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दैनिक पंचांग · ज्येष्ठ · विक्रम संवत 2082

Columbus का पंचांग, 9 जून 2025

सोमवार, 9 जून 2025

सोमवार, 9 जून 2025 को शुक्ल चतुर्दशी तिथि रात 2:06, 10 जून तक है, उसके बाद पूर्णिमा; नक्षत्र अनुराधा।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल चतुर्दशी रात 2:06, 10 जून तक

    फिर पूर्णिमा

    शुक्ल पक्ष की चौदहवीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    सोमवार

    सोमवार, चंद्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    अनुराधा

    27 नक्षत्रों में सत्रहवाँ: निरयण राशिचक्र में 213°20′ से 226°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    सिद्ध सुबह 4:15, 10 जून तक

    फिर साध्य

    27 नित्य योगों में इक्कीसवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    गर दोपहर 1:09 तक

    फिर वणिज रात 2:06, 10 जून तक

    फिर विष्टि

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल चतुर्दशी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: अनुराधा 1 · दोपहर 12:41 · अनुराधा 2 · शाम 7:19 · अनुराधा 3 · रात 1:56, 10 जून

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:03
सूर्यास्त
रात 9:00
चंद्रोदय
रात 8:00
चंद्रास्त
सुबह 5:03, 10 जून
दिनमान
14 घंटे 56 मिनट · 37 घटी 21 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 42 सेकंड अधिक
रात्रिमान
9 घंटे 3 मिनट · 22 घटी 39 पल
मध्याह्न
दोपहर 1:31

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 8:05 है।

शुक्ल पक्ष, आधे से बड़ा बढ़ता चाँद चंद्रमा का 96% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 13.3 दिन अगली पूर्णिमा: 11 जून 2025 अगली अमावस्या: 25 जून 2025

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 6:03सुबह 9:03दोपहर 12:03दोपहर 3:03शाम 6:03रात 9:03रात 12:03रात 3:03सुबह 6:03

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:03दोपहर 2:00रात 9:00

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

रात 9:00रात 2:00सुबह 6:03
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:51 – सुबह 5:27भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 4:51 – सुबह 6:03गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:02 – दोपहर 2:01दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।यमगण्ड के साथ: दोपहर 1:02 – दोपहर 1:31 (29 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तशाम 4:01 – शाम 5:01दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
  • अमृत कालशाम 6:24 – रात 8:10हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तरात 8:46 – रात 9:10गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्यारात 9:00 – रात 10:12गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 1:13 – रात 1:50, 10 जूनहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • सर्वार्थ सिद्धि योगपूरे दिनवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
  • रवि योगपूरे दिनचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • राहु कालसुबह 7:55 – सुबह 9:47वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • वर्ज्यसुबह 10:26 – दोपहर 12:12हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।
  • यमगण्डसुबह 11:39 – दोपहर 1:31वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 1:02 – दोपहर 1:31 (29 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 2:01 – दोपहर 3:01वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • गुलिक कालदोपहर 3:23 – शाम 5:16वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तशाम 5:01 – शाम 6:00वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
भद्रा
10 जून, रात 2:06 – दोपहर 2:58स्वर्ग लोक · 10 जून, रात 2:06 – दोपहर 2:58भद्रा पुच्छ · 10 जून, सुबह 10:31 – सुबह 11:43भद्रा मुख · 10 जून, सुबह 11:43 – दोपहर 1:43भद्रा परिहार · 10 जून, रात 2:06 – सुबह 6:03
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल (हमारी गिनती)
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:03, 10 जून) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. अमृतसुबह 6:03 – सुबह 7:55
  2. कालसुबह 7:55 – सुबह 9:47काल वेला (हमारी गिनती)
  3. शुभसुबह 9:47 – सुबह 11:39
  4. रोगसुबह 11:39 – दोपहर 1:31
  5. उद्वेगदोपहर 1:31 – दोपहर 3:23
  6. चरदोपहर 3:23 – शाम 5:16
  7. लाभशाम 5:16 – शाम 7:08वार वेला
  8. अमृतशाम 7:08 – रात 9:00

चौघड़िया · रात

  1. चररात 9:00 – रात 10:08
  2. रोगरात 10:08 – रात 11:15
  3. कालरात 11:15 – रात 12:23, 10 जून
  4. लाभरात 12:23 – रात 1:31, 10 जूनकाल रात्रि
  5. उद्वेगरात 1:31 – रात 2:39, 10 जून
  6. शुभरात 2:39 – रात 3:47, 10 जून
  7. अमृतरात 3:47 – सुबह 4:55, 10 जून
  8. चरसुबह 4:55 – सुबह 6:03, 10 जून

