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राशिफल 2027: सभी 12 राशियाँ

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

कर्क राशिफल 2027 — कर्क राशि का पूरा वर्ष

कर्क · Kark · Cancer (चंद्र राशि)

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक सहायक माना गया है।

2027 में शास्त्र कर्क राशि के लिए दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक सहायक मानते हैं।

शास्त्र में 25 जनवरी से 26 जून तक पहले भाव के गुरु को नरम गिना गया है, क्योंकि कर्क इसकी उच्च राशि है; 16 अगस्त से 15 सितंबर तक दूसरे भाव के गुरु की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का शनि (3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से) और दसवें भाव का शनि (3 जून से 20 अक्टूबर तक), सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु (दोनों पूरे साल), तथा तीसरे भाव का गुरु (26 नवंबर से) धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

2027 में कर्क राशि पर न साढ़ेसाती है, न ढैया।

2027 में कर्क: धीमे ग्रह, भाव के अनुसार

  • सहायक
  • नरम, रुका या मंद
  • धैर्य का समय
  • वक्री
  • अस्त
  • भारत में मान्य ग्रहण, भाव के साथ
  • संक्रांति

हर पट्टी किसी धीमे ग्रह का एक राशि में ठहराव है। उस पर कर्क से ग्रह का भाव लिखा है, और रंग हर अवधि में उसका शास्त्रीय फल बताता है। नीचे की तालिका यही बात शब्दों में कहती है।

शास्त्र के अनुसार किसी एक व्यक्ति के लिए गोचर का फल उसकी अपनी कुंडली पर निर्भर है: चल रही दशा और अष्टकवर्ग।

21 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया · सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2027 तक लिया गया है।

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वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि: एक नज़र में

  1. 25 जनवरी तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 1 सहायक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  2. 25 जनवरी से 3 जून तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक

    इस अवधि में चारों धीमे ग्रह कर्क राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते; अगला बदलाव 3 जून को है। शास्त्र में पहले भाव के गुरु को नरम गिना गया है, क्योंकि कर्क इसकी उच्च राशि है। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  3. 3 जून से 26 जून तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक

    इस अवधि में चारों धीमे ग्रह कर्क राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते; अगला बदलाव 26 जून को है। शास्त्र में पहले भाव के गुरु को नरम गिना गया है, क्योंकि कर्क इसकी उच्च राशि है। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  4. 26 जून से 16 अगस्त तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 1 सहायक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  5. 16 अगस्त से 15 सितंबर तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक

    इस अवधि में चारों धीमे ग्रह कर्क राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते; अगला बदलाव 15 सितंबर को है। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  6. 15 सितंबर से 20 अक्टूबर तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 1 सहायक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  7. 20 अक्टूबर से 26 नवंबर तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 1 सहायक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

  8. 26 नवंबर सेधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक

    इस अवधि में चारों धीमे ग्रह कर्क राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु, नौवें भाव का शनि, सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

2027 में कर्क राशि के मोड़

  • 25 जनवरी, रात 1:31 बजे: गुरु कर्क में, यानी आपसे पहले भाव में जाते हैं।

  • 3 जून, सुबह 5:28 बजे: शनि मेष में, यानी आपसे दसवें भाव में जाते हैं।

  • 26 जून, सुबह 5:19 बजे: गुरु सिंह में, यानी आपसे दूसरे भाव में जाते हैं।

  • 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे: शनि मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में जाते हैं।

  • 26 नवंबर, शाम 6:45 बजे: गुरु कन्या में, यानी आपसे तीसरे भाव में जाते हैं।

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

क्यों: कर्क से शनि, गुरु और राहु-केतु, हर ठहराव के साथ

2027 को छूने वाले हर धीमे ग्रह के ठहराव, कर्क से भाव, हर अवधि का शास्त्रीय फल और उसके पीछे का श्लोक।

  1. गुरु? सिंह · दूसरा भाव

    गुरु सिंह में, यानी आपसे दूसरे भाव में: 31 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:03 बजे से 25 जनवरी, रात 1:31 बजे तक।

    सहायक? 25 जनवरी तक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।

    सिंह का यह ठहराव राशि के बीच के तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में गुरु का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

  2. गुरु? कर्क · पहला भाव उच्च

    गुरु कर्क में, यानी आपसे पहले भाव में: 25 जनवरी, रात 1:31 बजे से 26 जून, सुबह 5:19 बजे तक।

    नरम? 25 जनवरी से 26 जून तक

    शास्त्र के अनुसार पहले भाव का गुरु धैर्य माँगता है (स्थान-परिवर्तन, धन और आपसी खिंचाव), लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 25 जनवरी से 26 जून तक इसे नरम गिना गया है।

    कर्क का यह ठहराव राशि के बीच के तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में गुरु का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

  3. गुरु? सिंह · दूसरा भाव

    गुरु सिंह में, यानी आपसे दूसरे भाव में: 26 जून, सुबह 5:19 बजे से 26 नवंबर, शाम 6:45 बजे तक।

    सहायक? 26 जून से 16 अगस्त तक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 26 जून से 16 अगस्त तक सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।

    सहायता मंद? 16 अगस्त से 15 सितंबर तक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता), लेकिन गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त से 15 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    सहायक? 15 सितंबर से 26 नवंबर तक

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 15 सितंबर से 26 नवंबर तक सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।

    सिंह में शास्त्र के अनुसार गुरु का प्रभाव राशि के बीच के तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 15 अगस्त, दोपहर 2:51 बजे से 1 अक्टूबर, रात 3:27 बजे तक।

  4. गुरु? कन्या · तीसरा भाव अमित्र राशि

    गुरु कन्या में, यानी आपसे तीसरे भाव में: 26 नवंबर, शाम 6:45 बजे से 28 फ़रवरी 2028, शाम 7:17 बजे तक।

    धैर्य का समय? 26 नवंबर से

    शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी): अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।

    कन्या का यह ठहराव राशि के बीच के तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में गुरु का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

  5. शनि? मीन · नौवाँ भाव

    शनि मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में: 29 मार्च 2025, रात 9:45 बजे से 3 जून, सुबह 5:28 बजे तक।

    धैर्य का समय? 3 जून तक

    शास्त्र के अनुसार 3 जून तक नौवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (अधिक मेहनत और कर्तव्यों में देरी): निरंतर प्रयास करते रहें।

  6. शनि? मेष · दसवाँ भाव नीच

    शनि मेष में, यानी आपसे दसवें भाव में: 3 जून, सुबह 5:28 बजे से 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे तक।

    धैर्य का समय? 3 जून से 20 अक्टूबर तक

    शास्त्र के अनुसार 3 जून से 20 अक्टूबर तक दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।

  7. शनि? मीन · नौवाँ भाव

    शनि मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में: 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे से 23 फ़रवरी 2028, शाम 7:24 बजे तक।

    धैर्य का समय? 20 अक्टूबर से

    शास्त्र के अनुसार 20 अक्टूबर से नौवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (अधिक मेहनत और कर्तव्यों में देरी): निरंतर प्रयास करते रहें।

