मीन राशि के तारे, अभी के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
शाम 7:50 बजे चंद्रमा कुंभ में है, इस मानचित्र से बाहर; शुक्रवार 23 अक्टूबर, सुबह 5:34 बजे यह फिर मीन में आएगा और रविवार 25 अक्टूबर, सुबह 9:52 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: शनि मीन में।
मीन को पहला भाव मानकर: अभी नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव मीन से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट अभी का मीन का गोचर है। शाम 7:50 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
मीन, आज: पूरे दिन चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है।
Columbus · America/New_York · ·
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
मीन के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है। मानचित्र पर चंद्रमा की जगह हर मिनट नई होती है; तारे अपनी जगह पर रहते हैं।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- पूर्वा भाद्रपद 320°00′ से 333°20′ योगतारा: Markab (α Pegasi)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- उत्तरा भाद्रपद 333°20′ से 346°40′ योगतारा: Algenib (γ Pegasi)। स्रोत: कैलेंडर सुधार समिति 1955 और बर्जेस और ह्विटनी 1860। पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807 में यह α Andromedae है। यहाँ स्रोत अलग हैं। 1955 की कैलेंडर सुधार समिति, जिसका लाहिड़ी अयनांश यह साइट उपयोग करती है, का दिया तारा चिह्नित है; दूसरा पाठ साथ में दिया गया है।
- रेवती 346°40′ से 360°00′ योगतारा: रेवती (ζ Piscium)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
- अश्विनी 0°00′ से 13°20′ योगतारा: Sheratan (β Arietis) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कोलब्रुक 1807 में यह α Arietis है।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक मीन राशिफल · चंद्र राशि · बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
आज का मीन राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
मीन राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। मीन बारह राशियों में बारहवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 330° से 360° तक, और इसके स्वामी गुरु हैं; इसमें पूर्वा भाद्रपद का चरण 4, उत्तरा भाद्रपद के चारों चरण और रेवती के चारों चरण आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Pisces कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, मीन से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
धैर्य का समय?
बुधवार, 21 अक्टूबर: पूरे दिन (शुक्रवार 23 अक्टूबर, सुबह 5:34 बजे तक) चंद्रमा कुंभ में है, जो मीन से बारहवीं राशि है। शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (खर्च और आराम): खर्च की योजना बनाएँ और भरपूर आराम करें।
- चंद्र · मीन से बारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
धैर्य का समय। हमारी गिनती में आज मीन के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 2, मिले-जुले 2 और धैर्य माँगने वाले 5; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
शास्त्र में छठे भाव के केतु को लाभ के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि बारहवें भाव का चंद्रमा खर्च पर ध्यान माँगता है: पहले से योजना बनाएँ। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- केतु · मीन से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- चंद्र · मीन से बारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- प्रेम और परिवार?
आज आपसे सातवें, चौथे या दूसरे भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए प्रेम और परिवार के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।
- सेहत?
शास्त्र के अनुसार पहले भाव का शनि सेहत पर ध्यान माँगता है: दिनचर्या नियमित रखें।
- शनि · मीन से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
मीन के लिए आज चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
पूरे दिन (शुक्रवार 23 अक्टूबर, सुबह 5:34 बजे तक): चंद्रमा कुंभ में, आपसे बारहवें भाव में; धैर्य का समय।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
पूरे दिन चंद्रमा कुंभ में राहु के साथ है।
मीन के लिए अगला चंद्राष्टम: 7 नवंबर, सुबह 6:45 बजे (EST) से 9 नवंबर, शाम 4:18 बजे (EST) तक।
मीन राशि के नक्षत्रों का ताराबल
पूर्वा भाद्रपद (चरण 4): सुबह 10:18 बजे तक मित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
पूर्वा भाद्रपद (चरण 4): सुबह 10:18 बजे से अतिमित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।
उत्तरा भाद्रपद (चरण 1–4): सुबह 10:18 बजे तक वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
उत्तरा भाद्रपद (चरण 1–4): सुबह 10:18 बजे से मित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।
रेवती (चरण 1–4): सुबह 10:18 बजे तक साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।
रेवती (चरण 1–4): सुबह 10:18 बजे से वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
Columbus में आपके सहायक समय
नई शुरुआत के लिए कोई समय नहीं; कारण भीतर दिया गया है
आज पंचांग के समय और आपके चंद्रबल के घंटे आपस में नहीं मिलते, इसलिए कोई समय नहीं दिया गया; पंचांग के समय संदर्भ के लिए दिए गए हैं।
Columbus में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 12:51 बजे से रात 2:55 बजे तक · सुबह 6:04 बजे से सुबह 6:57 बजे तक · सुबह 7:49 बजे से सुबह 9:11 बजे तक · सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक · दोपहर 3:05 बजे से दोपहर 3:49 बजे तक
इस पेज का हर समय America/New_York में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय Columbus के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक मीन राशिफल · चंद्र राशि
मीन राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
