दैनिक पंचांग · श्रावण · विक्रम संवत 2085
दिल्ली का पंचांग, 30 जुलाई 2028
रविवार, 30 जुलाई 2028 ·
रविवार, 30 जुलाई 2028 को शुक्ल नवमी तिथि सुबह 9:21 तक है, उसके बाद शुक्ल दशमी; नक्षत्र विशाखा दोपहर 1:04 तक।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने शुरू होने से खत्म होने तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आ जाते हैं।
-
तिथि
शुक्ल नवमी सुबह 9:21 तक
फिर शुक्ल दशमी
शुक्ल पक्ष की नौवीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 84% पूरा -
वार
रविवार
रविवार, सूर्य का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
विशाखा दोपहर 1:04 तक
फिर अनुराधा
27 नक्षत्रों में सोलहवाँ: निरयण राशिचक्र में 200° से 213°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 69% पूरा -
योग
शुक्ल शाम 6:33 तक
फिर ब्रह्म
सूर्योदय पर 43% पूरा -
करण
कौलव सुबह 9:21 तक
फिर तैतिल रात 9:01 तक
फिर गर
सूर्योदय पर 68% पूरा
पक्ष: शुक्ल
उदया तिथि: शुक्ल नवमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: विशाखा 3 · सुबह 7:05 · विशाखा 4 · दोपहर 1:04 · अनुराधा 1 · शाम 7:06 · अनुराधा 2 · रात 1:09, 31 जुलाई
इस पेज का हर समय ऊपर दिखाए गए शहर (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
आज रात का आसमान
आज रात, सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक: चंद्रमा और ग्रह आकाश में कहाँ हैं
स्थिति और समय की गणना NASA JPL के आंकड़ों से।
आसमान दिखना मौसम और आसपास की रुकावटों पर निर्भर है।
समय समुद्र-तल और खुले मैदान के हिसाब से है, जहाँ पहाड़ या इमारत की रुकावट न हो।
जहाँ चमक का अंक नहीं मिला, वह ग्रह देखने की जाँच में शामिल नहीं है।
नीचे दिया हर चंद्रमा या ग्रह हमारी कसौटी के हिसाब से दिख सकता है
- चंद्रमा · दक्षिण (35.8°) ·
चंद्रमा के उगने-डूबने का समय: नीचे सूर्य और चंद्रमा वाले हिस्से में - शुक्र · पूर्व (10.7°) ·
उगने का समय: रात 2:29 बजे · इस रात नहीं डूबता - बृहस्पति · पश्चिम (18.4°) ·
इस रात नहीं उगता · डूबने का समय: रात 9:39 बजे
आने वाली आकाश की घटनाएँ · कहाँ देखें
- इन छह हफ़्तों में कसौटी पूरी करने वाली घटना नहीं मिली।
सूर्य और चंद्रमा के समय भी देख सकते हैं
गणना और स्रोत देखें: NASA JPL के आंकड़ों से
खुली आँख से देखने की हमारी कसौटी: सूर्य की ऊँचाई −12° से नीचे, तारे या ग्रह की ऊँचाई 10° से ऊपर, चमक का अंक 4 या कम (अंक जितना कम, उतनी ज़्यादा चमक); चंद्रमा की ऊँचाई 5° से ऊपर हो तो सूर्य की ऊँचाई और चमक की शर्त नहीं। ऊँचाई हवा के असर के बिना, समुद्र-तल से है। हर 10 मिनट पर जाँच; छोटा समय छूट सकता है।
ग्रहों के मेल का चुना तरीका: राशि-चक्र पर दोनों का अंश बराबर हो। दूसरे तरीके: आकाश के नक्शे पर दोनों एक ही सीधी रेखा पर हों, या दोनों के बीच सबसे कम दूरी हो। हमारी सूची में वही मेल है जहाँ दोनों के बीच 10° से कम दूरी हो। दोनों की जाँच घटना के समय पर है।
छह हफ़्तों में कसौटी पूरी करने वाली अगली तीन घटनाएँ। यहाँ चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति के लिए ज़रूरी आंकड़े हैं। बुध, मंगल और शनि की चमक का अंक: नहीं मिला। ऋतु बदलने के दिन (जैसे साल का सबसे लंबा दिन) आसमान में देखने की चीज़ नहीं, इसलिए सूची में नहीं हैं।
नक्शे पर जगह के अंक (उत्तर-दक्षिण / पूर्व-पश्चिम): 28.66, 77.24
समय चुने गए शहर की घड़ी से · ग्रहों की स्थिति: NASA JPL (DE440s)
