वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
मिथुन राशिफल 2027 — मिथुन राशि का पूरा वर्ष
मिथुन · Mithun · Gemini (चंद्र राशि)
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक सहायक माना गया है।
2027 में शास्त्र मिथुन राशि के लिए दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक सहायक मानते हैं।
शास्त्र में 3 जून से 20 अक्टूबर तक ग्यारहवें भाव के शनि की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि मेष इसकी नीच राशि है।
शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु (25 जनवरी तक तथा 26 जून से 26 नवंबर तक) और चौथे भाव का गुरु (26 नवंबर से), दसवें भाव का शनि (3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से), तथा आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु (दोनों पूरे साल) धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
2027 में मिथुन राशि पर न साढ़ेसाती है, न ढैया।
2027 में मिथुन: धीमे ग्रह, भाव के अनुसार
- सहायक
- नरम, रुका या मंद
- धैर्य का समय
- वक्री
- अस्त
- भारत में मान्य ग्रहण, भाव के साथ
- संक्रांति
हर पट्टी किसी धीमे ग्रह का एक राशि में ठहराव है। उस पर मिथुन से ग्रह का भाव लिखा है, और रंग हर अवधि में उसका शास्त्रीय फल बताता है। नीचे की तालिका यही बात शब्दों में कहती है।
शास्त्र के अनुसार किसी एक व्यक्ति के लिए गोचर का फल उसकी अपनी कुंडली पर निर्भर है: चल रही दशा और अष्टकवर्ग।
- दशा और अष्टकवर्ग बृहत्संहिता 104.46 · फलदीपिका 20.34–38 · फलदीपिका 26.41
21 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया · सभी समय भारतीय मानक समय (IST) में हैं। वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2027 तक लिया गया है।
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि: एक नज़र में
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25 जनवरी तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक
इस अवधि में चारों धीमे ग्रह मिथुन राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते; अगला बदलाव 25 जनवरी को है। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु, दसवें भाव का शनि, आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
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25 जनवरी से 3 जून तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 1 सहायक
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि, आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
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3 जून से 26 जून तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 1 सहायक
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि मेष इसकी नीच राशि है। शास्त्र के अनुसार आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
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26 जून से 20 अक्टूबर तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक
इस अवधि में चारों धीमे ग्रह मिथुन राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते; अगला बदलाव 20 अक्टूबर को है। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि मेष इसकी नीच राशि है। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु, आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
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20 अक्टूबर से 26 नवंबर तकधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक
इस अवधि में चारों धीमे ग्रह मिथुन राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते; अगला बदलाव 26 नवंबर को है। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु, दसवें भाव का शनि, आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
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26 नवंबर सेधैर्य का समय?4 धीमे ग्रहों में से 0 सहायक
इस अवधि में चारों धीमे ग्रह मिथुन राशि को कोई शास्त्रीय बढ़त नहीं देते। शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का गुरु, दसवें भाव का शनि, आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
2027 में मिथुन राशि के मोड़
25 जनवरी, रात 1:31 बजे: गुरु कर्क में, यानी आपसे दूसरे भाव में जाते हैं।
3 जून, सुबह 5:28 बजे: शनि मेष में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में जाते हैं।
26 जून, सुबह 5:19 बजे: गुरु सिंह में, यानी आपसे तीसरे भाव में जाते हैं।
20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे: शनि मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में जाते हैं।
26 नवंबर, शाम 6:45 बजे: गुरु कन्या में, यानी आपसे चौथे भाव में जाते हैं।
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
क्यों: मिथुन से शनि, गुरु और राहु-केतु, हर ठहराव के साथ
2027 को छूने वाले हर धीमे ग्रह के ठहराव, मिथुन से भाव, हर अवधि का शास्त्रीय फल और उसके पीछे का श्लोक।
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गुरु? सिंह · तीसरा भाव
धैर्य का समय? 25 जनवरी तक
शास्त्र के अनुसार 25 जनवरी तक तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी): अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।
- गुरु · मिथुन से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वक्री (13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल तक)
सिंह का यह ठहराव राशि के बीच के तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में गुरु का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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सहायक? 25 जनवरी से 26 जून तक
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।
- गुरु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
- वक्री (13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल तक)
कर्क का यह ठहराव राशि के बीच के तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में गुरु का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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गुरु? सिंह · तीसरा भाव
धैर्य का समय? 26 जून से 26 नवंबर तक
शास्त्र के अनुसार 26 जून से 26 नवंबर तक तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी): अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।
- गुरु · मिथुन से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- अस्त (16 अगस्त, शाम 7:42 बजे से 15 सितंबर, रात 3:13 बजे तक)
सिंह में शास्त्र के अनुसार गुरु का प्रभाव राशि के बीच के तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 15 अगस्त, दोपहर 2:51 बजे से 1 अक्टूबर, रात 3:27 बजे तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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धैर्य का समय? 26 नवंबर से
शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से चौथे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (रिश्तेदारों से जुड़े मामले): रिश्तेदारों से धैर्य से संपर्क बनाए रखें।
- गुरु · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
26 नवंबर, शाम 6:45 बजे गुरु के कन्या में प्रवेश के समय सूर्य वृश्चिक में, यानी आपसे छठे भाव में है: शास्त्र में प्रवेश के क्षण सूर्य के बल को पूरे ठहराव के लिए सहायक माना गया है।
- प्रवेश के समय सूर्य मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
कन्या का यह ठहराव राशि के बीच के तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में गुरु का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शनि? मीन · दसवाँ भाव
धैर्य का समय? 3 जून तक
शास्त्र के अनुसार 3 जून तक दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।
- शनि · मिथुन से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
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सहायता मंद? 3 जून से 20 अक्टूबर तक
शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि को सहायक माना गया है (लाभ), लेकिन शनि अपनी नीच राशि मेष में है, इसलिए 3 जून से 20 अक्टूबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शनि · मिथुन से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
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शनि? मीन · दसवाँ भाव
धैर्य का समय? 20 अक्टूबर से
शास्त्र के अनुसार 20 अक्टूबर से दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।
- शनि · मिथुन से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (9 अगस्त से 24 दिसंबर तक)
