दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
रविवार, 19 जुलाई 2026 का सिंह राशिफल — Singh Rashifal
रविवार, 19 जुलाई 2026
सिंह राशि के तारे, 19 जुलाई के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा कन्या में है, इस मानचित्र से बाहर; 12 अगस्त, रात 8:37 बजे यह फिर सिंह राशि में आएगा और 15 अगस्त, रात 12:05 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: शुक्र सिंह में और केतु सिंह में।
सिंह राशि को पहला भाव मानकर: 19 जुलाई को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव सिंह राशि से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का सिंह राशि का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
सिंह राशि, 19 जुलाई को: पूरे दिन चंद्रमा आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में है (ध्यान: भाव अनुकूल नहीं); 9 ग्रहों में से 0 ग्रह साथ, 9 ध्यान माँगते हैं।
Columbus · America/New_York · ·
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
सिंह राशि के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- आश्लेषा 106°40′ से 120°00′ योगतारा: Acubens (α Cancri) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: कैलेंडर सुधार समिति 1955 और कोलब्रुक 1807। बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989 में यह ε Hydrae है। स्रोत दो-दो में बँटे हैं; सूर्य सिद्धांत की बताई स्थिति के निकट का तारा लिया गया है।
- मघा 120°00′ से 133°20′ योगतारा: Regulus (α Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- पूर्वा फाल्गुनी 133°20′ से 146°40′ योगतारा: Zosma (δ Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- उत्तरा फाल्गुनी 146°40′ से 160°00′ योगतारा: Denebola (β Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि · रविवार, 19 जुलाई 2026
19 जुलाई का सिंह राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
सिंह राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। सिंह बारह राशियों में पाँचवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 120° से 150° तक, और इसके स्वामी सूर्य हैं; इसमें मघा के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा फाल्गुनी का चरण 1 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Leo कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, सिंह राशि से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
9 ग्रहों में से 0 साथ · 9 ध्यान
19 जुलाई को सिंह राशि के लिए 9 ग्रहों में से 0 ग्रह साथ, 9 ध्यान माँगते हैं। चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, सोमवार 20 जुलाई, रात 10:25 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, सोमवार 20 जुलाई, रात 10:25 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन के मामले।
- चंद्र · सिंह राशि से दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
सूर्य कर्क में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 16 अगस्त, रात 10:29 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
- सूर्य · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
मंगल वृषभ में, आपसे दसवें भाव (करियर और कर्म) में, 2 अगस्त, दोपहर 1:21 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
- मंगल · सिंह राशि से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- दसवाँ भाव: करियर और कर्म बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
बुध मिथुन में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 5 अगस्त, सुबह 10:24 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे बारहवें भाव में सूर्य और गुरु होने से वेध बनता है, और बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: उन्नति, लाभ और मित्र।
- बुध · सिंह राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वेध: सूर्य और गुरु, बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
गुरु कर्क में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में चंद्रमा होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; शास्त्रीय फल: मन की उदासी।
- गुरु · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वाम वेध: चंद्र, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शुक्र सिंह में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 31 जुलाई, रात 11:58 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे आठवें भाव में शनि होने से वेध बनता है, और शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: सुख-सुविधाएँ और आनंद।
- शुक्र · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: शनि, आठवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
शनि मीन में, आपसे आठवें भाव (शोध और गुप्त विषय) में, 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: थकान।
- शनि · सिंह राशि से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- आठवाँ भाव: शोध और गुप्त विषय बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
राहु कुंभ में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: आपसी खिंचाव।
- राहु · सिंह राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
केतु सिंह में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: सेहत।
- केतु · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
काम और धन: ध्यान: चंद्रमा, मंगल, बुध, सूर्य और गुरु।
चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, सोमवार 20 जुलाई, रात 10:25 बजे तक: शास्त्र में धन के लिए अनुकूल नहीं।
- चंद्र · सिंह राशि से दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
मंगल वृषभ में, आपसे दसवें भाव (करियर और कर्म) में, 2 अगस्त, दोपहर 1:21 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; काम और धन के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- मंगल · सिंह राशि से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- दसवाँ भाव: करियर और कर्म बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
बुध मिथुन में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 5 अगस्त, सुबह 10:24 बजे तक: शास्त्र में उन्नति और लाभ के लिए अनुकूल, लेकिन आपसे बारहवें भाव में सूर्य और गुरु होने से वेध बनता है, और बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है।
- बुध · सिंह राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वेध: सूर्य और गुरु, बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
सूर्य कर्क में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 16 अगस्त, रात 10:29 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; काम और धन के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- सूर्य · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
गुरु कर्क में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में चंद्रमा होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; काम और धन के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- गुरु · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वाम वेध: चंद्र, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- प्रेम और परिवार?
