दैनिक पंचांग · ज्येष्ठ · विक्रम संवत 2084
Columbus का पंचांग, 10 जून 2027
गुरुवार, 10 जून 2027
गुरुवार, 10 जून 2027 Columbus में शुक्ल सप्तमी तिथि शाम 7:44 तक है, उसके बाद शुक्ल अष्टमी; नक्षत्र मघा सुबह 8:54 तक।
गणना: शहर के केंद्र से
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।
-
तिथि
शुक्ल सप्तमी शाम 7:44 तक
फिर शुक्ल अष्टमी
शुक्ल पक्ष की 7वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 38% पूरा -
वार
गुरुवार
गुरुवार, गुरु का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
मघा सुबह 8:54 तक
फिर पूर्वा फाल्गुनी
27 नक्षत्रों में 10वाँ: निरयण राशिचक्र में 120° से 133°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 87% पूरा -
योग
वज्र रात 3:25, 11 जून तक
फिर सिद्धि
27 नित्य योगों में 15वाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 1% पूरा -
करण
गर सुबह 8:40 तक
फिर वणिज शाम 7:44 तक
फिर विष्टि
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 76% पूरा
पक्ष: शुक्ल
उदया तिथि: शुक्ल सप्तमी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: मघा 4 · सुबह 8:54 · पूर्वा फाल्गुनी 1 · दोपहर 2:38 · पूर्वा फाल्गुनी 2 · रात 8:22 · पूर्वा फाल्गुनी 3 · रात 2:09, 11 जून
इस पेज का हर समय Columbus (America/New_York) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 6:03
- सूर्यास्त
- रात 9:00
- चंद्रोदय
- दोपहर 12:40
- चंद्रास्त
- रात 1:30, 11 जून
- दिनमान
- 14 घंटे 57 मिनट · 37 घटी 23 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 40 सेकंड अधिक
- रात्रिमान
- 9 घंटे 2 मिनट · 22 घटी 37 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 1:32
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, दोपहर 12:45 है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:51 – सुबह 5:27भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 5:09 – सुबह 6:03सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
- अमृत कालसुबह 6:39 – सुबह 8:09हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।यमगण्ड के साथ: सुबह 6:39 – सुबह 7:55 (76 मिनट)।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 1:02 – दोपहर 2:01दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
- विजय मुहूर्तशाम 4:01 – शाम 5:01दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।राहु काल के साथ: शाम 4:01 – शाम 5:01 (60 मिनट)।वर्ज्य के साथ: शाम 4:35 – शाम 5:01 (26 मिनट)।
- गोधूलि मुहूर्तरात 9:00 – रात 9:18गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।भद्रा के साथ: रात 9:00 – रात 9:18 (18 मिनट)।
- सायाह्न सन्ध्यारात 9:00 – रात 9:54सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।भद्रा के साथ: रात 9:00 – रात 9:54 (54 मिनट)।
- निशिता मुहूर्तरात 1:13 – रात 1:50, 11 जूनहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।भद्रा के साथ: रात 1:13 – रात 1:50, 11 जून (37 मिनट)।
- अमृत कालरात 1:49 – रात 3:21, 11 जूनहर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।भद्रा के साथ: रात 1:49 – रात 3:21, 11 जून (92 मिनट)।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- रवि योगसुबह 6:03 – सुबह 8:54चंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- यमगण्डसुबह 6:03 – सुबह 7:55वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अमृत काल के साथ: सुबह 6:39 – सुबह 7:55 (76 मिनट)।
- गुलिक कालसुबह 9:47 – सुबह 11:39वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तसुबह 11:02 – दोपहर 12:02वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- राहु कालदोपहर 3:24 – शाम 5:16वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।विजय मुहूर्त के साथ: शाम 4:01 – शाम 5:01 (60 मिनट)।
- वर्ज्यशाम 4:35 – शाम 6:08हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।विजय मुहूर्त के साथ: शाम 4:35 – शाम 5:01 (26 मिनट)।
- दुर्मुहूर्तशाम 5:01 – शाम 6:01वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- भद्रा
- 10 जून, शाम 7:44 → 11 जून, सुबह 6:56मृत्यु लोक · 10 जून, शाम 7:44 → 11 जून, सुबह 6:56भद्रा पुच्छ · रात 9:25 – रात 10:32भद्रा मुख · 10 जून, रात 10:32 → 11 जून, रात 12:24भद्रा परिहार · 10 जून, रात 9:00 → 11 जून, सुबह 6:03
- पंचक
- चुने हुए दिन नहीं
- गंड मूल
- 8 जून, दोपहर 12:07 → 10 जून, सुबह 8:54
- दिशा शूल
- दक्षिणवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 6:03, 11 जून) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- शुभसुबह 6:03 – सुबह 7:55
- रोगसुबह 7:55 – सुबह 9:47
- उद्वेगसुबह 9:47 – सुबह 11:39
- चरसुबह 11:39 – दोपहर 1:32
