दैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 का धनु राशिफल — Dhanu Rashifal
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
धनु राशि के तारे, 23 अक्टूबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ
दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा कुंभ में है, इस मानचित्र से बाहर; 12 नवंबर, दोपहर 2:19 बजे यह फिर धनु में आएगा और 15 नवंबर, रात 3:11 बजे तक रहेगा।
धनु को पहला भाव मानकर: 23 अक्टूबर को नौ ग्रह कहाँ हैं
हर भाव धनु से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का धनु का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।
धनु, 23 अक्टूबर को: दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा आपसे तीसरे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद है।
नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें
- चंद्रमा
- ग्रह
- राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
- योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
- तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
- क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
- राशि की सीमा
- नक्षत्र की सीमा
- अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं
धनु के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।
इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे
- ज्येष्ठा 226°40′ से 240°00′ योगतारा: Antares (α Scorpii) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
- मूल 240°00′ से 253°20′ योगतारा: Shaula (λ Scorpii)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और कैलेंडर सुधार समिति 1955। पिंग्री और मॉरिसी 1989 में यह 45 Ophiuchi है।
- पूर्वाषाढ़ा 253°20′ से 266°40′ योगतारा: Kaus Media (δ Sagittarii)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
- उत्तराषाढ़ा 266°40′ से 280°00′ योगतारा: Nunki (σ Sagittarii)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कोलब्रुक 1807 में यह τ Sagittarii है। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।
तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।
दैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि · शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026
23 अक्टूबर का धनु राशिफल: काम, प्रेम और सेहत
धनु राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। धनु बारह राशियों में नौवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 240° से 270° तक, और इसके स्वामी गुरु हैं; इसमें मूल के चारों चरण, पूर्वाषाढ़ा के चारों चरण और उत्तराषाढ़ा का चरण 1 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Sagittarius कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, धनु से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।
मिला-जुला?
शुक्रवार, 23 अक्टूबर: बुधवार 21 अक्टूबर, सुबह 7:01 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा कुंभ में है, जो धनु से तीसरी राशि है। शास्त्र में तीसरे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (लाभ), लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- चंद्र · धनु से तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- चंद्र के साथ राहु: सहायता मंद मुहूर्त चिंतामणि 4.7 · बृहत्संहिता 104.56
मिला-जुला। हमारी गिनती में 23 अक्टूबर को धनु के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 3, मिले-जुले 3 और धैर्य माँगने वाले 3; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।
23 अक्टूबर को दोपहर 3:04 बजे चंद्रमा मीन राशि में जाते हैं, इसलिए दिन के दोनों हिस्से दिखाए गए हैं।
काम, प्रेम और सेहत
- काम और धन?
शास्त्र में तीसरे भाव के राहु को लाभ के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि तीसरे भाव के चंद्रमा को लाभ के लिए अनुकूल माना गया है, लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।
- राहु · धनु से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- चंद्र · धनु से तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- चंद्र के साथ राहु: सहायता मंद मुहूर्त चिंतामणि 4.7 · बृहत्संहिता 104.56
- प्रेम और परिवार?
शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का शनि घर और रिश्तेदारों पर ध्यान माँगता है: घर के मामलों को समय दें।
- शनि · धनु से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- सेहत?
