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दैनिक पंचांग · श्रावण · विक्रम संवत 2084

दिल्ली का पंचांग, 20 जुलाई 2027

मंगलवार, 20 जुलाई 2027

मंगलवार, 20 जुलाई 2027 दिल्ली में कृष्ण द्वितीया तिथि रात 2:22, 21 जुलाई तक है, उसके बाद कृष्ण तृतीया; नक्षत्र श्रवण शाम 5:32 तक।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का पंचांग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

दिन के पाँच अंग। हर अंग अपने आरंभ से अंत तक चलता है, इसलिए एक दिन में अक्सर दो आते हैं।

  1. तिथि

    कृष्ण द्वितीया रात 2:22, 21 जुलाई तक

    फिर कृष्ण तृतीया

    कृष्ण पक्ष की दूसरी तिथि; एक तिथि तब तक रहती है जब तक चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है।

  2. वार

    मंगलवार

    मंगलवार, मंगल का दिन; वार एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।

  3. नक्षत्र

    श्रवण शाम 5:32 तक

    फिर धनिष्ठा

    27 नक्षत्रों में 22वाँ: निरयण राशिचक्र में 280° से 293°20′ तक का भाग, जिसे चंद्रमा लगभग एक दिन में पार करता है।

  4. योग

    प्रीति शाम 5:32 तक

    फिर आयुष्मान

    27 नित्य योगों में दूसरा; सूर्य और चंद्रमा के निरयण भोगांश के योग से गिना जाता है।

  5. करण

    तैतिल दोपहर 1:05 तक

    फिर गर रात 2:22, 21 जुलाई तक

    फिर वणिज

    सात चर करणों में से एक; करण तिथि का आधा भाग होता है।

पक्ष: कृष्ण

उदया तिथि: कृष्ण द्वितीया। सूर्योदय के समय की तिथि दिन का नाम तय करती है; व्रत और त्योहार इसी से चलते हैं।

नक्षत्र चरण बदलते हैं: श्रवण 3 · सुबह 10:45 · श्रवण 4 · शाम 5:32 · धनिष्ठा 1 · रात 12:18, 21 जुलाई

इस पेज का हर समय दिल्ली (Asia/Kolkata) के लिए है। सूर्योदय, और उसके साथ दिन का हर समय, शहर-दर-शहर बदलता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

सूर्योदय
सुबह 5:35
सूर्यास्त
शाम 7:19
चंद्रोदय
रात 8:26
चंद्रास्त
सुबह 6:51
दिनमान
13 घंटे 43 मिनट · 34 घटी 19 पल · पिछले दिन से 0 मिनट 57 सेकंड कम
रात्रिमान
10 घंटे 16 मिनट · 25 घटी 42 पल
मध्याह्न
दोपहर 12:27

चंद्रोदय तब दिखाया है जब चंद्रमा का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है; उसके केंद्र का समय, जैसा कुछ पंचांग छापते हैं, रात 8:30 है।

कृष्ण पक्ष, आधे से बड़ा घटता चाँद चंद्रमा का 98% भाग प्रकाशित · चंद्र आयु 15.9 दिन अगली पूर्णिमा: 17 अगस्त 2027 अगली अमावस्या: 2 अगस्त 2027

दैनिक पंचांग

एक नज़र में पूरा दिन

इस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। हरे समय वे हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा नए काम के लिए चुनती है; हल्के रंग वाले समय वे हैं जिन्हें वह छोड़ती है।

सुबह 5:35सुबह 8:36सुबह 11:36दोपहर 2:36शाम 5:36रात 8:36रात 11:36रात 2:36सुबह 5:36

दिन · सूर्योदय → सूर्यास्त

सुबह 5:35दोपहर 12:00शाम 7:19

रात · सूर्यास्त → अगला सूर्योदय

शाम 7:19रात 12:00सुबह 5:36
  • ज्योतिष परंपरा में नए काम के लिए चुना जाता है
  • रात

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल

वे समय जिन्हें वैदिक ज्योतिष परंपरा शुभ मानती है, हर एक का अपना उपयोग: हर समय के नीचे लिखा है कि किसके लिए।

