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दैनिक पंचांग · श्रावण · विक्रम संवत 2085

Columbus का पंचांग, 25 जुलाई 2028

मंगलवार, 25 जुलाई 2028

मंगलवार, 25 जुलाई 2028 को शुक्ल चतुर्थी तिथि सुबह 10:12 तक है, उसके बाद शुक्ल पंचमी; नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी सुबह 9:50 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल चतुर्थी सुबह 10:12 तक

    फिर शुक्ल पंचमी

    शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    मंगलवार

    मंगलवार, मंगल का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    पूर्वा फाल्गुनी सुबह 9:50 तक

    फिर उत्तरा फाल्गुनी

    27 नक्षत्रों में ग्यारहवाँ: निरयण राशिचक्र में 133°20′ से 146°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    परिघ रात 9:47 तक

    फिर शिव

  5. करण

    विष्टि सुबह 10:12 तक

    फिर बव रात 8:42 तक

    फिर बालव

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल चतुर्थी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: पूर्वा फाल्गुनी 4 · सुबह 9:50 · उत्तरा फाल्गुनी 1 · दोपहर 3:16 · उत्तरा फाल्गुनी 2 · रात 8:44 · उत्तरा फाल्गुनी 3 · रात 2:13, 26 जुलाई

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

आज रात का आसमान

आज रात, सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक: चंद्रमा और ग्रह आकाश में कहाँ हैं

स्थिति और समय की गणना NASA JPL के आंकड़ों से।

आसमान दिखना मौसम और आसपास की रुकावटों पर निर्भर है।

समय समुद्र-तल और खुले मैदान के हिसाब से है, जहाँ पहाड़ या इमारत की रुकावट न हो।

जहाँ चमक का अंक नहीं मिला, वह ग्रह देखने की जाँच में शामिल नहीं है।

नीचे दिया हर चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है

आने वाली आकाश की घटनाएँ · कहाँ देखें

नीचे की हर घटना के समय, उसमें दिया चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है

  • आधा चंद्रमा, घटता हुआ ·
    चंद्रमा: दक्षिण-पश्चिम (70.9°)
  • आधा चंद्रमा, बढ़ता हुआ ·
    चंद्रमा: दक्षिण-पश्चिम (16.5°)

सूर्य और चंद्रमा के समय भी देख सकते हैं

गणना और स्रोत देखें: NASA JPL के आंकड़ों से

खुली आँख से देखने की हमारी कसौटी: सूर्य की ऊँचाई −12° से नीचे, तारे या ग्रह की ऊँचाई 10° से ऊपर, चमक का अंक 4 या कम (अंक जितना कम, उतनी ज़्यादा चमक); चंद्रमा की ऊँचाई 5° से ऊपर हो तो सूर्य की ऊँचाई और चमक की शर्त नहीं। ऊँचाई हवा के असर के बिना, समुद्र-तल से है। हर 10 मिनट पर जाँच; छोटा समय छूट सकता है।

ग्रहों के मेल का चुना तरीका: राशि-चक्र पर दोनों का अंश बराबर हो। दूसरे तरीके: आकाश के नक्शे पर दोनों एक ही सीधी रेखा पर हों, या दोनों के बीच सबसे कम दूरी हो। हमारी सूची में वही मेल है जहाँ दोनों के बीच 10° से कम दूरी हो। दोनों की जाँच घटना के समय पर है।

छह हफ़्तों में कसौटी पूरी करने वाली अगली तीन घटनाएँ। यहाँ चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति के लिए ज़रूरी आंकड़े हैं। बुध, मंगल और शनि की चमक का अंक: नहीं मिला। ऋतु बदलने के दिन (जैसे साल का सबसे लंबा दिन) आसमान में देखने की चीज़ नहीं, इसलिए सूची में नहीं हैं।

नक्शे पर जगह के अंक (उत्तर-दक्षिण / पूर्व-पश्चिम): 39.96, -83.00

समय चुने गए शहर की घड़ी से · ग्रहों की स्थिति: NASA JPL (DE440s)

  • राष्ट्रीय पंचांग 1948 शक (2026-27), प्रस्तावना पृष्ठ छह (सूर्य: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 31′ मुड़ना + 16′ आधी चौड़ाई), पृष्ठ 114 (शहरों की तालिका), पृष्ठ 131 (शहरों के अक्षांश-देशांतर)
  • भारतीय खगोलीय पंचांग 2027, पृष्ठ 462 (चंद्रमा: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 34′ मुड़ना); राष्ट्रीय पंचांग में चंद्रमा का नियम लिखा नहीं, इसलिए इसे हमारा तय तरीका कहा गया है
  • ए. मल्लामा और जे. एल. हिल्टन (2018), ग्रहों की चमक की गणना (शुक्र, बृहस्पति)

