दैनिक पंचांग · आषाढ़ · विक्रम संवत 2082
Columbus का पंचांग, 17 जुलाई 2025
गुरुवार, 17 जुलाई 2025
गुरुवार, 17 जुलाई 2025 को कृष्ण सप्तमी तिथि सुबह 9:40 तक है, उसके बाद कृष्ण अष्टमी; नक्षत्र रेवती शाम 6:09 तक।
गणना: शहर के केंद्र से
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।
-
तिथि
कृष्ण सप्तमी सुबह 9:40 तक
फिर कृष्ण अष्टमी
कृष्ण पक्ष की सातवीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 85% पूरा -
वार
गुरुवार
गुरुवार, गुरु का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
रेवती शाम 6:09 तक
फिर अश्विनी
27 नक्षत्रों में सत्ताईसवाँ: निरयण राशिचक्र में 346°40′ से 360° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 48% पूरा -
योग
सुकर्मा रात 9:18 तक
फिर धृति
27 नित्य योगों में सातवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 30% पूरा -
करण
बव सुबह 9:40 तक
फिर बालव रात 8:38 तक
फिर कौलव
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 69% पूरा
पक्ष: कृष्ण
उदया तिथि: कृष्ण सप्तमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: रेवती 2 · सुबह 6:47 · रेवती 3 · दोपहर 12:28 · रेवती 4 · शाम 6:09 · अश्विनी 1 · रात 11:49 · अश्विनी 2 · सुबह 5:28, 18 जुलाई
इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 6:18
- सूर्यास्त
- रात 8:58
- चंद्रोदय
- रात 12:40, 18 जुलाई
- चंद्रास्त
- दोपहर 1:41
- दिनमान
- 14 घंटे 39 मिनट · 36 घटी 40 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 25 सेकंड कम
- रात्रिमान
- 9 घंटे 20 मिनट · 23 घटी 22 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 1:38
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 12:45, 18 जुलाई है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:03 – सुबह 5:41भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 5:06 – सुबह 6:18गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:09 – दोपहर 2:07दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
- अमृत कालदोपहर 3:52 – शाम 5:24हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।राहु काल के साथ: दोपहर 3:52 – शाम 5:18 (86 मिनट)।दुर्मुहूर्त के साथ: शाम 5:03 – शाम 5:24 (21 मिनट)।
- विजय मुहूर्तशाम 4:05 – शाम 5:03दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।राहु काल के साथ: शाम 4:05 – शाम 5:03 (58 मिनट)।
- गोधूलि मुहूर्तरात 8:44 – रात 9:08गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
- सायाह्न सन्ध्यारात 8:58 – रात 10:10गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
- निशिता मुहूर्तरात 1:20 – रात 1:57, 18 जुलाईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- सर्वार्थ सिद्धि योगपूरे दिनवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- यमगण्डसुबह 6:18 – सुबह 8:08वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- वर्ज्यसुबह 6:45 – सुबह 8:16हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
- गुलिक कालसुबह 9:58 – सुबह 11:48वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तसुबह 11:11 – दोपहर 12:10वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- राहु कालदोपहर 3:28 – शाम 5:18वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: दोपहर 3:52 – शाम 5:18 (86 मिनट)।विजय मुहूर्त के साथ: शाम 4:05 – शाम 5:03 (58 मिनट)।
- दुर्मुहूर्तशाम 5:03 – शाम 6:02वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: शाम 5:03 – शाम 5:24 (21 मिनट)।
- भद्रा
- चुने हुए दिन नहीं
- पंचक
- 13 जुलाई, सुबह 9:24 → 17 जुलाई, शाम 6:09
- गंड मूल
- 16 जुलाई, शाम 7:21 → 18 जुलाई, शाम 4:44
- दिशा शूल
- दक्षिणवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:19, 18 जुलाई) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- शुभसुबह 6:18 – सुबह 8:08
- रोगसुबह 8:08 – सुबह 9:58
- उद्वेगसुबह 9:58 – सुबह 11:48
- चरसुबह 11:48 – दोपहर 1:38
- लाभदोपहर 1:38 – दोपहर 3:28
- अमृतदोपहर 3:28 – शाम 5:18
- कालशाम 5:18 – शाम 7:08काल वेला
- शुभशाम 7:08 – रात 8:58वार वेला
चौघड़िया · रात
- अमृतरात 8:58 – रात 10:08
- चररात 10:08 – रात 11:18
- रोगरात 11:18 – रात 12:28, 18 जुलाई
- कालरात 12:28 – रात 1:38, 18 जुलाई
- लाभरात 1:38 – रात 2:49, 18 जुलाईकाल रात्रि
