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दैनिक पंचांग · माघ · विक्रम संवत 2084

Columbus का पंचांग, 28 जनवरी 2028

शुक्रवार, 28 जनवरी 2028

शुक्रवार, 28 जनवरी 2028 को शुक्ल द्वितीया तिथि दोपहर 3:32 तक है, उसके बाद शुक्ल तृतीया; नक्षत्र धनिष्ठा दोपहर 12:26 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल द्वितीया दोपहर 3:32 तक

    फिर शुक्ल तृतीया

    शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    शुक्रवार

    शुक्रवार, शुक्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    धनिष्ठा दोपहर 12:26 तक

    फिर शतभिषा

    27 नक्षत्रों में तेईसवाँ: निरयण राशिचक्र में 293°20′ से 306°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    वरीयान सुबह 5:48, 29 जनवरी तक

    फिर परिघ

    27 नित्य योगों में अठारहवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    कौलव दोपहर 3:32 तक

    फिर तैतिल सुबह 4:53, 29 जनवरी तक

    फिर गर

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल द्वितीया। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: धनिष्ठा 4 · दोपहर 12:26 · शतभिषा 1 · शाम 7:13 · शतभिषा 2 · रात 2:00, 29 जनवरी

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:44
सूर्यास्त
शाम 5:46
चंद्रोदय
सुबह 8:37
चंद्रास्त
शाम 7:58
दिनमान
10 घंटे 1 मिनट · 25 घटी 3 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 0 सेकंड अधिक
रात्रिमान
13 घंटे 57 मिनट · 34 घटी 55 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:45

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, सुबह 8:41 है।

शुक्ल पक्ष, बढ़ता हँसिया चाँद चंद्रमा का 3% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 1.9 दिन अगली पूर्णिमा: 10 फ़रवरी 2028 · सुपरमून अगली अमावस्या: 25 फ़रवरी 2028

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 7:44सुबह 10:44दोपहर 1:44शाम 4:44शाम 7:44रात 10:44रात 1:44सुबह 4:44सुबह 7:44

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:44दोपहर 1:00शाम 5:46

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 5:46रात 1:00सुबह 7:44
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:52 – सुबह 6:48भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 6:32 – सुबह 7:44गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:25 – दोपहर 1:05दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।राहु काल के साथ: दोपहर 12:25 – दोपहर 12:45 (20 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:25 – दोपहर 3:05दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 5:32 – शाम 5:56गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 5:46 – शाम 6:58गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:17 – रात 1:13, 29 जनवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
  • अमृत कालसुबह 7:25 – सुबह 9:13, 29 जनवरीहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

चुने हुए दिन कोई विशेष योग नहीं बन रहा।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • गुलिक कालसुबह 9:00 – सुबह 10:15वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 9:45 – सुबह 10:25वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • राहु कालसुबह 11:30 – दोपहर 12:45वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:25 – दोपहर 12:45 (20 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 1:05 – दोपहर 1:45वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डदोपहर 3:15 – शाम 4:31वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यरात 8:34 – रात 10:23हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
27 जनवरी, रात 10:52 → 1 फ़रवरी, रात 11:28
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 7:44, 29 जनवरी) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. चरसुबह 7:44 – सुबह 9:00
  2. लाभसुबह 9:00 – सुबह 10:15
  3. अमृतसुबह 10:15 – सुबह 11:30वार वेला
  4. कालसुबह 11:30 – दोपहर 12:45काल वेला
  5. शुभदोपहर 12:45 – दोपहर 2:00
  6. रोगदोपहर 2:00 – दोपहर 3:15
  7. उद्वेगदोपहर 3:15 – शाम 4:31
  8. चरशाम 4:31 – शाम 5:46

चौघड़िया · रात

  1. रोगशाम 5:46 – शाम 7:30
  2. कालशाम 7:30 – रात 9:15
  3. लाभरात 9:15 – रात 11:00काल रात्रि
  4. उद्वेगरात 11:00 – रात 12:45, 29 जनवरी
  5. शुभरात 12:45 – रात 2:29, 29 जनवरी
  6. अमृतरात 2:29 – सुबह 4:14, 29 जनवरी
  7. चरसुबह 4:14 – सुबह 5:59, 29 जनवरी
  8. रोगसुबह 5:59 – सुबह 7:44, 29 जनवरी