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:25
सूर्यास्त
रात 8:52
चंद्रोदय
सुबह 10:42
चंद्रास्त
रात 10:49
दिनमान
14 घंटे 26 मिनट · 36 घटी 6 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 45 सेकंड कम
रात्रिमान
9 घंटे 34 मिनट · 23 घटी 56 पल
मध्याह्न
दोपहर 1:38

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, सुबह 10:46 है।

शुक्ल पक्ष, बढ़ता हँसिया चाँद चंद्रमा का 15% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 3.3 दिन अगली पूर्णिमा: 5 अगस्त 2028 अगली अमावस्या: 20 अगस्त 2028

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

सुबह 6:25सुबह 9:25दोपहर 12:25दोपहर 3:25शाम 6:25रात 9:26रात 12:26रात 3:26सुबह 6:26

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:25दोपहर 2:00रात 8:52

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

रात 8:52रात 2:00सुबह 6:26
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

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चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:09 – सुबह 5:47भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।भद्रा के साथ: सुबह 5:09 – सुबह 5:47 (38 मिनट)।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:13 – सुबह 6:25गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।भद्रा के साथ: सुबह 5:13 – सुबह 6:25 (72 मिनट)।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:09 – दोपहर 2:07दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
  • विजय मुहूर्तशाम 4:03 – शाम 5:00दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।वर्ज्य के साथ: शाम 4:24 – शाम 5:00 (36 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तरात 8:38 – रात 9:02गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्यारात 8:52 – रात 10:04गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • अमृत कालरात 1:09 – रात 2:36, 26 जुलाईहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।दुर्मुहूर्त के साथ: रात 1:09 – रात 1:20, 26 जुलाई (11 मिनट)।
  • निशिता मुहूर्तरात 1:20 – रात 1:58, 26 जुलाईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • रवि योगसुबह 6:25 – सुबह 9:50चंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल

  • दुर्मुहूर्तसुबह 9:18 – सुबह 10:16
  • यमगण्डसुबह 10:02 – सुबह 11:50
  • गुलिक कालदोपहर 1:38 – दोपहर 3:27
  • वर्ज्यशाम 4:24 – शाम 5:51विजय मुहूर्त के साथ: शाम 4:24 – शाम 5:00 (36 मिनट)।
  • राहु कालशाम 5:15 – शाम 7:03
  • दुर्मुहूर्तरात 12:41 – रात 1:20, 26 जुलाईअमृत काल के साथ: रात 1:09 – रात 1:20, 26 जुलाई (11 मिनट)।
भद्रा
24 जुलाई, रात 11:46 → 25 जुलाई, सुबह 10:12मृत्यु लोक · 24 जुलाई, रात 11:46 → 25 जुलाई, सुबह 10:12मुहूर्त चिंतामणि, हिंदी टीका, पृ.21भद्रा पुच्छ · सुबह 9:10 – सुबह 10:12भद्रा मुख · 24 जुलाई, रात 11:46 → 25 जुलाई, रात 1:31भद्रा परिहार · सुबह 6:25 – सुबह 10:12
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल (हमारी गिनती)
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
उत्तर
नक्षत्र दिशा शूल MC 11.10
उत्तर सुबह 9:50 – सुबह 6:26, 26 जुलाई

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:26, 26 जुलाई) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है।

चौघड़िया · दिन

  1. रोगसुबह 6:25 – सुबह 8:13
  2. उद्वेगसुबह 8:13 – सुबह 10:02वार वेला
  3. चरसुबह 10:02 – सुबह 11:50
  4. लाभसुबह 11:50 – दोपहर 1:38
  5. अमृतदोपहर 1:38 – दोपहर 3:27
  6. कालदोपहर 3:27 – शाम 5:15काल वेला (हमारी गिनती)
  7. शुभशाम 5:15 – शाम 7:03
  8. रोगशाम 7:03 – रात 8:52