23 अक्टूबर को आपसे पहले या छठे भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए सेहत के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।
धनु के लिए 23 अक्टूबर को चंद्रबल और ताराबल
चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल
बुधवार 21 अक्टूबर, सुबह 7:01 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक: चंद्रमा कुंभ में, आपसे तीसरे भाव में; सहायक।
- चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
दोपहर 3:04 बजे से रविवार 25 अक्टूबर, शाम 7:22 बजे तक: चंद्रमा मीन में, आपसे चौथे भाव में; धैर्य का समय।
दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा कुंभ में राहु के साथ है।
दोपहर 3:04 बजे से चंद्रमा मीन में शनि के साथ है।
धनु के लिए अगला चंद्राष्टम: 1 नवंबर, रात 12:01 बजे से 3 नवंबर, रात 3:47 बजे तक।
धनु राशि के नक्षत्रों का ताराबल
मूल (चरण 1–4): रात 9:03 बजे तक वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
- ताराबल मुहूर्त चिंतामणि 4.11–12
मूल (चरण 1–4): रात 9:03 बजे से मित्र तारा, नए काम के लिए अच्छी।
पूर्वाषाढ़ा (चरण 1–4): रात 9:03 बजे तक साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।
पूर्वाषाढ़ा (चरण 1–4): रात 9:03 बजे से वध तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
उत्तराषाढ़ा (चरण 1): रात 9:03 बजे तक प्रत्यरि तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।
उत्तराषाढ़ा (चरण 1): रात 9:03 बजे से साधक तारा, नए काम के लिए अच्छी।
नई दिल्ली में आपके सहायक समय
पंचांग के 5 समय, इस राशि के अच्छे चंद्रबल के भीतर
रात 3:16 बजे से रात 3:17 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 4:54 बजे से सुबह 6:27 बजे तक: ब्रह्म मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
सुबह 7:51 बजे से सुबह 8:42 बजे तक: शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक: अभिजित मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
दोपहर 1:13 बजे से दोपहर 2:43 बजे तक: अमृत काल, विजय मुहूर्त और शुभ चौघड़िया, आपके अच्छे चंद्रबल के भीतर।
नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)
रात 3:16 बजे से रात 3:17 बजे तक · सुबह 4:54 बजे से सुबह 6:27 बजे तक · सुबह 7:51 बजे से सुबह 8:42 बजे तक · दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक · दोपहर 1:13 बजे से दोपहर 2:43 बजे तक
इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।
दैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि
धनु राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें
धनु के लिए शनि की ढैया (कंटक): शनि मीन में, यानी आपसे चौथे भाव में, 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक हैं। पूरी ढैया 29 मार्च 2025 से 23 फ़रवरी 2028 तक है, बीच में 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक विराम के साथ। परंपरा में यह समय निरंतर प्रयास, अनुशासन और सेहत की देखभाल का फल देता है।
- ढैया फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
इस ठहराव में शास्त्र के अनुसार शनि का प्रभाव मीन के अंतिम तिहाई भाग में सबसे अधिक माना गया है: 2 जुलाई 2026 से 20 अगस्त 2026 तक और 11 मार्च 2027 से 3 जून 2027 तक।
- सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
शनि नौ ग्रहों में से एक है: आपसे चौथे भाव के शनि का फल और बाकी आठ ग्रह नीचे की तालिका में हैं।
धनु पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक है।
चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।
दैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि
क्यों: धनु से हर ग्रह का भाव
हर ग्रह, अपने नियम के साथ · दोपहर 3:04 बजे तक
-
शास्त्र में ग्यारहवें भाव के सूर्य को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा, सम्मान, लाभ और सेहत में सुधार), लेकिन सूर्य अपनी नीच राशि तुला में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- सूर्य · धनु से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.9–11 · बृहत्संहिता 104.5–7
- नीच: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · बृहत्संहिता 104.53
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
शास्त्र में तीसरे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (लाभ), लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।
- चंद्र · धनु से तीसरा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
- चंद्र के साथ राहु: सहायता मंद मुहूर्त चिंतामणि 4.7 · बृहत्संहिता 104.56
- अभी सबसे अधिक प्रभाव फलदीपिका 26.25 · मुहूर्त चिंतामणि 4.19
-
शास्त्र के अनुसार आठवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (अनावश्यक जोखिम, धन और प्रतिष्ठा): अनावश्यक जोखिम से बचें और खर्च पर नज़र रखें।
- मंगल · धनु से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
- नीच बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
-
शास्त्र में ग्यारहवें भाव के बुध को सहायक माना गया है (उन्नति, लाभ और मित्र)।
