दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2084
Columbus का पंचांग, 15 मार्च 2028
बुधवार, 15 मार्च 2028
बुधवार, 15 मार्च 2028 को कृष्ण षष्ठी तिथि सुबह 6:43, 16 मार्च तक है, उसके बाद कृष्ण सप्तमी; नक्षत्र विशाखा सुबह 11:15 तक।
गणना: शहर के केंद्र से
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।
-
तिथि
कृष्ण षष्ठी सुबह 6:43, 16 मार्च तक
फिर कृष्ण सप्तमी
कृष्ण पक्ष की छठी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 1% पूरा -
वार
बुधवार
बुधवार, बुध का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
विशाखा सुबह 11:15 तक
फिर अनुराधा
27 नक्षत्रों में सोलहवाँ: निरयण राशिचक्र में 200° से 213°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 85% पूरा -
योग
हर्षण दोपहर 2:37 तक
फिर वज्र
27 नित्य योगों में चौदहवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 69% पूरा -
करण
गर शाम 6:56 तक
फिर वणिज सुबह 6:43, 16 मार्च तक
फिर विष्टि
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 3% पूरा
पक्ष: कृष्ण
उदया तिथि: कृष्ण षष्ठी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: विशाखा 4 · सुबह 11:15 · अनुराधा 1 · शाम 5:12 · अनुराधा 2 · रात 11:13 · अनुराधा 3 · सुबह 5:17, 16 मार्च
इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 7:43
- सूर्यास्त
- शाम 7:39
- चंद्रोदय
- रात 1:41, 16 मार्च
- चंद्रास्त
- सुबह 10:03
- दिनमान
- 11 घंटे 56 मिनट · 29 घटी 51 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 39 सेकंड अधिक
- रात्रिमान
- 12 घंटे 1 मिनट · 30 घटी 5 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 1:41
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 1:46, 16 मार्च है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 6:06 – सुबह 6:54भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 6:31 – सुबह 7:43गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
- विजय मुहूर्तदोपहर 3:40 – शाम 4:28दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।वर्ज्य के साथ: दोपहर 3:40 – शाम 4:28 (48 मिनट)।
- गोधूलि मुहूर्तशाम 7:26 – शाम 7:50गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
- सायाह्न सन्ध्याशाम 7:39 – रात 8:51गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
- अमृत कालरात 10:31 – रात 12:08, 16 मार्चहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
- निशिता मुहूर्तरात 1:16 – रात 2:04, 16 मार्चहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
- अभिजीत मुहूर्तबुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं: यह दुर्मुहूर्त में पड़ता है।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- अमृत सिद्धि योगसुबह 11:15 – सुबह 7:41, 16 मार्चवार और नक्षत्र का विशेष मेल, जिसे अच्छी शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
- सर्वार्थ सिद्धि योगसुबह 11:15 – सुबह 7:41, 16 मार्चवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
- रवि योगसुबह 11:15 – सुबह 7:41, 16 मार्चचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- यमगण्डसुबह 9:12 – सुबह 10:42वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
- गुलिक कालदोपहर 12:11 – दोपहर 1:41वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तदोपहर 1:17 – दोपहर 2:05वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
- राहु कालदोपहर 1:41 – दोपहर 3:11वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
- वर्ज्यदोपहर 3:17 – शाम 4:53हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 3:40 – शाम 4:28 (48 मिनट)।
- भद्रा
- 16 मार्च, सुबह 6:43 – शाम 6:43स्वर्ग लोक · 16 मार्च, सुबह 6:43 – शाम 6:43भद्रा पुच्छ · 16 मार्च, सुबह 11:31 – दोपहर 12:43भद्रा मुख · 16 मार्च, दोपहर 12:43 – दोपहर 2:43भद्रा परिहार · 16 मार्च, सुबह 6:43 – सुबह 7:41
- पंचक
- चुने हुए दिन नहीं
- गंड मूल (हमारी गिनती)
- चुने हुए दिन नहीं
- दिशा शूल
- उत्तरवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 7:41, 16 मार्च) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- लाभसुबह 7:43 – सुबह 9:12
- अमृतसुबह 9:12 – सुबह 10:42
- कालसुबह 10:42 – दोपहर 12:11काल वेला (हमारी गिनती)
- शुभदोपहर 12:11 – दोपहर 1:41
