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दैनिक पंचांग · वैशाख · विक्रम संवत 2085

Columbus का पंचांग, 24 अप्रैल 2028

सोमवार, 24 अप्रैल 2028

सोमवार, 24 अप्रैल 2028 को अमावस्या तिथि दोपहर 3:47 तक है, उसके बाद शुक्ल प्रतिपदा; नक्षत्र अश्विनी रात 8:25 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    अमावस्या दोपहर 3:47 तक

    फिर शुक्ल प्रतिपदा

    अमावस्या तिथि, कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता।

  2. वार

    सोमवार

    सोमवार, चंद्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    अश्विनी रात 8:25 तक

    फिर भरणी

    27 नक्षत्रों में पहला: निरयण राशिचक्र में 0° से 13°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    प्रीति रात 12:22, 25 अप्रैल तक

    फिर आयुष्मान

    27 नित्य योगों में दूसरा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    नाग दोपहर 3:47 तक

    फिर किंस्तुघ्न सुबह 4:04, 25 अप्रैल तक

    फिर बव

    चार स्थिर करणों में से एक, जो महीने में एक बार अमावस्या के आसपास आते हैं; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: अमावस्या। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: अश्विनी 2 · सुबह 7:44 · अश्विनी 3 · दोपहर 2:05 · अश्विनी 4 · रात 8:25 · भरणी 1 · रात 2:43, 25 अप्रैल

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

आज रात का आसमान

आज रात, सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक: चंद्रमा और ग्रह आकाश में कहाँ हैं

स्थिति और समय की गणना NASA JPL के आंकड़ों से।

आसमान दिखना मौसम और आसपास की रुकावटों पर निर्भर है।

समय समुद्र-तल और खुले मैदान के हिसाब से है, जहाँ पहाड़ या इमारत की रुकावट न हो।

जहाँ चमक का अंक नहीं मिला, वह ग्रह देखने की जाँच में शामिल नहीं है।

नीचे दिया हर चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है

  • शुक्र · पश्चिम (24.7°) ·
    इस रात नहीं उगता · डूबने का समय: रात 11:58 बजे
  • बृहस्पति · दक्षिण-पूर्व (53.0°) ·
    इस रात नहीं उगता · डूबने का समय: सुबह 4:58 बजे

आने वाली आकाश की घटनाएँ · कहाँ देखें

नीचे की हर घटना के समय, उसमें दिया चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है

  • आधा चंद्रमा, बढ़ता हुआ ·
    चंद्रमा: दक्षिण-पश्चिम (47.3°)
  • आधा चंद्रमा, घटता हुआ ·
    चंद्रमा: दक्षिण (37.1°)

सूर्य और चंद्रमा के समय भी देख सकते हैं

गणना और स्रोत देखें: NASA JPL के आंकड़ों से

खुली आँख से देखने की हमारी कसौटी: सूर्य की ऊँचाई −12° से नीचे, तारे या ग्रह की ऊँचाई 10° से ऊपर, चमक का अंक 4 या कम (अंक जितना कम, उतनी ज़्यादा चमक); चंद्रमा की ऊँचाई 5° से ऊपर हो तो सूर्य की ऊँचाई और चमक की शर्त नहीं। ऊँचाई हवा के असर के बिना, समुद्र-तल से है। हर 10 मिनट पर जाँच; छोटा समय छूट सकता है।

ग्रहों के मेल का चुना तरीका: राशि-चक्र पर दोनों का अंश बराबर हो। दूसरे तरीके: आकाश के नक्शे पर दोनों एक ही सीधी रेखा पर हों, या दोनों के बीच सबसे कम दूरी हो। हमारी सूची में वही मेल है जहाँ दोनों के बीच 10° से कम दूरी हो। दोनों की जाँच घटना के समय पर है।

छह हफ़्तों में कसौटी पूरी करने वाली अगली तीन घटनाएँ। यहाँ चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति के लिए ज़रूरी आंकड़े हैं। बुध, मंगल और शनि की चमक का अंक: नहीं मिला। ऋतु बदलने के दिन (जैसे साल का सबसे लंबा दिन) आसमान में देखने की चीज़ नहीं, इसलिए सूची में नहीं हैं।

