दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
रविवार, 20 सितंबर 2026 का सिंह राशिफल — Singh Rashifal
रविवार, 20 सितंबर 2026
सिंह राशि के तारे, 20 सितंबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा धनु में है, इस मानचित्र से बाहर; 6 अक्टूबर, दोपहर 12:48 बजे यह फिर सिंह में आएगा और 8 अक्टूबर, शाम 5:48 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: सूर्य कन्या में और केतु सिंह में।
सिंह को पहला भाव मानकर: 20 सितंबर को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव सिंह से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का सिंह का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
सिंह, 20 सितंबर को: पूरे दिन चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है।
Columbus · America/New_York · ·
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
सिंह के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- आश्लेषा 106°40′ से 120°00′ योगतारा: Acubens (α Cancri) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: कैलेंडर सुधार समिति 1955 और कोलब्रुक 1807। बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989 में यह ε Hydrae है। स्रोत दो-दो में बँटे हैं; सूर्य सिद्धांत की बताई स्थिति के निकट का तारा लिया गया है।
- मघा 120°00′ से 133°20′ योगतारा: Regulus (α Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- पूर्वा फाल्गुनी 133°20′ से 146°40′ योगतारा: Zosma (δ Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- उत्तरा फाल्गुनी 146°40′ से 160°00′ योगतारा: Denebola (β Leonis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि · रविवार, 20 सितंबर 2026
20 सितंबर का सिंह राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
सिंह राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। सिंह बारह राशियों में पाँचवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 120° से 150° तक, और इसके स्वामी सूर्य हैं; इसमें मघा के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा फाल्गुनी का चरण 1 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Leo कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, सिंह से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
धैर्य का समय?
रविवार, 20 सितंबर: पूरे दिन (सोमवार 21 सितंबर, रात 1:45 बजे तक) चंद्रमा धनु में है, जो सिंह से पाँचवीं राशि है। शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (काम में धीमी प्रगति): किसी काम की हामी भरने से पहले उसे दोबारा जाँच लें।
- चंद्र · सिंह से पाँचवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
धैर्य का समय। हमारी गिनती में 20 सितंबर को सिंह के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 3, मिले-जुले 1 और धैर्य माँगने वाले 5; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।
कल से कोई बदलाव नहीं: चंद्रमा शुक्रवार 18 सितंबर, दोपहर 1:15 बजे से धनु में, यानी आपसे पाँचवें भाव में है, और कल या 20 सितंबर को किसी ग्रह की राशि, चाल या अस्त-उदय की स्थिति नहीं बदली।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
शास्त्र में तीसरे भाव के शुक्र को समृद्धि और प्रतिष्ठा के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दूसरे भाव का सूर्य धन पर ध्यान माँगता है: खर्च पर नज़र रखें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- शुक्र · सिंह से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- सूर्य · सिंह से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- प्रेम और परिवार?
शास्त्र के अनुसार सातवें भाव का राहु रिश्तों पर ध्यान माँगता है: मधुरता से बोलें।
- राहु · सिंह से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- सेहत?
