दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2084
दिल्ली का पंचांग, 12 मार्च 2028
रविवार, 12 मार्च 2028 ·
रविवार, 12 मार्च 2028 को कृष्ण द्वितीया तिथि रात 11:34 तक है, उसके बाद कृष्ण तृतीया; नक्षत्र हस्त रात 1:02, 13 मार्च तक।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।
-
तिथि
कृष्ण द्वितीया रात 11:34 तक
फिर कृष्ण तृतीया
कृष्ण पक्ष की दूसरी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 18% पूरा -
वार
रविवार
रविवार, सूर्य का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
हस्त रात 1:02, 13 मार्च तक
फिर चित्रा
27 नक्षत्रों में तेरहवाँ: निरयण राशिचक्र में 160° से 173°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 14% पूरा -
योग
गण्ड दोपहर 12:12 तक
फिर वृद्धि
27 नित्य योगों में दसवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 72% पूरा -
करण
तैतिल दोपहर 1:13 तक
फिर गर रात 11:34 तक
फिर वणिज
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 35% पूरा
पक्ष: कृष्ण
उदया तिथि: कृष्ण द्वितीया। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: हस्त 1 · सुबह 8:56 · हस्त 2 · दोपहर 2:17 · हस्त 3 · शाम 7:38 · हस्त 4 · रात 1:02, 13 मार्च · चित्रा 1 · सुबह 6:27, 13 मार्च
इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 6:34
- सूर्यास्त
- शाम 6:28
- चंद्रोदय
- रात 8:07
- चंद्रास्त
- सुबह 7:00
- दिनमान
- 11 घंटे 53 मिनट · 29 घटी 44 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 43 सेकंड अधिक
- रात्रिमान
- 12 घंटे 5 मिनट · 30 घटी 13 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 12:31
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 8:11 है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:57 – सुबह 5:46भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 5:22 – सुबह 6:34गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:07 – दोपहर 12:55दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।वर्ज्य के साथ: दोपहर 12:07 – दोपहर 12:32 (25 मिनट)।यमगण्ड के साथ: दोपहर 12:31 – दोपहर 12:55 (24 मिनट)।
- विजय मुहूर्तदोपहर 2:30 – दोपहर 3:17दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
- गोधूलि मुहूर्तशाम 6:14 – शाम 6:38गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।राहु काल के साथ: शाम 6:14 – शाम 6:28 (14 मिनट)।
- सायाह्न सन्ध्याशाम 6:28 – शाम 7:40गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
- अमृत कालशाम 7:41 – रात 9:06हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
- निशिता मुहूर्तरात 12:06 – रात 12:54, 13 मार्चहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- अमृत सिद्धि योगसुबह 6:34 – रात 1:02, 13 मार्चवार और नक्षत्र का विशेष मेल, जिसे अच्छी शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।
- सर्वार्थ सिद्धि योगसुबह 6:34 – रात 1:02, 13 मार्चवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- वर्ज्यसुबह 11:07 – दोपहर 12:32हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:07 – दोपहर 12:32 (25 मिनट)।
- यमगण्डदोपहर 12:31 – दोपहर 2:00वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:31 – दोपहर 12:55 (24 मिनट)।
- गुलिक कालदोपहर 3:29 – शाम 4:58वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तशाम 4:52 – शाम 5:40वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
- राहु कालशाम 4:58 – शाम 6:28वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।गोधूलि मुहूर्त के साथ: शाम 6:14 – शाम 6:28 (14 मिनट)।
- भद्रा
- चुने हुए दिन नहीं
- पंचक
- चुने हुए दिन नहीं
- गंड मूल
- चुने हुए दिन नहीं
- दिशा शूल
- पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- उद्वेगसुबह 6:34 – सुबह 8:03
- चरसुबह 8:03 – सुबह 9:33
- लाभसुबह 9:33 – सुबह 11:02
- अमृतसुबह 11:02 – दोपहर 12:31वार वेला
- कालदोपहर 12:31 – दोपहर 2:00काल वेला
- शुभदोपहर 2:00 – दोपहर 3:29
- रोगदोपहर 3:29 – शाम 4:58
- उद्वेगशाम 4:58 – शाम 6:28
चौघड़िया · रात
- शुभशाम 6:28 – शाम 7:58
- अमृतशाम 7:58 – रात 9:29
- चररात 9:29 – रात 11:00
- रोगरात 11:00 – रात 12:30, 13 मार्च
- कालरात 12:30 – रात 2:01, 13 मार्च
- लाभरात 2:01 – रात 3:32, 13 मार्चकाल रात्रि
