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दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2084

दिल्ली का पंचांग, 25 फ़रवरी 2028

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2028 ·

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2028 को अमावस्या तिथि शाम 4:07 तक है, उसके बाद शुक्ल प्रतिपदा; नक्षत्र शतभिषा।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    अमावस्या शाम 4:07 तक

    फिर शुक्ल प्रतिपदा

    अमावस्या तिथि, कृष्ण पक्ष की पंद्रहवीं तिथि, जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता।

  2. वार

    शुक्रवार

    शुक्रवार, शुक्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    शतभिषा

    27 नक्षत्रों में चौबीसवाँ: निरयण राशिचक्र में 306°40′ से 320° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    शिव रात 8:46 तक

    फिर सिद्ध

    27 नित्य योगों में बीसवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    नाग शाम 4:07 तक

    फिर किंस्तुघ्न सुबह 5:25, 26 फ़रवरी तक

    फिर बव

    चार स्थिर करणों में से एक, जो महीने में एक बार अमावस्या के आसपास आते हैं; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: अमावस्या। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: शतभिषा 1 · सुबह 11:52 · शतभिषा 2 · शाम 6:38 · शतभिषा 3 · रात 1:24, 26 फ़रवरी

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

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चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:51
सूर्यास्त
शाम 6:18
चंद्रोदय
चुने हुए दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
शाम 6:20
दिनमान
11 घंटे 26 मिनट · 28 घटी 36 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 39 सेकंड अधिक
रात्रिमान
12 घंटे 32 मिनट · 31 घटी 22 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:34
अमावस्या (नव चंद्र) चंद्रमा का 0% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 29.4 दिन अगली पूर्णिमा: 11 मार्च 2028 · सुपरमून अगली अमावस्या: 25 फ़रवरी 2028

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 6:51सुबह 9:51दोपहर 12:51दोपहर 3:51शाम 6:51रात 9:51रात 12:50रात 3:50सुबह 6:50

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:51दोपहर 1:00शाम 6:18

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 6:18रात 1:00सुबह 6:50
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

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चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:11 – सुबह 6:01भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 5:39 – सुबह 6:51गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:11 – दोपहर 12:57दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।राहु काल के साथ: दोपहर 12:11 – दोपहर 12:34 (23 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:29 – दोपहर 3:15दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।वर्ज्य के साथ: दोपहर 2:29 – दोपहर 3:01 (32 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 6:04 – शाम 6:28गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 6:18 – शाम 7:30गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • अमृत कालरात 12:02 – रात 1:50, 26 फ़रवरीहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:09 – रात 12:59, 26 फ़रवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

चुने हुए दिन कोई विशेष योग नहीं बन रहा।

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चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • गुलिक कालसुबह 8:17 – सुबह 9:43वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 9:08 – सुबह 9:54वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • राहु कालसुबह 11:09 – दोपहर 12:34वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:11 – दोपहर 12:34 (23 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 12:57 – दोपहर 1:43वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • वर्ज्यदोपहर 1:13 – दोपहर 3:01हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 2:29 – दोपहर 3:01 (32 मिनट)।
  • यमगण्डदोपहर 3:26 – शाम 4:52वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
24 फ़रवरी, दोपहर 3:32 → 29 फ़रवरी, दोपहर 3:59
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:50, 26 फ़रवरी) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

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चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. चरसुबह 6:51 – सुबह 8:17
  2. लाभसुबह 8:17 – सुबह 9:43
  3. अमृतसुबह 9:43 – सुबह 11:09वार वेला
  4. कालसुबह 11:09 – दोपहर 12:34काल वेला
  5. शुभदोपहर 12:34 – दोपहर 2:00
  6. रोगदोपहर 2:00 – दोपहर 3:26
  7. उद्वेगदोपहर 3:26 – शाम 4:52
  8. चरशाम 4:52 – शाम 6:18

चौघड़िया · रात

  1. रोगशाम 6:18 – शाम 7:52
  2. कालशाम 7:52 – रात 9:26
  3. लाभरात 9:26 – रात 11:00काल रात्रि
  4. उद्वेगरात 11:00 – रात 12:34, 26 फ़रवरी
  5. शुभरात 12:34 – रात 2:08, 26 फ़रवरी
  6. अमृतरात 2:08 – रात 3:42, 26 फ़रवरी
  7. चररात 3:42 – सुबह 5:16, 26 फ़रवरी
  8. रोगसुबह 5:16 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी

होरा

  1. शुक्रसुबह 6:51 – सुबह 7:48
  2. बुधसुबह 7:48 – सुबह 8:46
  3. चंद्रसुबह 8:46 – सुबह 9:43
  4. शनिसुबह 9:43 – सुबह 10:40
  5. गुरुसुबह 10:40 – सुबह 11:37
  6. मंगलसुबह 11:37 – दोपहर 12:34
  7. सूर्यदोपहर 12:34 – दोपहर 1:32
  8. शुक्रदोपहर 1:32 – दोपहर 2:29
  9. बुधदोपहर 2:29 – दोपहर 3:26
  10. चंद्रदोपहर 3:26 – शाम 4:23
  11. शनिशाम 4:23 – शाम 5:20
  12. गुरुशाम 5:20 – शाम 6:18
  13. मंगलशाम 6:18 – शाम 7:20
  14. सूर्यशाम 7:20 – रात 8:23
  15. शुक्ररात 8:23 – रात 9:26
  16. बुधरात 9:26 – रात 10:28
  17. चंद्ररात 10:28 – रात 11:31
  18. शनिरात 11:31 – रात 12:34, 26 फ़रवरी
  19. गुरुरात 12:34 – रात 1:37, 26 फ़रवरी
  20. मंगलरात 1:37 – रात 2:39, 26 फ़रवरी
  21. सूर्यरात 2:39 – रात 3:42, 26 फ़रवरी
  22. शुक्ररात 3:42 – सुबह 4:45, 26 फ़रवरी
  23. बुधसुबह 4:45 – सुबह 5:47, 26 फ़रवरी
  24. चंद्रसुबह 5:47 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. सुखम्सुबह 6:51 – सुबह 8:17
  2. सोरम्सुबह 8:17 – सुबह 9:43
  3. उत्तिसुबह 9:43 – सुबह 11:09
  4. विषम्सुबह 11:09 – दोपहर 12:34
  5. अमृतम्दोपहर 12:34 – दोपहर 2:00
  6. रोगम्दोपहर 2:00 – दोपहर 3:26
  7. लाभम्दोपहर 3:26 – शाम 4:52
  8. धनम्शाम 4:52 – शाम 6:18
  1. रोगम्शाम 6:18 – शाम 7:52
  2. लाभम्शाम 7:52 – रात 9:26
  3. धनम्रात 9:26 – रात 11:00
  4. सुखम्रात 11:00 – रात 12:34, 26 फ़रवरी
  5. सोरम्रात 12:34 – रात 2:08, 26 फ़रवरी
  6. उत्तिरात 2:08 – रात 3:42, 26 फ़रवरी
  7. विषम्रात 3:42 – सुबह 5:16, 26 फ़रवरी
  8. अमृतम्सुबह 5:16 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
कुंभ
सूर्य राशि
कुंभ
सूर्य नक्षत्र
शतभिषा 2
अगली संक्रांति
मीन · 14 मार्च 2028, दोपहर 1:15, 14 मार्च

