करियर ज्योतिष · जन्म तिथि, समय और स्थान से
कुंडली से करियर: नौकरी, व्यापार और सही समय
जन्म तिथि, समय और स्थान से आपका दशम भाव, दशमांश, अमात्यकारक और चल रही दशा। फिर, आप चाहें तो, हमारे ज्योतिषी की निजी व्याख्या।
करियर ज्योतिष
एक नज़र में आपकी करियर कुंडली: दशम भाव, दशमांश, अमात्यकारक और दशा
केवल जन्म तिथि, समय और स्थान पूछे जाते हैं, और यह कि समय कितना सटीक है। कुंडली इसी पेज पर हमारे अपने इंजन से बनती है, और आपका भरा विवरण सहेजा नहीं जाता।
उदाहरण: एक काल्पनिक जन्म, 15 जुलाई 1990, सुबह 10:30 बजे, दिल्ली
हमारे इंजन से बनी, ठीक वैसे ही जैसे आपकी अपनी कुंडली बनेगी। बटन दबाने पर इसकी जगह आपकी कुंडली आती है।
एक वाक्य में आपकी करियर कुंडली
आपका दशम भाव, यानी कर्म भाव, मिथुन है। उसका स्वामी बुध आपके ग्यारहवें भाव में, कर्क राशि में है। अभी सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 तक है; उसके बाद आपके दशमेश बुध की अंतर्दशा 30 दिसंबर 2027 तक चलेगी।1, 2
जन्म समय में हर 15 मिनट के अंतर पर यहाँ की हर दशा-तारीख़ लगभग 68 दिन खिसकती है।
- रेखांकित: दशम भाव, मिथुन (3)
- घेरा: दशमेश बुध
- बिंदु: शुक्र, लग्न से कर्माजीव ग्रह
- व: वक्री
- अंक राशियाँ हैं, 1 मेष से 12 मीन तक; ऊपर बीच का खाना लग्न है, कन्या (6)।
सू सूर्य · चं चंद्र · मं मंगल · बु बुध · गु गुरु · शु शुक्र · श शनि · रा राहु · के केतु
आपका दशम भाव (कर्म भाव)
आपका दशम भाव मिथुन है। ग्रंथ दशम भाव को कर्म भाव मानते हैं: आजीविका, प्रतिष्ठा और काम से मिलने वाला सम्मान।1
ग्रंथ सेवा और व्यापार, दोनों को दशम भाव के अंतर्गत रखते हैं।2
ग्रंथ दशम भाव के चार कारक बताते हैं: गुरु, सूर्य, बुध और शनि; एक ग्रंथ केवल बुध को कारक मानता है।3
आपके दशम भाव में सूर्य है, मिथुन राशि में (तटस्थ राशि)। शास्त्र में इसे काम में बल और साहस, और पिता या पिता-समान व्यक्ति से सहयोग से जोड़ा गया है।4, 5, 6
आपके दशम भाव में गुरु है, मिथुन राशि में (अमित्र राशि)। शास्त्र में इसे काम से स्थिर समृद्धि, और भाइयों से सहयोग से जोड़ा गया है।5, 6, 7, 8
आपके दशम भाव में शुक्र है, मिथुन राशि में (मित्र राशि)। शास्त्र में इसे सुखद और समृद्ध आजीविका, और जीवनसाथी या परिचित स्त्रियों से सहयोग से जोड़ा गया है।5, 6, 9
भाव चलित (भाव-संधि से गिनती) में आपके दशम भाव में शुक्र है; इस गिनती में सूर्य और गुरु पास के भाव में आते हैं।
ग्रंथ सूर्य और मंगल को कुंडली के शीर्ष के पास सबसे बलवान मानते हैं। आपके: सूर्य 60 में से 51, मंगल 60 में से 42।10
सर्वाष्टकवर्ग में आपके दशम भाव में 24 बिंदु हैं। 12,000 कुंडलियों की हमारी गिनती में ज़्यादातर दशम भावों में 25 से 36 बिंदु होते हैं।
आपका दशमेश
आपका दशमेश बुध कर्क राशि (अमित्र राशि) में, आपके ग्यारहवें भाव (लाभ भाव) में है, सूर्य से 13.8° पर (अस्त)। षड्बल: शास्त्रीय न्यूनतम 7 के मुकाबले 6.2 रूप।1
आजीविका: कर्माजीव नियम
| किससे गिना | दसवीं राशि | स्वामी, नवांश | कर्माजीव |
|---|---|---|---|
| लग्न | मिथुन | बुध, तुला नवांश | शुक्र |
| चंद्र | धनु | गुरु, मिथुन नवांश | बुध |
| सूर्य | मीन | गुरु, मिथुन नवांश | बुध |
आपके लग्न से: दशमेश बुध तुला नवांश में है, जिसका स्वामी शुक्र है। ग्रंथ शुक्र को चाँदी, आभूषण और सजावट, संगीत और नृत्य, गाय-भैंस और दूध, और घोड़े और हाथी से जोड़ते हैं।1, 2
आपके चंद्र से: उससे दसवीं राशि धनु है; उसका स्वामी गुरु मिथुन नवांश में है, जिसका स्वामी बुध है। ग्रंथ बुध को लेखन, गणना और गणित, काव्य और साहित्य, और अध्ययन से जोड़ते हैं।1, 3
आपके सूर्य से: उससे दसवीं राशि मीन है; उसका स्वामी गुरु मिथुन नवांश में है, जिसका स्वामी बुध है। ग्रंथ बुध को लेखन, गणना और गणित, काव्य और साहित्य, और अध्ययन से जोड़ते हैं।1, 3
आज के शब्दों में, हमारी व्याख्या (शुक्र): कला, संगीत और नृत्य, डिज़ाइन और सजावट, आभूषण, और डेयरी व पशुपालन।
आज के शब्दों में, हमारी व्याख्या (बुध): लेखन, हिसाब-किताब, विश्लेषण, अध्यापन।
तीन में से दो पाठ (चंद्र और सूर्य से) बुध की ओर इशारा करते हैं।
फलदीपिका 5.1 तीनों में सबसे बलवान को लेने को कहती है, पर बल नापने का तरीका नहीं बताती। बृहज्जातक 10.1 की टीका में भट्टोत्पल हर एक को पढ़ने को कहते हैं। इसलिए हम तीनों दिखाते हैं।4
आपका दशमांश (D10)
यहाँ पहला भाव दशमांश लग्न वृषभ है।
घेरा: दशमेश बुध
आपके दशमांश में दशमेश बुध कर्क में है: न अपनी राशि में, न उच्च राशि में।1
आपके दशमांश में शुक्र, यानी लग्न से आपका कर्माजीव ग्रह, मिथुन में है: न अपनी राशि में, न उच्च राशि में।
शास्त्र में दशमांश उन वर्ग कुंडलियों में है जो ग्रह के बल में गिनी जाती हैं; ग्रंथ कहते हैं कि इससे 'महत् फल' देखा जाता है।2
आपका दशमांश लग्न वृषभ है। जन्म 5.1 मिनट बाद होता तो मिथुन, 22 मिनट पहले होता तो मेष होता। पढ़े गए ग्रंथों में दशमांश लग्न पढ़ने का नियम नहीं है, इसलिए हम इसे दिखाते हैं, इसका फल नहीं बताते।
आपका अमात्यकारक
आपका अमात्यकारक, यानी जैमिनि पद्धति में 'मंत्री' ग्रह, सूर्य है: आत्मकारक गुरु के बाद अपनी राशि में सबसे अधिक अंश इसी के हैं। यह आपके दसवें भाव में मिथुन राशि में है, और दशमांश में मीन में।1
दोनों में केवल 58″ का अंतर है।
