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दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2084

Columbus का पंचांग, 16 फ़रवरी 2028

बुधवार, 16 फ़रवरी 2028

बुधवार, 16 फ़रवरी 2028 को कृष्ण सप्तमी तिथि दोपहर 3:16 तक है, उसके बाद कृष्ण अष्टमी; नक्षत्र विशाखा रात 2:03, 17 फ़रवरी तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    कृष्ण सप्तमी दोपहर 3:16 तक

    फिर कृष्ण अष्टमी

    कृष्ण पक्ष की सातवीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    बुधवार

    बुधवार, बुध का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    विशाखा रात 2:03, 17 फ़रवरी तक

    फिर अनुराधा

    27 नक्षत्रों में सोलहवाँ: निरयण राशिचक्र में 200° से 213°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    वृद्धि सुबह 8:16 तक

    फिर ध्रुव सुबह 6:49, 17 फ़रवरी तक

    फिर व्याघात

    27 नित्य योगों में ग्यारहवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    बव दोपहर 3:16 तक

    फिर बालव रात 3:08, 17 फ़रवरी तक

    फिर कौलव

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: कृष्ण सप्तमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: विशाखा 1 · सुबह 7:54 · विशाखा 2 · दोपहर 1:54 · विशाखा 3 · शाम 7:57 · विशाखा 4 · रात 2:03, 17 फ़रवरी

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:24
सूर्यास्त
शाम 6:08
चंद्रोदय
रात 1:50, 17 फ़रवरी
चंद्रास्त
सुबह 10:26
दिनमान
10 घंटे 44 मिनट · 26 घटी 50 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 27 सेकंड अधिक
रात्रिमान
13 घंटे 14 मिनट · 33 घटी 6 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:46

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 1:56, 17 फ़रवरी है।

कृष्ण पक्ष, आधे से बड़ा घटता चाँद चंद्रमा का 59% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 20.9 दिन अगली पूर्णिमा: 10 मार्च 2028 · सुपरमून अगली अमावस्या: 25 फ़रवरी 2028

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 7:24सुबह 10:24दोपहर 1:24शाम 4:24शाम 7:24रात 10:23रात 1:23सुबह 4:23सुबह 7:23

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:24दोपहर 1:00शाम 6:08

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 6:08रात 1:00सुबह 7:23
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:38 – सुबह 6:31भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 6:12 – सुबह 7:24गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:34 – दोपहर 3:17दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
  • अमृत कालशाम 5:13 – शाम 6:49हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 5:55 – शाम 6:19गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 6:08 – शाम 7:20गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:19 – रात 1:12, 17 फ़रवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
  • अभिजीत मुहूर्तबुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं: यह दुर्मुहूर्त में पड़ता है।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • अमृत सिद्धि योगरात 2:03 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरीवार और नक्षत्र का विशेष मेल, जिसे अच्छी शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।रात 2:03 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी: कृष्ण अष्टमी तिथि के कारण यह योग मान्य नहीं
  • सर्वार्थ सिद्धि योगरात 2:03 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरीवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • वर्ज्यसुबह 7:34 – सुबह 9:11हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।
  • यमगण्डसुबह 8:45 – सुबह 10:05वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • गुलिक कालसुबह 11:26 – दोपहर 12:46वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 12:25 – दोपहर 1:08वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • राहु कालदोपहर 12:46 – दोपहर 2:07वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • वर्ज्यसुबह 6:12 – सुबह 7:51, 17 फ़रवरीहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
उत्तरवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. लाभसुबह 7:24 – सुबह 8:45
  2. अमृतसुबह 8:45 – सुबह 10:05
  3. कालसुबह 10:05 – सुबह 11:26काल वेला
  4. शुभसुबह 11:26 – दोपहर 12:46
  5. रोगदोपहर 12:46 – दोपहर 2:07वार वेला
  6. उद्वेगदोपहर 2:07 – दोपहर 3:27
  7. चरदोपहर 3:27 – शाम 4:48
  8. लाभशाम 4:48 – शाम 6:08