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राहु? मकर · आठवाँ भाव
धैर्य का समय? पूरे साल
शास्त्र के अनुसार पूरे साल आठवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (अनावश्यक जोखिम): सहज रहें और अनावश्यक जोखिम से बचें।
- राहु · मिथुन से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
मध्यम राहु-केतु की गणना से, जो कई पंचांगों में छपती है, राहु 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक मकर में है; यहाँ फल स्पष्ट (वास्तविक) गति से पढ़ा गया है।
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केतु? कर्क · दूसरा भाव
धैर्य का समय? पूरे साल
शास्त्र के अनुसार पूरे साल दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
- केतु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
मध्यम राहु-केतु की गणना से, जो कई पंचांगों में छपती है, केतु 5 दिसंबर 2026 से 24 जून 2028 तक कर्क में है; यहाँ फल स्पष्ट (वास्तविक) गति से पढ़ा गया है।
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि के लिए शनि: दसवाँ और ग्यारहवाँ भाव
2027 में मिथुन राशि पर न साढ़ेसाती है, न ढैया: इस साल शनि आपसे दसवें और ग्यारहवें भाव में है। अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2036 तक है।
- साढ़ेसाती और ढैया फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
मीन में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव राशि के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 11 मार्च, सुबह 6:27 बजे से 3 जून, सुबह 5:28 बजे तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
मेष का यह ठहराव राशि के अंतिम तिहाई भाग तक नहीं पहुँचता, जहाँ शास्त्र में शनि का प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
मीन में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव राशि के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे से 23 फ़रवरी 2028, शाम 7:24 बजे तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
मिथुन राशिफल 2027 महीने दर महीने
हर महीना: संक्रांति और उस क्षण का चंद्रमा, मिथुन से भाव के साथ मंगल, बुध और शुक्र के गोचर, सहज रहने के दिन, और उस समय की अवधि।
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जनवरी 2027
14 जनवरी, रात 9:10 बजे: सूर्य मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में (मकर संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 13 फ़रवरी तक आठवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: बड़े निर्णय धीरे-धीरे लें।
संक्रांति के क्षण चंद्रमा मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
25 जनवरी, रात 1:31 बजे: गुरु कर्क राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (26 जून तक)। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 26 जून तक सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
जनवरी के सभी गोचर (9)
1 जनवरी, रात 11:23 बजे: शुक्र वृश्चिक राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (29 जनवरी तक)। शास्त्र के अनुसार 29 जनवरी तक छठे भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत): योजनाएँ लचीली रखें और भरपूर आराम करें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
10 जनवरी, रात 12:37 बजे: बुध मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (28 जनवरी तक)। शास्त्र में आठवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (संतान और लाभ), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 23 जनवरी तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 23 जनवरी से 28 जनवरी तक, अस्त से बाहर आने पर, इसे सहायक गिना गया है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
10 जनवरी: मंगल सिंह में, आपसे तीसरे भाव में, वक्री होते हैं।
23 जनवरी, शाम 6:52 बजे: बुध मकर में, आपसे आठवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
28 जनवरी, रात 3:34 बजे: बुध कुंभ राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं (24 फ़रवरी तक)। शास्त्र के अनुसार 24 फ़रवरी तक नौवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (काम में धीमी प्रगति): काम को अतिरिक्त समय दें।
29 जनवरी, शाम 6:42 बजे: शुक्र धनु राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (24 फ़रवरी तक)। शास्त्र के अनुसार 24 फ़रवरी तक सातवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रिश्तों में खिंचाव): मधुरता से बोलें और अपेक्षाएँ सरल रखें।
14 जनवरी तक आपसे सातवें भाव में सूर्य होने से शास्त्र में तीसरे भाव के गुरु को वाम वेध से सहायक गिना गया है।
- वाम वेध मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
10 जनवरी तक आपसे सातवें भाव में बुध होने से शास्त्र में तीसरे भाव के गुरु को वाम वेध से सहायक गिना गया है।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 8 जनवरी, दोपहर 3:59 बजे से 11 जनवरी, सुबह 4:35 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
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फ़रवरी 2027
13 फ़रवरी, सुबह 10:09 बजे: सूर्य कुंभ राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में (कुंभ संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 15 मार्च तक नौवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (रुकावटें और मन की थकान): योजनाओं को अतिरिक्त समय दें और मन को आराम दें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा मेष में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
6 फ़रवरी: मकर (धनिष्ठा) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर वलयाकार), यानी आपसे आठवें भाव में। नई दिल्ली से यह नहीं दिखता, इसलिए वहाँ इसे नहीं गिना जाता और भाव का फल नहीं दिया गया।
21 फ़रवरी, सुबह 4:43 बजे: सिंह (मघा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे तीसरे भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 21 फ़रवरी को रात 2:42 बजे से सुबह 6:44 बजे तक।
फ़रवरी के सभी गोचर (6)
9 फ़रवरी, रात 11:06 बजे: बुध कुंभ में, आपसे नौवें भाव में, वक्री होते हैं।
12 फ़रवरी, दोपहर 1:35 बजे: बुध कुंभ में, आपसे नौवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
24 फ़रवरी, सुबह 4:40 बजे: बुध मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (12 मार्च तक)। शास्त्र में आठवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (संतान और लाभ), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 24 फ़रवरी तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 24 फ़रवरी से 12 मार्च तक, अस्त से बाहर आने पर, इसे सहायक गिना गया है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
24 फ़रवरी, दोपहर 3:16 बजे: शुक्र मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (21 मार्च तक)। शास्त्र में आठवें भाव के शुक्र को 21 मार्च तक सहायक माना गया है (धन और सुख-सुविधाएँ)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
24 फ़रवरी, शाम 7:26 बजे: बुध मकर में, आपसे आठवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 4 फ़रवरी, रात 10:18 बजे से 7 फ़रवरी, सुबह 10:37 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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मार्च 2027
15 मार्च, सुबह 7:00 बजे: सूर्य मीन राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में (मीन संक्रांति)। शास्त्र में दसवें भाव के सूर्य को 14 अप्रैल तक सहायक माना गया है (काम में सफलता)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा वृषभ में, यानी आपसे बारहवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
21 मार्च, दोपहर 1:46 बजे: शनि मीन में, आपसे दसवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
मार्च के सभी गोचर (6)
3 मार्च, शाम 6:03 बजे: बुध मकर में, आपसे आठवें भाव में, मार्गी होते हैं।
10 मार्च, रात 12:13 बजे: मंगल कर्क राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (26 अप्रैल तक)। शास्त्र के अनुसार 26 अप्रैल तक दूसरे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (वाणी और धन): वाणी मधुर रखें और खर्च पर नज़र रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
12 मार्च, सुबह 5:07 बजे: बुध कुंभ राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं (5 अप्रैल तक)। शास्त्र के अनुसार 5 अप्रैल तक नौवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (काम में धीमी प्रगति): काम को अतिरिक्त समय दें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
