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राशिफल

दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 का तुला राशिफल — Tula Rashifal

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

तुला राशि के तारे, 23 अक्टूबर के चंद्रमा और ग्रहों के साथ

कन्यातुलावृश्चिकचित्रास्वातिविशाखाक्रांतिवृत्तपूर्वपश्चिमचित्रा: Spicaस्वाति: Arcturusविशाखा: ι¹ Libraeसूर्यबुधशुक्र

दोपहर 12:00 बजे चंद्रमा कुंभ में है, इस मानचित्र से बाहर; 7 नवंबर, शाम 5:15 बजे यह फिर तुला में आएगा और 10 नवंबर, रात 2:48 बजे तक रहेगा। इस मानचित्र पर ये भी हैं: सूर्य तुला में, बुध तुला में और शुक्र तुला में।

तुला को पहला भाव मानकर: 23 अक्टूबर को नौ ग्रह कहाँ हैं

7सू 5°बु 26°शु 7°व891011चं 28°रा 3°12श 15°व1234मं 19°गु 28°5के 3°6

हर भाव तुला से गिना गया है, इसलिए यह चार्ट उस दिन का तुला का गोचर है। दोपहर 12:00 बजे की निरयण स्थिति (लाहिड़ी)। हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है: मेष 1 से मीन 12 तक। ग्रह के बाद व: वक्री।

तुला, 23 अक्टूबर को: दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा आपसे पाँचवें भाव में है, जो शास्त्र में वाम वेध से सहायक गिना गया है, पर कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद है।

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत · IST (Asia/Kolkata) · · Columbus के समय देखें

  • चंद्रमा
  • ग्रह
  • राहु और केतु: चंद्रमा के पात, बिना पिंड के बिंदु
  • योगतारा: नक्षत्र की पहचान का तारा
  • तारामंडल की रेखाएँ, हमारी बनाई
  • क्रांतिवृत्त: सूर्य का पथ
  • राशि की सीमा
  • नक्षत्र की सीमा
  • अधिक चमकीले तारे बड़े दिखाए गए हैं

तुला के 30° आकाश के असली तारे, तारा-सूची की स्थिति पर। केवल चंद्रमा और ग्रह चलते हैं। भारत से दक्षिण की ओर देखने पर: पूर्व बाईं ओर है, और चंद्रमा दाएँ से बाएँ चलता है।

इस मानचित्र के नक्षत्र और उनके योगतारे

  • चित्रा 173°20′ से 186°40′ योगतारा: Spica (α Virginis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।
  • स्वाति 186°40′ से 200°00′ योगतारा: Arcturus (α Boötis)। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807। लाहिड़ी अयनांश से यह तारा अपने नक्षत्र के 13°20′ के भाग से बाहर पड़ता है।
  • विशाखा 200°00′ से 213°20′ योगतारा: ι¹ Librae। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860 और पिंग्री और मॉरिसी 1989। कैलेंडर सुधार समिति 1955 और कोलब्रुक 1807 में यह α² Librae है। स्रोत दो-दो में बँटे हैं; सूर्य सिद्धांत की बताई स्थिति के निकट का तारा लिया गया है।
  • अनुराधा 213°20′ से 226°40′ योगतारा: Dschubba (δ Scorpii) · इस मानचित्र से बाहर। स्रोत: बर्जेस और ह्विटनी 1860, कैलेंडर सुधार समिति 1955, पिंग्री और मॉरिसी 1989 और कोलब्रुक 1807।

तारों की स्थिति हर घंटे के लिए तारा-सूची (निज गति, लंबन और विपथन) से, ग्रहों वाले उसी निरयण ढाँचे में, लाहिड़ी अयनांश के साथ निकाली जाती है। जाँचे गए 36 तारों के लिए स्विस एफ़ेमेरिस की अपनी तारा-फ़ाइल 2.4 विकला के भीतर मिलती है। चंद्रमा और ग्रह पृथ्वी के केंद्र से दिखने वाली स्थिति पर हैं; आपके अपने स्थान से चंद्रमा यहाँ की जगह से लगभग 1° तक हटा दिख सकता है। तारामंडल की रेखाएँ हमारी अपनी हैं; हर योगतारा ऊपर दिए स्रोतों में से कम से कम दो में दिया गया है।