होरा

  1. शुक्रसुबह 7:44 – सुबह 8:35
  2. बुधसुबह 8:35 – सुबह 9:25
  3. चंद्रसुबह 9:25 – सुबह 10:15
  4. शनिसुबह 10:15 – सुबह 11:05
  5. गुरुसुबह 11:05 – सुबह 11:55
  6. मंगलसुबह 11:55 – दोपहर 12:45
  7. सूर्यदोपहर 12:45 – दोपहर 1:35
  8. शुक्रदोपहर 1:35 – दोपहर 2:25
  9. बुधदोपहर 2:25 – दोपहर 3:15
  10. चंद्रदोपहर 3:15 – शाम 4:05
  11. शनिशाम 4:05 – शाम 4:56
  12. गुरुशाम 4:56 – शाम 5:46
  13. मंगलशाम 5:46 – शाम 6:55
  14. सूर्यशाम 6:55 – रात 8:05
  15. शुक्ररात 8:05 – रात 9:15
  16. बुधरात 9:15 – रात 10:25
  17. चंद्ररात 10:25 – रात 11:35
  18. शनिरात 11:35 – रात 12:45, 29 जनवरी
  19. गुरुरात 12:45 – रात 1:54, 29 जनवरी
  20. मंगलरात 1:54 – रात 3:04, 29 जनवरी
  21. सूर्यरात 3:04 – सुबह 4:14, 29 जनवरी
  22. शुक्रसुबह 4:14 – सुबह 5:24, 29 जनवरी
  23. बुधसुबह 5:24 – सुबह 6:34, 29 जनवरी
  24. चंद्रसुबह 6:34 – सुबह 7:44, 29 जनवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. सुखम्सुबह 7:44 – सुबह 9:00
  2. सोरम्सुबह 9:00 – सुबह 10:15
  3. उत्तिसुबह 10:15 – सुबह 11:30
  4. विषम्सुबह 11:30 – दोपहर 12:45
  5. अमृतम्दोपहर 12:45 – दोपहर 2:00
  6. रोगम्दोपहर 2:00 – दोपहर 3:15
  7. लाभम्दोपहर 3:15 – शाम 4:31
  8. धनम्शाम 4:31 – शाम 5:46
  1. रोगम्शाम 5:46 – शाम 7:30
  2. लाभम्शाम 7:30 – रात 9:15
  3. धनम्रात 9:15 – रात 11:00
  4. सुखम्रात 11:00 – रात 12:45, 29 जनवरी
  5. सोरम्रात 12:45 – रात 2:29, 29 जनवरी
  6. उत्तिरात 2:29 – सुबह 4:14, 29 जनवरी
  7. विषम्सुबह 4:14 – सुबह 5:59, 29 जनवरी
  8. अमृतम्सुबह 5:59 – सुबह 7:44, 29 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कुंभ
सूर्य राशि
मकर
सूर्य नक्षत्र
श्रवण 2
अगली संक्रांति
कुंभ · 13 फ़रवरी 2028, सुबह 5:53, 13 फ़रवरी

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मकरसुबह 7:04 – सुबह 8:35चरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:49
  2. कुंभसुबह 8:35 – सुबह 9:49स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 9:23
  3. मीनसुबह 9:49 – सुबह 11:00द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 10:10
  4. मेषसुबह 11:00 – दोपहर 12:23चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 11:56
  5. वृषभदोपहर 12:23 – दोपहर 2:12स्थिरपुष्कर भाग 14° · दोपहर 1:10
  6. मिथुनदोपहर 2:12 – शाम 4:30द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 3:32
  7. कर्कशाम 4:30 – शाम 7:01चरपुष्कर भाग 8° · शाम 5:10
  8. सिंहशाम 7:01 – रात 9:32स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 8:37
  9. कन्यारात 9:32 – रात 12:02, 29 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 10:17
  10. तुलारात 12:02 – रात 2:34, 29 जनवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 2:03, 29 जनवरी
  11. वृश्चिकरात 2:34 – सुबह 4:59, 29 जनवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 3:29, 29 जनवरी
  12. धनुसुबह 4:59 – सुबह 7:00, 29 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 6:34, 29 जनवरी
  13. मकरसुबह 7:00 – सुबह 8:31, 29 जनवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:45, 29 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमकर13°52′श्रवण · 2कुंभ · 13 फ़रवरी 2028
चंद्रकुंभ4°22′धनिष्ठा · 4मीन · 30 जनवरी 2028
मंगल अस्तमकर25°20′धनिष्ठा · 1कुंभ · 3 फ़रवरी 2028
बुध वक्री अस्तमकर23°52′धनिष्ठा · 1कुंभ · 8 मार्च 2028
गुरु वक्रीकन्या2°50′उत्तरा फाल्गुनी · 2सिंह · 28 फ़रवरी 2028
शुक्रकुंभ24°03′पूर्वा भाद्रपद · 2मीन · 2 फ़रवरी 2028
शनिमीन27°54′रेवती · 4मेष · 23 फ़रवरी 2028
राहुमकर8°07′उत्तराषाढ़ा · 4धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क8°07′पुष्य · 2मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
माघ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
माघ
विक्रम संवत
2084 दुर्मति
शक संवत
1949 प्लवंग

