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दैनिक पंचांग · ज्येष्ठ · विक्रम संवत 2083

Columbus का पंचांग, 16 मई 2026

शनिवार, 16 मई 2026

शनिवार, 16 मई 2026 Columbus में अमावस्या तिथि शाम 4:01 तक है, उसके बाद शुक्ल प्रतिपदा; नक्षत्र भरणी सुबह 8:01 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    अमावस्या शाम 4:01 तक

    फिर शुक्ल प्रतिपदा

    अमावस्या तिथि, कृष्ण पक्ष की 15वीं तिथि, जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता।

  2. वार

    शनिवार

    शनिवार, शनि का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    भरणी सुबह 8:01 तक

    फिर कृत्तिका सुबह 5:02, 17 मई तक

    फिर रोहिणी

    27 नक्षत्रों में दूसरा: निरयण राशिचक्र में 13°20′ से 26°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    शोभन रात 8:46 तक

    फिर अतिगण्ड

    27 नित्य योगों में 5वाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    नाग शाम 4:01 तक

    फिर किंस्तुघ्न रात 2:07, 17 मई तक

    फिर बव

    चार स्थिर करणों में से एक, जो महीने में एक बार अमावस्या के आसपास आते हैं; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: अमावस्या। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: भरणी 4 · सुबह 8:01 · कृत्तिका 1 · दोपहर 1:17 · कृत्तिका 2 · शाम 6:32 · कृत्तिका 3 · रात 11:47 · कृत्तिका 4 · सुबह 5:02, 17 मई

इस पेज का हर समय Columbus (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:16
सूर्यास्त
रात 8:41
चंद्रोदय
चुने हुए दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
रात 9:06
दिनमान
14 घंटे 25 मिनट · 36 घटी 4 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 50 सेकंड अधिक
रात्रिमान
9 घंटे 33 मिनट · 23 घटी 54 पल
मध्याह्न
दोपहर 1:29
अमावस्या (नव चंद्र) चंद्रमा का 0% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 28.9 दिन अगली पूर्णिमा: 31 मई 2026 अगली अमावस्या: 16 मई 2026

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 6:16सुबह 9:16दोपहर 12:16दोपहर 3:16शाम 6:15रात 9:15रात 12:15रात 3:15सुबह 6:15

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:16दोपहर 1:00रात 8:41

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

रात 8:41रात 1:00सुबह 6:15
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:59 – सुबह 5:38भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:18 – सुबह 6:16सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:00 – दोपहर 1:57दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 3:53 – शाम 4:51दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।यमगण्ड के साथ: दोपहर 3:53 – शाम 4:51 (58 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तरात 8:41 – रात 9:01गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
  • सायाह्न सन्ध्यारात 8:41 – रात 9:39सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
  • निशिता मुहूर्तरात 1:09 – रात 1:47, 17 मईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
  • अमृत कालरात 2:56 – सुबह 4:20, 17 मईहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • अमृत सिद्धि योगसुबह 5:02 – सुबह 6:15, 17 मईवार और नक्षत्र का विशेष मेल, जिसे अच्छी शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योगसुबह 5:02 – सुबह 6:15, 17 मईवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • दुर्मुहूर्तसुबह 6:16 – सुबह 7:14वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • गुलिक कालसुबह 6:16 – सुबह 8:04वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 7:14 – सुबह 8:11वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • राहु कालसुबह 9:52 – सुबह 11:40वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डदोपहर 3:17 – शाम 5:05वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 3:53 – शाम 4:51 (58 मिनट)।
  • वर्ज्यशाम 6:31 – शाम 7:55हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. कालसुबह 6:16 – सुबह 8:04काल वेला
  2. शुभसुबह 8:04 – सुबह 9:52
  3. रोगसुबह 9:52 – सुबह 11:40
  4. उद्वेगसुबह 11:40 – दोपहर 1:29
  5. चरदोपहर 1:29 – दोपहर 3:17
  6. लाभदोपहर 3:17 – शाम 5:05वार वेला
  7. अमृतशाम 5:05 – शाम 6:53
  8. कालशाम 6:53 – रात 8:41काल वेला

चौघड़िया · रात

  1. लाभरात 8:41 – रात 9:53काल रात्रि
  2. उद्वेगरात 9:53 – रात 11:05
  3. शुभरात 11:05 – रात 12:16, 17 मई
  4. अमृतरात 12:16 – रात 1:28, 17 मई
  5. चररात 1:28 – रात 2:40, 17 मई
  6. रोगरात 2:40 – रात 3:52, 17 मई
  7. कालरात 3:52 – सुबह 5:03, 17 मई
  8. लाभसुबह 5:03 – सुबह 6:15, 17 मईकाल रात्रि

