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दैनिक पंचांग · माघ · विक्रम संवत 2083

Columbus का पंचांग, 20 फ़रवरी 2027

शनिवार, 20 फ़रवरी 2027

शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 Columbus में पूर्णिमा तिथि शाम 6:24 तक है, उसके बाद कृष्ण प्रतिपदा; नक्षत्र मघा रात 3:21, 21 फ़रवरी तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    पूर्णिमा शाम 6:24 तक

    फिर कृष्ण प्रतिपदा

    पूर्णिमा तिथि, शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि, जब चंद्रमा पूरा प्रकाशित होता है।

  2. वार

    शनिवार

    शनिवार, शनि का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    मघा रात 3:21, 21 फ़रवरी तक

    फिर पूर्वा फाल्गुनी

    27 नक्षत्रों में 10वाँ: निरयण राशिचक्र में 120° से 133°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    अतिगण्ड रात 12:57, 21 फ़रवरी तक

    फिर सुकर्मा

    27 नित्य योगों में छठा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    विष्टि सुबह 7:55 तक

    फिर बव शाम 6:24 तक

    फिर बालव सुबह 4:56, 21 फ़रवरी तक

    फिर कौलव

    विष्टि, जिसे भद्रा भी कहते हैं, सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: पूर्णिमा। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: मघा 1 · सुबह 11:02 · मघा 2 · शाम 4:28 · मघा 3 · रात 9:54 · मघा 4 · रात 3:21, 21 फ़रवरी

इस पेज का हर समय Columbus (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:18
सूर्यास्त
शाम 6:14
चंद्रोदय
शाम 6:11
चंद्रास्त
चुने हुए दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
10 घंटे 55 मिनट · 27 घटी 18 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 30 सेकंड अधिक
रात्रिमान
13 घंटे 3 मिनट · 32 घटी 39 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:46

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, शाम 6:16 है।

पूर्णिमा (पूर्ण चंद्र) चंद्रमा का 100% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 13.8 दिन अगली पूर्णिमा: 20 फ़रवरी 2027 · सुपरमून अगली अमावस्या: 8 मार्च 2027

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 7:18सुबह 10:18दोपहर 1:18शाम 4:18शाम 7:18रात 10:18रात 1:17सुबह 4:17सुबह 7:17

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:18दोपहर 1:00शाम 6:14

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 6:14रात 1:00सुबह 7:17
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:34 – सुबह 6:26भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।भद्रा के साथ: सुबह 5:34 – सुबह 6:26 (52 मिनट)।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 6:00 – सुबह 7:18सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।भद्रा के साथ: सुबह 6:00 – सुबह 7:18 (78 मिनट)।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:24 – दोपहर 1:08दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:35 – दोपहर 3:19दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।यमगण्ड के साथ: दोपहर 2:35 – दोपहर 3:19 (44 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 6:14 – शाम 6:40गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 6:14 – शाम 7:32सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:19 – रात 1:11, 21 फ़रवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
  • अमृत कालरात 1:11 – रात 2:38, 21 फ़रवरीहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

चुने हुए दिन कोई विशेष योग नहीं बन रहा।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • दुर्मुहूर्तसुबह 7:18 – सुबह 8:02वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • गुलिक कालसुबह 7:18 – सुबह 8:40वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 8:02 – सुबह 8:46वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • राहु कालसुबह 10:02 – सुबह 11:24वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डदोपहर 2:08 – दोपहर 3:30वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 2:35 – दोपहर 3:19 (44 मिनट)।
  • वर्ज्यशाम 4:30 – शाम 5:56हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
भद्रा
19 फ़रवरी, रात 9:30 → 20 फ़रवरी, सुबह 7:55मृत्यु लोक · 19 फ़रवरी, रात 9:30 → 20 फ़रवरी, सुबह 7:55भद्रा पुच्छ · सुबह 4:17 – सुबह 5:19भद्रा मुख · सुबह 5:19 – सुबह 7:03
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
19 फ़रवरी, सुबह 8:06 → 21 फ़रवरी, रात 3:21
दिशा शूल
पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 7:17, 21 फ़रवरी) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. कालसुबह 7:18 – सुबह 8:40काल वेला
  2. शुभसुबह 8:40 – सुबह 10:02
  3. रोगसुबह 10:02 – सुबह 11:24
  4. उद्वेगसुबह 11:24 – दोपहर 12:46
  5. चरदोपहर 12:46 – दोपहर 2:08
  6. लाभदोपहर 2:08 – दोपहर 3:30वार वेला
  7. अमृतदोपहर 3:30 – शाम 4:52
  8. कालशाम 4:52 – शाम 6:14काल वेला