8 कारक गिनने पर (राहु सहित) भी यह सूर्य ही है।2
काम और धन से जुड़े योग
केंद्र-त्रिकोण योग लगभग 4 में से 3 कुंडलियों में
बुध, आपके पहले और दसवें भाव का स्वामी, और शुक्र, आपके नौवें भाव का स्वामी, जुड़े हैं, क्योंकि शुक्र बुध की राशि में है; गुरु, आपके चौथे और सातवें भाव का स्वामी, और शुक्र, आपके नौवें भाव का स्वामी, आपके दसवें भाव में साथ हैं। शास्त्र में केंद्र और त्रिकोण के स्वामियों का यह संबंध प्रतिष्ठा का योग (राजयोग) माना गया है। यह सबसे आम योगों में से है: इस नियम से लगभग 4 में से 3 कुंडलियों में यह होता है।1, 2
समय: दशा
अभी चल रही दशा: सूर्य की महादशा 6 मई 2029 तक, शनि की अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 तक, चंद्रमा की प्रत्यंतर दशा 27 अक्टूबर 2026 तक।
सूर्य आपके बारहवें भाव का स्वामी है और आपके दसवें भाव में है।
शनि आपके पाँचवें और छठे भाव का स्वामी है और आपके चौथे भाव में है।
चंद्रमा आपके ग्यारहवें भाव का स्वामी है और आपके सातवें भाव में है।
22 फ़रवरी 2027 से 30 दिसंबर 2027 तक आपके दशमेश बुध की अंतर्दशा है (सूर्य की महादशा में)। ग्रंथ दशमेश की अवधि को काम और प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं; यह कैसे फलेगी, यह स्वामी के बल पर निर्भर है, जो ऊपर दिखाया गया है।1
6 मार्च 2035 से 5 अगस्त 2036 तक आपके दशमेश बुध की अंतर्दशा है (चंद्रमा की महादशा में)। ग्रंथ दशमेश की अवधि को काम और प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं; यह कैसे फलेगी, यह स्वामी के बल पर निर्भर है, जो ऊपर दिखाया गया है।1
बुध, आपके केंद्र-त्रिकोण योग का ग्रह: इसकी अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 से 30 दिसंबर 2027 तक है (सूर्य की महादशा में); फिर 6 मार्च 2035 से 5 अगस्त 2036 तक (चंद्रमा की महादशा में)। शास्त्र में योग का फल प्रायः उसे बनाने वाले ग्रहों की दशा में माना गया है।2
शुक्र, आपके केंद्र-त्रिकोण योग का ग्रह: इसकी अंतर्दशा 5 मई 2028 से 6 मई 2029 तक है (सूर्य की महादशा में); फिर 6 मार्च 2037 से 5 नवंबर 2038 तक (चंद्रमा की महादशा में)। शास्त्र में योग का फल प्रायः उसे बनाने वाले ग्रहों की दशा में माना गया है।2
गुरु, आपके केंद्र-त्रिकोण योग का ग्रह: इसकी अंतर्दशा 5 अप्रैल 2032 से 5 अगस्त 2033 तक है (चंद्रमा की महादशा में)। शास्त्र में योग का फल प्रायः उसे बनाने वाले ग्रहों की दशा में माना गया है।2
जन्म समय में हर 15 मिनट के अंतर पर यहाँ की हर दशा-तारीख़ लगभग 68 दिन खिसकती है।
यहाँ विंशोत्तरी का वर्ष 365.25 दिन का गिना गया है।
परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं? परीक्षा की तारीख़ें और नियमित तैयारी पहले आती हैं। कुंडली केवल संदर्भ देती है; तैयारी टालने या फ़ॉर्म छोड़ने का कारण यह कभी नहीं है।
समय: अगले 24 महीनों के गोचर
समय भारतीय मानक समय (IST) में, मिनट तक दिया गया है।
गुरु 2 जून 2026 रात 1:50 बजे से 31 अक्टूबर 2026 दोपहर 12:03 बजे तक कर्क में है, यानी आपकी चंद्र राशि से पाँचवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह अनुकूल माना गया है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में कर्क में 7 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में अच्छा सहयोग, इसलिए आपके लिए सहायक; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है।1, 2
गुरु 31 अक्टूबर 2026 दोपहर 12:03 बजे से 25 जनवरी 2027 रात 1:31 बजे तक सिंह में है, यानी आपकी चंद्र राशि से छठे भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धैर्य का समय माना गया है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में सिंह में 3 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में कम सहयोग, इसलिए आपके लिए धैर्य का समय; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है। निरंतर प्रयास करते रहें और पहले से योजना बनाएँ।1, 2
गुरु 25 जनवरी 2027 रात 1:31 बजे से 26 जून 2027 सुबह 5:19 बजे तक कर्क में है, यानी आपकी चंद्र राशि से पाँचवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह अनुकूल माना गया है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में कर्क में 7 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में अच्छा सहयोग, इसलिए आपके लिए सहायक; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है।1, 2
गुरु 26 जून 2027 सुबह 5:19 बजे से 26 नवंबर 2027 शाम 6:45 बजे तक सिंह में है, यानी आपकी चंद्र राशि से छठे भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धैर्य का समय माना गया है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में सिंह में 3 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में कम सहयोग, इसलिए आपके लिए धैर्य का समय; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है। निरंतर प्रयास करते रहें और पहले से योजना बनाएँ।1, 2
गुरु 26 नवंबर 2027 शाम 6:45 बजे से 28 फ़रवरी 2028 शाम 7:17 बजे तक कन्या में है, यानी आपकी चंद्र राशि से सातवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह अनुकूल है, पर इसकी सहायता मंद है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में कन्या में 4 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में मध्यम, इसलिए आपके लिए मिला-जुला; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है।1, 2, 3
