दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि
बुधवार, 16 सितंबर 2026 का मिथुन राशिफल — Mithun Rashifal
बुधवार, 16 सितंबर 2026
मिथुन राशि के तारे, 16 सितंबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा वृश्चिक में है, इस मानचित्र से बाहर; 2 अक्टूबर, सुबह 6:11 बजे यह फिर मिथुन में आएगा और 4 अक्टूबर, सुबह 9:02 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: मंगल मिथुन में।
मिथुन को पहला भाव मानकर: 16 सितंबर को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव मिथुन से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का मिथुन का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
मिथुन, 16 सितंबर को: रात 1:19 बजे से चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक भाव है, पर नीच राशि में होने से इसकी सहायता मंद है।
Columbus · America/New_York · ·
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
मिथुन के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- मृगशिरा 53°20′ से 66°40′ योगतारा: Meissa (λ Orionis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- आर्द्रा 66°40′ से 80°00′ योगतारा: Betelgeuse (α Orionis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
- पुनर्वसु 80°00′ से 93°20′ योगतारा: Pollux (β Geminorum)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- पुष्य 93°20′ से 106°40′ योगतारा: Asellus Australis (δ Cancri) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि · बुधवार, 16 सितंबर 2026
16 सितंबर का मिथुन राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
मिथुन राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। मिथुन बारह राशियों में तीसरी राशि है, निरयण राशिचक्र में 60° से 90° तक, और इसके स्वामी बुध हैं; इसमें मृगशिरा के चरण 3 और 4, आर्द्रा के चारों चरण और पुनर्वसु के चरण 1 से 3 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Gemini कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, मिथुन से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
मिला-जुला?
बुधवार, 16 सितंबर: रात 1:19 बजे से शुक्रवार 18 सितंबर, दोपहर 1:15 बजे तक चंद्रमा वृश्चिक में है, जो मिथुन से छठी राशि है। शास्त्र में छठे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त), लेकिन चंद्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- चंद्र · मिथुन से छठा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
मिला-जुला। हमारी गिनती में 16 सितंबर को मिथुन के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 4, मिले-जुले 2 और धैर्य माँगने वाले 3; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।
16 सितंबर को रात 1:19 बजे चंद्रमा वृश्चिक राशि में जाते हैं, इसलिए दिन के दोनों हिस्से दिखाए गए हैं।
16 सितंबर को रात 10:23 बजे सूर्य कन्या राशि में जाते हैं, इसलिए दिन के दोनों हिस्से दिखाए गए हैं।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
शास्त्र में तीसरे भाव के सूर्य को प्रतिष्ठा, धन और प्रतिस्पर्धा में बढ़त के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दसवें भाव का शनि कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा पर ध्यान माँगता है: स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- सूर्य · मिथुन से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- शनि · मिथुन से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- प्रेम और परिवार?
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि चौथे भाव के बुध को परिवार में बढ़ोतरी के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन आपसे तीसरे भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए 16 सितंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- गुरु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- बुध · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- ग्रंथों में मतभेद: अधिकतर में अनुकूल, फलदीपिका 26.34 में नहीं फलदीपिका 26.34
- वेध: सूर्य, तीसरा भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- सेहत?
शास्त्र में छठे भाव के चंद्रमा को अच्छी सेहत के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन चंद्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है, जबकि पहले भाव का मंगल ऊर्जा पर ध्यान माँगता है: अपनी गति संतुलित रखें और दिनचर्या नियमित रखें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- चंद्र · मिथुन से छठा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- मंगल · मिथुन से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
मिथुन के लिए 16 सितंबर को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
रविवार 13 सितंबर, दोपहर 3:57 बजे से रात 1:19 बजे तक: चंद्रमा तुला में, आपसे पाँचवें भाव में; धैर्य का समय।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
रात 1:19 बजे से शुक्रवार 18 सितंबर, दोपहर 1:15 बजे तक: चंद्रमा वृश्चिक में, आपसे छठे भाव में; सहायक।
रात 1:19 बजे तक: चंद्रमा तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, शुक्ल पक्ष में; शास्त्र में शुक्ल पक्ष का चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना गया है।
- शुक्ल पक्ष का चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 13.2
रात 1:19 बजे तक चंद्रमा तुला में शुक्र के साथ है।
मिथुन के लिए अगला चंद्राष्टम: सोमवार 21 सितंबर, रात 1:45 बजे से 23 सितंबर, दोपहर 12:27 बजे तक।
मिथुन राशि के नक्षत्रों का ताराबल
मृगशिरा (चरण 3–4): सुबह 7:53 बजे तक विपत तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
मृगशिरा (चरण 3–4): सुबह 7:53 बजे से क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।
आर्द्रा (चरण 1–4): सुबह 7:53 बजे तक संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।
आर्द्रा (चरण 1–4): सुबह 7:53 बजे से विपत तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
पुनर्वसु (चरण 1–3): सुबह 7:53 बजे तक जन्म तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
पुनर्वसु (चरण 1–3): सुबह 7:53 बजे से संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।