  • ब्रह्म मुहूर्तसुबह 4:13 – सुबह 4:54भोर से पहले का मुहूर्त, ध्यान, अध्ययन और पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
  • प्रातः सन्ध्यासुबह 4:34 – सुबह 5:35सूर्योदय तक का प्रातः संधि-काल, पूजा और सन्ध्या-वन्दन के लिए।
  • अमृत कालसुबह 5:46 – सुबह 7:35हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जो परंपरा से शुभ माना जाता है।
  • अभिजित मुहूर्तदोपहर 12:00 – दोपहर 12:55दिन के 15 मुहूर्तों में आठवाँ, स्थानीय मध्याह्न के बीचों-बीच; काम शुरू करने के लिए बहुत प्रचलित।
  • विजय मुहूर्तदोपहर 2:45 – दोपहर 3:39दिन का ग्यारहवाँ मुहूर्त, यात्रा पर निकलने और विजय के कामों के लिए परंपरा से चुना जाता है।
  • गोधूलि मुहूर्तशाम 7:19 – शाम 7:40गोधूलि वेला: सूर्यास्त से शुरू होने वाला छोटा समय, विवाह के लिए परंपरा से प्रयोग होता है।
  • सायाह्न सन्ध्याशाम 7:19 – रात 8:21सूर्यास्त से शुरू होने वाला संधि-काल, पूजा और दीप जलाने के लिए।
  • निशिता मुहूर्तरात 12:07 – रात 12:48, 21 जुलाईहिन्दू मध्यरात्रि के आसपास का मुहूर्त, जन्माष्टमी और शिवरात्रि जैसी रात्रि पूजाओं के लिए।

चुने हुए दिन के विशेष योग

  • द्विपुष्कर योगशाम 5:32 – रात 2:22, 21 जुलाईपरंपरा के अनुसार इस समय किया गया काम दोबारा होता है; इसलिए इसे लाभ के कामों के लिए चुना जाता है और दुख के अवसरों से दूर रखा जाता है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का राहु काल और नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय

ज्योतिष परंपरा इन समयों में नया काम शुरू करने से बचती है। रोज़ की पूजा और सामान्य काम पहले की तरह चलते रहते हैं।

  • दुर्मुहूर्तसुबह 8:20 – सुबह 9:15वार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • यमगण्डसुबह 9:01 – सुबह 10:44वार के अनुसार तय दिन का एक और आठवाँ भाग, जिसमें भी नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • गुलिक कालदोपहर 12:27 – दोपहर 2:10वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, शनि से जुड़े गुलिक के नाम पर। पंचांग इसे राहु काल और यमगण्ड के साथ छापते हैं; इसे कितना महत्व दें, इस पर परंपराएँ अलग हैं।
  • राहु कालदोपहर 3:53 – शाम 5:36वार के अनुसार तय दिन का एक आठवाँ भाग, जिसमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
  • वर्ज्यरात 10:02 – रात 11:50हर नक्षत्र के भीतर उसके 60 भागों में से 4 भाग का समय, जिसमें नया काम शुरू करना परंपरा से टाला जाता है।
  • दुर्मुहूर्तरात 11:26 – रात 12:07, 21 जुलाईवार के अनुसार एक या दो मुहूर्त, जिनमें नए काम की शुरुआत परंपरा से नहीं की जाती।
भद्रा
चुने हुए दिन नहीं
पंचक
चुने हुए दिन नहीं
गंड मूल
चुने हुए दिन नहीं
दिशा शूल
उत्तरवैदिक ज्योतिष परंपरा चुने हुए दिन इस दिशा की ओर यात्रा शुरू करने से बचती है।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का चौघड़िया और होरा

दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे हैं; हर घंटा एक ग्रह की होरा है। नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ, और यात्रा के लिए चर पसंद किए जाते हैं।