चौघड़िया · रात

  1. कालरात 8:52 – रात 10:03
  2. लाभरात 10:03 – रात 11:15काल रात्रि
  3. उद्वेगरात 11:15 – रात 12:27, 26 जुलाई
  4. शुभरात 12:27 – रात 1:39, 26 जुलाई
  5. अमृतरात 1:39 – रात 2:51, 26 जुलाई
  6. चररात 2:51 – सुबह 4:02, 26 जुलाई
  7. रोगसुबह 4:02 – सुबह 5:14, 26 जुलाई
  8. कालसुबह 5:14 – सुबह 6:26, 26 जुलाई

होरा

  1. मंगलसुबह 6:25 – सुबह 7:37
  2. सूर्यसुबह 7:37 – सुबह 8:49
  3. शुक्रसुबह 8:49 – सुबह 10:02
  4. बुधसुबह 10:02 – सुबह 11:14
  5. चंद्रसुबह 11:14 – दोपहर 12:26
  6. शनिदोपहर 12:26 – दोपहर 1:38
  7. गुरुदोपहर 1:38 – दोपहर 2:50
  8. मंगलदोपहर 2:50 – शाम 4:03
  9. सूर्यशाम 4:03 – शाम 5:15
  10. शुक्रशाम 5:15 – शाम 6:27
  11. बुधशाम 6:27 – शाम 7:39
  12. चंद्रशाम 7:39 – रात 8:52
  13. शनिरात 8:52 – रात 9:39
  14. गुरुरात 9:39 – रात 10:27
  15. मंगलरात 10:27 – रात 11:15
  16. सूर्यरात 11:15 – रात 12:03, 26 जुलाई
  17. शुक्ररात 12:03 – रात 12:51, 26 जुलाई
  18. बुधरात 12:51 – रात 1:39, 26 जुलाई
  19. चंद्ररात 1:39 – रात 2:27, 26 जुलाई
  20. शनिरात 2:27 – रात 3:14, 26 जुलाई
  21. गुरुरात 3:14 – सुबह 4:02, 26 जुलाई
  22. मंगलसुबह 4:02 – सुबह 4:50, 26 जुलाई
  23. सूर्यसुबह 4:50 – सुबह 5:38, 26 जुलाई
  24. शुक्रसुबह 5:38 – सुबह 6:26, 26 जुलाई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. रोगम्सुबह 6:25 – सुबह 8:13
  2. लाभम्सुबह 8:13 – सुबह 10:02
  3. धनम्सुबह 10:02 – सुबह 11:50
  4. सुखम्सुबह 11:50 – दोपहर 1:38
  5. सोरम्दोपहर 1:38 – दोपहर 3:27
  6. उत्तिदोपहर 3:27 – शाम 5:15
  7. विषम्शाम 5:15 – शाम 7:03
  8. अमृतम्शाम 7:03 – रात 8:52
  1. सोरम्रात 8:52 – रात 10:03
  2. उत्तिरात 10:03 – रात 11:15
  3. विषम्रात 11:15 – रात 12:27, 26 जुलाई
  4. अमृतम्रात 12:27 – रात 1:39, 26 जुलाई
  5. रोगम्रात 1:39 – रात 2:51, 26 जुलाई
  6. लाभम्रात 2:51 – सुबह 4:02, 26 जुलाई
  7. धनम्सुबह 4:02 – सुबह 5:14, 26 जुलाई
  8. सुखम्सुबह 5:14 – सुबह 6:26, 26 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
सिंह दोपहर 3:16 तक
कन्या
सूर्य राशि
कर्क
सूर्य नक्षत्र
पुष्य 2
अगली संक्रांति
सिंह · 16 अगस्त 2028, सुबह 10:59, 16 अगस्त

