दैनिक पंचांग · माघ · विक्रम संवत 2082
दिल्ली का पंचांग, 30 जनवरी 2026
शुक्रवार, 30 जनवरी 2026
शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 दिल्ली में शुक्ल द्वादशी तिथि सुबह 11:10 तक है, उसके बाद शुक्ल त्रयोदशी; नक्षत्र आर्द्रा रात 3:28, 31 जनवरी तक।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।
-
तिथि
शुक्ल द्वादशी सुबह 11:10 तक
फिर शुक्ल त्रयोदशी
शुक्ल पक्ष की 12वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।
सूर्योदय पर 81% पूरा -
वार
शुक्रवार
शुक्रवार, शुक्र का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
-
नक्षत्र
आर्द्रा रात 3:28, 31 जनवरी तक
फिर पुनर्वसु
27 नक्षत्रों में छठा: निरयण राशिचक्र में 66°40′ से 80° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।
सूर्योदय पर 8% पूरा -
योग
वैधृति शाम 4:59 तक
फिर विष्कुम्भ
27 नित्य योगों में 27वाँ; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।
सूर्योदय पर 52% पूरा -
करण
बालव सुबह 11:10 तक
फिर कौलव रात 9:47 तक
फिर तैतिल
सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।
सूर्योदय पर 62% पूरा
पक्ष: शुक्ल
उदया तिथि: शुक्ल द्वादशी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।
नक्षत्र चरण बदलते हैं: आर्द्रा 1 · सुबह 10:59 · आर्द्रा 2 · शाम 4:28 · आर्द्रा 3 · रात 9:58 · आर्द्रा 4 · रात 3:28, 31 जनवरी
इस पेज का हर समय दिल्ली (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
- सूर्योदय
- सुबह 7:10
- सूर्यास्त
- शाम 5:58
- चंद्रोदय
- दोपहर 3:06
- चंद्रास्त
- सुबह 5:53, 31 जनवरी
- दिनमान
- 10 घंटे 48 मिनट · 27 घटी 0 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 19 सेकंड अधिक
- रात्रिमान
- 13 घंटे 11 मिनट · 32 घटी 58 पल
- मध्याह्न
- दोपहर 12:34
चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, दोपहर 3:11 है।
दैनिक पंचांग
एक नज़र में पूरा दिन
इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।
दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त
रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
- ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए नहीं चुना जाता
- रात
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल
वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।
- ब्रह्म मुहूर्तसुबह 5:25 – सुबह 6:18भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
- प्रातः सन्ध्यासुबह 5:51 – सुबह 7:10सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
- अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:13 – दोपहर 12:56दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।राहु काल के साथ: दोपहर 12:13 – दोपहर 12:34 (21 मिनट)।
- विजय मुहूर्तदोपहर 2:22 – दोपहर 3:06दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।वर्ज्य के साथ: दोपहर 2:22 – दोपहर 2:39 (17 मिनट)।
- गोधूलि मुहूर्तशाम 5:58 – शाम 6:25गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
- सायाह्न सन्ध्याशाम 5:58 – शाम 7:18सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
- अमृत कालशाम 6:18 – शाम 7:46हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।
- निशिता मुहूर्तरात 12:08 – रात 1:01, 31 जनवरीहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।
चुने हुए दिन के विशेष योग
- सर्वार्थ सिद्धि योगरात 3:28 – सुबह 7:10, 31 जनवरीवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।
- रवि योगरात 3:28 – सुबह 7:10, 31 जनवरीचंद्र नक्षत्र सूर्य नक्षत्र से अनुकूल गिनती पर है; परंपरा में यह बाधाएँ हल्की करने वाला माना जाता है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय
ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।
- गुलिक कालसुबह 8:31 – सुबह 9:52वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
- दुर्मुहूर्तसुबह 9:20 – सुबह 10:03वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- राहु कालसुबह 11:13 – दोपहर 12:34वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।अभिजित मुहूर्त के साथ: दोपहर 12:13 – दोपहर 12:34 (21 मिनट)।
- दुर्मुहूर्तदोपहर 12:56 – दोपहर 1:39वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- वर्ज्यदोपहर 1:11 – दोपहर 2:39हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 2:22 – दोपहर 2:39 (17 मिनट)।
- यमगण्डदोपहर 3:16 – शाम 4:37वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
- भद्रा
- चुने हुए दिन नहीं
- पंचक
- चुने हुए दिन नहीं
- गंड मूल
- चुने हुए दिन नहीं
- दिशा शूल
- पश्चिमवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।
चौघड़िया · दिन
- चरसुबह 7:10 – सुबह 8:31
- लाभसुबह 8:31 – सुबह 9:52
- अमृतसुबह 9:52 – सुबह 11:13वार वेला
- कालसुबह 11:13 – दोपहर 12:34काल वेला
- शुभदोपहर 12:34 – दोपहर 1:55
- रोगदोपहर 1:55 – दोपहर 3:16
- उद्वेगदोपहर 3:16 – शाम 4:37
