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दैनिक पंचांग · माघ · विक्रम संवत 2082

दिल्ली का पंचांग, 6 जनवरी 2026

मंगलवार, 6 जनवरी 2026

मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को कृष्ण तृतीया तिथि सुबह 8:02 तक है, उसके बाद कृष्ण चतुर्थी; नक्षत्र आश्लेषा दोपहर 12:18 तक।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    कृष्ण तृतीया सुबह 8:02 तक

    फिर कृष्ण चतुर्थी सुबह 6:53, 7 जनवरी तक

    फिर कृष्ण पंचमी

    कृष्ण पक्ष की तीसरी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    मंगलवार

    मंगलवार, मंगल का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    आश्लेषा दोपहर 12:18 तक

    फिर मघा

    27 नक्षत्रों में नौवाँ: निरयण राशिचक्र में 106°40′ से 120° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    प्रीति रात 8:21 तक

    फिर आयुष्मान

    27 नित्य योगों में दूसरा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    विष्टि सुबह 8:02 तक

    फिर बव शाम 7:22 तक

    फिर बालव सुबह 6:53, 7 जनवरी तक

    फिर कौलव

    विष्टि, जिसे भद्रा भी कहते हैं, सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: कृष्ण तृतीया। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

चुने हुए दिन क्षय तिथि: कृष्ण चतुर्थी दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए किसी दिन का नाम इससे नहीं होता।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: आश्लेषा 4 · दोपहर 12:18 · मघा 1 · शाम 6:08 · मघा 2 · रात 12:01, 7 जनवरी · मघा 3 · सुबह 5:57, 7 जनवरी

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:15
सूर्यास्त
शाम 5:39
चंद्रोदय
रात 8:55
चंद्रास्त
सुबह 9:34
दिनमान
10 घंटे 24 मिनट · 26 घटी 0 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 36 सेकंड अधिक
रात्रिमान
13 घंटे 36 मिनट · 34 घटी 0 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:27

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 8:59 है।

कृष्ण पक्ष, आधे से बड़ा घटता चाँद चंद्रमा का 91% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 17.0 दिन अगली पूर्णिमा: 2 फ़रवरी 2026 अगली अमावस्या: 19 जनवरी 2026

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 7:15सुबह 10:15दोपहर 1:15शाम 4:15शाम 7:15रात 10:15रात 1:15सुबह 4:15सुबह 7:15

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:15दोपहर 12:00शाम 5:39

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 5:39रात 12:00सुबह 7:15
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:26 – सुबह 6:20भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।भद्रा के साथ: सुबह 5:26 – सुबह 6:20 (54 मिनट)।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:53 – सुबह 7:15सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।भद्रा के साथ: सुबह 5:53 – सुबह 7:15 (82 मिनट)।
  • अमृत कालसुबह 10:46 – दोपहर 12:18हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।यमगण्ड के साथ: सुबह 10:46 – सुबह 11:09 (23 मिनट)।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:06 – दोपहर 12:48दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:11 – दोपहर 2:52दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 5:39 – शाम 6:06गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 5:39 – शाम 7:00सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:00 – रात 12:54, 7 जनवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।वर्ज्य के साथ: रात 12:07 – रात 12:54, 7 जनवरी (47 मिनट)।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • सर्वार्थ सिद्धि योगसुबह 7:15 – दोपहर 12:18वार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • दुर्मुहूर्तसुबह 9:20 – सुबह 10:01वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डसुबह 9:51 – सुबह 11:09वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: सुबह 10:46 – सुबह 11:09 (23 मिनट)।
  • गुलिक कालदोपहर 12:27 – दोपहर 1:45वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • राहु कालदोपहर 3:03 – शाम 4:21वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • दुर्मुहूर्तरात 11:05 – रात 12:00, 7 जनवरीवार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यरात 12:07 – रात 1:42, 7 जनवरीहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।निशिता मुहूर्त के साथ: रात 12:07 – रात 12:54, 7 जनवरी (47 मिनट)।
भद्रा
5 जनवरी, रात 8:54 → 6 जनवरी, सुबह 8:02मृत्यु लोक · 5 जनवरी, रात 8:54 → 6 जनवरी, सुबह 8:02भद्रा पुच्छ · सुबह 4:08 – सुबह 5:15भद्रा मुख · सुबह 5:15 – सुबह 7:06भद्रा परिहार · सुबह 7:15 – सुबह 8:02
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
5 जनवरी, दोपहर 1:25 → 7 जनवरी, सुबह 11:57
दिशा शूल
उत्तरवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 7:15, 7 जनवरी) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. रोगसुबह 7:15 – सुबह 8:33
  2. उद्वेगसुबह 8:33 – सुबह 9:51वार वेला
  3. चरसुबह 9:51 – सुबह 11:09
  4. लाभसुबह 11:09 – दोपहर 12:27
  5. अमृतदोपहर 12:27 – दोपहर 1:45
  6. कालदोपहर 1:45 – दोपहर 3:03काल वेला
  7. शुभदोपहर 3:03 – शाम 4:21
  8. रोगशाम 4:21 – शाम 5:39