चौघड़िया · दिन

  1. रोगसुबह 5:35 – सुबह 7:18
  2. उद्वेगसुबह 7:18 – सुबह 9:01वार वेला
  3. चरसुबह 9:01 – सुबह 10:44
  4. लाभसुबह 10:44 – दोपहर 12:27
  5. अमृतदोपहर 12:27 – दोपहर 2:10
  6. कालदोपहर 2:10 – दोपहर 3:53काल वेला
  7. शुभदोपहर 3:53 – शाम 5:36
  8. रोगशाम 5:36 – शाम 7:19

चौघड़िया · रात

  1. कालशाम 7:19 – रात 8:36
  2. लाभरात 8:36 – रात 9:53काल रात्रि
  3. उद्वेगरात 9:53 – रात 11:10
  4. शुभरात 11:10 – रात 12:28, 21 जुलाई
  5. अमृतरात 12:28 – रात 1:45, 21 जुलाई
  6. चररात 1:45 – रात 3:02, 21 जुलाई
  7. रोगरात 3:02 – सुबह 4:19, 21 जुलाई
  8. कालसुबह 4:19 – सुबह 5:36, 21 जुलाई

होरा

  1. मंगलसुबह 5:35 – सुबह 6:44
  2. सूर्यसुबह 6:44 – सुबह 7:53
  3. शुक्रसुबह 7:53 – सुबह 9:01
  4. बुधसुबह 9:01 – सुबह 10:10
  5. चंद्रसुबह 10:10 – सुबह 11:19
  6. शनिसुबह 11:19 – दोपहर 12:27
  7. गुरुदोपहर 12:27 – दोपहर 1:36
  8. मंगलदोपहर 1:36 – दोपहर 2:45
  9. सूर्यदोपहर 2:45 – दोपहर 3:53
  10. शुक्रदोपहर 3:53 – शाम 5:02
  11. बुधशाम 5:02 – शाम 6:10
  12. चंद्रशाम 6:10 – शाम 7:19
  13. शनिशाम 7:19 – रात 8:10
  14. गुरुरात 8:10 – रात 9:02
  15. मंगलरात 9:02 – रात 9:53
  16. सूर्यरात 9:53 – रात 10:45
  17. शुक्ररात 10:45 – रात 11:36
  18. बुधरात 11:36 – रात 12:28, 21 जुलाई
  19. चंद्ररात 12:28 – रात 1:19, 21 जुलाई
  20. शनिरात 1:19 – रात 2:10, 21 जुलाई
  21. गुरुरात 2:10 – रात 3:02, 21 जुलाई
  22. मंगलरात 3:02 – रात 3:53, 21 जुलाई
  23. सूर्यरात 3:53 – सुबह 4:45, 21 जुलाई
  24. शुक्रसुबह 4:45 – सुबह 5:36, 21 जुलाई
अन्य पद्धतियाँ: गौरी पंचांगम्
  1. रोगम्सुबह 5:35 – सुबह 7:18
  2. लाभम्सुबह 7:18 – सुबह 9:01
  3. धनम्सुबह 9:01 – सुबह 10:44
  4. सुखम्सुबह 10:44 – दोपहर 12:27
  5. सोरम्दोपहर 12:27 – दोपहर 2:10
  6. उत्तिदोपहर 2:10 – दोपहर 3:53
  7. विषम्दोपहर 3:53 – शाम 5:36
  8. अमृतम्शाम 5:36 – शाम 7:19
  1. सोरम्शाम 7:19 – रात 8:36
  2. उत्तिरात 8:36 – रात 9:53
  3. विषम्रात 9:53 – रात 11:10
  4. अमृतम्रात 11:10 – रात 12:28, 21 जुलाई
  5. रोगम्रात 12:28 – रात 1:45, 21 जुलाई
  6. लाभम्रात 1:45 – रात 3:02, 21 जुलाई
  7. धनम्रात 3:02 – सुबह 4:19, 21 जुलाई
  8. सुखम्सुबह 4:19 – सुबह 5:36, 21 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन चंद्रमा और सूर्य: राशि, नक्षत्र और उदय लग्न

चंद्र राशि
मकर
सूर्य राशि
कर्क
सूर्य नक्षत्र
पुनर्वसु 4 शाम 5:41 तक
पुष्य 1
अगली संक्रांति
सिंह · 17 अगस्त 2027, दोपहर 2:14, 17 अगस्त