- उद्वेगरात 3:32 – सुबह 5:02, 13 मार्च
- शुभसुबह 5:02 – सुबह 6:33, 13 मार्च
होरा
- सूर्यसुबह 6:34 – सुबह 7:34
- शुक्रसुबह 7:34 – सुबह 8:33
- बुधसुबह 8:33 – सुबह 9:33
- चंद्रसुबह 9:33 – सुबह 10:32
- शनिसुबह 10:32 – सुबह 11:31
- गुरुसुबह 11:31 – दोपहर 12:31
- मंगलदोपहर 12:31 – दोपहर 1:30
- सूर्यदोपहर 1:30 – दोपहर 2:30
- शुक्रदोपहर 2:30 – दोपहर 3:29
- बुधदोपहर 3:29 – शाम 4:29
- चंद्रशाम 4:29 – शाम 5:28
- शनिशाम 5:28 – शाम 6:28
- गुरुशाम 6:28 – शाम 7:28
- मंगलशाम 7:28 – रात 8:29
- सूर्यरात 8:29 – रात 9:29
- शुक्ररात 9:29 – रात 10:29
- बुधरात 10:29 – रात 11:30
- चंद्ररात 11:30 – रात 12:30, 13 मार्च
- शनिरात 12:30 – रात 1:31, 13 मार्च
- गुरुरात 1:31 – रात 2:31, 13 मार्च
- मंगलरात 2:31 – रात 3:32, 13 मार्च
- सूर्यरात 3:32 – सुबह 4:32, 13 मार्च
- शुक्रसुबह 4:32 – सुबह 5:33, 13 मार्च
- बुधसुबह 5:33 – सुबह 6:33, 13 मार्च
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- उत्तिसुबह 6:34 – सुबह 8:03
- अमृतम्सुबह 8:03 – सुबह 9:33
- रोगम्सुबह 9:33 – सुबह 11:02
- लाभम्सुबह 11:02 – दोपहर 12:31
- धनम्दोपहर 12:31 – दोपहर 2:00
- सुखम्दोपहर 2:00 – दोपहर 3:29
- सोरम्दोपहर 3:29 – शाम 4:58
- विषम्शाम 4:58 – शाम 6:28
- धनम्शाम 6:28 – शाम 7:58
- सुखम्शाम 7:58 – रात 9:29
- सोरम्रात 9:29 – रात 11:00
- विषम्रात 11:00 – रात 12:30, 13 मार्च
- उत्तिरात 12:30 – रात 2:01, 13 मार्च
- अमृतम्रात 2:01 – रात 3:32, 13 मार्च
- रोगम्रात 3:32 – सुबह 5:02, 13 मार्च
- लाभम्सुबह 5:02 – सुबह 6:33, 13 मार्च
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- कन्या
- सूर्य राशि
- कुंभ
- सूर्य नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद 3
- अगली संक्रांति
- मीन · 14 मार्च 2028, दोपहर 1:15, 14 मार्च
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- कुंभसुबह 5:17 – सुबह 6:44स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 6:13
- मीनसुबह 6:44 – सुबह 8:09द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 7:09
- मेषसुबह 8:09 – सुबह 9:44चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 9:14
- वृषभसुबह 9:44 – सुबह 11:40स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 10:35
- मिथुनसुबह 11:40 – दोपहर 1:54द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 12:59
- कर्कदोपहर 1:54 – शाम 4:15चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 2:32
- सिंहशाम 4:15 – शाम 6:32स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 5:42
- कन्याशाम 6:32 – रात 8:48द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · शाम 7:13
- तुलारात 8:48 – रात 11:08चरपुष्कर भाग 24° · रात 10:40
- वृश्चिकरात 11:08 – रात 1:27, 13 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 12:00, 13 मार्च
- धनुरात 1:27 – रात 3:30, 13 मार्चद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 3:04, 13 मार्च
- मकररात 3:30 – सुबह 5:13, 13 मार्चचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 4:21, 13 मार्च
- कुंभसुबह 5:13 – सुबह 6:40, 13 मार्चस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 6:09, 13 मार्च
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | कुंभ | 27°44′ | पूर्वा भाद्रपद · 3 | मीन · 14 मार्च 2028 |
| चंद्र | कन्या | 11°51′ | हस्त · 1 | तुला · 13 मार्च 2028 |
| मंगल अस्त | कुंभ | 29°40′ | पूर्वा भाद्रपद · 3 | मीन · 12 मार्च 2028 |
| बुध | कुंभ | 3°57′ | धनिष्ठा · 4 | मीन · 28 मार्च 2028 |
| गुरु वक्री | सिंह | 28°25′ | उत्तरा फाल्गुनी · 1 | कन्या · 24 जुलाई 2028 |
| शुक्र | मेष | 13°29′ | भरणी · 1 | वृषभ · 28 मार्च 2028 |
| शनि | मेष | 1°50′ | अश्विनी · 1 | वृषभ · 8 अगस्त 2029 |
| राहु | मकर | 6°54′ | उत्तराषाढ़ा · 4 | धनु · 24 मई 2028 |
| केतु | कर्क | 6°54′ | पुष्य · 2 | मिथुन · 24 मई 2028 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- चैत्र
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- फाल्गुन
- विक्रम संवत
- 2084 दुर्मति
- शक संवत
- 1949 प्लवंग
यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
- शिशिर
- सूर्य के हिसाब से ऋतु
- वसंत
- अयनांत के हिसाब से अयन
- उत्तरायण
- मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
- उत्तरायण
