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दैनिक पंचांग · भाद्रपद · विक्रम संवत 2082

Columbus का पंचांग, 10 अगस्त 2025

रविवार, 10 अगस्त 2025

रविवार, 10 अगस्त 2025 को कृष्ण द्वितीया तिथि रात 1:04, 11 अगस्त तक है, उसके बाद कृष्ण तृतीया; नक्षत्र शतभिषा रात 3:31, 11 अगस्त तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    कृष्ण द्वितीया रात 1:04, 11 अगस्त तक

    फिर कृष्ण तृतीया

    कृष्ण पक्ष की दूसरी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    रविवार

    रविवार, सूर्य का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    शतभिषा रात 3:31, 11 अगस्त तक

    फिर पूर्वा भाद्रपद

    27 नक्षत्रों में चौबीसवाँ: निरयण राशिचक्र में 306°40′ से 320° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    शोभन दोपहर 2:32 तक

    फिर अतिगण्ड

    27 नित्य योगों में पाँचवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    तैतिल दोपहर 1:55 तक

    फिर गर रात 1:04, 11 अगस्त तक

    फिर वणिज

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: कृष्ण द्वितीया। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: शतभिषा 1 · सुबह 10:12 · शतभिषा 2 · दोपहर 3:59 · शतभिषा 3 · रात 9:45 · शतभिषा 4 · रात 3:31, 11 अगस्त

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:40
सूर्यास्त
रात 8:34
चंद्रोदय
रात 9:31
चंद्रास्त
सुबह 7:56
दिनमान
13 घंटे 54 मिनट · 34 घटी 47 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 12 सेकंड कम
रात्रिमान
10 घंटे 6 मिनट · 25 घटी 15 पल
मध्याह्न
दोपहर 1:37

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 9:36 है।

कृष्ण पक्ष, आधे से बड़ा घटता चाँद चंद्रमा का 98% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 16.6 दिन अगली पूर्णिमा: 7 सितंबर 2025 अगली अमावस्या: 23 अगस्त 2025

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 6:40सुबह 9:40दोपहर 12:40दोपहर 3:40शाम 6:40रात 9:40रात 12:40रात 3:40सुबह 6:41

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:40दोपहर 2:00रात 8:34

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

रात 8:34रात 2:00सुबह 6:41
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:19 – सुबह 5:59भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:28 – सुबह 6:40गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:09 – दोपहर 2:05दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।यमगण्ड के साथ: दोपहर 1:37 – दोपहर 2:05 (28 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 3:56 – शाम 4:52दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तरात 8:21 – रात 8:45गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।राहु काल के साथ: रात 8:21 – रात 8:34 (13 मिनट)।
  • अमृत कालरात 8:34 – रात 10:07हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।
  • सायाह्न सन्ध्यारात 8:34 – रात 9:46गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 1:17 – रात 1:58, 11 अगस्तहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

चुने हुए दिन कोई विशेष योग नहीं बन रहा।

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चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • वर्ज्यसुबह 11:19 – दोपहर 12:52हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
  • यमगण्डदोपहर 1:37 – दोपहर 3:21वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 1:37 – दोपहर 2:05 (28 मिनट)।
  • गुलिक कालशाम 5:06 – शाम 6:50वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तशाम 6:43 – शाम 7:39वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • राहु कालशाम 6:50 – रात 8:34वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।गोधूलि मुहूर्त के साथ: रात 8:21 – रात 8:34 (13 मिनट)।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
9 अगस्त, शाम 4:41 → 13 अगस्त, रात 11:36
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:41, 11 अगस्त) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

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चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. उद्वेगसुबह 6:40 – सुबह 8:24
  2. चरसुबह 8:24 – सुबह 10:08
  3. लाभसुबह 10:08 – सुबह 11:53
  4. अमृतसुबह 11:53 – दोपहर 1:37वार वेला
  5. कालदोपहर 1:37 – दोपहर 3:21काल वेला
  6. शुभदोपहर 3:21 – शाम 5:06
  7. रोगशाम 5:06 – शाम 6:50
  8. उद्वेगशाम 6:50 – रात 8:34