होरा

  1. चंद्रसुबह 6:03 – सुबह 7:18
  2. शनिसुबह 7:18 – सुबह 8:33
  3. गुरुसुबह 8:33 – सुबह 9:47
  4. मंगलसुबह 9:47 – सुबह 11:02
  5. सूर्यसुबह 11:02 – दोपहर 12:17
  6. शुक्रदोपहर 12:17 – दोपहर 1:31
  7. बुधदोपहर 1:31 – दोपहर 2:46
  8. चंद्रदोपहर 2:46 – शाम 4:01
  9. शनिशाम 4:01 – शाम 5:16
  10. गुरुशाम 5:16 – शाम 6:30
  11. मंगलशाम 6:30 – शाम 7:45
  12. सूर्यशाम 7:45 – रात 9:00
  13. शुक्ररात 9:00 – रात 9:45
  14. बुधरात 9:45 – रात 10:30
  15. चंद्ररात 10:30 – रात 11:15
  16. शनिरात 11:15 – रात 12:01, 10 जून
  17. गुरुरात 12:01 – रात 12:46, 10 जून
  18. मंगलरात 12:46 – रात 1:31, 10 जून
  19. सूर्यरात 1:31 – रात 2:17, 10 जून
  20. शुक्ररात 2:17 – रात 3:02, 10 जून
  21. बुधरात 3:02 – रात 3:47, 10 जून
  22. चंद्ररात 3:47 – सुबह 4:33, 10 जून
  23. शनिसुबह 4:33 – सुबह 5:18, 10 जून
  24. गुरुसुबह 5:18 – सुबह 6:03, 10 जून
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. अमृतम्सुबह 6:03 – सुबह 7:55
  2. विषम्सुबह 7:55 – सुबह 9:47
  3. रोगम्सुबह 9:47 – सुबह 11:39
  4. लाभम्सुबह 11:39 – दोपहर 1:31
  5. धनम्दोपहर 1:31 – दोपहर 3:23
  6. सुखम्दोपहर 3:23 – शाम 5:16
  7. सोरम्शाम 5:16 – शाम 7:08
  8. उत्तिशाम 7:08 – रात 9:00
  1. सुखम्रात 9:00 – रात 10:08
  2. सोरम्रात 10:08 – रात 11:15
  3. उत्तिरात 11:15 – रात 12:23, 10 जून
  4. अमृतम्रात 12:23 – रात 1:31, 10 जून
  5. विषम्रात 1:31 – रात 2:39, 10 जून
  6. रोगम्रात 2:39 – रात 3:47, 10 जून
  7. लाभम्रात 3:47 – सुबह 4:55, 10 जून
  8. धनम्सुबह 4:55 – सुबह 6:03, 10 जून

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
वृश्चिक
सूर्य राशि
वृषभ
सूर्य नक्षत्र
मृगशिरा 1
अगली संक्रांति
मिथुन · 14 जून 2025, रात 9:14, 14 जून

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. वृषभसुबह 4:41 – सुबह 6:30स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:28
  2. मिथुनसुबह 6:30 – सुबह 8:48द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 7:50
  3. कर्कसुबह 8:48 – सुबह 11:19चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 9:28
  4. सिंहसुबह 11:19 – दोपहर 1:50स्थिरपुष्कर भाग 19° · दोपहर 12:55
  5. कन्यादोपहर 1:50 – शाम 4:20द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · दोपहर 2:35
  6. तुलाशाम 4:20 – शाम 6:52चरपुष्कर भाग 24° · शाम 6:21
  7. वृश्चिकशाम 6:52 – रात 9:17स्थिरपुष्कर भाग 11° · शाम 7:46
  8. धनुरात 9:17 – रात 11:18द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 10:52
  9. मकररात 11:18 – रात 12:49, 10 जूनचरपुष्कर भाग 14° · रात 12:03, 10 जून
  10. कुंभरात 12:49 – रात 2:03, 10 जूनस्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 1:37, 10 जून
  11. मीनरात 2:03 – रात 3:14, 10 जूनद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 2:24, 10 जून
  12. मेषरात 3:14 – सुबह 4:37, 10 जूनचरपुष्कर भाग 21° · सुबह 4:10, 10 जून
  13. वृषभसुबह 4:37 – सुबह 6:26, 10 जूनस्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:24, 10 जून