नक्शे पर जगह के अंक (उत्तर-दक्षिण / पूर्व-पश्चिम): 39.96, -83.00

समय चुने गए शहर की घड़ी से · ग्रहों की स्थिति: NASA JPL (DE440s)

  • राष्ट्रीय पंचांग 1948 शक (2026-27), प्रस्तावना पृष्ठ छह (सूर्य: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 31′ मुड़ना + 16′ आधी चौड़ाई), पृष्ठ 114 (शहरों की तालिका), पृष्ठ 131 (शहरों के अक्षांश-देशांतर)
  • भारतीय खगोलीय पंचांग 2027, पृष्ठ 462 (चंद्रमा: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 34′ मुड़ना); राष्ट्रीय पंचांग में चंद्रमा का नियम लिखा नहीं, इसलिए इसे हमारा तय तरीका कहा गया है
  • ए. मल्लामा और जे. एल. हिल्टन (2018), ग्रहों की चमक की गणना (शुक्र, बृहस्पति)

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चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:41
सूर्यास्त
रात 8:20
चंद्रोदय
चुने हुए दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
रात 8:38
दिनमान
13 घंटे 39 मिनट · 34 घटी 8 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 23 सेकंड अधिक
रात्रिमान
10 घंटे 19 मिनट · 25 घटी 49 पल
मध्याह्न
दोपहर 1:30
अमावस्या (नव चंद्र) चंद्रमा का 0% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 29.3 दिन अगली पूर्णिमा: 8 मई 2028 अगली अमावस्या: 24 अप्रैल 2028

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एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 6:41सुबह 9:41दोपहर 12:40दोपहर 3:40शाम 6:40रात 9:40रात 12:40रात 3:40सुबह 6:39

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:41दोपहर 2:00रात 8:20

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

रात 8:20रात 1:00सुबह 6:39
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

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चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:18 – सुबह 5:59भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:29 – सुबह 6:41गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अमृत कालदोपहर 12:46 – दोपहर 2:28हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।यमगण्ड के साथ: दोपहर 12:46 – दोपहर 1:30 (44 मिनट)।दुर्मुहूर्त के साथ: दोपहर 1:58 – दोपहर 2:28 (30 मिनट)।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:03 – दोपहर 1:58दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।यमगण्ड के साथ: दोपहर 1:03 – दोपहर 1:30 (27 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 3:47 – शाम 4:41दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।वर्ज्य के साथ: शाम 4:10 – शाम 4:41 (31 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तरात 8:06 – रात 8:30गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्यारात 8:20 – रात 9:32गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 1:09 – रात 1:50, 25 अप्रैलहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

चुने हुए दिन कोई विशेष योग नहीं बन रहा।

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चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • राहु कालसुबह 8:23 – सुबह 10:06वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • यमगण्डसुबह 11:48 – दोपहर 1:30वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: दोपहर 12:46 – दोपहर 1:30 (44 मिनट)।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 1:03 – दोपहर 1:30 (27 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 1:58 – दोपहर 2:52वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: दोपहर 1:58 – दोपहर 2:28 (30 मिनट)।
  • गुलिक कालदोपहर 3:13 – शाम 4:55वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • वर्ज्यशाम 4:10 – शाम 5:52हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।विजय मुहूर्त के साथ: शाम 4:10 – शाम 4:41 (31 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तशाम 4:41 – शाम 5:36वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • वर्ज्यसुबह 6:25 – सुबह 8:06, 25 अप्रैलहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल (हमारी गिनती)
22 अप्रैल, शाम 5:01 → 24 अप्रैल, रात 8:25
दिशा शूल
पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:39, 25 अप्रैल) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

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चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. अमृतसुबह 6:41 – सुबह 8:23
  2. कालसुबह 8:23 – सुबह 10:06काल वेला (हमारी गिनती)
  3. शुभसुबह 10:06 – सुबह 11:48
  4. रोगसुबह 11:48 – दोपहर 1:30
  5. उद्वेगदोपहर 1:30 – दोपहर 3:13
  6. चरदोपहर 3:13 – शाम 4:55
  7. लाभशाम 4:55 – शाम 6:38वार वेला
  8. अमृतशाम 6:38 – रात 8:20