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
शिशिर
सूर्य के हिसाब से ऋतु
शिशिर
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
माघ, दिन 15
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
8 माघ 1949
कलि संवत
5128
वर्ष का राजा
बुध
वर्ष का मंत्री
बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
शुक्र
दुर्गेश
मंगल
धनेश
शुक्र
रसेश
सूर्य
धान्येश
गुरु
नीरसेश
शुक्र
फलेश
मंगल
मेघेश
मंगल
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°14′57″
जूलियन दिन
2461798.5
गुजराती विक्रम संवत
2084
बृहस्पति संवत्सर
दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · शुक्रवार, 21 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पश्चिम
चंद्र वास
पश्चिम सुबह 7:44 – सुबह 7:44, 29 जनवरी
राहु वास
दक्षिण-पूर्व
शिव वास
गौरी के साथ सुबह 7:44 – दोपहर 3:32 · सभा में दोपहर 3:32 – सुबह 7:44, 29 जनवरी
अग्नि वास
आकाश में सुबह 7:44 – दोपहर 3:32 · पाताल में दोपहर 3:32 – सुबह 7:44, 29 जनवरी
आनंदादि योग
धाता सुबह 7:44 – दोपहर 12:26 · सौम्य दोपहर 12:26 – सुबह 7:44, 29 जनवरी
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 7:44 – सुबह 7:44, 29 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:45 – दोपहर 1:05, राहु काल से अलग) और अमृत काल (सुबह 7:25 – सुबह 9:13, 29 जनवरी) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:52 – सुबह 6:48) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल तृतीया
नक्षत्र
शतभिषा
सूर्योदय
सुबह 7:44
राहु काल
सुबह 10:14 – सुबह 11:30
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:25 – दोपहर 1:05
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

शुक्ल द्वितीया दोपहर 3:32 तक है, फिर शुक्ल तृतीया।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल तृतीया तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल सुबह 11:30 – दोपहर 12:45 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:52 – सुबह 6:48, प्रातः सन्ध्या सुबह 6:32 – सुबह 7:44, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:25 – दोपहर 1:05 (दोपहर 12:25 – दोपहर 12:45 राहु काल के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:25 – दोपहर 3:05, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:32 – शाम 5:56, सायाह्न सन्ध्या शाम 5:46 – शाम 6:58, निशिता मुहूर्त रात 12:17 – रात 1:13, 29 जनवरी, अमृत काल सुबह 7:25 – सुबह 9:13, 29 जनवरी।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:25 – दोपहर 1:05 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:52 – सुबह 6:48 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन धनिष्ठा नक्षत्र है, दोपहर 12:26 तक; फिर शतभिषा।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 10 फ़रवरी 2028, अगली अमावस्या 25 फ़रवरी 2028।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना माघ है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

हाँ: पंचक, 27 जनवरी, रात 10:52 → 1 फ़रवरी, रात 11:28। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शुक्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कुंभ राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, शुक्रवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:45 – दोपहर 1:05, राहु काल से अलग) और अमृत काल (सुबह 7:25 – सुबह 9:13, 29 जनवरी) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:52 – सुबह 6:48) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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