वह शहर चुनें जहाँ आप अभी रहते हैं।

दैनिक पंचांग · पौष · विक्रम संवत 2082

Columbus का पंचांग, 2 जनवरी 2026

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 Columbus में शुक्ल चतुर्दशी तिथि सुबह 8:24 तक है, उसके बाद पूर्णिमा; नक्षत्र मृगशिरा सुबह 9:34 तक।

गणना: शहर के केंद्र से

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    शुक्ल चतुर्दशी सुबह 8:24 तक

    फिर पूर्णिमा सुबह 5:03, 3 जनवरी तक

    फिर कृष्ण प्रतिपदा

    शुक्ल पक्ष की 14वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    शुक्रवार

    शुक्रवार, शुक्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    मृगशिरा सुबह 9:34 तक

    फिर आर्द्रा सुबह 6:58, 3 जनवरी तक

    फिर पुनर्वसु

    27 नक्षत्रों में 5वाँ: निरयण राशिचक्र में 53°20′ से 66°40′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    ब्रह्म रात 10:35 तक

    फिर इन्द्र

    27 नित्य योगों में 25वाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    वणिज सुबह 8:24 तक

    फिर विष्टि शाम 6:42 तक

    फिर बव सुबह 5:03, 3 जनवरी तक

    फिर बालव

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: शुक्ल

उदया तिथि: शुक्ल चतुर्दशी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

चुने हुए दिन क्षय तिथि: पूर्णिमा दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाती है, इसलिए किसी दिन का नाम इससे नहीं होता।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: मृगशिरा 4 · सुबह 9:34 · आर्द्रा 1 · दोपहर 2:54 · आर्द्रा 2 · रात 8:14 · आर्द्रा 3 · रात 1:36, 3 जनवरी · आर्द्रा 4 · सुबह 6:58, 3 जनवरी

इस पेज का हर समय Columbus (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 7:54
सूर्यास्त
शाम 5:19
चंद्रोदय
शाम 4:21
चंद्रास्त
चुने हुए दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
9 घंटे 24 मिनट · 23 घटी 32 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 45 सेकंड अधिक
रात्रिमान
14 घंटे 35 मिनट · 36 घटी 29 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:36

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, शाम 4:26 है।

शुक्ल पक्ष, आधे से बड़ा बढ़ता चाँद चंद्रमा का 99% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 13.5 दिन अगली पूर्णिमा: 3 जनवरी 2026 · सुपरमून अगली अमावस्या: 18 जनवरी 2026

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 7:54सुबह 10:54दोपहर 1:54शाम 4:54शाम 7:54रात 10:54रात 1:54सुबह 4:54सुबह 7:54

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 7:54दोपहर 1:00शाम 5:19

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 5:19रात 1:00सुबह 7:54
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:57 – सुबह 6:55भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 6:26 – सुबह 7:54सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:17 – दोपहर 12:55दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।राहु काल के साथ: दोपहर 12:17 – दोपहर 12:36 (19 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:10 – दोपहर 2:48दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 5:19 – शाम 5:48गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।वर्ज्य के साथ: शाम 5:19 – शाम 5:48 (29 मिनट)।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 5:19 – शाम 6:46सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।वर्ज्य के साथ: शाम 5:19 – शाम 6:29 (70 मिनट)।
  • अमृत कालरात 10:03 – रात 11:29हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:07 – रात 1:05, 3 जनवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • रवि योगसुबह 7:54 – सुबह 9:34चंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योगसुबह 6:58 – सुबह 7:54, 3 जनवरीवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • गुलिक कालसुबह 9:04 – सुबह 10:15वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 9:47 – सुबह 10:24वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • राहु कालसुबह 11:26 – दोपहर 12:36वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:17 – दोपहर 12:36 (19 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 12:55 – दोपहर 1:33वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डदोपहर 2:57 – शाम 4:08वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यशाम 5:04 – शाम 6:29हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।गोधूलि मुहूर्त के साथ: शाम 5:19 – शाम 5:48 (29 मिनट)।सायाह्न सन्ध्या के साथ: शाम 5:19 – शाम 6:29 (70 मिनट)।
भद्रा
सुबह 8:24 – शाम 6:42स्वर्ग लोक · सुबह 8:24 – शाम 6:42भद्रा पुच्छ · दोपहर 3:06 – शाम 4:07भद्रा मुख · शाम 4:07 – शाम 5:50भद्रा परिहार · शाम 5:19 – शाम 6:42
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. चरसुबह 7:54 – सुबह 9:04
  2. लाभसुबह 9:04 – सुबह 10:15
  3. अमृतसुबह 10:15 – सुबह 11:26वार वेला
  4. कालसुबह 11:26 – दोपहर 12:36काल वेला
  5. शुभदोपहर 12:36 – दोपहर 1:47
  6. रोगदोपहर 1:47 – दोपहर 2:57
  7. उद्वेगदोपहर 2:57 – शाम 4:08
  8. चरशाम 4:08 – शाम 5:19