चौघड़िया · रात

  1. लाभशाम 6:14 – शाम 7:51काल रात्रि
  2. उद्वेगशाम 7:51 – रात 9:29
  3. शुभरात 9:29 – रात 11:07
  4. अमृतरात 11:07 – रात 12:45, 21 फ़रवरी
  5. चररात 12:45 – रात 2:23, 21 फ़रवरी
  6. रोगरात 2:23 – सुबह 4:01, 21 फ़रवरी
  7. कालसुबह 4:01 – सुबह 5:39, 21 फ़रवरी
  8. लाभसुबह 5:39 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरीकाल रात्रि

होरा

  1. शनिसुबह 7:18 – सुबह 8:13
  2. गुरुसुबह 8:13 – सुबह 9:08
  3. मंगलसुबह 9:08 – सुबह 10:02
  4. सूर्यसुबह 10:02 – सुबह 10:57
  5. शुक्रसुबह 10:57 – सुबह 11:51
  6. बुधसुबह 11:51 – दोपहर 12:46
  7. चंद्रदोपहर 12:46 – दोपहर 1:41
  8. शनिदोपहर 1:41 – दोपहर 2:35
  9. गुरुदोपहर 2:35 – दोपहर 3:30
  10. मंगलदोपहर 3:30 – शाम 4:24
  11. सूर्यशाम 4:24 – शाम 5:19
  12. शुक्रशाम 5:19 – शाम 6:14
  13. बुधशाम 6:14 – शाम 7:19
  14. चंद्रशाम 7:19 – रात 8:24
  15. शनिरात 8:24 – रात 9:29
  16. गुरुरात 9:29 – रात 10:35
  17. मंगलरात 10:35 – रात 11:40
  18. सूर्यरात 11:40 – रात 12:45, 21 फ़रवरी
  19. शुक्ररात 12:45 – रात 1:51, 21 फ़रवरी
  20. बुधरात 1:51 – रात 2:56, 21 फ़रवरी
  21. चंद्ररात 2:56 – सुबह 4:01, 21 फ़रवरी
  22. शनिसुबह 4:01 – सुबह 5:06, 21 फ़रवरी
  23. गुरुसुबह 5:06 – सुबह 6:12, 21 फ़रवरी
  24. मंगलसुबह 6:12 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. सोरम्सुबह 7:18 – सुबह 8:40
  2. उत्तिसुबह 8:40 – सुबह 10:02
  3. विषम्सुबह 10:02 – सुबह 11:24
  4. अमृतम्सुबह 11:24 – दोपहर 12:46
  5. रोगम्दोपहर 12:46 – दोपहर 2:08
  6. लाभम्दोपहर 2:08 – दोपहर 3:30
  7. धनम्दोपहर 3:30 – शाम 4:52
  8. सुखम्शाम 4:52 – शाम 6:14
  1. लाभम्शाम 6:14 – शाम 7:51
  2. धनम्शाम 7:51 – रात 9:29
  3. सुखम्रात 9:29 – रात 11:07
  4. सोरम्रात 11:07 – रात 12:45, 21 फ़रवरी
  5. उत्तिरात 12:45 – रात 2:23, 21 फ़रवरी
  6. विषम्रात 2:23 – सुबह 4:01, 21 फ़रवरी
  7. अमृतम्सुबह 4:01 – सुबह 5:39, 21 फ़रवरी
  8. सोरम्सुबह 5:39 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
सिंह
सूर्य राशि
कुंभ
सूर्य नक्षत्र
शतभिषा 1
अगली संक्रांति
मीन · 14 मार्च 2027, रात 9:30, 14 मार्च (EDT)

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कुंभसुबह 7:04 – सुबह 8:18स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:51
  2. मीनसुबह 8:18 – सुबह 9:29द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 8:38
  3. मेषसुबह 9:29 – सुबह 10:52चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 10:25
  4. वृषभसुबह 10:52 – दोपहर 12:40स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 11:39
  5. मिथुनदोपहर 12:40 – दोपहर 2:58द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 2:00
  6. कर्कदोपहर 2:58 – शाम 5:29चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 3:38
  7. सिंहशाम 5:29 – रात 8:00स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 7:05
  8. कन्यारात 8:00 – रात 10:30द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 8:45
  9. तुलारात 10:30 – रात 1:02, 21 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 12:32, 21 फ़रवरी
  10. वृश्चिकरात 1:02 – रात 3:27, 21 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 1:57, 21 फ़रवरी
  11. धनुरात 3:27 – सुबह 5:28, 21 फ़रवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 5:03, 21 फ़रवरी
  12. मकरसुबह 5:28 – सुबह 7:00, 21 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 6:14, 21 फ़रवरी
  13. कुंभसुबह 7:00 – सुबह 8:14, 21 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:48, 21 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकुंभ7°23′शतभिषा · 1मीन · 14 मार्च 2027
चंद्रसिंह1°02′मघा · 1कन्या · 22 फ़रवरी 2027
मंगल वक्रीसिंह6°11′मघा · 2कर्क · 9 मार्च 2027
बुध वक्री अस्तकुंभ3°30′धनिष्ठा · 4मकर · 23 फ़रवरी 2027
गुरु वक्रीकर्क26°33′आश्लेषा · 3सिंह · 25 जून 2027
शुक्रधनु25°25′पूर्वाषाढ़ा · 4मकर · 24 फ़रवरी 2027
शनिमीन17°54′रेवती · 1मेष · 2 जून 2027
राहुमकर26°19′धनिष्ठा · 1धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क26°19′आश्लेषा · 3मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2083 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
माघ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
माघ
विक्रम संवत
2083 रौद्र
शक संवत
1948 पराभव

