दैनिक वृषभ राशिफल · चंद्र राशि
आज का वृषभ राशिफल — Vrishabh Rashifal Today
गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
वृषभ राशि के तारे, अभी के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
सुबह 4:35 बजे चंद्रमा कुंभ में है, इस मानचित्र से बाहर; मंगलवार 27 अक्टूबर, रात 9:07 बजे यह फिर वृषभ में आएगा और 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे तक रहेगा।
वृषभ को पहला भाव मानकर: अभी नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव वृषभ से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट अभी का वृषभ का गोचर है। सुबह 4:35 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
वृषभ, आज: पूरे दिन चंद्रमा आपसे दसवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद है।
नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
वृषभ के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है। मानचित्र पर चंद्रमा की जगह हर मिनट नई होती है; तारे अपनी जगह पर रहते हैं।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- भरणी 13°20′ से 26°40′ योगतारा: 35 Arietis · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कैलेंडर सुधार समिति 1955 में यह 41 Arietis है।
- कृत्तिका 26°40′ से 40°00′ योगतारा: Alcyone (η Tauri)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- रोहिणी 40°00′ से 53°20′ योगतारा: Aldebaran (α Tauri)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- मृगशिरा 53°20′ से 66°40′ योगतारा: Meissa (λ Orionis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक वृषभ राशिफल · चंद्र राशि · गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026
आज का वृषभ राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
वृषभ राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। वृषभ बारह राशियों में दूसरी राशि है, निरयण राशिचक्र में 30° से 60° तक, और इसके स्वामी शुक्र हैं; इसमें कृत्तिका के चरण 2 से 4, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के चरण 1 और 2 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Taurus कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, वृषभ से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
मिला-जुला?
गुरुवार, 22 अक्टूबर: पूरे दिन (शुक्रवार 23 अक्टूबर, दोपहर 3:04 बजे तक) चंद्रमा कुंभ में है, जो वृषभ से दसवीं राशि है। शास्त्र में दसवें भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (सफलता और सहजता), लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- चंद्र · वृषभ से दसवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- चंद्र के साथ राहु: सहायता मंद मुहूर्त चिंतामणि 4.7 · बृहत्संहिता 104.56
मिला-जुला। हमारी गिनती में आज वृषभ के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 2, मिले-जुले 5 और धैर्य माँगने वाले 2; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
शास्त्र में छठे भाव के बुध को सफलता और प्रतिष्ठा के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दसवें भाव के चंद्रमा को काम में सफलता के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- बुध · वृषभ से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- चंद्र · वृषभ से दसवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- चंद्र के साथ राहु: सहायता मंद मुहूर्त चिंतामणि 4.7 · बृहत्संहिता 104.56
- प्रेम और परिवार?
आपसे चौथे भाव में केतु धैर्य माँगता है; प्रेम और परिवार के लिए ग्रंथ इसका कोई अलग फल नहीं बताते।
- सेहत?
शास्त्र में छठे भाव के सूर्य को सेहत में सुधार और चिंताओं में कमी के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन सूर्य अपनी नीच राशि तुला में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- सूर्य · वृषभ से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
वृषभ के लिए आज चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
पूरे दिन (शुक्रवार 23 अक्टूबर, दोपहर 3:04 बजे तक): चंद्रमा कुंभ में, आपसे दसवें भाव में; सहायक।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
पूरे दिन चंद्रमा कुंभ में राहु के साथ है।
वृषभ के लिए अगला चंद्राष्टम: 12 नवंबर, दोपहर 2:19 बजे से 15 नवंबर, रात 3:11 बजे तक।
वृषभ राशि के नक्षत्रों का ताराबल
कृत्तिका (चरण 2–4): रात 8:49 बजे तक क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
कृत्तिका (चरण 2–4): रात 8:49 बजे से प्रत्यरि तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
रोहिणी (चरण 1–4): रात 8:49 बजे तक विपत तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
रोहिणी (चरण 1–4): रात 8:49 बजे से क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।
मृगशिरा (चरण 1–2): रात 8:49 बजे तक संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।
मृगशिरा (चरण 1–2): रात 8:49 बजे से विपत तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
नई दिल्ली में आपके सहायक समय
पंचांग का 1 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
शाम 5:45 बजे से शाम 7:20 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
शाम 5:45 बजे से शाम 7:20 बजे तक
इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।
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वृषभ राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
वृषभ के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 3 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में है। अगली साढ़ेसाती 3 जून 2027 से 13 जुलाई 2034 तक है।
वृषभ की अगली साढ़ेसाती 3 जून 2027 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 13 जुलाई 2034 को पूरी होती है, बीच में 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक वृषभ राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: वृषभ से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन
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शास्त्र में छठे भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (सेहत में सुधार, प्रतिस्पर्धा में बढ़त और चिंताओं में कमी), लेकिन सूर्य अपनी नीच राशि तुला में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- सूर्य · वृषभ से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र में दसवें भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (सफलता और सहजता), लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- चंद्र · वृषभ से दसवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- चंद्र के साथ राहु: सहायता मंद मुहूर्त चिंतामणि 4.7 · बृहत्संहिता 104.56