- सौर मास
- फाल्गुन, दिन 29
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 22 फाल्गुन 1949
- कलि संवत
- 5128
- वर्ष का राजा
- बुध
- वर्ष का मंत्री
- बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- शुक्र
- दुर्गेश
- मंगल
- धनेश
- शुक्र
- रसेश
- सूर्य
- धान्येश
- गुरु
- नीरसेश
- शुक्र
- फलेश
- मंगल
- मेघेश
- मंगल
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
- 24°15′03″
- जूलियन दिन
- 2461842.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2084
- बृहस्पति संवत्सर
- दुंदुभि 2 मार्च 2028 से; फिर रुधिरोद्गारी 26 फ़रवरी 2029 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
ग्रहण
- खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से दिखेगा · रात 10:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई सूतक: दोपहर 1:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिन्धु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
- खग्रास सूर्य ग्रहण · शनिवार, 22 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- पश्चिम
- चंद्र वास
- दक्षिण सुबह 6:34 – सुबह 6:33, 13 मार्च
- राहु वास
- उत्तर
- शिव वास
- सभा में सुबह 6:34 – रात 11:34 · क्रीड़ा में रात 11:34 – सुबह 6:33, 13 मार्च
- अग्नि वास
- पृथ्वी पर सुबह 6:34 – सुबह 6:33, 13 मार्च
- आनंदादि योग
- मानस सुबह 6:34 – रात 1:02, 13 मार्च · पद्म रात 1:02 – सुबह 6:33, 13 मार्च
- तमिल योग
- अमृत योग सुबह 6:34 – रात 1:02, 13 मार्च · सिद्ध योग रात 1:02 – सुबह 6:33, 13 मार्च
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (शाम 7:41 – रात 9:06) चुना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:57 – सुबह 5:46) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है।
चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- कृष्ण तृतीया
- नक्षत्र
- चित्रा
- सूर्योदय
- सुबह 6:33
- राहु काल
- सुबह 8:02 – सुबह 9:32
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:07 – दोपहर 12:54
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) बताता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का तरीका है।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
कृष्ण द्वितीया रात 11:34 तक है, फिर कृष्ण तृतीया।
अगले दिन की तिथि क्या है?
अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण तृतीया तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
चुने हुए दिन राहु काल शाम 4:58 – शाम 6:28 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:57 – सुबह 5:46, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:22 – सुबह 6:34, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 – दोपहर 12:55 (दोपहर 12:07 – दोपहर 12:32 वर्ज्य के साथ; दोपहर 12:31 – दोपहर 12:55 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 – दोपहर 3:17, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:14 – शाम 6:38 (शाम 6:14 – शाम 6:28 राहु काल के साथ), सायाह्न सन्ध्या शाम 6:28 – शाम 7:40, अमृत काल शाम 7:41 – रात 9:06, निशिता मुहूर्त रात 12:06 – रात 12:54, 13 मार्च।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 – दोपहर 12:55 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:57 – सुबह 5:46 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन हस्त नक्षत्र है, रात 1:02, 13 मार्च तक; फिर चित्रा।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 9 अप्रैल 2028, अगली अमावस्या 26 मार्च 2028।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना फाल्गुन है (अमांत; पूर्णिमांत में चैत्र), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह सूर्य की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन कन्या राशि में है।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, रविवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (शाम 7:41 – रात 9:06) चुना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:57 – सुबह 5:46) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए वर्ज्य, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल छोड़ती है। चुने हुए दिन अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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