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दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि

आज का मिथुन राशिफल — Mithun Rashifal Today

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

मिथुन राशि के तारे, अभी के चंद्रमा और ग्रहों के साथ

वृषभमिथुनकर्कमृगशिराआर्द्रापुनर्वसुक्रांतिवृत्तपूर्वपश्चिममृगशिरा: Meissaआर्द्रा: Betelgeuseपुनर्वसु: PolluxProcyonCastorBellatrixElnathAlhena

सुबह 4:34 बजे चंद्रमा कुंभ में है, इस मानचित्र से बाहर; 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे यह फिर मिथुन में आएगा और 1 नवंबर, रात 12:01 बजे तक रहेगा।

मिथुन को पहला भाव मानकर: अभी नौ ग्रह कहाँ हैं

34मं 19°गु 28°5के 3°67सू 4°बु 26°शु 7°व891011चं 11°रा 3°12श 15°व12

हर भाव मिथुन से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट अभी का मिथुन का गोचर है। सुबह 4:34 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।

मिथुन, आज: पूरे दिन चंद्रमा आपसे नौवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है।

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें

  • चंद्रमा
  • ग्रह
  • राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
  • योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
  • तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
  • क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
  • राशि की सीमा
  • नक्षत्र की सीमा
  • अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं

मिथुन के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है। मानचित्र पर चंद्रमा की जगह हर मिनट नई होती है; तारे अपनी जगह पर रहते हैं।

इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे

  • मृगशिरा 53°20′ से 66°40′ योगतारा: Meissa (λ Orionis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
  • आर्द्रा 66°40′ से 80°00′ योगतारा: Betelgeuse (α Orionis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
  • पुनर्वसु 80°00′ से 93°20′ योगतारा: Pollux (β Geminorum)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
  • पुष्य 93°20′ से 106°40′ योगतारा: Asellus Australis (δ Cancri) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।

तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।

तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।

दैनिक मिथुन राशिफल · चंद्र राशि · गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026

आज का मिथुन राशिफल: काम, प्रेम और सेहत

मिथुन राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। मिथुन बारह राशियों में तीसरी राशि है, निरयण राशिचक्र में 60° से 90° तक, और इसके स्वामी बुध हैं; इसमें मृगशिरा के चरण 3 और 4, आर्द्रा के चारों चरण और पुनर्वसु के चरण 1 से 3 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Gemini कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, मिथुन से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।

धैर्य का समय?

गुरुवार, 22 अक्टूबर: पूरे दिन (शुक्रवार 23 अक्टूबर, दोपहर 3:04 बजे तक) चंद्रमा कुंभ में है, जो मिथुन से नौवीं राशि है। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (मन की थकान और दफ़्तरी काम): दफ़्तरी काम धीरे-धीरे करें और मन को आराम दें।

धैर्य का समय। हमारी गिनती में आज मिथुन के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 3, मिले-जुले 1 और धैर्य माँगने वाले 5; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।

काम, प्रेम और सेहत

काम और धन?

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को धन के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दसवें भाव का शनि कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा पर ध्यान माँगता है: स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।

प्रेम और परिवार?

शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को परिवार में प्रसन्नता के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दूसरे भाव का मंगल घर की बातचीत पर ध्यान माँगता है: वाणी मधुर रखें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।

सेहत?

आज आपसे पहले या छठे भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए सेहत के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

मिथुन के लिए आज चंद्रबल और ताराबल

चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल

पूरे दिन (शुक्रवार 23 अक्टूबर, दोपहर 3:04 बजे तक): चंद्रमा कुंभ में, आपसे नौवें भाव में; धैर्य का समय।

  • चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4

पूरे दिन: चंद्रमा कुंभ में, आपसे नौवें भाव में, शुक्ल पक्ष में; शास्त्र में शुक्ल पक्ष का यह चंद्रमा सहायक है, लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

पूरे दिन चंद्रमा कुंभ में राहु के साथ है।

मिथुन के लिए अगला चंद्राष्टम: 15 नवंबर, रात 3:11 बजे से 17 नवंबर, दोपहर 3:31 बजे तक।

मिथुन राशि के नक्षत्रों का ताराबल

मृगशिरा (चरण 3–4): रात 8:49 बजे तक संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।

मृगशिरा (चरण 3–4): रात 8:49 बजे से विपत तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

आर्द्रा (चरण 1–4): रात 8:49 बजे तक जन्म तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

आर्द्रा (चरण 1–4): रात 8:49 बजे से संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।

पुनर्वसु (चरण 1–3): रात 8:49 बजे तक अतिमित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।

पुनर्वसु (चरण 1–3): रात 8:49 बजे से जन्म तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

नई दिल्ली में आपके सहायक समय

नई शुरुआत के लिए कोई समय नहीं; कारण भीतर दिया गया है

आज पंचांग के समय और आपके चंद्रबल के घंटे आपस में नहीं मिलते, इसलिए कोई समय नहीं दिया गया; पंचांग के समय संदर्भ के लिए दिए गए हैं।

सहायक समय क्या हैं?

नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)

शाम 5:45 बजे से शाम 7:20 बजे तक

व्हाट्सऐप पर भेजें

इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।

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मिथुन राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें

मिथुन के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 3 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे दसवें भाव में है। अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 से 27 अगस्त 2036 तक है।

मिथुन की अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 27 अगस्त 2036 को पूरी होती है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।

चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।

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क्यों: मिथुन से हर ग्रह का भाव

हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन

  1. सूर्य? तुला · पाँचवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (सेहत और आराम): खुद को आराम का समय दें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 16 नवंबर, शाम 7:43 बजे

  2. चंद्र? कुंभ · नौवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (मन की थकान और दफ़्तरी काम): दफ़्तरी काम धीरे-धीरे करें और मन को आराम दें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: शुक्रवार 23 अक्टूबर, दोपहर 3:04 बजे

  3. मंगल? कर्क · दूसरा भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (वाणी और धन): वाणी मधुर रखें और खर्च पर नज़र रखें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 12 नवंबर, रात 8:19 बजे

  4. बुध? तुला · पाँचवाँ भाव सहायक (वाम वेध)?

    शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का बुध अपने आप में प्रतिकूल है (घर में खिंचाव), लेकिन आपसे दूसरे भाव में मंगल और गुरु होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए इसे सहायक गिना गया है।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 2 दिसंबर, शाम 5:28 बजे

  5. गुरु? कर्क · दूसरा भाव सहायक?

    शास्त्र में दूसरे भाव के गुरु को सहायक माना गया है (धन और परिवार में प्रसन्नता)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे

  6. शुक्र? तुला · पाँचवाँ भाव वेध से रुका?

    शास्त्र में पाँचवें भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (संतान और प्रसन्नता), लेकिन आपसे नौवें भाव में चंद्रमा होने से वेध बनता है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए आज इसकी सहायता रुकी हुई है।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 6 नवंबर, रात 1:04 बजे

  7. शनि? मीन · दसवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शनि धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा): स्थिर रहें और अपने काम को बोलने दें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे

  8. राहु? कुंभ · नौवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (मन का भारीपन): मन को आराम दें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

  9. केतु? सिंह · तीसरा भाव सहायक?

    शास्त्र में तीसरे भाव के केतु को सहायक माना गया है (प्रसन्नता)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

मिथुन के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 2, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 2।

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अगले 30 दिनों में मिथुन राशि

अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ

शनिवार 24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, वक्री होते हैं।

29 अक्टूबर, सुबह 9:40 बजे: शुक्र तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

30 अक्टूबर, सुबह 6:04 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी): अतिरिक्त समय रखें और ज़रूरत हो तो दोबारा प्रयास करें।

6 नवंबर, रात 1:04 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में चौथे भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (मित्र और प्रसन्नता), लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

10 नवंबर, दोपहर 3:54 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

12 नवंबर, रात 8:19 बजे: मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे तीसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में तीसरे भाव के मंगल को सहायक माना गया है (सफलता, लाभ और उत्साह)।

13 नवंबर, रात 9:24 बजे: बुध तुला में, आपसे पाँचवें भाव में, मार्गी होते हैं।

14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे: शुक्र कन्या में, आपसे चौथे भाव में, मार्गी होते हैं।

16 नवंबर, शाम 7:43 बजे: सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में छठे भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी)।

मिथुन राशिफल 2027: पूरा साल, महीने दर महीने

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कल का मिथुन राशिफल

कल (शुक्रवार, 23 अक्टूबर): दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा आपसे नौवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है।

कल का पूरा राशिफल देखें

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मिथुन राशि के बारे में: स्वामी बुध, नक्षत्र और नाम अक्षर