- बुध · धनु से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.17 · बृहत्संहिता 104.19–24
- वक्री होंगे: शनिवार 24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे
-
शास्त्र के अनुसार आठवें भाव का गुरु अपने आप में प्रतिकूल है (थकाने वाली यात्रा और सेहत), लेकिन आपसे ग्यारहवें भाव में सूर्य, बुध और शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, इसलिए इसे सहायक गिना गया है।
- गुरु · धनु से आठवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
- वाम वेध: सूर्य, बुध और शुक्र, ग्यारहवाँ भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.4 · नारद संहिता 12.8
- उच्च बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3
-
शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शुक्र को अनुकूल माना गया है, लेकिन आपसे तीसरे भाव में चंद्रमा होने से वेध बनता है, और शुक्र सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए 23 अक्टूबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।
- शुक्र · धनु से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- वेध: चंद्र, तीसरा भाव फलदीपिका 26.3–8 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3 · नारद संहिता 12.1–6
- अस्त: सहायता मंद फलदीपिका 26.32 · नारद संहिता 12.11
- वक्री (3 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे से 14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे तक)
- मार्गी होंगे: 14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे
-
शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का शनि धैर्य माँगता है (घर और रिश्तेदार): घर के मामलों को समय दें।
- शनि · धनु से चौथा भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.22–23 · बृहत्संहिता 104.39–45
- वक्री (27 जुलाई से 11 दिसंबर तक)
-
शास्त्र में तीसरे भाव के राहु को सहायक माना गया है (प्रसन्नता और लाभ)।
- राहु · धनु से तीसरा भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.24 · ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · बृहद्दैवज्ञरंजन 32.195
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
-
शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का केतु धैर्य माँगता है (मन का भारीपन): मन को आराम दें।
- केतु · धनु से नौवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · कालप्रकाशिका 36.10
- शास्त्रीय फल ज्योतिर्निबंध पृ. 54 · कालप्रकाशिका 36.10
- मध्यम राहु-केतु की गणना: 5 दिसंबर तक
दिन का दूसरा हिस्सा: दोपहर 3:04 बजे से
-
शास्त्र के अनुसार चौथे भाव का चंद्रमा धैर्य माँगता है (मन की बेचैनी): दिन सरल रखें और भरपूर आराम करें।
- चंद्र · धनु से चौथा भाव मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4
- शास्त्रीय फल बृहत्संहिता 104.8–10 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–4
-
शास्त्र में ग्यारहवें भाव के शुक्र को अनुकूल माना गया है, लेकिन शुक्र अपनी स्वराशि तुला में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; इस पर ग्रंथों के संकेत दोनों ओर जाते हैं, इसलिए इसे मिला-जुला गिना गया है।
- शुक्र · धनु से ग्यारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- स्वराशि और अस्त: संकेत दोनों ओर फलदीपिका 26.31–32 · कालप्रकाशिका 36.15
- वक्री (3 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे से 14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे तक)
- मार्गी होंगे: 14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे
धनु के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 2, मिले-जुले 0, धैर्य माँगने वाले 2।
दैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि
अगले 30 दिनों में धनु राशि
अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ
शनिवार 24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे: बुध तुला में, आपसे ग्यारहवें भाव में, वक्री होते हैं।
गुरुवार 29 अक्टूबर, सुबह 9:40 बजे: शुक्र तुला में, आपसे ग्यारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
30 अक्टूबर, सुबह 6:04 बजे: बुध तुला में, आपसे ग्यारहवें भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।
31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में नौवें भाव के गुरु को सहायक माना गया है (भाग्य, सफलता और संतान)।
- गुरु · धनु से नौवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.18–20 · बृहत्संहिता 104.25–31
6 नवंबर, रात 1:04 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे दसवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का शुक्र धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में खिंचाव और प्रतिष्ठा): कार्यस्थल पर मधुरता से बात करें।
- शुक्र · धनु से दसवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.21 · बृहत्संहिता 104.32–38
10 नवंबर, दोपहर 3:54 बजे: बुध तुला में, आपसे ग्यारहवें भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।