- लाभदोपहर 1:32 – दोपहर 3:24
- अमृतदोपहर 3:24 – शाम 5:16
- कालशाम 5:16 – शाम 7:08काल वेला
- शुभशाम 7:08 – रात 9:00वार वेला
चौघड़िया · रात
- अमृतरात 9:00 – रात 10:08
- चररात 10:08 – रात 11:16
- रोगरात 11:16 – रात 12:24, 11 जून
- कालरात 12:24 – रात 1:32, 11 जून
- लाभरात 1:32 – रात 2:39, 11 जूनकाल रात्रि
- उद्वेगरात 2:39 – रात 3:47, 11 जून
- शुभरात 3:47 – सुबह 4:55, 11 जून
- अमृतसुबह 4:55 – सुबह 6:03, 11 जून
होरा
- गुरुसुबह 6:03 – सुबह 7:18
- मंगलसुबह 7:18 – सुबह 8:33
- सूर्यसुबह 8:33 – सुबह 9:47
- शुक्रसुबह 9:47 – सुबह 11:02
- बुधसुबह 11:02 – दोपहर 12:17
- चंद्रदोपहर 12:17 – दोपहर 1:32
- शनिदोपहर 1:32 – दोपहर 2:46
- गुरुदोपहर 2:46 – शाम 4:01
- मंगलशाम 4:01 – शाम 5:16
- सूर्यशाम 5:16 – शाम 6:31
- शुक्रशाम 6:31 – शाम 7:45
- बुधशाम 7:45 – रात 9:00
- चंद्ररात 9:00 – रात 9:45
- शनिरात 9:45 – रात 10:31
- गुरुरात 10:31 – रात 11:16
- मंगलरात 11:16 – रात 12:01, 11 जून
- सूर्यरात 12:01 – रात 12:46, 11 जून
- शुक्ररात 12:46 – रात 1:32, 11 जून
- बुधरात 1:32 – रात 2:17, 11 जून
- चंद्ररात 2:17 – रात 3:02, 11 जून
- शनिरात 3:02 – रात 3:47, 11 जून
- गुरुरात 3:47 – सुबह 4:32, 11 जून
- मंगलसुबह 4:32 – सुबह 5:18, 11 जून
- सूर्यसुबह 5:18 – सुबह 6:03, 11 जून
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- धनम्सुबह 6:03 – सुबह 7:55
- सुखम्सुबह 7:55 – सुबह 9:47
- सोरम्सुबह 9:47 – सुबह 11:39
- उत्तिसुबह 11:39 – दोपहर 1:32
- अमृतम्दोपहर 1:32 – दोपहर 3:24
- विषम्दोपहर 3:24 – शाम 5:16
- रोगम्शाम 5:16 – शाम 7:08
- लाभम्शाम 7:08 – रात 9:00
- अमृतम्रात 9:00 – रात 10:08
- विषम्रात 10:08 – रात 11:16
- रोगम्रात 11:16 – रात 12:24, 11 जून
- लाभम्रात 12:24 – रात 1:32, 11 जून
- धनम्रात 1:32 – रात 2:39, 11 जून
- सुखम्रात 2:39 – रात 3:47, 11 जून
- सोरम्रात 3:47 – सुबह 4:55, 11 जून
- उत्तिसुबह 4:55 – सुबह 6:03, 11 जून
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- सिंह
- सूर्य राशि
- वृषभ
- सूर्य नक्षत्र
- मृगशिरा 1
- अगली संक्रांति
- मिथुन · 15 जून 2027, सुबह 9:26, 15 जून
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- वृषभसुबह 4:39 – सुबह 6:28स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:26
- मिथुनसुबह 6:28 – सुबह 8:46द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 7:48
- कर्कसुबह 8:46 – सुबह 11:17चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 9:26
- सिंहसुबह 11:17 – दोपहर 1:48स्थिरपुष्कर भाग 19° · दोपहर 12:53
- कन्यादोपहर 1:48 – शाम 4:18द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · दोपहर 2:33
- तुलाशाम 4:18 – शाम 6:50चरपुष्कर भाग 24° · शाम 6:19
- वृश्चिकशाम 6:50 – रात 9:15स्थिरपुष्कर भाग 11° · शाम 7:45
- धनुरात 9:15 – रात 11:16द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 10:50
- मकररात 11:16 – रात 12:47, 11 जूनचरपुष्कर भाग 14° · रात 12:02, 11 जून
- कुंभरात 12:47 – रात 2:01, 11 जूनस्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 1:35, 11 जून
- मीनरात 2:01 – रात 3:12, 11 जूनद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 2:22, 11 जून
- मेषरात 3:12 – सुबह 4:35, 11 जूनचरपुष्कर भाग 21° · सुबह 4:08, 11 जून
- वृषभसुबह 4:35 – सुबह 6:24, 11 जूनस्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 5:22, 11 जून
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | वृषभ | 25°05′ | मृगशिरा · 1 | मिथुन · 15 जून 2027 |
| चंद्र | सिंह | 11°40′ | मघा · 4 | कन्या · 11 जून 2027 |
| मंगल | सिंह | 17°18′ | पूर्वा फाल्गुनी · 2 | कन्या · 4 जुलाई 2027 |
| बुध | मिथुन | 12°07′ | आर्द्रा · 2 | कर्क · 30 जुलाई 2027 |
| गुरु | कर्क | 27°29′ | आश्लेषा · 4 | सिंह · 25 जून 2027 |
| शुक्र | वृषभ | 8°04′ | कृत्तिका · 4 | मिथुन · 28 जून 2027 |
| शनि | मेष | 0°42′ | अश्विनी · 1 | मीन · 19 अक्टूबर 2027 |
| राहु | मकर | 18°40′ | श्रवण · 3 | धनु · 24 मई 2028 |
| केतु | कर्क | 18°40′ | आश्लेषा · 1 | मिथुन · 24 मई 2028 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- ज्येष्ठ
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- ज्येष्ठ
- विक्रम संवत
- 2084 दुर्मति
- शक संवत
- 1949 प्लवंग
यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के अनुसार ऋतु
- ग्रीष्म
- सूर्य के अनुसार ऋतु
- ग्रीष्म
- अयनांत के अनुसार अयन
- उत्तरायण
- मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
- उत्तरायण
- सौर मास
- ज्येष्ठ, दिन 27
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 20 ज्येष्ठ 1949
- कलि संवत
- 5128
- वर्ष का राजा
- बुध