- राष्ट्रीय पंचांग 1948 शक (2026-27), प्रस्तावना पृष्ठ छह (सूर्य: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 31′ मुड़ना + 16′ आधी चौड़ाई), पृष्ठ 114 (शहरों की तालिका), पृष्ठ 131 (शहरों के अक्षांश-देशांतर)
- भारतीय खगोलीय पंचांग 2027, पृष्ठ 462 (चंद्रमा: ऊपरी किनारा, हवा से रोशनी का 34′ मुड़ना); राष्ट्रीय पंचांग में चंद्रमा का नियम लिखा नहीं, इसलिए इसे हमारा तय तरीका कहा गया है
- ए. मल्लामा और जे. एल. हिल्टन (2018), ग्रहों की चमक की गणना (शुक्र, बृहस्पति)
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 5:42
- सूर्यास्त
- शाम 7:13
- चंद्रोदय
- दोपहर 2:24
- चंद्रास्त
- रात 12:51, 31 जुलाई
- दिनमान
- 13 घंटे 31 मिनट · 33 घटी 48 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 13 सेकंड कम
- रात्रिमान
- 10 घंटे 29 मिनट · 26 घटी 13 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 12:27
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, दोपहर 2:29 है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- राहु काल और दूसरे समय
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:18 – सुबह 5:00भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- अमृत कालसुबह 4:22 – सुबह 5:57हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 4:30 – सुबह 5:42गौण काल (तीन घड़ी): सूर्योदय से 72 मिनट पहले से सूर्योदय तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: सुबह तारे दिखते रहें तब।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:00 – दोपहर 12:54दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।यमगण्ड के साथ: दोपहर 12:27 – दोपहर 12:54 (27 मिनट)।
- विजय मुहूर्तदोपहर 2:43 – दोपहर 3:37दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए ज्योतिष परंपरा में चुना जाता है।
- गोधूलि मुहूर्तशाम 7:00 – शाम 7:24गोधूलि: आधे डूबे सूर्य से आधी घड़ी पहले से आधी घड़ी बाद तक (मुहूर्त चिंतामणि, पीयूषधारा टीका)। कुछ विद्वान: सूर्य का तीसरा हिस्सा दिखने से दो घड़ी; टीका कहती है स्थानीय रिवाज़ से चुनें।राहु काल के साथ: शाम 7:00 – शाम 7:13 (13 मिनट)।
- सायाह्न सन्ध्याशाम 7:13 – रात 8:25गौण काल (तीन घड़ी): सूर्यास्त से 72 मिनट तक (संस्कार गणपति)। मुख्य समय: शाम सूर्य दिखते रहे तब।
- निशिता मुहूर्तरात 12:07 – रात 12:49, 31 जुलाईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
- अमृत कालरात 12:25 – रात 2:02, 31 जुलाईहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो ज्योतिष परंपरा में शुभ माना जाता है।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- रवि योगपूरे दिनचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल
- यमगण्डदोपहर 12:27 – दोपहर 2:09अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:27 – दोपहर 12:54 (27 मिनट)।
- गुलिक कालदोपहर 3:50 – शाम 5:32
- वर्ज्यशाम 5:07 – शाम 6:44
- दुर्मुहूर्तशाम 5:25 – शाम 6:19
- राहु कालशाम 5:32 – शाम 7:13गोधूलि मुहूर्त के साथ: शाम 7:00 – शाम 7:13 (13 मिनट)।
- भद्रा
- चुने हुए दिन नहीं
- पंचक
- चुने हुए दिन नहीं
- गंड मूल (हमारी गिनती)
- चुने हुए दिन नहीं
- दिशा शूल
- पश्चिम
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है।
चौघड़िया · दिन
- उद्वेगसुबह 5:42 – सुबह 7:23
- चरसुबह 7:23 – सुबह 9:05
- लाभसुबह 9:05 – सुबह 10:46
- अमृतसुबह 10:46 – दोपहर 12:27वार वेला
- कालदोपहर 12:27 – दोपहर 2:09काल वेला (हमारी गिनती)
