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दैनिक पंचांग · चैत्र · विक्रम संवत 2085

दिल्ली का पंचांग, 7 अप्रैल 2028

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2028 ·

शुक्रवार, 7 अप्रैल 2028 को शुक्ल त्रयोदशी तिथि रात 10:34 तक है, उसके बाद शुक्ल चतुर्दशी; नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी शाम 4:58 तक।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल त्रयोदशी रात 10:34 तक

    फिर शुक्ल चतुर्दशी

    शुक्ल पक्ष की तेरहवीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    शुक्रवार

    शुक्रवार, शुक्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    पूर्वा फाल्गुनी शाम 4:58 तक

    फिर उत्तरा फाल्गुनी

    27 नक्षत्रों में ग्यारहवाँ: निरयण राशिचक्र में 133°20′ से 146°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    वृद्धि रात 2:08, 8 अप्रैल तक

    फिर ध्रुव

    27 नित्य योगों में ग्यारहवाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    कौलव दोपहर 12:14 तक

    फिर तैतिल रात 10:34 तक

    फिर गर

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल त्रयोदशी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: पूर्वा फाल्गुनी 2 · सुबह 6:14 · पूर्वा फाल्गुनी 3 · सुबह 11:36 · पूर्वा फाल्गुनी 4 · शाम 4:58 · उत्तरा फाल्गुनी 1 · रात 10:19 · उत्तरा फाल्गुनी 2 · रात 3:41, 8 अप्रैल

इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 6:04
सूर्यास्त
शाम 6:42
चंद्रोदय
शाम 4:36
चंद्रास्त
सुबह 4:53, 8 अप्रैल
दिनमान
12 घंटे 38 मिनट · 31 घटी 35 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 41 सेकंड अधिक
रात्रिमान
11 घंटे 20 मिनट · 28 घटी 22 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:23

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, शाम 4:40 है।

शुक्ल पक्ष, आधे से बड़ा बढ़ता चाँद चंद्रमा का 92% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 11.8 दिन अगली पूर्णिमा: 9 अप्रैल 2028 · सुपरमून अगली अमावस्या: 25 अप्रैल 2028

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 6:04सुबह 9:04दोपहर 12:04दोपहर 3:04शाम 6:04रात 9:04रात 12:03रात 3:03सुबह 6:03

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 6:04दोपहर 12:00शाम 6:42

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 6:42रात 12:00सुबह 6:03
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:33 – सुबह 5:19भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 4:52 – सुबह 6:04गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
  • अमृत कालसुबह 11:14 – दोपहर 12:40हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।राहु काल के साथ: सुबह 11:14 – दोपहर 12:23 (69 मिनट)।
  • अभिजित मुहूर्तसुबह 11:58 – दोपहर 12:49दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।राहु काल के साथ: सुबह 11:58 – दोपहर 12:23 (25 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:30 – दोपहर 3:20दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 6:29 – शाम 6:53गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 6:42 – शाम 7:54गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:00 – रात 12:45, 8 अप्रैलहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।वर्ज्य के साथ: रात 12:00 – रात 12:45, 8 अप्रैल (45 मिनट)।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • रवि योगशाम 4:58 – सुबह 6:03, 8 अप्रैलचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • गुलिक कालसुबह 7:39 – सुबह 9:14वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 8:36 – सुबह 9:26वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • राहु कालसुबह 10:49 – दोपहर 12:23वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: सुबह 11:14 – दोपहर 12:23 (69 मिनट)।अभिजित मुहूर्त के साथ: सुबह 11:58 – दोपहर 12:23 (25 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 12:49 – दोपहर 1:39वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • यमगण्डदोपहर 3:33 – शाम 5:08वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत ज्योतिष परंपरा में नहीं की जाती।
  • वर्ज्यरात 11:23 – रात 12:49, 8 अप्रैलहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना ज्योतिष परंपरा में टाला जाता है।निशिता मुहूर्त के साथ: रात 12:00 – रात 12:45, 8 अप्रैल (45 मिनट)।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल (हमारी गिनती)
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
नक्षत्र दिशा शूल MC 11.10
उत्तर शाम 4:58 – सुबह 6:03, 8 अप्रैलइस नक्षत्र के समय मुहूर्त चिंतामणि (11.10) इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचने को कहता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. चरसुबह 6:04 – सुबह 7:39
  2. लाभसुबह 7:39 – सुबह 9:14
  3. अमृतसुबह 9:14 – सुबह 10:49वार वेला
  4. कालसुबह 10:49 – दोपहर 12:23काल वेला (हमारी गिनती)
  5. शुभदोपहर 12:23 – दोपहर 1:58
  6. रोगदोपहर 1:58 – दोपहर 3:33
  7. उद्वेगदोपहर 3:33 – शाम 5:08
  8. चरशाम 5:08 – शाम 6:42