तारों की स्थितियाँ: येल ब्राइट स्टार कैटलॉग, 5वाँ संस्करण (हॉफ़्लाइट और वॉरेन, 1991; NASA HEASARC, पब्लिक डोमेन)। तारों के नाम: IAU वर्किंग ग्रुप ऑन स्टार नेम्स (CC BY 4.0)। चंद्रमा और ग्रह: NASA JPL DE440s।

दैनिक तुला राशिफल · चंद्र राशि · शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

23 अक्टूबर का तुला राशिफल: काम, प्रेम और सेहत

तुला राशि का आज का राशिफल, आपकी चंद्र राशि से। तुला बारह राशियों में सातवीं राशि है, निरयण राशिचक्र में 180° से 210° तक, और इसके स्वामी शुक्र हैं; इसमें चित्रा के चरण 3 और 4, स्वाति के चारों चरण और विशाखा के चरण 1 से 3 आते हैं। अंग्रेज़ी में इसे Libra कहते हैं, पर यहाँ इसका अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जन्मदिन वाली राशि नहीं। नीचे की हर पंक्ति अपना ग्रह, तुला से उस ग्रह का भाव और उसके पीछे का शास्त्रीय श्लोक बताती है।

मिला-जुला?

शुक्रवार, 23 अक्टूबर: बुधवार 21 अक्टूबर, सुबह 7:01 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा कुंभ में है, जो तुला से पाँचवीं राशि है। शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का चंद्रमा अपने आप में प्रतिकूल है (काम में धीमी प्रगति), लेकिन आपसे पहले भाव में सूर्य और शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

मिला-जुला। हमारी गिनती में 23 अक्टूबर को तुला के लिए 9 ग्रहों में से सहायक 1, मिले-जुले 4 और धैर्य माँगने वाले 4; दिन का मुख्य ग्रह चंद्रमा है।

23 अक्टूबर को दोपहर 3:04 बजे चंद्रमा मीन राशि में जाते हैं, इसलिए दिन के दोनों हिस्से दिखाए गए हैं।

काम, प्रेम और सेहत

काम और धन?

शास्त्र में छठे भाव के शनि को हर ओर सहजता के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि दसवें भाव का गुरु काम और धन पर ध्यान माँगता है, लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए इसे नरम गिना गया है। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।

प्रेम और परिवार?

23 अक्टूबर को आपसे सातवें, चौथे या दूसरे भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए प्रेम और परिवार के लिए शास्त्र कोई विशेष संकेत नहीं देते।

सेहत?

शास्त्र में छठे भाव के शनि को हर ओर सहजता के लिए अनुकूल माना गया है, जबकि पहले भाव का सूर्य ऊर्जा पर ध्यान माँगता है: अपनी गति संतुलित रखें और भरपूर आराम करें। दोनों को मिलाकर इसे मिला-जुला गिना गया है।

तुला के लिए 23 अक्टूबर को चंद्रबल और ताराबल

चंद्रबल, चंद्राष्टम और ताराबल

बुधवार 21 अक्टूबर, सुबह 7:01 बजे से दोपहर 3:04 बजे तक: चंद्रमा कुंभ में, आपसे पाँचवें भाव में; धैर्य का समय।

  • चंद्रबल मुहूर्त चिंतामणि 4.1 · फलदीपिका 26.2 · बृहत्संहिता 104.4

दोपहर 3:04 बजे से रविवार 25 अक्टूबर, शाम 7:22 बजे तक: चंद्रमा मीन में, आपसे छठे भाव में; सहायक।

दोपहर 3:04 बजे तक: चंद्रमा कुंभ में, आपसे पाँचवें भाव में, शुक्ल पक्ष में; शास्त्र में शुक्ल पक्ष का यह चंद्रमा सहायक है, लेकिन कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

दोपहर 3:04 बजे तक चंद्रमा कुंभ में राहु के साथ है।

दोपहर 3:04 बजे से चंद्रमा मीन में शनि के साथ है।

तुला के लिए अगला चंद्राष्टम: मंगलवार 27 अक्टूबर, रात 9:07 बजे से गुरुवार 29 अक्टूबर, रात 10:07 बजे तक।

तुला राशि के नक्षत्रों का ताराबल

चित्रा (चरण 3–4): रात 9:03 बजे तक विपत तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

चित्रा (चरण 3–4): रात 9:03 बजे से क्षेम तारा, नए काम के लिए अच्छी।

स्वाति (चरण 1–4): रात 9:03 बजे तक संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।