गुरु 28 फ़रवरी 2028 शाम 7:17 बजे से 24 जुलाई 2028 दोपहर 3:37 बजे तक सिंह में है, यानी आपकी चंद्र राशि से छठे भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धैर्य का समय माना गया है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में सिंह में 3 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में कम सहयोग, इसलिए आपके लिए धैर्य का समय; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है। निरंतर प्रयास करते रहें और पहले से योजना बनाएँ।1, 2
गुरु 24 जुलाई 2028 दोपहर 3:37 बजे से 26 दिसंबर 2028 दोपहर 1:40 बजे तक कन्या में है, यानी आपकी चंद्र राशि से सातवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह अनुकूल है, पर इसकी सहायता मंद है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में कन्या में 4 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में मध्यम, इसलिए आपके लिए मिला-जुला; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है।1, 2, 3, 4
शनि 29 मार्च 2025 रात 9:45 बजे से 3 जून 2027 सुबह 5:28 बजे तक मीन में है, यानी आपकी चंद्र राशि से पहले भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धैर्य का समय माना गया है। शनि के अपने अष्टकवर्ग में मीन में 3 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में कम सहयोग, इसलिए आपके लिए धैर्य का समय; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है। निरंतर प्रयास करते रहें और पहले से योजना बनाएँ।2, 5
शनि 3 जून 2027 सुबह 5:28 बजे से 20 अक्टूबर 2027 सुबह 7:12 बजे तक मेष में है, यानी आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धन में धैर्य का समय माना गया है: नियमित बचत करें और खर्च पर नज़र रखें। शनि के अपने अष्टकवर्ग में मेष में 5 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में अच्छा सहयोग, इसलिए आपके लिए सहायक; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है।2, 5
शनि 20 अक्टूबर 2027 सुबह 7:12 बजे से 23 फ़रवरी 2028 शाम 7:24 बजे तक मीन में है, यानी आपकी चंद्र राशि से पहले भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धैर्य का समय माना गया है। शनि के अपने अष्टकवर्ग में मीन में 3 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में कम सहयोग, इसलिए आपके लिए धैर्य का समय; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है। निरंतर प्रयास करते रहें और पहले से योजना बनाएँ।2, 5
शनि 23 फ़रवरी 2028 शाम 7:24 बजे से 8 अगस्त 2029 दोपहर 12:32 बजे तक मेष में है, यानी आपकी चंद्र राशि से दूसरे भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धन में धैर्य का समय माना गया है: नियमित बचत करें और खर्च पर नज़र रखें। शनि के अपने अष्टकवर्ग में मेष में 5 बिंदु हैं: हमारे वर्गीकरण में अच्छा सहयोग, इसलिए आपके लिए सहायक; शास्त्र में अष्टकवर्ग का फल भाव के फल की जगह लेता है।2, 5
राहु 25 नवंबर 2026 शाम 5:46 बजे से 24 मई 2028 दोपहर 3:08 बजे तक मकर में है, यानी आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह लाभ के लिए अनुकूल माना गया है (25 जनवरी 2027 से वेध से रुका; 26 जून 2027 से अनुकूल)।6, 7
राहु 24 मई 2028 दोपहर 3:08 बजे से 4 फ़रवरी 2030 दोपहर 1:08 बजे तक धनु में है, यानी आपकी चंद्र राशि से दसवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह धैर्य का समय माना गया है। निरंतर प्रयास करते रहें और पहले से योजना बनाएँ।8, 9
16 दिसंबर 2026 सुबह 10:25 बजे से 14 जनवरी 2027 रात 9:10 बजे तक सूर्य धनु में है, यानी आपकी चंद्र राशि से दसवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह काम में सफलता के लिए अनुकूल माना गया है।10
14 जनवरी 2027 रात 9:10 बजे से 13 फ़रवरी 2027 सुबह 10:09 बजे तक सूर्य मकर में है, यानी आपकी चंद्र राशि से ग्यारहवें भाव में। भाव के हिसाब से शास्त्र में यह प्रतिष्ठा, सम्मान और लाभ के लिए अनुकूल है, पर इसकी सहायता मंद है (25 जनवरी 2027 से वेध से रुका)।3, 10, 11
गुरु 2 जून 2026 रात 1:50 बजे से 31 अक्टूबर 2026 दोपहर 12:03 बजे तक कर्क में है; जन्म के समय आपका दशमेश बुध इसी राशि में है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में इस राशि में 7 बिंदु हैं (हमारे वर्गीकरण में अच्छा सहयोग)।
गुरु 25 जनवरी 2027 रात 1:31 बजे से 26 जून 2027 सुबह 5:19 बजे तक कर्क में है; जन्म के समय आपका दशमेश बुध इसी राशि में है। गुरु के अपने अष्टकवर्ग में इस राशि में 7 बिंदु हैं (हमारे वर्गीकरण में अच्छा सहयोग)।
शनि आपकी चंद्र राशि मीन में है, यानी साढ़ेसाती का मध्य चरण, 3 जून 2027 तक। ग्रंथ साढ़ेसाती को काम का फ़ैसला नहीं मानते; काम के लिए वे दशमेश की अवधि और चंद्र से शनि की स्थिति देखते हैं, जो यहाँ दिखाई गई है।12
अगले 24 महीनों में न गुरु, न शनि आपके दशम भाव या चंद्र राशि से दसवें भाव में आते हैं; इस अवधि में धीमे ग्रह आपके लिए कहाँ हैं, यह यहाँ की बाकी पंक्तियाँ दिखाती हैं।
यह कितना सटीक है?