चौघड़िया · रात

  1. उद्वेगशाम 6:08 – शाम 7:48
  2. शुभशाम 7:48 – रात 9:27
  3. अमृतरात 9:27 – रात 11:06
  4. चररात 11:06 – रात 12:46, 17 फ़रवरी
  5. रोगरात 12:46 – रात 2:25, 17 फ़रवरी
  6. कालरात 2:25 – सुबह 4:04, 17 फ़रवरी
  7. लाभसुबह 4:04 – सुबह 5:44, 17 फ़रवरीकाल रात्रि
  8. उद्वेगसुबह 5:44 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी

होरा

  1. बुधसुबह 7:24 – सुबह 8:18
  2. चंद्रसुबह 8:18 – सुबह 9:12
  3. शनिसुबह 9:12 – सुबह 10:05
  4. गुरुसुबह 10:05 – सुबह 10:59
  5. मंगलसुबह 10:59 – सुबह 11:53
  6. सूर्यसुबह 11:53 – दोपहर 12:46
  7. शुक्रदोपहर 12:46 – दोपहर 1:40
  8. बुधदोपहर 1:40 – दोपहर 2:34
  9. चंद्रदोपहर 2:34 – दोपहर 3:27
  10. शनिदोपहर 3:27 – शाम 4:21
  11. गुरुशाम 4:21 – शाम 5:15
  12. मंगलशाम 5:15 – शाम 6:08
  13. सूर्यशाम 6:08 – शाम 7:15
  14. शुक्रशाम 7:15 – रात 8:21
  15. बुधरात 8:21 – रात 9:27
  16. चंद्ररात 9:27 – रात 10:33
  17. शनिरात 10:33 – रात 11:39
  18. गुरुरात 11:39 – रात 12:46, 17 फ़रवरी
  19. मंगलरात 12:46 – रात 1:52, 17 फ़रवरी
  20. सूर्यरात 1:52 – रात 2:58, 17 फ़रवरी
  21. शुक्ररात 2:58 – सुबह 4:04, 17 फ़रवरी
  22. बुधसुबह 4:04 – सुबह 5:11, 17 फ़रवरी
  23. चंद्रसुबह 5:11 – सुबह 6:17, 17 फ़रवरी
  24. शनिसुबह 6:17 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. लाभम्सुबह 7:24 – सुबह 8:45
  2. धनम्सुबह 8:45 – सुबह 10:05
  3. सुखम्सुबह 10:05 – सुबह 11:26
  4. सोरम्सुबह 11:26 – दोपहर 12:46
  5. विषम्दोपहर 12:46 – दोपहर 2:07
  6. उत्तिदोपहर 2:07 – दोपहर 3:27
  7. अमृतम्दोपहर 3:27 – शाम 4:48
  8. रोगम्शाम 4:48 – शाम 6:08
  1. उत्तिशाम 6:08 – शाम 7:48
  2. अमृतम्शाम 7:48 – रात 9:27
  3. रोगम्रात 9:27 – रात 11:06
  4. लाभम्रात 11:06 – रात 12:46, 17 फ़रवरी
  5. धनम्रात 12:46 – रात 2:25, 17 फ़रवरी
  6. सुखम्रात 2:25 – सुबह 4:04, 17 फ़रवरी
  7. सोरम्सुबह 4:04 – सुबह 5:44, 17 फ़रवरी
  8. विषम्सुबह 5:44 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
तुला शाम 7:57 तक
वृश्चिक
सूर्य राशि
कुंभ
सूर्य नक्षत्र
धनिष्ठा 3 दोपहर 1:05 तक
धनिष्ठा 4
अगली संक्रांति
मीन · 14 मार्च 2028, रात 3:45, 14 मार्च (EDT)

