वह शहर चुनें जहाँ आप अभी रहते हैं।

दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2083

Columbus का पंचांग, 18 मार्च 2027

गुरुवार, 18 मार्च 2027

गुरुवार, 18 मार्च 2027 Columbus में शुक्ल एकादशी तिथि शाम 4:22 तक है, उसके बाद शुक्ल द्वादशी; नक्षत्र पुष्य शाम 5:51 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल एकादशी शाम 4:22 तक

    फिर शुक्ल द्वादशी

    शुक्ल पक्ष की 11वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    गुरुवार

    गुरुवार, गुरु का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    पुष्य शाम 5:51 तक

    फिर आश्लेषा

    27 नक्षत्रों में 8वाँ: निरयण राशिचक्र में 93°20′ से 106°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    अतिगण्ड शाम 5:05 तक

    फिर सुकर्मा

    27 नित्य योगों में छठा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    विष्टि शाम 4:22 तक

    फिर बव रात 3:05, 19 मार्च तक

    फिर बालव

    विष्टि, जिसे भद्रा भी कहते हैं, सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल एकादशी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: पुष्य 3 · दोपहर 12:18 · पुष्य 4 · शाम 5:51 · आश्लेषा 1 · रात 11:24 · आश्लेषा 2 · सुबह 4:57, 19 मार्च

इस पेज का हर समय Columbus (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:39
सूर्यास्त
शाम 7:42
चंद्रोदय
दोपहर 3:31
चंद्रास्त
सुबह 6:01, 19 मार्च
दिनमान
12 घंटे 2 मिनट · 30 घटी 7 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 39 सेकंड अधिक
रात्रिमान
11 घंटे 55 मिनट · 29 घटी 49 पल
मध्याह्न
दोपहर 1:40

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, दोपहर 3:36 है।

शुक्ल पक्ष, आधे से बड़ा बढ़ता चाँद चंद्रमा का 80% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 10.1 दिन अगली पूर्णिमा: 22 मार्च 2027 अगली अमावस्या: 6 अप्रैल 2027

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 7:39सुबह 10:39दोपहर 1:39शाम 4:38शाम 7:38रात 10:38रात 1:38सुबह 4:37सुबह 7:37

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:39दोपहर 2:00शाम 7:42

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 7:42रात 2:00सुबह 7:37
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 6:03 – सुबह 6:51भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।भद्रा के साथ: सुबह 6:03 – सुबह 6:51 (48 मिनट)।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 6:27 – सुबह 7:39सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।भद्रा के साथ: सुबह 6:27 – सुबह 7:39 (72 मिनट)।
  • अमृत कालसुबह 11:56 – दोपहर 1:24हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।भद्रा के साथ: सुबह 11:56 – दोपहर 1:24 (88 मिनट)।दुर्मुहूर्त के साथ: सुबह 11:56 – दोपहर 12:28 (32 मिनट)।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:16 – दोपहर 2:04दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।भद्रा के साथ: दोपहर 1:16 – दोपहर 2:04 (48 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 3:41 – शाम 4:29दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।भद्रा के साथ: दोपहर 3:41 – शाम 4:22 (41 मिनट)।राहु काल के साथ: दोपहर 3:41 – शाम 4:29 (48 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 7:42 – रात 8:06गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 7:42 – रात 8:53सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
  • निशिता मुहूर्तरात 1:16 – रात 2:03, 19 मार्चहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • गुरु पुष्य योगसुबह 7:39 – शाम 5:51गुरुवार को पुष्य नक्षत्र; पढ़ाई, नए काम और सोना या नई चीज़ें घर लाने के लिए पसंदीदा समय।
  • अमृत सिद्धि योगसुबह 7:39 – शाम 5:51वार और नक्षत्र का विशेष मेल, जिसे अच्छी शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योगसुबह 7:39 – शाम 5:51वार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
  • रवि योगसुबह 7:39 – शाम 5:51चंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • यमगण्डसुबह 7:39 – सुबह 9:09वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • गुलिक कालसुबह 10:40 – दोपहर 12:10वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 11:40 – दोपहर 12:28वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: सुबह 11:56 – दोपहर 12:28 (32 मिनट)।
  • राहु कालदोपहर 3:11 – शाम 4:41वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 3:41 – शाम 4:29 (48 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तशाम 4:29 – शाम 5:17वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यसुबह 5:41 – सुबह 7:10, 19 मार्चहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
भद्रा
सुबह 5:38 – शाम 4:22मृत्यु लोक · सुबह 5:38 – शाम 4:22भद्रा पुच्छ · सुबह 9:55 – सुबह 11:00भद्रा मुख · सुबह 11:00 – दोपहर 12:47भद्रा परिहार · सुबह 7:39 – शाम 4:22
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
18 मार्च, शाम 5:51 → 20 मार्च, दोपहर 2:15
दिशा शूल
दक्षिणवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 7:37, 19 मार्च) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. शुभसुबह 7:39 – सुबह 9:09
  2. रोगसुबह 9:09 – सुबह 10:40
  3. उद्वेगसुबह 10:40 – दोपहर 12:10
  4. चरदोपहर 12:10 – दोपहर 1:40
  5. लाभदोपहर 1:40 – दोपहर 3:11
  6. अमृतदोपहर 3:11 – शाम 4:41
  7. कालशाम 4:41 – शाम 6:11काल वेला
  8. शुभशाम 6:11 – शाम 7:42वार वेला