चौघड़िया · रात

  1. रोगशाम 6:42 – रात 8:07
  2. कालरात 8:07 – रात 9:33
  3. लाभरात 9:33 – रात 10:58काल रात्रि
  4. उद्वेगरात 10:58 – रात 12:23, 8 अप्रैल
  5. शुभरात 12:23 – रात 1:48, 8 अप्रैल
  6. अमृतरात 1:48 – रात 3:13, 8 अप्रैल
  7. चररात 3:13 – सुबह 4:38, 8 अप्रैल
  8. रोगसुबह 4:38 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल

होरा

  1. शुक्रसुबह 6:04 – सुबह 7:07
  2. बुधसुबह 7:07 – सुबह 8:11
  3. चंद्रसुबह 8:11 – सुबह 9:14
  4. शनिसुबह 9:14 – सुबह 10:17
  5. गुरुसुबह 10:17 – सुबह 11:20
  6. मंगलसुबह 11:20 – दोपहर 12:23
  7. सूर्यदोपहर 12:23 – दोपहर 1:26
  8. शुक्रदोपहर 1:26 – दोपहर 2:30
  9. बुधदोपहर 2:30 – दोपहर 3:33
  10. चंद्रदोपहर 3:33 – शाम 4:36
  11. शनिशाम 4:36 – शाम 5:39
  12. गुरुशाम 5:39 – शाम 6:42
  13. मंगलशाम 6:42 – शाम 7:39
  14. सूर्यशाम 7:39 – रात 8:36
  15. शुक्ररात 8:36 – रात 9:33
  16. बुधरात 9:33 – रात 10:29
  17. चंद्ररात 10:29 – रात 11:26
  18. शनिरात 11:26 – रात 12:23, 8 अप्रैल
  19. गुरुरात 12:23 – रात 1:19, 8 अप्रैल
  20. मंगलरात 1:19 – रात 2:16, 8 अप्रैल
  21. सूर्यरात 2:16 – रात 3:13, 8 अप्रैल
  22. शुक्ररात 3:13 – सुबह 4:10, 8 अप्रैल
  23. बुधसुबह 4:10 – सुबह 5:06, 8 अप्रैल
  24. चंद्रसुबह 5:06 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. सुखम्सुबह 6:04 – सुबह 7:39
  2. सोरम्सुबह 7:39 – सुबह 9:14
  3. उत्तिसुबह 9:14 – सुबह 10:49
  4. विषम्सुबह 10:49 – दोपहर 12:23
  5. अमृतम्दोपहर 12:23 – दोपहर 1:58
  6. रोगम्दोपहर 1:58 – दोपहर 3:33
  7. लाभम्दोपहर 3:33 – शाम 5:08
  8. धनम्शाम 5:08 – शाम 6:42
  1. रोगम्शाम 6:42 – रात 8:07
  2. लाभम्रात 8:07 – रात 9:33
  3. धनम्रात 9:33 – रात 10:58
  4. सुखम्रात 10:58 – रात 12:23, 8 अप्रैल
  5. सोरम्रात 12:23 – रात 1:48, 8 अप्रैल
  6. उत्तिरात 1:48 – रात 3:13, 8 अप्रैल
  7. विषम्रात 3:13 – सुबह 4:38, 8 अप्रैल
  8. अमृतम्सुबह 4:38 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
सिंह रात 10:19 तक
कन्या
सूर्य राशि
मीन
सूर्य नक्षत्र
रेवती 3
अगली संक्रांति
मेष · 13 अप्रैल 2028, रात 9:44, 13 अप्रैल

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मीनसुबह 5:02 – सुबह 6:27द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 5:27
  2. मेषसुबह 6:27 – सुबह 8:02चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 7:32
  3. वृषभसुबह 8:02 – सुबह 9:58स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 8:53
  4. मिथुनसुबह 9:58 – दोपहर 12:12द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 11:17
  5. कर्कदोपहर 12:12 – दोपहर 2:33चरपुष्कर भाग 8° · दोपहर 12:50
  6. सिंहदोपहर 2:33 – शाम 4:50स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 4:00
  7. कन्याशाम 4:50 – शाम 7:06द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · शाम 5:31
  8. तुलाशाम 7:06 – रात 9:26चरपुष्कर भाग 24° · रात 8:58
  9. वृश्चिकरात 9:26 – रात 11:44स्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 10:17
  10. धनुरात 11:44 – रात 1:48, 8 अप्रैलद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 1:21, 8 अप्रैल
  11. मकररात 1:48 – रात 3:30, 8 अप्रैलचरपुष्कर भाग 14° · रात 2:38, 8 अप्रैल
  12. कुंभरात 3:30 – सुबह 4:58, 8 अप्रैलस्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 4:27, 8 अप्रैल
  13. मीनसुबह 4:58 – सुबह 6:23, 8 अप्रैलद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 5:23, 8 अप्रैल