चौघड़िया · रात

  1. चररात 8:20 – रात 9:37
  2. रोगरात 9:37 – रात 10:55
  3. कालरात 10:55 – रात 12:12, 25 अप्रैल
  4. लाभरात 12:12 – रात 1:30, 25 अप्रैलकाल रात्रि
  5. उद्वेगरात 1:30 – रात 2:47, 25 अप्रैल
  6. शुभरात 2:47 – सुबह 4:05, 25 अप्रैल
  7. अमृतसुबह 4:05 – सुबह 5:22, 25 अप्रैल
  8. चरसुबह 5:22 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल

होरा

  1. चंद्रसुबह 6:41 – सुबह 7:49
  2. शनिसुबह 7:49 – सुबह 8:57
  3. गुरुसुबह 8:57 – सुबह 10:06
  4. मंगलसुबह 10:06 – सुबह 11:14
  5. सूर्यसुबह 11:14 – दोपहर 12:22
  6. शुक्रदोपहर 12:22 – दोपहर 1:30
  7. बुधदोपहर 1:30 – दोपहर 2:39
  8. चंद्रदोपहर 2:39 – दोपहर 3:47
  9. शनिदोपहर 3:47 – शाम 4:55
  10. गुरुशाम 4:55 – शाम 6:03
  11. मंगलशाम 6:03 – शाम 7:12
  12. सूर्यशाम 7:12 – रात 8:20
  13. शुक्ररात 8:20 – रात 9:12
  14. बुधरात 9:12 – रात 10:03
  15. चंद्ररात 10:03 – रात 10:55
  16. शनिरात 10:55 – रात 11:46
  17. गुरुरात 11:46 – रात 12:38, 25 अप्रैल
  18. मंगलरात 12:38 – रात 1:30, 25 अप्रैल
  19. सूर्यरात 1:30 – रात 2:21, 25 अप्रैल
  20. शुक्ररात 2:21 – रात 3:13, 25 अप्रैल
  21. बुधरात 3:13 – सुबह 4:05, 25 अप्रैल
  22. चंद्रसुबह 4:05 – सुबह 4:56, 25 अप्रैल
  23. शनिसुबह 4:56 – सुबह 5:48, 25 अप्रैल
  24. गुरुसुबह 5:48 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. अमृतम्सुबह 6:41 – सुबह 8:23
  2. विषम्सुबह 8:23 – सुबह 10:06
  3. रोगम्सुबह 10:06 – सुबह 11:48
  4. लाभम्सुबह 11:48 – दोपहर 1:30
  5. धनम्दोपहर 1:30 – दोपहर 3:13
  6. सुखम्दोपहर 3:13 – शाम 4:55
  7. सोरम्शाम 4:55 – शाम 6:38
  8. उत्तिशाम 6:38 – रात 8:20
  1. सुखम्रात 8:20 – रात 9:37
  2. सोरम्रात 9:37 – रात 10:55
  3. उत्तिरात 10:55 – रात 12:12, 25 अप्रैल
  4. अमृतम्रात 12:12 – रात 1:30, 25 अप्रैल
  5. विषम्रात 1:30 – रात 2:47, 25 अप्रैल
  6. रोगम्रात 2:47 – सुबह 4:05, 25 अप्रैल
  7. लाभम्सुबह 4:05 – सुबह 5:22, 25 अप्रैल
  8. धनम्सुबह 5:22 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
मेष
सूर्य राशि
मेष
सूर्य नक्षत्र
अश्विनी 4
अगली संक्रांति
वृषभ · 14 मई 2028, सुबह 9:07, 14 मई