  8. राहु? मकर · सातवाँ भाव

    राहु मकर में, यानी आपसे सातवें भाव में: 25 नवंबर 2026, शाम 5:46 बजे से 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक।

    धैर्य का समय? पूरे साल

    शास्त्र के अनुसार पूरे साल सातवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (आपसी खिंचाव): मधुरता से बोलें।

    मध्यम राहु-केतु की गणना से, जो कई पंचांगों में छपती है, राहु 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक मकर में है; यहाँ फल स्पष्ट (वास्तविक) गति से पढ़ा गया है।

  9. केतु? कर्क · पहला भाव

    केतु कर्क में, यानी आपसे पहले भाव में: 25 नवंबर 2026, शाम 5:46 बजे से 24 मई 2028, दोपहर 3:08 बजे तक।

    धैर्य का समय? पूरे साल

    शास्त्र के अनुसार पूरे साल पहले भाव का केतु धैर्य माँगता है (सेहत): दिनचर्या नियमित रखें और भरपूर आराम करें।

    मध्यम राहु-केतु की गणना से, जो कई पंचांगों में छपती है, केतु 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक कर्क में है; यहाँ फल स्पष्ट (वास्तविक) गति से पढ़ा गया है।

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि के लिए शनि: नौवाँ और दसवाँ भाव

2027 में कर्क राशि पर न साढ़ेसाती है, न ढैया: इस साल शनि आपसे नौवें और दसवें भाव में है। अगली साढ़ेसाती 31 मई 2032 से 13 जुलाई 2039 तक है।

मीन में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव राशि के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 11 मार्च, सुबह 6:27 बजे से 3 जून, सुबह 5:28 बजे तक।

मेष का यह ठहराव राशि के अंतिम तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में शनि का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

मीन में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव राशि के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे से 23 फ़रवरी 2028, शाम 7:24 बजे तक।

3 जून से 20 अक्टूबर तक शनि अपनी नीच राशि मेष में है। आपसे दसवें भाव में इससे क्या बदलता है, इस पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं, इसलिए इसे केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है।

  • नीच बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

कर्क राशिफल 2027 महीने दर महीने

हर महीना: संक्रांति और उस क्षण का चंद्रमा, कर्क से भाव के साथ मंगल, बुध और शुक्र के गोचर, सहज रहने के दिन, और उस समय की अवधि।

  1. जनवरी 2027

    14 जनवरी, रात 9:10 बजे: सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में (मकर संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 13 फ़रवरी तक सातवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकाने वाली यात्रा और प्रतिष्ठा में कमी): यात्राओं के बीच आराम का समय रखें और काम में स्थिर रहें।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।

    25 जनवरी, रात 1:31 बजे: गुरु कर्क राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं (26 जून तक)। शास्त्र के अनुसार पहले भाव का गुरु धैर्य माँगता है (स्थान-परिवर्तन, धन और आपसी खिंचाव), लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 26 जून तक इसे नरम गिना गया है।

    जनवरी के सभी गोचर (9)

    1 जनवरी, रात 11:23 बजे: शुक्र वृश्चिक राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (29 जनवरी तक)। शास्त्र में पाँचवें भाव के शुक्र को 29 जनवरी तक सहायक माना गया है (संतान और प्रसन्नता)।

    10 जनवरी, रात 12:37 बजे: बुध मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (28 जनवरी तक)। शास्त्र के अनुसार 28 जनवरी तक सातवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (आपसी खिंचाव): मधुरता से बोलें और पहले सुनें।

    10 जनवरी: मंगल सिंह में, आपसे दूसरे भाव में, वक्री होते हैं।

    23 जनवरी, शाम 6:52 बजे: बुध मकर में, आपसे सातवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    28 जनवरी, रात 3:34 बजे: बुध कुंभ राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (24 फ़रवरी तक)। शास्त्र में आठवें भाव के बुध को 12 फ़रवरी तक सहायक माना गया है (संतान और लाभ)। 12 फ़रवरी से 24 फ़रवरी तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    29 जनवरी, शाम 6:42 बजे: शुक्र धनु राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (24 फ़रवरी तक)। शास्त्र के अनुसार 24 फ़रवरी तक छठे भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत): योजनाएँ लचीली रखें और भरपूर आराम करें।

    10 जनवरी तक आपसे छठे भाव में बुध होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    • वाम वेध मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8

    29 जनवरी से 24 फ़रवरी तक आपसे छठे भाव में शुक्र होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 11 जनवरी, सुबह 4:35 बजे से 13 जनवरी, दोपहर 3:40 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 25 जनवरी तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  2. फ़रवरी 2027

    13 फ़रवरी, सुबह 10:09 बजे: सूर्य कुंभ राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में (कुंभ संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 15 मार्च तक आठवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: बड़े निर्णय धीरे-धीरे लें।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा मेष में, यानी आपसे दसवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।

    6 फ़रवरी: मकर (धनिष्ठा) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर वलयाकार), यानी आपसे सातवें भाव में। नई दिल्ली से यह नहीं दिखता, इसलिए वहाँ इसे नहीं गिना जाता और भाव का फल नहीं दिया गया।

    21 फ़रवरी, सुबह 4:43 बजे: सिंह (मघा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे दूसरे भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 21 फ़रवरी को रात 2:42 बजे से सुबह 6:44 बजे तक।

    फ़रवरी के सभी गोचर (7)

    9 फ़रवरी, रात 11:06 बजे: बुध कुंभ में, आपसे आठवें भाव में, वक्री होते हैं।

    12 फ़रवरी, दोपहर 1:35 बजे: बुध कुंभ में, आपसे आठवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    24 फ़रवरी, सुबह 4:40 बजे: बुध मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (12 मार्च तक)। शास्त्र के अनुसार 12 मार्च तक सातवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (आपसी खिंचाव): मधुरता से बोलें और पहले सुनें।

    24 फ़रवरी, दोपहर 3:16 बजे: शुक्र मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (21 मार्च तक)। शास्त्र के अनुसार 21 मार्च तक सातवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रिश्तों में खिंचाव): मधुरता से बोलें और अपेक्षाएँ सरल रखें।

    24 फ़रवरी, शाम 7:26 बजे: बुध मकर में, आपसे सातवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    29 जनवरी से 24 फ़रवरी तक आपसे छठे भाव में शुक्र होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    • वाम वेध मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 7 फ़रवरी, सुबह 10:37 बजे से 9 फ़रवरी, रात 9:17 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  3. मार्च 2027

    15 मार्च, सुबह 7:00 बजे: सूर्य मीन राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में (मीन संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 14 अप्रैल तक नौवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (रुकावटें और मन की थकान): योजनाओं को अतिरिक्त समय दें और मन को आराम दें।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा वृषभ में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।

    21 मार्च, दोपहर 1:46 बजे: शनि मीन में, आपसे नौवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    मार्च के सभी गोचर (6)