चौघड़िया · रात

  1. अमृतशाम 7:42 – रात 9:11
  2. चररात 9:11 – रात 10:41
  3. रोगरात 10:41 – रात 12:10, 19 मार्च
  4. कालरात 12:10 – रात 1:40, 19 मार्च
  5. लाभरात 1:40 – रात 3:09, 19 मार्चकाल रात्रि
  6. उद्वेगरात 3:09 – सुबह 4:38, 19 मार्च
  7. शुभसुबह 4:38 – सुबह 6:08, 19 मार्च
  8. अमृतसुबह 6:08 – सुबह 7:37, 19 मार्च

होरा

  1. गुरुसुबह 7:39 – सुबह 8:39
  2. मंगलसुबह 8:39 – सुबह 9:39
  3. सूर्यसुबह 9:39 – सुबह 10:40
  4. शुक्रसुबह 10:40 – सुबह 11:40
  5. बुधसुबह 11:40 – दोपहर 12:40
  6. चंद्रदोपहर 12:40 – दोपहर 1:40
  7. शनिदोपहर 1:40 – दोपहर 2:41
  8. गुरुदोपहर 2:41 – दोपहर 3:41
  9. मंगलदोपहर 3:41 – शाम 4:41
  10. सूर्यशाम 4:41 – शाम 5:41
  11. शुक्रशाम 5:41 – शाम 6:42
  12. बुधशाम 6:42 – शाम 7:42
  13. चंद्रशाम 7:42 – रात 8:41
  14. शनिरात 8:41 – रात 9:41
  15. गुरुरात 9:41 – रात 10:41
  16. मंगलरात 10:41 – रात 11:40
  17. सूर्यरात 11:40 – रात 12:40, 19 मार्च
  18. शुक्ररात 12:40 – रात 1:40, 19 मार्च
  19. बुधरात 1:40 – रात 2:39, 19 मार्च
  20. चंद्ररात 2:39 – रात 3:39, 19 मार्च
  21. शनिरात 3:39 – सुबह 4:38, 19 मार्च
  22. गुरुसुबह 4:38 – सुबह 5:38, 19 मार्च
  23. मंगलसुबह 5:38 – सुबह 6:38, 19 मार्च
  24. सूर्यसुबह 6:38 – सुबह 7:37, 19 मार्च
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. धनम्सुबह 7:39 – सुबह 9:09
  2. सुखम्सुबह 9:09 – सुबह 10:40
  3. सोरम्सुबह 10:40 – दोपहर 12:10
  4. उत्तिदोपहर 12:10 – दोपहर 1:40
  5. अमृतम्दोपहर 1:40 – दोपहर 3:11
  6. विषम्दोपहर 3:11 – शाम 4:41
  7. रोगम्शाम 4:41 – शाम 6:11
  8. लाभम्शाम 6:11 – शाम 7:42
  1. अमृतम्शाम 7:42 – रात 9:11
  2. विषम्रात 9:11 – रात 10:41
  3. रोगम्रात 10:41 – रात 12:10, 19 मार्च
  4. लाभम्रात 12:10 – रात 1:40, 19 मार्च
  5. धनम्रात 1:40 – रात 3:09, 19 मार्च
  6. सुखम्रात 3:09 – सुबह 4:38, 19 मार्च
  7. सोरम्सुबह 4:38 – सुबह 6:08, 19 मार्च
  8. उत्तिसुबह 6:08 – सुबह 7:37, 19 मार्च

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कर्क
सूर्य राशि
मीन
सूर्य नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 1
अगली संक्रांति
मेष · 14 अप्रैल 2027, सुबह 5:58, 14 अप्रैल

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मीनसुबह 7:35 – सुबह 8:46द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 7:56
  2. मेषसुबह 8:46 – सुबह 10:09चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 9:42
  3. वृषभसुबह 10:09 – सुबह 11:58स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 10:56
  4. मिथुनसुबह 11:58 – दोपहर 2:16द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 1:18
  5. कर्कदोपहर 2:16 – शाम 4:47चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 2:56
  6. सिंहशाम 4:47 – शाम 7:18स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 6:23
  7. कन्याशाम 7:18 – रात 9:48द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 8:03
  8. तुलारात 9:48 – रात 12:20, 19 मार्चचरपुष्कर भाग 24° · रात 11:50
  9. वृश्चिकरात 12:20 – रात 2:45, 19 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 1:15, 19 मार्च
  10. धनुरात 2:45 – सुबह 4:46, 19 मार्चद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 4:21, 19 मार्च
  11. मकरसुबह 4:46 – सुबह 6:17, 19 मार्चचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:32, 19 मार्च
  12. कुंभसुबह 6:17 – सुबह 7:31, 19 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:05, 19 मार्च
  13. मीनसुबह 7:31 – सुबह 8:43, 19 मार्चद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 7:52, 19 मार्च