स्वाति (चरण 1–4): रात 9:03 बजे से विपत तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

विशाखा (चरण 1–3): रात 9:03 बजे तक जन्म तारा; परंपरा में नए काम के लिए धैर्य रखा जाता है।

विशाखा (चरण 1–3): रात 9:03 बजे से संपत तारा, नए काम के लिए अच्छी।

नई दिल्ली में आपके सहायक समय

नई शुरुआत के लिए कोई समय नहीं; कारण भीतर दिया गया है

23 अक्टूबर को पंचांग के समय और आपके चंद्रबल के घंटे आपस में नहीं मिलते, इसलिए कोई समय नहीं दिया गया; पंचांग के समय संदर्भ के लिए दिए गए हैं।

सहायक समय क्या हैं?

नई दिल्ली में नए काम के लिए पंचांग के समय (संदर्भ के लिए)

रात 3:16 बजे से रात 3:17 बजे तक · सुबह 4:54 बजे से सुबह 6:27 बजे तक · सुबह 7:51 बजे से सुबह 8:42 बजे तक · दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक · दोपहर 1:13 बजे से दोपहर 2:43 बजे तक

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इस पेज का हर समय IST (Asia/Kolkata) में है। इस समय क्षेत्र में हर किसी के लिए फल एक ही है; केवल सहायक समय नई दिल्ली के सूर्योदय से बनते हैं।

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तुला राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया: सटीक तारीख़ें

तुला के लिए अभी न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि 3 जून 2027 तक मीन में, यानी आपसे छठे भाव में है। अगली ढैया (आठवाँ भाव) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है।

तुला पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं।

चंद्र राशि से गिना गया है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, और हर विराम दिखाया गया है। शास्त्र में यह निरंतर प्रयास और धैर्य का समय माना गया है, कोई तय फल नहीं।

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क्यों: तुला से हर ग्रह का भाव

हर ग्रह, अपने नियम के साथ · दोपहर 3:04 बजे तक

  1. सूर्य? तुला · पहला भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार पहले भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (थकान, अतिरिक्त खर्च और यात्रा): अपनी गति संतुलित रखें और खर्च की योजना पहले से बनाएँ।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 16 नवंबर, शाम 7:43 बजे

  2. चंद्र? कुंभ · पाँचवाँ भाव मिला-जुला?

    शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का चंद्रमा अपने आप में प्रतिकूल है (काम में धीमी प्रगति), लेकिन आपसे पहले भाव में सूर्य और शुक्र होने से विपरीत (वाम) वेध बनता है, और कुंभ में उसके साथ राहु है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: दोपहर 3:04 बजे

  3. मंगल? कर्क · दसवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का मंगल धैर्य माँगता है: हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 12 नवंबर, रात 8:19 बजे

  4. बुध? तुला · पहला भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार पहले भाव का बुध धैर्य माँगता है (धन और सलाह): किसी सलाह पर अमल से पहले उसे परखें और खर्च पर नज़र रखें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 2 दिसंबर, शाम 5:28 बजे

  5. गुरु? कर्क · दसवाँ भाव नरम?

    शास्त्र के अनुसार दसवें भाव का गुरु धैर्य माँगता है (कार्यक्षेत्र में बदलाव और धन), लेकिन कर्क इसकी उच्च राशि है, जहाँ ग्रंथों के अनुसार यह प्रतिकूल फल नहीं देता, इसलिए इसे नरम गिना गया है।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे

  6. शुक्र? तुला · पहला भाव मिला-जुला?

    शास्त्र में पहले भाव के शुक्र को सहायक माना गया है (सुख-सुविधाएँ और आनंद), लेकिन शुक्र अपनी स्वराशि तुला में है और सूर्य के निकट (अस्त) भी; इस पर ग्रंथों के संकेत दोनों ओर जाते हैं, इसलिए इसे मिला-जुला गिना गया है।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 6 नवंबर, रात 1:04 बजे

  7. शनि? मीन · छठा भाव सहायक?

    शास्त्र में छठे भाव के शनि को सहायक माना गया है (हर ओर सहजता)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे

  8. राहु? कुंभ · पाँचवाँ भाव धैर्य का समय?