    3 मार्च, शाम 6:03 बजे: बुध मकर में, आपसे सातवें भाव में, मार्गी होते हैं।

    10 मार्च, रात 12:13 बजे: मंगल कर्क राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं (26 अप्रैल तक)। शास्त्र के अनुसार 26 अप्रैल तक पहले भाव का मंगल धैर्य माँगता है (ऊर्जा पर दबाव): अपनी गति संतुलित रखें और दिनचर्या नियमित रखें।

    12 मार्च, सुबह 5:07 बजे: बुध कुंभ राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (5 अप्रैल तक)। शास्त्र में आठवें भाव के बुध को 5 अप्रैल तक सहायक माना गया है (संतान और लाभ)।

    21 मार्च, शाम 6:52 बजे: शुक्र कुंभ राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (15 अप्रैल तक)। शास्त्र में आठवें भाव के शुक्र को 15 अप्रैल तक सहायक माना गया है (धन और सुख-सुविधाएँ)।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 6 मार्च, शाम 5:35 बजे से 9 मार्च, रात 3:40 बजे तक।

    11 मार्च, सुबह 6:27 बजे: शनि मीन के अंतिम तिहाई भाग में पहुँचते हैं, यानी आपसे नौवें भाव में, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  4. अप्रैल 2027

    14 अप्रैल, दोपहर 3:28 बजे: सूर्य मेष राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में (मेष संक्रांति, सौर नववर्ष)। शास्त्र में दसवें भाव के सूर्य को 15 मई तक सहायक माना गया है (काम में सफलता)।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा कर्क में, यानी आपसे पहले भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।

    13 अप्रैल: गुरु कर्क में, आपसे पहले भाव में, मार्गी होते हैं।

    25 अप्रैल, दोपहर 12:40 बजे: शनि मीन में, आपसे नौवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    7 अप्रैल: विक्रम संवत 2084 शुरू (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा), साथ में शक संवत 1949; शक गणना से वर्ष का नाम प्लवंग है।

    अप्रैल के सभी गोचर (7)

    1 अप्रैल: मंगल कर्क में, आपसे पहले भाव में, मार्गी होते हैं।

    5 अप्रैल, शाम 4:16 बजे: बुध मीन राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं (22 अप्रैल तक)। शास्त्र के अनुसार 22 अप्रैल तक नौवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (काम में धीमी प्रगति): काम को अतिरिक्त समय दें।

    15 अप्रैल, दोपहर 12:18 बजे: बुध मीन में, आपसे नौवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    15 अप्रैल, दोपहर 3:21 बजे: शुक्र मीन राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं (10 मई तक)। शास्त्र में नौवें भाव के शुक्र को 10 मई तक सहायक माना गया है (प्रसन्नता और धन)।

    22 अप्रैल, सुबह 8:13 बजे: बुध मेष राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (6 मई तक)। शास्त्र में दसवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (सुख और लाभ), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 6 मई तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    26 अप्रैल, सुबह 11:47 बजे: मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (5 जुलाई तक)। शास्त्र के अनुसार 5 जुलाई तक दूसरे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (वाणी और धन): वाणी मधुर रखें और खर्च पर नज़र रखें।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 3 अप्रैल, रात 1:33 बजे से 5 अप्रैल, सुबह 11:32 बजे तक; 30 अप्रैल, सुबह 9:54 बजे से 2 मई, रात 8:24 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  5. मई 2027

    15 मई, दोपहर 12:20 बजे: सूर्य वृषभ राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में (वृषभ संक्रांति)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, सम्मान, लाभ और सेहत में सुधार), लेकिन सूर्य वृषभ में है, जिसके स्वामी शुक्र से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए 15 जून तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा सिंह में, यानी आपसे दूसरे भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।

    मई के सभी गोचर (5)

    6 मई, दोपहर 12:36 बजे: बुध वृषभ राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (23 मई तक)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (उन्नति, लाभ और मित्र), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 11 मई तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 11 मई से 23 मई तक, अस्त से बाहर आने पर, इसे सहायक गिना गया है।

    10 मई, सुबह 8:49 बजे: शुक्र मेष राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (4 जून तक)। शास्त्र के अनुसार 4 जून तक दसवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में खिंचाव और प्रतिष्ठा): कार्यस्थल पर मधुरता से बात करें।

    11 मई, दोपहर 12:42 बजे: बुध वृषभ में, आपसे ग्यारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    23 मई, शाम 6:32 बजे: बुध मिथुन राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (30 जुलाई तक)। शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत), लेकिन मिथुन इसकी स्वराशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 23 मई से 15 जून तक तथा 2 जुलाई से 29 जुलाई तक इसे नरम गिना गया है। 15 जून से 2 जुलाई तक तथा 29 जुलाई से 30 जुलाई तक इसे मिला-जुला गिना गया है, क्योंकि मिथुन इसकी स्वराशि है, पर यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 30 अप्रैल, सुबह 9:54 बजे से 2 मई, रात 8:24 बजे तक; 27 मई, शाम 5:50 बजे से 30 मई, सुबह 5:09 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  6. जून 2027

    15 जून, शाम 6:56 बजे: सूर्य मिथुन राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में (मिथुन संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 17 जुलाई तक बारहवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा तुला में, यानी आपसे चौथे भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।

    3 जून, सुबह 5:28 बजे: शनि मेष राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (20 अक्टूबर तक)। शास्त्र के अनुसार 20 अक्टूबर तक दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।

    26 जून, सुबह 5:19 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (26 नवंबर तक)। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)। 16 अगस्त से 15 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    जून के सभी गोचर (9)

    4 जून, रात 12:41 बजे: शुक्र वृषभ राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (28 जून तक)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शुक्र को 28 जून तक अनुकूल माना गया है।

    10 जून, रात 11:45 बजे: बुध मिथुन में, आपसे बारहवें भाव में, वक्री होते हैं।

    15 जून, सुबह 5:31 बजे: बुध मिथुन में, आपसे बारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    28 जून, दोपहर 2:40 बजे: शुक्र मिथुन राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (23 जुलाई तक)। शास्त्र में बारहवें भाव के शुक्र को 6 जुलाई तक अनुकूल माना गया है। 6 जुलाई से 23 जुलाई तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    26 जून से 17 जुलाई तक आपसे बारहवें भाव में सूर्य होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।

    • वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6

    26 जून से 30 जुलाई तक आपसे बारहवें भाव में बुध होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।

    28 जून से 23 जुलाई तक आपसे बारहवें भाव में शुक्र होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 24 जून, रात 12:51 बजे से 26 जून, दोपहर 12:52 बजे तक।

    3 जून, सुबह 5:28 बजे: शनि मीन के अंतिम तिहाई भाग से निकलते हैं, यानी आपसे नौवें भाव से, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 3 जून से 26 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 26 जून से 16 अगस्त तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  7. जुलाई 2027

    17 जुलाई, सुबह 5:49 बजे: सूर्य कर्क राशि में, यानी आपसे पहले भाव में (कर्क संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 17 अगस्त तक पहले भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकान, अतिरिक्त खर्च और यात्रा): अपनी गति संतुलित रखें और खर्च की योजना पहले से बनाएँ।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा धनु में, यानी आपसे छठे भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।