चौघड़िया · रात

  1. रोगशाम 5:19 – शाम 7:08
  2. कालशाम 7:08 – रात 8:57
  3. लाभरात 8:57 – रात 10:47काल रात्रि
  4. उद्वेगरात 10:47 – रात 12:36, 3 जनवरी
  5. शुभरात 12:36 – रात 2:26, 3 जनवरी
  6. अमृतरात 2:26 – सुबह 4:15, 3 जनवरी
  7. चरसुबह 4:15 – सुबह 6:05, 3 जनवरी
  8. रोगसुबह 6:05 – सुबह 7:54, 3 जनवरी

होरा

  1. शुक्रसुबह 7:54 – सुबह 8:41
  2. बुधसुबह 8:41 – सुबह 9:28
  3. चंद्रसुबह 9:28 – सुबह 10:15
  4. शनिसुबह 10:15 – सुबह 11:02
  5. गुरुसुबह 11:02 – सुबह 11:49
  6. मंगलसुबह 11:49 – दोपहर 12:36
  7. सूर्यदोपहर 12:36 – दोपहर 1:23
  8. शुक्रदोपहर 1:23 – दोपहर 2:10
  9. बुधदोपहर 2:10 – दोपहर 2:57
  10. चंद्रदोपहर 2:57 – दोपहर 3:44
  11. शनिदोपहर 3:44 – शाम 4:31
  12. गुरुशाम 4:31 – शाम 5:19
  13. मंगलशाम 5:19 – शाम 6:31
  14. सूर्यशाम 6:31 – शाम 7:44
  15. शुक्रशाम 7:44 – रात 8:57
  16. बुधरात 8:57 – रात 10:10
  17. चंद्ररात 10:10 – रात 11:23
  18. शनिरात 11:23 – रात 12:36, 3 जनवरी
  19. गुरुरात 12:36 – रात 1:49, 3 जनवरी
  20. मंगलरात 1:49 – रात 3:02, 3 जनवरी
  21. सूर्यरात 3:02 – सुबह 4:15, 3 जनवरी
  22. शुक्रसुबह 4:15 – सुबह 5:28, 3 जनवरी
  23. बुधसुबह 5:28 – सुबह 6:41, 3 जनवरी
  24. चंद्रसुबह 6:41 – सुबह 7:54, 3 जनवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. सुखम्सुबह 7:54 – सुबह 9:04
  2. सोरम्सुबह 9:04 – सुबह 10:15
  3. उत्तिसुबह 10:15 – सुबह 11:26
  4. विषम्सुबह 11:26 – दोपहर 12:36
  5. अमृतम्दोपहर 12:36 – दोपहर 1:47
  6. रोगम्दोपहर 1:47 – दोपहर 2:57
  7. लाभम्दोपहर 2:57 – शाम 4:08
  8. धनम्शाम 4:08 – शाम 5:19
  1. रोगम्शाम 5:19 – शाम 7:08
  2. लाभम्शाम 7:08 – रात 8:57
  3. धनम्रात 8:57 – रात 10:47
  4. सुखम्रात 10:47 – रात 12:36, 3 जनवरी
  5. सोरम्रात 12:36 – रात 2:26, 3 जनवरी
  6. उत्तिरात 2:26 – सुबह 4:15, 3 जनवरी
  7. विषम्सुबह 4:15 – सुबह 6:05, 3 जनवरी
  8. अमृतम्सुबह 6:05 – सुबह 7:54, 3 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
मिथुन
सूर्य राशि
धनु
सूर्य नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 2
अगली संक्रांति
मकर · 14 जनवरी 2026, सुबह 4:37, 14 जनवरी