    शास्त्र के अनुसार पाँचवें भाव का राहु धैर्य माँगता है (धन और मन की उदासी): खर्च पर नज़र रखें और मन को आराम दें।

    शास्त्रीय फल: धैर्य · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

  9. केतु? सिंह · ग्यारहवाँ भाव वेध से रुका?

    शास्त्र में ग्यारहवें भाव के केतु को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा और यश), लेकिन आपसे पाँचवें भाव में चंद्रमा होने से वेध बनता है, इसलिए 23 अक्टूबर को इसकी सहायता रुकी हुई है।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

दिन का दूसरा हिस्सा: दोपहर 3:04 बजे से

  1. चंद्र? मीन · छठा भाव मिला-जुला?

    शास्त्र में छठे भाव के चंद्रमा को सहायक माना गया है (धन और अच्छी सेहत, और प्रतिस्पर्धा में बढ़त), लेकिन मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: रविवार 25 अक्टूबर, शाम 7:22 बजे

  2. केतु? सिंह · ग्यारहवाँ भाव सहायक?

    शास्त्र में ग्यारहवें भाव के केतु को सहायक माना गया है (प्रतिष्ठा और यश)।

    शास्त्रीय फल: अनुकूल · इस राशि में कब तक: 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे

तुला के लिए धीमे ग्रह (गुरु, शनि, राहु और केतु): सहायक 1, मिले-जुले 2, धैर्य माँगने वाले 1।

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अगले 30 दिनों में तुला राशि

अगले 30 दिन, हर बदलाव अपने भाव के साथ

शनिवार 24 अक्टूबर, दोपहर 12:43 बजे: बुध तुला में, आपसे पहले भाव में, वक्री होते हैं।

गुरुवार 29 अक्टूबर, सुबह 9:40 बजे: शुक्र तुला में, आपसे पहले भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

30 अक्टूबर, सुबह 6:04 बजे: बुध तुला में, आपसे पहले भाव में, सूर्य के निकट आकर अस्त होते हैं।

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे: गुरु सिंह राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के गुरु को सहायक माना गया है (लाभ और सेहत में सुधार)।

6 नवंबर, रात 1:04 बजे: शुक्र कन्या राशि में, यानी आपसे बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में बारहवें भाव के शुक्र को अनुकूल माना गया है, लेकिन शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में है, इसलिए इसकी सहायता मंद मानी गई है।

10 नवंबर, दोपहर 3:54 बजे: बुध तुला में, आपसे पहले भाव में, अस्त से बाहर आते हैं।

12 नवंबर, रात 8:19 बजे: मंगल सिंह राशि में, यानी आपसे ग्यारहवें भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में ग्यारहवें भाव के मंगल को सहायक माना गया है (लाभ, प्रतिष्ठा और अच्छी सेहत)।

13 नवंबर, रात 9:24 बजे: बुध तुला में, आपसे पहले भाव में, मार्गी होते हैं।

14 नवंबर, सुबह 6:00 बजे: शुक्र कन्या में, आपसे बारहवें भाव में, मार्गी होते हैं।

16 नवंबर, शाम 7:43 बजे: सूर्य वृश्चिक राशि में, यानी आपसे दूसरे भाव में प्रवेश करते हैं। शास्त्र के अनुसार दूसरे भाव का सूर्य धैर्य माँगता है (धन और रोज़मर्रा की सुविधाएँ): खर्च पर नज़र रखें।

तुला राशिफल 2027: पूरा साल, महीने दर महीने

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अगले दिन का तुला राशिफल, 24 अक्टूबर

कल (शनिवार, 24 अक्टूबर): पूरे दिन चंद्रमा आपसे छठे भाव में है, जो शास्त्र में सहायक माना गया है, पर मीन में उसके साथ शनि है, इसलिए इसकी सहायता मंद है।

24 अक्टूबर का पूरा राशिफल देखें

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तुला राशि के बारे में: स्वामी शुक्र, नक्षत्र और नाम अक्षर