    18 जुलाई, रात 9:33 बजे: मकर (उत्तराषाढ़ा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे सातवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 18 जुलाई को रात 9:27 बजे से रात 9:39 बजे तक। चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी छाया को केवल छूता है।

    जुलाई के सभी गोचर (11)

    2 जुलाई, रात 2:29 बजे: बुध मिथुन में, आपसे बारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    5 जुलाई, रात 1:11 बजे: बुध मिथुन में, आपसे बारहवें भाव में, मार्गी होते हैं।

    5 जुलाई, सुबह 4:35 बजे: मंगल कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (24 अगस्त तक)। शास्त्र में तीसरे भाव के मंगल को सहायक माना गया है (सफलता, लाभ और उत्साह), लेकिन मंगल कन्या में है, जिसके स्वामी बुध से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए 24 अगस्त तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    6 जुलाई, रात 8:43 बजे: शुक्र मिथुन में, आपसे बारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    23 जुलाई, रात 1:47 बजे: शुक्र कर्क राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं (16 अगस्त तक)। शास्त्र में पहले भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (सुख-सुविधाएँ और आनंद), लेकिन शुक्र कर्क में है, जिसके स्वामी चंद्रमा से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    29 जुलाई, दोपहर 2:58 बजे: बुध मिथुन में, आपसे बारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    30 जुलाई, शाम 6:31 बजे: बुध कर्क राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं (14 अगस्त तक)। शास्त्र के अनुसार 14 अगस्त तक पहले भाव का बुध धैर्य माँगता है (धन और सलाह): किसी सलाह पर अमल से पहले उसे परखें और खर्च पर नज़र रखें।

    26 जून से 17 जुलाई तक आपसे बारहवें भाव में सूर्य होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।

    • वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6

    26 जून से 30 जुलाई तक आपसे बारहवें भाव में बुध होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।

    28 जून से 23 जुलाई तक आपसे बारहवें भाव में शुक्र होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 21 जुलाई, सुबह 7:04 बजे से 23 जुलाई, शाम 7:19 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 26 जून से 16 अगस्त तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  8. अगस्त 2027

    17 अगस्त, दोपहर 2:14 बजे: सूर्य सिंह राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में (सिंह संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (धन और रोज़मर्रा की सुविधाएँ), लेकिन सिंह इसकी स्वराशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 17 सितंबर तक इसे नरम गिना गया है।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा कुंभ में, यानी आपसे आठवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।

    9 अगस्त: शनि मेष में, आपसे दसवें भाव में, वक्री होते हैं।

    16 अगस्त, शाम 7:42 बजे: गुरु सिंह में, आपसे दूसरे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    2 अगस्त: कर्क (पुष्य) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर पूर्ण), यानी आपसे पहले भाव में। नई दिल्ली से यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखता है, 2 अगस्त को दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:03 बजे तक। शास्त्र के अनुसार आपसे पहले भाव का ग्रहण छह महीने तक ध्यान माँगता है: नई योजनाएँ सरल रखें।

    17 अगस्त, दोपहर 12:44 बजे: मकर (धनिष्ठा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे सातवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया।

    अगस्त के सभी गोचर (7)

    14 अगस्त, सुबह 11:53 बजे: बुध सिंह राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (31 अगस्त तक)। शास्त्र में दूसरे भाव के बुध को सहायक माना गया है (धन), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 26 अगस्त तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 26 अगस्त से 31 अगस्त तक, अस्त से बाहर आने पर, इसे सहायक गिना गया है।

    16 अगस्त, सुबह 9:35 बजे: शुक्र सिंह राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (9 सितंबर तक)। शास्त्र में दूसरे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (धन और परिवार), लेकिन शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 9 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    24 अगस्त, सुबह 9:52 बजे: मंगल तुला राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (8 अक्टूबर तक)। शास्त्र के अनुसार 8 अक्टूबर तक चौथे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (सेहत और दिनचर्या): भोजन और आराम का समय नियमित रखें।

    26 अगस्त, शाम 7:47 बजे: बुध सिंह में, आपसे दूसरे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    31 अगस्त, रात 2:01 बजे: बुध कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (21 सितंबर तक)। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का बुध धैर्य माँगता है (प्रतिस्पर्धा), लेकिन कन्या इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 21 सितंबर तक इसे नरम गिना गया है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 17 अगस्त, दोपहर 1:05 बजे से 20 अगस्त, रात 1:05 बजे तक।

    15 अगस्त, दोपहर 2:51 बजे: गुरु सिंह के बीच के तिहाई भाग में पहुँचते हैं, यानी आपसे दूसरे भाव में, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 26 जून से 16 अगस्त तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 16 अगस्त से 15 सितंबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  9. सितंबर 2027

    17 सितंबर, दोपहर 2:11 बजे: सूर्य कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में (कन्या संक्रांति)। शास्त्र में तीसरे भाव के सूर्य को 18 अक्टूबर तक सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त)।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।

    15 सितंबर, रात 3:13 बजे: गुरु सिंह में, आपसे दूसरे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    सितंबर के सभी गोचर (4)

    9 सितंबर, दोपहर 2:41 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (3 अक्टूबर तक)। शास्त्र में तीसरे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (समृद्धि और प्रतिष्ठा), लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 17 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक, अस्त से बाहर आने पर, इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि कन्या इसकी नीच राशि है।

    17 सितंबर, रात 10:49 बजे: शुक्र कन्या में, आपसे तीसरे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    21 सितंबर, शाम 6:21 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (21 अक्टूबर तक)। शास्त्र में चौथे भाव के बुध को 14 अक्टूबर तक सहायक माना गया है (लाभ और परिवार में बढ़ोतरी)। 14 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 13 सितंबर, शाम 7:34 बजे से 16 सितंबर, सुबह 7:14 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 16 अगस्त से 15 सितंबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 15 सितंबर से 20 अक्टूबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  10. अक्टूबर 2027

    18 अक्टूबर, रात 2:09 बजे: सूर्य तुला राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में (तुला संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 17 नवंबर तक चौथे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और घर की सुविधाएँ): दिनचर्या नियमित रखें और घर की योजनाएँ सरल रखें।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा मेष में, यानी आपसे दसवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।

    20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे: शनि मीन राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं (23 फ़रवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार 20 अक्टूबर से नौवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (अधिक मेहनत और कर्तव्यों में देरी): निरंतर प्रयास करते रहें।

    30 अक्टूबर: गुजराती विक्रम संवत 2084 शुरू (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)।

    अक्टूबर के सभी गोचर (11)

    3 अक्टूबर, शाम 6:24 बजे: शुक्र तुला राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (27 अक्टूबर तक)। शास्त्र में चौथे भाव के शुक्र को 27 अक्टूबर तक सहायक माना गया है (मित्र और प्रसन्नता)।