होरा

  1. शनिसुबह 6:16 – सुबह 7:28
  2. गुरुसुबह 7:28 – सुबह 8:40
  3. मंगलसुबह 8:40 – सुबह 9:52
  4. सूर्यसुबह 9:52 – सुबह 11:04
  5. शुक्रसुबह 11:04 – दोपहर 12:17
  6. बुधदोपहर 12:17 – दोपहर 1:29
  7. चंद्रदोपहर 1:29 – दोपहर 2:41
  8. शनिदोपहर 2:41 – दोपहर 3:53
  9. गुरुदोपहर 3:53 – शाम 5:05
  10. मंगलशाम 5:05 – शाम 6:17
  11. सूर्यशाम 6:17 – शाम 7:29
  12. शुक्रशाम 7:29 – रात 8:41
  13. बुधरात 8:41 – रात 9:29
  14. चंद्ररात 9:29 – रात 10:17
  15. शनिरात 10:17 – रात 11:05
  16. गुरुरात 11:05 – रात 11:53
  17. मंगलरात 11:53 – रात 12:40, 17 मई
  18. सूर्यरात 12:40 – रात 1:28, 17 मई
  19. शुक्ररात 1:28 – रात 2:16, 17 मई
  20. बुधरात 2:16 – रात 3:04, 17 मई
  21. चंद्ररात 3:04 – रात 3:52, 17 मई
  22. शनिरात 3:52 – सुबह 4:39, 17 मई
  23. गुरुसुबह 4:39 – सुबह 5:27, 17 मई
  24. मंगलसुबह 5:27 – सुबह 6:15, 17 मई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. सोरम्सुबह 6:16 – सुबह 8:04
  2. उत्तिसुबह 8:04 – सुबह 9:52
  3. विषम्सुबह 9:52 – सुबह 11:40
  4. अमृतम्सुबह 11:40 – दोपहर 1:29
  5. रोगम्दोपहर 1:29 – दोपहर 3:17
  6. लाभम्दोपहर 3:17 – शाम 5:05
  7. धनम्शाम 5:05 – शाम 6:53
  8. सुखम्शाम 6:53 – रात 8:41
  1. लाभम्रात 8:41 – रात 9:53
  2. धनम्रात 9:53 – रात 11:05
  3. सुखम्रात 11:05 – रात 12:16, 17 मई
  4. सोरम्रात 12:16 – रात 1:28, 17 मई
  5. उत्तिरात 1:28 – रात 2:40, 17 मई
  6. विषम्रात 2:40 – रात 3:52, 17 मई
  7. अमृतम्रात 3:52 – सुबह 5:03, 17 मई
  8. सोरम्सुबह 5:03 – सुबह 6:15, 17 मई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
मेष दोपहर 1:17 तक
वृषभ
सूर्य राशि
वृषभ
सूर्य नक्षत्र
कृत्तिका 2
अगली संक्रांति
मिथुन · 15 जून 2026, रात 3:23, 15 जून

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मेषसुबह 4:53 – सुबह 6:16चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 5:49
  2. वृषभसुबह 6:16 – सुबह 8:05स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:03
  3. मिथुनसुबह 8:05 – सुबह 10:23द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 9:25
  4. कर्कसुबह 10:23 – दोपहर 12:54चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 11:03
  5. सिंहदोपहर 12:54 – दोपहर 3:25स्थिरपुष्कर भाग 19° · दोपहर 2:30
  6. कन्यादोपहर 3:25 – शाम 5:55द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · शाम 4:10
  7. तुलाशाम 5:55 – रात 8:27चरपुष्कर भाग 24° · शाम 7:57
  8. वृश्चिकरात 8:27 – रात 10:52स्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 9:22
  9. धनुरात 10:52 – रात 12:53, 17 मईद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 12:28, 17 मई
  10. मकररात 12:53 – रात 2:24, 17 मईचरपुष्कर भाग 14° · रात 1:39, 17 मई
  11. कुंभरात 2:24 – रात 3:38, 17 मईस्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 3:12, 17 मई
  12. मीनरात 3:38 – सुबह 4:50, 17 मईद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 3:59, 17 मई
  13. मेषसुबह 4:50 – सुबह 6:13, 17 मईचरपुष्कर भाग 21° · सुबह 5:45, 17 मई
  14. वृषभसुबह 6:13 – सुबह 8:01, 17 मईस्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 6:59, 17 मई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यवृषभ1°21′कृत्तिका · 2मिथुन · 15 जून 2026
चंद्रमेष25°34′भरणी · 4वृषभ · 16 मई 2026
मंगलमेष3°53′अश्विनी · 2वृषभ · 20 जून 2026
बुध अस्तवृषभ3°34′कृत्तिका · 3मिथुन · 29 मई 2026
गुरुमिथुन27°04′पुनर्वसु · 3कर्क · 1 जून 2026
शुक्रमिथुन2°38′मृगशिरा · 3कर्क · 8 जून 2026
शनिमीन16°34′उत्तरा भाद्रपद · 4मेष · 2 जून 2027
राहुकुंभ11°11′शतभिषा · 2मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह11°11′मघा · 4कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2083 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
ज्येष्ठ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083 रौद्र
शक संवत
1948 पराभव