- शुभदोपहर 2:09 – दोपहर 3:50
- रोगदोपहर 3:50 – शाम 5:32
- उद्वेगशाम 5:32 – शाम 7:13
चौघड़िया · रात
- शुभशाम 7:13 – रात 8:32
- अमृतरात 8:32 – रात 9:50
- चररात 9:50 – रात 11:09
- रोगरात 11:09 – रात 12:28, 31 जुलाई
- कालरात 12:28 – रात 1:46, 31 जुलाई
- लाभरात 1:46 – रात 3:05, 31 जुलाईकाल रात्रि
- उद्वेगरात 3:05 – सुबह 4:24, 31 जुलाई
- शुभसुबह 4:24 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
होरा
- सूर्यसुबह 5:42 – सुबह 6:49
- शुक्रसुबह 6:49 – सुबह 7:57
- बुधसुबह 7:57 – सुबह 9:05
- चंद्रसुबह 9:05 – सुबह 10:12
- शनिसुबह 10:12 – सुबह 11:20
- गुरुसुबह 11:20 – दोपहर 12:27
- मंगलदोपहर 12:27 – दोपहर 1:35
- सूर्यदोपहर 1:35 – दोपहर 2:43
- शुक्रदोपहर 2:43 – दोपहर 3:50
- बुधदोपहर 3:50 – शाम 4:58
- चंद्रशाम 4:58 – शाम 6:05
- शनिशाम 6:05 – शाम 7:13
- गुरुशाम 7:13 – रात 8:05
- मंगलरात 8:05 – रात 8:58
- सूर्यरात 8:58 – रात 9:50
- शुक्ररात 9:50 – रात 10:43
- बुधरात 10:43 – रात 11:35
- चंद्ररात 11:35 – रात 12:28, 31 जुलाई
- शनिरात 12:28 – रात 1:20, 31 जुलाई
- गुरुरात 1:20 – रात 2:12, 31 जुलाई
- मंगलरात 2:12 – रात 3:05, 31 जुलाई
- सूर्यरात 3:05 – रात 3:57, 31 जुलाई
- शुक्ररात 3:57 – सुबह 4:50, 31 जुलाई
- बुधसुबह 4:50 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- उत्तिसुबह 5:42 – सुबह 7:23
- अमृतम्सुबह 7:23 – सुबह 9:05
- रोगम्सुबह 9:05 – सुबह 10:46
- लाभम्सुबह 10:46 – दोपहर 12:27
- धनम्दोपहर 12:27 – दोपहर 2:09
- सुखम्दोपहर 2:09 – दोपहर 3:50
- सोरम्दोपहर 3:50 – शाम 5:32
- विषम्शाम 5:32 – शाम 7:13
- धनम्शाम 7:13 – रात 8:32
- सुखम्रात 8:32 – रात 9:50
- सोरम्रात 9:50 – रात 11:09
- विषम्रात 11:09 – रात 12:28, 31 जुलाई
- उत्तिरात 12:28 – रात 1:46, 31 जुलाई
- अमृतम्रात 1:46 – रात 3:05, 31 जुलाई
- रोगम्रात 3:05 – सुबह 4:24, 31 जुलाई
- लाभम्सुबह 4:24 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- तुला सुबह 7:05 तक
- वृश्चिक
- सूर्य राशि
- कर्क
- सूर्य नक्षत्र
- पुष्य 3 सुबह 11:07 तक
- पुष्य 4
- अगली संक्रांति
- सिंह · 16 अगस्त 2028, रात 8:29, 16 अगस्त
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उगती राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। लंबे चलने वाले काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- कर्कसुबह 4:44 – सुबह 7:04चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 5:22
- सिंहसुबह 7:04 – सुबह 9:22स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 8:32
- कन्यासुबह 9:22 – सुबह 11:38द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 10:02
- तुलासुबह 11:38 – दोपहर 1:58चरपुष्कर भाग 24° · दोपहर 1:29
- वृश्चिकदोपहर 1:58 – शाम 4:16स्थिरपुष्कर भाग 11° · दोपहर 2:49
- धनुशाम 4:16 – शाम 6:20द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · शाम 5:53
- मकरशाम 6:20 – रात 8:02चरपुष्कर भाग 14° · शाम 7:10
- कुंभरात 8:02 – रात 9:30स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 8:59
- मीनरात 9:30 – रात 10:55द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 9:55
- मेषरात 10:55 – रात 12:30, 31 जुलाईचरपुष्कर भाग 21° · रात 12:00, 31 जुलाई
- वृषभरात 12:30 – रात 2:25, 31 जुलाईस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 1:21, 31 जुलाई