चौघड़िया · रात

  1. कालशाम 5:39 – शाम 7:21
  2. लाभशाम 7:21 – रात 9:03काल रात्रि
  3. उद्वेगरात 9:03 – रात 10:45
  4. शुभरात 10:45 – रात 12:27, 7 जनवरी
  5. अमृतरात 12:27 – रात 2:09, 7 जनवरी
  6. चररात 2:09 – रात 3:51, 7 जनवरी
  7. रोगरात 3:51 – सुबह 5:33, 7 जनवरी
  8. कालसुबह 5:33 – सुबह 7:15, 7 जनवरी

होरा

  1. मंगलसुबह 7:15 – सुबह 8:07
  2. सूर्यसुबह 8:07 – सुबह 8:59
  3. शुक्रसुबह 8:59 – सुबह 9:51
  4. बुधसुबह 9:51 – सुबह 10:43
  5. चंद्रसुबह 10:43 – सुबह 11:35
  6. शनिसुबह 11:35 – दोपहर 12:27
  7. गुरुदोपहर 12:27 – दोपहर 1:19
  8. मंगलदोपहर 1:19 – दोपहर 2:11
  9. सूर्यदोपहर 2:11 – दोपहर 3:03
  10. शुक्रदोपहर 3:03 – दोपहर 3:55
  11. बुधदोपहर 3:55 – शाम 4:47
  12. चंद्रशाम 4:47 – शाम 5:39
  13. शनिशाम 5:39 – शाम 6:47
  14. गुरुशाम 6:47 – शाम 7:55
  15. मंगलशाम 7:55 – रात 9:03
  16. सूर्यरात 9:03 – रात 10:11
  17. शुक्ररात 10:11 – रात 11:19
  18. बुधरात 11:19 – रात 12:27, 7 जनवरी
  19. चंद्ररात 12:27 – रात 1:35, 7 जनवरी
  20. शनिरात 1:35 – रात 2:43, 7 जनवरी
  21. गुरुरात 2:43 – रात 3:51, 7 जनवरी
  22. मंगलरात 3:51 – सुबह 4:59, 7 जनवरी
  23. सूर्यसुबह 4:59 – सुबह 6:07, 7 जनवरी
  24. शुक्रसुबह 6:07 – सुबह 7:15, 7 जनवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. रोगम्सुबह 7:15 – सुबह 8:33
  2. लाभम्सुबह 8:33 – सुबह 9:51
  3. धनम्सुबह 9:51 – सुबह 11:09
  4. सुखम्सुबह 11:09 – दोपहर 12:27
  5. सोरम्दोपहर 12:27 – दोपहर 1:45
  6. उत्तिदोपहर 1:45 – दोपहर 3:03
  7. विषम्दोपहर 3:03 – शाम 4:21
  8. अमृतम्शाम 4:21 – शाम 5:39
  1. सोरम्शाम 5:39 – शाम 7:21
  2. उत्तिशाम 7:21 – रात 9:03
  3. विषम्रात 9:03 – रात 10:45
  4. अमृतम्रात 10:45 – रात 12:27, 7 जनवरी
  5. रोगम्रात 12:27 – रात 2:09, 7 जनवरी
  6. लाभम्रात 2:09 – रात 3:51, 7 जनवरी
  7. धनम्रात 3:51 – सुबह 5:33, 7 जनवरी
  8. सुखम्सुबह 5:33 – सुबह 7:15, 7 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कर्क दोपहर 12:18 तक
सिंह
सूर्य राशि
धनु
सूर्य नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 3
अगली संक्रांति
मकर · 14 जनवरी 2026, दोपहर 3:07, 14 जनवरी