आपका लग्न कन्या तभी तक यही रहता है जब जन्म 8.4 मिनट पहले से 2 घंटे बाद के बीच हो। उससे पहले होने पर लग्न सिंह और दशम भाव मिथुन नहीं, वृषभ होता; उसके बाद होने पर लग्न तुला और दशम भाव कर्क होता।
दशमांश लग्न (वृषभ): 22 मिनट पहले तक और 5.1 मिनट बाद तक यही रहता है।
आत्मकारक और अमात्यकारक (गुरु, सूर्य): 31 मिनट बाद तक यही रहते हैं, फिर सूर्य और गुरु; पहले की ओर एक घंटे के भीतर ये नहीं बदलते।
दशा की तारीख़ें: हर 15 मिनट पर लगभग 68 दिन।
अगर जन्म समय पर संदेह है, तो जन्म समय शोधन से इसे सीमित किया जा सकता है।
यह कुंडली कैसे बनी
पद्धति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी अयनांश; पूर्ण राशि भाव (होल-साइन); राहु-केतु स्पष्ट पात से; पहले 7 चर कारक, और अलग होने पर 8 कारक भी; विंशोत्तरी दशा, वर्ष 365.25 दिन का; ग्रह-स्थिति नासा जेपीएल DE440s से, जिसे एक दूसरे एफ़ेमेरिस से जाँचा गया है।
यहाँ का हर मान OfficialAstrology™ अपने इंजन से निकालता है; व्याख्या एक ज्योतिषी लिखते हैं।
करियर ज्योतिष
आपकी करियर व्याख्या
उदाहरण कुंडली में दशमेश बुध है, और अभी सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 तक है; व्याख्या ऐसे तथ्यों को साथ तौलती है।
ऊपर की कुंडली तथ्य बताती है, और यह भी कि ग्रंथ हर तथ्य को किससे जोड़ते हैं। वह इन तथ्यों को आपस में, या आपकी अपनी स्थिति से, तौल नहीं सकती। यह काम आपके ज्योतिषी करते हैं: वे सब तथ्य साथ पढ़ते हैं, आपके अपने सवालों के उत्तर देते हैं, और शांत शब्दों में लिखते हैं कि इस अवधि में किस बात पर काम करें। व्याख्या के तीन भाग हैं: करियर और काम, धन और वित्त, और आगे का समय।
यह कैसे होता है
- 1.
लेखन
हमारे एक ज्योतिषी आपकी करियर कुंडली, यही जो इस पेज पर दिखी है, आपके सवालों के साथ पढ़ते हैं और आपकी व्याख्या लिखते हैं।
- 2.
जाँच
दूसरे ज्योतिषी उसे पढ़कर मंज़ूर करते हैं। एक लिखते हैं, दूसरे जाँचते हैं; उसके बाद ही यह आप तक पहुँचती है।
- 3.
आपके डैशबोर्ड पर
आपका डैशबोर्ड असली स्थिति दिखाता है, समीक्षा बाकी या पूरी, तारीख़ के साथ। कोई उलटी गिनती नहीं।
आपका नाम और लिंग अगले चरण में, आपके खाते के साथ पूछे जाते हैं।
व्यक्तिगत मार्गदर्शन वैकल्पिक है; किसी उपाय, वस्तु या सेवा को खरीदना अनिवार्य नहीं है।
कुंडली में करियर कैसे देखें: दशम भाव (कर्म भाव)
उदाहरण कुंडली में दशम भाव मिथुन है, जिसमें सूर्य, गुरु और शुक्र हैं।
ग्रंथ दशम भाव को कर्म भाव कहते हैं: आजीविका, पद, सम्मान और काम से मिलने वाला यश; फलदीपिका इसमें व्यापार भी जोड़ती है। धन दो और भावों से पढ़ा जाता है: दूसरा भाव संचित धन और बचत का, ग्यारहवाँ आय और लाभ का। फलदीपिका 1.10, 1.15 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 11.3, 11.11–12
शास्त्र में कोई भाव तब फलता है जब शुभ ग्रह उसमें हों या उसे देखें और उसका स्वामी अच्छी स्थिति में हो; स्वामी अस्त हो या नीच राशि में हो तो वह भाव अधिक प्रयास माँगता है। दशम भाव के कारकों में फलदीपिका चार ग्रह बताती है: गुरु, सूर्य, बुध और शनि; बृहत्पाराशर होराशास्त्र बुध को बताता है, और कोई भी ग्रंथ शनि को अकेला कर्म कारक नहीं कहता। बृहत्पाराशर होराशास्त्र 11.14–16 · फलदीपिका 15.1–3, 15.17 · जातक पारिजात 15.1 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 32.34
आपका दशमेश कहाँ बैठा है
उदाहरण कुंडली में दशमेश बुध ग्यारहवें भाव में, कर्क राशि (अमित्र राशि) में है और अस्त है; षड्बल शास्त्रीय न्यूनतम 7 के मुकाबले 6.2 रूप है।
दशम भाव का स्वामी जहाँ बैठता है, भाव के विषय वहीं ले जाता है। शास्त्र में अपनी या उच्च राशि का दशमेश काम को आगे बढ़ाता है, और नीच राशि का दशमेश, जब कोई शुभ ग्रह न उसके साथ हो न उस पर दृष्टि डाले, निरंतर, धैर्यपूर्ण प्रयास माँगता है। अस्त, वक्री और आठवें भाव की स्थिति तथ्य के रूप में दिखाई जाती है, क्योंकि यहाँ इन्हें केवल एक ग्रंथ पढ़ता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र 21.2–3 · सारावली 33.2 · फलदीपिका 15.3
इसका बल षड्बल के रूपों में, उस ग्रह के शास्त्रीय न्यूनतम के साथ दिखाया जाता है। ग्रंथ बारहों भावों में दशमेश की एक-एक पंक्ति भी देते हैं। पहले भाव के लिए, और अपनी या उच्च राशि में दूसरे भाव के लिए, दूसरा ग्रंथ सहमत है; बाकी दस दूसरे ग्रंथ की प्रतीक्षा में हैं। बृहत्पाराशर होराशास्त्र 27.32 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 24.109–110 · जातक पारिजात 11.18
कौन सा काम मेरे लिए? शास्त्रीय आजीविका नियम (कर्माजीव)
उदाहरण कुंडली में आजीविका का नियम लग्न से शुक्र, चंद्र से बुध और सूर्य से बुध की ओर इशारा करता है।
बृहज्जातक और फलदीपिका एक नियम देते हैं। लग्न, चंद्र और सूर्य से दसवें भाव का स्वामी देखें; वह किस नवांश में है; उस नवांश का स्वामी उस काम का प्रकार बताता है जिससे आजीविका आती है। हर ग्रह की एक शास्त्रीय सूची है: बुध के लिए लेखन, गणना, काव्य और अध्ययन। बृहज्जातक 10.1–3 · फलदीपिका 5.1–8 · होरासार 22.1–11
हम केवल वे बातें दिखाते हैं जो दो ग्रंथों में मिलती हैं, कठोर बातें कभी नहीं, और हर सूची के साथ एक तय पंक्ति, 'आज के शब्दों में, हमारी व्याख्या'। फलदीपिका तीनों में सबसे बलवान को लेने को कहती है, पर बल नापने का तरीका नहीं बताती; बृहज्जातक 10.1 की टीका में भट्टोत्पल हर एक को पढ़ने को कहते हैं, इसलिए तीनों दिखाए जाते हैं। कुंडली काम का प्रकार बताती है, नौकरी का नाम नहीं; चुनाव आपका रहता है। फलदीपिका 5.1 · होरासार 22.3 · बृहज्जातक 10.1
दशमांश (D10) कुंडली: करियर की अपनी कुंडली
उदाहरण कुंडली में दशमांश लग्न वृषभ है, जो 22 मिनट पहले और 5.1 मिनट बाद तक यही रहता है; दशमांश में दशमेश बुध कर्क में है।