प्रेम और परिवार: ध्यान: चंद्रमा और राहु।
चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, सोमवार 20 जुलाई, रात 10:25 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- चंद्र · सिंह राशि से दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
राहु कुंभ में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) तक: शास्त्र में रिश्तों के लिए अनुकूल नहीं।
- राहु · सिंह राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- सेहत?
सेहत: ध्यान: शुक्र और केतु।
शुक्र सिंह में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 31 जुलाई, रात 11:58 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे आठवें भाव में शनि होने से वेध बनता है, और शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; सेहत के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- शुक्र · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: शनि, आठवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
केतु सिंह में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) तक: शास्त्र में सेहत के लिए अनुकूल नहीं।
- केतु · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
सिंह के लिए 19 जुलाई को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
पूरे दिन (सोमवार 20 जुलाई, रात 10:25 बजे तक): चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में; इस भाव से चंद्रबल नहीं।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
पूरे दिन: चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव में, शुक्ल पक्ष में; शास्त्र में शुक्ल पक्ष का चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना गया है।
- शुक्ल पक्ष का चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 13.2
सिंह राशि के लिए अगला चंद्राष्टम: 2 अगस्त, सुबह 5:57 बजे से 4 अगस्त, दोपहर 12:24 बजे तक।
सिंह राशि के नक्षत्रों का ताराबल
मघा (चरण 1–4): सुबह 8:42 बजे तक विपत तारा: नए काम के लिए नहीं ली जाती (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–13)।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
मघा (चरण 1–4): सुबह 8:42 बजे से क्षेम तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
पूर्वा फाल्गुनी (चरण 1–4): सुबह 8:42 बजे तक संपत तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
पूर्वा फाल्गुनी (चरण 1–4): सुबह 8:42 बजे से विपत तारा: नए काम के लिए नहीं ली जाती (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–13)।
उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1): सुबह 8:42 बजे तक जन्म तारा: नए काम के लिए नहीं ली जाती (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–13)।
उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1): सुबह 8:42 बजे से संपत तारा: नए काम के लिए अनुकूल गिनी गई (मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12)।
Columbus में आपके सहायक समय
पंचांग के 6 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
रात 12:00 बजे से रात 3:03 बजे तक: अमृत काल और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 5:04 बजे से सुबह 5:42 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 9:59 बजे से सुबह 11:48 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 1:09 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक: अभिजित मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 3:28 बजे से शाम 5:18 बजे तक: विजय मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
रात 8:57 बजे से रात 11:18 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
Columbus में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 12:00 बजे से रात 3:03 बजे तक · सुबह 5:04 बजे से सुबह 5:42 बजे तक · सुबह 9:59 बजे से सुबह 11:48 बजे तक · दोपहर 1:09 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक · दोपहर 3:28 बजे से शाम 5:18 बजे तक · रात 8:57 बजे से रात 11:18 बजे तक
इस पेज का हर समय America/New_York में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय Columbus के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
सिंह राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
साढ़ेसाती चंद्र राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि का गोचर है, लगभग साढ़े सात वर्ष। ढैया चंद्र राशि से चौथी या आठवीं राशि में शनि का गोचर है, लगभग ढाई वर्ष।
सिंह के लिए शनि की ढैया (आठवाँ भाव): शनि मीन में, यानी आपसे आठवें भाव में, 29 मार्च 2025 से 2 जून 2027 तक हैं। पूरी ढैया 29 मार्च 2025 से 23 फ़रवरी 2028 तक है, बीच में 2 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम के साथ। परंपरा में यह समय निरंतर प्रयास, अनुशासन और सेहत की देखभाल का फल देता है।
