दैनिक पंचांग · माघ · विक्रम संवत 2084
दिल्ली का पंचांग, 29 जनवरी 2028
शनिवार, 29 जनवरी 2028 ·
शनिवार, 29 जनवरी 2028 को शुक्ल तृतीया तिथि सुबह 4:43, 30 जनवरी तक है, उसके बाद शुक्ल चतुर्थी; नक्षत्र शतभिषा रात 2:03, 30 जनवरी तक।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।
-
तिथि
शुक्ल तृतीया सुबह 4:43, 30 जनवरी तक
फिर शुक्ल चतुर्थी
शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 19% पूरा -
वार
शनिवार
शनिवार, शनि का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
शतभिषा रात 2:03, 30 जनवरी तक
फिर पूर्वा भाद्रपद
27 नक्षत्रों में चौबीसवाँ: निरयण राशिचक्र में 306°40′ से 320° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 30% पूरा -
योग
वरीयान शाम 4:18 तक
फिर परिघ
27 नित्य योगों में अठारहवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 63% पूरा -
करण
तैतिल दोपहर 3:23 तक
फिर गर सुबह 4:43, 30 जनवरी तक
फिर वणिज
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 39% पूरा
पक्ष: शुक्ल
उदया तिथि: शुक्ल तृतीया। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: शतभिषा 2 · दोपहर 12:30 · शतभिषा 3 · शाम 7:17 · शतभिषा 4 · रात 2:03, 30 जनवरी
इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 7:11
- सूर्यास्त
- शाम 5:57
- चंद्रोदय
- सुबह 8:30
- चंद्रास्त
- रात 8:24
- दिनमान
- 10 घंटे 45 मिनट · 26 घटी 54 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 17 सेकंड अधिक
- रात्रिमान
- 13 घंटे 13 मिनट · 33 घटी 5 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 12:34
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, सुबह 8:34 है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:25 – सुबह 6:18भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 5:59 – सुबह 7:11गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।वर्ज्य के साथ: सुबह 7:04 – सुबह 7:11 (7 मिनट)।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:13 – दोपहर 12:56दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
- विजय मुहूर्तदोपहर 2:22 – दोपहर 3:05दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।यमगण्ड के साथ: दोपहर 2:22 – दोपहर 3:05 (43 मिनट)।
- गोधूलि मुहूर्तशाम 5:44 – शाम 6:08गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
- अमृत कालशाम 5:55 – शाम 7:43हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।
- सायाह्न सन्ध्याशाम 5:57 – शाम 7:09गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
- निशिता मुहूर्तरात 12:07 – रात 1:00, 30 जनवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- रवि योगरात 2:03 – सुबह 7:11, 30 जनवरीचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- वर्ज्यसुबह 7:04 – सुबह 8:53हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।प्रातः सन्ध्या के साथ: सुबह 7:04 – सुबह 7:11 (7 मिनट)।
- दुर्मुहूर्तसुबह 7:11 – सुबह 7:54वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- गुलिक कालसुबह 7:11 – सुबह 8:32वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तसुबह 7:54 – सुबह 8:37वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- राहु कालसुबह 9:53 – सुबह 11:13वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- यमगण्डदोपहर 1:55 – दोपहर 3:16वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 2:22 – दोपहर 3:05 (43 मिनट)।
- भद्रा
- चुने हुए दिन नहीं
- पंचक
- 28 जनवरी, सुबह 9:22 → 2 फ़रवरी, सुबह 9:58
- गंड मूल
- चुने हुए दिन नहीं
- दिशा शूल
- पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 7:11, 30 जनवरी) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- कालसुबह 7:11 – सुबह 8:32काल वेला
- शुभसुबह 8:32 – सुबह 9:53
- रोगसुबह 9:53 – सुबह 11:13
- उद्वेगसुबह 11:13 – दोपहर 12:34
- चरदोपहर 12:34 – दोपहर 1:55
- लाभदोपहर 1:55 – दोपहर 3:16वार वेला
- अमृतदोपहर 3:16 – शाम 4:36
- कालशाम 4:36 – शाम 5:57काल वेला
चौघड़िया · रात
- लाभशाम 5:57 – शाम 7:36काल रात्रि
- उद्वेगशाम 7:36 – रात 9:15
