:01
सूर्यास्त
शाम 6:27
चंद्रोदय
सुबह 9:21
चंद्रास्त
रात 12:34, 5 मार्च
दिनमान
11 घंटे 26 मिनट · 28 घटी 37 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 37 सेकंड अधिक
रात्रिमान
12 घंटे 31 मिनट · 31 घटी 19 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:44

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, सुबह 9:26 है।

शुक्ल पक्ष, बढ़ता हँसिया चाँद चंद्रमा का 26% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 4.5 दिन अगली पूर्णिमा: 14 मार्च 2025 अगली अमावस्या: 29 मार्च 2025

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

सुबह 7:01सुबह 10:00दोपहर 1:00शाम 4:00शाम 7:00रात 10:00रात 12:59रात 3:59सुबह 6:59

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:01दोपहर 1:00शाम 6:27

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 6:27रात 1:00सुबह 6:59
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

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चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:20 – सुबह 6:10भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:49 – सुबह 7:01गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अमृत कालसुबह 11:42 – दोपहर 1:11हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:21 – दोपहर 1:07दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:38 – दोपहर 3:24दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 6:14 – शाम 6:38गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 6:27 – शाम 7:39गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:18 – रात 1:08, 5 मार्चहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • रवि योगसुबह 7:01 – सुबह 8:11चंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योगशाम 4:08 – सुबह 6:59, 5 मार्चवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
  • रवि योगशाम 4:08 – सुबह 6:59, 5 मार्चचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
  • त्रिपुष्कर योगरात 2:22 – सुबह 6:59, 5 मार्चपरंपरा के अनुसार इस समय किया गया काम तीन बार होता है; इसलिए इसे लाभ के कामों के लिए चुना जाता है और दुख के अवसरों से दूर रखा जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल

  • दुर्मुहूर्तसुबह 9:18 – सुबह 10:04
  • यमगण्डसुबह 9:52 – सुबह 11:18
  • गुलिक कालदोपहर 12:44 – दोपहर 2:10
  • राहु कालदोपहर 3:36 – शाम 5:01
  • दुर्मुहूर्तरात 11:28 – रात 12:18, 5 मार्च
  • वर्ज्यरात 3:23 – सुबह 4:53, 5 मार्च
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल (हमारी गिनती)
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
उत्तर

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है।

चौघड़िया · दिन

  1. रोगसुबह 7:01 – सुबह 8:26
  2. उद्वेगसुबह 8:26 – सुबह 9:52वार वेला
  3. चरसुबह 9:52 – सुबह 11:18
  4. लाभसुबह 11:18 – दोपहर 12:44
  5. अमृतदोपहर 12:44 – दोपहर 2:10
  6. कालदोपहर 2:10 – दोपहर 3:36काल वेला (हमारी गिनती)
  7. शुभदोपहर 3:36 – शाम 5:01
  8. रोगशाम 5:01 – शाम 6:27

चौघड़िया · रात

  1. कालशाम 6:27 – रात 8:01
  2. लाभरात 8:01 – रात 9:35काल रात्रि
  3. उद्वेगरात 9:35 – रात 11:09
  4. शुभरात 11:09 – रात 12:43, 5 मार्च
  5. अमृतरात 12:43 – रात 2:17, 5 मार्च
  6. चररात 2:17 – रात 3:51, 5 मार्च
  7. रोगरात 3:51 – सुबह 5:25, 5 मार्च
  8. कालसुबह 5:25 – सुबह 6:59, 5 मार्च

होरा

  1. मंगलसुबह 7:01 – सुबह 7:58
  2. सूर्यसुबह 7:58 – सुबह 8:55
  3. शुक्रसुबह 8:55 – सुबह 9:52
  4. बुधसुबह 9:52 – सुबह 10:49
  5. चंद्रसुबह 10:49 – सुबह 11:47
  6. शनिसुबह 11:47 – दोपहर 12:44
  7. गुरुदोपहर 12:44 – दोपहर 1:41
  8. मंगलदोपहर 1:41 – दोपहर 2:38
  9. सूर्यदोपहर 2:38 – दोपहर 3:36
  10. शुक्रदोपहर 3:36 – शाम 4:33
  11. बुधशाम 4:33 – शाम 5:30
  12. चंद्रशाम 5:30 – शाम 6:27
  13. शनिशाम 6:27 – शाम 7:30
  14. गुरुशाम 7:30 – रात 8:33
  15. मंगलरात 8:33 – रात 9:35
  16. सूर्यरात 9:35 – रात 10:38
  17. शुक्ररात 10:38 – रात 11:40
  18. बुधरात 11:40 – रात 12:43, 5 मार्च
  19. चंद्ररात 12:43 – रात 1:46, 5 मार्च
  20. शनिरात 1:46 – रात 2:48, 5 मार्च
  21. गुरुरात 2:48 – रात 3:51, 5 मार्च
  22. मंगलरात 3:51 – सुबह 4:54, 5 मार्च
  23. सूर्यसुबह 4:54 – सुबह 5:56, 5 मार्च
  24. शुक्रसुबह 5:56 – सुबह 6:59, 5 मार्च
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. रोगम्सुबह 7:01 – सुबह 8:26
  2. लाभम्सुबह 8:26 – सुबह 9:52
  3. धनम्सुबह 9:52 – सुबह 11:18
  4. सुखम्सुबह 11:18 – दोपहर 12:44
  5. सोरम्दोपहर 12:44 – दोपहर 2:10
  6. उत्तिदोपहर 2:10 – दोपहर 3:36
  7. विषम्दोपहर 3:36 – शाम 5:01
  8. अमृतम्शाम 5:01 – शाम 6:27
  1. सोरम्शाम 6:27 – रात 8:01
  2. उत्तिरात 8:01 – रात 9:35
  3. विषम्रात 9:35 – रात 11:09
  4. अमृतम्रात 11:09 – रात 12:43, 5 मार्च
  5. रोगम्रात 12:43 – रात 2:17, 5 मार्च
  6. लाभम्रात 2:17 – रात 3:51, 5 मार्च
  7. धनम्रात 3:51 – सुबह 5:25, 5 मार्च
  8. सुखम्सुबह 5:25 – सुबह 6:59, 5 मार्च