- ढैया फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
इस ठहराव में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव मीन के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 1 जुलाई 2026 से 20 अगस्त 2026 तक और 10 मार्च 2027 से 2 जून 2027 तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
शनि नौ ग्रहों में से एक है: आपसे आठवें भाव के शनि का फल और बाकी आठ ग्रह नीचे की तालिका में हैं।
सिंह राशि की अगली साढ़ेसाती 12 जुलाई 2034 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 25 सितंबर 2041 को पूरी होती है, बीच में 27 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: सिंह राशि से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन
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सूर्य कर्क में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 16 अगस्त, रात 10:29 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
- सूर्य · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में, सोमवार 20 जुलाई, रात 10:25 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन के मामले।
- चंद्र · सिंह राशि से दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- दूसरा भाव: परिवार, धन और वाणी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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मंगल वृषभ में, आपसे दसवें भाव (करियर और कर्म) में, 2 अगस्त, दोपहर 1:21 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं।
- मंगल · सिंह राशि से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- दसवाँ भाव: करियर और कर्म बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
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बुध मिथुन में, आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में, 5 अगस्त, सुबह 10:24 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे बारहवें भाव में सूर्य और गुरु होने से वेध बनता है, और बुध सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: उन्नति, लाभ और मित्र।
- बुध · सिंह राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वेध: सूर्य और गुरु, बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
- ग्यारहवाँ भाव: लाभ और मित्र बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- वक्री (29 जून, दोपहर 1:35 बजे से गुरुवार 23 जुलाई, शाम 6:59 बजे तक)
- मार्गी होंगे: गुरुवार 23 जुलाई, शाम 6:59 बजे
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गुरु? कर्क · बारहवाँ भाव ध्यान: भाव अनुकूल नहीं; वाम वेध: आपसे दूसरे भाव में चंद्रमा; अस्त; कर्क, उच्च राशि?
गुरु कर्क में, आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में, 31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन आपसे दूसरे भाव में चंद्रमा होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; शास्त्रीय फल: मन की उदासी।
- गुरु · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वाम वेध: चंद्र, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- उच्च राशि और अस्त: दोनों तथ्य फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- बारहवाँ भाव: व्यय, विदेश और मोक्ष बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शुक्र सिंह में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 31 जुलाई, रात 11:58 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन आपसे आठवें भाव में शनि होने से वेध बनता है, और शुक्र सिंह में है, जिसके स्वामी सूर्य से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता रुकी हुई है; शास्त्रीय फल: सुख-सुविधाएँ और आनंद।
- शुक्र · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: शनि, आठवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शनि मीन में, आपसे आठवें भाव (शोध और गुप्त विषय) में, 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: थकान।
- शनि · सिंह राशि से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- आठवाँ भाव: शोध और गुप्त विषय बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- वक्री होंगे: 26 जुलाई
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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राहु कुंभ में, आपसे सातवें भाव (विवाह और साझेदारी) में, 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: आपसी खिंचाव।
- राहु · सिंह राशि से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- सातवाँ भाव: विवाह और साझेदारी बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
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केतु सिंह में, आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में, 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) तक: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: सेहत।
