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दैनिक पंचांग · श्रावण · विक्रम संवत 2082

दिल्ली का पंचांग, 15 जुलाई 2025

मंगलवार, 15 जुलाई 2025 ·

मंगलवार, 15 जुलाई 2025 को कृष्ण पंचमी तिथि रात 10:40 तक है, उसके बाद कृष्ण षष्ठी; नक्षत्र शतभिषा सुबह 6:27 तक।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    कृष्ण पंचमी रात 10:40 तक

    फिर कृष्ण षष्ठी

    कृष्ण पक्ष की पाँचवीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    मंगलवार

    मंगलवार, मंगल का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    शतभिषा सुबह 6:27 तक

    फिर पूर्वा भाद्रपद

    27 नक्षत्रों में चौबीसवाँ: निरयण राशिचक्र में 306°40′ से 320° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    सौभाग्य दोपहर 2:12 तक

    फिर शोभन

    27 नित्य योगों में चौथा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    कौलव सुबह 11:22 तक

    फिर तैतिल रात 10:40 तक

    फिर गर

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: कृष्ण पंचमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: शतभिषा 4 · सुबह 6:27 · पूर्वा भाद्रपद 1 · दोपहर 12:18 · पूर्वा भाद्रपद 2 · शाम 6:09 · पूर्वा भाद्रपद 3 · रात 11:58

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 5:33
सूर्यास्त
शाम 7:21
चंद्रोदय
रात 10:27
चंद्रास्त
सुबह 9:44
दिनमान
13 घंटे 47 मिनट · 34 घटी 28 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 50 सेकंड कम
रात्रिमान
10 घंटे 13 मिनट · 25 घटी 33 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:27

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 10:31 है।

कृष्ण पक्ष, आधे से बड़ा घटता चाँद चंद्रमा का 82% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 19.6 दिन अगली पूर्णिमा: 9 अगस्त 2025 अगली अमावस्या: 25 जुलाई 2025

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 5:33सुबह 8:33सुबह 11:33दोपहर 2:34शाम 5:34रात 8:34रात 11:34रात 2:34सुबह 5:34

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 5:33दोपहर 12:00शाम 7:21

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 7:21रात 12:00सुबह 5:34
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:12 – सुबह 4:52भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 4:21 – सुबह 5:33गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अभिजित मुहूर्तसुबह 11:59 – दोपहर 12:54दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।वर्ज्य के साथ: दोपहर 12:40 – दोपहर 12:54 (14 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:45 – दोपहर 3:40दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 7:07 – शाम 7:31गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 7:21 – रात 8:33गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • अमृत कालरात 10:00 – रात 11:33हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।दुर्मुहूर्त के साथ: रात 11:26 – रात 11:33 (7 मिनट)।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:07 – रात 12:48, 16 जुलाईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

चुने हुए दिन कोई विशेष योग नहीं बन रहा।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • दुर्मुहूर्तसुबह 8:19 – सुबह 9:14वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • यमगण्डसुबह 9:00 – सुबह 10:44वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • गुलिक कालदोपहर 12:27 – दोपहर 2:10वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • वर्ज्यदोपहर 12:40 – दोपहर 2:13हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:40 – दोपहर 12:54 (14 मिनट)।
  • राहु कालदोपहर 3:54 – शाम 5:37वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • दुर्मुहूर्तरात 11:26 – रात 12:07, 16 जुलाईवार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: रात 11:26 – रात 11:33 (7 मिनट)।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
13 जुलाई, शाम 6:54 → 18 जुलाई, रात 3:39
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
उत्तरवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 5:34, 16 जुलाई) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. रोगसुबह 5:33 – सुबह 7:17
  2. उद्वेगसुबह 7:17 – सुबह 9:00वार वेला
  3. चरसुबह 9:00 – सुबह 10:44
  4. लाभसुबह 10:44 – दोपहर 12:27
  5. अमृतदोपहर 12:27 – दोपहर 2:10
  6. कालदोपहर 2:10 – दोपहर 3:54काल वेला
  7. शुभदोपहर 3:54 – शाम 5:37
  8. रोगशाम 5:37 – शाम 7:21

चौघड़िया · रात

  1. कालशाम 7:21 – रात 8:37
  2. लाभरात 8:37 – रात 9:54काल रात्रि
  3. उद्वेगरात 9:54 – रात 11:11
  4. शुभरात 11:11 – रात 12:27, 16 जुलाई
  5. अमृतरात 12:27 – रात 1:44, 16 जुलाई
  6. चररात 1:44 – रात 3:01, 16 जुलाई
  7. रोगरात 3:01 – सुबह 4:17, 16 जुलाई
  8. कालसुबह 4:17 – सुबह 5:34, 16 जुलाई