शास्त्र के अनुसार पहले भाव का केतु सेहत पर ध्यान माँगता है: दिनचर्या नियमित रखें और भरपूर आराम करें।
- केतु · सिंह से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
सिंह के लिए 20 सितंबर को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
पूरे दिन (सोमवार 21 सितंबर, रात 1:45 बजे तक): चंद्रमा धनु में, आपसे पाँचवें भाव में; धैर्य का समय।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
पूरे दिन: चंद्रमा धनु में, आपसे पाँचवें भाव में, शुक्ल पक्ष में; शास्त्र में शुक्ल पक्ष का चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना गया है।
- शुक्ल पक्ष का चंद्रमा मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 13.2
सिंह के लिए अगला चंद्राष्टम: शुक्रवार 25 सितंबर, रात 8:03 बजे से 28 सितंबर, रात 12:47 बजे तक।
सिंह राशि के नक्षत्रों का ताराबल
मघा (चरण 1–4): शाम 7:05 बजे तक संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
मघा (चरण 1–4): शाम 7:05 बजे से विपत तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
पूर्वा फाल्गुनी (चरण 1–4): शाम 7:05 बजे तक जन्म तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
पूर्वा फाल्गुनी (चरण 1–4): शाम 7:05 बजे से संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।
उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1): शाम 7:05 बजे तक अतिमित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।
उत्तरा फाल्गुनी (चरण 1): शाम 7:05 बजे से जन्म तारा, मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार नए काम के लिए स्वीकार्य (प्रचलित पंचांग सारणी: अच्छी नहीं)।
Columbus में आपके सहायक समय
पंचांग के 6 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
रात 12:00 बजे से रात 1:26 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 5:44 बजे से सुबह 6:31 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 10:21 बजे से सुबह 11:53 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 1:01 बजे से दोपहर 1:25 बजे तक: अभिजित मुहूर्त, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 2:57 बजे से शाम 4:29 बजे तक: अमृत काल, विजय मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
शाम 7:32 बजे से रात 10:29 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
Columbus में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 12:00 बजे से रात 1:26 बजे तक · सुबह 5:44 बजे से सुबह 6:31 बजे तक · सुबह 10:21 बजे से सुबह 11:53 बजे तक · दोपहर 1:01 बजे से दोपहर 1:25 बजे तक · दोपहर 2:57 बजे से शाम 4:29 बजे तक · शाम 7:32 बजे से रात 10:29 बजे तक
इस पेज का हर समय America/New_York में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय Columbus के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
सिंह राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
सिंह के लिए शनि की ढैया (आठवाँ भाव): शनि मीन में, यानी आपसे आठवें भाव में, 29 मार्च 2025 से 2 जून 2027 तक हैं। पूरी ढैया 29 मार्च 2025 से 23 फ़रवरी 2028 तक है, बीच में 2 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक विराम के साथ। परंपरा में यह समय निरंतर प्रयास, अनुशासन और सेहत की देखभाल का फल देता है।
- ढैया फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
इस ठहराव में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव मीन के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 1 जुलाई 2026 से 20 अगस्त 2026 तक और 10 मार्च 2027 से 2 जून 2027 तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
शनि नौ ग्रहों में से एक है: आपसे आठवें भाव के शनि का फल और बाकी आठ ग्रह नीचे की तालिका में हैं।
सिंह की अगली साढ़ेसाती 12 जुलाई 2034 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 25 सितंबर 2041 को पूरी होती है, बीच में 27 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: सिंह से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन
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शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (धन और रोज़मर्रा की सुविधाएँ): खर्च पर नज़र रखें।
- सूर्य · सिंह से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (काम में धीमी प्रगति): किसी काम की हामी भरने से पहले उसे दोबारा जाँच लें।
- चंद्र · सिंह से पाँचवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का मंगल अपने आप में प्रतिकूल है (खर्च और सेहत), लेकिन आपसे तीसरे भाव में शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और मंगल अपनी नीच राशि कर्क में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- मंगल · सिंह से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- वाम वेध: शुक्र, तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र में दूसरे भाव के बुध को सहायक माना गया है (धन)।
- बुध · सिंह से दूसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
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शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का गुरु अपने आप में प्रतिकूल है (मन की उदासी), लेकिन आपसे दूसरे भाव में सूर्य और बुध होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए इसे सहायक गिना गया है।
- गुरु · सिंह से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वाम वेध: सूर्य और बुध, दूसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
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शास्त्र में तीसरे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (समृद्धि और प्रतिष्ठा)।
- शुक्र · सिंह से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- स्वराशि बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
- वक्री होंगे: 3 अक्टूबर, रात 3:13 बजे
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र के अनुसार आठवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (थकान): सहज रहें और अनावश्यक जोखिम से बचें।
- शनि · सिंह से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (26 जुलाई से 10 दिसंबर तक)
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शास्त्र के अनुसार सातवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (आपसी खिंचाव): मधुरता से बोलें।
- राहु · सिंह से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
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शास्त्र के अनुसार पहले भाव का केतु धैर्य माँगता है (सेहत): दिनचर्या नियमित रखें और भरपूर आराम करें।
- केतु · सिंह से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
सिंह के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 1, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 3।