स्वामी
शुक्रबृहज्जातक 1.6; सारावली 3.11; फलदीपिका 1.6
चिह्न
तराजू लिए हुए पुरुषबृहज्जातक 1.5; सारावली 3.3–4
प्रकृति
चरबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
विषम या सम
विषम राशि; पुरुषबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.20–21; फलदीपिका 1.9
दिशा
पश्चिमबृहज्जातक 1.11; सारावली 3.22; फलदीपिका 1.9
उदय
शीर्षोदय: सिर की ओर से उदयबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; जातक पारिजात 1.14
बल
दिन में बलीबृहज्जातक 1.10; सारावली 3.24; फलदीपिका 1.8
कालपुरुष का अंग
नाभि के नीचे का भाग (बस्ति)बृहज्जातक 1.4; बृहत् पाराशर होरा शास्त्र 4.4; सारावली 3.5–6; फलदीपिका 1.4
विस्तार (निरयण)
180° से 210°बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नक्षत्र चरण
चित्रा 3–4; स्वाति 1–4; विशाखा 1–3बृहज्जातक 1.4; होरासार 1.13
नाम अक्षर
रा री रू रे रो ता ती तू तेअवकहड़ा तालिका, दो छपी तालिकाओं से जाँची गई
उच्च, नीच, मूलत्रिकोण
तुला में शनि उच्च और सूर्य नीच होते हैं; तुला शुक्र की मूलत्रिकोण राशि भी है।बृहज्जातक 1.13–14; सारावली 3.34–36; फलदीपिका 1.6–7

नाम राशि जन्म राशि तभी है जब नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से चुना गया हो। हर तथ्य कम से कम दो शास्त्रीय ग्रंथों में है, और जहाँ ग्रंथ अलग हैं वहाँ दोनों पाठ दिए गए हैं। छोड़ा गया: तत्त्व, जिसे हमारे पढ़े ग्रंथों में से केवल एक (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4) बताता है; और किसी राशि का कोई रंग, अंक या पत्थर, जिसे इनमें से कोई ग्रंथ सौभाग्य से नहीं जोड़ता।

इस पेज के लिए पढ़े गए ग्रंथ

  • वराहमिहिर का बृहज्जातक: संस्कृत, एम. डी. नीली का अंग्रेज़ी अनुवाद; वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • बृहत् पाराशर होरा शास्त्र: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद, संस्कृत मूल के साथ
  • कल्याण वर्मा की सारावली: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • मंत्रेश्वर की फलदीपिका: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • वैद्यनाथ का जातक पारिजात: वी. सुब्रह्मण्य शास्त्री का अंग्रेज़ी अनुवाद
  • पृथुयशस का होरासार: आर. संतानम का अंग्रेज़ी अनुवाद

प्रश्न

तुला राशि से जुड़े सवाल

तुला राशि का स्वामी कौन है?

तुला के स्वामी शुक्र 23 अक्टूबर को तुला में है, यानी तुला से पहले भाव में, 6 नवंबर, रात 1:04 बजे तक। हमारे पढ़े हर शास्त्रीय ग्रंथ में तुला के स्वामी शुक्र हैं: बृहज्जातक 1.6, सारावली 3.11 और फलदीपिका 1.6। शुक्र वृषभ के भी स्वामी हैं।

तुला राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?

23 अक्टूबर को चंद्रमा कुंभ में है; 7 नवंबर, शाम 5:15 बजे यह फिर तुला में आएगा और 10 नवंबर, रात 2:48 बजे तक रहेगा: इन घंटों में जन्मे बच्चे की जन्म राशि तुला होती है। तुला के नौ नाम अक्षर, हर नक्षत्र चरण का एक, ये हैं: रा, री (चित्रा 3–4); रू, रे, रो, ता (स्वाति 1–4); ती, तू, ते (विशाखा 1–3)। इनमें से किसी अक्षर से शुरू होने वाले नाम की नाम राशि तुला है, जो जन्म राशि से तभी मिलती है जब नाम जन्म नक्षत्र से चुना गया हो।

तुला राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

23 अक्टूबर को चंद्रमा पूर्वा भाद्रपद में है; 7 नवंबर, शाम 5:15 बजे यह तुला के पहले चरण, चित्रा चरण 3, में पहुँचेगा। तुला निरयण राशिचक्र में 180° से 210° तक है: चित्रा के चरण 3 और 4, स्वाति के चारों चरण और विशाखा के चरण 1 से 3, कुल नौ नक्षत्र चरण, जैसे हर राशि में होते हैं (बृहज्जातक 1.4, होरासार 1.13)। अगर आपकी राशि तुला है, तो आपका जन्म नक्षत्र इन्हीं में से एक है।

तुला राशि के लोग कैसे होते हैं?