स्वामी
बुधबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
चिह्न
गदा और वीणा लिए स्त्री-पुरुष का जोड़ाबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
प्रकृति
द्विस्वभावबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
विषम या सम
विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
दिशा
पश्चिमबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
उदय
शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
बल
रात में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
कालपुरुष का अंग
भुजाएँ और छाती का ऊपरी भाग (ग्रंथ इनमें से कोई एक बताते हैं)बृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
विस्तार (निरयण)
60° से 90°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नक्षत्र चरण
मृगशिरा 3–4; आर्द्रा 1–4; पुनर्वसु 1–3बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नाम अक्षर
का की कू घ ङ छ के को हाअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
मिथुन में कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
  • उदय: बृहज्जातक 1.10, सारावली 3.24 और जातक पारिजात 1.14 मिथुन को शीर्षोदय कहते हैं; फलदीपिका 1.8 इसे दोनों ओर से उदय होने वाली मानती है।
  • कालपुरुष का अंग: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4 और सारावली 3.5 भुजाएँ बताते हैं; बृहज्जातक 1.4 और फलदीपिका 1.4 छाती बताते हैं।

नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।

इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ

  • वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
  • कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद

प्रश्न

मिथुन राशि से जुड़े सवाल

मिथुन राशि का स्वामी कौन है?

मिथुन के स्वामी बुध आज तुला में है, मिथुन से पाँचवें भाव में, 2 दिसंबर, शाम 5:28 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में मिथुन के स्वामी बुध हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। बुध कन्या के भी स्वामी हैं।

मिथुन राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?

आज चंद्रमा कुंभ में है; 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे यह फिर मिथुन में आएगा और 1 नवंबर, रात 12:01 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि मिथुन होती है। मिथुन के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: का, की (मृगशिरा 3–4); कू, घ, ङ, छ (आर्द्रा 1–4); के, को, हा (पुनर्वसु 1–3)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मिथुन है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।

मिथुन राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

आज चंद्रमा शतभिषा में है; 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे यह मिथुन के पहले चरण, मृगशिरा चरण 3, में पहुँचेगा। मिथुन निरयण राशिचक्र में 60° से 90° तक है: मृगशिरा के चरण 3 और 4, आर्द्रा के चारों चरण और पुनर्वसु के चरण 1 से 3, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि मिथुन है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।

मिथुन राशि के लोग कैसे होते हैं?

उन्हें तीक्ष्ण बुद्धि और विनोदी स्वभाव वाला, मधुर और स्पष्ट वाणी वाला, और संगीत तथा कलाओं का प्रेमी बताया गया है; ग्रंथ उन्हें उठी हुई नाक वाला भी बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.3, सारावली 23.16 और होरासार 29.3 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, मिथुन और इसके स्वामी बुध, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।

मिथुन राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?

मिथुन पर आज न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, मिथुन से दसवें भाव में। मिथुन की अगली साढ़ेसाती 8 अगस्त 2029 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 27 अगस्त 2036 को पूरी होती है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।

मिथुन राशि का समय कब बदलेगा?

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, मिथुन से तीसरे भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, मिथुन से आठवें और दूसरे भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, मिथुन से ग्यारहवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव मिथुन की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।

मिथुन राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

आज दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में तुला 28°52′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में तुला 4°38′ में। अंग्रेज़ी में मिथुन को Gemini कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Gemini है, उसकी राशि मिथुन हो, यह ज़रूरी नहीं।

इस पेज के शब्द

33
सूर्य
नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
चंद्र
नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
मंगल
नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
बुध
नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
गुरु
नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
शुक्र
नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
शनि
नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
राहु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
केतु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
सहायक
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
सहायक (वाम वेध)
धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जिसे जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से (वाम वेध) सहायक गिना गया है।
वेध से रुका
अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
धैर्य का समय
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
धैर्य का समय
दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा धैर्य माँगने वाले भाव में या चंद्राष्टम में हो।
गोचर
राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
भाव
आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
वेध
जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
वाम वेध (विपरीत वेध)
धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
चंद्रमा का साथ
चंद्रमा की राशि में बैठे ग्रह; वहाँ सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद मानी जाती है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56)।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
चंद्रबल
आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
ताराबल
आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
मार्गी
वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
अस्त
ग्रह सूर्य के इतना निकट है कि उसकी चमक में छिप जाता है; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद मानी जाती है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
सबसे अधिक प्रभाव
राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
मध्यम राहु-केतु की गणना
राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
सहायक समय
आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
उच्च
वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
नीच
उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
काम और धन
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
प्रेम और परिवार
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
सेहत
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।

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