चौघड़िया · रात

  1. शुभरात 8:34 – रात 9:50
  2. अमृतरात 9:50 – रात 11:06
  3. चररात 11:06 – रात 12:22, 11 अगस्त
  4. रोगरात 12:22 – रात 1:37, 11 अगस्त
  5. कालरात 1:37 – रात 2:53, 11 अगस्त
  6. लाभरात 2:53 – सुबह 4:09, 11 अगस्तकाल रात्रि
  7. उद्वेगसुबह 4:09 – सुबह 5:25, 11 अगस्त
  8. शुभसुबह 5:25 – सुबह 6:41, 11 अगस्त

होरा

  1. सूर्यसुबह 6:40 – सुबह 7:49
  2. शुक्रसुबह 7:49 – सुबह 8:59
  3. बुधसुबह 8:59 – सुबह 10:08
  4. चंद्रसुबह 10:08 – सुबह 11:18
  5. शनिसुबह 11:18 – दोपहर 12:27
  6. गुरुदोपहर 12:27 – दोपहर 1:37
  7. मंगलदोपहर 1:37 – दोपहर 2:47
  8. सूर्यदोपहर 2:47 – दोपहर 3:56
  9. शुक्रदोपहर 3:56 – शाम 5:06
  10. बुधशाम 5:06 – शाम 6:15
  11. चंद्रशाम 6:15 – शाम 7:25
  12. शनिशाम 7:25 – रात 8:34
  13. गुरुरात 8:34 – रात 9:25
  14. मंगलरात 9:25 – रात 10:15
  15. सूर्यरात 10:15 – रात 11:06
  16. शुक्ररात 11:06 – रात 11:56
  17. बुधरात 11:56 – रात 12:47, 11 अगस्त
  18. चंद्ररात 12:47 – रात 1:37, 11 अगस्त
  19. शनिरात 1:37 – रात 2:28, 11 अगस्त
  20. गुरुरात 2:28 – रात 3:18, 11 अगस्त
  21. मंगलरात 3:18 – सुबह 4:09, 11 अगस्त
  22. सूर्यसुबह 4:09 – सुबह 4:59, 11 अगस्त
  23. शुक्रसुबह 4:59 – सुबह 5:50, 11 अगस्त
  24. बुधसुबह 5:50 – सुबह 6:41, 11 अगस्त
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. उत्तिसुबह 6:40 – सुबह 8:24
  2. अमृतम्सुबह 8:24 – सुबह 10:08
  3. रोगम्सुबह 10:08 – सुबह 11:53
  4. लाभम्सुबह 11:53 – दोपहर 1:37
  5. धनम्दोपहर 1:37 – दोपहर 3:21
  6. सुखम्दोपहर 3:21 – शाम 5:06
  7. सोरम्शाम 5:06 – शाम 6:50
  8. विषम्शाम 6:50 – रात 8:34
  1. धनम्रात 8:34 – रात 9:50
  2. सुखम्रात 9:50 – रात 11:06
  3. सोरम्रात 11:06 – रात 12:22, 11 अगस्त
  4. विषम्रात 12:22 – रात 1:37, 11 अगस्त
  5. उत्तिरात 1:37 – रात 2:53, 11 अगस्त
  6. अमृतम्रात 2:53 – सुबह 4:09, 11 अगस्त
  7. रोगम्सुबह 4:09 – सुबह 5:25, 11 अगस्त
  8. लाभम्सुबह 5:25 – सुबह 6:41, 11 अगस्त

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कुंभ
सूर्य राशि
कर्क
सूर्य नक्षत्र
आश्लेषा 3
अगली संक्रांति
सिंह · 16 अगस्त 2025, शाम 4:23, 16 अगस्त

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कर्कसुबह 4:44 – सुबह 7:15चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 5:24
  2. सिंहसुबह 7:15 – सुबह 9:46स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 8:51
  3. कन्यासुबह 9:46 – दोपहर 12:16द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 10:31
  4. तुलादोपहर 12:16 – दोपहर 2:48चरपुष्कर भाग 24° · दोपहर 2:17
  5. वृश्चिकदोपहर 2:48 – शाम 5:13स्थिरपुष्कर भाग 11° · दोपहर 3:43
  6. धनुशाम 5:13 – शाम 7:14द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · शाम 6:49
  7. मकरशाम 7:14 – रात 8:45चरपुष्कर भाग 14° · रात 8:00
  8. कुंभरात 8:45 – रात 9:59स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 9:33
  9. मीनरात 9:59 – रात 11:10द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 10:20
  10. मेषरात 11:10 – रात 12:33, 11 अगस्तचरपुष्कर भाग 21° · रात 12:06, 11 अगस्त
  11. वृषभरात 12:33 – रात 2:22, 11 अगस्तस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 1:20, 11 अगस्त
  12. मिथुनरात 2:22 – सुबह 4:40, 11 अगस्तद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · रात 3:42, 11 अगस्त
  13. कर्कसुबह 4:40 – सुबह 7:11, 11 अगस्तचरपुष्कर भाग 8° · सुबह 5:20, 11 अगस्त