21 मार्च, शाम 6:52 बजे: शुक्र कुंभ राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं (15 अप्रैल तक)। शास्त्र में नौवें भाव के शुक्र को 15 अप्रैल तक सहायक माना गया है (प्रसन्नता और धन)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 4 मार्च, सुबह 5:21 बजे से 6 मार्च, शाम 5:35 बजे तक; 31 मार्च, दोपहर 1:08 बजे से 3 अप्रैल, रात 1:33 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
11 मार्च, सुबह 6:27 बजे: शनि मीन के अंतिम तिहाई भाग में पहुँचते हैं, यानी आपसे दसवें भाव में, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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अप्रैल 2027
14 अप्रैल, दोपहर 3:28 बजे: सूर्य मेष राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में (मेष संक्रांति, सौर नववर्ष)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के सूर्य को 15 मई तक सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, सम्मान, लाभ और सेहत में सुधार)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा कर्क में, यानी आपसे दूसरे भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
13 अप्रैल: गुरु कर्क में, आपसे दूसरे भाव में, मार्गी होते हैं।
25 अप्रैल, दोपहर 12:40 बजे: शनि मीन में, आपसे दसवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
7 अप्रैल: विक्रम संवत 2084 शुरू (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा), साथ में शक संवत 1949; शक गणना से वर्ष का नाम प्लवंग है।
अप्रैल के सभी गोचर (7)
1 अप्रैल: मंगल कर्क में, आपसे दूसरे भाव में, मार्गी होते हैं।
5 अप्रैल, शाम 4:16 बजे: बुध मीन राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (22 अप्रैल तक)। शास्त्र में दसवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (सुख और लाभ), लेकिन बुध अपनी नीच राशि मीन में है, इसलिए 15 अप्रैल तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 15 अप्रैल से 22 अप्रैल तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि मीन इसकी नीच राशि है और यह सूर्य के निकट (अस्त) है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
15 अप्रैल, दोपहर 12:18 बजे: बुध मीन में, आपसे दसवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
15 अप्रैल, दोपहर 3:21 बजे: शुक्र मीन राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (10 मई तक)। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में खिंचाव और प्रतिष्ठा), लेकिन मीन इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 10 मई तक इसे नरम गिना गया है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- उच्च राशि: नरम फलदीपिका 26.31 · कालप्रकाशिका 36.12
22 अप्रैल, सुबह 8:13 बजे: बुध मेष राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (6 मई तक)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (उन्नति, लाभ और मित्र), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 6 मई तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
26 अप्रैल, सुबह 11:47 बजे: मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (5 जुलाई तक)। शास्त्र में तीसरे भाव के मंगल को 5 जुलाई तक सहायक माना गया है (सफलता, लाभ और उत्साह)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 31 मार्च, दोपहर 1:08 बजे से 3 अप्रैल, रात 1:33 बजे तक; 27 अप्रैल, रात 9:11 बजे से 30 अप्रैल, सुबह 9:54 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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मई 2027
15 मई, दोपहर 12:20 बजे: सूर्य वृषभ राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में (वृषभ संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 15 जून तक बारहवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
संक्रांति के क्षण चंद्रमा सिंह में, यानी आपसे तीसरे भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
मई के सभी गोचर (7)
6 मई, दोपहर 12:36 बजे: बुध वृषभ राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (23 मई तक)। शास्त्र के अनुसार 23 मई तक बारहवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत): योजनाएँ लचीली रखें और भरपूर आराम करें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
10 मई, सुबह 8:49 बजे: शुक्र मेष राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (4 जून तक)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शुक्र को 4 जून तक अनुकूल माना गया है।
11 मई, दोपहर 12:42 बजे: बुध वृषभ में, आपसे बारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
23 मई, शाम 6:32 बजे: बुध मिथुन राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं (30 जुलाई तक)। शास्त्र के अनुसार पहले भाव का बुध धैर्य माँगता है (धन और सलाह), लेकिन मिथुन इसकी स्वराशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 23 मई से 15 जून तक तथा 2 जुलाई से 29 जुलाई तक इसे नरम गिना गया है। 15 जून से 2 जुलाई तक तथा 29 जुलाई से 30 जुलाई तक इसे मिला-जुला गिना गया है, क्योंकि मिथुन इसकी स्वराशि है, पर यह सूर्य के निकट (अस्त) है।
- स्वराशि: नरम फलदीपिका 26.31 · कालप्रकाशिका 36.12
- स्वराशि और अस्त: संकेत दोनों ओर फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
6 मई से 23 मई तक आपसे बारहवें भाव में बुध होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
- वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
15 मई से 15 जून तक आपसे बारहवें भाव में सूर्य होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 25 मई, सुबह 4:53 बजे से 27 मई, शाम 5:50 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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जून 2027
15 जून, शाम 6:56 बजे: सूर्य मिथुन राशि में, यानी आपसे पहले भाव में (मिथुन संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 17 जुलाई तक पहले भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकान, अतिरिक्त खर्च और यात्रा): अपनी गति संतुलित रखें और खर्च की योजना पहले से बनाएँ।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा तुला में, यानी आपसे पाँचवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
3 जून, सुबह 5:28 बजे: शनि मेष राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (20 अक्टूबर तक)। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि को सहायक माना गया है (लाभ), लेकिन शनि अपनी नीच राशि मेष में है, इसलिए 20 अक्टूबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
26 जून, सुबह 5:19 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (26 नवंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर तक तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी): अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
जून के सभी गोचर (8)
4 जून, रात 12:41 बजे: शुक्र वृषभ राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं (28 जून तक)। शास्त्र में बारहवें भाव के शुक्र को 28 जून तक अनुकूल माना गया है।
10 जून, रात 11:45 बजे: बुध मिथुन में, आपसे पहले भाव में, वक्री होते हैं।
15 जून, सुबह 5:31 बजे: बुध मिथुन में, आपसे पहले भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
28 जून, दोपहर 2:40 बजे: शुक्र मिथुन राशि में, यानी आपसे पहले भाव में प्रवेश करते हैं (23 जुलाई तक)। शास्त्र में पहले भाव के शुक्र को 6 जुलाई तक सहायक माना गया है (सुख-सुविधाएँ और आनंद)। 6 जुलाई से 23 जुलाई तक इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि यह सूर्य के निकट (अस्त) है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
15 मई से 15 जून तक आपसे बारहवें भाव में सूर्य होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
- वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
4 जून से 26 जून तक आपसे बारहवें भाव में शुक्र होने से दूसरे भाव के गुरु पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 21 जून, सुबह 11:49 बजे से 24 जून, रात 12:51 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
3 जून, सुबह 5:28 बजे: शनि मीन के अंतिम तिहाई भाग से निकलते हैं, यानी आपसे दसवें भाव से, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 25 जनवरी से 3 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3)।?
- अवधि 3 जून से 26 जून तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 2)।?