उन्हें देवताओं और विद्वानों का आदर करने वाला, व्यापार और अपने काम में कुशल, समझदार, और अपने संबंधियों की सहायता करने वाला बताया गया है; ग्रंथ उन्हें दुबले शरीर और उठी हुई नाक वाला बताते हैं। ये वे बातें हैं जो बृहज्जातक 17.7, सारावली 23.44 और होरासार 29.7 में से कम से कम दो ग्रंथों में मिलती हैं। बृहज्जातक 17.13 कहता है कि यह चित्र पूरा तभी लागू होता है जब जन्म कुंडली में चंद्रमा, तुला और इसके स्वामी शुक्र, तीनों बलवान हों, और होरासार 29.13 कहता है कि चंद्रमा के साथ बैठा या उसे देखता कोई ग्रह इसे बदल देता है; इसलिए आपकी अपनी कुंडली राशि से अधिक बताती है।

तुला राशि पर साढ़ेसाती और शनि की ढैया कब से कब तक है?

तुला पर 23 अक्टूबर को न साढ़ेसाती है, न ढैया: शनि मीन में है, तुला से छठे भाव में। तुला पर अगली ढैया (अष्टम, शनि आठवें भाव में) 8 अगस्त 2029 से 31 मई 2032 तक है, बीच में 5 अक्टूबर 2029 से 17 अप्रैल 2030 तक शनि इससे बाहर रहते हैं। हर अवधि शनि के पहले प्रवेश से अंतिम निकास तक है, हर विराम के साथ, और चंद्र राशि से गिनी गई है, जैसे फलदीपिका 26.22–23 और बृहत्संहिता 104 गिनते हैं। शास्त्र में साढ़ेसाती और ढैया निरंतर प्रयास और धैर्य का समय हैं; दोनों में से कोई तय फल नहीं है।

तुला राशि का समय कब बदलेगा?

31 अक्टूबर, दोपहर 12:03 बजे गुरु सिंह में जाते हैं, तुला से ग्यारहवें भाव में; 25 नवंबर, शाम 5:46 बजे राहु मकर में और केतु कर्क में जाते हैं, तुला से चौथे और दसवें भाव में (स्पष्ट राहु से; कई पंचांगों में छपने वाली मध्यम गणना से 5 दिसंबर को); 3 जून 2027, सुबह 5:28 बजे शनि मेष में जाते हैं, तुला से सातवें भाव में। शनि, गुरु और राहु-केतु एक राशि में कई महीने रहते हैं, इसलिए इनके बदलाव तुला की पृष्ठभूमि तय करते हैं, और ऊपर हर बदलाव अपना भाव बताता है। इस पेज का दैनिक फल नौ ग्रहों को साथ तौलता है, और किसी राशि का समय पूरा अच्छा या पूरा कठिन नहीं होता।

तुला राशि को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

23 अक्टूबर को सुबह 7:32 बजे सूर्य जन्मदिन वाली राशियों के सायन राशिचक्र में तुला 29°41′ में है, पर वैदिक ज्योतिष के निरयण राशिचक्र में तुला 5°27′ में। अंग्रेज़ी में तुला को Libra कहते हैं, पर राशि जन्म के समय निरयण राशिचक्र में चंद्रमा की राशि है, जन्मदिन वाली राशि नहीं; इसलिए जिसकी जन्मदिन वाली राशि Libra है, उसकी राशि तुला हो, यह ज़रूरी नहीं।