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र में तीसरे भाव के मंगल को सहायक माना गया है (सफलता, लाभ और उत्साह), लेकिन मंगल अपनी नीच राशि कर्क में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- मंगल · वृषभ से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
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शास्त्र में छठे भाव के बुध को सहायक माना गया है (सफलता और प्रतिष्ठा)।
- बुध · वृषभ से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वक्री होंगे: शनिवार 24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे
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शास्त्र के अनुसार तीसरे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (काम में देरी), लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए इसे नरम गिना गया है।
- गुरु · वृषभ से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च राशि: नरम फलदीपिका 26.31 · कालप्रकाशिका 36.12
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शास्त्र के अनुसार छठे भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रुकावटें और सेहत), लेकिन शुक्र अपनी स्वराशि तुला में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; इस पर ग्रंथों के संकेत दोनों ओर जाते हैं, इसलिए इसे मिला-जुला गिना गया है।
- शुक्र · वृषभ से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- स्वराशि और अस्त: संकेत दोनों ओर फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- वक्री (3 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे से 14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे तक)
- मार्गी होंगे: 14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे
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शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शनि को सहायक माना गया है (लाभ)।
- शनि · वृषभ से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (27 जुलाई से 11 दिसंबर तक)
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शास्त्र के अनुसार दसवें भाव में राहु होने से यह धैर्य का समय है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
- राहु · वृषभ से दसवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10 · ज्योतिर्निबंध पृ. 51, 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- ग्रंथों में मतभेद: अधिकतर में धैर्य, फलदीपिका 26.2 में अनुकूल फलदीपिका 26.2, 26.24 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10 · ज्योतिर्निबंध पृ. 51, 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
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शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का केतु धैर्य माँगता है (बेचैनी): घर की दिनचर्या शांत रखें।
- केतु · वृषभ से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
वृषभ के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 1, मिले-जुले 1, धैर्य माँगने वाले 2।
दैनिक वृषभ राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में वृषभ राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
शनिवार 24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे: बुध तुला में, आपसे छठे भाव में, वक्री होते हैं।
29 अक्टूबर, सुबह 9:40 बजे: शुक्र तुला में, आपसे छठे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
30 अक्टूबर, सुबह 6:04 बजे: बुध तुला में, आपसे छठे भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (रिश्तेदारों से जुड़े मामले): रिश्तेदारों से धैर्य से संपर्क बनाए रखें।
- गुरु · वृषभ से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
6 नवंबर, रात 1:04 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे पाँचवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में पाँचवें भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (संतान और प्रसन्नता), लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- शुक्र · वृषभ से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
10 नवंबर, दोपहर 3:54 बजे: बुध तुला में, आपसे छठे भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
12 नवंबर, रात 8:19 बजे: मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे चौथे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का मंगल धैर्य माँगता है (सेहत और दिनचर्या): भोजन और आराम का समय नियमित रखें।
- मंगल · वृषभ से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
13 नवंबर, रात 9:24 बजे: बुध तुला में, आपसे छठे भाव में, मार्गी होते हैं।
14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे: शुक्र कन्या में, आपसे पाँचवें भाव में, मार्गी होते हैं।
16 नवंबर, शाम 7:43 बजे: सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार सातवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकाने वाली यात्रा और प्रतिष्ठा में कमी): यात्राओं के बीच आराम का समय रखें और काम में स्थिर रहें।
- सूर्य · वृषभ से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
दैनिक वृषभ राशिफल · चंद्र राशि
कल का वृषभ राशिफल
कल (शुक्रवार, 23 अक्टूबर): दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा आपसे दसवें भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद है।
कल का पूरा राशिफल देखेंदैनिक वृषभ राशिफल · चंद्र राशि
वृषभ राशि के बारे में: स्वामी शुक्र, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- शुक्रबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- बैलबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- स्थिरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- सम राशि; स्त्रीबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- दक्षिणबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- पृष्ठोदय: पीठ की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- रात में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- मुखबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 30° से 60°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- कृत्तिका 2–4; रोहिणी 1–4; मृगशिरा 1–2बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- इ उ ए ओ वा वी वू वे वोअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- वृषभ में चंद्रमा उच्च होता है, और वृषभ चंद्रमा की मूलत्रिकोण राशि भी है।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
वृषभ राशि से जुड़े सवाल
वृषभ राशि का स्वामी कौन है?