- शुभरात 9:15 – रात 10:55
- अमृतरात 10:55 – रात 12:34, 30 जनवरी
- चररात 12:34 – रात 2:13, 30 जनवरी
- रोगरात 2:13 – रात 3:52, 30 जनवरी
- कालरात 3:52 – सुबह 5:32, 30 जनवरी
- लाभसुबह 5:32 – सुबह 7:11, 30 जनवरीकाल रात्रि
होरा
- शनिसुबह 7:11 – सुबह 8:05
- गुरुसुबह 8:05 – सुबह 8:59
- मंगलसुबह 8:59 – सुबह 9:53
- सूर्यसुबह 9:53 – सुबह 10:47
- शुक्रसुबह 10:47 – सुबह 11:40
- बुधसुबह 11:40 – दोपहर 12:34
- चंद्रदोपहर 12:34 – दोपहर 1:28
- शनिदोपहर 1:28 – दोपहर 2:22
- गुरुदोपहर 2:22 – दोपहर 3:16
- मंगलदोपहर 3:16 – शाम 4:09
- सूर्यशाम 4:09 – शाम 5:03
- शुक्रशाम 5:03 – शाम 5:57
- बुधशाम 5:57 – शाम 7:03
- चंद्रशाम 7:03 – रात 8:09
- शनिरात 8:09 – रात 9:15
- गुरुरात 9:15 – रात 10:22
- मंगलरात 10:22 – रात 11:28
- सूर्यरात 11:28 – रात 12:34, 30 जनवरी
- शुक्ररात 12:34 – रात 1:40, 30 जनवरी
- बुधरात 1:40 – रात 2:46, 30 जनवरी
- चंद्ररात 2:46 – रात 3:52, 30 जनवरी
- शनिरात 3:52 – सुबह 4:59, 30 जनवरी
- गुरुसुबह 4:59 – सुबह 6:05, 30 जनवरी
- मंगलसुबह 6:05 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- सोरम्सुबह 7:11 – सुबह 8:32
- उत्तिसुबह 8:32 – सुबह 9:53
- विषम्सुबह 9:53 – सुबह 11:13
- अमृतम्सुबह 11:13 – दोपहर 12:34
- रोगम्दोपहर 12:34 – दोपहर 1:55
- लाभम्दोपहर 1:55 – दोपहर 3:16
- धनम्दोपहर 3:16 – शाम 4:36
- सुखम्शाम 4:36 – शाम 5:57
- लाभम्शाम 5:57 – शाम 7:36
- धनम्शाम 7:36 – रात 9:15
- सुखम्रात 9:15 – रात 10:55
- सोरम्रात 10:55 – रात 12:34, 30 जनवरी
- उत्तिरात 12:34 – रात 2:13, 30 जनवरी
- विषम्रात 2:13 – रात 3:52, 30 जनवरी
- अमृतम्रात 3:52 – सुबह 5:32, 30 जनवरी
- सोरम्सुबह 5:32 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- कुंभ
- सूर्य राशि
- मकर
- सूर्य नक्षत्र
- श्रवण 2
- अगली संक्रांति
- कुंभ · 13 फ़रवरी 2028, शाम 4:23, 13 फ़रवरी
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- मकरसुबह 6:23 – सुबह 8:06चरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:14
- कुंभसुबह 8:06 – सुबह 9:33स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 9:02
- मीनसुबह 9:33 – सुबह 10:58द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 9:58
- मेषसुबह 10:58 – दोपहर 12:33चरपुष्कर भाग 21° · दोपहर 12:03
- वृषभदोपहर 12:33 – दोपहर 2:29स्थिरपुष्कर भाग 14° · दोपहर 1:24
- मिथुनदोपहर 2:29 – शाम 4:44द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 3:48
- कर्कशाम 4:44 – शाम 7:04चरपुष्कर भाग 8° · शाम 5:21
- सिंहशाम 7:04 – रात 9:21स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 8:31
- कन्यारात 9:21 – रात 11:38द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 10:02
- तुलारात 11:38 – रात 1:57, 30 जनवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 1:29, 30 जनवरी
- वृश्चिकरात 1:57 – सुबह 4:16, 30 जनवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 2:49, 30 जनवरी
- धनुसुबह 4:16 – सुबह 6:20, 30 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 5:53, 30 जनवरी
- मकरसुबह 6:20 – सुबह 8:02, 30 जनवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:10, 30 जनवरी
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | मकर | 14°24′ | श्रवण · 2 | कुंभ · 13 फ़रवरी 2028 |
| चंद्र | कुंभ | 10°43′ | शतभिषा · 2 | मीन · 30 जनवरी 2028 |
| मंगल अस्त | मकर | 25°46′ | धनिष्ठा · 1 | कुंभ · 3 फ़रवरी 2028 |
| बुध वक्री अस्त | मकर | 23°27′ | धनिष्ठा · 1 | कुंभ · 9 मार्च 2028 |
| गुरु वक्री | कन्या | 2°49′ | उत्तरा फाल्गुनी · 2 | सिंह · 28 फ़रवरी 2028 |
| शुक्र | कुंभ | 24°42′ | पूर्वा भाद्रपद · 2 | मीन · 2 फ़रवरी 2028 |
| शनि | मीन | 27°56′ | रेवती · 4 | मेष · 23 फ़रवरी 2028 |
| राहु | मकर | 8°06′ | उत्तराषाढ़ा · 4 | धनु · 24 मई 2028 |
| केतु | कर्क | 8°06′ | पुष्य · 2 | मिथुन · 24 मई 2028 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- माघ
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- माघ
- विक्रम संवत
- 2084 दुर्मति
- शक संवत
- 1949 प्लवंग
यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