- रोगदोपहर 1:41 – दोपहर 3:11वार वेला
- उद्वेगदोपहर 3:11 – शाम 4:40
- चरशाम 4:40 – शाम 6:10
- लाभशाम 6:10 – शाम 7:39
चौघड़िया · रात
- उद्वेगशाम 7:39 – रात 9:09
- शुभरात 9:09 – रात 10:40
- अमृतरात 10:40 – रात 12:10, 16 मार्च
- चररात 12:10 – रात 1:40, 16 मार्च
- रोगरात 1:40 – रात 3:10, 16 मार्च
- कालरात 3:10 – सुबह 4:41, 16 मार्च
- लाभसुबह 4:41 – सुबह 6:11, 16 मार्चकाल रात्रि
- उद्वेगसुबह 6:11 – सुबह 7:41, 16 मार्च
होरा
- बुधसुबह 7:43 – सुबह 8:42
- चंद्रसुबह 8:42 – सुबह 9:42
- शनिसुबह 9:42 – सुबह 10:42
- गुरुसुबह 10:42 – सुबह 11:42
- मंगलसुबह 11:42 – दोपहर 12:41
- सूर्यदोपहर 12:41 – दोपहर 1:41
- शुक्रदोपहर 1:41 – दोपहर 2:41
- बुधदोपहर 2:41 – दोपहर 3:40
- चंद्रदोपहर 3:40 – शाम 4:40
- शनिशाम 4:40 – शाम 5:40
- गुरुशाम 5:40 – शाम 6:40
- मंगलशाम 6:40 – शाम 7:39
- सूर्यशाम 7:39 – रात 8:39
- शुक्ररात 8:39 – रात 9:40
- बुधरात 9:40 – रात 10:40
- चंद्ररात 10:40 – रात 11:40
- शनिरात 11:40 – रात 12:40, 16 मार्च
- गुरुरात 12:40 – रात 1:40, 16 मार्च
- मंगलरात 1:40 – रात 2:40, 16 मार्च
- सूर्यरात 2:40 – रात 3:41, 16 मार्च
- शुक्ररात 3:41 – सुबह 4:41, 16 मार्च
- बुधसुबह 4:41 – सुबह 5:41, 16 मार्च
- चंद्रसुबह 5:41 – सुबह 6:41, 16 मार्च
- शनिसुबह 6:41 – सुबह 7:41, 16 मार्च
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- लाभम्सुबह 7:43 – सुबह 9:12
- धनम्सुबह 9:12 – सुबह 10:42
- सुखम्सुबह 10:42 – दोपहर 12:11
- सोरम्दोपहर 12:11 – दोपहर 1:41
- विषम्दोपहर 1:41 – दोपहर 3:11
- उत्तिदोपहर 3:11 – शाम 4:40
- अमृतम्शाम 4:40 – शाम 6:10
- रोगम्शाम 6:10 – शाम 7:39
- उत्तिशाम 7:39 – रात 9:09
- अमृतम्रात 9:09 – रात 10:40
- रोगम्रात 10:40 – रात 12:10, 16 मार्च
- लाभम्रात 12:10 – रात 1:40, 16 मार्च
- धनम्रात 1:40 – रात 3:10, 16 मार्च
- सुखम्रात 3:10 – सुबह 4:41, 16 मार्च
- सोरम्सुबह 4:41 – सुबह 6:11, 16 मार्च
- विषम्सुबह 6:11 – सुबह 7:41, 16 मार्च
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- वृश्चिक
- सूर्य राशि
- मीन
- सूर्य नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद 4
- अगली संक्रांति
- मेष · 13 अप्रैल 2028, दोपहर 12:14, 13 अप्रैल
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- कुंभसुबह 6:30 – सुबह 7:44स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:18
- मीनसुबह 7:44 – सुबह 8:55द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 8:05
- मेषसुबह 8:55 – सुबह 10:18चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 9:51
- वृषभसुबह 10:18 – दोपहर 12:07स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 11:05
- मिथुनदोपहर 12:07 – दोपहर 2:25द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 1:27
- कर्कदोपहर 2:25 – शाम 4:56चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 3:05
- सिंहशाम 4:56 – शाम 7:27स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 6:32
- कन्याशाम 7:27 – रात 9:57द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 8:12
- तुलारात 9:57 – रात 12:29, 16 मार्चचरपुष्कर भाग 24° · रात 11:58
- वृश्चिकरात 12:29 – रात 2:54, 16 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 1:24, 16 मार्च
- धनुरात 2:54 – सुबह 4:55, 16 मार्चद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 4:29, 16 मार्च
- मकरसुबह 4:55 – सुबह 6:26, 16 मार्चचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:41, 16 मार्च
- कुंभसुबह 6:26 – सुबह 7:40, 16 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:14, 16 मार्च
- मीनसुबह 7:40 – सुबह 8:51, 16 मार्चद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 8:01, 16 मार्च
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | मीन | 1°10′ | पूर्वा भाद्रपद · 4 | मेष · 13 अप्रैल 2028 |
| चंद्र | वृश्चिक | 1°20′ | विशाखा · 4 | धनु · 17 मार्च 2028 |
| मंगल अस्त | मीन | 2°22′ | पूर्वा भाद्रपद · 4 | मेष · 20 अप्रैल 2028 |
| बुध | कुंभ | 8°58′ | शतभिषा · 1 | मीन · 28 मार्च 2028 |
| गुरु वक्री | सिंह | 27°58′ | उत्तरा फाल्गुनी · 1 | कन्या · 24 जुलाई 2028 |
| शुक्र | मेष | 17°05′ | भरणी · 2 | वृषभ · 28 मार्च 2028 |
| शनि | मेष | 2°14′ | अश्विनी · 1 | वृषभ · 8 अगस्त 2029 |