- अवधि 26 जून से 20 अक्टूबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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जुलाई 2027
17 जुलाई, सुबह 5:49 बजे: सूर्य कर्क राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में (कर्क संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 17 अगस्त तक दूसरे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (धन और रोज़मर्रा की सुविधाएँ): खर्च पर नज़र रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा धनु में, यानी आपसे सातवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
18 जुलाई, रात 9:33 बजे: मकर (उत्तराषाढ़ा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे आठवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 18 जुलाई को रात 9:27 बजे से रात 9:39 बजे तक। चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी छाया को केवल छूता है।
जुलाई के सभी गोचर (8)
2 जुलाई, रात 2:29 बजे: बुध मिथुन में, आपसे पहले भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
5 जुलाई, रात 1:11 बजे: बुध मिथुन में, आपसे पहले भाव में, मार्गी होते हैं।
5 जुलाई, सुबह 4:35 बजे: मंगल कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (24 अगस्त तक)। शास्त्र के अनुसार 24 अगस्त तक चौथे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (सेहत और दिनचर्या): भोजन और आराम का समय नियमित रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
6 जुलाई, रात 8:43 बजे: शुक्र मिथुन में, आपसे पहले भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
23 जुलाई, रात 1:47 बजे: शुक्र कर्क राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (16 अगस्त तक)। शास्त्र में दूसरे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (धन और परिवार), लेकिन शुक्र कर्क में है, जिसके स्वामी चंद्रमा से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 16 अगस्त तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
29 जुलाई, दोपहर 2:58 बजे: बुध मिथुन में, आपसे पहले भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
30 जुलाई, शाम 6:31 बजे: बुध कर्क राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं (14 अगस्त तक)। शास्त्र में दूसरे भाव के बुध को सहायक माना गया है (धन), लेकिन बुध कर्क में है, जिसके स्वामी चंद्रमा से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, और बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 14 अगस्त तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 18 जुलाई, शाम 6:04 बजे से 21 जुलाई, सुबह 7:04 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 26 जून से 20 अक्टूबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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अगस्त 2027
17 अगस्त, दोपहर 2:14 बजे: सूर्य सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में (सिंह संक्रांति)। शास्त्र में तीसरे भाव के सूर्य को 17 सितंबर तक सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा कुंभ में, यानी आपसे नौवें भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
9 अगस्त: शनि मेष में, आपसे ग्यारहवें भाव में, वक्री होते हैं।
16 अगस्त, शाम 7:42 बजे: गुरु सिंह में, आपसे तीसरे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
2 अगस्त: कर्क (पुष्य) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर पूर्ण), यानी आपसे दूसरे भाव में। नई दिल्ली से यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखता है, 2 अगस्त को दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:03 बजे तक। शास्त्र के अनुसार आपसे दूसरे भाव का ग्रहण छह महीने तक ध्यान माँगता है: नई योजनाएँ सरल रखें।
- भाव से ग्रहण मुहूर्त चिंतामणि 4.6 · बृहद्दैवज्ञरंजन 33.81
17 अगस्त, दोपहर 12:44 बजे: मकर (धनिष्ठा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे आठवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया।
अगस्त के सभी गोचर (8)
14 अगस्त, सुबह 11:53 बजे: बुध सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (31 अगस्त तक)। शास्त्र के अनुसार 31 अगस्त तक तीसरे भाव का बुध धैर्य माँगता है (प्रतिस्पर्धा): निष्पक्ष और स्थिर रहें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
16 अगस्त, सुबह 9:35 बजे: शुक्र सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं (9 सितंबर तक)। शास्त्र में तीसरे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (समृद्धि और प्रतिष्ठा), लेकिन शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 9 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
24 अगस्त, सुबह 9:52 बजे: मंगल तुला राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (8 अक्टूबर तक)। शास्त्र के अनुसार 8 अक्टूबर तक पाँचवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (संतान की ज़रूरतें और सेहत): संतान को समय दें और दिनचर्या नियमित रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
26 अगस्त, शाम 7:47 बजे: बुध सिंह में, आपसे तीसरे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
31 अगस्त, रात 2:01 बजे: बुध कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (21 सितंबर तक)। शास्त्र में चौथे भाव के बुध को 21 सितंबर तक सहायक माना गया है (लाभ और परिवार में बढ़ोतरी)।
24 अगस्त से 8 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें भाव में मंगल होने से ग्यारहवें भाव के शनि पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
- वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 15 अगस्त, रात 12:07 बजे से 17 अगस्त, दोपहर 1:05 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
15 अगस्त, दोपहर 2:51 बजे: गुरु सिंह के बीच के तिहाई भाग में पहुँचते हैं, यानी आपसे तीसरे भाव में, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 26 जून से 20 अक्टूबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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सितंबर 2027
17 सितंबर, दोपहर 2:11 बजे: सूर्य कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में (कन्या संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 18 अक्टूबर तक चौथे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और घर की सुविधाएँ): दिनचर्या नियमित रखें और घर की योजनाएँ सरल रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
15 सितंबर, रात 3:13 बजे: गुरु सिंह में, आपसे तीसरे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
सितंबर के सभी गोचर (6)
9 सितंबर, दोपहर 2:41 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (3 अक्टूबर तक)। शास्त्र में चौथे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (मित्र और प्रसन्नता), लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 17 सितंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक, अस्त से बाहर आने पर, इसकी सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि कन्या इसकी नीच राशि है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
17 सितंबर, रात 10:49 बजे: शुक्र कन्या में, आपसे चौथे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
21 सितंबर, शाम 6:21 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (21 अक्टूबर तक)। शास्त्र के अनुसार 21 अक्टूबर तक पाँचवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (घर में खिंचाव): घर में मधुरता से बात करें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
24 अगस्त से 8 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें भाव में मंगल होने से ग्यारहवें भाव के शनि पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
- वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
21 सितंबर से 20 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें भाव में बुध होने से ग्यारहवें भाव के शनि पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 11 सितंबर, सुबह 6:37 बजे से 13 सितंबर, शाम 7:34 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 26 जून से 20 अक्टूबर तक: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 3)।?