- शिशिर
- सूर्य के हिसाब से ऋतु
- शिशिर
- अयनांत के हिसाब से अयन
- उत्तरायण
- मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
- उत्तरायण
- सौर मास
- माघ, दिन 15
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 9 माघ 1949
- कलि संवत
- 5128
- वर्ष का राजा
- बुध
- वर्ष का मंत्री
- बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- शुक्र
- दुर्गेश
- मंगल
- धनेश
- शुक्र
- रसेश
- सूर्य
- धान्येश
- गुरु
- नीरसेश
- शुक्र
- फलेश
- मंगल
- मेघेश
- मंगल
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
- 24°14′57″
- जूलियन दिन
- 2461799.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2084
- बृहस्पति संवत्सर
- दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
ग्रहण
- खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से दिखेगा · रात 10:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई सूतक: दोपहर 1:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
- खग्रास सूर्य ग्रहण · शनिवार, 22 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- पूर्व
- चंद्र वास
- पश्चिम सुबह 7:11 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
- राहु वास
- पूर्व
- शिव वास
- सभा में सुबह 7:11 – सुबह 4:43, 30 जनवरी · क्रीड़ा में सुबह 4:43 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
- अग्नि वास
- पृथ्वी पर सुबह 7:11 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
- आनंदादि योग
- आनंद सुबह 7:11 – रात 2:03, 30 जनवरी · कालदंड रात 2:03 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
- तमिल योग
- अमृत योग सुबह 7:11 – रात 2:03, 30 जनवरी · मरण योग रात 2:03 – सुबह 7:11, 30 जनवरी
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56) और अमृत काल (शाम 5:55 – शाम 7:43) चुने जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:25 – सुबह 6:18) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड छोड़ती है।
चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद
- सूर्योदय
- सुबह 7:11
- राहु काल
- शाम 4:37 – शाम 5:58
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
शुक्ल तृतीया सुबह 4:43, 30 जनवरी तक है, फिर शुक्ल चतुर्थी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल चतुर्थी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
चुने हुए दिन राहु काल सुबह 9:53 – सुबह 11:13 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 – सुबह 6:18, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:59 – सुबह 7:11 (सुबह 7:04 – सुबह 7:11 वर्ज्य के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56, विजय मुहूर्त दोपहर 2:22 – दोपहर 3:05 (दोपहर 2:22 – दोपहर 3:05 यमगण्ड के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 5:44 – शाम 6:08, अमृत काल शाम 5:55 – शाम 7:43, सायाह्न सन्ध्या शाम 5:57 – शाम 7:09, निशिता मुहूर्त रात 12:07 – रात 1:00, 30 जनवरी।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 – सुबह 6:18 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन शतभिषा नक्षत्र है, रात 2:03, 30 जनवरी तक; फिर पूर्वा भाद्रपद।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 10 फ़रवरी 2028, अगली अमावस्या 25 फ़रवरी 2028।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना माघ है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
हाँ: पंचक, 28 जनवरी, सुबह 9:22 → 2 फ़रवरी, सुबह 9:58। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शनि की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन कुंभ राशि में है।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, शनिवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56) और अमृत काल (शाम 5:55 – शाम 7:43) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:25 – सुबह 6:18) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड छोड़ती है। चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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