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
वसंत
सूर्य के अनुसार ऋतु
ग्रीष्म
अयनांत के अनुसार अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
उत्तरायण
सौर मास
ज्येष्ठ, दिन 3
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
26 वैशाख 1948
कलि संवत
5127
वर्ष का राजा
गुरु
वर्ष का मंत्री
मंगल
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
गुरु
दुर्गेश
चंद्र
धनेश
गुरु
रसेश
शनि
धान्येश
बुध
नीरसेश
गुरु
फलेश
चंद्र
मेघेश
चंद्र
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°13′32″
जूलियन दिन
2461176.5
गुजराती विक्रम संवत
2082
बृहस्पति संवत्सर
रौद्र 11 मार्च 2026 से; फिर दुर्मति 7 मार्च 2027 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · बुधवार, 12 अगस्त 2026 · यहाँ से दिखेगा · दोपहर 1:21 – दोपहर 2:00, 12 अगस्त सूतक: रात 1:21 – दोपहर 2:00, 12 अगस्त। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · यहाँ से दिखेगा · रात 10:33, 27 अगस्त – रात 1:53, 28 अगस्त सूतक: दोपहर 1:33, 27 अगस्त – रात 1:53, 28 अगस्त। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पूर्व
चंद्र वास
पूर्व सुबह 6:16 – दोपहर 1:17 · दक्षिण दोपहर 1:17 – सुबह 6:15, 17 मई
राहु वास
पूर्व
शिव वास
गौरी के साथ सुबह 6:16 – शाम 4:01 · श्मशान में शाम 4:01 – सुबह 6:15, 17 मई
अग्नि वास
पाताल में सुबह 6:16 – शाम 4:01 · आकाश में शाम 4:01 – सुबह 6:15, 17 मई
आनंदादि योग
ध्वांक्ष सुबह 6:16 – सुबह 8:01 · ध्वज सुबह 8:01 – सुबह 5:02, 17 मई · श्रीवत्स सुबह 5:02 – सुबह 6:15, 17 मई
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:16 – सुबह 5:02, 17 मई · अमृत योग सुबह 5:02 – सुबह 6:15, 17 मई

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:00 – दोपहर 1:57) और अमृत काल (रात 2:56 – सुबह 4:20, 17 मई) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:59 – सुबह 5:38) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र
रोहिणी
सूर्योदय
सुबह 6:15
राहु काल
शाम 6:54 – रात 8:42
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 1:00 – दोपहर 1:58
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

Columbus में अमावस्या शाम 4:01 तक है, फिर शुक्ल प्रतिपदा।

अगले दिन की तिथि क्या है?

Columbus में अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

Columbus में चुने हुए दिन राहु काल सुबह 9:52 – सुबह 11:40 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में Columbus के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

Columbus में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:59 – सुबह 5:38, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:18 – सुबह 6:16, अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:00 – दोपहर 1:57, विजय मुहूर्त दोपहर 3:53 – शाम 4:51 (दोपहर 3:53 – शाम 4:51 यमगण्ड के साथ), गोधूलि मुहूर्त रात 8:41 – रात 9:01, सायाह्न सन्ध्या रात 8:41 – रात 9:39, निशिता मुहूर्त रात 1:09 – रात 1:47, 17 मई, अमृत काल रात 2:56 – सुबह 4:20, 17 मई।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

Columbus में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:00 – दोपहर 1:57 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

Columbus में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:59 – सुबह 5:38 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन भरणी नक्षत्र है, सुबह 8:01 तक; फिर कृत्तिका।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 31 मई 2026, अगली अमावस्या 16 मई 2026।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना ज्येष्ठ है (पूर्णिमांत; अमांत में वैशाख), विक्रम संवत 2083 रौद्र और शक संवत 1948।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शनि की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन मेष राशि में है, दोपहर 1:17 पर वृषभ में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, शनिवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:00 – दोपहर 1:57) और अमृत काल (रात 2:56 – सुबह 4:20, 17 मई) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:59 – सुबह 5:38) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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