    7 अक्टूबर, रात 8:06 बजे: बुध तुला में, आपसे चौथे भाव में, वक्री होते हैं।

    8 अक्टूबर, रात 1:29 बजे: मंगल वृश्चिक राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (18 नवंबर तक)। शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (संतान की ज़रूरतें और सेहत), लेकिन वृश्चिक इसकी स्वराशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 18 नवंबर तक इसे नरम गिना गया है।

    14 अक्टूबर, रात 3:28 बजे: बुध तुला में, आपसे चौथे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    21 अक्टूबर, सुबह 8:12 बजे: बुध कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (5 नवंबर तक)। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का बुध धैर्य माँगता है (प्रतिस्पर्धा), लेकिन बुध अपनी उच्च राशि कन्या में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; इस पर ग्रंथों के संकेत दोनों ओर जाते हैं, इसलिए 25 अक्टूबर तक इसे मिला-जुला गिना गया है। 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक इसे नरम गिना गया है, क्योंकि कन्या इसकी उच्च राशि है।

    25 अक्टूबर, रात 11:15 बजे: बुध कन्या में, आपसे तीसरे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

    27 अक्टूबर, रात 9:57 बजे: शुक्र वृश्चिक राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (21 नवंबर तक)। शास्त्र में पाँचवें भाव के शुक्र को 21 नवंबर तक सहायक माना गया है (संतान और प्रसन्नता)।

    28 अक्टूबर, शाम 7:41 बजे: बुध कन्या में, आपसे तीसरे भाव में, मार्गी होते हैं।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 11 अक्टूबर, रात 2:56 बजे से 13 अक्टूबर, दोपहर 2:32 बजे तक।

    1 अक्टूबर, रात 3:27 बजे: गुरु सिंह के बीच के तिहाई भाग से निकलते हैं, यानी आपसे दूसरे भाव से, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

    20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे: शनि मीन के अंतिम तिहाई भाग में पहुँचते हैं, यानी आपसे नौवें भाव में, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 15 सितंबर से 20 अक्टूबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 20 अक्टूबर से 26 नवंबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
  11. नवंबर 2027

    17 नवंबर, रात 1:59 बजे: सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में (वृश्चिक संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 16 दिसंबर तक पाँचवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और आराम): खुद को आराम का समय दें।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा मिथुन में, यानी आपसे बारहवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।

    26 नवंबर, शाम 6:45 बजे: गुरु कन्या राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (28 फ़रवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी): अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।

    नवंबर के सभी गोचर (8)

    5 नवंबर, शाम 5:11 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (26 नवंबर तक)। शास्त्र में चौथे भाव के बुध को 17 नवंबर तक सहायक माना गया है (लाभ और परिवार में बढ़ोतरी)। 17 नवंबर से 26 नवंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    17 नवंबर, सुबह 4:47 बजे: बुध तुला में, आपसे चौथे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

    18 नवंबर, सुबह 8:46 बजे: मंगल धनु राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (27 दिसंबर तक)। शास्त्र में छठे भाव के मंगल को 27 दिसंबर तक सहायक माना गया है (विवादों का सुलझना, अच्छी सेहत और लाभ)।

    21 नवंबर, रात 2:08 बजे: शुक्र धनु राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (15 दिसंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 15 दिसंबर तक छठे भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत): योजनाएँ लचीली रखें और भरपूर आराम करें।

    26 नवंबर, रात 12:29 बजे: बुध वृश्चिक राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (15 दिसंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 15 दिसंबर तक पाँचवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (घर में खिंचाव): घर में मधुरता से बात करें।

    18 नवंबर से 27 दिसंबर तक आपसे छठे भाव में मंगल होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    • वाम वेध मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8

    21 नवंबर से 15 दिसंबर तक आपसे छठे भाव में शुक्र होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 7 नवंबर, सुबह 11:00 बजे से 9 नवंबर, रात 10:57 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 20 अक्टूबर से 26 नवंबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
    • अवधि 26 नवंबर से: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 4)।?
  12. दिसंबर 2027

    16 दिसंबर, शाम 4:39 बजे: सूर्य धनु राशि में, यानी आपसे छठे भाव में (धनु संक्रांति)। शास्त्र में छठे भाव के सूर्य को 15 जनवरी 2028 तक सहायक माना गया है (सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी)।

    संक्रांति के क्षण चंद्रमा कर्क में, यानी आपसे पहले भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।

    24 दिसंबर: शनि मीन में, आपसे नौवें भाव में, मार्गी होते हैं।

    दिसंबर के सभी गोचर (9)

    15 दिसंबर, रात 2:07 बजे: बुध धनु राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (2 जनवरी 2028 तक)। शास्त्र में छठे भाव के बुध को सहायक माना गया है (सफलता और प्रतिष्ठा), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 2 जनवरी 2028 तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    15 दिसंबर, सुबह 8:11 बजे: शुक्र मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (8 जनवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार 8 जनवरी 2028 तक सातवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रिश्तों में खिंचाव): मधुरता से बोलें और अपेक्षाएँ सरल रखें।

    27 दिसंबर, दोपहर 1:05 बजे: मंगल मकर राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (3 फ़रवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार सातवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (जीवनसाथी से खिंचाव और सेहत), लेकिन मकर इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 4 जनवरी 2028 तक इसे नरम गिना गया है। 4 जनवरी 2028 से 3 फ़रवरी 2028 तक इसे मिला-जुला गिना गया है, क्योंकि मकर इसकी उच्च राशि है, पर यह सूर्य के निकट (अस्त) है।

    18 नवंबर से 27 दिसंबर तक आपसे छठे भाव में मंगल होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    • वाम वेध मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8

    21 नवंबर से 15 दिसंबर तक आपसे छठे भाव में शुक्र होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    15 दिसंबर से आपसे छठे भाव में बुध होने से शास्त्र में नौवें भाव के शनि को वाम वेध से सहायक गिना गया है।

    15 दिसंबर से आपसे सातवें भाव में शुक्र होने से शास्त्र में तीसरे भाव के गुरु को वाम वेध से सहायक गिना गया है, लेकिन इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि कन्या इसके लिए अमित्र राशि है।

    27 दिसंबर से आपसे सातवें भाव में मंगल होने से शास्त्र में तीसरे भाव के गुरु को वाम वेध से सहायक गिना गया है, लेकिन इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि कन्या इसके लिए अमित्र राशि है।

    सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 4 दिसंबर, शाम 7:08 बजे से 7 दिसंबर, सुबह 7:40 बजे तक।

    • कर्क से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
    • अवधि 26 नवंबर से: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 4)।?