होरा

  1. मंगलसुबह 5:33 – सुबह 6:42
  2. सूर्यसुबह 6:42 – सुबह 7:51
  3. शुक्रसुबह 7:51 – सुबह 9:00
  4. बुधसुबह 9:00 – सुबह 10:09
  5. चंद्रसुबह 10:09 – सुबह 11:18
  6. शनिसुबह 11:18 – दोपहर 12:27
  7. गुरुदोपहर 12:27 – दोपहर 1:36
  8. मंगलदोपहर 1:36 – दोपहर 2:45
  9. सूर्यदोपहर 2:45 – दोपहर 3:54
  10. शुक्रदोपहर 3:54 – शाम 5:03
  11. बुधशाम 5:03 – शाम 6:12
  12. चंद्रशाम 6:12 – शाम 7:21
  13. शनिशाम 7:21 – रात 8:12
  14. गुरुरात 8:12 – रात 9:03
  15. मंगलरात 9:03 – रात 9:54
  16. सूर्यरात 9:54 – रात 10:45
  17. शुक्ररात 10:45 – रात 11:36
  18. बुधरात 11:36 – रात 12:27, 16 जुलाई
  19. चंद्ररात 12:27 – रात 1:18, 16 जुलाई
  20. शनिरात 1:18 – रात 2:09, 16 जुलाई
  21. गुरुरात 2:09 – रात 3:01, 16 जुलाई
  22. मंगलरात 3:01 – रात 3:52, 16 जुलाई
  23. सूर्यरात 3:52 – सुबह 4:43, 16 जुलाई
  24. शुक्रसुबह 4:43 – सुबह 5:34, 16 जुलाई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. रोगम्सुबह 5:33 – सुबह 7:17
  2. लाभम्सुबह 7:17 – सुबह 9:00
  3. धनम्सुबह 9:00 – सुबह 10:44
  4. सुखम्सुबह 10:44 – दोपहर 12:27
  5. सोरम्दोपहर 12:27 – दोपहर 2:10
  6. उत्तिदोपहर 2:10 – दोपहर 3:54
  7. विषम्दोपहर 3:54 – शाम 5:37
  8. अमृतम्शाम 5:37 – शाम 7:21
  1. सोरम्शाम 7:21 – रात 8:37
  2. उत्तिरात 8:37 – रात 9:54
  3. विषम्रात 9:54 – रात 11:11
  4. अमृतम्रात 11:11 – रात 12:27, 16 जुलाई
  5. रोगम्रात 12:27 – रात 1:44, 16 जुलाई
  6. लाभम्रात 1:44 – रात 3:01, 16 जुलाई
  7. धनम्रात 3:01 – सुबह 4:17, 16 जुलाई
  8. सुखम्सुबह 4:17 – सुबह 5:34, 16 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कुंभ रात 11:58 तक
मीन
सूर्य राशि
मिथुन
सूर्य नक्षत्र
पुनर्वसु 3
अगली संक्रांति
कर्क · 16 जुलाई 2025, शाम 5:32, 16 जुलाई

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मिथुनरात 3:29 – सुबह 5:44द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 4:49
  2. कर्कसुबह 5:44 – सुबह 8:04चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:21
  3. सिंहसुबह 8:04 – सुबह 10:22स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 9:32
  4. कन्यासुबह 10:22 – दोपहर 12:38द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 11:02
  5. तुलादोपहर 12:38 – दोपहर 2:57चरपुष्कर भाग 24° · दोपहर 2:29
  6. वृश्चिकदोपहर 2:57 – शाम 5:16स्थिरपुष्कर भाग 11° · दोपहर 3:49
  7. धनुशाम 5:16 – शाम 7:20द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · शाम 6:53
  8. मकरशाम 7:20 – रात 9:02चरपुष्कर भाग 14° · रात 8:10
  9. कुंभरात 9:02 – रात 10:30स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 9:59
  10. मीनरात 10:30 – रात 11:55द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 10:55
  11. मेषरात 11:55 – रात 1:30, 16 जुलाईचरपुष्कर भाग 21° · रात 12:59, 16 जुलाई
  12. वृषभरात 1:30 – रात 3:25, 16 जुलाईस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 2:21, 16 जुलाई
  13. मिथुनरात 3:25 – सुबह 5:40, 16 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 4:45, 16 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमिथुन28°34′पुनर्वसु · 3कर्क · 16 जुलाई 2025
चंद्रकुंभ19°30′शतभिषा · 4मीन · 15 जुलाई 2025
मंगलसिंह21°47′पूर्वा फाल्गुनी · 3कन्या · 28 जुलाई 2025
बुधकर्क20°57′आश्लेषा · 2सिंह · 30 अगस्त 2025
गुरुमिथुन13°46′आर्द्रा · 3कर्क · 18 अक्टूबर 2025
शुक्रवृषभ17°20′रोहिणी · 3मिथुन · 26 जुलाई 2025
शनि वक्रीमीन7°43′उत्तरा भाद्रपद · 2मेष · 3 जून 2027
राहुकुंभ25°33′पूर्वा भाद्रपद · 2मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह25°33′पूर्वा फाल्गुनी · 4कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
श्रावण
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082 सिद्धार्थी
शक संवत
1947 विश्वावसु

