वह शहर चुनें जहाँ आप अभी रहते हैं।

दैनिक पंचांग · वैशाख · विक्रम संवत 2083

दिल्ली का पंचांग, 14 मई 2026

गुरुवार, 14 मई 2026

गुरुवार, 14 मई 2026 दिल्ली में कृष्ण द्वादशी तिथि सुबह 11:21 तक है, उसके बाद कृष्ण त्रयोदशी; नक्षत्र रेवती रात 10:34 तक।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    कृष्ण द्वादशी सुबह 11:21 तक

    फिर कृष्ण त्रयोदशी

    कृष्ण पक्ष की 12वीं तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    गुरुवार

    गुरुवार, गुरु का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    रेवती रात 10:34 तक

    फिर अश्विनी

    27 नक्षत्रों में 27वाँ: निरयण राशिचक्र में 346°40′ से 360° तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    प्रीति शाम 5:54 तक

    फिर आयुष्मान

    27 नित्य योगों में दूसरा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    तैतिल सुबह 11:21 तक

    फिर गर रात 10:01 तक

    फिर वणिज

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: कृष्ण द्वादशी। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: रेवती 1 · सुबह 5:56 · रेवती 2 · सुबह 11:31 · रेवती 3 · शाम 5:04 · रेवती 4 · रात 10:34 · अश्विनी 1 · सुबह 4:02, 15 मई

इस पेज का हर समय दिल्ली (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 5:31
सूर्यास्त
शाम 7:04
चंद्रोदय
रात 3:55, 15 मई
चंद्रास्त
शाम 4:27
दिनमान
13 घंटे 33 मिनट · 33 घटी 53 पल · पिछले दिन से 1 मिनट 14 सेकंड अधिक
रात्रिमान
10 घंटे 26 मिनट · 26 घटी 6 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:18

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 3:59, 15 मई है।

कृष्ण पक्ष, घटता हँसिया चाँद चंद्रमा का 11% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 26.5 दिन अगली पूर्णिमा: 31 मई 2026 अगली अमावस्या: 17 मई 2026

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 5:31सुबह 8:31सुबह 11:31दोपहर 2:31शाम 5:31रात 8:31रात 11:31रात 2:30सुबह 5:30

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 5:31दोपहर 12:00शाम 7:04

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 7:04रात 12:00सुबह 5:30
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:07 – सुबह 4:49भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 4:28 – सुबह 5:31सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
  • अभिजित मुहूर्तसुबह 11:50 – दोपहर 12:45दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।वर्ज्य के साथ: सुबह 11:50 – दोपहर 12:45 (55 मिनट)।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:33 – दोपहर 3:27दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।राहु काल के साथ: दोपहर 2:33 – दोपहर 3:27 (54 मिनट)।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 7:04 – शाम 7:25गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 7:04 – रात 8:07सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
  • अमृत कालरात 8:20 – रात 9:50हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।
  • निशिता मुहूर्तरात 11:56 – रात 12:38, 15 मईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए गए हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया गया।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • सर्वार्थ सिद्धि योगपूरे दिनवार और नक्षत्र का ऐसा मेल, जिसे परंपरा में लगभग हर तरह के काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • यमगण्डसुबह 5:31 – सुबह 7:13वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • गुलिक कालसुबह 8:54 – सुबह 10:36वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • दुर्मुहूर्तसुबह 10:02 – सुबह 10:56वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यसुबह 11:26 – दोपहर 12:55हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।अभिजित मुहूर्त के साथ: सुबह 11:50 – दोपहर 12:45 (55 मिनट)।
  • राहु कालदोपहर 1:59 – दोपहर 3:41वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।विजय मुहूर्त के साथ: दोपहर 2:33 – दोपहर 3:27 (54 मिनट)।
  • दुर्मुहूर्तदोपहर 3:27 – शाम 4:21वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
10 मई, दोपहर 12:13 → 14 मई, रात 10:34
गंड मूल
14 मई, रात 12:18 → 15 मई, रात 8:15
दिशा शूल
दक्षिणवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय (सुबह 5:30, 15 मई) तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय भी इसी दिन में आ सकता है। जो समय किसी और तारीख़ पर शुरू या ख़त्म होता है, उसकी तारीख़ साथ दी गई है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. शुभसुबह 5:31 – सुबह 7:13
  2. रोगसुबह 7:13 – सुबह 8:54
  3. उद्वेगसुबह 8:54 – सुबह 10:36
  4. चरसुबह 10:36 – दोपहर 12:18
  5. लाभदोपहर 12:18 – दोपहर 1:59
  6. अमृतदोपहर 1:59 – दोपहर 3:41
  7. कालदोपहर 3:41 – शाम 5:22काल वेला
  8. शुभशाम 5:22 – शाम 7:04वार वेला

