दैनिक पंचांग · फाल्गुन · विक्रम संवत 2082
Columbus का पंचांग, 9 फ़रवरी 2026
सोमवार, 9 फ़रवरी 2026
सोमवार, 9 फ़रवरी 2026 Columbus में कृष्ण अष्टमी तिथि रात 8:58 तक है, उसके बाद कृष्ण नवमी; नक्षत्र विशाखा रात 9:25 तक।
गणना: शहर के केंद्र से
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।
-
तिथि
कृष्ण अष्टमी रात 8:58 तक
फिर कृष्ण नवमी
कृष्ण पक्ष की 8वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 49% पूरा -
वार
सोमवार
सोमवार, चंद्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
विशाखा रात 9:25 तक
फिर अनुराधा
27 नक्षत्रों में 16वाँ: निरयण राशिचक्र में 200° से 213°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 48% पूरा -
योग
वृद्धि दोपहर 2:22 तक
फिर ध्रुव
27 नित्य योगों में 11वाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 72% पूरा -
करण
बालव सुबह 7:43 तक
फिर कौलव रात 8:58 तक
फिर तैतिल
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 99% पूरा
पक्ष: कृष्ण
उदया तिथि: कृष्ण अष्टमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: विशाखा 2 · सुबह 7:58 · विशाखा 3 · दोपहर 2:41 · विशाखा 4 · रात 9:25 · अनुराधा 1 · सुबह 4:10, 10 फ़रवरी
इस पेज का हर समय Columbus (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 7:32
- सूर्यास्त
- शाम 6:01
- चंद्रोदय
- रात 2:31, 10 फ़रवरी
- चंद्रास्त
- सुबह 11:02
- दिनमान
- 10 घंटे 29 मिनट · 26 घटी 13 पल · पिछले दिन से 2 मिनट 20 सेकंड अधिक
- रात्रिमान
- 13 घंटे 29 मिनट · 33 घटी 45 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 12:46
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 2:36, 10 फ़रवरी है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:44 – सुबह 6:38भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 6:11 – सुबह 7:32सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
- अमृत कालसुबह 11:34 – दोपहर 1:22हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।यमगण्ड के साथ: सुबह 11:34 – दोपहर 12:46 (72 मिनट)।दुर्मुहूर्त के साथ: दोपहर 1:07 – दोपहर 1:22 (15 मिनट)।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:25 – दोपहर 1:07दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।यमगण्ड के साथ: दोपहर 12:25 – दोपहर 12:46 (21 मिनट)।
- विजय मुहूर्तदोपहर 2:31 – दोपहर 3:13दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
- गोधूलि मुहूर्तशाम 6:01 – शाम 6:28गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
- सायाह्न सन्ध्याशाम 6:01 – शाम 7:22सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
- निशिता मुहूर्तरात 12:19 – रात 1:13, 10 फ़रवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- सर्वार्थ सिद्धि योगरात 9:25 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरीवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- राहु कालसुबह 8:51 – सुबह 10:09वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- यमगण्डसुबह 11:28 – दोपहर 12:46वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: सुबह 11:34 – दोपहर 12:46 (72 मिनट)।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:25 – दोपहर 12:46 (21 मिनट)।
- दुर्मुहूर्तदोपहर 1:07 – दोपहर 1:49वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: दोपहर 1:07 – दोपहर 1:22 (15 मिनट)।
- गुलिक कालदोपहर 2:05 – दोपहर 3:24वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तदोपहर 3:13 – दोपहर 3:55वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- वर्ज्यरात 1:55 – रात 3:43, 10 फ़रवरीहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
- भद्रा
- चुने हुए दिन नहीं
- पंचक
- चुने हुए दिन नहीं
- गंड मूल
- चुने हुए दिन नहीं
- दिशा शूल
- पूर्ववैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- अमृतसुबह 7:32 – सुबह 8:51
- कालसुबह 8:51 – सुबह 10:09काल वेला
- शुभसुबह 10:09 – सुबह 11:28
- रोगसुबह 11:28 – दोपहर 12:46
- उद्वेगदोपहर 12:46 – दोपहर 2:05
- चरदोपहर 2:05 – दोपहर 3:24
- लाभदोपहर 3:24 – शाम 4:42वार वेला
- अमृतशाम 4:42 – शाम 6:01
चौघड़िया · रात
- चरशाम 6:01 – शाम 7:42
- रोगशाम 7:42 – रात 9:23
- कालरात 9:23 – रात 11:05
- लाभरात 11:05 – रात 12:46, 10 फ़रवरीकाल रात्रि
- उद्वेगरात 12:46 – रात 2:27, 10 फ़रवरी
- शुभरात 2:27 – सुबह 4:08, 10 फ़रवरी
- अमृतसुबह 4:08 – सुबह 5:50, 10 फ़रवरी
- चरसुबह 5:50 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
होरा
- चंद्रसुबह 7:32 – सुबह 8:24
- शनिसुबह 8:24 – सुबह 9:17
- गुरुसुबह 9:17 – सुबह 10:09
- मंगलसुबह 10:09 – सुबह 11:02
- सूर्यसुबह 11:02 – सुबह 11:54
- शुक्रसुबह 11:54 – दोपहर 12:46