- केतु · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- पहला भाव: देह और स्वयं बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
सिंह राशि के लिए 4 धीमे ग्रहों (गुरु, शनि, राहु और केतु) में से 0 साथ, 4 ध्यान माँगते हैं।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में सिंह राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
मंगलवार 21 जुलाई, सुबह 4:38 बजे: बुध मिथुन में, आपसे ग्यारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
गुरुवार 23 जुलाई, शाम 6:59 बजे: बुध मिथुन में, आपसे ग्यारहवें भाव में, मार्गी होते हैं।
26 जुलाई: शनि मीन में, आपसे आठवें भाव में, वक्री होते हैं।
31 जुलाई, रात 11:58 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: धन और परिवार।
- शुक्र · सिंह राशि से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
2 अगस्त, दोपहर 1:21 बजे: मंगल मिथुन राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव (लाभ और मित्र) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव, लेकिन मंगल मिथुन में है, जिसके स्वामी बुध से इसकी नैसर्गिक मित्रता नहीं है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है; शास्त्रीय फल: लाभ, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत।
- मंगल · सिंह राशि से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- अमित्र राशि: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
5 अगस्त, सुबह 10:24 बजे: बुध कर्क राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव (व्यय, विदेश और मोक्ष) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: रुकावटें और सेहत।
- बुध · सिंह राशि से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
9 अगस्त, रात 10:23 बजे: गुरु कर्क में, आपसे बारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
13 अगस्त, दोपहर 3:58 बजे: बुध कर्क में, आपसे बारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
16 अगस्त, रात 10:29 बजे: सूर्य सिंह राशि में, यानी आपसे पहले भाव (देह और स्वयं) में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं, लेकिन सिंह इसकी स्वराशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता; शास्त्रीय फल: थकान, अतिरिक्त खर्च और यात्रा।
- सूर्य · सिंह राशि से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- स्वराशि: नरम फलदीपिका 26.31 · कालप्रकाशिका 36.12
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का सिंह राशिफल, 20 जुलाई
कल (सोमवार, 20 जुलाई): रात 10:25 बजे तक चंद्रमा कन्या में, आपसे दूसरे भाव (परिवार, धन और वाणी) में है: शास्त्र में अनुकूल भाव नहीं; शास्त्रीय फल: धन के मामले।
20 जुलाई का पूरा राशिफल देखेंदैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
सिंह राशि के बारे में: स्वामी सूर्य, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- सूर्यबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- सिंह (शेर)बृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- स्थिरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- पूर्वबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- पेटबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 120° से 150°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- मघा 1–4; पूर्वा फाल्गुनी 1–4; उत्तरा फाल्गुनी 1बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- मा मी मू मे मो टा टी टू टेअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- सिंह सूर्य की मूलत्रिकोण राशि है; इसमें कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
सिंह राशि से जुड़े सवाल
सिंह राशि का स्वामी कौन है?
सिंह राशि के स्वामी सूर्य 19 जुलाई को कर्क में है, सिंह राशि से बारहवें भाव में, 16 अगस्त, रात 10:29 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। सूर्य किसी और राशि के स्वामी नहीं हैं।
सिंह राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
19 जुलाई को चंद्रमा कन्या में है; 12 अगस्त, रात 8:37 बजे यह फिर सिंह राशि में आएगा और 15 अगस्त, रात 12:05 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि सिंह होती है। सिंह राशि के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: मा, मी, मू, मे (मघा 1–4); मो, टा, टी, टू (पूर्वा फाल्गुनी 1–4); टे (उत्तरा फाल्गुनी 1)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि सिंह है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
सिंह राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
19 जुलाई को चंद्रमा हस्त में है; 12 अगस्त, रात 8:37 बजे यह सिंह राशि के पहले चरण, मघा चरण 1, में पहुँचेगा। सिंह निरयण राशिचक्र में 120° से 150° तक है: मघा के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा फाल्गुनी का चरण 1, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि सिंह है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