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि: काम और धन

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शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक धन के लिए अनुकूल माना गया है।

शास्त्र के अनुसार 3 जून से 20 अक्टूबर तक दसवें भाव का शनि कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा पर ध्यान माँगता है: स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को धन के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त से 15 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से तीसरे भाव का गुरु काम पर ध्यान माँगता है: अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।

25 जनवरी से 3 जून तक आपसे दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे या बारहवें भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से काम और धन के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि: प्रेम, विवाह और परिवार

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शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है।

शास्त्र के अनुसार पूरे साल सातवें भाव का राहु रिश्तों पर ध्यान माँगता है: मधुरता से बोलें।

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त से 15 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि: सेहत

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शास्त्र के अनुसार पूरे साल पहले भाव का केतु सेहत पर ध्यान माँगता है: दिनचर्या नियमित रखें और भरपूर आराम करें।

शास्त्र में 25 जनवरी से 26 जून तक पहले भाव के गुरु को नरम गिना गया है, क्योंकि कर्क इसकी उच्च राशि है; सेहत के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि: पढ़ाई, संतान और धर्म

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शास्त्र के अनुसार 3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से नौवें भाव का शनि धैर्य माँगता है: निरंतर प्रयास करते रहें; पढ़ाई, संतान और धर्म के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।

3 जून से 20 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें या नौवें भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से पढ़ाई, संतान और धर्म के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार

2027 में कर्क राशि के लिए ग्रहण, वक्री और अस्त की तारीख़ें

ग्रहण

ग्रहण दिखता है या नहीं, उसके समय और सूतक नई दिल्ली के हैं।

6 फ़रवरी: मकर (धनिष्ठा) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर वलयाकार), यानी आपसे सातवें भाव में। नई दिल्ली से यह नहीं दिखता, इसलिए वहाँ इसे नहीं गिना जाता और भाव का फल नहीं दिया गया।

21 फ़रवरी, सुबह 4:43 बजे: सिंह (मघा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे दूसरे भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 21 फ़रवरी को रात 2:42 बजे से सुबह 6:44 बजे तक।

18 जुलाई, रात 9:33 बजे: मकर (उत्तराषाढ़ा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे सातवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 18 जुलाई को रात 9:27 बजे से रात 9:39 बजे तक। चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी छाया को केवल छूता है।

2 अगस्त: कर्क (पुष्य) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर पूर्ण), यानी आपसे पहले भाव में। नई दिल्ली से यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखता है, 2 अगस्त को दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:03 बजे तक। शास्त्र के अनुसार आपसे पहले भाव का ग्रहण छह महीने तक ध्यान माँगता है: नई योजनाएँ सरल रखें।

पंचांग के नियम से नई दिल्ली में सूतक: 2 अगस्त को रात 3:53 बजे से शाम 5:03 बजे तक। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।

17 अगस्त, दोपहर 12:44 बजे: मकर (धनिष्ठा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे सातवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया।

वक्री काल

13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल तक गुरु वक्री है, सिंह (आपसे दूसरे भाव) से वापस कर्क (आपसे पहले भाव) तक।

10 जनवरी से 1 अप्रैल तक मंगल वक्री है, सिंह (आपसे दूसरे भाव) से वापस कर्क (आपसे पहले भाव) तक।

9 फ़रवरी, रात 11:06 बजे से 3 मार्च, शाम 6:03 बजे तक बुध वक्री है, कुंभ (आपसे आठवें भाव) से वापस मकर (आपसे सातवें भाव) तक।

10 जून, रात 11:45 बजे से 5 जुलाई, रात 1:11 बजे तक बुध वक्री है, मिथुन में, यानी आपसे बारहवें भाव में।

9 अगस्त से 24 दिसंबर तक शनि वक्री है, मेष (आपसे दसवें भाव) से वापस मीन (आपसे नौवें भाव) तक।

7 अक्टूबर, रात 8:06 बजे से 28 अक्टूबर, शाम 7:41 बजे तक बुध वक्री है, तुला (आपसे चौथे भाव) से वापस कन्या (आपसे तीसरे भाव) तक।

अस्त काल

7 दिसंबर 2026, रात 12:55 बजे से 23 जनवरी, शाम 6:52 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, वृश्चिक (आपसे पाँचवें भाव) से शुरू होकर मकर (आपसे सातवें भाव) तक।

12 फ़रवरी, दोपहर 1:35 बजे से 24 फ़रवरी, शाम 7:26 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, कुंभ (आपसे आठवें भाव) से शुरू होकर मकर (आपसे सातवें भाव) तक।

21 मार्च, दोपहर 1:46 बजे से 25 अप्रैल, दोपहर 12:40 बजे तक शनि सूर्य के निकट (अस्त) है, मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में।

15 अप्रैल, दोपहर 12:18 बजे से 11 मई, दोपहर 12:42 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, मीन (आपसे नौवें भाव) से शुरू होकर वृषभ (आपसे ग्यारहवें भाव) तक।

15 जून, सुबह 5:31 बजे से 2 जुलाई, रात 2:29 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, मिथुन में, यानी आपसे बारहवें भाव में।

6 जुलाई, रात 8:43 बजे से 17 सितंबर, रात 10:49 बजे तक शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, मिथुन (आपसे बारहवें भाव) से शुरू होकर कन्या (आपसे तीसरे भाव) तक।

29 जुलाई, दोपहर 2:58 बजे से 26 अगस्त, शाम 7:47 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, मिथुन (आपसे बारहवें भाव) से शुरू होकर सिंह (आपसे दूसरे भाव) तक।

16 अगस्त, शाम 7:42 बजे से 15 सितंबर, रात 3:13 बजे तक गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, सिंह में, यानी आपसे दूसरे भाव में।

14 अक्टूबर, रात 3:28 बजे से 25 अक्टूबर, रात 11:15 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, तुला (आपसे चौथे भाव) से शुरू होकर कन्या (आपसे तीसरे भाव) तक।

17 नवंबर, सुबह 4:47 बजे से 5 जनवरी 2028, सुबह 11:04 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, तुला (आपसे चौथे भाव) से शुरू होकर मकर (आपसे सातवें भाव) तक।

प्रश्न

कर्क राशिफल 2027 से जुड़े सवाल

कर्क राशि के लिए 2027 कैसा रहेगा?

2027 में शास्त्र कर्क राशि के लिए दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक सहायक मानते हैं। शास्त्र में 25 जनवरी से 26 जून तक पहले भाव के गुरु को नरम गिना गया है, क्योंकि कर्क इसकी उच्च राशि है; 16 अगस्त से 15 सितंबर तक दूसरे भाव के गुरु की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का शनि (3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से) और दसवें भाव का शनि (3 जून से 20 अक्टूबर तक), सातवें भाव का राहु और पहले भाव का केतु (दोनों पूरे साल), तथा तीसरे भाव का गुरु (26 नवंबर से) धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ। 2027 में कर्क राशि पर न साढ़ेसाती है, न ढैया।

2027 में कर्क राशि से शनि और गुरु का भाव कब बदलता है?

2027 में: 25 जनवरी, रात 1:31 बजे गुरु कर्क में, यानी आपसे पहले भाव में; 3 जून, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में, यानी आपसे दसवें भाव में; 26 जून, सुबह 5:19 बजे गुरु सिंह में, यानी आपसे दूसरे भाव में; 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे शनि मीन में, यानी आपसे नौवें भाव में; 26 नवंबर, शाम 6:45 बजे गुरु कन्या में, यानी आपसे तीसरे भाव में।

2027 में कर्क राशि के लिए काम और धन कैसा है?