चुने हुए दिन का उदय लग्न

पूर्व में उदित राशि, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। स्थायी आरंभ के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा स्थिर लग्न चुनती है।

  1. कर्कसुबह 5:26 – सुबह 7:47चरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:04
  2. सिंहसुबह 7:47 – सुबह 10:04स्थिरपुष्कर भाग 19° · सुबह 9:14
  3. कन्यासुबह 10:04 – दोपहर 12:20द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · सुबह 10:45
  4. तुलादोपहर 12:20 – दोपहर 2:40चरपुष्कर भाग 24° · दोपहर 2:12
  5. वृश्चिकदोपहर 2:40 – शाम 4:58स्थिरपुष्कर भाग 11° · दोपहर 3:31
  6. धनुशाम 4:58 – शाम 7:02द्विस्वभावपुष्कर भाग 23° · शाम 6:35
  7. मकरशाम 7:02 – रात 8:45चरपुष्कर भाग 14° · शाम 7:53
  8. कुंभरात 8:45 – रात 10:12स्थिरपुष्कर भाग 19° · रात 9:41
  9. मीनरात 10:12 – रात 11:37द्विस्वभावपुष्कर भाग 9° · रात 10:37
  10. मेषरात 11:37 – रात 1:12, 21 जुलाईचरपुष्कर भाग 21° · रात 12:42, 21 जुलाई
  11. वृषभरात 1:12 – रात 3:08, 21 जुलाईस्थिरपुष्कर भाग 14° · रात 2:03, 21 जुलाई
  12. मिथुनरात 3:08 – सुबह 5:22, 21 जुलाईद्विस्वभावपुष्कर भाग 18° · सुबह 4:27, 21 जुलाई
  13. कर्कसुबह 5:22 – सुबह 7:43, 21 जुलाईचरपुष्कर भाग 8° · सुबह 6:00, 21 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का ग्रह गोचर

सूर्योदय पर निरयण स्थिति (लाहिड़ी), उसी तरह जैसे आपकी कुंडली की गणना होती है।

ग्रहराशिअंशनक्षत्र · चरणअगला राशि परिवर्तन
सूर्यकर्क2°51′पुनर्वसु · 4सिंह · 17 अगस्त 2027
चंद्रमकर17°28′श्रवण · 3कुंभ · 21 जुलाई 2027
मंगलकन्या8°30′उत्तरा फाल्गुनी · 4तुला · 24 अगस्त 2027
बुधमिथुन12°54′आर्द्रा · 2कर्क · 30 जुलाई 2027
गुरुसिंह4°30′मघा · 2कन्या · 26 नवंबर 2027
शुक्र अस्तमिथुन26°30′पुनर्वसु · 2कर्क · 23 जुलाई 2027
शनिमेष3°16′अश्विनी · 1मीन · 20 अक्टूबर 2027
राहुमकर17°12′श्रवण · 3धनु · 24 मई 2028
केतुकर्क17°12′आश्लेषा · 1मिथुन · 24 मई 2028

दैनिक पंचांग

हिंदू महीना, पक्ष, विक्रम संवत 2084 और शक संवत

पूर्णिमांत महीना (उत्तर भारत)
श्रावण
अमांत महीना (दक्षिण और पश्चिम भारत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084 दुर्मति
शक संवत
1949 प्लवंग

यहाँ पहले पूर्णिमांत नाम: उत्तर भारत में यही प्रचलित है। अमांत नाम पहले दिखाएँ

चंद्र मास के अनुसार ऋतु
ग्रीष्म
सूर्य के अनुसार ऋतु
वर्षा
अयनांत के अनुसार अयन
दक्षिणायन
मकर-कर्क संक्रांति के अनुसार अयन
दक्षिणायन
सौर मास
श्रावण, दिन 4
भारतीय राष्ट्रीय तिथि
29 आषाढ़ 1949
कलि संवत
5128
वर्ष का राजा
बुध
वर्ष का मंत्री
बुध
वर्ष का मंत्रिमंडल
सस्येश
शुक्र
दुर्गेश
मंगल
धनेश
शुक्र
रसेश
सूर्य
धान्येश
गुरु
नीरसेश
शुक्र
फलेश
मंगल
मेघेश
मंगल
युग और दिन संख्या
अयनांश (लाहिड़ी, मध्यम)
24°14′31″
जूलियन दिन
2461606.5
गुजराती विक्रम संवत
2083
बृहस्पति संवत्सर
दुर्मति 7 मार्च 2027 से; फिर दुंदुभि 2 मार्च 2028 से