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
मेष रात 9:43 तक
वृषभ
सूर्य राशि
कुंभ
सूर्य नक्षत्र
शतभिषा 4 सुबह 8:11 तक
पूर्वा भाद्रपद 1
अगली संक्रांति
मीन · 14 मार्च 2025, सुबह 9:21, 14 मार्च (EDT)

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कुंभसुबह 6:14 – सुबह 7:28स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:02
  2. मीनसुबह 7:28 – सुबह 8:40द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 7:49
  3. मेषसुबह 8:40 – सुबह 10:02चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 9:35
  4. वृषभसुबह 10:02 – सुबह 11:51स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 10:49
  5. मिथुनसुबह 11:51 – दोपहर 2:09द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 1:11
  6. कर्कदोपहर 2:09 – शाम 4:40चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 2:49
  7. सिंहशाम 4:40 – शाम 7:11स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 6:16
  8. कन्याशाम 7:11 – रात 9:41द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · शाम 7:56
  9. तुलारात 9:41 – रात 12:13, 5 मार्चचरपुष्कर भाग 24° · रात 11:43
  10. वृश्चिकरात 12:13 – रात 2:38, 5 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 1:08, 5 मार्च
  11. धनुरात 2:38 – सुबह 4:39, 5 मार्चद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 4:14, 5 मार्च
  12. मकरसुबह 4:39 – सुबह 6:10, 5 मार्चचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:25, 5 मार्च
  13. कुंभसुबह 6:10 – सुबह 7:24, 5 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 6:58, 5 मार्च

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकुंभ19°57′शतभिषा · 4मीन · 14 मार्च 2025
चंद्रमेष21°12′भरणी · 3वृषभ · 4 मार्च 2025
मंगलमिथुन23°14′पुनर्वसु · 1कर्क · 2 अप्रैल 2025
बुधमीन7°24′उत्तरा भाद्रपद · 2मेष · 6 मई 2025
गुरुवृषभ18°22′रोहिणी · 3मिथुन · 14 मई 2025
शुक्र वक्रीमीन16°30′उत्तरा भाद्रपद · 4मेष · 31 मई 2025
शनि अस्तकुंभ26°55′पूर्वा भाद्रपद · 3मीन · 29 मार्च 2025
राहुमीन3°14′पूर्वा भाद्रपद · 4कुंभ · 29 मई 2025
केतुकन्या3°14′उत्तरा फाल्गुनी · 2सिंह · 29 मई 2025

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2081 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
फाल्गुन
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081 कालयुक्त
शक संवत
1946 क्रोधी

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
शिशिर
सूर्य के हिसाब से ऋतु
वसंत
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
फाल्गुन, दिन 21
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
13 फाल्गुन 1946
कलि संवत
5125
वर्ष का राजा
मंगल
वर्ष का मंत्री
शनि
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
मंगल
दुर्गेश
शुक्र
धनेश
चंद्र
रसेश
गुरु
धान्येश
सूर्य
नीरसेश
मंगल
फलेश
शुक्र
मेघेश
शुक्र
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी)
24°12′31″
जूलियन दिन
2460738.5
गुजराती विक्रम संवत
2081
बृहस्पति संवत्सर
कालयुक्त 19 मार्च 2024 से; फिर सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

चंद्र दर्शन · अमावस्या के बाद का चाँद

चुनी तारीख तक की पिछली अमावस्या के बाद, हर तरीके की पहली शाम दिखाई गई है। नतीजे एक जैसे हों तो जानकारी एक बार दिखाई गई है।

यैलप 1997 · ओदेह 2004/2006

नीचे बताई गई शर्तों में चाँद दिख सकता है।

पहली शाम की तारीख
28 फ़रवरी 2025
चाँद डूबने का स्थानीय समय
शाम 7:25 बजे
सूर्यास्त पर अमावस्या के बाद बीते घंटे
22.6
सूर्यास्त पर सूरज और चाँद के बीच का कोण
12.9°

चंद्र दर्शन मौसम, साफ़ आसमान और सामने की रुकावटों पर निर्भर है; यह देखे जाने की पुष्टि नहीं है।