- बुधदोपहर 12:46 – दोपहर 1:39
- चंद्रदोपहर 1:39 – दोपहर 2:31
- शनिदोपहर 2:31 – दोपहर 3:24
- गुरुदोपहर 3:24 – शाम 4:16
- मंगलशाम 4:16 – शाम 5:09
- सूर्यशाम 5:09 – शाम 6:01
- शुक्रशाम 6:01 – शाम 7:08
- बुधशाम 7:08 – रात 8:16
- चंद्ररात 8:16 – रात 9:23
- शनिरात 9:23 – रात 10:31
- गुरुरात 10:31 – रात 11:38
- मंगलरात 11:38 – रात 12:46, 10 फ़रवरी
- सूर्यरात 12:46 – रात 1:53, 10 फ़रवरी
- शुक्ररात 1:53 – रात 3:01, 10 फ़रवरी
- बुधरात 3:01 – सुबह 4:08, 10 फ़रवरी
- चंद्रसुबह 4:08 – सुबह 5:16, 10 फ़रवरी
- शनिसुबह 5:16 – सुबह 6:23, 10 फ़रवरी
- गुरुसुबह 6:23 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- अमृतम्सुबह 7:32 – सुबह 8:51
- विषम्सुबह 8:51 – सुबह 10:09
- रोगम्सुबह 10:09 – सुबह 11:28
- लाभम्सुबह 11:28 – दोपहर 12:46
- धनम्दोपहर 12:46 – दोपहर 2:05
- सुखम्दोपहर 2:05 – दोपहर 3:24
- सोरम्दोपहर 3:24 – शाम 4:42
- उत्तिशाम 4:42 – शाम 6:01
- सुखम्शाम 6:01 – शाम 7:42
- सोरम्शाम 7:42 – रात 9:23
- उत्तिरात 9:23 – रात 11:05
- अमृतम्रात 11:05 – रात 12:46, 10 फ़रवरी
- विषम्रात 12:46 – रात 2:27, 10 फ़रवरी
- रोगम्रात 2:27 – सुबह 4:08, 10 फ़रवरी
- लाभम्सुबह 4:08 – सुबह 5:50, 10 फ़रवरी
- धनम्सुबह 5:50 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- तुला दोपहर 2:41 तक
- वृश्चिक
- सूर्य राशि
- मकर
- सूर्य नक्षत्र
- धनिष्ठा 1 सुबह 10:35 तक
- धनिष्ठा 2
- अगली संक्रांति
- कुंभ · 12 फ़रवरी 2026, शाम 5:39, 12 फ़रवरी
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- मकरसुबह 6:14 – सुबह 7:46चरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:00
- कुंभसुबह 7:46 – सुबह 9:00स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 8:34
- मीनसुबह 9:00 – सुबह 10:11द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 9:21
- मेषसुबह 10:11 – सुबह 11:34चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 11:07
- वृषभसुबह 11:34 – दोपहर 1:23स्थिरपुष्कर भाग 14° · दोपहर 12:21
- मिथुनदोपहर 1:23 – दोपहर 3:41द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 2:43
- कर्कदोपहर 3:41 – शाम 6:12चरपुष्कर भाग 8° · शाम 4:20
- सिंहशाम 6:12 – रात 8:42स्थिरपुष्कर भाग 19° · शाम 7:47
- कन्यारात 8:42 – रात 11:13द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 9:27
- तुलारात 11:13 – रात 1:44, 10 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 1:14, 10 फ़रवरी
- वृश्चिकरात 1:44 – सुबह 4:10, 10 फ़रवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 2:39, 10 फ़रवरी
- धनुसुबह 4:10 – सुबह 6:10, 10 फ़रवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 5:45, 10 फ़रवरी
- मकरसुबह 6:10 – सुबह 7:42, 10 फ़रवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 6:56, 10 फ़रवरी
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | मकर | 26°32′ | धनिष्ठा · 1 | कुंभ · 12 फ़रवरी 2026 |
| चंद्र | तुला | 26°27′ | विशाखा · 2 | वृश्चिक · 9 फ़रवरी 2026 |
| मंगल अस्त | मकर | 19°11′ | श्रवण · 3 | कुंभ · 23 फ़रवरी 2026 |
| बुध अस्त | कुंभ | 10°15′ | शतभिषा · 2 | मीन · 10 अप्रैल 2026 |
| गुरु वक्री | मिथुन | 22°16′ | पुनर्वसु · 1 | कर्क · 1 जून 2026 |
| शुक्र अस्त | कुंभ | 4°38′ | धनिष्ठा · 4 | मीन · 1 मार्च 2026 |
| शनि | मीन | 5°17′ | उत्तरा भाद्रपद · 1 | मेष · 2 जून 2027 |
| राहु | कुंभ | 14°55′ | शतभिषा · 3 | मकर · 25 नवंबर 2026 |
| केतु | सिंह | 14°55′ | पूर्वा फाल्गुनी · 1 | कर्क · 25 नवंबर 2026 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- फाल्गुन
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- माघ
- विक्रम संवत
- 2082 सिद्धार्थी
- शक संवत
- 1947 विश्वावसु
यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: इस जगह का क्षेत्र पता नहीं। अमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के अनुसार ऋतु
- शिशिर
- सूर्य के अनुसार ऋतु
- शिशिर
- अयनांत के अनुसार अयन
- उत्तरायण
- मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
- उत्तरायण
- सौर मास
- माघ, दिन 27
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 20 माघ 1947
- कलि संवत
- 5126
- वर्ष का राजा
- सूर्य
- वर्ष का मंत्री
- सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- बुध
- दुर्गेश
- शनि
- धनेश
- मंगल
- रसेश
- शुक्र
- धान्येश
- चंद्र
- नीरसेश
- बुध
- फलेश
- शनि
- मेघेश
- सूर्य
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
- 24°13′18″
- जूलियन दिन
- 2461080.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2082
- बृहस्पति संवत्सर
- सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
अभी चल रहा है