हर राशि को 3° के दस भागों में बाँटा जाता है। विषम (ओज) राशि में भाग उसी राशि से गिने जाते हैं, युग्म (सम) राशि में उससे नौवीं राशि से; इसलिए सिंह 27°–30° और कन्या 0°–3° एक ही दशमांश राशि में आते हैं। ग्रंथ दशमांश को ग्रह के बल के लिए देखते हैं: बृहत्पाराशर होराशास्त्र कहता है कि इससे 'महत् फल' देखा जाता है। बृहत्पाराशर होराशास्त्र 6.13, 7.3 · फलदीपिका 3.1–2, 3.6
दशमांश लग्न या उसके भावों के नियम ग्रंथों में नहीं हैं, इसलिए हम दशमांश लग्न तथ्य के रूप में दिखाते हैं, उसका फल नहीं बताते। यह तेज़ी से बदलता है: हमारी गिनती में जन्म समय से 5 मिनट आगे-पीछे यह 100 में से 78 जन्मों में बदल जाता है, और 10 मिनट में 98 में।
अमात्यकारक ग्रह: काम का कारक, और कैलकुलेटर अलग-अलग क्यों बताते हैं
उदाहरण कुंडली में 7 कारकों से अमात्यकारक सूर्य है, और 8 कारकों (राहु सहित) से भी यही।
जैमिनि पद्धति में ग्रहों को उनकी राशि में अंशों के क्रम से रखा जाता है। सबसे अधिक अंश वाला आत्मकारक है; उसके बाद वाला अमात्यकारक, यानी 'मंत्री'। दोनों ग्रंथ सात कारक (सूर्य से शनि) या आठ कारक (राहु सहित, 30° में से उसके अंश घटाकर) की अनुमति देते हैं। बृहत्पाराशर होराशास्त्र 32.1–2, 32.13–17 · जैमिनि सूत्र 1.1.11, 1.1.13
इसी एक चुनाव से लगभग 4 में से 1 जन्म में उत्तर बदल जाता है, और आठ कारकों में स्पष्ट राहु की जगह माध्य राहु लेने से लगभग 11 में से 1 में और। इसीलिए कैलकुलेटर अलग-अलग बताते हैं। हम पहले सात कारक पढ़ते हैं, जैसे हमारी जन्मपत्रिका में, और जब आठ कारकों का उत्तर अलग हो, उसे भी दिखाते हैं। पढ़े गए ग्रंथ इसके फल पर सहमत नहीं हैं, इसलिए यह तथ्य के रूप में दिखाया जाता है।
नौकरी या व्यापार: ग्रंथ क्या कहते हैं
उदाहरण कुंडली में दशम भाव मिथुन है और उसका स्वामी बुध ग्यारहवें भाव में है; ग्रंथ इन्हीं तथ्यों से सेवा और व्यापार, दोनों पढ़ते हैं।
कई पेज छठे, सातवें और ग्यारहवें भाव से फ़ैसला सुना देते हैं। पढ़े गए ग्रंथ ऐसा नहीं करते। फलदीपिका व्यापार को दशम भाव में ही रखती है, और बृहत्पाराशर होराशास्त्र दशमेश को संरक्षण से और व्यापार से, दोनों तरह के लाभ से जोड़ता है। फलदीपिका 1.15 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 21.4
आजीविका की सूचियों में भी सेवा और व्यापार साथ हैं: सूर्य की सूची में किसी अधिकारी के अधीन काम है, बुध की सूची में गणना और लेखन, और शनि की सूची में कई सहायकों के साथ काम। छठे भाव को 'नौकरी' मानना आधुनिक प्रयोग है, शास्त्रीय नियम नहीं। इसलिए यह पेज नौकरी या व्यापार का कोई फ़ैसला नहीं देता। आपके ज्योतिषी कुंडली को आपकी स्थिति और कौशल के साथ तौलते हैं, और चुनाव वहीं होता है। बृहज्जातक 10.2–3 · फलदीपिका 5.2–8
क्या कुंडली में सरकारी नौकरी का योग होता है?
उदाहरण कुंडली में लग्न, चंद्र या सूर्य, किसी से भी गिना गया दशमेश न सूर्य के नवांश में है, न गुरु के; दशमेश बुध की अगली अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 से 30 दिसंबर 2027 तक है।
पढ़े गए ग्रंथों का कोई श्लोक सरकारी नौकरी का योग परिभाषित नहीं करता, इसलिए हम ऐसा कोई दावा नहीं करते, और कोई एक ग्रह अकेले इसे तय नहीं करता। ग्रंथ यह कहते हैं: दशमेश सूर्य के नवांश में हो तो आजीविका किसी राजा या अधिकारी के अधीन सेवा से आती है; गुरु का नवांश वरिष्ठों और संस्थाओं के सहयोग से जुड़ा है; और दशमेश की अवधि अधिकारियों से मिलने वाले सम्मान से जुड़ी है। फलदीपिका 5.2, 5.6 · होरासार 22.4, 22.8 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 48.6
चयन परीक्षा पर निर्भर है: आपकी तैयारी और परीक्षा की तारीख़ें पहले आती हैं।
नौकरी कब लगेगी: दशा और गोचर से समय
उदाहरण कुंडली में अभी सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 तक है; दशमेश बुध की अगली अंतर्दशा 22 फ़रवरी 2027 से 30 दिसंबर 2027 तक है।
पहले दशा: ग्रंथ दशमेश की अवधि को काम से जोड़ते हैं, उसके बल के अनुसार। फिर चंद्र राशि से गोचर: शास्त्र में उससे दसवें भाव में सूर्य काम में सफलता का महीना माना गया है, ग्यारहवें में प्रतिष्ठा और लाभ का; तीसरे भाव में शनि प्रतिष्ठा और सहयोगियों से, छठे में सहजता से, और ग्यारहवें में लाभ से जुड़ा है। फलदीपिका 20.11, 26.1, 26.11, 26.22–23 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 48.6 · बृहत्संहिता 104.7, 104.41–45
चंद्र से दसवें भाव में गुरु कोई बड़ा मौका नहीं है: दोनों ग्रंथ इसे कार्यक्षेत्र में संभावित बदलाव का समय मानते हैं, और नौकरी बदलना भी इन्हीं दशा और गोचर से पढ़ा जाता है। फलदीपिका 26.20 · बृहत्संहिता 104.31
परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं? परीक्षा की तारीख़ें और नियमित तैयारी पहले आती हैं। कुंडली केवल संदर्भ देती है; तैयारी टालने या फ़ॉर्म छोड़ने का कारण यह कभी नहीं है।
कुंडली में धन: दूसरा और ग्यारहवाँ भाव, धन योग और राजयोग
उदाहरण कुंडली में काम और धन से जुड़े ये योग बनते हैं: केंद्र-त्रिकोण योग।
धन दूसरे भाव (संचित धन) और ग्यारहवें भाव (आय और लाभ) से पढ़ा जाता है। यह पेज योगों की एक छोटी सूची जाँचता है, हर योग दो ग्रंथों में परिभाषित, और केवल वही दिखाता है जो बनते हैं, साथ में यह कि हर योग कितना आम है: नवमेश और दशमेश साथ, केंद्र और त्रिकोण के स्वामियों का संबंध, अमला, पाँच महापुरुष योग, चंद्र से उपचय भावों में शुभ ग्रह, दूसरे और ग्यारहवें के स्वामियों का परिवर्तन, और पहले, दूसरे या ग्यारहवें भाव में बलवान शुभ ग्रह। फलदीपिका 6.1–4, 6.19, 6.37 · बृहत्पाराशर होराशास्त्र 34.11–15, 36.5–6, 37.6 · बृहज्जातक 10.4, 13.9
ज़्यादातर कुंडलियों में मिलने वाला व्यापक 'राजयोग' यहाँ कभी नहीं दिखाया जाता। धन योग पढ़ा जाता है, ख़रीदा नहीं जाता।
जन्म का समय कितना सटीक चाहिए?