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अक्टूबर 2027
18 अक्टूबर, रात 2:09 बजे: सूर्य तुला राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में (तुला संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 17 नवंबर तक पाँचवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और आराम): खुद को आराम का समय दें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा मेष में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे: शनि मीन राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं (23 फ़रवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार 20 अक्टूबर से दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
30 अक्टूबर: गुजराती विक्रम संवत 2084 शुरू (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)।
अक्टूबर के सभी गोचर (14)
3 अक्टूबर, शाम 6:24 बजे: शुक्र तुला राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (27 अक्टूबर तक)। शास्त्र में पाँचवें भाव के शुक्र को 27 अक्टूबर तक सहायक माना गया है (संतान और प्रसन्नता)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
7 अक्टूबर, रात 8:06 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, वक्री होते हैं।
8 अक्टूबर, रात 1:29 बजे: मंगल वृश्चिक राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (18 नवंबर तक)। शास्त्र में छठे भाव के मंगल को 18 नवंबर तक सहायक माना गया है (विवादों का सुलझना, अच्छी सेहत और लाभ)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
14 अक्टूबर, रात 3:28 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
21 अक्टूबर, सुबह 8:12 बजे: बुध कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (5 नवंबर तक)। शास्त्र में चौथे भाव के बुध को सहायक माना गया है (लाभ और परिवार में बढ़ोतरी), लेकिन बुध अपनी उच्च राशि कन्या में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; इस पर ग्रंथों के संकेत दोनों ओर जाते हैं, इसलिए 25 अक्टूबर तक इसे मिला-जुला गिना गया है। 25 अक्टूबर से 5 नवंबर तक, अस्त से बाहर आने पर, इसे सहायक गिना गया है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- उच्च राशि और अस्त: संकेत दोनों ओर फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
25 अक्टूबर, रात 11:15 बजे: बुध कन्या में, आपसे चौथे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
27 अक्टूबर, रात 9:57 बजे: शुक्र वृश्चिक राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (21 नवंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 21 नवंबर तक छठे भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत): योजनाएँ लचीली रखें और भरपूर आराम करें।
28 अक्टूबर, शाम 7:41 बजे: बुध कन्या में, आपसे चौथे भाव में, मार्गी होते हैं।
24 अगस्त से 8 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें भाव में मंगल होने से ग्यारहवें भाव के शनि पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
- वेध फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
21 सितंबर से 20 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें भाव में बुध होने से ग्यारहवें भाव के शनि पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
3 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक आपसे पाँचवें भाव में शुक्र होने से ग्यारहवें भाव के शनि पर वेध बनता है: शास्त्र में तब तक इसकी सहायता रुकी हुई मानी गई है।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 8 अक्टूबर, दोपहर 1:59 बजे से 11 अक्टूबर, रात 2:56 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
1 अक्टूबर, रात 3:27 बजे: गुरु सिंह के बीच के तिहाई भाग से निकलते हैं, यानी आपसे तीसरे भाव से, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे: शनि मीन के अंतिम तिहाई भाग में पहुँचते हैं, यानी आपसे दसवें भाव में, जहाँ शास्त्र में इसका प्रभाव सबसे अधिक माना गया है।
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
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नवंबर 2027
17 नवंबर, रात 1:59 बजे: सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे छठे भाव में (वृश्चिक संक्रांति)। शास्त्र में छठे भाव के सूर्य को 16 दिसंबर तक सहायक माना गया है (सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा मिथुन में, यानी आपसे पहले भाव में है: शास्त्र में यह अच्छा चंद्रबल है, जिसे शुरू हो रहे सौर मास के लिए सहायक माना गया है।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
26 नवंबर, शाम 6:45 बजे: गुरु कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं (28 फ़रवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से चौथे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (रिश्तेदारों से जुड़े मामले): रिश्तेदारों से धैर्य से संपर्क बनाए रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
नवंबर के सभी गोचर (8)
5 नवंबर, शाम 5:11 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं (26 नवंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर तक पाँचवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (घर में खिंचाव): घर में मधुरता से बात करें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
17 नवंबर, सुबह 4:47 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
18 नवंबर, सुबह 8:46 बजे: मंगल धनु राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (27 दिसंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 27 दिसंबर तक सातवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (जीवनसाथी से खिंचाव और सेहत): जीवनसाथी से मधुरता से बात करें और भोजन का समय नियमित रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
21 नवंबर, रात 2:08 बजे: शुक्र धनु राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (15 दिसंबर तक)। शास्त्र के अनुसार 15 दिसंबर तक सातवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रिश्तों में खिंचाव): मधुरता से बोलें और अपेक्षाएँ सरल रखें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
26 नवंबर, रात 12:29 बजे: बुध वृश्चिक राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं (15 दिसंबर तक)। शास्त्र में छठे भाव के बुध को सहायक माना गया है (सफलता और प्रतिष्ठा), लेकिन बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 15 दिसंबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
18 नवंबर से 26 नवंबर तक आपसे सातवें भाव में मंगल होने से शास्त्र में तीसरे भाव के गुरु को वाम वेध से सहायक गिना गया है।
- वाम वेध मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
21 नवंबर से 26 नवंबर तक आपसे सातवें भाव में शुक्र होने से शास्त्र में तीसरे भाव के गुरु को वाम वेध से सहायक गिना गया है।
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 4 नवंबर, रात 10:07 बजे से 7 नवंबर, सुबह 11:00 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
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दिसंबर 2027
16 दिसंबर, शाम 4:39 बजे: सूर्य धनु राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में (धनु संक्रांति)। शास्त्र के अनुसार 15 जनवरी 2028 तक सातवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकाने वाली यात्रा और प्रतिष्ठा में कमी): यात्राओं के बीच आराम का समय रखें और काम में स्थिर रहें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
संक्रांति के क्षण चंद्रमा कर्क में, यानी आपसे दूसरे भाव में है, इसलिए इस शास्त्रीय नियम से सौर मास को चंद्रमा से अलग से बल नहीं मिलता।
- संक्रांति पर चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 3.19 · नारद संहिता 11.26 · ज्योतिर्निबंध पृ. 52 श्लोक 22
24 दिसंबर: शनि मीन में, आपसे दसवें भाव में, मार्गी होते हैं।
दिसंबर के सभी गोचर (4)
15 दिसंबर, रात 2:07 बजे: बुध धनु राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं (2 जनवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार 2 जनवरी 2028 तक सातवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (आपसी खिंचाव): मधुरता से बोलें और पहले सुनें।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
15 दिसंबर, सुबह 8:11 बजे: शुक्र मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (8 जनवरी 2028 तक)। शास्त्र में आठवें भाव के शुक्र को 8 जनवरी 2028 तक सहायक माना गया है (धन और सुख-सुविधाएँ)।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
27 दिसंबर, दोपहर 1:05 बजे: मंगल मकर राशि में, यानी आपसे आठवें भाव में प्रवेश करते हैं (3 फ़रवरी 2028 तक)। शास्त्र के अनुसार आठवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (अनावश्यक जोखिम, धन और प्रतिष्ठा), लेकिन मकर इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए 4 जनवरी 2028 तक इसे नरम गिना गया है। 4 जनवरी 2028 से 3 फ़रवरी 2028 तक इसे मिला-जुला गिना गया है, क्योंकि मकर इसकी उच्च राशि है, पर यह सूर्य के निकट (अस्त) है।
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- उच्च राशि: नरम फलदीपिका 26.31 · कालप्रकाशिका 36.12
- उच्च राशि और अस्त: संकेत दोनों ओर फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
सहज रहने के दिन (चंद्राष्टम, चंद्रमा आपसे आठवें भाव में): 2 दिसंबर, सुबह 6:25 बजे से 4 दिसंबर, शाम 7:08 बजे तक; 29 दिसंबर, दोपहर 2:04 बजे से 1 जनवरी 2028, रात 2:40 बजे तक।
- चंद्राष्टम: सहज रहें फलदीपिका 26.34 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1
- मिथुन से भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- अवधि 26 नवंबर से: धैर्य का समय (4 धीमे ग्रहों में से सहायक 0, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 4)।?