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कुंभसुबह 7:20 – सुबह 8:34स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 8:08
  2. मीनसुबह 8:34 – सुबह 9:45द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 8:55
  3. मेषसुबह 9:45 – सुबह 11:08चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 10:41
  4. वृषभसुबह 11:08 – दोपहर 12:57स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 11:55
  5. मिथुनदोपहर 12:57 – दोपहर 3:15द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 2:17
  6. कर्कदोपहर 3:15 – शाम 5:46चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 3:55
  7. सिंहशाम 5:46 – रात 8:17स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 7:22
  8. कन्यारात 8:17 – रात 10:47द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 9:02
  9. तुलारात 10:47 – रात 1:19, 17 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 12:49, 17 फ़रवरी
  10. वृश्चिकरात 1:19 – रात 3:44, 17 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 2:14, 17 फ़रवरी
  11. धनुरात 3:44 – सुबह 5:45, 17 फ़रवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 5:20, 17 फ़रवरी
  12. मकरसुबह 5:45 – सुबह 7:16, 17 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 6:31, 17 फ़रवरी
  13. कुंभसुबह 7:16 – सुबह 8:30, 17 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 8:04, 17 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकुंभ3°06′धनिष्ठा · 3मीन · 14 मार्च 2028
चंद्रतुला23°04′विशाखा · 1वृश्चिक · 16 फ़रवरी 2028
मंगल अस्तकुंभ10°21′शतभिषा · 2मीन · 12 मार्च 2028
बुधमकर9°57′उत्तराषाढ़ा · 4कुंभ · 8 मार्च 2028
गुरु वक्रीकन्या1°22′उत्तरा फाल्गुनी · 2सिंह · 28 फ़रवरी 2028
शुक्रमीन16°19′उत्तरा भाद्रपद · 4मेष · 28 फ़रवरी 2028
शनिमीन29°21′रेवती · 4मेष · 23 फ़रवरी 2028
राहुमकर7°50′उत्तराषाढ़ा · 4धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क7°50′पुष्य · 2मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
फाल्गुन
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
माघ
विक्रम संवत
2084 दुर्मति
शक संवत
1949 प्लवंग

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
शिशिर
सूर्य के हिसाब से ऋतु
शिशिर
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
फाल्गुन, दिन 4
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
27 माघ 1949
कलि संवत
5128
वर्ष का राजा
बुध
वर्ष का मंत्री
बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
शुक्र
दुर्गेश
मंगल
धनेश
शुक्र
रसेश
सूर्य
धान्येश
गुरु
नीरसेश
शुक्र
फलेश
मंगल
मेघेश
मंगल
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°15′00″
जूलियन दिन
2461817.5
गुजराती विक्रम संवत
2084
बृहस्पति संवत्सर
दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · शुक्रवार, 21 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर
चंद्र वास
पश्चिम सुबह 7:24 – शाम 7:57 · उत्तर शाम 7:57 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी
राहु वास
दक्षिण-पश्चिम
शिव वास
श्मशान में सुबह 7:24 – दोपहर 3:16 · गौरी के साथ दोपहर 3:16 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 7:24 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी
आनंदादि योग
धाता सुबह 7:24 – रात 2:03, 17 फ़रवरी · सौम्य रात 2:03 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 7:24 – सुबह 7:23, 17 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (शाम 5:13 – शाम 6:49) चुना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:38 – सुबह 6:31) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है।

चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण अष्टमी
नक्षत्र
अनुराधा
सूर्योदय
सुबह 7:23
राहु काल
दोपहर 2:07 – दोपहर 3:28
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:25 – दोपहर 1:08
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

कृष्ण सप्तमी दोपहर 3:16 तक है, फिर कृष्ण अष्टमी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण अष्टमी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 12:46 – दोपहर 2:07 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:38 – सुबह 6:31, प्रातः सन्ध्या सुबह 6:12 – सुबह 7:24, विजय मुहूर्त दोपहर 2:34 – दोपहर 3:17, अमृत काल शाम 5:13 – शाम 6:49, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:55 – शाम 6:19, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:08 – शाम 7:20, निशिता मुहूर्त रात 12:19 – रात 1:12, 17 फ़रवरी।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं: यह दुर्मुहूर्त में पड़ता है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:38 – सुबह 6:31 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन विशाखा नक्षत्र है, रात 2:03, 17 फ़रवरी तक; फिर अनुराधा।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 10 मार्च 2028, अगली अमावस्या 25 फ़रवरी 2028।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना फाल्गुन है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह बुध की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन तुला राशि में है, शाम 7:57 पर वृश्चिक में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, बुधवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (शाम 5:13 – शाम 6:49) चुना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:38 – सुबह 6:31) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है। चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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