उदाहरण कुंडली में लग्न कन्या है, जो 8.4 मिनट पहले और 2 घंटे बाद तक यही रहता है; दशमांश लग्न वृषभ, 22 मिनट पहले और 5.1 मिनट बाद तक।
ज़्यादातर सवालों से अधिक सटीक। हमारी गिनती में जन्म समय से 5 मिनट आगे-पीछे दशमांश लग्न 100 में से 78 जन्मों में बदल जाता है, और 10 मिनट में 98 में; लग्न स्वयं 15 मिनट में लगभग 4 में से 1 जन्म में बदलता है। जन्म प्रमाणपत्र में समय अक्सर 5 मिनट तक गोल कर दिया जाता है।
इसलिए इस पेज की हर कुंडली अपनी समय-सीमाएँ ख़ुद मापती है, और हर दशा-तारीख़ बताती है कि हर 15 मिनट पर वह कितनी खिसकती है। समय को अनुमानित बताने पर कुंडली 30 मिनट आगे-पीछे जाँचती है और बदलने वाली हर बात दोनों मानों के साथ दिखाती है; चुपचाप कोई एक नहीं चुनती। जन्म समय पर संदेह हो तो जीवन की घटनाओं से जन्म समय शोधन उसे सीमित कर सकता है।
हम करियर कुंडली कैसे पढ़ते हैं
उदाहरण कुंडली में लग्न कन्या है और चंद्रमा मीन राशि में है, नासा जेपीएल DE440s की ग्रह-स्थिति से।
ग्रह-स्थिति नासा जेपीएल के DE440s एफ़ेमेरिस से, निरयण राशिचक्र और लाहिड़ी अयनांश में, पूर्ण राशि भाव और राहु-केतु के लिए स्पष्ट पात के साथ। पहले सात चर कारक पढ़े जाते हैं; विंशोत्तरी का वर्ष 365.25 दिन का है। 500 कुंडलियों पर एक दूसरे एफ़ेमेरिस से जाँच में ग्रह-स्थिति का अधिकतम अंतर 0.3 आर्कसेकंड था, और हर करियर तथ्य वही निकला, और दशा की तारीख़ें लगभग एक घंटे के भीतर।
हर पंक्ति बताती है कि वह किस ग्रंथ और श्लोक पर टिकी है; केवल एक ग्रंथ में मिला नियम दूसरे ग्रंथ की प्रतीक्षा करता है, उसके बाद ही पेज उसे लेता है। जहाँ ग्रंथों में मतभेद है, पंक्ति यह बताती है। गणना हमारा अपना इंजन करता है; व्याख्या एक ज्योतिषी लिखते हैं।
यह पेज क्या लेता है, और क्या छोड़ता है
- हर मान आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान से निकाला गया है: नासा जेपीएल DE440s की ग्रह-स्थिति, निरयण राशिचक्र (लाहिड़ी अयनांश) और पूर्ण राशि भाव; राहु-केतु स्पष्ट पात से।
- आजीविका बृहज्जातक 10.1–3 और फलदीपिका 5.1–8 से: दशमेश जिस नवांश में है, उसका स्वामी, लग्न, चंद्र और सूर्य, तीनों से। अय्यर के बृहज्जातक 10.1 और होरासार 22.3 में यह कदम तब है जब दशम भाव में कोई ग्रह न हो; फलदीपिका 5.1 इसे हमेशा लेती है, और यह पेज फलदीपिका 5.1 के अनुसार चलता है।
- हर ग्रह के काम की सूची में केवल वे बातें हैं जो बृहज्जातक, फलदीपिका और होरासार में से कम से कम दो ग्रंथों में हैं; कठोर बातें कभी नहीं दिखाई जातीं।
- 'आज के शब्दों में' वाली पंक्ति हमारी व्याख्या है, हर ग्रह के लिए एक बार तय; यह कभी किसी नौकरी का नाम नहीं है।
- शास्त्र में ग्रह अपनी उच्च राशि में पूरा फल, मूलत्रिकोण में तीन-चौथाई, अपनी राशि में आधा, मित्र राशि में चौथाई, और अमित्र या नीच राशि में सबसे कम फल देता है।
- अमला योग और धन योगों में चंद्र शुक्ल पक्ष में शुभ ग्रह गिना जाता है, कृष्ण पक्ष में नहीं।
- जो नवमेश और दशमेश तीसरे, छठे, आठवें या ग्यारहवें भाव के भी स्वामी हों, वे केवल साथ होने से यह योग नहीं बनाते।
- केंद्र-त्रिकोण योग में भी, जो स्वामी तीसरे, छठे, आठवें या ग्यारहवें भाव का भी स्वामी हो, वह केवल संबंध से योग नहीं बनाता।
- योगकारक केवल उन चार लग्नों के लिए बताया गया है जिनका योगकारक बृहत्पाराशर होराशास्त्र में नाम से है: वृषभ, कर्क, मकर और कुंभ। सिंह और तुला के लिए ग्रंथ दूसरे योगकर्ता बताता है, इसलिए वहाँ स्वामित्व तथ्य के रूप में दिखाया गया है।
- पंच महापुरुष योगों के लिए बृहत्पाराशर होराशास्त्र 75.1 ग्रह के बलवान होने की बात जोड़ता है; फलदीपिका 6.1 और सारावली 37.2 नहीं, इसलिए केवल राशि ली गई है।
- बृहज्जातक 10.4 और सारावली 33.82 पहले, दूसरे या ग्यारहवें भाव में बलवान शुभ ग्रह माँगते हैं; बल की हमारी कसौटी ग्रह की अपनी या उच्च राशि है।
- 'लगभग N में से 1' हमारी अपनी गिनती है: 12,000 जन्म (भारत के छह शहर, 1950–2010), इसी पेज के कोड से।