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि: काम और धन
?शास्त्र के अनुसार 25 जनवरी तक तथा 26 जून से 26 नवंबर तक तीसरे भाव का गुरु काम पर ध्यान माँगता है: अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।
- गुरु · मिथुन से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
शास्त्र के अनुसार 3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से दसवें भाव का शनि कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा पर ध्यान माँगता है: स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।
- शनि · मिथुन से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
शास्त्र के अनुसार पूरे साल दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ; काम और धन के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- केतु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक धन के लिए अनुकूल माना गया है।
- गुरु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि को लाभ के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन शनि अपनी नीच राशि मेष में है, इसलिए 3 जून से 20 अक्टूबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शनि · मिथुन से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि: प्रेम, विवाह और परिवार
?शास्त्र के अनुसार पूरे साल दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- केतु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है।
- गुरु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से चौथे भाव का गुरु रिश्तेदारों पर ध्यान माँगता है: धैर्य से संपर्क बनाए रखें।
- गुरु · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि: सेहत
?पूरे साल आपसे पहले या छठे भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से सेहत के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि: पढ़ाई, संतान और धर्म
?पूरे साल आपसे पाँचवें या नौवें भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से पढ़ाई, संतान और धर्म के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।
वार्षिक राशिफल 2027 · चंद्र राशि के अनुसार
2027 में मिथुन राशि के लिए ग्रहण, वक्री और अस्त की तारीख़ें
ग्रहण
ग्रहण दिखता है या नहीं, उसके समय और सूतक नई दिल्ली के हैं।
6 फ़रवरी: मकर (धनिष्ठा) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर वलयाकार), यानी आपसे आठवें भाव में। नई दिल्ली से यह नहीं दिखता, इसलिए वहाँ इसे नहीं गिना जाता और भाव का फल नहीं दिया गया।
21 फ़रवरी, सुबह 4:43 बजे: सिंह (मघा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे तीसरे भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 21 फ़रवरी को रात 2:42 बजे से सुबह 6:44 बजे तक।
18 जुलाई, रात 9:33 बजे: मकर (उत्तराषाढ़ा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे आठवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया। नई दिल्ली: 18 जुलाई को रात 9:27 बजे से रात 9:39 बजे तक। चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी छाया को केवल छूता है।
2 अगस्त: कर्क (पुष्य) में सूर्य ग्रहण (अन्य स्थानों पर पूर्ण), यानी आपसे दूसरे भाव में। नई दिल्ली से यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में दिखता है, 2 अगस्त को दोपहर 3:53 बजे से शाम 5:03 बजे तक। शास्त्र के अनुसार आपसे दूसरे भाव का ग्रहण छह महीने तक ध्यान माँगता है: नई योजनाएँ सरल रखें।
- भाव से ग्रहण मुहूर्त चिंतामणि 4.6 · बृहद्दैवज्ञरंजन 33.81
पंचांग के नियम से नई दिल्ली में सूतक: 2 अगस्त को रात 3:53 बजे से शाम 5:03 बजे तक। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
17 अगस्त, दोपहर 12:44 बजे: मकर (धनिष्ठा) में उपच्छाया चंद्र ग्रहण, यानी आपसे आठवें भाव में। केवल उपच्छाया: परंपरा में इसे ग्रहण नहीं गिना जाता, इसलिए भाव का फल नहीं दिया गया।
वक्री काल
13 दिसंबर 2026 से 13 अप्रैल तक गुरु वक्री है, सिंह (आपसे तीसरे भाव) से वापस कर्क (आपसे दूसरे भाव) तक।
10 जनवरी से 1 अप्रैल तक मंगल वक्री है, सिंह (आपसे तीसरे भाव) से वापस कर्क (आपसे दूसरे भाव) तक।
9 फ़रवरी, रात 11:06 बजे से 3 मार्च, शाम 6:03 बजे तक बुध वक्री है, कुंभ (आपसे नौवें भाव) से वापस मकर (आपसे आठवें भाव) तक।
10 जून, रात 11:45 बजे से 5 जुलाई, रात 1:11 बजे तक बुध वक्री है, मिथुन में, यानी आपसे पहले भाव में।
9 अगस्त से 24 दिसंबर तक शनि वक्री है, मेष (आपसे ग्यारहवें भाव) से वापस मीन (आपसे दसवें भाव) तक।
7 अक्टूबर, रात 8:06 बजे से 28 अक्टूबर, शाम 7:41 बजे तक बुध वक्री है, तुला (आपसे पाँचवें भाव) से वापस कन्या (आपसे चौथे भाव) तक।
अस्त काल
7 दिसंबर 2026, रात 12:55 बजे से 23 जनवरी, शाम 6:52 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, वृश्चिक (आपसे छठे भाव) से शुरू होकर मकर (आपसे आठवें भाव) तक।
12 फ़रवरी, दोपहर 1:35 बजे से 24 फ़रवरी, शाम 7:26 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, कुंभ (आपसे नौवें भाव) से शुरू होकर मकर (आपसे आठवें भाव) तक।
21 मार्च, दोपहर 1:46 बजे से 25 अप्रैल, दोपहर 12:40 बजे तक शनि सूर्य के निकट (अस्त) है, मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में।
15 अप्रैल, दोपहर 12:18 बजे से 11 मई, दोपहर 12:42 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, मीन (आपसे दसवें भाव) से शुरू होकर वृषभ (आपसे बारहवें भाव) तक।
15 जून, सुबह 5:31 बजे से 2 जुलाई, रात 2:29 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, मिथुन में, यानी आपसे पहले भाव में।
6 जुलाई, रात 8:43 बजे से 17 सितंबर, रात 10:49 बजे तक शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, मिथुन (आपसे पहले भाव) से शुरू होकर कन्या (आपसे चौथे भाव) तक।
29 जुलाई, दोपहर 2:58 बजे से 26 अगस्त, शाम 7:47 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, मिथुन (आपसे पहले भाव) से शुरू होकर सिंह (आपसे तीसरे भाव) तक।
16 अगस्त, शाम 7:42 बजे से 15 सितंबर, रात 3:13 बजे तक गुरु सूर्य के निकट (अस्त) है, सिंह में, यानी आपसे तीसरे भाव में।
14 अक्टूबर, रात 3:28 बजे से 25 अक्टूबर, रात 11:15 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, तुला (आपसे पाँचवें भाव) से शुरू होकर कन्या (आपसे चौथे भाव) तक।
17 नवंबर, सुबह 4:47 बजे से 5 जनवरी 2028, सुबह 11:04 बजे तक बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, तुला (आपसे पाँचवें भाव) से शुरू होकर मकर (आपसे आठवें भाव) तक।
प्रश्न
मिथुन राशिफल 2027 से जुड़े सवाल
मिथुन राशि के लिए 2027 कैसा रहेगा?
2027 में शास्त्र मिथुन राशि के लिए दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक सहायक मानते हैं। शास्त्र में 3 जून से 20 अक्टूबर तक ग्यारहवें भाव के शनि की सहायता मंद मानी गई है, क्योंकि मेष इसकी नीच राशि है। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु (25 जनवरी तक तथा 26 जून से 26 नवंबर तक) और चौथे भाव का गुरु (26 नवंबर से), दसवें भाव का शनि (3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से), तथा आठवें भाव का राहु और दूसरे भाव का केतु (दोनों पूरे साल) धैर्य माँगते हैं: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ। 2027 में मिथुन राशि पर न साढ़ेसाती है, न ढैया।
2027 में मिथुन राशि से शनि और गुरु का भाव कब बदलता है?
2027 में: 25 जनवरी, रात 1:31 बजे गुरु कर्क में, यानी आपसे दूसरे भाव में; 3 जून, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में; 26 जून, सुबह 5:19 बजे गुरु सिंह में, यानी आपसे तीसरे भाव में; 20 अक्टूबर, सुबह 7:12 बजे शनि मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में; 26 नवंबर, शाम 6:45 बजे गुरु कन्या में, यानी आपसे चौथे भाव में।
2027 में मिथुन राशि के लिए काम और धन कैसा है?