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. धनुसुबह 6:43 – सुबह 8:44द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 8:18
  2. मकरसुबह 8:44 – सुबह 10:15चरपुष्कर भाग 14° · सुबह 9:30
  3. कुंभसुबह 10:15 – सुबह 11:29स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 11:03
  4. मीनसुबह 11:29 – दोपहर 12:40द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 11:50
  5. मेषदोपहर 12:40 – दोपहर 2:03चरपुष्कर भाग 21° · दोपहर 1:36
  6. वृषभदोपहर 2:03 – दोपहर 3:52स्थिरपुष्कर भाग 14° · दोपहर 2:50
  7. मिथुनदोपहर 3:52 – शाम 6:10द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · शाम 5:12
  8. कर्कशाम 6:10 – रात 8:41चरपुष्कर भाग 8° · शाम 6:50
  9. सिंहरात 8:41 – रात 11:12स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 10:17
  10. कन्यारात 11:12 – रात 1:42, 3 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 11:57
  11. तुलारात 1:42 – सुबह 4:14, 3 जनवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 3:43, 3 जनवरी
  12. वृश्चिकसुबह 4:14 – सुबह 6:39, 3 जनवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · सुबह 5:09, 3 जनवरी
  13. धनुसुबह 6:39 – सुबह 8:40, 3 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 8:14, 3 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यधनु17°55′पूर्वाषाढ़ा · 2मकर · 14 जनवरी 2026
चंद्रमिथुन5°37′मृगशिरा · 4कर्क · 3 जनवरी 2026
मंगल अस्तधनु19°39′पूर्वाषाढ़ा · 2मकर · 15 जनवरी 2026
बुध अस्तधनु6°47′मूल · 3मकर · 16 जनवरी 2026
गुरु वक्रीमिथुन26°56′पुनर्वसु · 3कर्क · 1 जून 2026
शुक्र अस्तधनु16°55′पूर्वाषाढ़ा · 2मकर · 12 जनवरी 2026
शनिमीन2°02′पूर्वा भाद्रपद · 4मेष · 2 जून 2027
राहुकुंभ16°30′शतभिषा · 3मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह16°30′पूर्वा फाल्गुनी · 1कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
पौष
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
पौष
विक्रम संवत
2082 सिद्धार्थी
शक संवत
1947 विश्वावसु

यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
हेमंत
सूर्य के अनुसार ऋतु
शिशिर
अयनांत के अनुसार अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
दक्षिणायन
सौर मास
पौष, दिन 19
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
12 पौष 1947
कलि संवत
5126
वर्ष का राजा
सूर्य
वर्ष का मंत्री
सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
बुध
दुर्गेश
शनि
धनेश
मंगल
रसेश
शुक्र
धान्येश
चंद्र
नीरसेश
बुध
फलेश
शनि
मेघेश
सूर्य
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°13′13″
जूलियन दिन
2461042.5
गुजराती विक्रम संवत
2082
बृहस्पति संवत्सर
सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