शुक्र अस्त: Columbus से दृश्यता के अनुसार, मुहूर्त चिंतामणि 5.27 के अतिरिक्त दिनों सहित, 23 नवंबर – 15 फ़रवरी (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 26 नवंबर – 17 फ़रवरी।
ग्रहण
- कंकणाकृति सूर्य ग्रहण · मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
- खग्रास चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 3 मार्च 2026 · यहाँ से दिखेगा · सुबह 4:50 – सुबह 8:18, 3 मार्च सूतक: शाम 7:50, 2 मार्च – सुबह 8:18, 3 मार्च। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
- खंडग्रास सूर्य ग्रहण · बुधवार, 12 अगस्त 2026 · यहाँ से दिखेगा · दोपहर 1:21 (EDT) – दोपहर 2:00, 12 अगस्त (EDT) सूतक: रात 1:21 (EDT) – दोपहर 2:00, 12 अगस्त (EDT)। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- पूर्व
- चंद्र वास
- पश्चिम सुबह 7:32 – दोपहर 2:41 · उत्तर दोपहर 2:41 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
- राहु वास
- उत्तर-पश्चिम
- शिव वास
- गौरी के साथ सुबह 7:32 – रात 8:58 · सभा में रात 8:58 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
- अग्नि वास
- पाताल में सुबह 7:32 – रात 8:58 · पृथ्वी पर रात 8:58 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
- आनंदादि योग
- मित्र सुबह 7:32 – रात 9:25 · मानस रात 9:25 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
- तमिल योग
- मरण योग सुबह 7:32 – रात 9:25 · सिद्ध योग रात 9:25 – सुबह 7:31, 10 फ़रवरी
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (दोपहर 12:46 – दोपहर 1:07, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:46 – दोपहर 1:07, यमगण्ड से अलग) चुने जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:44 – सुबह 6:38) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए राहु काल, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य छोड़ती है।
चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- कृष्ण नवमी
- नक्षत्र
- अनुराधा
- सूर्योदय
- सुबह 7:31
- राहु काल
- दोपहर 3:24 – शाम 4:43
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:25 – दोपहर 1:07
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
Columbus में कृष्ण अष्टमी रात 8:58 तक है, फिर कृष्ण नवमी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
Columbus में अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण नवमी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
Columbus में चुने हुए दिन राहु काल सुबह 8:51 – सुबह 10:09 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में Columbus के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
Columbus में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:44 – सुबह 6:38, प्रातः सन्ध्या सुबह 6:11 – सुबह 7:32, अमृत काल सुबह 11:34 – दोपहर 1:22 (सुबह 11:34 – दोपहर 12:46 यमगण्ड के साथ; दोपहर 1:07 – दोपहर 1:22 दुर्मुहूर्त के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:25 – दोपहर 1:07 (दोपहर 12:25 – दोपहर 12:46 यमगण्ड के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:31 – दोपहर 3:13, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:01 – शाम 6:28, सायाह्न सन्ध्या शाम 6:01 – शाम 7:22, निशिता मुहूर्त रात 12:19 – रात 1:13, 10 फ़रवरी।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
Columbus में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:25 – दोपहर 1:07 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
Columbus में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:44 – सुबह 6:38 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन विशाखा नक्षत्र है, रात 9:25 तक; फिर अनुराधा।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 3 मार्च 2026, अगली अमावस्या 17 फ़रवरी 2026।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना फाल्गुन है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह चंद्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन तुला राशि में है, दोपहर 2:41 पर वृश्चिक में जाएगा।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, सोमवार को, दिशा शूल पूर्व दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?
चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (दोपहर 12:46 – दोपहर 1:07, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:46 – दोपहर 1:07, यमगण्ड से अलग) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:44 – सुबह 6:38) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए राहु काल, यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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