- मिथुनरात 2:25 – सुबह 4:40, 31 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · रात 3:45, 31 जुलाई
- कर्कसुबह 4:40 – सुबह 7:00, 31 जुलाईचरपुष्कर भाग 8° · सुबह 5:18, 31 जुलाई
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर ग्रह किस राशि में हैं, निरयण (नक्षत्रों वाले) हिसाब से और लाहिड़ी अयनांश के साथ; ठीक वैसे ही जैसे आपकी कुंडली बनती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | कर्क | 13°07′ | पुष्य · 3 | सिंह · 16 अगस्त 2028 |
| चंद्र | तुला | 29°14′ | विशाखा · 3 | वृश्चिक · 30 जुलाई 2028 |
| मंगल | मिथुन | 11°54′ | आर्द्रा · 2 | कर्क · 26 अगस्त 2028 |
| बुध अस्त | कर्क | 18°06′ | आश्लेषा · 1 | सिंह · 5 अगस्त 2028 |
| गुरु | कन्या | 0°57′ | उत्तरा फाल्गुनी · 2 | तुला · 26 दिसंबर 2028 |
| शुक्र | वृषभ | 28°02′ | मृगशिरा · 2 | मिथुन · 1 अगस्त 2028 |
| शनि | मेष | 16°33′ | भरणी · 1 | वृषभ · 8 अगस्त 2029 |
| राहु | धनु | 28°55′ | उत्तराषाढ़ा · 1 | वृश्चिक · 4 फ़रवरी 2030 |
| केतु | मिथुन | 28°55′ | पुनर्वसु · 3 | वृषभ · 4 फ़रवरी 2030 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2085 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- श्रावण
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- श्रावण
- विक्रम संवत
- 2085 दुंदुभि
- शक संवत
- 1950 कीलक
यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के हिसाब से ऋतु
- वर्षा
- सूर्य के हिसाब से ऋतु
- वर्षा
- अयनांत के हिसाब से अयन
- दक्षिणायन
- मकर-कर्क संक्रांति के हिसाब से अयन
- दक्षिणायन
- सौर मास
- श्रावण, दिन 15
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 8 श्रावण 1950
- कलि संवत
- 5129
- वर्ष का राजा
- चंद्र
- वर्ष का मंत्री
- गुरु
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- सूर्य
- दुर्गेश
- बुध
- धनेश
- शनि
- रसेश
- मंगल
- धान्येश
- शुक्र
- नीरसेश
- सूर्य
- फलेश
- बुध
- मेघेश
- बुध
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी)
- 24°15′23″
- जूलियन दिन
- 2461982.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2084
- बृहस्पति संवत्सर
- दुंदुभि 2 मार्च 2028 से; फिर रुधिरोद्गारी 26 फ़रवरी 2029 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी राशि और नक्षत्र एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के हिसाब से है, जैसे हम मुहूर्त निकालते हैं। दूसरी प्रचलित पद्धतियाँ भी साथ में दी गई हैं; उनमें जिसका भी परिणाम अलग है, उस पर अलग से निशान लगाया गया है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
चंद्र दर्शन · अमावस्या के बाद का चाँद
चुनी तारीख तक की पिछली अमावस्या के बाद, हर तरीके की पहली शाम दिखाई गई है। नतीजे एक जैसे हों तो जानकारी एक बार दिखाई गई है।
यैलप 1997 · ओदेह 2004/2006
नीचे बताई गई शर्तों में चाँद दिख सकता है।
- पहली शाम की तारीख
- 23 जुलाई 2028
- चाँद डूबने का स्थानीय समय
- रात 8:12 बजे
- सूर्यास्त पर अमावस्या के बाद बीते घंटे
- 34.8
- सूर्यास्त पर सूरज और चाँद के बीच का कोण
- 20.2°
चंद्र दर्शन मौसम, साफ़ आसमान और सामने की रुकावटों पर निर्भर है; यह देखे जाने की पुष्टि नहीं है।
आप ऊपर दूसरी तारीख चुन सकते हैं।
NASA JPL के आंकड़ों से गणना और स्रोत देखें
ग्रहों की स्थिति NASA JPL के आंकड़ों से। अमावस्या का समय सूरज और चाँद के भोगांश (आकाश में उनके रास्ते पर नापी गई जगह) के मिलने पर लिया है। खोज उस स्थानीय तारीख से सात तारीखों तक है; यह हमारी खोज की सीमा है, धार्मिक तारीख का नियम नहीं।