सिंह राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें साहसी और उदार, अपने विचारों पर दृढ़ और माता के प्रति समर्पित बताया गया है; ग्रंथ उन्हें चौड़े मुख वाला भी बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.5, सारावली 23.30 और होरासार 29.5 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, सिंह और इसके स्वामी सूर्य, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
सिंह राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
सिंह राशि पर 19 जुलाई को शनि की ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) चल रही है: शनि मीन में है, सिंह राशि से आठवें भाव में। यह 29 मार्च 2025 को शुरू हुई और शनि के अंतिम निकास के साथ 23 फ़रवरी 2028 को पूरी होती है, बीच में 2 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। सिंह राशि की अगली साढ़ेसाती 12 जुलाई 2034 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 25 सितंबर 2041 को पूरी होती है, बीच में 27 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
सिंह राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे गुरु स्वयं सिंह राशि में आते हैं; 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, सिंह राशि से छठे और बारहवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे शनि मेष में जाते हैं, सिंह राशि से नौवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव सिंह राशि की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
सिंह राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
19 जुलाई को दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में कर्क 27°00′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में कर्क 2°47′ में। अंग्रेज़ी में सिंह को Leo कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Leo है, उसकी राशि सिंह हो, यह ज़रूरी नहीं।
दैनिक राशिफल
बाकी 11 राशियों का राशिफल
- मेष राशिफल
- वृषभ राशिफल
- मिथुन राशिफल
- कर्क राशिफल
- कन्या राशिफल
- तुला राशिफल
- वृश्चिक राशिफल
- धनु राशिफल
- मकर राशिफल
- कुंभ राशिफल
- मीन राशिफल
इस पेज के शब्द
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- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- ध्यान: दोनों तथ्य
- स्वराशि या उच्च राशि के साथ सूर्य के निकट (अस्त): कोई ग्रंथ एक को दूसरे से ऊपर नहीं रखता, इसलिए दोनों तथ्य दिखाए गए हैं; या अनुकूल चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु (मुहूर्त चिंतामणि 4.7)।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- शुक्ल पक्ष
- अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- शनि की ढैया
- आपकी चंद्र राशि से चौथे या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई वर्ष का ठहराव।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- अस्त
- सूर्य की चमक में छिपा ग्रह; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद (फलदीपिका 26.32)। गुरु और शुक्र: जब तक भारत के संदर्भ अक्षांश 23°11′ उत्तर (भारतीय खगोलीय पंचांग) से न दिखें; मंगल, बुध और शनि ग्रंथों के अंशों से (सूर्य सिद्धांत 9.6–9.8)।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- चंद्रबल के भीतर पंचांग के समय
- अभिजित, अमृत काल, ब्रह्म मुहूर्त, विजय या लाभ, शुभ या अमृत चौघड़िया, जो राहु काल, यमगंड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य और भद्रा से बाहर हों, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी चंद्र राशि से पहले, तीसरे, छठे, सातवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- स्वराशि
- वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- अमित्र राशि
- ऐसी राशि जिसके स्वामी से ग्रह का नैसर्गिक विरोध है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- ध्यान माँगने वाली बातें
- बाकी हर ग्रह, उस तथ्य के साथ जो उसे यहाँ रखता है: शास्त्र में अनुकूल न गिना गया भाव, वेध, नीच या अमित्र राशि, अस्त, प्रतिकूल भाव में स्वराशि या उच्च राशि, चंद्रमा का साथ, या चंद्राष्टम।
- भाव का अर्थ
- हर भाव किस विषय का है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11): पहला देह और स्वयं, दूसरा परिवार, धन और वाणी, तीसरा पराक्रम और भाई-बहन, चौथा माता, घर और सुख, पाँचवाँ संतान, विद्या और बुद्धि, छठा स्वास्थ्य, नौकरी और प्रतियोगिता, सातवाँ विवाह और साझेदारी, आठवाँ शोध और गुप्त विषय, नौवाँ भाग्य, धर्म और पिता, दसवाँ करियर और कर्म, ग्यारहवाँ लाभ और मित्र, बारहवाँ व्यय, विदेश और मोक्ष।
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राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
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