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कुंभसुबह 6:20 – सुबह 7:47स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:16
  2. मीनसुबह 7:47 – सुबह 9:12द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 8:12
  3. मेषसुबह 9:12 – सुबह 10:47चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 10:17
  4. वृषभसुबह 10:47 – दोपहर 12:43स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 11:38
  5. मिथुनदोपहर 12:43 – दोपहर 2:57द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 2:02
  6. कर्कदोपहर 2:57 – शाम 5:18चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 3:35
  7. सिंहशाम 5:18 – शाम 7:35स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 6:45
  8. कन्याशाम 7:35 – रात 9:51द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 8:16
  9. तुलारात 9:51 – रात 12:11, 26 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 11:43
  10. वृश्चिकरात 12:11 – रात 2:29, 26 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 1:02, 26 फ़रवरी
  11. धनुरात 2:29 – सुबह 4:33, 26 फ़रवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 4:06, 26 फ़रवरी
  12. मकरसुबह 4:33 – सुबह 6:16, 26 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:24, 26 फ़रवरी
  13. कुंभसुबह 6:16 – सुबह 7:43, 26 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 7:12, 26 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकुंभ11°42′शतभिषा · 2मीन · 14 मार्च 2028
चंद्रकुंभ7°32′शतभिषा · 1मीन · 27 फ़रवरी 2028
मंगल अस्तकुंभ17°06′शतभिषा · 4मीन · 12 मार्च 2028
बुधमकर14°58′श्रवण · 2कुंभ · 9 मार्च 2028
गुरु वक्रीकन्या0°25′उत्तरा फाल्गुनी · 2सिंह · 28 फ़रवरी 2028
शुक्रमीन26°01′रेवती · 3मेष · 28 फ़रवरी 2028
शनिमेष0°09′अश्विनी · 1वृषभ · 8 अगस्त 2029
राहुमकर7°51′उत्तराषाढ़ा · 4धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क7°51′पुष्य · 2मिथुन · 24 मई 2028

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हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
फाल्गुन
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
माघ
विक्रम संवत
2084 दुर्मति
शक संवत
1949 प्लवंग

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
शिशिर
सूर्य के हिसाब से ऋतु
वसंत
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
फाल्गुन, दिन 13
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
6 फाल्गुन 1949
कलि संवत
5128
वर्ष का राजा
बुध
वर्ष का मंत्री
बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
शुक्र
दुर्गेश
मंगल
धनेश
शुक्र
रसेश
सूर्य
धान्येश
गुरु
नीरसेश
शुक्र
फलेश
मंगल
मेघेश
मंगल
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°15′01″
जूलियन दिन
2461826.5
गुजराती विक्रम संवत
2084
बृहस्पति संवत्सर
दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

ग्रहण

  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से दिखेगा · रात 10:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई सूतक: दोपहर 1:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिन्धु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · शनिवार, 22 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पश्चिम
चंद्र वास
पश्चिम सुबह 6:51 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी
राहु वास
दक्षिण-पूर्व
शिव वास
गौरी के साथ सुबह 6:51 – शाम 4:07 · श्मशान में शाम 4:07 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी
अग्नि वास
आकाश में सुबह 6:51 – शाम 4:07 · पृथ्वी पर शाम 4:07 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी
आनंदादि योग
सौम्य सुबह 6:51 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:51 – सुबह 6:50, 26 फ़रवरी

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:34 – दोपहर 12:57, राहु काल से अलग) और अमृत काल (रात 12:02 – रात 1:50, 26 फ़रवरी) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:11 – सुबह 6:01) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य, यमगण्ड छोड़ती है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा
सूर्योदय
सुबह 6:50
राहु काल
सुबह 9:42 – सुबह 11:08
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:11 – दोपहर 12:57
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

अमावस्या शाम 4:07 तक है, फिर शुक्ल प्रतिपदा।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल सुबह 11:09 – दोपहर 12:34 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 – सुबह 6:01, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:39 – सुबह 6:51, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 – दोपहर 12:57 (दोपहर 12:11 – दोपहर 12:34 राहु काल के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 – दोपहर 3:15 (दोपहर 2:29 – दोपहर 3:01 वर्ज्य के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 6:04 – शाम 6:28, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:18 – शाम 7:30, अमृत काल रात 12:02 – रात 1:50, 26 फ़रवरी, निशिता मुहूर्त रात 12:09 – रात 12:59, 26 फ़रवरी।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 – दोपहर 12:57 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 – सुबह 6:01 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन शतभिषा नक्षत्र है।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 11 मार्च 2028, अगली अमावस्या 25 फ़रवरी 2028।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना फाल्गुन है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

हाँ: पंचक, 24 फ़रवरी, दोपहर 3:32 → 29 फ़रवरी, दोपहर 3:59। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शुक्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन कुंभ राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, शुक्रवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:34 – दोपहर 12:57, राहु काल से अलग) और अमृत काल (रात 12:02 – रात 1:50, 26 फ़रवरी) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:11 – सुबह 6:01) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य, यमगण्ड छोड़ती है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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