वृषभ के स्वामी शुक्र आज तुला में है, वृषभ से छठे भाव में, 6 नवंबर, रात 1:04 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में वृषभ के स्वामी शुक्र हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। शुक्र तुला के भी स्वामी हैं।
वृषभ राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
आज चंद्रमा कुंभ में है; मंगलवार 27 अक्टूबर, रात 9:07 बजे यह फिर वृषभ में आएगा और 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि वृषभ होती है। वृषभ के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: इ, उ, ए (कृत्तिका 2–4); ओ, वा, वी, वू (रोहिणी 1–4); वे, वो (मृगशिरा 1–2)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि वृषभ है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
वृषभ राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
आज चंद्रमा शतभिषा में है; मंगलवार 27 अक्टूबर, रात 9:07 बजे यह वृषभ के पहले चरण, कृत्तिका चरण 2, में पहुँचेगा। वृषभ निरयण राशिचक्र में 30° से 60° तक है: कृत्तिका के चरण 2 से 4, रोहिणी के चारों चरण और मृगशिरा के चरण 1 और 2, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि वृषभ है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
वृषभ राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें उदार, क्षमाशील और धैर्यवान, चाल-ढाल में सुंदर, और भले-बुरे की पहचान रखने वाला समझदार बताया गया है। तीनों ग्रंथ जीवन के मध्य और बाद के वर्षों को अधिक सुखी बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.2, सारावली 23.8 और होरासार 29.2 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, वृषभ और इसके स्वामी शुक्र, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
वृषभ राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
वृषभ पर आज न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, वृषभ से ग्यारहवें भाव में। वृषभ की अगली साढ़ेसाती 3 जून 2027 को शुरू होती है और शनि के अंतिम निकास के साथ 13 जुलाई 2034 को पूरी होती है, बीच में 20 अक्टूबर 2027 से 23 फ़रवरी 2028 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
वृषभ राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, वृषभ से चौथे भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, वृषभ से नौवें और तीसरे भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, वृषभ से बारहवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव वृषभ की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
वृषभ राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
आज दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में तुला 28°52′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में तुला 4°38′ में। अंग्रेज़ी में वृषभ को Taurus कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Taurus है, उसकी राशि वृषभ हो, यह ज़रूरी नहीं।
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इस पेज के शब्द
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- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- सहायता मंद
- अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
- मिला-जुला
- संकेत दोनों ओर जाते हैं (स्वराशि या उच्च राशि, पर सूर्य के निकट), या सहायक चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हैं, इसलिए यह गोचर न सहायक गिना गया, न धैर्य का समय।
- नरम
- धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जो ग्रह के स्वराशि या उच्च राशि में होने से नरम पड़ा है (फलदीपिका 26.31)।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- मिला-जुला
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा वेध से रुका, मंद या नरम हो, या उसकी राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- चंद्रमा का साथ
- चंद्रमा की राशि में बैठे ग्रह; वहाँ सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद मानी जाती है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- ग्रंथों में मतभेद
- शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
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