दैनिक पंचांग

आपकी राशि के लिए चंद्रबल और ताराबल

चुने हुए दिन का चंद्रमा आपकी चंद्र राशि और जन्म नक्षत्र के साथ कैसा है। अपनी एक बार चुनें; यह ब्राउज़र याद रखेगा। उत्तर मुहूर्त चिंतामणि के अनुसार है, जैसे हमारे मुहूर्त खोजक में; अन्य पद्धतियाँ साथ में हैं, और जिसका उत्तर अलग हो वह चिह्नित है।

अपनी राशि या नक्षत्र नहीं पता? जन्म तिथि से जानें

केवल इस उत्तर के लिए; आपका जन्म विवरण सहेजा नहीं जाता।

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन का व्रत-त्योहार, और अगली एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या

चुना हुआ दिन

इस शहर के इस वर्ष के व्रत-त्योहार तैयार हो रहे हैं…

अभी चल रहा है

  • शुक्र अस्त · 20 सितंबर 2027 तक

शुक्र अस्त: दिल्ली से दृश्यता के अनुसार, मुहूर्त चिंतामणि 5.27 के अतिरिक्त दिनों सहित, 5 जुलाई – 20 सितंबर (हमारा डिफ़ॉल्ट); ग्रंथों के अंशों से 6 जुलाई – 17 सितंबर।

ग्रहण

  • खंडग्रास सूर्य ग्रहण · सोमवार, 2 अगस्त 2027 · यहाँ से दिखेगा · दोपहर 3:53 – शाम 5:03, 2 अगस्त सूतक: रात 3:53 – शाम 5:03, 2 अगस्त। बच्चों, बुज़ुर्गों और अस्वस्थ लोगों को परंपरा से इसकी छूट है।
  • उपच्छाया चंद्र ग्रहण · मंगलवार, 17 अगस्त 2027 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • खंडग्रास चंद्र ग्रहण · बुधवार, 12 जनवरी 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
  • कंकणाकृति सूर्य ग्रहण · बुधवार, 26 जनवरी 2028 · यहाँ से नहीं दिखेगा
सभी ग्रहण, शहरवार समय और सूतक

दैनिक पंचांग

चुने हुए दिन पंचक, भद्रा और दिशा शूल

दिशा शूल
उत्तर
चंद्र वास
दक्षिण सुबह 5:35 – सुबह 5:36, 21 जुलाई
राहु वास
पश्चिम
शिव वास
सभा में सुबह 5:35 – रात 2:22, 21 जुलाई · क्रीड़ा में रात 2:22 – सुबह 5:36, 21 जुलाई
अग्नि वास
आकाश में सुबह 5:35 – रात 2:22, 21 जुलाई · पाताल में रात 2:22 – सुबह 5:36, 21 जुलाई
आनंदादि योग
लुम्बक सुबह 5:35 – शाम 5:32 · उत्पात शाम 5:32 – सुबह 5:36, 21 जुलाई
तमिल योग
सिद्ध योग सुबह 5:35 – सुबह 5:36, 21 जुलाई

दैनिक पंचांग

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 5:46 – सुबह 7:35) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:00 – दोपहर 12:55) चुने जाते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:13 – सुबह 4:54) पूजा और अध्ययन के लिए है।

ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, यमगण्ड, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है।

चुने हुए दिन द्विपुष्कर योग भी बन रहा है।

कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

अगले दिन का पंचांग

तिथि
कृष्ण तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा
सूर्योदय
सुबह 5:36
राहु काल
दोपहर 12:27 – दोपहर 2:10
अगले दिन का पूरा पंचांग देखें