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में सिंह राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
शनिवार 26 सितंबर, रात 3:09 बजे: बुध तुला राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का बुध धैर्य माँगता है (प्रतिस्पर्धा): निष्पक्ष और स्थिर रहें।
- बुध · सिंह से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
3 अक्टूबर, रात 3:13 बजे: शुक्र तुला में, आपसे तीसरे भाव में, वक्री होते हैं।
13 अक्टूबर, दोपहर 2:51 बजे: शुक्र तुला में, आपसे तीसरे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
17 अक्टूबर, सुबह 10:22 बजे: सूर्य तुला राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में तीसरे भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त), लेकिन सूर्य अपनी नीच राशि तुला में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- सूर्य · सिंह से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
दैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का सिंह राशिफल, 21 सितंबर
कल (सोमवार, 21 सितंबर): रात 1:45 बजे से चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक है, पर मंगल और गुरु के वेध से रुका हुआ है।
21 सितंबर का पूरा राशिफल देखेंदैनिक सिंह राशिफल · चंद्र राशि
सिंह राशि के बारे में: स्वामी सूर्य, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- सूर्यबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- सिंह (शेर)बृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- स्थिरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- पूर्वबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- पेटबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 120° से 150°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- मघा 1–4; पूर्वा फाल्गुनी 1–4; उत्तरा फाल्गुनी 1बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- मा मी मू मे मो टा टी टू टेअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- सिंह सूर्य की मूलत्रिकोण राशि है; इसमें कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
सिंह राशि से जुड़े सवाल
सिंह राशि का स्वामी कौन है?
सिंह के स्वामी सूर्य 20 सितंबर को कन्या में है, सिंह से दूसरे भाव में, 17 अक्टूबर, सुबह 10:22 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में सिंह के स्वामी सूर्य हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। सूर्य किसी और राशि के स्वामी नहीं हैं।
सिंह राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
20 सितंबर को चंद्रमा धनु में है; 6 अक्टूबर, दोपहर 12:48 बजे यह फिर सिंह में आएगा और 8 अक्टूबर, शाम 5:48 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि सिंह होती है। सिंह के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: मा, मी, मू, मे (मघा 1–4); मो, टा, टी, टू (पूर्वा फाल्गुनी 1–4); टे (उत्तरा फाल्गुनी 1)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि सिंह है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
सिंह राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
20 सितंबर को चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा में है; 6 अक्टूबर, दोपहर 12:48 बजे यह सिंह के पहले चरण, मघा चरण 1, में पहुँचेगा। सिंह निरयण राशिचक्र में 120° से 150° तक है: मघा के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा फाल्गुनी का चरण 1, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि सिंह है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
सिंह राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें साहसी और उदार, अपने विचारों पर दृढ़ और माता के प्रति समर्पित बताया गया है; ग्रंथ उन्हें चौड़े मुख वाला भी बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.5, सारावली 23.30 और होरासार 29.5 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, सिंह और इसके स्वामी सूर्य, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
सिंह राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
सिंह पर 20 सितंबर को शनि की ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) चल रही है: शनि मीन में है, सिंह से आठवें भाव में। यह 29 मार्च 2025 को शुरू हुई और शनि के अंतिम निकास के साथ 23 फ़रवरी 2028 को पूरी होती है, बीच में 2 जून 2027 से 19 अक्टूबर 2027 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। सिंह की अगली साढ़ेसाती 12 जुलाई 2034 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 25 सितंबर 2041 को पूरी होती है, बीच में 27 जनवरी 2041 से 6 फ़रवरी 2041 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
सिंह राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे गुरु स्वयं सिंह में आते हैं; 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, सिंह से छठे और बारहवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे शनि मेष में जाते हैं, सिंह से नौवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव सिंह की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
सिंह राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
20 सितंबर को दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में कन्या 27°43′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में कन्या 3°29′ में। अंग्रेज़ी में सिंह को Leo कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Leo है, उसकी राशि सिंह हो, यह ज़रूरी नहीं।
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इस पेज के शब्द
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- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- सहायक (वाम वेध)
- धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जिसे जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से (वाम वेध) सहायक गिना गया है।
- सहायता मंद
- अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- धैर्य का समय
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा धैर्य माँगने वाले भाव में या चंद्राष्टम में हो।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- शुक्ल पक्ष
- अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- शनि की ढैया
- आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक) या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई वर्ष का ठहराव।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- स्वराशि
- वह राशि जिसका स्वामी स्वयं वह ग्रह है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
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