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक धन के लिए अनुकूल माना गया है। शास्त्र के अनुसार 3 जून से 20 अक्टूबर तक दसवें भाव का शनि कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा पर ध्यान माँगता है: स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को धन के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त से 15 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से तीसरे भाव का गुरु काम पर ध्यान माँगता है: अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें। 25 जनवरी से 3 जून तक आपसे दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे या बारहवें भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से काम और धन के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

2027 में कर्क राशि के लिए प्रेम और विवाह का समय कैसा है?

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है। शास्त्र के अनुसार पूरे साल सातवें भाव का राहु रिश्तों पर ध्यान माँगता है: मधुरता से बोलें। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त से 15 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। किसी एक व्यक्ति के लिए समय उसकी अपनी कुंडली और दशा से देखा जाता है, जैसा ग्रंथ स्वयं कहते हैं।

2027 कर्क राशि के विद्यार्थियों के लिए कैसा है?

शास्त्र के अनुसार 3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से नौवें भाव का शनि धैर्य माँगता है: निरंतर प्रयास करते रहें; पढ़ाई, संतान और धर्म के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते। 3 जून से 20 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें या नौवें भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से पढ़ाई, संतान और धर्म के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

2027 के कौन से महीने कर्क राशि के लिए धैर्य के हैं?

हमारी गिनती में 2027 की हर अवधि में कर्क राशि के लिए धैर्य माँगने वाले धीमे ग्रह साथ देने वालों से अधिक हैं, इसलिए कोई महीना अलग नहीं दिखता। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी तक, 26 जून से 16 अगस्त तक तथा 15 सितंबर से 26 नवंबर तक सहायक माना गया है। योजनाएँ सरल रखें और उन्हें समय दें।

2027 में गुरु कर्क राशि में ही उच्च का है, इसका क्या अर्थ है?

शास्त्र के अनुसार पहले भाव का गुरु धैर्य माँगता है (स्थान-परिवर्तन, धन और आपसी खिंचाव), लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 25 जनवरी से 26 जून तक इसे नरम गिना गया है।

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2027 में बाकी राशियों का राशिफल

राशिफल 2027: सभी 12 राशियाँ

हमारा राशिफल 2027 कैसे बनता है

हम क्या लागू करते हैं

  • 'साल' का कोई शास्त्रीय सूत्र नहीं है: शास्त्र हर ग्रह का गोचर आपकी चंद्र राशि से पढ़ते हैं और कहते हैं कि आपके लिए फल आपकी अपनी कुंडली की दशा और अष्टकवर्ग पर निर्भर है। इसलिए यहाँ साल को धीमे ग्रहों के ठहराव के रूप में, हर ठहराव के शास्त्रीय अर्थ के साथ, कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) में दिखाया गया है।
  • साल चार धीमे ग्रहों, गुरु, शनि, राहु और केतु, से पढ़ा गया है, आपकी चंद्र राशि से उनके भाव के अनुसार, और उन्हीं नियमों से जो हमारे दैनिक राशिफल में हैं: अनुकूल भाव, वेध, स्वराशि या उच्च राशि, नीच या अमित्र राशि, और अस्त।
  • एक अवधि किसी धीमे ग्रह के राशि परिवर्तन, या गुरु या शनि के अस्त-उदय, से अगले बदलाव तक चलती है। अवधि के भीतर वेध में केवल गुरु और शनि गिने गए हैं; तेज़ ग्रहों का वेध कुछ दिनों या हफ़्तों का होता है, इसलिए वह महीने के कार्ड में अपनी तारीख़ों के साथ दिया गया है और अवधि को नहीं बदलता। यह पढ़ने का तरीका हमारी अपनी पद्धति है।
  • हर अवधि का लेबल हमारी अपनी पद्धति है, कोई शास्त्रीय अंक नहीं: चार धीमे ग्रहों में सहायक धैर्य माँगने वालों से अधिक हों तो सहायक, कम हों तो धैर्य का समय, बराबर हों तो मिला-जुला। गिनती साथ में दी गई है। पूरे साल का कोई एक लेबल नहीं है।
  • जीवन के चार क्षेत्र भावों का हमारा अपना समूह हैं, जिनके अर्थ बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11 में इन्हीं विषयों से जुड़े हैं: काम और धन (दसवाँ, छठा, तीसरा, ग्यारहवाँ, दूसरा, बारहवाँ), प्रेम और परिवार (सातवाँ, चौथा, दूसरा), सेहत (पहला, छठा), और वार्षिक पेज पर पढ़ाई, संतान और धर्म (पाँचवाँ, नौवाँ)।
  • जब गुरु या शनि आगे चलते हुए किसी राशि में प्रवेश करें और उस समय सूर्य आपसे तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव में हों, और वहाँ स्वयं सहायक गिने जाएँ (अपनी नीच या किसी अमित्र राशि में न हों), तो अलग पंक्ति बताती है कि प्रवेश के क्षण सूर्य का बल उस ठहराव में साथ देता है (मुहूर्त चिंतामणि 3.19; ज्योतिर्निबंध पृ. 52)। दोनों ग्रंथों में केवल यही पक्ष है, इसलिए केवल यही दिखाया गया है, और इससे कोई लेबल नहीं बदलता। वक्री रहते हुए किए गए प्रवेश छोड़े गए हैं: कोई ग्रंथ नहीं बताता कि वे गिने जाएँ या नहीं।
  • हर संक्रांति पर आपकी चंद्र राशि से चंद्रमा का स्थान उसी क्षण के चंद्रबल के रूप में पढ़ा गया है, सूर्योदय पर नहीं (मुहूर्त चिंतामणि 3.19; नारद संहिता 11.26)। जब संक्रांति के 30 मिनट के भीतर चंद्रमा राशि बदले, तो यह पंक्ति नहीं दी जाती।
  • आपसे तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव का ग्रहण शास्त्र में छह महीने तक अनुकूल माना गया है; बाकी भावों में यह ध्यान माँगता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.6; दैवज्ञ-मनोहर)। ग्रंथ यह नहीं बताते कि आपके स्थान से न दिखने वाला ग्रहण गिना जाए या नहीं; परंपरा केवल दिखने वाले, उपच्छाया से अलग ग्रहण को मानती है, इसलिए भाव का फल केवल उन्हीं के लिए दिया गया है। यह हमारा अर्थ है।
  • अस्त के लिए पंचांग की दूरी ली गई है (सूर्य से गुरु 11 अंश, शनि 15 अंश)। जो पंचांग गुरु या शनि का अस्त सुबह-शाम दिखना बंद होने से छापते हैं, उनकी तारीख़ें कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
  • ग्रहण के समय सेकंड तक निकाले गए हैं और मिनट तक घटाकर छापे गए हैं; मध्य क्षण मिनटों के बीच से निकाला गया है, केवल पूरे मिनटों पर नहीं। सूतक पहले स्पर्श के साथ चलता है।
  • वक्री या मार्गी होने का क्षण वह है जब तारों के सापेक्ष ग्रह की गति शून्य हो। मंगल, गुरु और शनि के लिए केवल तारीख़ दी गई है, क्योंकि मिनट परिभाषा पर निर्भर करता है।
  • हर भाव आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है; राशिचक्र निरयण (लाहिड़ी अयनांश) है और ग्रह-स्थिति नासा जेपीएल DE440 से है। राहु-केतु स्पष्ट (वास्तविक) गति से लिए गए हैं, जैसा हमारी कुंडली में है, और कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना की तारीख़ साथ में दी गई है।
  • किस भाव में गोचर अनुकूल है, यह फलदीपिका 26.2, बृहत्संहिता 104.4 और मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 से लिया गया है, जो आपस में सहमत हैं; हर भाव का फल वहीं लिखा गया है जहाँ फलदीपिका और बृहत्संहिता एक बात कहती हैं।
  • वेध आपकी चंद्र राशि से गिना गया है (नारद), और सूर्य-शनि तथा चंद्र-बुध के बीच वेध नहीं होता।
  • अनुकूल भाव में राहु-केतु को भी सात में से कोई ग्रह इसी तरह वेध से रोकता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.1; कालप्रकाशिका 36.18)।
  • वाम वेध धैर्य माँगने वाली स्थिति को तब सहायक गिनता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8); यह भी आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, और चंद्राष्टम को नहीं बदलता।
  • अनुकूल भाव में नीच या अमित्र राशि के ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; बृहत्संहिता 104.53)।
  • अनुकूल भाव में सूर्य के निकट (अस्त) ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
  • धैर्य माँगने वाले भाव में स्वराशि या उच्च राशि का ग्रह प्रतिकूल फल नहीं देता (फलदीपिका 26.31; कालप्रकाशिका 36.12)।
  • जहाँ स्वराशि या उच्च राशि और अस्त दोनों हों, वहाँ कोई ग्रंथ एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखता, इसलिए उसे दोनों तथ्यों के साथ मिला-जुला दिखाया गया है।
  • दसवें भाव के राहु या केतु को धैर्य का समय माना गया है, जैसा पाँच ग्रंथ मानते हैं (मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका, शार्ङ्गधर, ज्योतिःप्रकाश और श्रीपति); फलदीपिका इसे अनुकूल मानती है, इसलिए साथ में 'ग्रंथों में मतभेद' लिखा गया है।
  • वक्री होना केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है। गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं, इसलिए वक्री ग्रह को उसी राशि से पढ़ा गया है जिसमें वह है।