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
शिशिर
सूर्य के अनुसार ऋतु
वसंत
अयनांत के अनुसार अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
उत्तरायण
सौर मास
फाल्गुन, दिन 9
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
1 फाल्गुन 1948
कलि संवत
5127
वर्ष का राजा
गुरु
वर्ष का मंत्री
मंगल
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
गुरु
दुर्गेश
चंद्र
धनेश
गुरु
रसेश
शनि
धान्येश
बुध
नीरसेश
गुरु
फलेश
चंद्र
मेघेश
चंद्र
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°14′10″
जूलियन दिन
2461456.5
गुजराती विक्रम संवत
2083
बृहस्पति संवत्सर
रौद्र 11 मार्च 2026 से; फिर दुर्मति 7 मार्च 2027 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण · शनिवार, 20 फ़रवरी 2027 · यहाँ से दिखेगा · शाम 4:12 – रात 8:14
  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण · रविवार, 18 जुलाई 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · सोमवार, 2 अगस्त 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 17 अगस्त 2027 · यहाँ से दिखेगा · रात 1:24 (EDT) – सुबह 5:04, 17 अगस्त (EDT)
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पूर्व
चंद्र वास
पूर्व सुबह 7:18 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी
राहु वास
पूर्व
शिव वास
श्मशान में सुबह 7:18 – शाम 6:24 · गौरी के साथ शाम 6:24 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 7:18 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी
आनंदादि योग
पद्म सुबह 7:18 – रात 3:21, 21 फ़रवरी · लुम्बक रात 3:21 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी
तमिल योग
अमृत योग सुबह 7:18 – रात 3:21, 21 फ़रवरी · सिद्ध योग रात 3:21 – सुबह 7:17, 21 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:24 – दोपहर 1:08) और अमृत काल (रात 1:11 – रात 2:38, 21 फ़रवरी) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:34 – सुबह 6:26) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी
सूर्योदय
सुबह 7:17
राहु काल
शाम 4:52 – शाम 6:15
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:24 – दोपहर 1:08
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

Columbus में पूर्णिमा शाम 6:24 तक है, फिर कृष्ण प्रतिपदा।

अगले दिन की तिथि क्या है?

Columbus में अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

Columbus में चुने हुए दिन राहु काल सुबह 10:02 – सुबह 11:24 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में Columbus के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

Columbus में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:34 – सुबह 6:26 (सुबह 5:34 – सुबह 6:26 भद्रा के साथ), प्रातः सन्ध्या सुबह 6:00 – सुबह 7:18 (सुबह 6:00 – सुबह 7:18 भद्रा के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:24 – दोपहर 1:08, विजय मुहूर्त दोपहर 2:35 – दोपहर 3:19 (दोपहर 2:35 – दोपहर 3:19 यमगण्ड के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 6:14 – शाम 6:40, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:14 – शाम 7:32, निशिता मुहूर्त रात 12:19 – रात 1:11, 21 फ़रवरी, अमृत काल रात 1:11 – रात 2:38, 21 फ़रवरी।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

Columbus में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:24 – दोपहर 1:08 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

Columbus में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:34 – सुबह 6:26 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन मघा नक्षत्र है, रात 3:21, 21 फ़रवरी तक; फिर पूर्वा फाल्गुनी।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 20 फ़रवरी 2027, अगली अमावस्या 8 मार्च 2027।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना माघ है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2083 रौद्र और शक संवत 1948।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

हाँ, भद्रा 19 फ़रवरी, रात 9:30 → 20 फ़रवरी, सुबह 7:55। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शनि की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन सिंह राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, शनिवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:24 – दोपहर 1:08) और अमृत काल (रात 1:11 – रात 2:38, 21 फ़रवरी) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:34 – सुबह 6:26) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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