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दैनिक पंचांग · ज्येष्ठ · विक्रम संवत 2083

दिल्ली का पंचांग, 22 जून 2026

सोमवार, 22 जून 2026

सोमवार, 22 जून 2026 दिल्ली में शुक्ल अष्टमी तिथि दोपहर 3:41 तक है, उसके बाद शुक्ल नवमी; नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी सुबह 10:23 तक।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल अष्टमी दोपहर 3:41 तक

    फिर शुक्ल नवमी

    शुक्ल पक्ष की 8वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    सोमवार

    सोमवार, चंद्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    उत्तरा फाल्गुनी सुबह 10:23 तक

    फिर हस्त

    27 नक्षत्रों में 12वाँ: निरयण राशिचक्र में 146°40′ से 160° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    व्यतीपात सुबह 10:31 तक

    फिर वरीयान

    27 नित्य योगों में 17वाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    बव दोपहर 3:41 तक

    फिर बालव सुबह 4:06, 23 जून तक

    फिर कौलव

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल अष्टमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: उत्तरा फाल्गुनी 4 · सुबह 10:23 · हस्त 1 · शाम 4:42 · हस्त 2 · रात 11:04

इस पेज का हर समय दिल्ली (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 5:24
सूर्यास्त
शाम 7:22
चंद्रोदय
दोपहर 12:46
चंद्रास्त
रात 12:38, 23 जून
दिनमान
13 घंटे 58 मिनट · 34 घटी 56 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 1 सेकंड कम
रात्रिमान
10 घंटे 1 मिनट · 25 घटी 5 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:23

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, दोपहर 12:50 है।

शुक्ल पक्ष का आधा चाँद चंद्रमा का 51% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 6.9 दिन अगली पूर्णिमा: 30 जून 2026 अगली अमावस्या: 14 जुलाई 2026

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 5:24सुबह 8:24सुबह 11:24दोपहर 2:24शाम 5:24रात 8:24रात 11:24रात 2:24सुबह 5:24

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 5:24दोपहर 12:00शाम 7:22

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 7:22रात 12:00सुबह 5:24
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

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चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:04 – सुबह 4:44भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 4:24 – सुबह 5:24सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
  • अभिजित मुहूर्तसुबह 11:55 – दोपहर 12:51दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।यमगण्ड के साथ: सुबह 11:55 – दोपहर 12:23 (28 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:43 – दोपहर 3:39दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 7:22 – शाम 7:42गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।वर्ज्य के साथ: शाम 7:22 – शाम 7:42 (20 मिनट)।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 7:22 – रात 8:22सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।वर्ज्य के साथ: शाम 7:22 – रात 8:22 (60 मिनट)।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:03 – रात 12:43, 23 जूनहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • रवि योगसुबह 10:23 – दोपहर 12:26चंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • राहु कालसुबह 7:09 – सुबह 8:53वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डसुबह 10:38 – दोपहर 12:23वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: सुबह 11:55 – दोपहर 12:23 (28 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 12:51 – दोपहर 1:47वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • गुलिक कालदोपहर 2:08 – दोपहर 3:53वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 3:39 – शाम 4:34वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यशाम 7:19 – रात 9:01हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।गोधूलि मुहूर्त के साथ: शाम 7:22 – शाम 7:42 (20 मिनट)।सायाह्न सन्ध्या के साथ: शाम 7:22 – रात 8:22 (60 मिनट)।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. अमृतसुबह 5:24 – सुबह 7:09
  2. कालसुबह 7:09 – सुबह 8:53काल वेला
  3. शुभसुबह 8:53 – सुबह 10:38
  4. रोगसुबह 10:38 – दोपहर 12:23
  5. उद्वेगदोपहर 12:23 – दोपहर 2:08
  6. चरदोपहर 2:08 – दोपहर 3:53
  7. लाभदोपहर 3:53 – शाम 5:37वार वेला
  8. अमृतशाम 5:37 – शाम 7:22

चौघड़िया · रात

  1. चरशाम 7:22 – रात 8:37
  2. रोगरात 8:37 – रात 9:53
  3. कालरात 9:53 – रात 11:08
  4. लाभरात 11:08 – रात 12:23, 23 जूनकाल रात्रि
  5. उद्वेगरात 12:23 – रात 1:38, 23 जून
  6. शुभरात 1:38 – रात 2:54, 23 जून
  7. अमृतरात 2:54 – सुबह 4:09, 23 जून
  8. चरसुबह 4:09 – सुबह 5:24, 23 जून