शास्त्र के अनुसार 25 जनवरी तक तथा 26 जून से 26 नवंबर तक तीसरे भाव का गुरु काम पर ध्यान माँगता है: अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें। शास्त्र के अनुसार 3 जून तक तथा 20 अक्टूबर से दसवें भाव का शनि कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा पर ध्यान माँगता है: स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें। शास्त्र के अनुसार पूरे साल दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ; काम और धन के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक धन के लिए अनुकूल माना गया है। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि को लाभ के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन शनि अपनी नीच राशि मेष में है, इसलिए 3 जून से 20 अक्टूबर तक इसकी सहायता मंद मानी गई है।
2027 में मिथुन राशि के लिए प्रेम और विवाह का समय कैसा है?
शास्त्र के अनुसार पूरे साल दूसरे भाव का केतु धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है। शास्त्र के अनुसार 26 नवंबर से चौथे भाव का गुरु रिश्तेदारों पर ध्यान माँगता है: धैर्य से संपर्क बनाए रखें। किसी एक व्यक्ति के लिए समय उसकी अपनी कुंडली और दशा से देखा जाता है, जैसा ग्रंथ स्वयं कहते हैं।
2027 मिथुन राशि के विद्यार्थियों के लिए कैसा है?
पूरे साल आपसे पाँचवें या नौवें भाव में कोई धीमा ग्रह नहीं है, इसलिए धीमे ग्रहों से पढ़ाई, संतान और धर्म के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।
2027 के कौन से महीने मिथुन राशि के लिए धैर्य के हैं?
हमारी गिनती में 2027 की हर अवधि में मिथुन राशि के लिए धैर्य माँगने वाले धीमे ग्रह साथ देने वालों से अधिक हैं, इसलिए कोई महीना अलग नहीं दिखता। शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक सहायक माना गया है। योजनाएँ सरल रखें और उन्हें समय दें।
2027 में मिथुन पर साढ़ेसाती या ढैया नहीं है, तो वर्ष किस ग्रह से तय होता है?
2027 में शास्त्र मिथुन राशि के लिए दूसरे भाव के गुरु को 25 जनवरी से 26 जून तक सहायक मानते हैं।
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हमारा राशिफल 2027 कैसे बनता है
हम क्या लागू करते हैं
- 'साल' का कोई शास्त्रीय सूत्र नहीं है: शास्त्र हर ग्रह का गोचर आपकी चंद्र राशि से पढ़ते हैं और कहते हैं कि आपके लिए फल आपकी अपनी कुंडली की दशा और अष्टकवर्ग पर निर्भर है। इसलिए यहाँ साल को धीमे ग्रहों के ठहराव के रूप में, हर ठहराव के शास्त्रीय अर्थ के साथ, कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) में दिखाया गया है।
- साल चार धीमे ग्रहों, गुरु, शनि, राहु और केतु, से पढ़ा गया है, आपकी चंद्र राशि से उनके भाव के अनुसार, और उन्हीं नियमों से जो हमारे दैनिक राशिफल में हैं: अनुकूल भाव, वेध, स्वराशि या उच्च राशि, नीच या अमित्र राशि, और अस्त।
- एक अवधि किसी धीमे ग्रह के राशि परिवर्तन, या गुरु या शनि के अस्त-उदय, से अगले बदलाव तक चलती है। अवधि के भीतर वेध में केवल गुरु और शनि गिने गए हैं; तेज़ ग्रहों का वेध कुछ दिनों या हफ़्तों का होता है, इसलिए वह महीने के कार्ड में अपनी तारीख़ों के साथ दिया गया है और अवधि को नहीं बदलता। यह पढ़ने का तरीका हमारी अपनी पद्धति है।
- हर अवधि का लेबल हमारी अपनी पद्धति है, कोई शास्त्रीय अंक नहीं: चार धीमे ग्रहों में सहायक धैर्य माँगने वालों से अधिक हों तो सहायक, कम हों तो धैर्य का समय, बराबर हों तो मिला-जुला। गिनती साथ में दी गई है। पूरे साल का कोई एक लेबल नहीं है।
- जीवन के चार क्षेत्र भावों का हमारा अपना समूह हैं, जिनके अर्थ बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11 में इन्हीं विषयों से जुड़े हैं: काम और धन (दसवाँ, छठा, तीसरा, ग्यारहवाँ, दूसरा, बारहवाँ), प्रेम और परिवार (सातवाँ, चौथा, दूसरा), सेहत (पहला, छठा), और वार्षिक पेज पर पढ़ाई, संतान और धर्म (पाँचवाँ, नौवाँ)।
- जब गुरु या शनि आगे चलते हुए किसी राशि में प्रवेश करें और उस समय सूर्य आपसे तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव में हों, और वहाँ स्वयं सहायक गिने जाएँ (अपनी नीच या किसी अमित्र राशि में न हों), तो अलग पंक्ति बताती है कि प्रवेश के क्षण सूर्य का बल उस ठहराव में साथ देता है (मुहूर्त चिंतामणि 3.19; ज्योतिर्निबंध पृ. 52)। दोनों ग्रंथों में केवल यही पक्ष है, इसलिए केवल यही दिखाया गया है, और इससे कोई लेबल नहीं बदलता। वक्री रहते हुए किए गए प्रवेश छोड़े गए हैं: कोई ग्रंथ नहीं बताता कि वे गिने जाएँ या नहीं।
- हर संक्रांति पर आपकी चंद्र राशि से चंद्रमा का स्थान उसी क्षण के चंद्रबल के रूप में पढ़ा गया है, सूर्योदय पर नहीं (मुहूर्त चिंतामणि 3.19; नारद संहिता 11.26)। जब संक्रांति के 30 मिनट के भीतर चंद्रमा राशि बदले, तो यह पंक्ति नहीं दी जाती।
- आपसे तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव का ग्रहण शास्त्र में छह महीने तक अनुकूल माना गया है; बाकी भावों में यह ध्यान माँगता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.6; दैवज्ञ-मनोहर)। ग्रंथ यह नहीं बताते कि आपके स्थान से न दिखने वाला ग्रहण गिना जाए या नहीं; परंपरा केवल दिखने वाले, उपच्छाया से अलग ग्रहण को मानती है, इसलिए भाव का फल केवल उन्हीं के लिए दिया गया है। यह हमारा अर्थ है।
- अस्त के लिए पंचांग की दूरी ली गई है (सूर्य से गुरु 11 अंश, शनि 15 अंश)। जो पंचांग गुरु या शनि का अस्त सुबह-शाम दिखना बंद होने से छापते हैं, उनकी तारीख़ें कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- ग्रहण के समय सेकंड तक निकाले गए हैं और मिनट तक घटाकर छापे गए हैं; मध्य क्षण मिनटों के बीच से निकाला गया है, केवल पूरे मिनटों पर नहीं। सूतक पहले स्पर्श के साथ चलता है।
- वक्री या मार्गी होने का क्षण वह है जब तारों के सापेक्ष ग्रह की गति शून्य हो। मंगल, गुरु और शनि के लिए केवल तारीख़ दी गई है, क्योंकि मिनट परिभाषा पर निर्भर करता है।
- हर भाव आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है; राशिचक्र निरयण (लाहिड़ी अयनांश) है और ग्रह-स्थिति नासा जेपीएल DE440 से है। राहु-केतु स्पष्ट (वास्तविक) गति से लिए गए हैं, जैसा हमारी कुंडली में है, और कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना की तारीख़ साथ में दी गई है।