चौघड़िया · रात

  1. अमृतशाम 7:04 – रात 8:22
  2. चररात 8:22 – रात 9:41
  3. रोगरात 9:41 – रात 10:59
  4. कालरात 10:59 – रात 12:17, 15 मई
  5. लाभरात 12:17 – रात 1:36, 15 मईकाल रात्रि
  6. उद्वेगरात 1:36 – रात 2:54, 15 मई
  7. शुभरात 2:54 – सुबह 4:12, 15 मई
  8. अमृतसुबह 4:12 – सुबह 5:30, 15 मई

होरा

  1. गुरुसुबह 5:31 – सुबह 6:39
  2. मंगलसुबह 6:39 – सुबह 7:46
  3. सूर्यसुबह 7:46 – सुबह 8:54
  4. शुक्रसुबह 8:54 – सुबह 10:02
  5. बुधसुबह 10:02 – सुबह 11:10
  6. चंद्रसुबह 11:10 – दोपहर 12:18
  7. शनिदोपहर 12:18 – दोपहर 1:25
  8. गुरुदोपहर 1:25 – दोपहर 2:33
  9. मंगलदोपहर 2:33 – दोपहर 3:41
  10. सूर्यदोपहर 3:41 – शाम 4:49
  11. शुक्रशाम 4:49 – शाम 5:56
  12. बुधशाम 5:56 – शाम 7:04
  13. चंद्रशाम 7:04 – शाम 7:56
  14. शनिशाम 7:56 – रात 8:48
  15. गुरुरात 8:48 – रात 9:41
  16. मंगलरात 9:41 – रात 10:33
  17. सूर्यरात 10:33 – रात 11:25
  18. शुक्ररात 11:25 – रात 12:17, 15 मई
  19. बुधरात 12:17 – रात 1:09, 15 मई
  20. चंद्ररात 1:09 – रात 2:02, 15 मई
  21. शनिरात 2:02 – रात 2:54, 15 मई
  22. गुरुरात 2:54 – रात 3:46, 15 मई
  23. मंगलरात 3:46 – सुबह 4:38, 15 मई
  24. सूर्यसुबह 4:38 – सुबह 5:30, 15 मई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. धनम्सुबह 5:31 – सुबह 7:13
  2. सुखम्सुबह 7:13 – सुबह 8:54
  3. सोरम्सुबह 8:54 – सुबह 10:36
  4. उत्तिसुबह 10:36 – दोपहर 12:18
  5. अमृतम्दोपहर 12:18 – दोपहर 1:59
  6. विषम्दोपहर 1:59 – दोपहर 3:41
  7. रोगम्दोपहर 3:41 – शाम 5:22
  8. लाभम्शाम 5:22 – शाम 7:04
  1. अमृतम्शाम 7:04 – रात 8:22
  2. विषम्रात 8:22 – रात 9:41
  3. रोगम्रात 9:41 – रात 10:59
  4. लाभम्रात 10:59 – रात 12:17, 15 मई
  5. धनम्रात 12:17 – रात 1:36, 15 मई
  6. सुखम्रात 1:36 – रात 2:54, 15 मई
  7. सोरम्रात 2:54 – सुबह 4:12, 15 मई
  8. उत्तिसुबह 4:12 – सुबह 5:30, 15 मई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
मीन रात 10:34 तक
मेष
सूर्य राशि
मेष
सूर्य नक्षत्र
कृत्तिका 1
अगली संक्रांति
वृषभ · 15 मई 2026, सुबह 6:22, 15 मई