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. धनुसुबह 5:48 – सुबह 7:52द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 7:25
  2. मकरसुबह 7:52 – सुबह 9:34चरपुष्कर भाग 14° · सुबह 8:42
  3. कुंभसुबह 9:34 – सुबह 11:02स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 10:30
  4. मीनसुबह 11:02 – दोपहर 12:27द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 11:27
  5. मेषदोपहर 12:27 – दोपहर 2:02चरपुष्कर भाग 21° · दोपहर 1:31
  6. वृषभदोपहर 2:02 – दोपहर 3:57स्थिरपुष्कर भाग 14° · दोपहर 2:53
  7. मिथुनदोपहर 3:57 – शाम 6:12द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · शाम 5:17
  8. कर्कशाम 6:12 – रात 8:32चरपुष्कर भाग 8° · शाम 6:49
  9. सिंहरात 8:32 – रात 10:50स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 10:00
  10. कन्यारात 10:50 – रात 1:06, 7 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 11:30
  11. तुलारात 1:06 – रात 3:25, 7 जनवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 2:57, 7 जनवरी
  12. वृश्चिकरात 3:25 – सुबह 5:44, 7 जनवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · सुबह 4:17, 7 जनवरी
  13. धनुसुबह 5:44 – सुबह 7:48, 7 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 7:21, 7 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यधनु21°31′पूर्वाषाढ़ा · 3मकर · 14 जनवरी 2026
चंद्रकर्क27°06′आश्लेषा · 4सिंह · 6 जनवरी 2026
मंगल अस्तधनु22°22′पूर्वाषाढ़ा · 3मकर · 16 जनवरी 2026
बुध अस्तधनु12°15′मूल · 4मकर · 17 जनवरी 2026
गुरु वक्रीमिथुन26°28′पुनर्वसु · 2कर्क · 2 जून 2026
शुक्र अस्तधनु21°22′पूर्वाषाढ़ा · 3मकर · 13 जनवरी 2026
शनिमीन2°16′पूर्वा भाद्रपद · 4मेष · 3 जून 2027
राहुकुंभ16°06′शतभिषा · 3मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह16°06′पूर्वा फाल्गुनी · 1कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
माघ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
पौष
विक्रम संवत
2082 सिद्धार्थी
शक संवत
1947 विश्वावसु

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
हेमंत
सूर्य के हिसाब से ऋतु
शिशिर
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
दक्षिणायन
सौर मास
पौष, दिन 22
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
16 पौष 1947
कलि संवत
5126
वर्ष का राजा
सूर्य
वर्ष का मंत्री
सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
बुध
दुर्गेश
शनि
धनेश
मंगल
रसेश
शुक्र
धान्येश
चंद्र
नीरसेश
बुध
फलेश
शनि
मेघेश
सूर्य
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°13′14″
जूलियन दिन
2461046.5
गुजराती विक्रम संवत
2082
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

  • संकष्टी चतुर्थी

अभी चल रहा है

  • खरमास · 14 जनवरी 2026 तक
  • शुक्र अस्त · 12 फ़रवरी 2026 तक

शुक्र अस्त: इस शहर से दिखने के हिसाब से, मुहूर्त चिंतामणि 5.27 के बताए कुछ और दिन जोड़कर, 26 नवंबर – 12 फ़रवरी (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 26 नवंबर – 17 फ़रवरी।

ग्रहण

  • कंकणाकृति सूर्य ग्रहण · मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 3 मार्च 2026 · यहाँ से दिखेगा · दोपहर 3:20 – शाम 6:48, 3 मार्च सूतक: सुबह 6:20 – शाम 6:48, 3 मार्च। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