Columbus में आपके सहायक समय
पंचांग के 8 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
रात 12:00 बजे से रात 12:18 बजे तक: अमृत काल और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
रात 1:04 बजे से रात 2:54 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 5:42 बजे से सुबह 6:28 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 7:14 बजे से सुबह 8:47 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 3:31 बजे से शाम 4:20 बजे तक: विजय मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
शाम 6:06 बजे से शाम 7:39 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
रात 9:06 बजे से गुरुवार 17 सितंबर, रात 12:00 बजे तक: अमृत काल और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
Columbus में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 12:00 बजे से रात 12:18 बजे तक · रात 1:04 बजे से रात 2:54 बजे तक · सुबह 5:42 बजे से सुबह 6:28 बजे तक · सुबह 7:14 बजे से सुबह 8:47 बजे तक · सुबह 11:53 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक · दोपहर 3:31 बजे से शाम 4:20 बजे तक · शाम 6:06 बजे से शाम 7:39 बजे तक · रात 9:06 बजे से गुरुवार 17 सितंबर, रात 12:00 बजे तक
इस पेज का हर समय America/New_York में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय Columbus के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि
मिथुन राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
मिथुन के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 2 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में है। अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2036 तक है।
मिथुन की अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 27 अगस्त 2036 को पूरी होती है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: मिथुन से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · रात 1:19 बजे से रात 10:23 बजे तक
-
शास्त्र में तीसरे भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त)।
- सूर्य · मिथुन से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- स्वराशि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
-
शास्त्र में छठे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त), लेकिन चंद्रमा अपनी नीच राशि वृश्चिक में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- चंद्र · मिथुन से छठा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
-
शास्त्र के अनुसार पहले भाव का मंगल धैर्य माँगता है (ऊर्जा पर दबाव): अपनी गति संतुलित रखें और दिनचर्या नियमित रखें।
- मंगल · मिथुन से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
-
शास्त्र में चौथे भाव के बुध को सहायक माना गया है (लाभ और परिवार में बढ़ोतरी), लेकिन आपसे तीसरे भाव में सूर्य होने से वेध बनता है, इसलिए 16 सितंबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- बुध · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- ग्रंथों में मतभेद: अधिकतर में अनुकूल, फलदीपिका 26.34 में नहीं फलदीपिका 26.34
- वेध: सूर्य, तीसरा भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
-
शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।
- गुरु · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
-
शास्त्र में पाँचवें भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (संतान और प्रसन्नता)।
- शुक्र · मिथुन से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- स्वराशि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
- वक्री होंगे: 3 अक्टूबर, रात 3:13 बजे
-
शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।
- शनि · मिथुन से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (26 जुलाई से 10 दिसंबर तक)
-
शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (मन का भारीपन): मन को आराम दें।
- राहु · मिथुन से नौवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
-
शास्त्र में तीसरे भाव के केतु को सहायक माना गया है (प्रसन्नता)।
- केतु · मिथुन से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
दिन का दूसरा हिस्सा: रात 1:19 बजे तक
-
शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का चंद्रमा अपने आप में प्रतिकूल है (काम में धीमी प्रगति), लेकिन आपसे पहले भाव में मंगल होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए इसे सहायक गिना गया है।
- चंद्र · मिथुन से पाँचवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- वाम वेध: मंगल, पहला भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
दिन का दूसरा हिस्सा: रात 10:23 बजे से
-
शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और घर की सुविधाएँ): दिनचर्या नियमित रखें और घर की योजनाएँ सरल रखें।
- सूर्य · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
शास्त्र में चौथे भाव के बुध को सहायक माना गया है (लाभ और परिवार में बढ़ोतरी)।
- बुध · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- ग्रंथों में मतभेद: अधिकतर में अनुकूल, फलदीपिका 26.34 में नहीं फलदीपिका 26.34
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
मिथुन के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 2, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 2।
दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में मिथुन राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
आज के बदलाव
16 सितंबर को रात 10:23 बजे: सूर्य कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और घर की सुविधाएँ): दिनचर्या नियमित रखें और घर की योजनाएँ सरल रखें।
- सूर्य · मिथुन से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
शुक्रवार 18 सितंबर, सुबह 7:06 बजे: मंगल कर्क राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (वाणी और धन): वाणी मधुर रखें और खर्च पर नज़र रखें।
- मंगल · मिथुन से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
26 सितंबर, रात 3:09 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का बुध धैर्य माँगता है (घर में खिंचाव): घर में मधुरता से बात करें।