- उद्वेगरात 2:49 – रात 3:59, 18 जुलाई
- शुभरात 3:59 – सुबह 5:09, 18 जुलाई
- अमृतसुबह 5:09 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
होरा
- गुरुसुबह 6:18 – सुबह 7:31
- मंगलसुबह 7:31 – सुबह 8:45
- सूर्यसुबह 8:45 – सुबह 9:58
- शुक्रसुबह 9:58 – सुबह 11:11
- बुधसुबह 11:11 – दोपहर 12:25
- चंद्रदोपहर 12:25 – दोपहर 1:38
- शनिदोपहर 1:38 – दोपहर 2:51
- गुरुदोपहर 2:51 – शाम 4:05
- मंगलशाम 4:05 – शाम 5:18
- सूर्यशाम 5:18 – शाम 6:31
- शुक्रशाम 6:31 – शाम 7:45
- बुधशाम 7:45 – रात 8:58
- चंद्ररात 8:58 – रात 9:45
- शनिरात 9:45 – रात 10:31
- गुरुरात 10:31 – रात 11:18
- मंगलरात 11:18 – रात 12:05, 18 जुलाई
- सूर्यरात 12:05 – रात 12:52, 18 जुलाई
- शुक्ररात 12:52 – रात 1:38, 18 जुलाई
- बुधरात 1:38 – रात 2:25, 18 जुलाई
- चंद्ररात 2:25 – रात 3:12, 18 जुलाई
- शनिरात 3:12 – रात 3:59, 18 जुलाई
- गुरुरात 3:59 – सुबह 4:45, 18 जुलाई
- मंगलसुबह 4:45 – सुबह 5:32, 18 जुलाई
- सूर्यसुबह 5:32 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- धनम्सुबह 6:18 – सुबह 8:08
- सुखम्सुबह 8:08 – सुबह 9:58
- सोरम्सुबह 9:58 – सुबह 11:48
- उत्तिसुबह 11:48 – दोपहर 1:38
- अमृतम्दोपहर 1:38 – दोपहर 3:28
- विषम्दोपहर 3:28 – शाम 5:18
- रोगम्शाम 5:18 – शाम 7:08
- लाभम्शाम 7:08 – रात 8:58
- अमृतम्रात 8:58 – रात 10:08
- विषम्रात 10:08 – रात 11:18
- रोगम्रात 11:18 – रात 12:28, 18 जुलाई
- लाभम्रात 12:28 – रात 1:38, 18 जुलाई
- धनम्रात 1:38 – रात 2:49, 18 जुलाई
- सुखम्रात 2:49 – रात 3:59, 18 जुलाई
- सोरम्रात 3:59 – सुबह 5:09, 18 जुलाई
- उत्तिसुबह 5:09 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- मीन शाम 6:09 तक
- मेष
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्य नक्षत्र
- पुनर्वसु 4
- अगली संक्रांति
- सिंह · 16 अगस्त 2025, शाम 4:23, 16 अगस्त
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- मिथुनसुबह 4:01 – सुबह 6:18द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 5:20
- कर्कसुबह 6:18 – सुबह 8:49चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:58
- सिंहसुबह 8:49 – सुबह 11:20स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 10:25
- कन्यासुबह 11:20 – दोपहर 1:50द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · दोपहर 12:05
- तुलादोपहर 1:50 – शाम 4:22चरपुष्कर भाग 24° · दोपहर 3:52
- वृश्चिकशाम 4:22 – शाम 6:47स्थिरपुष्कर भाग 11° · शाम 5:17
- धनुशाम 6:47 – रात 8:48द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 8:23
- मकररात 8:48 – रात 10:20चरपुष्कर भाग 14° · रात 9:34
- कुंभरात 10:20 – रात 11:34स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 11:08
- मीनरात 11:34 – रात 12:45, 18 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 11:55
- मेषरात 12:45 – रात 2:08, 18 जुलाईचरपुष्कर भाग 21° · रात 1:41, 18 जुलाई
- वृषभरात 2:08 – रात 3:57, 18 जुलाईस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 2:55, 18 जुलाई
- मिथुनरात 3:57 – सुबह 6:14, 18 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 5:17, 18 जुलाई
- कर्कसुबह 6:14 – सुबह 8:46, 18 जुलाईचरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:54, 18 जुलाई
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | कर्क | 0°53′ | पुनर्वसु · 4 | सिंह · 16 अगस्त 2025 |
| चंद्र | मीन | 23°03′ | रेवती · 2 | मेष · 17 जुलाई 2025 |
| मंगल | सिंह | 23°14′ | पूर्वा फाल्गुनी · 3 | कन्या · 28 जुलाई 2025 |
| बुध | कर्क | 21°20′ | आश्लेषा · 2 | सिंह · 30 अगस्त 2025 |
| गुरु | मिथुन | 14°19′ | आर्द्रा · 3 | कर्क · 18 अक्टूबर 2025 |
| शुक्र | वृषभ | 20°04′ | रोहिणी · 4 | मिथुन · 25 जुलाई 2025 |
| शनि वक्री | मीन | 7°42′ | उत्तरा भाद्रपद · 2 | मेष · 2 जून 2027 |
| राहु | कुंभ | 25°34′ | पूर्वा भाद्रपद · 2 | मकर · 25 नवंबर 2026 |
| केतु | सिंह | 25°34′ | पूर्वा फाल्गुनी · 4 | कर्क · 25 नवंबर 2026 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- श्रावण
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- आषाढ़
- विक्रम संवत
- 2082 सिद्धार्थी
- शक संवत
- 1947 विश्वावसु
यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
- ग्रीष्म
- सूर्य के हिसाब से ऋतु
- वर्षा
- अयनांत के हिसाब से अयन
- दक्षिणायन
- मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
- दक्षिणायन
- सौर मास
- श्रावण, दिन 2
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 26 आषाढ़ 1947
- कलि संवत
- 5126
- वर्ष का राजा
- सूर्य
- वर्ष का मंत्री
- सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- बुध
- दुर्गेश
- शनि
- धनेश
- मंगल
- रसेश
- शुक्र
- धान्येश
- चंद्र
- नीरसेश
- बुध
- फलेश
- शनि
- मेघेश
- सूर्य
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
- 24°12′50″
- जूलियन दिन
- 2460873.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2081
- बृहस्पति संवत्सर
- सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
अभी चल रहा है
गुरु अस्त: इस शहर से दिखने के हिसाब से, 7 और दिन (मुहूर्त मार्तंड 3.9; नारद संहिता 29.5) जोड़कर, 31 मई – 17 जुलाई (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 14 जुलाई – 13 अगस्त।
ग्रहण
- खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 7 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
- खंडग्रास सूर्य ग्रहण · रविवार, 21 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- दक्षिण
- चंद्र वास
- उत्तर सुबह 6:18 – शाम 6:09 · पूर्व शाम 6:09 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
- राहु वास
- दक्षिण
- शिव वास
- श्मशान में सुबह 6:18 – सुबह 9:40 · गौरी के साथ सुबह 9:40 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
- अग्नि वास
- पृथ्वी पर सुबह 6:18 – सुबह 9:40 · आकाश में सुबह 9:40 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
- आनंदादि योग
- मित्र सुबह 6:18 – शाम 6:09 · मानस शाम 6:09 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
- तमिल योग
- सिद्ध योग सुबह 6:18 – शाम 6:09 · अमृत योग शाम 6:09 – सुबह 6:19, 18 जुलाई
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07) चुना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:03 – सुबह 5:41) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए यमगण्ड, वर्ज्य, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है।
चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी
- नक्षत्र
- अश्विनी
- सूर्योदय
- सुबह 6:19
- राहु काल
- सुबह 11:48 – दोपहर 1:38
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
कृष्ण सप्तमी सुबह 9:40 तक है, फिर कृष्ण अष्टमी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण अष्टमी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:28 – शाम 5:18 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:03 – सुबह 5:41, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:06 – सुबह 6:18, अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07, अमृत काल दोपहर 3:52 – शाम 5:24 (दोपहर 3:52 – शाम 5:18 राहु काल के साथ; शाम 5:03 – शाम 5:24 दुर्मुहूर्त के साथ), विजय मुहूर्त शाम 4:05 – शाम 5:03 (शाम 4:05 – शाम 5:03 राहु काल के साथ), गोधूलि मुहूर्त रात 8:44 – रात 9:08, सायाह्न सन्ध्या रात 8:58 – रात 10:10, निशिता मुहूर्त रात 1:20 – रात 1:57, 18 जुलाई।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:03 – सुबह 5:41 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन रेवती नक्षत्र है, शाम 6:09 तक; फिर अश्विनी।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 9 अगस्त 2025, अगली अमावस्या 24 जुलाई 2025।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना आषाढ़ है (अमांत; पूर्णिमांत में श्रावण), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
हाँ: पंचक, 13 जुलाई, सुबह 9:24 → 17 जुलाई, शाम 6:09। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह गुरु की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन मीन राशि में है, शाम 6:09 पर मेष में जाएगा।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, गुरुवार को, दिशा शूल दक्षिण दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07) चुना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:03 – सुबह 5:41) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए यमगण्ड, वर्ज्य, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है। चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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