आप ऊपर दूसरी तारीख चुन सकते हैं।

NASA JPL के आंकड़ों से गणना और स्रोत देखें

ग्रहों की स्थिति NASA JPL के आंकड़ों से। अमावस्या का समय सूरज और चाँद के भोगांश (आकाश में उनके रास्ते पर नापी गई जगह) के मिलने पर लिया है। खोज उस स्थानीय तारीख से सात तारीखों तक है; यह हमारी खोज की सीमा है, धार्मिक तारीख का नियम नहीं।

अमावस्या का स्थानीय समय: 27 फ़रवरी 2025, शाम 7:45 बजे

यैलप में श्रेणी ए या बी; ओदेह में श्रेणी ए या बी को अलग जाँचा है। यैलप की बी श्रेणी में आसमान और देखने की हालत बहुत अच्छी होनी चाहिए। ओदेह की बी श्रेणी में दूरबीन की ज़रूरत हो सकती है। दोनों तरीकों की जाँच सूर्यास्त और चाँद डूबने के बीच उनके अपने चुने समय पर है; ऊपर दिए घंटे और कोण सूरज डूबने के समय के हैं।

स्रोत: बी. डी. यैलप, नए चाँद की पहली झलक का अनुमान लगाने की विधि, नौवहन पंचांग कार्यालय तकनीकी नोट 69 (1997), पन्ने 3–4 और 11, समीकरण 4.1 व 6.1, तालिका 5। मोहम्मद श. ओदेह, चाँद की पतली झलक दिखने की नई कसौटी, एक्सपेरिमेंटल एस्ट्रोनॉमी 18, पन्ने 43 और 61, समीकरण 1 व 2।

समुद्र की सतह जितनी ऊँचाई और सामने खुला आसमान माना है। पहाड़, इमारतें और स्थानीय मौसम शामिल नहीं हैं। दो जाँच अभी बाकी हैं: पहली, असल में चाँद कब दिखा, उससे मिलान; दूसरी, पृथ्वी के घूमने के ताज़ा आंकड़ों से समय कितना बदलता है। धार्मिक तारीख तय करने के लिए भी इसकी जाँच बाकी है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खग्रास चंद्र ग्रहण · शुक्रवार, 14 मार्च 2025 · यहाँ से दिखेगा · रात 1:09 (EDT) – सुबह 4:48, 14 मार्च (EDT) सूतक: शाम 4:09, 13 मार्च (EDT) – सुबह 4:48, 14 मार्च (EDT)। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिंधु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · शनिवार, 29 मार्च 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 7 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर
चंद्र वास
पूर्व सुबह 7:01 – रात 9:43 · दक्षिण रात 9:43 – सुबह 6:59, 5 मार्च
राहु वास
पश्चिम
शिव वास
वृषभ पर सुबह 7:01 – रात 2:22, 5 मार्च · भोजन में रात 2:22 – सुबह 6:59, 5 मार्च
अग्नि वास
पाताल में सुबह 7:01 – रात 2:22, 5 मार्च · पृथ्वी पर रात 2:22 – सुबह 6:59, 5 मार्च
आनंदादि योग
मुसल सुबह 7:01 – शाम 4:08मुहूर्त चिंतामणि 1.23–25 · गदा शाम 4:08 – सुबह 6:59, 5 मार्चमुहूर्त चिंतामणि 1.23–25
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 7:01 – सुबह 6:59, 5 मार्च

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 11:42 – दोपहर 1:11) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:21 – दोपहर 1:07) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:20 – सुबह 6:10) पूजा और अध्ययन के लिए है।

चुने हुए दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका
सूर्योदय
सुबह 6:59
राहु काल
दोपहर 12:44 – दोपहर 2:10
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
मिलते हुए समय अपने-अपने समय के साथ दिए हैं; साझा हिस्सा भी दिखाया गया है।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

शुक्ल षष्ठी रात 2:22, 5 मार्च तक है, फिर शुक्ल सप्तमी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल सप्तमी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:36 – शाम 5:01 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:20 – सुबह 6:10, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:49 – सुबह 7:01, अमृत काल सुबह 11:42 – दोपहर 1:11, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:21 – दोपहर 1:07, विजय मुहूर्त दोपहर 2:38 – दोपहर 3:24, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:14 – शाम 6:38, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:27 – शाम 7:39, निशिता मुहूर्त रात 12:18 – रात 1:08, 5 मार्च।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:21 – दोपहर 1:07 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:20 – सुबह 6:10 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन भरणी नक्षत्र है, शाम 4:08 तक; फिर कृत्तिका।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 14 मार्च 2025, अगली अमावस्या 29 मार्च 2025।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना फाल्गुन है (पूर्णिमांत; अमांत में फाल्गुन), विक्रम संवत 2081 कालयुक्त और शक संवत 1946।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह मंगल की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन मेष राशि में है, रात 9:43 पर वृषभ में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, मंगलवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 11:42 – दोपहर 1:11) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:21 – दोपहर 1:07) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:20 – सुबह 6:10) पूजा और अध्ययन के लिए है। चुने हुए दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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