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमीन3°25′उत्तरा भाद्रपद · 1मेष · 14 अप्रैल 2027
चंद्रकर्क10°32′पुष्य · 3सिंह · 19 मार्च 2027
मंगल वक्रीकर्क27°57′आश्लेषा · 4सिंह · 26 अप्रैल 2027
बुधकुंभ5°50′धनिष्ठा · 4मीन · 5 अप्रैल 2027
गुरु वक्रीकर्क23°47′आश्लेषा · 3सिंह · 25 जून 2027
शुक्रमकर26°19′धनिष्ठा · 1कुंभ · 21 मार्च 2027
शनिमीन20°54′रेवती · 2मेष · 2 जून 2027
राहुमकर25°49′धनिष्ठा · 1धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क25°49′आश्लेषा · 3मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2083 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
फाल्गुन
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083 रौद्र
शक संवत
1948 पराभव

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
शिशिर
सूर्य के अनुसार ऋतु
वसंत
अयनांत के अनुसार अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
उत्तरायण
सौर मास
चैत्र, दिन 5
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
27 फाल्गुन 1948
कलि संवत
5127
वर्ष का राजा
गुरु
वर्ष का मंत्री
मंगल
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
गुरु
दुर्गेश
चंद्र
धनेश
गुरु
रसेश
शनि
धान्येश
बुध
नीरसेश
गुरु
फलेश
चंद्र
मेघेश
चंद्र
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°14′14″
जूलियन दिन
2461482.5
गुजराती विक्रम संवत
2083
बृहस्पति संवत्सर
दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

अभी चल रहा है

  • खरमास · 14 अप्रैल 2027 तक

ग्रहण

  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण · रविवार, 18 जुलाई 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · सोमवार, 2 अगस्त 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 17 अगस्त 2027 · यहाँ से दिखेगा · रात 1:24 – सुबह 5:04, 17 अगस्त
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
दक्षिण
चंद्र वास
उत्तर सुबह 7:39 – सुबह 7:37, 19 मार्च
राहु वास
दक्षिण
शिव वास
क्रीड़ा में सुबह 7:39 – शाम 4:22 · कैलाश पर शाम 4:22 – सुबह 7:37, 19 मार्च
अग्नि वास
आकाश में सुबह 7:39 – शाम 4:22 · पाताल में शाम 4:22 – सुबह 7:37, 19 मार्च
आनंदादि योग
शुभ सुबह 7:39 – शाम 5:51 · अमृत शाम 5:51 – सुबह 7:37, 19 मार्च
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 7:39 – सुबह 7:37, 19 मार्च

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 6:03 – सुबह 6:51) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल द्वादशी
नक्षत्र
आश्लेषा
सूर्योदय
सुबह 7:37
राहु काल
दोपहर 12:09 – दोपहर 1:40
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 1:16 – दोपहर 2:04
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

OfficialAstrology™

गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

Columbus में शुक्ल एकादशी शाम 4:22 तक है, फिर शुक्ल द्वादशी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

Columbus में अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल द्वादशी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

Columbus में चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:11 – शाम 4:41 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में Columbus के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

Columbus में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 6:03 – सुबह 6:51 (सुबह 6:03 – सुबह 6:51 भद्रा के साथ), प्रातः सन्ध्या सुबह 6:27 – सुबह 7:39 (सुबह 6:27 – सुबह 7:39 भद्रा के साथ), अमृत काल सुबह 11:56 – दोपहर 1:24 (सुबह 11:56 – दोपहर 1:24 भद्रा के साथ; सुबह 11:56 – दोपहर 12:28 दुर्मुहूर्त के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:16 – दोपहर 2:04 (दोपहर 1:16 – दोपहर 2:04 भद्रा के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 3:41 – शाम 4:29 (दोपहर 3:41 – शाम 4:22 भद्रा के साथ; दोपहर 3:41 – शाम 4:29 राहु काल के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 7:42 – रात 8:06, सायाह्न सन्ध्या शाम 7:42 – रात 8:53, निशिता मुहूर्त रात 1:16 – रात 2:03, 19 मार्च।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

Columbus में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:16 – दोपहर 2:04 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

Columbus में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 6:03 – सुबह 6:51 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन पुष्य नक्षत्र है, शाम 5:51 तक; फिर आश्लेषा।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 22 मार्च 2027, अगली अमावस्या 6 अप्रैल 2027।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना फाल्गुन है (पूर्णिमांत; अमांत में फाल्गुन), विक्रम संवत 2083 रौद्र और शक संवत 1948।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

हाँ, भद्रा सुबह 5:38 – शाम 4:22। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह गुरु की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कर्क राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, गुरुवार को, दिशा शूल दक्षिण दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

चुना हुआ दिन कैसा है?

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 6:03 – सुबह 6:51) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

दैनिक पंचांग

आपकी अपनी कुंडली, इसी सटीकता से।

पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक है। आपकी जन्मपत्रिका केवल आपकी है।

मेरी जन्मपत्रिका बनाएँ