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गणना पद्धति: हमारी गणना कैसे होती है

हमारा अपना इंजन
हर स्थिति NASA JPL के DE440 एफ़ेमेरिस से, हमारे अपने बनाए और परखे सॉफ़्टवेयर द्वारा। पूरे एक वर्ष में हमारी तिथि और नक्षत्र के अंत-समय भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग से औसतन लगभग एक सेकंड के भीतर मिलते हैं।
दृक् पद्धति, लाहिड़ी अयनांश
हम सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक, दृश्य स्थिति (दृक् गणित) और लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश का उपयोग करते हैं, ठीक वैसा जैसा भारतीय खगोलीय पंचांग (Indian Astronomical Ephemeris) उसे परिभाषित करता है; यही भारत के राष्ट्रीय पंचांग का मानक है।
सूर्योदय, जैसा आप देखते हैं
सूर्योदय वह क्षण है जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखता है, वायुमंडल से प्रकाश के मुड़ने सहित। दिन का हर समय इसी से मापा जाता है।
पंचांग अलग क्यों होते हैं
दो पंचांगों में एक-दो मिनट का अंतर हो सकता है: पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक। तिथि के अंत का क्षण हर जगह एक ही है; केवल स्थानीय घड़ी का समय बदलता है।
हम कौन-सी पद्धति अपनाते हैं, एक-एक करके
पंचांग का दिन
एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक। सूर्योदय की तिथि दिन का नाम तय करती है (उदया तिथि)।
महीने
दोनों तरह से: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण और पश्चिम भारत)। जब एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक सूर्य राशि नहीं बदलता, वह महीना अधिक मास होता है।
एकादशी
स्मार्त तिथि: सूर्योदय पर चल रही एकादशी। जहाँ वैष्णव एकादशी एक दिन बाद पड़ती है, वह भी दी गई है।
राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है; वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है।
वर्ज्य और अमृत काल
हर नक्षत्र की समय-अवधि 60 घटियों में बाँटी जाती है। हर समय उस नक्षत्र के लिए पारंपरिक तालिका में दी गई घटी से शुरू होता है और 4 घटी चलता है।
भद्रा
भद्रा विष्टि करण है और उसी के साथ समाप्त होती है। उसका मुख और पुच्छ मुहूर्त गणपति के अनुसार; उसका वास (लोक) चंद्रमा की राशि के अनुसार।
तमिल योग
तमिल पंचांगों में प्रयुक्त वार और नक्षत्र की तालिका से।
वर्ष का राजा और मंत्री
राजा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का वार और मंत्री मेष संक्रांति का वार है, दोनों उज्जैन के सूर्योदय से गिने जाते हैं।
समय
शहर के अपने समय क्षेत्र में, निकटतम मिनट तक, जैसे भारत का आधिकारिक राष्ट्रीय पंचांग छापता है: सूर्योदय, सूर्यास्त, तिथि या नक्षत्र का अंत और उन पर बने सभी समय। 1972 से पहले की तारीखों में वही माध्य सौर समय, जो उस समय की घड़ियाँ रखती थीं।
मिलते हुए समय
जहाँ कोई शुभ समय नए काम के लिए छोड़े जाने वाले समय से मिलता है, वहाँ दोनों के अपने समय दिए जाते हैं, और साझा हिस्सा नए काम की शुरुआत के लिए नहीं सुझाया जाता।

पंचांग (पंच अंग, पाँच अंग) दिन का हिंदू कैलेंडर है। ये इसके हिस्से हैं, उसी क्रम में जिसमें परिवार इन्हें अक्सर पढ़ते हैं।

01तिथि: चंद्र दिवस

तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ता है। एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में (पूर्णिमा पर पूरी) और 15 कृष्ण पक्ष में (अमावस्या पर पूरी)। एक तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है, इसलिए यह कैलेंडर के दिन से कम ही मेल खाती है।