- चरशाम 4:37 – शाम 5:58
चौघड़िया · रात
- रोगशाम 5:58 – शाम 7:37
- कालशाम 7:37 – रात 9:16
- लाभरात 9:16 – रात 10:55काल रात्रि
- उद्वेगरात 10:55 – रात 12:34, 31 जनवरी
- शुभरात 12:34 – रात 2:13, 31 जनवरी
- अमृतरात 2:13 – रात 3:52, 31 जनवरी
- चररात 3:52 – सुबह 5:31, 31 जनवरी
- रोगसुबह 5:31 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
होरा
- शुक्रसुबह 7:10 – सुबह 8:04
- बुधसुबह 8:04 – सुबह 8:58
- चंद्रसुबह 8:58 – सुबह 9:52
- शनिसुबह 9:52 – सुबह 10:46
- गुरुसुबह 10:46 – सुबह 11:40
- मंगलसुबह 11:40 – दोपहर 12:34
- सूर्यदोपहर 12:34 – दोपहर 1:28
- शुक्रदोपहर 1:28 – दोपहर 2:22
- बुधदोपहर 2:22 – दोपहर 3:16
- चंद्रदोपहर 3:16 – शाम 4:10
- शनिशाम 4:10 – शाम 5:04
- गुरुशाम 5:04 – शाम 5:58
- मंगलशाम 5:58 – शाम 7:04
- सूर्यशाम 7:04 – रात 8:10
- शुक्ररात 8:10 – रात 9:16
- बुधरात 9:16 – रात 10:22
- चंद्ररात 10:22 – रात 11:28
- शनिरात 11:28 – रात 12:34, 31 जनवरी
- गुरुरात 12:34 – रात 1:40, 31 जनवरी
- मंगलरात 1:40 – रात 2:46, 31 जनवरी
- सूर्यरात 2:46 – रात 3:52, 31 जनवरी
- शुक्ररात 3:52 – सुबह 4:58, 31 जनवरी
- बुधसुबह 4:58 – सुबह 6:04, 31 जनवरी
- चंद्रसुबह 6:04 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
- सुखम्सुबह 7:10 – सुबह 8:31
- सोरम्सुबह 8:31 – सुबह 9:52
- उत्तिसुबह 9:52 – सुबह 11:13
- विषम्सुबह 11:13 – दोपहर 12:34
- अमृतम्दोपहर 12:34 – दोपहर 1:55
- रोगम्दोपहर 1:55 – दोपहर 3:16
- लाभम्दोपहर 3:16 – शाम 4:37
- धनम्शाम 4:37 – शाम 5:58
- रोगम्शाम 5:58 – शाम 7:37
- लाभम्शाम 7:37 – रात 9:16
- धनम्रात 9:16 – रात 10:55
- सुखम्रात 10:55 – रात 12:34, 31 जनवरी
- सोरम्रात 12:34 – रात 2:13, 31 जनवरी
- उत्तिरात 2:13 – रात 3:52, 31 जनवरी
- विषम्रात 3:52 – सुबह 5:31, 31 जनवरी
- अमृतम्सुबह 5:31 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न
- चंद्र राशि
- मिथुन
- सूर्य राशि
- मकर
- सूर्य नक्षत्र
- श्रवण 2 रात 12:18, 31 जनवरी तक
- श्रवण 3
- अगली संक्रांति
- कुंभ · 13 फ़रवरी 2026, सुबह 4:09, 13 फ़रवरी
चुने हुए दिन का उदय लग्न
पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।
- मकरसुबह 6:18 – सुबह 8:00चरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:08
- कुंभसुबह 8:00 – सुबह 9:27स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 8:56
- मीनसुबह 9:27 – सुबह 10:52द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 9:52
- मेषसुबह 10:52 – दोपहर 12:27चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 11:57
- वृषभदोपहर 12:27 – दोपहर 2:23स्थिरपुष्कर भाग 14° · दोपहर 1:18
- मिथुनदोपहर 2:23 – शाम 4:38द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · दोपहर 3:42
- कर्कशाम 4:38 – शाम 6:58चरपुष्कर भाग 8° · शाम 5:15
- सिंहशाम 6:58 – रात 9:15स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 8:25
- कन्यारात 9:15 – रात 11:32द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 9:56
- तुलारात 11:32 – रात 1:51, 31 जनवरीचरपुष्कर भाग 24° · रात 1:23, 31 जनवरी
- वृश्चिकरात 1:51 – सुबह 4:10, 31 जनवरीस्थिरपुष्कर भाग 11° · रात 2:43, 31 जनवरी
- धनुसुबह 4:10 – सुबह 6:14, 31 जनवरीद्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · सुबह 5:47, 31 जनवरी
- मकरसुबह 6:14 – सुबह 7:56, 31 जनवरीचरपुष्कर भाग 14° · सुबह 7:04, 31 जनवरी
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का ग्रह गोचर
सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।
| ग्रह | राशि | अंश | नक्षत्र · चरण | अगला राशि परिवर्तन |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | मकर | 15°57′ | श्रवण · 2 | कुंभ · 13 फ़रवरी 2026 |
| चंद्र | मिथुन | 7°41′ | आर्द्रा · 1 | कर्क · 31 जनवरी 2026 |
| मंगल अस्त | मकर | 11°00′ | श्रवण · 1 | कुंभ · 23 फ़रवरी 2026 |
| बुध अस्त | मकर | 21°51′ | श्रवण · 4 | कुंभ · 3 फ़रवरी 2026 |
| गुरु वक्री | मिथुन | 23°21′ | पुनर्वसु · 2 | कर्क · 2 जून 2026 |
| शुक्र अस्त | मकर | 21°32′ | श्रवण · 4 | कुंभ · 6 फ़रवरी 2026 |
| शनि | मीन | 4°14′ | उत्तरा भाद्रपद · 1 | मेष · 3 जून 2027 |
| राहु | कुंभ | 15°02′ | शतभिषा · 3 | मकर · 25 नवंबर 2026 |
| केतु | सिंह | 15°02′ | पूर्वा फाल्गुनी · 1 | कर्क · 25 नवंबर 2026 |
दैनिक पंचांग
हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2082 और शक संवत
- पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
- माघ
- अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
- माघ
- विक्रम संवत
- 2082 सिद्धार्थी
- शक संवत
- 1947 विश्वावसु
यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ
- चंद्र मास के अनुसार ऋतु
- शिशिर
- सूर्य के अनुसार ऋतु
- शिशिर
- अयनांत के अनुसार अयन
- उत्तरायण
- मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
- उत्तरायण
- सौर मास
- माघ, दिन 17
- भारतीय राष्ट्रीय तिथि