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यवृषभ24°37′मृगशिरा · 1मिथुन · 14 जून 2025
चंद्रवृश्चिक3°21′अनुराधा · 1धनु · 11 जून 2025
मंगलसिंह1°24′मघा · 1कन्या · 28 जुलाई 2025
बुध अस्तमिथुन6°43′आर्द्रा · 1कर्क · 22 जून 2025
गुरुमिथुन5°41′मृगशिरा · 4कर्क · 18 अक्टूबर 2025
शुक्रमेष9°01′अश्विनी · 3वृषभ · 29 जून 2025
शनिमीन6°47′उत्तरा भाद्रपद · 2मेष · 2 जून 2027
राहुकुंभ29°17′पूर्वा भाद्रपद · 3मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह29°17′उत्तरा फाल्गुनी · 1कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
ज्येष्ठ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082 सिद्धार्थी
शक संवत
1947 विश्वावसु

यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
ग्रीष्म
सूर्य के हिसाब से ऋतु
ग्रीष्म
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
ज्येष्ठ, दिन 27
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
19 ज्येष्ठ 1947
कलि संवत
5126
वर्ष का राजा
सूर्य
वर्ष का मंत्री
सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
बुध
दुर्गेश
शनि
धनेश
मंगल
रसेश
शुक्र
धान्येश
चंद्र
नीरसेश
बुध
फलेश
शनि
मेघेश
सूर्य
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी)
24°12′45″
जूलियन दिन
2460835.5
गुजराती विक्रम संवत
2081
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

अभी चल रहा है

  • गुरु अस्त · 17 जुलाई 2025 तक

गुरु अस्त: इस शहर से दिखने के हिसाब से, 7 और दिन (मुहूर्त मार्तंड 3.9; नारद संहिता 29.5) जोड़कर, 31 मई – 17 जुलाई (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 9 जून – 9 जुलाई।

ग्रहण

  • खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 7 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · रविवार, 21 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पूर्व
चंद्र वास
उत्तर सुबह 6:03 – सुबह 6:03, 10 जून
राहु वास
उत्तर-पश्चिम
शिव वास
भोजन में सुबह 6:03 – रात 2:06, 10 जून · श्मशान में रात 2:06 – सुबह 6:03, 10 जून
अग्नि वास
आकाश में सुबह 6:03 – रात 2:06, 10 जून · पाताल में रात 2:06 – सुबह 6:03, 10 जून
आनंदादि योग
मानस सुबह 6:03 – सुबह 6:03, 10 जून
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:03 – सुबह 6:03, 10 जून

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:31 – दोपहर 2:01, यमगण्ड से अलग) और अमृत काल (शाम 6:24 – रात 8:10) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:51 – सुबह 5:27) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए राहु काल, वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त छोड़ती है।

चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
पूर्णिमा
नक्षत्र
अनुराधा
सूर्योदय
सुबह 6:03
राहु काल
शाम 5:16 – शाम 7:08
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 1:02 – दोपहर 2:02
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

शुक्ल चतुर्दशी रात 2:06, 10 जून तक है, फिर पूर्णिमा।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल सुबह 7:55 – सुबह 9:47 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 – सुबह 5:27, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:51 – सुबह 6:03, अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:02 – दोपहर 2:01 (दोपहर 1:02 – दोपहर 1:31 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त शाम 4:01 – शाम 5:01, अमृत काल शाम 6:24 – रात 8:10, गोधूलि मुहूर्त रात 8:46 – रात 9:10, सायाह्न सन्ध्या रात 9:00 – रात 10:12, निशिता मुहूर्त रात 1:13 – रात 1:50, 10 जून।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:02 – दोपहर 2:01 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 – सुबह 5:27 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन अनुराधा नक्षत्र है।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 11 जून 2025, अगली अमावस्या 25 जून 2025।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना ज्येष्ठ है (अमांत; पूर्णिमांत में ज्येष्ठ), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

हाँ, भद्रा 10 जून, रात 2:06 – दोपहर 2:58। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह चंद्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन वृश्चिक राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, सोमवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:31 – दोपहर 2:01, यमगण्ड से अलग) और अमृत काल (शाम 6:24 – रात 8:10) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:51 – सुबह 5:27) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए राहु काल, वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त छोड़ती है। चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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