होरा

  1. चंद्रसुबह 5:24 – सुबह 6:34
  2. शनिसुबह 6:34 – सुबह 7:44
  3. गुरुसुबह 7:44 – सुबह 8:53
  4. मंगलसुबह 8:53 – सुबह 10:03
  5. सूर्यसुबह 10:03 – सुबह 11:13
  6. शुक्रसुबह 11:13 – दोपहर 12:23
  7. बुधदोपहर 12:23 – दोपहर 1:33
  8. चंद्रदोपहर 1:33 – दोपहर 2:43
  9. शनिदोपहर 2:43 – दोपहर 3:53
  10. गुरुदोपहर 3:53 – शाम 5:02
  11. मंगलशाम 5:02 – शाम 6:12
  12. सूर्यशाम 6:12 – शाम 7:22
  13. शुक्रशाम 7:22 – रात 8:12
  14. बुधरात 8:12 – रात 9:02
  15. चंद्ररात 9:02 – रात 9:53
  16. शनिरात 9:53 – रात 10:43
  17. गुरुरात 10:43 – रात 11:33
  18. मंगलरात 11:33 – रात 12:23, 23 जून
  19. सूर्यरात 12:23 – रात 1:13, 23 जून
  20. शुक्ररात 1:13 – रात 2:03, 23 जून
  21. बुधरात 2:03 – रात 2:54, 23 जून
  22. चंद्ररात 2:54 – रात 3:44, 23 जून
  23. शनिरात 3:44 – सुबह 4:34, 23 जून
  24. गुरुसुबह 4:34 – सुबह 5:24, 23 जून
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. अमृतम्सुबह 5:24 – सुबह 7:09
  2. विषम्सुबह 7:09 – सुबह 8:53
  3. रोगम्सुबह 8:53 – सुबह 10:38
  4. लाभम्सुबह 10:38 – दोपहर 12:23
  5. धनम्दोपहर 12:23 – दोपहर 2:08
  6. सुखम्दोपहर 2:08 – दोपहर 3:53
  7. सोरम्दोपहर 3:53 – शाम 5:37
  8. उत्तिशाम 5:37 – शाम 7:22
  1. सुखम्शाम 7:22 – रात 8:37
  2. सोरम्रात 8:37 – रात 9:53
  3. उत्तिरात 9:53 – रात 11:08
  4. अमृतम्रात 11:08 – रात 12:23, 23 जून
  5. विषम्रात 12:23 – रात 1:38, 23 जून
  6. रोगम्रात 1:38 – रात 2:54, 23 जून
  7. लाभम्रात 2:54 – सुबह 4:09, 23 जून
  8. धनम्सुबह 4:09 – सुबह 5:24, 23 जून

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कन्या
सूर्य राशि
मिथुन
सूर्य नक्षत्र
मृगशिरा 4 दोपहर 12:26 तक
आर्द्रा 1
अगली संक्रांति
कर्क · 16 जुलाई 2026, रात 11:39, 16 जुलाई

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मिथुनसुबह 5:01 – सुबह 7:15द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 6:20
  2. कर्कसुबह 7:15 – सुबह 9:36चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 7:53
  3. सिंहसुबह 9:36 – सुबह 11:53स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 11:03
  4. कन्यासुबह 11:53 – दोपहर 2:09द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · दोपहर 12:34
  5. तुलादोपहर 2:09 – शाम 4:29चरपुष्कर भाग 24° · शाम 4:01
  6. वृश्चिकशाम 4:29 – शाम 6:47स्थिरपुष्कर भाग 11° · शाम 5:20
  7. धनुशाम 6:47 – रात 8:51द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 8:24
  8. मकररात 8:51 – रात 10:34चरपुष्कर भाग 14° · रात 9:42
  9. कुंभरात 10:34 – रात 12:01, 23 जूनस्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 11:30
  10. मीनरात 12:01 – रात 1:26, 23 जूनद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 12:26, 23 जून
  11. मेषरात 1:26 – रात 3:01, 23 जूनचरपुष्कर भाग 21° · रात 2:31, 23 जून
  12. वृषभरात 3:01 – सुबह 4:57, 23 जूनस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 3:52, 23 जून
  13. मिथुनसुबह 4:57 – सुबह 7:11, 23 जूनद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 6:16, 23 जून

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमिथुन6°23′मृगशिरा · 4कर्क · 16 जुलाई 2026
चंद्रकन्या7°22′उत्तरा फाल्गुनी · 4तुला · 24 जून 2026
मंगलवृषभ0°53′कृत्तिका · 2मिथुन · 2 अगस्त 2026
बुधमिथुन29°46′पुनर्वसु · 3कर्क · 22 जून 2026
गुरुकर्क4°02′पुष्य · 1सिंह · 31 अक्टूबर 2026
शुक्रकर्क15°40′पुष्य · 4सिंह · 4 जुलाई 2026
शनिमीन19°31′रेवती · 1मेष · 3 जून 2027
राहुकुंभ7°42′शतभिषा · 1मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह7°42′मघा · 3कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2083 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
ज्येष्ठ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083 रौद्र
शक संवत
1948 पराभव

यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
ग्रीष्म
सूर्य के अनुसार ऋतु
वर्षा
अयनांत के अनुसार अयन
दक्षिणायन
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
उत्तरायण
सौर मास
आषाढ़, दिन 8
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
1 आषाढ़ 1948
कलि संवत
5127
वर्ष का राजा
गुरु
वर्ष का मंत्री
मंगल
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
गुरु
दुर्गेश
चंद्र
धनेश
गुरु
रसेश
शनि
धान्येश
बुध
नीरसेश
गुरु
फलेश
चंद्र
मेघेश
चंद्र
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°13′37″
जूलियन दिन
2461213.5
गुजराती विक्रम संवत
2082
बृहस्पति संवत्सर
रौद्र 11 मार्च 2026 से; फिर दुर्मति 7 मार्च 2027 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

ग्रहण

  • खग्रास सूर्य ग्रहण · बुधवार, 12 अगस्त 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

आगे

  1. निर्जला एकादशीगुरुवार, 25 जून 20263 दिन में
  2. शनि प्रदोष व्रतशनिवार, 27 जून 20265 दिन में
  3. पूर्णिमासोमवार, 29 जून 20267 दिन में
  4. पूर्णिमा व्रतसोमवार, 29 जून 20267 दिन में
  5. संकष्टी चतुर्थीशुक्रवार, 3 जुलाई 202611 दिन में
  6. मासिक शिवरात्रिरविवार, 12 जुलाई 202620 दिन में
  7. अमावस्यामंगलवार, 14 जुलाई 2026 · श्राद्ध का दिन22 दिन में
  8. कर्क संक्रांतिगुरुवार, 16 जुलाई 202624 दिन में

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पूर्व
चंद्र वास
दक्षिण सुबह 5:24 – सुबह 5:24, 23 जून
राहु वास
उत्तर-पश्चिम
शिव वास
श्मशान में सुबह 5:24 – दोपहर 3:41 · गौरी के साथ दोपहर 3:41 – सुबह 5:24, 23 जून
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 5:24 – सुबह 5:24, 23 जून
आनंदादि योग
श्रीवत्स सुबह 5:24 – सुबह 10:23 · वज्र सुबह 10:23 – सुबह 5:24, 23 जून
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 5:24 – सुबह 5:24, 23 जून

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:23 – दोपहर 12:51, यमगण्ड से अलग) चुना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:04 – सुबह 4:44) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए राहु काल, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल नवमी
नक्षत्र
हस्त
सूर्योदय
सुबह 5:24
राहु काल
दोपहर 3:53 – शाम 5:38
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:55 – दोपहर 12:51
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

दिल्ली में शुक्ल अष्टमी दोपहर 3:41 तक है, फिर शुक्ल नवमी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

दिल्ली में अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल नवमी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

दिल्ली में चुने हुए दिन राहु काल सुबह 7:09 – सुबह 8:53 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में दिल्ली के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

दिल्ली में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:04 – सुबह 4:44, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:24 – सुबह 5:24, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:55 – दोपहर 12:51 (सुबह 11:55 – दोपहर 12:23 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:43 – दोपहर 3:39, गोधूलि मुहूर्त शाम 7:22 – शाम 7:42 (शाम 7:22 – शाम 7:42 वर्ज्य के साथ), सायाह्न सन्ध्या शाम 7:22 – रात 8:22 (शाम 7:22 – रात 8:22 वर्ज्य के साथ), निशिता मुहूर्त रात 12:03 – रात 12:43, 23 जून।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

दिल्ली में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 – दोपहर 12:51 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

दिल्ली में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:04 – सुबह 4:44 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है, सुबह 10:23 तक; फिर हस्त।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 30 जून 2026, अगली अमावस्या 14 जुलाई 2026।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना ज्येष्ठ है (अमांत; पूर्णिमांत में ज्येष्ठ), विक्रम संवत 2083 रौद्र और शक संवत 1948।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह चंद्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कन्या राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, सोमवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

अगली एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या कब है?

निर्जला एकादशी: गुरुवार, 25 जून 2026; पूर्णिमा: सोमवार, 29 जून 2026; पूर्णिमा व्रत: सोमवार, 29 जून 2026; अमावस्या: मंगलवार, 14 जुलाई 2026।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:23 – दोपहर 12:51, यमगण्ड से अलग) चुना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:04 – सुबह 4:44) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए राहु काल, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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