12 नवंबर, रात 8:19 बजे: मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे नौवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार नौवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है (प्रतिष्ठा, धन और कम ऊर्जा): ऊर्जा बचाकर रखें और खर्च पर नज़र रखें।
- मंगल · धनु से नौवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
- शास्त्रीय फल फलदीपिका 26.13–16 · बृहत्संहिता 104.11–18
13 नवंबर, रात 9:24 बजे: बुध तुला में, आपसे ग्यारहवें भाव में, मार्गी होते हैं।
14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे: शुक्र कन्या में, आपसे दसवें भाव में, मार्गी होते हैं।
16 नवंबर, शाम 7:43 बजे: सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार बारहवें भाव का सूर्य धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
- सूर्य · धनु से बारहवाँ भाव फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4 · मुहूर्त चिंतामणि 4.1–3
दैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि
अगले दिन का धनु राशिफल, 24 अक्टूबर
कल (शनिवार, 24 अक्टूबर): पूरे दिन चंद्रमा आपसे चौथे भाव में है, जिसे शास्त्र में धैर्य का समय माना गया है।
24 अक्टूबर का पूरा राशिफल देखेंदैनिक धनु राशिफल · चंद्र राशि
धनु राशि के बारे में: स्वामी गुरु, नक्षत्र और नाम अक्षर
- स्वामी
- गुरुबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
- चिह्न
- धनुषधारी, जिसका पिछला भाग घोड़े का हैबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
- प्रकृति
- द्विस्वभावबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- विषम या सम
- विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
- दिशा
- पूर्वबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
- उदय
- पृष्ठोदय: पीठ की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
- बल
- रात में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
- कालपुरुष का अंग
- जाँघेंबृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
- विस्तार (निरयण)
- 240° से 270°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नक्षत्र चरण
- मूल 1–4; पूर्वाषाढ़ा 1–4; उत्तराषाढ़ा 1बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
- नाम अक्षर
- ये यो भा भी भू धा फा ढा भेअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
- उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
- धनु गुरु की मूलत्रिकोण राशि है; इसमें कोई ग्रह उच्च या नीच नहीं होता।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7
- उदय: बृहज्जातक 1.10, सारावली 3.24, फलदीपिका 1.8 और जातक पारिजात 1.14 धनु को पृष्ठोदय कहते हैं; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.17 के छपे संस्करण इस श्लोक को अलग-अलग पढ़ते हैं।
नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।
इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ
- वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
- कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
- मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
- पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
प्रश्न
धनु राशि से जुड़े सवाल
धनु राशि का स्वामी कौन है?
धनु के स्वामी गुरु 23 अक्टूबर को कर्क में है, धनु से आठवें भाव में, 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में धनु के स्वामी गुरु हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। गुरु मीन के भी स्वामी हैं।
धनु राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
23 अक्टूबर को चंद्रमा कुंभ में है; 12 नवंबर, दोपहर 2:19 बजे यह फिर धनु में आएगा और 15 नवंबर, रात 3:11 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि धनु होती है। धनु के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: ये, यो, भा, भी (मूल 1–4); भू, धा, फा, ढा (पूर्वाषाढ़ा 1–4); भे (उत्तराषाढ़ा 1)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि धनु है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।
धनु राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
23 अक्टूबर को चंद्रमा पूर्वा भाद्रपद में है; 12 नवंबर, दोपहर 2:19 बजे यह धनु के पहले चरण, मूल चरण 1, में पहुँचेगा। धनु निरयण राशिचक्र में 240° से 270° तक है: मूल के चारों चरण, पूर्वाषाढ़ा के चारों चरण और उत्तराषाढ़ा का चरण 1, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि धनु है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।
धनु राशि के लोग कैसे होते हैं?
उन्हें अच्छा वक्ता, कला और शिल्प में कुशल, बलवान और साहसी, तथा धर्म और शास्त्रों का जानकार बताया गया है; ग्रंथ उन्हें लंबे मुख और उभरी गर्दन वाला बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.9, सारावली 23.58 और होरासार 29.9 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, धनु और इसके स्वामी गुरु, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।
धनु राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?