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. मेषसुबह 4:03 – सुबह 5:38चरपुष्कर भाग 21° · सुबह 5:08
  2. वृषभसुबह 5:38 – सुबह 7:34स्थिरपुष्कर भाग 14° · सुबह 6:30
  3. मिथुनसुबह 7:34 – सुबह 9:49द्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 8:53
  4. कर्कसुबह 9:49 – दोपहर 12:09चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 10:26
  5. सिंहदोपहर 12:09 – दोपहर 2:26स्थिरपुष्कर भाग 19° · दोपहर 1:36
  6. कन्यादोपहर 2:26 – शाम 4:43द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · दोपहर 3:07
  7. तुलाशाम 4:43 – शाम 7:02चरपुष्कर भाग 24° · शाम 6:34
  8. वृश्चिकशाम 7:02 – रात 9:21स्थिरपुष्कर भाग 11° · शाम 7:54
  9. धनुरात 9:21 – रात 11:25द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · रात 10:58
  10. मकररात 11:25 – रात 1:07, 15 मईचरपुष्कर भाग 14° · रात 12:15, 15 मई
  11. कुंभरात 1:07 – रात 2:34, 15 मईस्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 2:03, 15 मई
  12. मीनरात 2:34 – रात 3:59, 15 मईद्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 3:00, 15 मई
  13. मेषरात 3:59 – सुबह 5:35, 15 मईचरपुष्कर भाग 21° · सुबह 5:04, 15 मई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यमेष29°00′कृत्तिका · 1वृषभ · 15 मई 2026
चंद्रमीन19°45′रेवती · 1मेष · 14 मई 2026
मंगलमेष2°03′अश्विनी · 1वृषभ · 21 जून 2026
बुध अस्तमेष28°16′कृत्तिका · 1वृषभ · 15 मई 2026
गुरुमिथुन26°40′पुनर्वसु · 2कर्क · 2 जून 2026
शुक्रवृषभ29°44′मृगशिरा · 2मिथुन · 14 मई 2026
शनिमीन16°19′उत्तरा भाद्रपद · 4मेष · 3 जून 2027
राहुकुंभ11°31′शतभिषा · 2मकर · 25 नवंबर 2026
केतुसिंह11°31′मघा · 4कर्क · 25 नवंबर 2026

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2083 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
ज्येष्ठ
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083 रौद्र
शक संवत
1948 पराभव

यहाँ पहले अमांत नाम: आपकी पसंद। पूर्णिमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
वसंत
सूर्य के अनुसार ऋतु
ग्रीष्म
अयनांत के अनुसार अयन
उत्तरायण
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
उत्तरायण
सौर मास
वैशाख, दिन 31
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
24 वैशाख 1948
कलि संवत
5127
वर्ष का राजा
गुरु
वर्ष का मंत्री
मंगल
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
गुरु
दुर्गेश
चंद्र
धनेश
गुरु
रसेश
शनि
धान्येश
बुध
नीरसेश
गुरु
फलेश
चंद्र
मेघेश
चंद्र
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°13′31″
जूलियन दिन
2461174.5
गुजराती विक्रम संवत
2082
बृहस्पति संवत्सर
रौद्र 11 मार्च 2026 से; फिर दुर्मति 7 मार्च 2027 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

  • प्रदोष व्रत (कृष्ण)

ग्रहण

  • खग्रास सूर्य ग्रहण · बुधवार, 12 अगस्त 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