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकर्क23°51′आश्लेषा · 3सिंह · 16 अगस्त 2025
चंद्रकुंभ7°58′शतभिषा · 1मीन · 11 अगस्त 2025
मंगलकन्या7°57′उत्तरा फाल्गुनी · 4तुला · 13 सितंबर 2025
बुध वक्रीकर्क10°05′पुष्य · 3सिंह · 30 अगस्त 2025
गुरुमिथुन19°29′आर्द्रा · 4कर्क · 18 अक्टूबर 2025
शुक्रमिथुन17°45′आर्द्रा · 4कर्क · 20 अगस्त 2025
शनि वक्रीमीन7°04′उत्तरा भाद्रपद · 2मेष · 2 जून 2027
राहुकुंभ24°18′पूर्वा भाद्रपद · 2मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह24°18′पूर्वा फाल्गुनी · 4कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
भाद्रपद
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082 सिद्धार्थी
शक संवत
1947 विश्वावसु

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
वर्षा
सूर्य के हिसाब से ऋतु
वर्षा
अयनांत के हिसाब से अयन
दक्षिणायन
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
दक्षिणायन
सौर मास
श्रावण, दिन 26
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
19 श्रावण 1947
कलि संवत
5126
वर्ष का राजा
सूर्य
वर्ष का मंत्री
सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
बुध
दुर्गेश
शनि
धनेश
मंगल
रसेश
शुक्र
धान्येश
चंद्र
नीरसेश
बुध
फलेश
शनि
मेघेश
सूर्य
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°12′53″
जूलियन दिन
2460897.5
गुजराती विक्रम संवत
2081
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 7 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · रविवार, 21 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पश्चिम
चंद्र वास
पश्चिम सुबह 6:40 – सुबह 6:41, 11 अगस्त
राहु वास
उत्तर
शिव वास
सभा में सुबह 6:40 – रात 1:04, 11 अगस्त · क्रीड़ा में रात 1:04 – सुबह 6:41, 11 अगस्त
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 6:40 – सुबह 6:41, 11 अगस्त
आनंदादि योग
राक्षस सुबह 6:40 – रात 3:31, 11 अगस्त · चर रात 3:31 – सुबह 6:41, 11 अगस्त
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:40 – सुबह 6:41, 11 अगस्त

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:09 – दोपहर 1:37, यमगण्ड से अलग) और अमृत काल (रात 8:34 – रात 10:07) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:19 – सुबह 5:59) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण तृतीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
सूर्योदय
सुबह 6:41
राहु काल
सुबह 8:25 – सुबह 10:09
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 1:09 – दोपहर 2:05
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

कृष्ण द्वितीया रात 1:04, 11 अगस्त तक है, फिर कृष्ण तृतीया।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण तृतीया तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल शाम 6:50 – रात 8:34 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:19 – सुबह 5:59, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:28 – सुबह 6:40, अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:09 – दोपहर 2:05 (दोपहर 1:37 – दोपहर 2:05 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 3:56 – शाम 4:52, गोधूलि मुहूर्त रात 8:21 – रात 8:45 (रात 8:21 – रात 8:34 राहु काल के साथ), अमृत काल रात 8:34 – रात 10:07, सायाह्न सन्ध्या रात 8:34 – रात 9:46, निशिता मुहूर्त रात 1:17 – रात 1:58, 11 अगस्त।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:09 – दोपहर 2:05 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:19 – सुबह 5:59 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन शतभिषा नक्षत्र है, रात 3:31, 11 अगस्त तक; फिर पूर्वा भाद्रपद।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 7 सितंबर 2025, अगली अमावस्या 23 अगस्त 2025।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना भाद्रपद है (पूर्णिमांत; अमांत में श्रावण), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

हाँ: पंचक, 9 अगस्त, शाम 4:41 → 13 अगस्त, रात 11:36। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह सूर्य की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कुंभ राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, रविवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:09 – दोपहर 1:37, यमगण्ड से अलग) और अमृत काल (रात 8:34 – रात 10:07) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:19 – सुबह 5:59) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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