धनु पर 23 अक्टूबर को शनि की ढैया (कंटक, शनि चौथे भाव में) चल रही है: शनि मीन में है, धनु से चौथे भाव में। यह 29 मार्च 2025 को शुरू हुई और शनि के अंतिम निकास के साथ 23 फ़रवरी 2028 को पूरी होती है, बीच में 3 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। धनु पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 13 जुलाई 2034 से 27 अगस्त 2036 तक है। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।
धनु राशि का समय कब बदलेगा?
31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, धनु से नौवें भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, धनु से दूसरे और आठवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, धनु से पाँचवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव धनु की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।
धनु राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?
23 अक्टूबर को सुबह 7:32 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में तुला 29°41′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में तुला 5°27′ में। अंग्रेज़ी में धनु को Sagittarius कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Sagittarius है, उसकी राशि धनु हो, यह ज़रूरी नहीं।
दैनिक राशिफल
बाकी 11 राशियों का राशिफल
- मेष राशिफल
- वृषभ राशिफल
- मिथुन राशिफल
- कर्क राशिफल
- सिंह राशिफल
- कन्या राशिफल
- तुला राशिफल
- वृश्चिक राशिफल
- मकर राशिफल
- कुंभ राशिफल
- मीन राशिफल
इस पेज के शब्द
36
- सूर्य
- नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
- चंद्र
- नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
- मंगल
- नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
- बुध
- नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
- गुरु
- नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
- शुक्र
- नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
- शनि
- नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
- राहु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
- केतु
- नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
- सहायक
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
- सहायक (वाम वेध)
- धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जिसे जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह होने से (वाम वेध) सहायक गिना गया है।
- वेध से रुका
- अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
- सहायता मंद
- अनुकूल गोचर, जिसका ग्रह नीच, अमित्र राशि में या सूर्य के निकट (अस्त) है, इसलिए उसकी सहायता मंद मानी गई है।
- मिला-जुला
- संकेत दोनों ओर जाते हैं (स्वराशि या उच्च राशि, पर सूर्य के निकट), या सहायक चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हैं, इसलिए यह गोचर न सहायक गिना गया, न धैर्य का समय।
- धैर्य का समय
- ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
- मिला-जुला
- दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा वेध से रुका, मंद या नरम हो, या उसकी राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों।
- गोचर
- राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
- भाव
- आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
- वेध
- जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
- वाम वेध (विपरीत वेध)
- धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
- चंद्रमा का साथ
- चंद्रमा की राशि में बैठे ग्रह; वहाँ सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद मानी जाती है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56)।
- चंद्रबल
- आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
- ताराबल
- आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
- शनि की ढैया
- आपकी चंद्र राशि से चौथे (कंटक) या आठवें भाव में शनि का लगभग ढाई वर्ष का ठहराव।
- वक्री
- पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
- मार्गी
- वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
- अस्त
- ग्रह सूर्य के इतना निकट है कि उसकी चमक में छिप जाता है; अनुकूल भाव में इसकी सहायता मंद मानी जाती है (फलदीपिका 26.32; नारद संहिता 12.11)।
- सबसे अधिक प्रभाव
- राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
- मध्यम राहु-केतु की गणना
- राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
- ग्रंथों में मतभेद
- शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
- सहायक समय
- आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
- उच्च
- वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- नीच
- उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
- काम और धन
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- प्रेम और परिवार
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
- सेहत
- हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
OfficialAstrology™
राशि शुरुआत है, पूरी बात आपकी जन्मपत्रिका बताती है।
राशिफल एक चंद्र राशि वाले सभी लोगों का दिन बताता है। आपकी जन्मपत्रिका दिन को केवल आपके लिए पढ़ती है: आपका लग्न, आपकी दशा और हर ग्रह का भाव।
मेरी जन्मपत्रिका पाएँ