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
ग्रीष्म
सूर्य के हिसाब से ऋतु
वर्षा
अयनांत के हिसाब से अयन
दक्षिणायन
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
आषाढ़, दिन 31
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
24 आषाढ़ 1947
कलि संवत
5126
वर्ष का राजा
सूर्य
वर्ष का मंत्री
सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
बुध
दुर्गेश
शनि
धनेश
मंगल
रसेश
शुक्र
धान्येश
चंद्र
नीरसेश
बुध
फलेश
शनि
मेघेश
सूर्य
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°12′50″
जूलियन दिन
2460871.5
गुजराती विक्रम संवत
2081
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

अभी चल रहा है

  • गुरु अस्त · 15 जुलाई 2025 तक

गुरु अस्त: इस शहर से दिखने के हिसाब से, 7 और दिन (मुहूर्त मार्तंड 3.9; नारद संहिता 29.5) जोड़कर, 3 जून – 15 जुलाई (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 14 जुलाई – 13 अगस्त।

ग्रहण

  • खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 7 सितंबर 2025 · यहाँ से दिखेगा · रात 9:57, 7 सितंबर – रात 1:27, 8 सितंबर सूतक: दोपहर 12:57, 7 सितंबर – रात 1:27, 8 सितंबर। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिन्धु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · सोमवार, 22 सितंबर 2025 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर
चंद्र वास
पश्चिम सुबह 5:33 – रात 11:58 · उत्तर रात 11:58 – सुबह 5:34, 16 जुलाई
राहु वास
पश्चिम
शिव वास
वृषभ पर सुबह 5:33 – रात 10:40 · भोजन में रात 10:40 – सुबह 5:34, 16 जुलाई
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 5:33 – रात 10:40 · आकाश में रात 10:40 – सुबह 5:34, 16 जुलाई
आनंदादि योग
मृत्यु योग (आनंदादि) सुबह 5:33 – सुबह 6:27 ज्योतिष परंपरा में इस समय नया काम शुरू नहीं करते — रोज़ के काम सामान्य रूप से चलते हैं। · काण सुबह 6:27 – सुबह 5:34, 16 जुलाई
तमिल योग
मरण योग सुबह 5:33 – सुबह 5:34, 16 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (सुबह 11:59 – दोपहर 12:40, वर्ज्य से अलग) और अमृत काल (रात 10:00 – रात 11:26, दुर्मुहूर्त से अलग) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:12 – सुबह 4:52) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, यमगण्ड, वर्ज्य, राहु काल छोड़ती है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
सूर्योदय
सुबह 5:34
राहु काल
दोपहर 12:27 – दोपहर 2:10
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

कृष्ण पंचमी रात 10:40 तक है, फिर कृष्ण षष्ठी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण षष्ठी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:54 – शाम 5:37 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:12 – सुबह 4:52, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:21 – सुबह 5:33, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:59 – दोपहर 12:54 (दोपहर 12:40 – दोपहर 12:54 वर्ज्य के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:45 – दोपहर 3:40, गोधूलि मुहूर्त शाम 7:07 – शाम 7:31, सायाह्न सन्ध्या शाम 7:21 – रात 8:33, अमृत काल रात 10:00 – रात 11:33 (रात 11:26 – रात 11:33 दुर्मुहूर्त के साथ), निशिता मुहूर्त रात 12:07 – रात 12:48, 16 जुलाई।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 – दोपहर 12:54 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:12 – सुबह 4:52 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन शतभिषा नक्षत्र है, सुबह 6:27 तक; फिर पूर्वा भाद्रपद।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 9 अगस्त 2025, अगली अमावस्या 25 जुलाई 2025।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना श्रावण है (पूर्णिमांत; अमांत में आषाढ़), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

हाँ: पंचक, 13 जुलाई, शाम 6:54 → 18 जुलाई, रात 3:39। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह मंगल की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कुंभ राशि में है, रात 11:58 पर मीन में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, मंगलवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (सुबह 11:59 – दोपहर 12:40, वर्ज्य से अलग) और अमृत काल (रात 10:00 – रात 11:26, दुर्मुहूर्त से अलग) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:12 – सुबह 4:52) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, यमगण्ड, वर्ज्य, राहु काल छोड़ती है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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