अमावस्या का स्थानीय समय: 22 जुलाई 2028, सुबह 8:32 बजे
यैलप में श्रेणी ए या बी; ओदेह में श्रेणी ए या बी को अलग जाँचा है। यैलप की बी श्रेणी में आसमान और देखने की हालत बहुत अच्छी होनी चाहिए। ओदेह की बी श्रेणी में दूरबीन की ज़रूरत हो सकती है। दोनों तरीकों की जाँच सूर्यास्त और चाँद डूबने के बीच उनके अपने चुने समय पर है; ऊपर दिए घंटे और कोण सूरज डूबने के समय के हैं।
स्रोत: बी. डी. यैलप, नए चाँद की पहली झलक का अनुमान लगाने की विधि, नौवहन पंचांग कार्यालय तकनीकी नोट 69 (1997), पन्ने 3–4 और 11, समीकरण 4.1 व 6.1, तालिका 5। मोहम्मद श. ओदेह, चाँद की पतली झलक दिखने की नई कसौटी, एक्सपेरिमेंटल एस्ट्रोनॉमी 18, पन्ने 43 और 61, समीकरण 1 व 2।
समुद्र की सतह जितनी ऊँचाई और सामने खुला आसमान माना है। पहाड़, इमारतें और स्थानीय मौसम शामिल नहीं हैं। दो जाँच अभी बाकी हैं: पहली, असल में चाँद कब दिखा, उससे मिलान; दूसरी, पृथ्वी के घूमने के ताज़ा आंकड़ों से समय कितना बदलता है। धार्मिक तारीख तय करने के लिए भी इसकी जाँच बाकी है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
ग्रहण
- खग्रास चंद्र ग्रहण · रविवार, 31 दिसंबर 2028 · यहाँ से दिखेगा · रात 8:37, 31 दिसंबर – रात 12:07, 1 जनवरी सूतक: सुबह 11:37, 31 दिसंबर – रात 12:07, 1 जनवरी। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए धर्मसिंधु इसे घटाकर ग्रहण से पहले डेढ़ प्रहर (लगभग साढ़े 4 घंटे) या तीन मुहूर्त (लगभग 2 घंटे 24 मिनट) करता है; निर्णयसिंधु एक प्रहर (लगभग 3 घंटे)।
- खंडग्रास सूर्य ग्रहण · रविवार, 14 जनवरी 2029 · यहाँ से नहीं दिखेगा
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- पश्चिम
- चंद्र वास
- पश्चिम सुबह 5:42 – सुबह 7:05 · उत्तर सुबह 7:05 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
- राहु वास
- उत्तर
- शिव वास
- गौरी के साथ सुबह 5:42 – सुबह 9:21 · सभा में सुबह 9:21 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
- अग्नि वास
- पृथ्वी पर सुबह 5:42 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
- आनंदादि योग
- उत्पात सुबह 5:42 – दोपहर 1:04मुहूर्त चिंतामणि 1.23–25 · मृत्यु योग (आनंदादि) दोपहर 1:04 – सुबह 5:42, 31 जुलाईमुहूर्त चिंतामणि 1.23–25
- तमिल योग
- मरण योग सुबह 5:42 – सुबह 5:42, 31 जुलाई
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 4:22 – सुबह 5:57) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:00 – दोपहर 12:27, यमगण्ड से अलग) चुने जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:18 – सुबह 5:00) पूजा और अध्ययन के लिए है।
चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल दशमी
- नक्षत्र
- अनुराधा
- सूर्योदय
- सुबह 5:42
- राहु काल
- सुबह 7:24 – सुबह 9:05
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:00 – दोपहर 12:54