इस पेज के शब्द

34
सूर्य
नौ ग्रहों में से एक: आत्मा, प्रतिष्ठा और अधिकार।
चंद्र
नौ ग्रहों में से एक: मन; दिन का फल इसी से पढ़ा जाता है।
मंगल
नौ ग्रहों में से एक: ऊर्जा, साहस और प्रयास।
बुध
नौ ग्रहों में से एक: वाणी, विद्या और व्यापार।
गुरु
नौ ग्रहों में से एक: ज्ञान, संतान और उन्नति।
शुक्र
नौ ग्रहों में से एक: सुख, रिश्ते और कला।
शनि
नौ ग्रहों में से एक: कर्तव्य, धैर्य और निरंतर काम।
राहु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का उत्तरी पात, एक छाया ग्रह।
केतु
नौ ग्रहों में से एक: चंद्रमा का दक्षिणी पात, सदा राहु के सामने।
सहायक
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र अनुकूल भाव में मानते हैं, और जिसे कोई रोक नहीं रहा।
वेध से रुका
अनुकूल गोचर, जिसे उसके वेध भाव में बैठा दूसरा ग्रह रोक रहा है।
मिला-जुला
संकेत दोनों ओर जाते हैं (स्वराशि या उच्च राशि, पर सूर्य के निकट), या सहायक चंद्रमा की राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हैं, इसलिए यह गोचर न सहायक गिना गया, न धैर्य का समय।
नरम
धैर्य माँगने वाले भाव का गोचर, जो ग्रह के स्वराशि या उच्च राशि में होने से नरम पड़ा है (फलदीपिका 26.31)।
धैर्य का समय
ऐसा गोचर जिसे शास्त्र प्रतिकूल भाव में मानते हैं: निरंतर प्रयास और सरल योजनाओं का समय।
मिला-जुला
दिन का हमारा लेबल, जब चंद्रमा वेध से रुका, मंद या नरम हो, या उसकी राशि में सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों।
गोचर
राशियों में ग्रहों का भ्रमण, जिसे आपकी चंद्र राशि से पढ़ा जाता है (फलदीपिका 26.1)।
भाव
आपकी चंद्र राशि से राशियों की गिनती; चंद्र राशि स्वयं पहला भाव है।
वेध
जब अनुकूल गोचर के जोड़ीदार भाव में दूसरा ग्रह हो, तो वह गोचर रुक जाता है (फलदीपिका 26.3–8)।
वाम वेध (विपरीत वेध)
धैर्य माँगने वाला गोचर तब सहायक गिना जाता है जब उसके जोड़ीदार अनुकूल भाव में दूसरा ग्रह हो (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 12.8)।
चंद्रमा का साथ
चंद्रमा की राशि में बैठे ग्रह; वहाँ सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु हों तो सहायक चंद्रमा की सहायता मंद मानी जाती है (मुहूर्त चिंतामणि 4.7; बृहत्संहिता 104.56)।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक का पखवाड़ा; इसमें चंद्रमा दूसरे, पाँचवें और नौवें भाव में भी सहायक माना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि 4.4; नारद संहिता 13.2)।
चंद्रबल
आपकी चंद्र राशि से गिना गया चंद्रमा का बल: 1, 3, 6, 7, 10 और 11वाँ भाव अच्छा है।
ताराबल
आपके जन्म नक्षत्र से नौ-नौ की गिनती में दिन के नक्षत्र का बल।
वक्री
पृथ्वी से देखने पर ग्रह उल्टा चलता दिखता है; केवल तथ्य के रूप में दिखाया गया है, क्योंकि गोचर में इसके अर्थ पर ग्रंथ एकमत नहीं।
मार्गी
वक्री अवधि के बाद ग्रह फिर आगे चलने लगता है।
सबसे अधिक प्रभाव
राशि का वह तिहाई भाग जिसमें गोचर का प्रभाव शास्त्र में सबसे अधिक माना गया है: सूर्य और मंगल पहले, गुरु और शुक्र बीच के, चंद्रमा और शनि अंतिम भाग में (फलदीपिका 26.25; मुहूर्त चिंतामणि 4.19)।
मध्यम राहु-केतु की गणना
राहु-केतु की औसत गति, जो कई पंचांगों में छपती है; इसकी तारीख़ें स्पष्ट गति से कुछ दिन अलग हो सकती हैं।
ग्रंथों में मतभेद
शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को अलग-अलग पढ़ते हैं; हम अधिकतर ग्रंथों का मत लेते हैं और अलग मत वाले ग्रंथ का नाम बताते हैं।
सहायक समय
आपके शहर में नए काम के लिए पंचांग के अच्छे समय, उन घंटों के भीतर जब चंद्रमा आपकी राशि के लिए सहायक हो।
उच्च
वह राशि जहाँ ग्रह सबसे बली होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
नीच
उच्च राशि के सामने की राशि, जहाँ ग्रह सबसे निर्बल होता है (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 3)।
काम और धन
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से दसवें, छठे, तीसरे, ग्यारहवें, दूसरे और बारहवें भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
प्रेम और परिवार
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से सातवें, चौथे और दूसरे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।
सेहत
हमारा समूह: आपकी चंद्र राशि से पहले और छठे भाव से पढ़ा गया, जिनके अर्थ इसी विषय से जुड़े हैं (बृहत्पाराशर होराशास्त्र अध्याय 11)।

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