- बुध · मिथुन से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
3 अक्टूबर, रात 3:13 बजे: शुक्र तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, वक्री होते हैं।
13 अक्टूबर, दोपहर 2:51 बजे: शुक्र तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का मिथुन राशिफल, 17 सितंबर
कल (गुरुवार, 17 सितंबर): पूरे दिन चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक भाव है, पर नीच राशि में होने से इसकी सहायता मंद है।
17 सितंबर का पूरा राशिफल देखेंदैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि
मिथुन राशि के बारे में: स्वामी बुध, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- बुधबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- गदा और वीणा लिए स्त्री-पुरुष का जोड़ाबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- द्विस्वभावबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- पश्चिमबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- रात में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- भुजाएँ और छाती का ऊपरी भाग (ग्रंथ इनमें से कोई एक बताते हैं)बृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 60° से 90°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- मृगशिरा 3–4; आर्द्रा 1–4; पुनर्वसु 1–3बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- का की कू घ ङ छ के को हाअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- मिथुन में कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
- उदय: बृहज्जातक 1.10, सारावली 3.24 और जातक पारिजात 1.14 मिथुन को शीर्षोदय कहते हैं; फलदीपिका 1.8 इसे दोनों ओर से उदय होने वाली मानती है।
- कालपुरुष का अंग: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4 और सारावली 3.5 भुजाएँ बताते हैं; बृहज्जातक 1.4 और फलदीपिका 1.4 छाती बताते हैं।
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
मिथुन राशि से जुड़े सवाल
मिथुन राशि का स्वामी कौन है?
मिथुन के स्वामी बुध 16 सितंबर को कन्या में है, मिथुन से चौथे भाव में, 26 सितंबर, रात 3:09 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में मिथुन के स्वामी बुध हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। बुध कन्या के भी स्वामी हैं।
मिथुन राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
16 सितंबर को चंद्रमा वृश्चिक में है; 2 अक्टूबर, सुबह 6:11 बजे यह फिर मिथुन में आएगा और 4 अक्टूबर, सुबह 9:02 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि मिथुन होती है। मिथुन के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: का, की (मृगशिरा 3–4); कू, घ, ङ, छ (आर्द्रा 1–4); के, को, हा (पुनर्वसु 1–3)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मिथुन है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
मिथुन राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
16 सितंबर को चंद्रमा अनुराधा में है; 2 अक्टूबर, सुबह 6:11 बजे यह मिथुन के पहले चरण, मृगशिरा चरण 3, में पहुँचेगा। मिथुन निरयण राशिचक्र में 60° से 90° तक है: मृगशिरा के चरण 3 और 4, आर्द्रा के चारों चरण और पुनर्वसु के चरण 1 से 3, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि मिथुन है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
मिथुन राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें तीक्ष्ण बुद्धि और विनोदी स्वभाव वाला, मधुर और स्पष्ट वाणी वाला, और संगीत तथा कलाओं का प्रेमी बताया गया है; ग्रंथ उन्हें उठी हुई नाक वाला भी बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.3, सारावली 23.16 और होरासार 29.3 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, मिथुन और इसके स्वामी बुध, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
मिथुन राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
मिथुन पर 16 सितंबर को न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, मिथुन से दसवें भाव में। मिथुन की अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 27 अगस्त 2036 को पूरी होती है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 16 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
मिथुन राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, मिथुन से तीसरे भाव में; 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, मिथुन से आठवें और दूसरे भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे शनि मेष में जाते हैं, मिथुन से ग्यारहवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव मिथुन की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
मिथुन राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
16 सितंबर को सुबह 11:51 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में कन्या 23°48′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में सिंह 29°34′ में। अंग्रेज़ी में मिथुन को Gemini कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Gemini है, उसकी राशि मिथुन हो, यह ज़रूरी नहीं।
दैनिक राशिफल
बाकी 11 राशियों का राशिफल
- मेष राशिफल
- वृषभ राशिफल
- कर्क राशिफल
- सिंह राशिफल
- कन्या राशिफल
- तुला राशिफल
- वृश्चिक राशिफल
- धनु राशिफल
- मकर राशिफल
- कुंभ राशिफल
- मीन राशिफल
इस पेज के शब्द
33
- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- सहायक (वाम वेध)
- धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जिसे जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से (वाम वेध) सहायक गिना गया है।
- वेध से रुका
- अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
- सहायता मंद
- अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- मिला-जुला
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा वेध से रुका, मंद या नरम हो, या उसकी राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- शुक्ल पक्ष
- अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- ग्रंथों में मतभेद
- शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- स्वराशि
- वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
OfficialAstrology™
राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
मेरी जन्मपत्रिका पाएँ