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मेषसुबह 6:18 – सुबह 7:41चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 7:14
  2. वृषभसुबह 7:41 – सुबह 9:30स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 8:28
  3. मिथुनसुबह 9:30 – सुबह 11:48द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 10:50
  4. कर्कसुबह 11:48 – दोपहर 2:19चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 12:28
  5. सिंहदोपहर 2:19 – शाम 4:50स्थिरपुष्कर भाग 19° · दोपहर 3:55
  6. कन्याशाम 4:50 – शाम 7:20द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · शाम 5:35
  7. तुलाशाम 7:20 – रात 9:52चरपुष्कर भाग 24° · रात 9:21
  8. वृश्चिकरात 9:52 – रात 12:17, 25 अप्रैलस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 10:46
  9. धनुरात 12:17 – रात 2:18, 25 अप्रैलद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 1:52, 25 अप्रैल
  10. मकररात 2:18 – रात 3:49, 25 अप्रैलचरपुष्कर भाग 14° · रात 3:03, 25 अप्रैल
  11. कुंभरात 3:49 – सुबह 5:03, 25 अप्रैलस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 4:37, 25 अप्रैल
  12. मीनसुबह 5:03 – सुबह 6:14, 25 अप्रैलद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 5:24, 25 अप्रैल
  13. मेषसुबह 6:14 – सुबह 7:37, 25 अप्रैलचरपुष्कर भाग 21° · सुबह 7:10, 25 अप्रैल

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमेष10°31′अश्विनी · 4वृषभ · 14 मई 2028
चंद्रमेष6°07′अश्विनी · 2वृषभ · 26 अप्रैल 2028
मंगल अस्तमेष3°07′अश्विनी · 1वृषभ · 30 मई 2028
बुध अस्तमेष24°08′भरणी · 4वृषभ · 27 अप्रैल 2028
गुरु वक्रीसिंह23°51′पूर्वा फाल्गुनी · 4कन्या · 24 जुलाई 2028
शुक्रवृषभ20°40′रोहिणी · 4मिथुन · 1 अगस्त 2028
शनि अस्तमेष7°11′अश्विनी · 3वृषभ · 8 अगस्त 2029
राहुमकर2°43′उत्तराषाढ़ा · 2धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क2°43′पुनर्वसु · 4मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2085 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
वैशाख
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085 दुंदुभि
शक संवत
1950 कीलक

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
वसंत
सूर्य के हिसाब से ऋतु
ग्रीष्म
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
वैशाख, दिन 12
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
4 वैशाख 1950
कलि संवत
5129
वर्ष का राजा
चंद्र
वर्ष का मंत्री
गुरु
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
सूर्य
दुर्गेश
बुध
धनेश
शनि
रसेश
मंगल
धान्येश
शुक्र
नीरसेश
सूर्य
फलेश
बुध
मेघेश
बुध
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी)
24°15′09″
जूलियन दिन
2461885.5
गुजराती विक्रम संवत
2084
बृहस्पति संवत्सर
दुंदुभि 2 मार्च 2028 से; फिर रुधिरोद्गारी 26 फ़रवरी 2029 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

चंद्र दर्शन · अमावस्या के बाद का चाँद

चुनी तारीख तक की पिछली अमावस्या के बाद, हर तरीके की पहली शाम दिखाई गई है। नतीजे एक जैसे हों तो जानकारी एक बार दिखाई गई है।

यैलप 1997 · ओदेह 2004/2006

नीचे बताई गई शर्तों में चाँद दिख सकता है।

पहली शाम की तारीख
25 अप्रैल 2028
चाँद डूबने का स्थानीय समय
रात 9:43 बजे
सूर्यास्त पर अमावस्या के बाद बीते घंटे
28.6
सूर्यास्त पर सूरज और चाँद के बीच का कोण
14.7°

चंद्र दर्शन मौसम, साफ़ आसमान और सामने की रुकावटों पर निर्भर है; यह देखे जाने की पुष्टि नहीं है।

आप ऊपर दूसरी तारीख चुन सकते हैं।

NASA JPL के आंकड़ों से गणना और स्रोत देखें

ग्रहों की स्थिति NASA JPL के आंकड़ों से। अमावस्या का समय सूरज और चाँद के भोगांश (आकाश में उनके रास्ते पर नापी गई जगह) के मिलने पर लिया है। खोज उस स्थानीय तारीख से सात तारीखों तक है; यह हमारी खोज की सीमा है, धार्मिक तारीख का नियम नहीं।

अमावस्या का स्थानीय समय: 24 अप्रैल 2028, दोपहर 3:47 बजे

यैलप में श्रेणी ए या बी; ओदेह में श्रेणी ए या बी को अलग जाँचा है। यैलप की बी श्रेणी में आसमान और देखने की हालत बहुत अच्छी होनी चाहिए। ओदेह की बी श्रेणी में दूरबीन की ज़रूरत हो सकती है। दोनों तरीकों की जाँच सूर्यास्त और चाँद डूबने के बीच उनके अपने चुने समय पर है; ऊपर दिए घंटे और कोण सूरज डूबने के समय के हैं।