मीन के लिए साढ़ेसाती का दूसरा चरण: शनि मीन में, यानी आपसे पहले भाव में, 29 मार्च 2025 से 2 जून 2027 तक हैं। पूरी साढ़ेसाती 28 अप्रैल 2022 से 16 अप्रैल 2030 तक है, बीच में 12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2023 तक और 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक विराम के साथ। परंपरा में यह समय निरंतर प्रयास, अनुशासन और सेहत की देखभाल का फल देता है।
- साढ़ेसाती फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
इस ठहराव में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव मीन के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 1 जुलाई 2026 से 20 अगस्त 2026 तक और 10 मार्च 2027 से 2 जून 2027 तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
शनि नौ ग्रहों में से एक है: आपसे पहले भाव के शनि का फल और बाकी आठ ग्रह नीचे की तालिका में हैं।
मीन पर अगली ढैया (कंटक, शनि चौथे भाव में) 30 मई 2032 से 12 जुलाई 2034 तक है।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक मीन राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: मीन से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · पूरे दिन
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शास्त्र के अनुसार आठवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: बड़े निर्णय धीरे-धीरे लें।
- सूर्य · मीन से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- नीच बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
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शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (खर्च और आराम): खर्च की योजना बनाएँ और भरपूर आराम करें।
- चंद्र · मीन से बारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
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शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (संतान की ज़रूरतें और सेहत): संतान को समय दें और दिनचर्या नियमित रखें।
- मंगल · मीन से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- नीच बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
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शास्त्र में आठवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (संतान और लाभ), लेकिन आपसे पहले भाव में शनि होने से वेध बनता है, इसलिए आज इसकी सहायता रुकी हुई है।
- बुध · मीन से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वेध: शनि, पहला भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- वक्री होंगे: शनिवार 24 अक्टूबर, रात 3:13 बजे
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शास्त्र में पाँचवें भाव के गुरु को सहायक माना गया है (संतान, समृद्धि और सद्भाव)।
- गुरु · मीन से पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
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शास्त्र में आठवें भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (धन और सुख-सुविधाएँ), लेकिन आपसे पाँचवें भाव में मंगल और गुरु होने से वेध बनता है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए आज इसकी सहायता रुकी हुई है।
- शुक्र · मीन से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
- वेध: मंगल और गुरु, पाँचवाँ भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
- वक्री (3 अक्टूबर, रात 3:13 बजे से 13 नवंबर, शाम 7:30 बजे (EST) तक)
- मार्गी होंगे: 13 नवंबर, शाम 7:30 बजे (EST)
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शास्त्र के अनुसार पहले भाव का शनि धैर्य माँगता है (सेहत और पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ): दिनचर्या नियमित रखें और पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ मिलकर निभाएँ।
- शनि · मीन से पहला भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (26 जुलाई से 10 दिसंबर तक)
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शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (खर्च): पहले से योजना बनाएँ।
- राहु · मीन से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
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शास्त्र में छठे भाव के केतु को सहायक माना गया है (लाभ)।
- केतु · मीन से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
मीन के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 2, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 2।
दैनिक मीन राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में मीन राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
शनिवार 24 अक्टूबर, रात 3:13 बजे: बुध तुला में, आपसे आठवें भाव में, वक्री होते हैं।
29 अक्टूबर, रात 12:10 बजे: शुक्र तुला में, आपसे आठवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
29 अक्टूबर, रात 8:34 बजे: बुध तुला में, आपसे आठवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार छठे भाव का गुरु धैर्य माँगता है (बेचैनी): दिनचर्या नियमित रखें।
- गुरु · मीन से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
5 नवंबर, दोपहर 2:34 बजे (EST): शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे सातवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार सातवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (रिश्तों में खिंचाव): मधुरता से बोलें और अपेक्षाएँ सरल रखें।
- शुक्र · मीन से सातवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
10 नवंबर, सुबह 5:24 बजे (EST): बुध तुला में, आपसे आठवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
12 नवंबर, सुबह 9:49 बजे (EST): मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे छठे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में छठे भाव के मंगल को सहायक माना गया है (विवादों का सुलझना, अच्छी सेहत और लाभ)।
- मंगल · मीन से छठा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
13 नवंबर, सुबह 10:54 बजे (EST): बुध तुला में, आपसे आठवें भाव में, मार्गी होते हैं।