- दशम भाव के बिंदुओं की सामान्य सीमा उन्हीं जन्मों पर हमारी अपनी गिनती है; ग्रंथों के वर्ग-नाम इस्तेमाल नहीं किए गए।
- आपके दशम भाव की राशि पर, और जन्म के समय दशमेश जिस राशि में है उस पर, गोचर तथ्य के रूप में, ग्रह के अपने बिंदुओं के साथ दिखाए गए हैं; वर्ग (5 या अधिक: अच्छा सहयोग; 4: मध्यम; 3 या उससे कम: कम सहयोग) हमारे हैं।
- गोचर का फल आपकी चंद्र राशि से गिना गया है, जैसा फलदीपिका 26.1 कहती है, और नियम व शब्द वही हैं जो हमारे राशिफल में हैं।
- चर कारक: पहले सात (सूर्य से शनि), जैसा बृहत्पाराशर होराशास्त्र 32.2 अनुमति देता है; आठ कारकों का उत्तर (राहु 30° में से उसके अंश घटाकर) जब अलग हो, तब दिखाया जाता है।
- षड्बल का शास्त्रीय न्यूनतम बृहत्पाराशर होराशास्त्र 27.32 से है (सूर्य 6.5 रूप)।
- विंशोत्तरी दशा, वर्ष 365.25 दिन का; हर तारीख़ जन्म समय के साथ खिसकती है, और पेज बताता है कि कितनी।
- दशम भाव में राहु या केतु का काम पर फल: ग्रंथों में मतभेद है, इसलिए केवल तथ्य दिखाया गया है।
- दशम भाव के बिंदुओं के वर्ग-नाम: स्वीकृत नहीं, इसलिए संख्या और हमारी सामान्य सीमा दिखाई गई है।
- अस्त दशमेश, या आठवें भाव में दशमेश, का फल: केवल एक ग्रंथ, इसलिए दोनों तथ्य के रूप में हैं।
- दशमेश के हर भाव की पंक्तियाँ: दूसरा ग्रंथ केवल लग्न के लिए, और अपनी या उच्च राशि में दूसरे भाव के लिए सहमत है; बाकी दस दूसरे ग्रंथ की प्रतीक्षा में हैं।
- लग्न, चंद्र और सूर्य में सबसे बलवान कौन: फलदीपिका 5.1 यह पूछती है, पर कोई ग्रंथ इसे नापने का तरीका नहीं बताता, इसलिए तीनों दिखाए गए हैं।
- घर पर या बाहर कमाई (फलदीपिका 5.9, होरासार 22.14–15): दो ग्रंथ नियम देते हैं, पर इसकी दो कसौटियाँ एक ही कुंडली में अलग-अलग दिशा दिखा सकती हैं, इसलिए यह पेज इसे नहीं पढ़ता; आपके ज्योतिषी इसे तौलते हैं।
- दशमांश लग्न, दशमांश के भाव या 'दशमांश का दसवाँ भाव' का फल: पढ़े गए ग्रंथों में कोई श्लोक नहीं, इसलिए दशमांश लग्न केवल तथ्य के रूप में है।
- दशमांश के दस भागों के देवता: केवल एक ग्रंथ।
- दो कारकों के अंश विकला तक बराबर हों: बृहत्पाराशर होराशास्त्र दो नियम देता है, इसलिए बराबरी पर कोई कारक नहीं चुना जाता।
- अमात्यकारक का फल (बृहत्पाराशर होराशास्त्र 40): केवल एक ग्रंथ, इसलिए नहीं पढ़ा गया।
- दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी साथ केंद्र या त्रिकोण में: केवल एक ग्रंथ।
- ख्याति, धेनु और सुपारिजात योग: केवल एक ग्रंथ।
- ज़्यादातर कुंडलियों में मिलने वाला व्यापक 'राजयोग': इस पेज पर कभी नहीं दिखाया जाता।
- अवधि के किस भाग में फल मिलता है: ग्रंथों में मतभेद है।
- अमात्यकारक या कर्माजीव ग्रह की दशा: कोई श्लोक नहीं पढ़ा गया।
- दोहरा गोचर (गुरु और शनि साथ दसवें भाव पर): कोई श्लोक नहीं पढ़ा गया।
- गोचर की दृष्टि, और दशमेश के अंश पर गोचर: कोई श्लोक नहीं पढ़ा गया।
- दशम भाव की राशि से काम का प्रकार: केवल एक ग्रंथ।
- छठा भाव 'सेवा' या नौकरी के रूप में: आधुनिक प्रयोग, पढ़े गए ग्रंथों में नहीं।
- ग्रह युद्ध: इस्तेमाल नहीं किया गया।
- चिप पर श्लोक के उद्धृत शब्द हर संस्करण से दोबारा मिलान की प्रतीक्षा में हैं; ग्रंथ और श्लोक संख्या दिखाई गई है।
- 'सरकारी नौकरी का योग': पढ़े गए ग्रंथों का कोई श्लोक इसे परिभाषित नहीं करता, इसलिए ऐसा कोई दावा नहीं किया गया।
- साढ़ेसाती को काम का फ़ैसला मानना: ग्रंथ ऐसा नहीं कहते।
- नौकरी या व्यापार का फ़ैसला: ग्रंथ दोनों को दशम भाव में रखते हैं और कोई फ़ैसला नहीं देते; आपके ज्योतिषी इसे तौलते हैं।
सवाल
करियर ज्योतिष से जुड़े सवाल
कुंडली में करियर कैसे देखें? कौन सा भाव नौकरी का है?
दशम भाव, यानी कर्म भाव: आजीविका, पद, सम्मान और व्यापार (फलदीपिका 1.15, बृहत्पाराशर होराशास्त्र 11.11)। इसे इसके स्वामी और इसमें बैठे ग्रहों के साथ पढ़ा जाता है। धन के लिए दूसरा भाव (संचित धन) और ग्यारहवाँ भाव (आय और लाभ) देखे जाते हैं।
नौकरी कब लगेगी, कुंडली से कैसे जानें?