02उदया तिथि: सूर्योदय क्यों तय करता है

हिंदू दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, और सूर्योदय के समय चल रही तिथि दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही तारीख़ पर दो शहरों में अलग तिथि हो सकती है, और व्रत अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

03वार: सप्ताह का दिन

हर वार एक ग्रह का है: रविवार सूर्य का, सोमवार चंद्रमा का, इसी तरह आगे। वार भी सूर्योदय से शुरू होता है, आधी रात से नहीं।

04नक्षत्र: चंद्रमा का तारा

आकाश 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बँटा है, हर एक के चार चरण। दिन का नक्षत्र वह है जिसमें चंद्रमा है; मुहूर्त के अधिकतर नियम इसी से शुरू होते हैं।

05योग और करण

योग सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को जोड़कर 27 भागों से बनता है। करण आधी तिथि है: 11 करण, एक मास में 60। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

06राहु काल, यमगंड और गुलिक

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है, और वार तय करता है कि कौन-सा भाग किसका है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है। ज्योतिष परंपरा इसमें नया काम शुरू करने से बचती है; पूजा और रोज़ का काम चलता रहता है।

07मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई

दिन और रात, दोनों में 15-15 मुहूर्त होते हैं; उनकी लंबाई वास्तविक दिन-रात के अनुसार होती है। अभिजीत दिन का आठवाँ मुहूर्त है, दोपहर के आसपास। ब्रह्म मुहूर्त रात का अंत से दूसरा मुहूर्त है, सूर्योदय से पहले।

08चौघड़िया और होरा

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल। होरा हर घंटा एक ग्रह को देता है, सूर्योदय पर वार के स्वामी से शुरू होकर।

09महीने और संवत

उत्तर भारत महीने को पूर्णिमा पर पूरा मानता है (पूर्णिमांत); दक्षिण और पश्चिम भारत अमावस्या पर (अमांत)। दोनों का अंतर केवल कृष्ण पक्ष में है। विक्रम संवत ईसवी सन् से लगभग 57 वर्ष आगे और शक संवत लगभग 78 वर्ष पीछे चलता है।

प्रश्न

पंचांग से जुड़े सवाल

चुने हुए दिन कौन सी तिथि है और कितने बजे तक है?

दिल्ली में कृष्ण द्वितीया रात 2:22, 21 जुलाई तक है, फिर कृष्ण तृतीया।

अगले दिन की तिथि क्या है?

दिल्ली में अगले दिन सूर्योदय पर कृष्ण तृतीया तिथि रहेगी।

चुने हुए दिन राहु काल कब से कब तक है?

दिल्ली में चुने हुए दिन राहु काल दोपहर 3:53 – शाम 5:36 है। यह शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त और वार के साथ बदलता है।

चुने हुए दिन कौन से चौघड़िया हैं?

चौघड़िया वाले हिस्से में दिल्ली के लिए चुने हुए दिन के आठ दिन के और आठ रात के चौघड़िया दिए गए हैं।

चुने हुए दिन का शुभ मुहूर्त कितने बजे है?

दिल्ली में चुने हुए दिन के अच्छे समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:13 – सुबह 4:54, प्रातः सन्ध्या सुबह 4:34 – सुबह 5:35, अमृत काल सुबह 5:46 – सुबह 7:35, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 – दोपहर 12:55, विजय मुहूर्त दोपहर 2:45 – दोपहर 3:39, गोधूलि मुहूर्त शाम 7:19 – शाम 7:40, सायाह्न सन्ध्या शाम 7:19 – रात 8:21, निशिता मुहूर्त रात 12:07 – रात 12:48, 21 जुलाई।

चुने हुए दिन का अभिजीत मुहूर्त कब है?

दिल्ली में चुने हुए दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 – दोपहर 12:55 है।

चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?

दिल्ली में चुने हुए दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:13 – सुबह 4:54 है: सूर्योदय से पहले रात का अंत से दूसरा मुहूर्त।

चुने हुए दिन कौन सा नक्षत्र है और कब तक रहेगा?

चुने हुए दिन श्रवण नक्षत्र है, शाम 5:32 तक; फिर धनिष्ठा।

चुने हुए दिन कौन सा पक्ष है, शुक्ल या कृष्ण?