- वर्ष का मंत्री
- बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- शुक्र
- दुर्गेश
- मंगल
- धनेश
- शुक्र
- रसेश
- सूर्य
- धान्येश
- गुरु
- नीरसेश
- शुक्र
- फलेश
- मंगल
- मेघेश
- मंगल
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
- 24°14′25″
- जूलियन दिन
- 2461566.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2083
- बृहस्पति संवत्सर
- दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…
ग्रहण
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण · रविवार, 18 जुलाई 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
- खग्रास सूर्य ग्रहण · सोमवार, 2 अगस्त 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 17 अगस्त 2027 · यहाँ से दिखेगा · रात 1:24 – सुबह 5:04, 17 अगस्त
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- दक्षिण
- चंद्र वास
- पूर्व सुबह 6:03 – सुबह 6:03, 11 जून
- राहु वास
- दक्षिण
- शिव वास
- भोजन में सुबह 6:03 – शाम 7:44 · श्मशान में शाम 7:44 – सुबह 6:03, 11 जून
- अग्नि वास
- आकाश में सुबह 6:03 – शाम 7:44 · पाताल में शाम 7:44 – सुबह 6:03, 11 जून
- आनंदादि योग
- मुसल सुबह 6:03 – सुबह 8:54 · गदा सुबह 8:54 – सुबह 6:03, 11 जून
- तमिल योग
- अमृत योग सुबह 6:03 – सुबह 8:54 · सिद्ध योग सुबह 8:54 – सुबह 6:03, 11 जून
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 7:55 – सुबह 8:09, यमगण्ड से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:02 – दोपहर 2:01) चुने जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:51 – सुबह 5:27) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है।
चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी
- नक्षत्र
- पूर्वा फाल्गुनी
- सूर्योदय
- सुबह 6:03
- राहु काल
- सुबह 11:40 – दोपहर 1:32
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 1:02 – दोपहर 2:02
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
Columbus में शुक्ल सप्तमी शाम 7:44 तक है, फिर शुक्ल अष्टमी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
Columbus में अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल अष्टमी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
Columbus में चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:24 – शाम 5:16 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में Columbus के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
Columbus में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 – सुबह 5:27, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:09 – सुबह 6:03, अमृत काल सुबह 6:39 – सुबह 8:09 (सुबह 6:39 – सुबह 7:55 यमगण्ड के साथ), अभिजित मुहूर्त दोपहर 1:02 – दोपहर 2:01, विजय मुहूर्त शाम 4:01 – शाम 5:01 (शाम 4:01 – शाम 5:01 राहु काल के साथ; शाम 4:35 – शाम 5:01 वर्ज्य के साथ), गोधूलि मुहूर्त रात 9:00 – रात 9:18 (रात 9:00 – रात 9:18 भद्रा के साथ), सायाह्न सन्ध्या रात 9:00 – रात 9:54 (रात 9:00 – रात 9:54 भद्रा के साथ), निशिता मुहूर्त रात 1:13 – रात 1:50, 11 जून (रात 1:13 – रात 1:50, 11 जून भद्रा के साथ), अमृत काल रात 1:49 – रात 3:21, 11 जून (रात 1:49 – रात 3:21, 11 जून भद्रा के साथ)।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
Columbus में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 1:02 – दोपहर 2:01 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
Columbus में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 – सुबह 5:27 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन मघा नक्षत्र है, सुबह 8:54 तक; फिर पूर्वा फाल्गुनी।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 18 जून 2027, अगली अमावस्या 3 जुलाई 2027।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना ज्येष्ठ है (अमांत; पूर्णिमांत में ज्येष्ठ), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
हाँ, भद्रा 10 जून, शाम 7:44 → 11 जून, सुबह 6:56। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह गुरु की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन सिंह राशि में है।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, गुरुवार को, दिशा शूल दक्षिण दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?
चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 7:55 – सुबह 8:09, यमगण्ड से अलग) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 1:02 – दोपहर 2:01) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:51 – सुबह 5:27) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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