अभी चल रहा है

  • खरमास · 14 जनवरी 2026 तक
  • शुक्र अस्त · 15 फ़रवरी 2026 तक

शुक्र अस्त: Columbus से दृश्यता के अनुसार, मुहूर्त चिंतामणि 5.27 के अतिरिक्त दिनों सहित, 23 नवंबर – 15 फ़रवरी (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 26 नवंबर – 17 फ़रवरी।

ग्रहण

  • कंकणाकृति सूर्य ग्रहण · मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खग्रास चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 3 मार्च 2026 · यहाँ से दिखेगा · सुबह 4:50 – सुबह 8:18, 3 मार्च सूतक: शाम 7:50, 2 मार्च – सुबह 8:18, 3 मार्च। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
पश्चिम
चंद्र वास
पश्चिम सुबह 7:54 – सुबह 7:54, 3 जनवरी
राहु वास
दक्षिण-पूर्व
शिव वास
भोजन में सुबह 7:54 – सुबह 8:24 · श्मशान में सुबह 8:24 – सुबह 5:03, 3 जनवरी · गौरी के साथ सुबह 5:03 – सुबह 7:54, 3 जनवरी
अग्नि वास
आकाश में सुबह 7:54 – सुबह 8:24 · पाताल में सुबह 8:24 – सुबह 5:03, 3 जनवरी · पृथ्वी पर सुबह 5:03 – सुबह 7:54, 3 जनवरी
आनंदादि योग
मानस सुबह 7:54 – सुबह 9:34 · पद्म सुबह 9:34 – सुबह 6:58, 3 जनवरी · लुम्बक सुबह 6:58 – सुबह 7:54, 3 जनवरी
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 7:54 – सुबह 7:54, 3 जनवरी

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:36 – दोपहर 12:55, राहु काल से अलग) और अमृत काल (रात 10:03 – रात 11:29) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:57 – सुबह 6:55) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण प्रतिपदा
नक्षत्र
पुनर्वसु
सूर्योदय
सुबह 7:54
राहु काल
सुबह 10:15 – सुबह 11:26
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 12:18 – दोपहर 12:56
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

OfficialAstrology™

गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

Columbus में शुक्ल चतुर्दशी सुबह 8:24 तक है, फिर पूर्णिमा।

अगले दिन की तिथि क्या है?

Columbus में अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

Columbus में चुने हुए दिन राहु काल सुबह 11:26 – दोपहर 12:36 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में Columbus के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

Columbus में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:57 – सुबह 6:55, प्रातः सन्ध्या सुबह 6:26 – सुबह 7:54, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 – दोपहर 12:55 (दोपहर 12:17 – दोपहर 12:36 राहु काल के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:10 – दोपहर 2:48, गोधूलि मुहूर्त शाम 5:19 – शाम 5:48 (शाम 5:19 – शाम 5:48 वर्ज्य के साथ), सायाह्न सन्ध्या शाम 5:19 – शाम 6:46 (शाम 5:19 – शाम 6:29 वर्ज्य के साथ), अमृत काल रात 10:03 – रात 11:29, निशिता मुहूर्त रात 12:07 – रात 1:05, 3 जनवरी।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

Columbus में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:17 – दोपहर 12:55 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

Columbus में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:57 – सुबह 6:55 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन मृगशिरा नक्षत्र है, सुबह 9:34 तक; फिर आर्द्रा।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 3 जनवरी 2026, अगली अमावस्या 18 जनवरी 2026।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना पौष है (अमांत; पूर्णिमांत में पौष), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

हाँ, भद्रा सुबह 8:24 – शाम 6:42। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शुक्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन मिथुन राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, शुक्रवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:36 – दोपहर 12:55, राहु काल से अलग) और अमृत काल (रात 10:03 – रात 11:29) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:57 – सुबह 6:55) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, यमगण्ड, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

दैनिक पंचांग

आपकी अपनी कुंडली, इसी सटीकता से।

पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक है। आपकी जन्मपत्रिका केवल आपकी है।

मेरी जन्मपत्रिका बनाएँ