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कर्कसुबह 5:46 – सुबह 8:17चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:26
  2. सिंहसुबह 8:17 – सुबह 10:48स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 9:53
  3. कन्यासुबह 10:48 – दोपहर 1:18द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 11:33
  4. तुलादोपहर 1:18 – दोपहर 3:50चरपुष्कर भाग 24° · दोपहर 3:19
  5. वृश्चिकदोपहर 3:50 – शाम 6:15स्थिरपुष्कर भाग 11° · शाम 4:45
  6. धनुशाम 6:15 – रात 8:16द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · शाम 7:50
  7. मकररात 8:16 – रात 9:47चरपुष्कर भाग 14° · रात 9:02
  8. कुंभरात 9:47 – रात 11:01स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 10:35
  9. मीनरात 11:01 – रात 12:12, 26 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 11:22
  10. मेषरात 12:12 – रात 1:35, 26 जुलाईचरपुष्कर भाग 21° · रात 1:08, 26 जुलाई
  11. वृषभरात 1:35 – रात 3:24, 26 जुलाईस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 2:22, 26 जुलाई
  12. मिथुनरात 3:24 – सुबह 5:42, 26 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 4:44, 26 जुलाई
  13. कर्कसुबह 5:42 – सुबह 8:13, 26 जुलाईचरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:22, 26 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकर्क8°45′पुष्य · 2सिंह · 16 अगस्त 2028
चंद्रसिंह24°34′पूर्वा फाल्गुनी · 4कन्या · 25 जुलाई 2028
मंगलमिथुन8°50′आर्द्रा · 1कर्क · 26 अगस्त 2028
बुध अस्तकर्क8°37′पुष्य · 2सिंह · 4 अगस्त 2028
गुरुकन्या0°10′उत्तरा फाल्गुनी · 2तुला · 26 दिसंबर 2028
शुक्रवृषभ24°16′मृगशिरा · 1मिथुन · 1 अगस्त 2028
शनिमेष16°21′भरणी · 1वृषभ · 8 अगस्त 2029
राहुधनु28°56′उत्तराषाढ़ा · 1वृश्चिक · 4 फ़रवरी 2030
केतुमिथुन28°56′पुनर्वसु · 3वृषभ · 4 फ़रवरी 2030

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2085 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
श्रावण
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
श्रावण
विक्रम संवत
2085 दुंदुभि
शक संवत
1950 कीलक

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
वर्षा
सूर्य के हिसाब से ऋतु
वर्षा
अयनांत के हिसाब से अयन
दक्षिणायन
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
दक्षिणायन
सौर मास
श्रावण, दिन 10
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
3 श्रावण 1950
कलि संवत
5129
वर्ष का राजा
चंद्र
वर्ष का मंत्री
गुरु
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
सूर्य
दुर्गेश
बुध
धनेश
शनि
रसेश
मंगल
धान्येश
शुक्र
नीरसेश
सूर्य
फलेश
बुध
मेघेश
बुध
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी)
24°15′22″
जूलियन दिन
2461977.5
गुजराती विक्रम संवत
2084
बृहस्पति संवत्सर
दुंदुभि 2 मार्च 2028 से; फिर रुधिरोद्गारी 26 फ़रवरी 2029 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

चंद्र दर्शन · अमावस्या के बाद का चाँद

चुनी तारीख तक की पिछली अमावस्या के बाद, हर तरीके की पहली शाम दिखाई गई है। नतीजे एक जैसे हों तो जानकारी एक बार दिखाई गई है।

यैलप 1997 · ओदेह 2004/2006

नीचे बताई गई शर्तों में चाँद दिख सकता है।

पहली शाम की तारीख
23 जुलाई 2028
चाँद डूबने का स्थानीय समय
रात 9:52 बजे
सूर्यास्त पर अमावस्या के बाद बीते घंटे
45.9
सूर्यास्त पर सूरज और चाँद के बीच का कोण
26.6°

चंद्र दर्शन मौसम, साफ़ आसमान और सामने की रुकावटों पर निर्भर है; यह देखे जाने की पुष्टि नहीं है।

आप ऊपर दूसरी तारीख चुन सकते हैं।

NASA JPL के आंकड़ों से गणना और स्रोत देखें

ग्रहों की स्थिति NASA JPL के आंकड़ों से। अमावस्या का समय सूरज और चाँद के भोगांश (आकाश में उनके रास्ते पर नापी गई जगह) के मिलने पर लिया है। खोज उस स्थानीय तारीख से सात तारीखों तक है; यह हमारी खोज की सीमा है, धार्मिक तारीख का नियम नहीं।

अमावस्या का स्थानीय समय: 21 जुलाई 2028, रात 11:02 बजे

यैलप में श्रेणी ए या बी; ओदेह में श्रेणी ए या बी को अलग जाँचा है। यैलप की बी श्रेणी में आसमान और देखने की हालत बहुत अच्छी होनी चाहिए। ओदेह की बी श्रेणी में दूरबीन की ज़रूरत हो सकती है। दोनों तरीकों की जाँच सूर्यास्त और चाँद डूबने के बीच उनके अपने चुने समय पर है; ऊपर दिए घंटे और कोण सूरज डूबने के समय के हैं।