- किस भाव में गोचर अनुकूल है, यह फलदीपिका 26.2, बृहत्संहिता 104.4 और मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 से लिया गया है, जो आपस में सहमत हैं; हर भाव का फल वहीं लिखा गया है जहाँ फलदीपिका और बृहत्संहिता एक बात कहती हैं।
- वेध आपकी चंद्र राशि से गिना गया है (नारद), और सूर्य-शनि तथा चंद्र-बुध के बीच वेध नहीं होता।
- अनुकूल भाव में राहु-केतु को भी सात में से कोई ग्रह इसी तरह वेध से रोकता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.1; कालप्रकाशिका 36.18)।
- वाम वेध धैर्य माँगने वाली स्थिति को तब सहायक गिनता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8); यह भी आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, और चंद्राष्टम को नहीं बदलता।
- अनुकूल भाव में नीच या अमित्र राशि के ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; बृहत्संहिता 104.53)।
- अनुकूल भाव में सूर्य के निकट (अस्त) ग्रह की सहायता मंद मानी गई है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
- धैर्य माँगने वाले भाव में स्वराशि या उच्च राशि का ग्रह प्रतिकूल फल नहीं देता (फलदीपिका 26.31; कालप्रकाशिका 36.12)।
- जहाँ स्वराशि या उच्च राशि और अस्त दोनों हों, वहाँ कोई ग्रंथ एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखता, इसलिए उसे दोनों तथ्यों के साथ मिला-जुला दिखाया गया है।
- दसवें भाव के राहु या केतु को धैर्य का समय माना गया है, जैसा पाँच ग्रंथ मानते हैं (मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका, शार्ङ्गधर, ज्योतिःप्रकाश और श्रीपति); फलदीपिका इसे अनुकूल मानती है, इसलिए साथ में 'ग्रंथों में मतभेद' लिखा गया है।
- वक्री होना केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है। गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं हैं, इसलिए वक्री ग्रह को उसी राशि से पढ़ा गया है जिसमें वह है।
क्या छोड़ा गया और क्यों
- कुछ ग्रंथ कहते हैं कि धीमे ग्रह की अगली राशि का असर प्रवेश से महीनों पहले शुरू हो जाता है। वे यह नहीं बताते कि ग्रह के वापस मुड़ने पर यह कैसे गिना जाए, इसलिए यह नहीं लिया गया।
- गुरु और शनि का 'दोहरा गोचर' जन्म कुंडली की एक आधुनिक पद्धति है, जो पढ़े गए गोचर अध्यायों में नहीं मिलती, इसलिए नहीं ली गई।
- गुरु की अतिचारी चाल मुहूर्त का विषय है, गोचर फल का नहीं, इसलिए नहीं ली गई।
- कोई गोचर ग्रंथ राशि में ग्रह के अंश से फल नहीं बदलता, इसलिए अंश नहीं लिए गए।
- वर्ष के राजा और मंत्री, और संवत्सर का उत्तर भारतीय नाम, आपकी राशि के बारे में नहीं बल्कि देश-काल के बारे में हैं, और किसी दूसरे स्रोत से पुष्ट नहीं हैं, इसलिए छोड़े गए हैं।
- केवल उपच्छाया वाला चंद्र ग्रहण खगोलीय तथ्य के रूप में दिया गया है, पर ग्रहण के रूप में नहीं गिना गया।
जाँच पूरी होने तक रोका गया
- यहाँ राहु-केतु की उच्च या स्वराशि नहीं ली गई, क्योंकि इन पर ग्रंथों में मतभेद है।
- कक्ष्या का समय फलदीपिका 23.16–19 में दूसरे मत के रूप में दिया गया है और बाकी ग्रंथों में नहीं मिलता, इसलिए नहीं लिया गया।
- शनि का 'पाया' (सोना, चाँदी, ताँबा या लोहा) नहीं दिखाया गया: मुख्य ग्रंथों में इसका श्लोक नहीं मिला, और प्रचलित नियम आपस में अलग हैं।
- शास्त्र कहते हैं कि अनुकूल स्थिति को 'अन्य ग्रह' वेध से रोकते हैं, पर यह नहीं बताते कि राहु-केतु इनमें गिने जाएँ या नहीं; इसलिए हम वेध में केवल सात दृश्य ग्रह गिनते हैं।
- राहु-केतु पर वाम वेध लागू नहीं किया गया: केवल एक ग्रंथ ऐसा पढ़ता है, इसलिए धैर्य माँगने वाले भाव में राहु-केतु को वैसे ही गिना गया है।
इस पेज के शब्द
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- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- सहायता मंद
- अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- चंद्राष्टम: सहज रहें
- चंद्रमा आपकी राशि से आठवीं राशि में; परंपरा में योजनाएँ सरल रखने और बड़े नए निर्णय धीरे लेने का समय।
- धैर्य का समय
- उस अवधि का हमारा लेबल, जिसमें चारों धीमे ग्रहों में से धैर्य माँगने वाले सहायक ग्रहों से अधिक हों: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- साढ़ेसाती
- आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का भ्रमण; नाम बाद की परंपरा का है, भाव फलदीपिका 26.22–23 में हैं।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- अस्त
- ग्रह सूर्य के इतना निकट है कि उसकी चमक में छिप जाता है; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद मानी जाती है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- ग्रंथों में मतभेद
- शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
- दशा
- विंशोत्तरी पद्धति से आपके जीवन में चल रही ग्रह की अवधि।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- स्वराशि
- वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- अमित्र राशि
- ऐसी राशि जिसके स्वामी से ग्रह का नैसर्गिक विरोध है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- संक्रांति पर चंद्रमा
- संक्रांति के क्षण आपकी चंद्र राशि से चंद्रमा का भाव, जिसे सौर मास के चंद्रबल के रूप में पढ़ा जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 3.19)।
- प्रवेश के समय सूर्य
- गुरु या शनि के राशि-प्रवेश के समय आपकी चंद्र राशि से सूर्य का भाव; तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव में, और वहाँ स्वयं सहायक हों तो, यह उस ठहराव में साथ देता है (मुहूर्त चिंतामणि 3.19)।
- भाव से ग्रहण
- आपकी चंद्र राशि से तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव का ग्रहण शास्त्र में छह महीने तक अनुकूल माना गया है (मुहूर्त चिंतामणि 4.6)।
- पढ़ाई, संतान और धर्म
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पाँचवें और नौवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ संतान, विद्या, भाग्य और धर्म से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
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राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
वार्षिक राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों के लिए धीमे ग्रहों को पढ़ता है। आपकी जन्मपत्रिका साल को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
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