आगे

  1. संकष्टी चतुर्थीमंगलवार, 6 जनवरी 2026चुना हुआ दिन
  2. षटतिला एकादशीबुधवार, 14 जनवरी 20268 दिन में
  3. मकर संक्रांतिबुधवार, 14 जनवरी 20268 दिन में
  4. शुक्र प्रदोष व्रतशुक्रवार, 16 जनवरी 202610 दिन में
  5. मासिक शिवरात्रिशुक्रवार, 16 जनवरी 202610 दिन में
  6. अमावस्यारविवार, 18 जनवरी 2026 · श्राद्ध का दिन12 दिन में
  7. पूर्णिमारविवार, 1 फ़रवरी 202626 दिन में
  8. पूर्णिमा व्रतरविवार, 1 फ़रवरी 202626 दिन में

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर
चंद्र वास
उत्तर सुबह 7:15 – दोपहर 12:18 · पूर्व दोपहर 12:18 – सुबह 7:15, 7 जनवरी
राहु वास
पश्चिम
शिव वास
क्रीड़ा में सुबह 7:15 – सुबह 8:02 · कैलाश पर सुबह 8:02 – सुबह 6:53, 7 जनवरी · वृषभ पर सुबह 6:53 – सुबह 7:15, 7 जनवरी
अग्नि वास
पाताल में सुबह 7:15 – सुबह 8:02 · पृथ्वी पर सुबह 8:02 – सुबह 7:15, 7 जनवरी
आनंदादि योग
आनंद सुबह 7:15 – दोपहर 12:18 · कालदंड दोपहर 12:18 – सुबह 7:15, 7 जनवरी
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 7:15 – सुबह 7:15, 7 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 11:09 – दोपहर 12:18, यमगण्ड से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:06 – दोपहर 12:48) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:26 – सुबह 6:20) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, यमगण्ड, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण पंचमी
नक्षत्र
मघा
सूर्योदय
सुबह 7:15
राहु काल
दोपहर 12:27 – दोपहर 1:45
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

कृष्ण तृतीया सुबह 8:02 तक है, फिर कृष्ण चतुर्थी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण पंचमी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:03 – शाम 4:21 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:26 – सुबह 6:20 (सुबह 5:26 – सुबह 6:20 भद्रा के साथ), प्रातः सन्ध्या सुबह 5:53 – सुबह 7:15 (सुबह 5:53 – सुबह 7:15 भद्रा के साथ), अमृत काल सुबह 10:46 – दोपहर 12:18 (सुबह 10:46 – सुबह 11:09 यमगण्ड के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:06 – दोपहर 12:48, विजय मुहूर्त दोपहर 2:11 – दोपहर 2:52, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:39 – शाम 6:06, सायाह्न सन्ध्या शाम 5:39 – शाम 7:00, निशिता मुहूर्त रात 12:00 – रात 12:54, 7 जनवरी (रात 12:07 – रात 12:54, 7 जनवरी वर्ज्य के साथ)।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 – दोपहर 12:48 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:26 – सुबह 6:20 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन आश्लेषा नक्षत्र है, दोपहर 12:18 तक; फिर मघा।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 2 फ़रवरी 2026, अगली अमावस्या 19 जनवरी 2026।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना माघ है (पूर्णिमांत; अमांत में पौष), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

हाँ, भद्रा 5 जनवरी, रात 8:54 → 6 जनवरी, सुबह 8:02। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह मंगल की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कर्क राशि में है, दोपहर 12:18 पर सिंह में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, मंगलवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन संकष्टी चतुर्थी।

अगली एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या कब है?

षटतिला एकादशी: बुधवार, 14 जनवरी 2026; अमावस्या: रविवार, 18 जनवरी 2026; पूर्णिमा: रविवार, 1 फ़रवरी 2026; पूर्णिमा व्रत: रविवार, 1 फ़रवरी 2026।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 11:09 – दोपहर 12:18, यमगण्ड से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:06 – दोपहर 12:48) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:26 – सुबह 6:20) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, यमगण्ड, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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