कोई कुंडली तारीख़ तय नहीं करती। ग्रंथ दशमेश की अवधि को काम की प्रगति से जोड़ते हैं, और चंद्र राशि से गोचर हर महीने का रंग बताता है। ऊपर की कुंडली में अगले 12 वर्षों में दशमेश की अवधियाँ और अगले 24 महीनों के गोचर, तारीख़ों के साथ, दिए गए हैं। परीक्षा की तारीख़ें और नियमित तैयारी पहले आती हैं।
कुंडली में सरकारी नौकरी का योग कैसे देखें?
पढ़े गए ग्रंथों का कोई श्लोक सरकारी नौकरी का योग परिभाषित नहीं करता, इसलिए हम ऐसा कोई दावा नहीं करते। ग्रंथ सूर्य के नवांश में दशमेश को किसी अधिकारी के अधीन सेवा से, गुरु के नवांश को वरिष्ठों और संस्थाओं के सहयोग से, और दशमेश की अवधि को अधिकारियों से सम्मान से जोड़ते हैं। चयन परीक्षा पर निर्भर है।
सरकारी नौकरी के लिए कौन सा ग्रह ज़िम्मेदार है?
कोई एक ग्रह अकेले यह तय नहीं करता। ग्रंथों में सूर्य का नवांश राजा या अधिकारी के अधीन सेवा से (फलदीपिका 5.2), और दशमेश की अवधि अधिकारियों से सम्मान से (बृहत्पाराशर होराशास्त्र 48.6) जुड़ी है। ये संकेत हैं, किसी नौकरी का वादा नहीं।
नौकरी करूँ या व्यापार? कुंडली क्या कहती है?
पढ़े गए ग्रंथ सेवा और व्यापार, दोनों को दशम भाव में रखते हैं और इनके बीच कोई फ़ैसला नहीं देते; छठे भाव को 'नौकरी' मानना आधुनिक प्रयोग है। इसलिए यह पेज कोई एक नहीं चुनता। आपके ज्योतिषी आपकी कुंडली को आपकी स्थिति और कौशल के साथ तौलते हैं; निर्णय आपका है।
दशम भाव का स्वामी कौन है, और वह कहाँ बैठा है, इसका क्या अर्थ है?
दशम भाव की राशि का स्वामी ही दशमेश है। वह जिस भाव में बैठता है, काम के विषय उस ओर जाते हैं। शास्त्र में अपनी या उच्च राशि का दशमेश काम को आगे बढ़ाता है, और नीच राशि का दशमेश, जब कोई शुभ ग्रह न उसके साथ हो न उस पर दृष्टि डाले, निरंतर प्रयास माँगता है। दशमेश की राशि, भाव और षड्बल ऊपर की कुंडली में दिए हैं।
दशमांश (D10) कुंडली क्या होती है और कैसे देखें?
हर राशि के 3-3° के दस भाग, बृहत्पाराशर होराशास्त्र 6.13 और फलदीपिका 3.6 के नियम से। ग्रंथ दशमांश को ग्रह के बल के लिए देखते हैं: दशमेश और आजीविका के ग्रह वहाँ अपनी या उच्च राशि में हैं या नहीं। दशमांश लग्न का नियम ग्रंथों में नहीं है, इसलिए हम उसे समय-सीमा के साथ दिखाते हैं, उसका फल नहीं बताते।
अमात्यकारक ग्रह क्या है, और अलग-अलग साइटों पर अलग क्यों दिखता है?
जैमिनि पद्धति में अपनी राशि में दूसरे सबसे अधिक अंश वाला ग्रह। सात या आठ कारक गिनने से लगभग 4 में से 1 जन्म में उत्तर बदल जाता है, और आठ कारकों में माध्य या स्पष्ट राहु से लगभग 11 में से 1 में और। हम पहले सात कारक पढ़ते हैं और अलग होने पर आठ कारकों का उत्तर भी दिखाते हैं।
कुंडली में विदेश जाने का योग कैसे देखें?
घर पर या बाहर कमाई के लिए दो ग्रंथ एक नियम देते हैं (फलदीपिका 5.9 · होरासार 22.14–15)। इसकी दो कसौटियाँ एक ही कुंडली में अलग-अलग दिशा दिखा सकती हैं, इसलिए यह पेज इसे नहीं पढ़ता; आपके ज्योतिषी इसे तौलते हैं।
कुंडली में धन योग कैसे बनता है?
धन भावों (दूसरा, ग्यारहवाँ) के स्वामियों के संबंध से, या कुछ भावों में शुभ ग्रहों से: जैसे चंद्र से उपचय भावों में शुभ ग्रह, या दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामियों का परिवर्तन। ऊपर की कुंडली में बनने वाले धन योग और राजयोग, हर एक कितना आम है, इसके साथ दिए गए हैं।
क्या साढ़ेसाती या शनि-राहु की महादशा नौकरी का फ़ैसला करती है?
नहीं। साढ़ेसाती आपकी चंद्र राशि पर शनि का गोचर है, और ग्रंथ इसे काम का फ़ैसला नहीं मानते; काम के लिए वे दशमेश की अवधि और चंद्र से शनि की स्थिति देखते हैं। शनि या राहु की दशा को आपकी कुंडली में उस ग्रह के भाव और बल से, किसी भी दूसरी दशा की तरह, पढ़ा जाता है।
क्या जन्म का सटीक समय ज़रूरी है?
हाँ, ज़्यादातर सवालों से अधिक। हमारी गिनती में जन्म समय से 5 मिनट आगे-पीछे दशमांश लग्न 100 में से 78 जन्मों में बदल जाता है, और 15 मिनट में लग्न लगभग 4 में से 1 में। समय पर संदेह हो तो 'अनुमानित' चुनें: कुंडली 30 मिनट आगे-पीछे बदलने वाली हर बात दोनों मानों के साथ दिखाती है।
क्या धन योग पहना जा सकता है?
नहीं। ग्रंथों में धन योग आपकी जन्म कुंडली में भावों के स्वामियों का संबंध, या कुछ भावों में शुभ ग्रह हैं, जो जन्म के क्षण से बनते हैं। इसे पढ़ा जाता है, ख़रीदा नहीं जाता; कोई वस्तु या अनुष्ठान इसे नहीं बनाता।
क्या मेरा जन्म विवरण सहेजा जाता है?
इस कुंडली के लिए नहीं। साइन इन न हों तो आपकी भरी जन्म तिथि, समय और स्थान केवल इसी एक अनुरोध पर कुंडली बनाने में लगते हैं; वे सहेजे नहीं जाते, किसी पते (URL) में नहीं जाते, लॉग नहीं होते और साझा नहीं होते। साइन इन हों तो कुंडली आपके अपने खाते में सहेजे व्यक्ति से बनती है। विवरण तभी सहेजा जाता है जब आप व्याख्या का अनुरोध करके अपना खाता बनाते हैं।
करियर ज्योतिष