क्या छोड़ा गया और क्यों

  • कुछ ग्रंथ कहते हैं कि धीमे ग्रह की अगली राशि का असर प्रवेश से महीनों पहले शुरू हो जाता है। वे यह नहीं बताते कि ग्रह के वापस मुड़ने पर यह कैसे गिना जाए, इसलिए यह नहीं लिया गया।
  • गुरु और शनि का 'दोहरा गोचर' जन्म कुंडली की एक आधुनिक पद्धति है, जो पढ़े गए गोचर अध्यायों में नहीं मिलती, इसलिए नहीं ली गई।
  • गुरु की अतिचारी चाल मुहूर्त का विषय है, गोचर फल का नहीं, इसलिए नहीं ली गई।
  • कोई गोचर ग्रंथ राशि में ग्रह के अंश से फल नहीं बदलता, इसलिए अंश नहीं लिए गए।
  • वर्ष के राजा और मंत्री, और संवत्सर का उत्तर भारतीय नाम, आपकी राशि के बारे में नहीं बल्कि देश-काल के बारे में हैं, और किसी दूसरे स्रोत से पुष्ट नहीं हैं, इसलिए छोड़े गए हैं।
  • केवल उपच्छाया वाला चंद्र ग्रहण खगोलीय तथ्य के रूप में दिया गया है, पर ग्रहण के रूप में नहीं गिना गया।

जाँच पूरी होने तक रोका गया

  • यहाँ राहु-केतु की उच्च या स्वराशि नहीं ली गई, क्योंकि इन पर ग्रंथों में मतभेद है।
  • कक्ष्या का समय फलदीपिका 23.16–19 में दूसरे मत के रूप में दिया गया है और बाकी ग्रंथों में नहीं मिलता, इसलिए नहीं लिया गया।
  • शनि का 'पाया' (सोना, चाँदी, ताँबा या लोहा) नहीं दिखाया गया: मुख्य ग्रंथों में इसका श्लोक नहीं मिला, और प्रचलित नियम आपस में अलग हैं।
  • शास्त्र कहते हैं कि अनुकूल स्थिति को 'अन्य ग्रह' वेध से रोकते हैं, पर यह नहीं बताते कि राहु-केतु इनमें गिने जाएँ या नहीं; इसलिए हम वेध में केवल सात दृश्य ग्रह गिनते हैं।
  • राहु-केतु पर वाम वेध लागू नहीं किया गया: केवल एक ग्रंथ ऐसा पढ़ता है, इसलिए धैर्य माँगने वाले भाव में राहु-केतु को वैसे ही गिना गया है।

इस पेज के शब्द

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गुरु
नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
शनि
नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
राहु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
केतु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
सहायक
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
सहायता मंद
अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
नरम
धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जो ग्रह के स्वराशि या उच्च राशि में होने से नरम पड़ा है (फलदीपिका 26.31)।
धैर्य का समय
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
चंद्राष्टम: सहज रहें
चंद्रमा आपकी राशि से आठवीं राशि में; परंपरा में योजनाएँ सरल रखने और बड़े नए निर्णय धीरे लेने का समय।
धैर्य का समय
उस अवधि का हमारा लेबल, जिसमें चारों धीमे ग्रहों में से धैर्य माँगने वाले सहायक ग्रहों से अधिक हों: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
गोचर
राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
भाव
आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
वेध
जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
वाम वेध (विपरीत वेध)
धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
साढ़ेसाती
आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का भ्रमण; नाम बाद की परंपरा का है, भाव फलदीपिका 26.22–23 में हैं।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
अस्त
ग्रह सूर्य के इतना निकट है कि उसकी चमक में छिप जाता है; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद मानी जाती है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
सबसे अधिक प्रभाव
राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
ग्रंथों में मतभेद
शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
दशा
विंशोत्तरी पद्धति से आपके जीवन में चल रही ग्रह की अवधि।
उच्च
वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
नीच
उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
स्वराशि
वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
अमित्र राशि
ऐसी राशि जिसके स्वामी से ग्रह का नैसर्गिक विरोध है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
काम और धन
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
प्रेम और परिवार
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
सेहत
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
संक्रांति पर चंद्रमा
संक्रांति के क्षण आपकी चंद्र राशि से चंद्रमा का भाव, जिसे सौर मास के चंद्रबल के रूप में पढ़ा जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 3.19)।
भाव से ग्रहण
आपकी चंद्र राशि से तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव का ग्रहण शास्त्र में छह महीने तक अनुकूल माना गया है (मुहूर्त चिंतामणि 4.6)।
पढ़ाई, संतान और धर्म
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पाँचवें और नौवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ संतान, विद्या, भाग्य और धर्म से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।

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