चुने हुए दिन कृष्ण पक्ष है। अगली पूर्णिमा 17 अगस्त 2027, अगली अमावस्या 2 अगस्त 2027।

चुने हुए दिन हिंदी का कौन सा महीना है और कौन सा विक्रम संवत है?

हिंदू महीना श्रावण है (पूर्णिमांत; अमांत में आषाढ़), विक्रम संवत 2084 दुर्मति और शक संवत 1949।

चुने हुए दिन पंचक है क्या?

चुने हुए दिन पंचक नहीं है। पंचक वह समय है जिसमें चंद्रमा धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अंत तक चलता है, लगभग पाँच दिन।

चुने हुए दिन भद्रा है या नहीं, कब तक है?

चुने हुए दिन भद्रा नहीं है। विष्टि करण को ही भद्रा कहते हैं।

चुने हुए दिन की पहली होरा कौन सी है?

सूर्योदय के बाद पहली होरा वार के स्वामी की होती है; चुने हुए दिन यह मंगल की है। पूरी सूची होरा वाले हिस्से में है।

चुने हुए दिन चंद्रमा किस राशि में है?

चंद्रमा चुने हुए दिन मकर राशि में है।

चुने हुए दिन दिशा शूल किधर है?

चुने हुए दिन, मंगलवार को, दिशा शूल उत्तर दिशा में है। सोमवार और शनिवार को पूर्व, मंगलवार और बुधवार को उत्तर, गुरुवार को दक्षिण, शुक्रवार और रविवार को पश्चिम।

चुने हुए दिन कौन सा व्रत या त्योहार है?

चुने हुए दिन कोई बड़ा व्रत या त्योहार नहीं।

चुना हुआ दिन कैसा है?

चुने हुए दिन नए काम की शुरुआत के लिए वैदिक ज्योतिष परंपरा से अमृत काल (सुबह 5:46 – सुबह 7:35) और अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12:00 – दोपहर 12:55) चुने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:13 – सुबह 4:54) पूजा और अध्ययन के लिए है। ज्योतिष परंपरा नए आरंभ के लिए दुर्मुहूर्त, यमगण्ड, राहु काल, वर्ज्य छोड़ती है। चुने हुए दिन द्विपुष्कर योग भी बन रहा है। कोई दिन पूरा बुरा नहीं होता: जो शुरू करें, उसके लिए सही समय चुनें।

पंचांग क्या है और इसके पांच अंग कौन से हैं?

पंचांग दिन का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण (आधी तिथि)।

राहु काल कैसे निकाला जाता है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर भागों में बँटता है। राहु काल सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग है।

क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। रोज़ की पूजा पहले की तरह चलती है। ज्योतिष परंपरा केवल नए काम की शुरुआत राहु काल के बाहर करना पसंद करती है।

कौन सा चौघड़िया शुभ होता है?

नए काम के लिए अमृत, शुभ और लाभ पसंद किए जाते हैं, और यात्रा के लिए चर। नए आरंभ के लिए उद्वेग, रोग और काल टाले जाते हैं।

उदया तिथि क्या होती है?

उदया तिथि वह तिथि है जो स्थानीय सूर्योदय के समय चल रही हो; यही दिन का नाम तय करती है। सूर्योदय शहर-दर-शहर अलग होता है, इसलिए एक ही व्रत दो शहरों में अलग तारीख़ पर पड़ सकता है।

हर शहर का पंचांग अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त और उन पर बने सभी समय शहर के अक्षांश और देशांतर पर निर्भर हैं। तिथि या नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर समाप्त होते हैं; केवल स्थानीय घड़ी का समय अलग होता है।

दो पंचांगों में समय अलग क्यों दिखता है?

वे पुरानी तालिकाएँ, अलग अयनांश, सूर्योदय की अलग परिभाषा या शहर के अलग निर्देशांक उपयोग कर सकते हैं। हम NASA JPL DE440 की स्थिति, लाहिड़ी अयनांश और दृश्य सूर्योदय का उपयोग करते हैं।

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