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमीन23°28′रेवती · 3मेष · 13 अप्रैल 2028
चंद्रसिंह19°54′पूर्वा फाल्गुनी · 2कन्या · 7 अप्रैल 2028
मंगल अस्तमीन19°50′रेवती · 1मेष · 20 अप्रैल 2028
बुध अस्तमीन18°15′रेवती · 1मेष · 12 अप्रैल 2028
गुरु वक्रीसिंह25°16′पूर्वा फाल्गुनी · 4कन्या · 24 जुलाई 2028
शुक्रवृषभ8°28′कृत्तिका · 4मिथुन · 1 अगस्त 2028
शनि अस्तमेष4°58′अश्विनी · 2वृषभ · 8 अगस्त 2029
राहुमकर4°44′उत्तराषाढ़ा · 3धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क4°44′पुष्य · 1मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2085 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
चैत्र
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085 दुंदुभि
शक संवत
1950 कीलक

यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
वसंत
सूर्य के हिसाब से ऋतु
वसंत
अयनांत के हिसाब से अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
उत्तरायण
सौर मास
चैत्र, दिन 25
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
18 चैत्र 1950
कलि संवत
5129
वर्ष का राजा
चंद्र
वर्ष का मंत्री
गुरु
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
सूर्य
दुर्गेश
बुध
धनेश
शनि
रसेश
मंगल
धान्येश
शुक्र
नीरसेश
सूर्य
फलेश
बुध
मेघेश
बुध
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी)
24°15′07″
जूलियन दिन
2461868.5
गुजराती विक्रम संवत
2084
बृहस्पति संवत्सर
दुंदुभि 2 मार्च 2028 से; फिर रुधिरोद्गारी 26 फ़रवरी 2029 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

सिर्फ़ इस उत्तर के लिए; आपकी जन्म की जानकारी सेव नहीं की जाती।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

अभी चल रहा है

  • खरमास · 13 अप्रैल 2028 तक

ग्रहण

  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · गुरुवार, 6 जुलाई 2028 · यहाँ से दिखेगा · रात 10:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई सूतक: दोपहर 1:38, 6 जुलाई – रात 1:01, 7 जुलाई। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिन्धु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
  • खग्रास सूर्य ग्रहण · शनिवार, 22 जुलाई 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पश्चिम
नक्षत्र दिशा शूल MC 11.10
उत्तर शाम 4:58 – सुबह 6:03, 8 अप्रैलइस नक्षत्र के समय मुहूर्त चिंतामणि (11.10) इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचने को कहता है।
चंद्र वास
पूर्व सुबह 6:04 – रात 10:19 · दक्षिण रात 10:19 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल
राहु वास
दक्षिण-पूर्व
शिव वास
वृषभ पर सुबह 6:04 – रात 10:34 · भोजन में रात 10:34 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल
अग्नि वास
पृथ्वी पर सुबह 6:04 – रात 10:34 · आकाश में रात 10:34 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल
आनंदादि योग
सिद्धि सुबह 6:04 – शाम 4:58 · शुभ शाम 4:58 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 6:04 – सुबह 6:03, 8 अप्रैल

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (दोपहर 12:23 – दोपहर 12:40, राहु काल से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:23 – दोपहर 12:49, राहु काल से अलग) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:33 – सुबह 5:19) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
सूर्योदय
सुबह 6:03
राहु काल
सुबह 9:13 – सुबह 10:48
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:58 – दोपहर 12:48
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और जो हिस्सा दोनों में आता है, वह नए काम की शुरुआत के लिए नहीं बताया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

शुक्ल त्रयोदशी रात 10:34 तक है, फिर शुक्ल चतुर्दशी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल चतुर्दशी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

चुने हुए दिन राहु काल सुबह 10:49 – दोपहर 12:23 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:33 – सुबह 5:19, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:52 – सुबह 6:04, अमृत काल सुबह 11:14 – दोपहर 12:40 (सुबह 11:14 – दोपहर 12:23 राहु काल के साथ), अभिजित मुहूर्त सुबह 11:58 – दोपहर 12:49 (सुबह 11:58 – दोपहर 12:23 राहु काल के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 – दोपहर 3:20, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:29 – शाम 6:53, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:42 – शाम 7:54, निशिता मुहूर्त रात 12:00 – रात 12:45, 8 अप्रैल (रात 12:00 – रात 12:45, 8 अप्रैल वर्ज्य के साथ)।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 – दोपहर 12:49 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:33 – सुबह 5:19 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र है, शाम 4:58 तक; फिर उत्तरा फाल्गुनी।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 9 अप्रैल 2028, अगली अमावस्या 25 अप्रैल 2028।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना चैत्र है (अमांत; पूर्णिमांत में चैत्र), विक्रम संवत 2085 दुंदुभि और शक संवत 1950।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शुक्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन सिंह राशि में है, रात 10:19 पर कन्या में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, शुक्रवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (दोपहर 12:23 – दोपहर 12:40, राहु काल से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:23 – दोपहर 12:49, राहु काल से अलग) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:33 – सुबह 5:19) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नई शुरुआत के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नई शुरुआत के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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