आगे

  1. गुरु प्रदोष व्रतगुरुवार, 14 मई 2026चुना हुआ दिन
  2. मासिक शिवरात्रिशुक्रवार, 15 मई 20261 दिन में
  3. वृषभ संक्रांतिशुक्रवार, 15 मई 20261 दिन में
  4. शनि अमावस्याशनिवार, 16 मई 2026 · श्राद्ध का दिन2 दिन में
  5. पद्मिनी एकादशीबुधवार, 27 मई 202613 दिन में
  6. पूर्णिमा व्रतशनिवार, 30 मई 202616 दिन में
  7. पूर्णिमारविवार, 31 मई 202617 दिन में
  8. संकष्टी चतुर्थीबुधवार, 3 जून 202620 दिन में

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
दक्षिण
चंद्र वास
उत्तर सुबह 5:31 – रात 10:34 · पूर्व रात 10:34 – सुबह 5:30, 15 मई
राहु वास
दक्षिण
शिव वास
वृषभ पर सुबह 5:31 – सुबह 11:21 · भोजन में सुबह 11:21 – सुबह 5:30, 15 मई
अग्नि वास
आकाश में सुबह 5:31 – सुबह 11:21 · पाताल में सुबह 11:21 – सुबह 5:30, 15 मई
आनंदादि योग
मित्र सुबह 5:31 – रात 10:34 · मानस रात 10:34 – सुबह 5:30, 15 मई
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 5:31 – रात 10:34 · अमृत योग रात 10:34 – सुबह 5:30, 15 मई

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (रात 8:20 – रात 9:50) चुना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:07 – सुबह 4:49) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य, राहु काल छोड़ती है।

चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्र
अश्विनी
सूर्योदय
सुबह 5:30
राहु काल
सुबह 10:36 – दोपहर 12:18
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:50 – दोपहर 12:45
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

OfficialAstrology™

गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

दिल्ली में कृष्ण द्वादशी सुबह 11:21 तक है, फिर कृष्ण त्रयोदशी।

अगले दिन की तिथि क्या है?

दिल्ली में अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण त्रयोदशी तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

दिल्ली में चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:41 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में दिल्ली के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

दिल्ली में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:07 – सुबह 4:49, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:28 – सुबह 5:31, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:50 – दोपहर 12:45 (सुबह 11:50 – दोपहर 12:45 वर्ज्य के साथ), विजय मुहूर्त दोपहर 2:33 – दोपहर 3:27 (दोपहर 2:33 – दोपहर 3:27 राहु काल के साथ), गोधूलि मुहूर्त शाम 7:04 – शाम 7:25, सायाह्न सन्ध्या शाम 7:04 – रात 8:07, अमृत काल रात 8:20 – रात 9:50, निशिता मुहूर्त रात 11:56 – रात 12:38, 15 मई।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

दिल्ली में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 – दोपहर 12:45 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

दिल्ली में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:07 – सुबह 4:49 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन रेवती नक्षत्र है, रात 10:34 तक; फिर अश्विनी।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 31 मई 2026, अगली अमावस्या 17 मई 2026।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना वैशाख है (अमांत; पूर्णिमांत में ज्येष्ठ), विक्रम संवत 2083 रौद्र और शक संवत 1948।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

हाँ: पंचक, 10 मई, दोपहर 12:13 → 14 मई, रात 10:34। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह गुरु की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन मीन राशि में है, रात 10:34 पर मेष में जाएगा।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, गुरुवार को, दिशा शूल दक्षिण दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन प्रदोष व्रत (कृष्ण)।

अगली एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या कब है?

शनि अमावस्या: शनिवार, 16 मई 2026; पद्मिनी एकादशी: बुधवार, 27 मई 2026; पूर्णिमा व्रत: शनिवार, 30 मई 2026; पूर्णिमा: रविवार, 31 मई 2026।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (रात 8:20 – रात 9:50) चुना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:07 – सुबह 4:49) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए यमगण्ड, दुर्मुहूर्त, वर्ज्य, राहु काल छोड़ती है। चुने हुए दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

दैनिक पंचांग

आपकी अपनी कुंडली, इसी सटीकता से।

पंचांग आपके शहर में सबके लिए एक है। आपकी जन्मपत्रिका केवल आपकी है।

मेरी जन्मपत्रिका बनाएँ