| राहु | मकर | 6°29′ | उत्तराषाढ़ा · 3 | धनु · 24 मई 2028 |
| केतु | कर्क | 6°29′ | पुष्य · 1 | मिथुन · 24 मई 2028 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- चैत्र
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- फाल्गुन
- विक्रम संवत
- 2084 दुर्मति
- शक संवत
- 1949 प्लवंग
यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
- शिशिर
- सूर्य के हिसाब से ऋतु
- वसंत
- अयनांत के हिसाब से अयन
- उत्तरायण
- मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
- उत्तरायण
- सौर मास
- चैत्र, दिन 2
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 25 फाल्गुन 1949
- कलि संवत
- 5128
- वर्ष का राजा
- बुध
- वर्ष का मंत्री
- बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- शुक्र
- दुर्गेश
- मंगल
- धनेश
- शुक्र
- रसेश
- सूर्य
- धान्येश
- गुरु
- नीरसेश
- शुक्र
- फलेश
- मंगल
- मेघेश
- मंगल
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी)
- 24°15′04″
- जूलियन दिन
- 2461845.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2084
- बृहस्पति संवत्सर
- दुंदुभि 2 मार्च 2028 से; फिर रुधिरोद्गारी 26 फ़रवरी 2029 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
अभी चल रहा है
ग्रहण
- खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
- खग्रास सूर्य ग्रहण · शुक्रवार, 21 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- उत्तर
- चंद्र वास
- उत्तर सुबह 7:43 – सुबह 7:41, 16 मार्च
- राहु वास
- दक्षिण-पश्चिम
- शिव वास
- भोजन में सुबह 7:43 – सुबह 6:43, 16 मार्च · श्मशान में सुबह 6:43 – सुबह 7:41, 16 मार्च
- अग्नि वास
- पाताल में सुबह 7:43 – सुबह 6:43, 16 मार्च · पृथ्वी पर सुबह 6:43 – सुबह 7:41, 16 मार्च
- आनंदादि योग
- धाता सुबह 7:43 – सुबह 11:15 · सौम्य सुबह 11:15 – सुबह 7:41, 16 मार्च
- तमिल योग
- सिद्ध योग सुबह 7:43 – सुबह 7:41, 16 मार्च
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (रात 10:31 – रात 12:08, 16 मार्च) चुना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 6:06 – सुबह 6:54) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है।
चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी
- नक्षत्र
- अनुराधा
- सूर्योदय
- सुबह 7:41
- राहु काल
- दोपहर 3:11 – शाम 4:40
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 1:17 – दोपहर 2:05
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
कृष्ण षष्ठी सुबह 6:43, 16 मार्च तक है, फिर कृष्ण सप्तमी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण सप्तमी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 1:41 – दोपहर 3:11 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 6:06 – सुबह 6:54, प्रातः सन्ध्या सुबह 6:31 – सुबह 7:43, विजय मुहूर्त दोपहर 3:40 – शाम 4:28 (दोपहर 3:40 – शाम 4:28 वर्ज्य के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 7:26 – शाम 7:50, सायाह्न सन्ध्या शाम 7:39 – रात 8:51, अमृत काल रात 10:31 – रात 12:08, 16 मार्च, निशिता मुहूर्त रात 1:16 – रात 2:04, 16 मार्च।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
बुधवार को अभिजीत मुहूर्त नहीं: यह दुर्मुहूर्त में पड़ता है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 6:06 – सुबह 6:54 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन विशाखा नक्षत्र है, सुबह 11:15 तक; फिर अनुराधा।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 9 अप्रैल 2028, अगली अमावस्या 26 मार्च 2028।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना फाल्गुन है (अमांत; पूर्णिमांत में चैत्र), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
हाँ, भद्रा 16 मार्च, सुबह 6:43 – शाम 6:43। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह बुध की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन वृश्चिक राशि में है।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, बुधवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (रात 10:31 – रात 12:08, 16 मार्च) चुना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 6:06 – सुबह 6:54) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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