- 10 माघ 1947
- कलि संवत
- 5126
- वर्ष का राजा
- सूर्य
- वर्ष का मंत्री
- सूर्य
वर्ष का मंत्रिमंडल
- सस्येश
- बुध
- दुर्गेश
- शनि
- धनेश
- मंगल
- रसेश
- शुक्र
- धान्येश
- चंद्र
- नीरसेश
- बुध
- फलेश
- शनि
- मेघेश
- सूर्य
युग और दिन संख्या
- अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
- 24°13′17″
- जूलियन दिन
- 2461070.5
- गुजराती विक्रम संवत
- 2082
- बृहस्पति संवत्सर
- सिद्धार्थी 15 मार्च 2025 से; फिर रौद्र 11 मार्च 2026 से
दैनिक पंचांग
आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल
चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।
अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या
चुना हुआ दिन
अभी चल रहा है
शुक्र अस्त: दिल्ली से दृश्यता के अनुसार, मुहूर्त चिंतामणि 5.27 के अतिरिक्त दिनों सहित, 26 नवंबर – 12 फ़रवरी (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 26 नवंबर – 17 फ़रवरी।
ग्रहण
- कंकणाकृति सूर्य ग्रहण · मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
- खग्रास चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 3 मार्च 2026 · यहाँ से दिखेगा · दोपहर 3:20 – शाम 6:48, 3 मार्च सूतक: सुबह 6:20 – शाम 6:48, 3 मार्च। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
आगे
- शुक्र प्रदोष व्रतशुक्रवार, 30 जनवरी 2026चुना हुआ दिन
- पूर्णिमारविवार, 1 फ़रवरी 20262 दिन में
- पूर्णिमा व्रतरविवार, 1 फ़रवरी 20262 दिन में
- संकष्टी चतुर्थीगुरुवार, 5 फ़रवरी 20266 दिन में
- विजया एकादशीशुक्रवार, 13 फ़रवरी 202614 दिन में
- कुंभ संक्रांतिशुक्रवार, 13 फ़रवरी 202614 दिन में
- मासिक शिवरात्रिरविवार, 15 फ़रवरी 202616 दिन में
- अमावस्यामंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 · श्राद्ध का दिन18 दिन में
दैनिक पंचांग
चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल
- दिशा शूल
- पश्चिम
- चंद्र वास
- पश्चिम सुबह 7:10 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
- राहु वास
- दक्षिण-पूर्व
- शिव वास
- कैलाश पर सुबह 7:10 – सुबह 11:10 · वृषभ पर सुबह 11:10 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
- अग्नि वास
- पृथ्वी पर सुबह 7:10 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
- आनंदादि योग
- पद्म सुबह 7:10 – रात 3:28, 31 जनवरी · लुम्बक रात 3:28 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
- तमिल योग
- सिद्ध योग सुबह 7:10 – सुबह 7:10, 31 जनवरी
दैनिक पंचांग
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:34 – दोपहर 12:56, राहु काल से अलग) और अमृत काल (शाम 6:18 – शाम 7:46) चुने जाते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:25 – सुबह 6:18) पूजा और अध्ययन के लिए है।
ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य, यमगण्ड छोड़ती है।
चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।
कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
अगले दिन का पंचांग
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी
- नक्षत्र
- पुनर्वसु
- सूर्योदय
- सुबह 7:10
- राहु काल
- सुबह 9:52 – सुबह 11:13
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56
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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है
- हमारा अपना इंजन
- हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
- दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
- हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
- सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
- सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
- पंचांग अलग क्यों होते हैं
- दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
- पंचांग का दिन
- एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
- महीने
- दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
- एकादशी
- स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
- राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
- वर्ज्य और अमृत काल
- हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
- भद्रा
- भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
- तमिल योग
- तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
- वर्ष का राजा और मंत्री
- राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
- समय
- शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
- मिलते हुए समय
- जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।
पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।
01तिथि: चंद्र दिवस
तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।
02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है
हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
03वार: सप्ताह का दिन
हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।