13 नवंबर, शाम 7:30 बजे (EST): शुक्र कन्या में, आपसे सातवें भाव में, मार्गी होते हैं।
16 नवंबर, सुबह 9:13 बजे (EST): सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (रुकावटें और मन की थकान): योजनाओं को अतिरिक्त समय दें और मन को आराम दें।
- सूर्य · मीन से नौवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
दैनिक मीन राशिफल · चंद्र राशि
कल का मीन राशिफल
कल (गुरुवार, 22 अक्टूबर): पूरे दिन चंद्रमा आपसे बारहवें भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है।
कल का पूरा राशिफल देखेंदैनिक मीन राशिफल · चंद्र राशि
मीन राशि के बारे में: स्वामी गुरु, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- गुरुबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- दो मछलियाँ, एक का मुख दूसरी की पूँछ की ओरबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- द्विस्वभावबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- सम राशि; स्त्रीबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- उत्तरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- उभयोदय: दोनों ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- पैरबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 330° से 360°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- पूर्वा भाद्रपद 4; उत्तरा भाद्रपद 1–4; रेवती 1–4बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- दी दू थ झ ञ दे दो चा चीअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- मीन में शुक्र उच्च और बुध नीच होते हैं।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
मीन राशि से जुड़े सवाल
मीन राशि का स्वामी कौन है?
मीन के स्वामी गुरु आज कर्क में है, मीन से पाँचवें भाव में, 31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में मीन के स्वामी गुरु हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। गुरु धनु के भी स्वामी हैं।
मीन राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
आज चंद्रमा कुंभ में है; शुक्रवार 23 अक्टूबर, सुबह 5:34 बजे यह फिर मीन में आएगा और रविवार 25 अक्टूबर, सुबह 9:52 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि मीन होती है। मीन के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: दी (पूर्वा भाद्रपद 4); दू, थ, झ, ञ (उत्तरा भाद्रपद 1–4); दे, दो, चा, ची (रेवती 1–4)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि मीन है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
मीन राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
आज चंद्रमा शतभिषा में है; शुक्रवार 23 अक्टूबर, सुबह 5:34 बजे यह मीन के पहले चरण, पूर्वा भाद्रपद चरण 4, में पहुँचेगा। मीन निरयण राशिचक्र में 330° से 360° तक है: पूर्वा भाद्रपद का चरण 4, उत्तरा भाद्रपद के चारों चरण और रेवती के चारों चरण, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि मीन है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
मीन राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें विद्वान, सुंदर और सुडौल, विरोध करने वालों के साथ भी बात बना लेने वाला, और जल तथा समुद्र की ओर आकर्षित बताया गया है; ग्रंथ उन्हें बड़े सिर वाला भी बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.12, सारावली 23.79 और होरासार 29.12 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, मीन और इसके स्वामी गुरु, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
मीन राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
मीन पर आज साढ़ेसाती चल रही है, इसका दूसरा चरण: शनि मीन में है, यानी मीन से पहले भाव में। यह 28 अप्रैल 2022 को शुरू हुई और शनि के अंतिम निकास के साथ 16 अप्रैल 2030 को पूरी होती है, बीच में 12 जुलाई 2022 से 17 जनवरी 2023 तक और 8 अगस्त 2029 से 5 अक्टूबर 2029 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। मीन पर अगली ढैया (कंटक, शनि चौथे भाव में) 30 मई 2032 से 12 जुलाई 2034 तक है। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
मीन राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, रात 2:33 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, मीन से छठे भाव में; 25 नवंबर, सुबह 7:16 बजे (EST) राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, मीन से ग्यारहवें और पाँचवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 2 जून 2027, शाम 7:58 बजे शनि मेष में जाते हैं, मीन से दूसरे भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव मीन की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
मीन राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
आज दोपहर 12:00 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में तुला 28°16′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में तुला 4°02′ में। अंग्रेज़ी में मीन को Pisces कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Pisces है, उसकी राशि मीन हो, यह ज़रूरी नहीं।
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इस पेज के शब्द
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- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- वेध से रुका
- अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- धैर्य का समय
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा धैर्य माँगने वाले भाव में या चंद्राष्टम में हो।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- साढ़ेसाती
- आपकी चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि का लगभग साढ़े सात वर्ष का भ्रमण; नाम बाद की परंपरा का है, भाव फलदीपिका 26.22–23 में हैं।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- अस्त
- ग्रह सूर्य के इतना निकट है कि उसकी चमक में छिप जाता है; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद मानी जाती है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
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