स्रोत: बी. डी. यैलप, नए चाँद की पहली झलक का अनुमान लगाने की विधि, नौवहन पंचांग कार्यालय तकनीकी नोट 69 (1997), पन्ने 3–4 और 11, समीकरण 4.1 व 6.1, तालिका 5। मोहम्मद श. ओदेह, चाँद की पतली झलक दिखने की नई कसौटी, एक्सपेरिमेंटल एस्ट्रोनॉमी 18, पन्ने 43 और 61, समीकरण 1 व 2।

समुद्र की सतह जितनी ऊँचाई और सामने खुला आसमान माना है। पहाड़, इमारतें और स्थानीय मौसम शामिल नहीं हैं। दो जाँच अभी बाकी हैं: पहली, असल में चाँद कब दिखा, उससे मिलान; दूसरी, पृथ्वी के घूमने के ताज़ा आंकड़ों से समय कितना बदलता है। धार्मिक तारीख तय करने के लिए भी इसकी जाँच बाकी है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 31 दिसंबर 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · रविवार, 14 जनवरी 2029 · यहाँ से दिखेगा · सुबह 11:03 (EST) – दोपहर 2:02, 14 जनवरी (EST) सूतक: रात 11:03, 13 जनवरी (EST) – दोपहर 2:02, 14 जनवरी (EST)। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिंधु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर
नक्षत्र दिशा शूल MC 11.10
उत्तर सुबह 9:50 – सुबह 6:26, 26 जुलाई
चंद्र वास
पूर्व सुबह 6:25 – दोपहर 3:16 · दक्षिण दोपहर 3:16 – सुबह 6:26, 26 जुलाई
राहु वास
पश्चिम
शिव वास
क्रीड़ा में सुबह 6:25 – सुबह 10:12 · कैलाश पर सुबह 10:12 – सुबह 6:26, 26 जुलाई
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 6:25 – सुबह 10:12 · आकाश में सुबह 10:12 – सुबह 6:26, 26 जुलाई
आनंदादि योग
धूम्र सुबह 6:25 – सुबह 9:50 · धाता सुबह 9:50 – सुबह 6:26, 26 जुलाई
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:25 – सुबह 9:50 · अमृत योग सुबह 9:50 – सुबह 6:26, 26 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07) और अमृत काल (रात 1:20 – रात 2:36, 26 जुलाई, दुर्मुहूर्त से अलग) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:09 – सुबह 5:47) पूजा और अध्ययन के लिए है।

चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
सूर्योदय
सुबह 6:26
राहु काल
दोपहर 1:38 – दोपहर 3:26
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
मिलते हुए समय अपने-अपने समय के साथ दिए हैं; साझा हिस्सा भी दिखाया गया है।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

शुक्ल चतुर्थी सुबह 10:12 तक है, फिर शुक्ल पंचमी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल पंचमी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल शाम 5:15 – शाम 7:03 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 – सुबह 5:47 (सुबह 5:09 – सुबह 5:47 भद्रा के साथ), प्रातः सन्ध्या सुबह 5:13 – सुबह 6:25 (सुबह 5:13 – सुबह 6:25 भद्रा के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07, विजय मुहूर्त शाम 4:03 – शाम 5:00 (शाम 4:24 – शाम 5:00 वर्ज्य के साथ), गोधूलि मुहूर्त रात 8:38 – रात 9:02, सायाह्न सन्ध्या रात 8:52 – रात 10:04, अमृत काल रात 1:09 – रात 2:36, 26 जुलाई (रात 1:09 – रात 1:20, 26 जुलाई दुर्मुहूर्त के साथ), निशिता मुहूर्त रात 1:20 – रात 1:58, 26 जुलाई।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 – सुबह 5:47 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र है, सुबह 9:50 तक; फिर उत्तरा फाल्गुनी।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 5 अगस्त 2028, अगली अमावस्या 20 अगस्त 2028।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना श्रावण है (पूर्णिमांत; अमांत में श्रावण), विक्रम संवत 2085 दुंदुभि और शक संवत 1950।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

हाँ, भद्रा 24 जुलाई, रात 11:46 → 25 जुलाई, सुबह 10:12। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह मंगल की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन सिंह राशि में है, दोपहर 3:16 पर कन्या में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, मंगलवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:09 – दोपहर 2:07) और अमृत काल (रात 1:20 – रात 2:36, 26 जुलाई, दुर्मुहूर्त से अलग) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:09 – सुबह 5:47) पूजा और अध्ययन के लिए है। चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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