04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा
आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।
05योग और करण
योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
06राहु काल, यमगंड और गुलिक
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।
07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।
08चौघड़िया और होरा
चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।
09महीने और संवत
उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।
प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?
दिल्ली में शुक्ल द्वादशी सुबह 11:10 तक है, फिर शुक्ल त्रयोदशी।
अगले दिन की तिथि क्या है?
दिल्ली में अगले दिन सूर्योदय पर शुक्ल त्रयोदशी तिथि रहेगी।
चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?
दिल्ली में चुने हुए दिन राहु काल सुबह 11:13 – दोपहर 12:34 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।
चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?
चौघड़िया वाले हिस्से में दिल्ली के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।
चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?
दिल्ली में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 – सुबह 6:18, प्रातः सन्ध्या सुबह 5:51 – सुबह 7:10, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56 (दोपहर 12:13 – दोपहर 12:34 राहु काल के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:22 – दोपहर 3:06 (दोपहर 2:22 – दोपहर 2:39 वर्ज्य के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 5:58 – शाम 6:25, सायाह्न सन्ध्या शाम 5:58 – शाम 7:18, अमृत काल शाम 6:18 – शाम 7:46, निशिता मुहूर्त रात 12:08 – रात 1:01, 31 जनवरी।
चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?
दिल्ली में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 – दोपहर 12:56 है।
चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
दिल्ली में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:25 – सुबह 6:18 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।
चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?
चुने हुए दिन आर्द्रा नक्षत्र है, रात 3:28, 31 जनवरी तक; फिर पुनर्वसु।
चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?
चुने हुए दिन शुक्ल पक्ष है। अगली पूर्णिमा 2 फ़रवरी 2026, अगली अमावस्या 17 फ़रवरी 2026।
चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?
हिंदू महीना माघ है (पूर्णिमांत; अमांत में माघ), विक्रम संवत 2082 सिद्धार्थी और शक संवत 1947।
चुने हुए दिन पंचक है क्या?
चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।
चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?
चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।
चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?
सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह शुक्र की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।
चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?
चंद्रमा चुने हुए दिन मिथुन राशि में है।
चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?
चुने हुए दिन, शुक्रवार को, दिशा शूल पश्चिम दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।
चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?
चुने हुए दिन प्रदोष व्रत (शुक्ल)।
अगली एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या कब है?
पूर्णिमा: रविवार, 1 फ़रवरी 2026; पूर्णिमा व्रत: रविवार, 1 फ़रवरी 2026; विजया एकादशी: शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026; अमावस्या: मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026।
चुना हुआ दिन कैसा है?
चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:34 – दोपहर 12:56, राहु काल से अलग) और अमृत काल (शाम 6:18 – शाम 7:46) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 5:25 – सुबह 6:18) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, राहु काल, वर्ज्य, यमगण्ड छोड़ती है। चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।
पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?
पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।
राहु काल कैसे निकाला जाता है?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।
क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।
कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?
नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।
उदया तिथि क्या होती है?
उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।
हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।
दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?
वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।
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