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर से निकाली गई है। पूरे एक साल में हमारी तिथि और नक्षत्र के खत्म होने के समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की असली, आकाश में दिखने वाली स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का इस्तेमाल करते हैं: आधिकारिक परिभाषा (राष्ट्रीय पंचांग प्रस्तावना पृष्ठ सात; भारतीय खगोलीय पंचांग पृष्ठ 378), माध्य अयनांश।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का फ़र्क हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय गिनने का अलग तरीका, या शहर की अलग लोकेशन। तिथि खत्म होने का पल हर जगह एक ही है; बस अपने शहर की घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र का पूरा समय 60 घटियों में बाँटा जाता है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ खत्म होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के हिसाब से हैं; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के हिसाब से।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- मिलते हुए समय अपने-अपने समय के साथ दिए हैं; साझा हिस्सा भी दिखाया गया है।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई उस दिन के असली दिन-रात के हिसाब से होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
शुक्ल नवमी सुबह 9:21 तक है, फिर शुक्ल दशमी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल दशमी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
चुने हुए दिन राहु काल शाम 5:32 – शाम 7:13 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:18 – सुबह 5:00, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:30 – सुबह 5:42, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 – दोपहर 12:54 (दोपहर 12:27 – दोपहर 12:54 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:43 – दोपहर 3:37, गोधूलि मुहूर्त शाम 7:00 – शाम 7:24 (शाम 7:00 – शाम 7:13 राहु काल के साथ), सायाह्न सन्ध्या शाम 7:13 – रात 8:25, निशिता मुहूर्त रात 12:07 – रात 12:49, 31 जुलाई, अमृत काल रात 12:25 – रात 2:02, 31 जुलाई।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 – दोपहर 12:54 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:18 – सुबह 5:00 है: सूर्योदय से पहले, रात के आखिरी से पहले वाला मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन विशाखा नक्षत्र है, दोपहर 1:04 तक; फिर अनुराधा।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 5 अगस्त 2028, अगली अमावस्या 20 अगस्त 2028।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना श्रावण है (पूर्णिमांत; अमांत में श्रावण), विक्रम संवत 2085 दुंदुभि और शक संवत 1950।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह सूर्य की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन तुला राशि में है, सुबह 7:05 पर वृश्चिक में जाएगा।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, रविवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 4:22 – सुबह 5:57) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:00 – दोपहर 12:27, यमगण्ड से अलग) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:18 – सुबह 5:00) पूजा और अध्ययन के लिए है। चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो आपके शहर में सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उनसे बने सभी समय शहर की जगह (अक्षांश और देशांतर) पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही पल में खत्म होते हैं; बस अपने शहर की घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
दैनिक पंचांग
आपकी अपनी कुंडली, इसी सटीकता से।
पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक है। आपकी जन्मपत्रिका केवल आपकी है।
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