स्रोत: बी. डी. यैलप, नए चाँद की पहली झलक का अनुमान लगाने की विधि, नौवहन पंचांग कार्यालय तकनीकी नोट 69 (1997), पन्ने 3–4 और 11, समीकरण 4.1 व 6.1, तालिका 5। मोहम्मद श. ओदेह, चाँद की पतली झलक दिखने की नई कसौटी, एक्सपेरिमेंटल एस्ट्रोनॉमी 18, पन्ने 43 और 61, समीकरण 1 व 2।

समुद्र की सतह जितनी ऊँचाई और सामने खुला आसमान माना है। पहाड़, इमारतें और स्थानीय मौसम शामिल नहीं हैं। दो जाँच अभी बाकी हैं: पहली, असल में चाँद कब दिखा, उससे मिलान; दूसरी, पृथ्वी के घूमने के ताज़ा आंकड़ों से समय कितना बदलता है। धार्मिक तारीख तय करने के लिए भी इसकी जाँच बाकी है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · शुक्रवार, 21 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पूर्व
चंद्र वास
पूर्व सुबह 6:41 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल
राहु वास
उत्तर-पश्चिम
शिव वास
गौरी के साथ सुबह 6:41 – दोपहर 3:47 · श्मशान में दोपहर 3:47 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल
अग्नि वास
आकाश में सुबह 6:41 – दोपहर 3:47 · पृथ्वी पर दोपहर 3:47 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल
आनंदादि योग
राक्षस सुबह 6:41 – रात 8:25मुहूर्त चिंतामणि 1.23–25 आनंदादि 28 योगों में पच्चीसवाँ: वार और नक्षत्र से बनता है (मुहूर्त चिंतामणि 1.23–25)। · चर रात 8:25 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:41 – सुबह 6:39, 25 अप्रैल

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (दोपहर 1:30 – दोपहर 1:58, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:30 – दोपहर 1:58, यमगण्ड से अलग) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:18 – सुबह 5:59) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए राहु काल, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य छोड़ती है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी
सूर्योदय
सुबह 6:39
राहु काल
शाम 4:56 – शाम 6:38
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 1:03 – दोपहर 1:58
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

अमावस्या दोपहर 3:47 तक है, फिर शुक्ल प्रतिपदा।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल सुबह 8:23 – सुबह 10:06 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:18 – सुबह 5:59, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:29 – सुबह 6:41, अमृत काल दोपहर 12:46 – दोपहर 2:28 (दोपहर 12:46 – दोपहर 1:30 यमगण्ड के साथ; दोपहर 1:58 – दोपहर 2:28 दुर्मुहूर्त के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:03 – दोपहर 1:58 (दोपहर 1:03 – दोपहर 1:30 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 3:47 – शाम 4:41 (शाम 4:10 – शाम 4:41 वर्ज्य के साथ), गोधूलि मुहूर्त रात 8:06 – रात 8:30, सायाह्न सन्ध्या रात 8:20 – रात 9:32, निशिता मुहूर्त रात 1:09 – रात 1:50, 25 अप्रैल।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:03 – दोपहर 1:58 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:18 – सुबह 5:59 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन अश्विनी नक्षत्र है, रात 8:25 तक; फिर भरणी।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 8 मई 2028, अगली अमावस्या 24 अप्रैल 2028।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना वैशाख है (पूर्णिमांत; अमांत में चैत्र), विक्रम संवत 2085 दुंदुभि और शक संवत 1950।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह चंद्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन मेष राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, सोमवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (दोपहर 1:30 – दोपहर 1:58, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:30 – दोपहर 1:58, यमगण्ड से अलग) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:18 – सुबह 5:59) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए राहु काल, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य छोड़ती है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

दैनिक पंचांग

आपकी अपनी कुंडली, इसी सटीकता से।

पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक है। आपकी जन्मपत्रिका केवल आपकी है।

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